स्वामीह फंड-2, ₹12.2 लाख करोड़ के इंफ्रा निवेश और टियर-2/3 शहरों पर फोकस से देशभर में संतुलित और टिकाऊ शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी.
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रितु राणा
केंद्रीय बजट 2026–27 में रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को लेकर कई अहम घोषणाएं की गई हैं, जिन्हें उद्योग विशेषज्ञों ने सकारात्मक और दूरगामी बताया है. बजट ने आवासीय परियोजनाओं को गति देने, छोटे शहरों में शहरी विकास को बढ़ावा देने और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है.
स्वामीह फंड-2: रियल एस्टेट में विश्वास बहाल
क्रेडाई वेस्टर्न यूपी के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता के अनुसार, “केंद्रीय बजट 2026–27 में 15,000 करोड़ रुपये के स्वामीह फंड-2 की घोषणा रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगी. अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग के लिए बने स्पेशल विंडो के पहले चरण से करीब 50,000 आवासीय इकाइयों का निर्माण पूरा हो चुका है और आने वाले समय में लगभग 40,000 और इकाइयों के पूरा होने की उम्मीद है. इससे लंबे समय से अटकी परियोजनाओं में घर खरीदारों का भरोसा काफी मजबूत होगा. नए स्वामीह फंड-2 का लक्ष्य अतिरिक्त 1 लाख आवासीय इकाइयों का निर्माण करना है, जिससे करीब 40,000 से 60,000 करोड़ रुपये मूल्य की अटकी इन्वेंट्री को गति मिलेगी और पूरे रियल एस्टेट इकोसिस्टम में तरलता बढ़ेगी.”
औद्योगिक हब्स के आसपास आवासीय विकास
Vision बिजनेस पार्क के फाउंडर अतुल विक्रम सिंह कहते हैं, “केंद्रीय बजट में सेमीकंडक्टर, पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और रेल जैसे प्रमुख उद्योगों पर दिया गया जोर यह स्पष्ट करता है कि आने वाले वर्षों में औद्योगिक क्लस्टर्स के आसपास आवासीय विकास की मांग तेजी से बढ़ेगी. इन इंडस्ट्रियल हब्स के विस्तार के साथ कार्यबल के लिए किफायती और सुव्यवस्थित आवास की आवश्यकता भी बढ़ेगी. ऐसे में रियल एस्टेट डेवलपर्स को औद्योगिक टाउनशिप्स के आसपास योजनाबद्ध, टिकाऊ और कनेक्टेड रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स विकसित करने पर ध्यान देना होगा, ताकि उद्योगों के साथ-साथ आवासीय इकोसिस्टम भी संतुलित रूप से विकसित हो सके.”
उभरते शहरों को संतुलित और समान विकास को बढ़ावा
अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के सीएफओ एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संतोष अग्रवाल ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026 ‘नए शहरी भारत’ की साफ तस्वीर पेश करता है. सरकार ने सार्वजनिक पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया है, जो केवल सड़कों या परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है. उभरते शहरों के लिए हर साल ₹5,000 करोड़ का प्रावधान संतुलित और समान विकास को बढ़ावा देगा. रियल एस्टेट सेक्टर के लिए यह सिर्फ बेहतर कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि बेहतर रहन-सहन और जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने का संकेत है। इससे छोटे और मझोले शहर आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्र बनेंगे. अब विकास केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में फैला हुआ दिखाई देगा.”
इंफ्रास्ट्रक्चर और मल्टीप्लायर इफेक्ट
एलांते ग्रुप की एडिशनल वाईस प्रेसिडेंट हेनम खनेजा ने कहा, “बजट 2026–27 अवसंरचना क्षेत्र को ₹12.2 लाख करोड़ के प्रस्तावित पूंजीगत व्यय के माध्यम से मजबूत और विश्वास बढ़ाने वाला प्रोत्साहन देता है. पाँच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों, टियर-2 और टियर-3 विकास केंद्रों और सिटी इकोनॉमिक रीजन पर ध्यान देकर संतुलित शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा. इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड और REITs/InvITs के माध्यम से परिसंपत्ति मुद्रीकरण जैसी पहलें निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करेंगी और रियल एस्टेट पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाएंगी. बजट में पाँच प्रमुख क्षेत्रीय स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं का प्रस्ताव भी है, जिससे गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी और रियल एस्टेट बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.”
प्रखर अग्रवाल, निदेशक, रामा ग्रुप के अनुसार “वित्त मंत्री का टियर-1 और टियर-2 शहरों में विकास को प्राथमिकता देना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए स्वागतयोग्य है. सड़कों, रेलवे और शहरी सुविधाओं जैसी बुनियादी ढांचा निवेश से उभरते शहरों में संगठित आवासीय और मिक्स्ड-यूज़ प्रोजेक्ट्स के लिए नए अवसर खुलेंगे.
रियल एस्टेट की ग्रोथ इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर
क्रीवा और कनोडिया ग्रुप के फाउंडर डॉ. गौतम कनोडिया कहते हैं, “बजट 2026 यह साफ करता है कि रियल एस्टेट की ग्रोथ इंफ्रास्ट्रक्चर के बाद आती है, पहले नहीं. ₹12.2 लाख करोड़ के लगातार सरकारी खर्च और नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से मेट्रो और उभरते शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी. इससे रियल एस्टेट के मौके सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेंगे. मेट्रो शहरों में बाहरी इलाकों की अहमियत बढ़ेगी और सेंट्रल बिजनेस इलाकों का दबाव कम होगा. टियर-2 और टियर-3 शहरों में घरों की बिक्री बढ़ेगी और संगठित कमर्शियल डेवलपमेंट को फायदा मिलेगा. बेहतर फाइनेंसिंग और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से डेवलपर्स लंबे समय वाले प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देंगे. यह बजट देश में संतुलित और टिकाऊ शहरी विकास की नींव रखता है.”
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी ने कहा, “यूनियन बजट 2026 टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास को लेकर मजबूत कदम है. बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी सुविधाएं और लॉजिस्टिक्स से ये बाजार संगठित कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज़ प्रोजेक्ट्स के लिए अधिक मजबूत बनेंगे. इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की शुरुआत से फंडिंग का जोखिम कम होगा और लंबे समय वाले प्रोजेक्ट्स में प्राइवेट निवेश को बढ़ावा मिलेगा.”
निजी निवेश और टियर-2/3 शहरों का महत्व
Model Economic Township Ltd. (Reliance MET City) के सीईओ श्रीवल्लभ गोयल CEO के अनुसार, “केंद्रीय बजट 2026–27 आर्थिक विस्तार, रोजगार सृजन और देशव्यापी संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए अवसंरचना-आधारित विकास के प्रति सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है. ₹12.2 लाख करोड़ के बढ़े हुए पूंजीगत व्यय आवंटन से विश्व-स्तरीय भौतिक और औद्योगिक अवसंरचना के निर्माण पर निर्णायक फोकस का संकेत मिलता है. यह निवेश केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन गलियारों, आधुनिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, शहरी अवसंरचना और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में ठोस प्रगति के रूप में सामने आता है, विशेष रूप से उभरते टियर-2 और टियर-3 शहरों में. बजट में शहरी विकास पर दिया गया विशेष जोर इस गति को और मजबूती प्रदान करता है. शहरी आवास, गतिशीलता और शहर-स्तरीय सेवाओं पर बढ़ते फोकस के माध्यम से सरकार सतत, रहने योग्य और निवेश-अनुकूल शहरों की नींव रख रही है. रिलायंस मेट सिटी जैसे एकीकृत विकास इस दृष्टिकोण का उदाहरण हैं, जहाँ औद्योगिक अवसंरचना, शहरी नियोजन और कार्यबल पारिस्थितिकी तंत्र एक साथ मिलकर दीर्घकालिक आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देते हैं. इस प्रकार का लक्षित शहरी और औद्योगिक विकास निजी निवेश को आकर्षित करने, सुगम शहरीकरण को सक्षम बनाने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में भारत की विकास आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.”
M3M India के प्रेजीडेंट रोबिन मंगला ने कहा “केंद्रीय बजट 2026 रियल एस्टेट के लिए अवसंरचना-आधारित विकास को एक प्रमुख प्रेरक के रूप में रेखांकित करता है. पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया जाना शहरी विस्तार, कनेक्टिविटी और परियोजना क्रियान्वयन के लिए दीर्घकालिक स्पष्टता प्रदान करता है, जिससे आवासीय और वाणिज्यिक दोनों क्षेत्रों में मांग को मजबूती मिलती है. ये कदम समग्र रियल एस्टेट पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करेंगे, परियोजना निष्पादन में विश्वास बढ़ाएंगे और प्रमुख बाजारों में सतत विकास को समर्थन देंगे, जो एम3एम की विश्वस्तरीय परियोजनाएं विकसित करने की प्रतिबद्धता और दीर्घकालिक निवेशक विश्वास को सुदृढ़ करने के दृष्टिकोण के अनुरूप है.”
NRI संपत्ति बिक्री लेनदेन को सरल बनाना संरचनात्मक सुधार
प्रॉपर्टीपिस्टल के फाउंडर और एमडी अशिष नारायण अग्रवाल ने कहा “केंद्रीय बजट 2026 रियल एस्टेट को एक प्रमुख निवेश स्तंभ के रूप में और मजबूत करता है. NRI संपत्ति बिक्री लेनदेन को सरल बनाना एक संरचनात्मक सुधार है, जो तरलता बढ़ाता है और सीमा-पार पूंजी प्रवाह को तेज करता है. टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए समर्पित ₹5,000 करोड़ के प्रोत्साहन के साथ, जो नए पेश किए गए रिस्क गारंटी फंड से समर्थित हैं, निष्पादन जोखिम में महत्वपूर्ण कमी आती है और निवेशकों का भरोसा बढ़ता है.
इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल व्यय ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ने के साथ, शहर-आर्थिक क्षेत्र मेट्रो शहरों से बाहर विस्तारित होने के लिए तैयार हैं, जिससे बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार और शहरी अवसंरचना के माध्यम से आवासीय मांग बढ़ेगी. रियल एस्टेट निवेशकों के लिए, यह बजट कहानी को सट्टा आधारित विकास से नीति-समर्थित, डेटा-आधारित रिटर्न की ओर मोड़ता है. उभरते शहर अब किफायती आवास, अवसंरचना की गति और दीर्घकालिक मूल्य वृद्धि का सम्मोहक मिश्रण पेश करते हैं, जिससे यह निवेश करने का सही समय है.”
रिपोर्ट में कहा गया है कि FTA का फायदा ब्रिटिश सप्लायर्स की तुलना में भारतीय निर्यातकों को अधिक मिलेगा. पहले भारतीय उत्पादों पर 12 प्रतिशत का टैरिफ नुकसान था, जो अब खत्म हो गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को बड़ा फायदा मिल सकता है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते से मध्यम से लंबी अवधि में भारत के टेक्सटाइल निर्यात में करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 900 मिलियन डॉलर) की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, इसका वास्तविक लाभ कंपनियों की क्षमता विस्तार, लागत नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन पर निर्भर करेगा.
भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए बड़ा अवसर
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय टेक्सटाइल निर्यातकों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है. एजेंसी का मानना है कि यह समझौता टेक्सटाइल कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल को भी मजबूत करेगा.
Ind-Ra के कॉरपोरेट रेटिंग्स के निदेशक रोहित सडाका ने कहा कि बड़ी और एकीकृत (इंटीग्रेटेड) टेक्सटाइल कंपनियां अपने मजबूत वित्तीय संसाधनों, स्थापित ग्राहक नेटवर्क और बड़े कारोबार के कारण इस अवसर का बेहतर लाभ उठा सकेंगी. वहीं, छोटी कंपनियों के लिए विस्तार के दौरान अत्यधिक कर्ज लेने की स्थिति में वित्तीय दबाव और नकदी संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं.
भारत के लिए अहम बाजार है UK
रिपोर्ट के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम भारत के टेक्सटाइल निर्यात का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है, जहां देश के कुल टेक्सटाइल निर्यात का करीब 6.1 प्रतिशत जाता है. दूसरी ओर, भारत में ब्रिटेन से आने वाले टेक्सटाइल उत्पादों की हिस्सेदारी घरेलू खपत के 1 प्रतिशत से भी कम है. वर्तमान में ब्रिटेन के कुल टेक्सटाइल आयात बाजार में भारत की हिस्सेदारी केवल 6.9 प्रतिशत है, जिससे आगे विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं.
भारतीय निर्यातकों को मिलेगा प्रतिस्पर्धी लाभ
रिपोर्ट में कहा गया है कि FTA का फायदा ब्रिटिश सप्लायर्स की तुलना में भारतीय निर्यातकों को अधिक मिलेगा. पहले भारतीय उत्पादों पर 12 प्रतिशत का टैरिफ नुकसान था, जो अब खत्म हो गया है. इससे ब्रिटेन में भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों की लागत प्रतिस्पर्धात्मक रूप से कम होगी और समय के साथ भारत चीन के मुकाबले अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है.
हालांकि, बांग्लादेश से मुकाबला आसान नहीं होगा, क्योंकि वहां उत्पादन लागत कम है और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता मौजूद है. इसके बावजूद यदि ब्रिटेन के टेक्सटाइल आयात बाजार में भारत की हिस्सेदारी मौजूदा 6.9 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत तक पहुंचती है, तो भारतीय कंपनियों के लिए करीब 900 मिलियन डॉलर के अतिरिक्त निर्यात का अवसर पैदा हो सकता है.
मुनाफे में बढ़ोतरी आने में लगेगा समय
रिपोर्ट में कहा गया है कि FTA से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त जरूर मिलेगी, लेकिन कंपनियों के मुनाफे में तुरंत बड़ा सुधार होने की संभावना नहीं है. ब्रिटेन के खरीदार टैरिफ में मिली राहत का कुछ हिस्सा कम कीमत के रूप में मांग सकते हैं, जिससे शुरुआती दौर में मार्जिन पर दबाव रह सकता है.
हालांकि, लंबे समय में निर्यात बढ़ने से कंपनियों की परिचालन क्षमता (ऑपरेटिंग लीवरेज) बेहतर होगी और लाभप्रदता को समर्थन मिलेगा. वहीं, ईंधन, बिजली, माल ढुलाई और शिपिंग लागत में बढ़ोतरी से अल्पावधि में कुछ लाभ कम हो सकता है.
आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा से जुड़े देशों के निवेश पर लागू 'प्रेस नोट-3' के तहत सरकार अब भी बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में चीन से आए केवल एक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसकी कुल राशि महज 1 करोड़ रुपये रही. वहीं, हांगकांग से आए 13 निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति मिली, जिनका कुल मूल्य 610.42 करोड़ रुपये है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश पर अब भी कड़ी निगरानी बनाए हुए है.
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच सरकार ने कुल 63 एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनकी कुल कीमत 10,292.67 करोड़ रुपये (करीब 1.18 अरब डॉलर) रही.
प्रेस नोट-3 के तहत होती है जांच
अप्रैल 2020 में लागू किए गए प्रेस नोट-3 के तहत भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी. यह फैसला कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के उद्देश्य से लिया गया था.
मार्च 2026 में सरकार ने इस नियम में आंशिक राहत देते हुए कुछ निवेशों को ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति दी, लेकिन यह छूट चीन, हांगकांग और भारत की भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत कंपनियों पर लागू नहीं होती. ऐसे मामलों में अब भी सरकारी मंजूरी जरूरी है.
सिंगापुर रहा सबसे बड़ा निवेशक
मंजूर किए गए प्रस्तावों के मूल्य के आधार पर सिंगापुर सबसे बड़ा निवेश स्रोत रहा. उसके 3,259.88 करोड़ रुपये के पांच प्रस्तावों को मंजूरी मिली. इसके बाद ब्रिटेन के पांच प्रस्ताव (2,477.67 करोड़ रुपये) और थाईलैंड के दो प्रस्ताव (1,600 करोड़ रुपये) स्वीकृत हुए.
भारत में चीन का FDI अब भी बेहद सीमित
DPIIT के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत में कुल एफडीआई इक्विटी निवेश में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत रही. इस अवधि में चीन से 2.51 अरब डॉलर (करीब 16,162.25 करोड़ रुपये) का निवेश आया, जिससे वह निवेश करने वाले देशों की सूची में 23वें स्थान पर रहा.
वहीं, हांगकांग 15वें स्थान पर रहा. इस अवधि में वहां से 4.91 अरब डॉलर (करीब 31,220.30 करोड़ रुपये) का निवेश भारत आया, जो कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का 0.62 प्रतिशत है.
पिछले वित्त वर्ष में भी यही रुझान
वित्त वर्ष 2024-25 में भी सरकार ने चीन के केवल एक एफडीआई प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसकी कीमत 28.71 करोड़ रुपये थी. उस वर्ष सरकारी मार्ग के तहत कुल 82 निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति मिली थी, जिनका मूल्य 39,758 करोड़ रुपये था. इनमें हांगकांग के 11 प्रस्ताव शामिल थे, जिनकी कुल कीमत 1,225.28 करोड़ रुपये थी.
नए ऑर्डर और भर्ती में सुस्ती, जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग PMI अगस्त 2021 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जुलाई में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार धीमी पड़ गई. HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI घटकर 53.5 पर आ गया, जो अगस्त 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर है. नए ऑर्डर, कच्चे माल की खरीद और भर्तियों की गति कमजोर रहने से फैक्ट्री गतिविधियों में सुस्ती देखने को मिली, हालांकि मजबूत निर्यात मांग और सप्लाई चेन में सुधार ने सेक्टर को कुछ राहत दी.
जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग PMI 53.5 पर आया
भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि जुलाई में धीमी पड़ गई. सोमवार को जारी HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के अनुसार, जुलाई में PMI घटकर 53.5 पर आ गया, जो जून में 54.2 था. यह अगस्त 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर है और इसके साथ ही इंडेक्स अपने दीर्घकालिक औसत 54.2 से भी नीचे रहा. हालांकि PMI का 50 से ऊपर बने रहना इस बात का संकेत है कि मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां अब भी विस्तार के दौर में हैं, लेकिन उनकी रफ्तार काफी धीमी हो गई है.
नए ऑर्डर और उत्पादन में सुस्ती
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों को जुलाई में नए ऑर्डर मिलते रहे, लेकिन उनकी वृद्धि पिछले चार वर्षों से अधिक समय में दूसरी सबसे कमजोर रही. बाजार की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और कुछ प्रमुख उत्पादों की मांग में कमी का असर ऑर्डर बुक पर दिखाई दिया. उत्पादन में बढ़ोतरी जारी रही, लेकिन इसकी गति भी कमजोर बनी रही. कंज्यूमर गुड्स कंपनियों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा, जबकि इंटरमीडिएट और कैपिटल गुड्स से जुड़े उद्योगों ने बेहतर प्रदर्शन किया.
निर्यात मांग बनी मजबूत
घरेलू बाजार में सुस्ती के बावजूद निर्यात ऑर्डर में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. कंपनियों ने बताया कि कनाडा, मिस्र, इंडोनेशिया, केन्या, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों से मांग मजबूत बनी रही, जिससे उत्पादन को सहारा मिला.
सप्लाई चेन में सुधार, लेकिन पश्चिम एशिया का तनाव चिंता
HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि जुलाई में सप्लायर्स की डिलीवरी में सुधार हुआ, जिससे सप्लाई चेन की दिक्कतें कम होने के संकेत मिले हैं. हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव भविष्य में सप्लाई पर असर डाल सकते हैं. इसी आशंका के चलते कंपनियां कच्चे माल और तैयार उत्पादों का स्टॉक बढ़ा रही हैं.
कच्चे माल की खरीद और भर्ती की रफ्तार घटी
कंपनियों ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कच्चे माल की खरीद जारी रखी, लेकिन इसकी रफ्तार पिछले 31 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई. वहीं, तैयार माल का स्टॉक 11 वर्षों से अधिक समय में सबसे तेज गति से बढ़ा. रोजगार के मोर्चे पर लगातार 29वें महीने नई भर्तियां हुईं, लेकिन भर्ती की रफ्तार लगातार तीसरे महीने कमजोर रही और मौजूदा विस्तार चक्र में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई.
लागत का दबाव कम, कंपनियों ने बढ़ाईं कीमतें
जुलाई में कच्चे माल की लागत बढ़ने का दबाव घटकर पांच महीने के निचले स्तर पर आ गया. हालांकि, परिवहन लागत अब भी ऊंची बनी हुई है. कंपनियों ने बढ़ती लागत का असर ग्राहकों पर डालते हुए उत्पादों की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी की. इसके बावजूद कंपनियों का कारोबारी भरोसा मजबूत हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, नए ग्राहकों और बेहतर मार्केटिंग के दम पर कारोबार में तेजी आएगी.
आज के दौर में, जब विज्ञापन जगत तेजी से इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की ओर बढ़ रहा है, सुनील ग्रोवर अपनी अभिनय क्षमता और किरदारों के दम पर अलग पहचान बनाए हुए हैं. उनकी खासियत यह है कि दर्शक उनके निभाए किरदार को भी याद रखते हैं और उससे जुड़े ब्रांड को भी नहीं भूलते.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टीवी के लोकप्रिय किरदार 'गुत्थी' और 'डॉ. मशहूर गुलाटी' से दर्शकों का दिल जीतने वाले कॉमेडियन और अभिनेता सुनील ग्रोवर आज यानी 03 अगस्त को अपना जन्मदिन मना रहे हैं. अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और अलग-अलग किरदारों में ढलने की कला के दम पर उन्होंने न सिर्फ मनोरंजन जगत, बल्कि विज्ञापन की दुनिया में भी खास पहचान बनाई है. यही वजह है कि कई बड़े ब्रांड उन्हें अपने विज्ञापन अभियानों का चेहरा बनाते हैं. उनके जन्मदिन के इस खास मौके पर जानते हैं उनकी अनुमानित नेटवर्थ, कमाई के प्रमुख स्रोत और उन यादगार विज्ञापनों के बारे में, जिन्होंने उन्हें विज्ञापन जगत का 'मार्केटिंग गोल्ड' बना दिया.
कितनी है सुनील ग्रोवर की नेटवर्थ, कहां-कहां से होती है कमाई?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनील ग्रोवर की अनुमानित नेटवर्थ 21 से 25 करोड़ रुपये के बीच है. हालांकि, उनकी कुल संपत्ति को लेकर आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. उनकी कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा टीवी शो, फिल्मों, वेब सीरीज, लाइव कॉमेडी परफॉर्मेंस, ब्रांड एंडोर्समेंट और विज्ञापनों से आता है. इसके अलावा वह सोशल मीडिया प्रमोशन, स्टेज शो और कॉर्पोरेट इवेंट्स में परफॉर्मेंस के जरिए भी अच्छी आय अर्जित करते हैं. हाल के वर्षों में 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' में वापसी और कई बड़े ब्रांड्स के साथ किए गए विज्ञापन अभियानों ने उनकी कमाई और लोकप्रियता दोनों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. आइए जानते हैं उन पांच विज्ञापन अभियानों के बारे में, जिन्होंने सुनील ग्रोवर को विज्ञापन जगत का 'मार्केटिंग गोल्ड' बना दिया.
1. फिगारो ऑलिव ऑयल: एक विज्ञापन में पांच किरदार
इस साल फिगारो ऑलिव ऑयल ने अपनी नई ब्रांड पहचान के साथ एक नया कैंपेन लॉन्च किया, जिसमें सुनील ग्रोवर एक साथ पांच अलग-अलग किरदार निभाते नजर आए. विज्ञापन का संदेश था कि जिस तरह ग्रोवर आसानी से अलग-अलग किरदार निभा लेते हैं, उसी तरह फिगारो ऑलिव ऑयल भी खाना बनाने से लेकर पर्सनल केयर तक कई कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है.
यह अभियान कंपनी डियोलियो (Deoleo) की नई ब्रांडिंग रणनीति का हिस्सा था. कंपनी के अनुसार, भारत में फिगारो के कारोबार का करीब 48% हिस्सा मल्टीपर्पज कैटेगरी से आता है.
2. गोआईबिबो की 'डीलपंती': जब बने डोनाल्ड ट्रंप
गोआईबिबो के 'डीलपंती' कैंपेन में सुनील ग्रोवर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मजेदार नकल की. विज्ञापन में वह होटल की कीमतों पर बहस करते नजर आते हैं, जिसके बाद क्रिकेटर ऋषभ पंत ब्रांड का ऑफर पेश करते हैं.
इस डिजिटल अभियान की खास बात यह थी कि इसमें कॉमेडियन कीकू शारदा भी शामिल थे. दोनों ने अपने हास्य अभिनय से ट्रैवल डील्स को भी मनोरंजक बना दिया.
3. एयरटेल-एडोबी एक्सप्रेस: डिजाइनिंग को बनाया आसान
'झटपट फटाफट' कैंपेन में सुनील ग्रोवर एक ऐसे पारिवारिक ज्योतिषी की भूमिका में दिखे, जो शादी के कार्ड की डिजाइन पर टिप्पणी करता है और फिर Adobe Express से खुद तैयार किया गया निमंत्रण पत्र दिखाता है.
इस अभियान का उद्देश्य Airtel ग्राहकों को Adobe Express Premium की सुविधा से परिचित कराना था. बाद में इसे जन्मदिन की शुभकामनाओं, मीम्स, व्हाट्सऐप क्रिएटिव, पार्टी इनविटेशन और छोटे कारोबारों के प्रमोशनल मटेरियल तक भी विस्तार दिया गया.
4. मेंटोस का 'एंग्री चिकन डैड': जो मीम बन गया
परफेटी वैन मेल (Perfetti Van Melle) के मेंटोस #FarakPadega अभियान में सुनील ग्रोवर ने गुस्सैल मुर्गे की आवाज दी थी. विज्ञापन का डायलॉग, "इनको फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन आपको #FarakPadega", इतना लोकप्रिय हुआ कि बाद में सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम रील्स पर मीम के रूप में खूब वायरल हुआ.
इस विज्ञापन की खासियत यह थी कि इसमें उत्पाद को समस्या का जादुई समाधान नहीं बताया गया, बल्कि हास्य के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया गया.
5. कुरकुरे: जूही चावला के साथ बनाई अलग पहचान
OTT और सोशल मीडिया के दौर से पहले ही सुनील ग्रोवर कुरकुरे के टीवी विज्ञापनों में जूही चावला के साथ नजर आ चुके थे. इन विज्ञापनों में उन्होंने आम लोगों से जुड़े मजेदार किरदार निभाए, जिसने ब्रांड की चुलबुली और मनोरंजक छवि को और मजबूत किया. इन शुरुआती अभियानों ने यह साबित कर दिया कि सुनील ग्रोवर ऐसे कलाकार हैं, जो ब्रांड से ध्यान हटाए बिना विज्ञापन को यादगार बना सकते हैं.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित CEPA के तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में टैरिफ तथा अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या समाप्त किया जाएगा और व्यापार को चरणबद्ध तरीके से उदार बनाया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और कनाडा ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) पर वार्ता को वर्ष 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है. केंद्र सरकार ने राज्यसभा में इसकी जानकारी दी. यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ शुल्क (टैरिफ) और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि अब तक CEPA पर वार्ता के तीन दौर पूरे हो चुके हैं. ताजा दौर 6 जुलाई से 10 जुलाई 2026 के बीच कनाडा की राजधानी ओटावा में आयोजित किया गया था. उन्होंने कहा कि वार्ता के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति हुई है और दोनों देश 2026 के अंत तक बातचीत को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं.
क्या है CEPA?
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, प्रस्तावित CEPA का उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच एक मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area) स्थापित करना है. इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में टैरिफ तथा अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या समाप्त किया जाएगा और व्यापार को चरणबद्ध तरीके से उदार बनाया जाएगा.
सरकार का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के लिए अधिक पारदर्शी एवं पूर्वानुमान योग्य ढांचा तैयार करेगा. साथ ही आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूती मिलेगी.
भारत के लिए अहम बाजार है कनाडा
साल 2025 के अनुमान के अनुसार कनाडा की आबादी लगभग 4.16 करोड़ (41.65 मिलियन) है. क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity-PPP) के आधार पर उसकी अर्थव्यवस्था का आकार करीब 2.34 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है. ऐसे में कनाडा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात बाजार और निवेश गंतव्य माना जाता है.
रिश्तों में सुधार के साथ तेज हुई वार्ता
भारत और कनाडा के बीच CEPA वार्ता ऐसे समय तेज हुई है, जब दोनों देश पिछले कुछ समय से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव के बाद अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं. नई कनाडाई सरकार के साथ संबंधों में सुधार के प्रयासों के बीच व्यापार समझौते को नई गति मिली है.
प्रधानमंत्री मोदी के कनाडा दौरे की उम्मीद
सरकार को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष के अंत में कनाडा की यात्रा कर सकते हैं. माना जा रहा है कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को और गति देने के साथ-साथ CEPA वार्ता को अंतिम रूप तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है.
कंपनी के अनुसार, इस फंड जुटाने का उद्देश्य उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना तथा हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के हालिया आदेश के बावजूद ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्रस्तावित ₹3,144 करोड़ की फंड जुटाने की योजना पर इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा. कंपनी ने कहा कि वह सेबी के अंतिम आदेश का कानूनी विशेषज्ञों के साथ अध्ययन कर रही है और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार करेगी. कंपनी के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, "कंपनी को सेबी का आदेश प्राप्त हो गया है और इस संबंध में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है."
फंड जुटाने की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी
जी ने दोहराया कि सेबी का आदेश उसके पूंजी जुटाने के प्रस्ताव से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है. कंपनी ने कहा कि 31 जुलाई 2026 को आयोजित असाधारण आम बैठक (EGM) में शेयरधारकों की मंजूरी और स्टॉक एक्सचेंजों से आवश्यक नियामकीय स्वीकृतियां मिलने के बाद अब वह फंड जुटाने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी.
कंपनी के अनुसार, इस फंड जुटाने का उद्देश्य उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना तथा हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करना है.
हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए उठाए जाएंगे कानूनी कदम
जी ने कहा कि कंपनी और उसके प्रमोटरों पर लगाए गए आरोपों के संबंध में वह कानून के अनुरूप आवश्यक कदम उठाएगी ताकि सभी हितधारकों के हितों की रक्षा की जा सके.
क्या है पूरा मामला?
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में सेबी ने ज़ी की हैदराबाद स्थित संपत्ति को प्रमोटर समूह से जुड़ी एस्सेल ग्रुप की कंपनियों द्वारा लिए गए ऋण के लिए बिना अनुमति गिरवी रखने के मामले में अंतिम आदेश जारी किया है.
सेबी ने जी एंटरटेनमेंट को दो महीने तक प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया है. वहीं कंपनी के संस्थापक एवं चेयरमैन एमेरिटस सुभाष चंद्र और प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) पुनीत गोयनका पर एक-एक वर्ष तक प्रतिभूति बाजार में भाग लेने पर रोक लगा दी गई है. इसके अलावा कंपनी और दोनों अधिकारियों पर मौद्रिक जुर्माना भी लगाया गया है.
बिना मंजूरी गिरवी रखी गई थी संपत्ति
सेबी के अनुसार, ज़ी की हैदराबाद स्थित संपत्ति को निदेशक मंडल, ऑडिट समिति या शेयरधारकों की मंजूरी के बिना ऋण के लिए संपार्श्विक (Collateral) के रूप में गिरवी रखा गया था. साथ ही इस लेनदेन का पर्याप्त खुलासा भी नहीं किया गया, जो नियामकीय नियमों का उल्लंघन माना गया.
नए नियमों के तहत F&O शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू होगा, इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग का समय बढ़ेगा और प्री-ओपनिंग सेशन का शेड्यूल भी बदल जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अगर आप शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग करते हैं, तो आज से लागू हुए नए नियमों की जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 3 अगस्त से शेयर बाजार के ट्रेडिंग ढांचे में कई अहम बदलाव लागू कर दिए हैं. नए नियमों के तहत F&O शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू होगा, इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग का समय बढ़ेगा और प्री-ओपनिंग सेशन का शेड्यूल भी बदल जाएगा. इन बदलावों का मकसद बाजार को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है.
F&O शेयरों की क्लोजिंग का तरीका बदला
आज से F&O सेगमेंट में शामिल शेयरों की क्लोजिंग प्रक्रिया पूरी तरह बदल गई है. इन शेयरों में सामान्य खरीद-बिक्री दोपहर 3:15 बजे तक होगी. इसके बाद शाम 3:20 बजे से 3:30 बजे तक क्लोजिंग ऑक्शन सेशन चलेगा, जिसमें निवेशक अपने ऑर्डर दर्ज कर सकेंगे. फिर 3:30 बजे से 3:35 बजे तक ऑर्डर मैचिंग होगी और इसी प्रक्रिया से तय हुई कीमत को उस शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस माना जाएगा.
F&O ट्रेडिंग का समय 10 मिनट बढ़ा
SEBI ने इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट की ट्रेडिंग अवधि भी बढ़ा दी है. अब इस सेगमेंट में कारोबार दोपहर 3:40 बजे तक किया जा सकेगा. हालांकि, यह बदलाव केवल F&O सेगमेंट पर लागू होगा. नकद बाजार (Cash Market) के वे शेयर जो F&O में शामिल नहीं हैं, उनमें पहले की तरह दोपहर 3:30 बजे तक ही ट्रेडिंग होगी.
प्री-ओपनिंग सेशन का नया शेड्यूल
बाजार खुलने से पहले होने वाले प्री-ओपनिंग सेशन के समय में भी बदलाव किया गया है. नए नियमों के अनुसार सुबह 9:00 बजे से 9:07 बजे तक ऑर्डर एंट्री होगी. इसके बाद 9:07 बजे से 9:15 बजे तक ऑर्डर मैचिंग की जाएगी. हालांकि, नियमित ट्रेडिंग का समय पहले की तरह सुबह 9:15 बजे से ही रहेगा.
SEBI ने क्यों किए ये बदलाव?
SEBI का कहना है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू करने का उद्देश्य शेयरों की क्लोजिंग प्राइस को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है. इससे बाजार में उपलब्ध लिक्विडिटी बेहतर तरीके से एकत्र होगी, सभी निवेशकों को समान अवसर मिलेगा और पैसिव फंड्स की ट्रैकिंग एरर कम होगी. साथ ही, भारतीय शेयर बाजार की कार्यप्रणाली वैश्विक मानकों के और करीब पहुंचेगी.
निवेशकों और ट्रेडर्स पर क्या होगा असर?
नए नियमों के बाद F&O ट्रेडर्स को अपनी ट्रेडिंग रणनीति और ऑर्डर प्लेसमेंट के समय में बदलाव करना होगा. क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के कारण अंतिम कीमत अधिक पारदर्शी तरीके से तय होगी, जबकि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के लिए अतिरिक्त 10 मिनट मिलने से निवेशकों को अपनी पोजिशन मैनेज करने का अधिक समय मिलेगा. वहीं, प्री-ओपनिंग सेशन के नए शेड्यूल के कारण शुरुआती ऑर्डर प्रक्रिया भी पहले से अधिक व्यवस्थित होगी.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली. इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को फिलहाल टालने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का फैसला रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला टालने और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने के फैसले से वैश्विक कच्चे तेल बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सोमवार को ब्रेंट क्रूड 4% से अधिक टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 5% से ज्यादा फिसलकर 81 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार करने लगा. निवेशकों को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा भी घट सकता है.
ट्रंप के फैसले से टूटा तेल बाजार
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली. इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को फिलहाल टालने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का फैसला रहा.
ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब समेत पश्चिम एशिया के कई सहयोगी देशों ने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की अपील की थी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने की दिशा में प्रगति होती है तो बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा.
तेल की कीमतों में क्यों आई गिरावट?
ट्रंप के बयान के बाद बाजार को भरोसा मिला कि पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का जोखिम घटेगा. इसी उम्मीद के चलते ब्रेंट क्रूड 4% से ज्यादा टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि WTI क्रूड 5% से अधिक गिरकर 81 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार करने लगा.
जुलाई में रहा भारी उतार-चढ़ाव
हालांकि तेल बाजार में अस्थिरता अभी भी बनी हुई है. जुलाई के दौरान ब्रेंट क्रूड करीब 25% चढ़ा था, जो मार्च के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक बढ़त रही. युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण पिछले महीने ब्रेंट में करीब 32 डॉलर प्रति बैरल का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया.
तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
शुरुआती गिरावट के बाद तेल की कीमतों में कुछ रिकवरी भी देखने को मिली. इसकी वजह ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर के निकट हुए विस्फोट की खबर रही. इस घटना ने संकेत दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा संबंधी जोखिम अभी भी बने हुए हैं.
दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है.
OPEC बढ़ाएगा उत्पादन, सप्लाई को मिलेगा सहारा
इस बीच OPEC के प्रमुख देशों ने उत्पादन बढ़ाने की योजना को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. यदि पश्चिम एशिया में तनाव और कम होता है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है. वहीं, इराक और तुर्किये ने अपनी तेल पाइपलाइन समझौते को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है, जिससे प्रतिदिन लगभग 7.5 लाख बैरल तेल का निर्यात संभव होगा.
ईरान-ओमान के बीच भी जारी है बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि ईरान और ओमान के बीच बातचीत अंतिम चरण में है. दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े नए शिपिंग रूट पर चर्चा कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब जलडमरूमध्य को खोलने या बंद करने पर कोई अंतिम फैसला नहीं है.
बीते कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को सेंसेक्स 166.49 अंक यानी 0.21% बढ़कर 78,094.64 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी50 इंडेक्स 66.45 अंक यानी 0.27% की बढ़त के साथ 24,383.60 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र में लगातार तीसरे दिन बढ़त दर्ज की थी. मजबूत वैश्विक संकेतों और ऑटो व वित्तीय शेयरों में खरीदारी के दम पर बीएसई सेंसेक्स 166.49 अंक की बढ़त के साथ 78,094.64 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 24,383.60 के स्तर पर पहुंच गया. इस तेजी के बीच बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व सबसे बड़े गेनर रहे. आज के कारोबार में भी कई कंपनियों के तिमाही नतीजों, नए ऑर्डर और नियामकीय घटनाक्रमों के चलते चुनिंदा शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी.
तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ था बाजार
घरेलू शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया. मजबूत वैश्विक संकेतों के बीच बाजार की शुरुआत हल्की बढ़त के साथ हुई और पूरे दिन सीमित दायरे में कारोबार चलता रहा. कारोबार के अंत में ऑटो और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में खरीदारी के दम पर बीएसई सेंसेक्स 166.49 अंक यानी 0.21% बढ़कर 78,094.64 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का निफ्टी50 इंडेक्स 66.45 अंक यानी 0.27% की बढ़त के साथ 24,383.60 पर पहुंच गया.
बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व ने दिखाई दमदार तेजी
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 14 बढ़त के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा तेजी बजाज फाइनेंस में 8.04% और बजाज फिनसर्व में 6.60% दर्ज की गई. इनके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), टाइटन और भारती एयरटेल के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली.
आईटी शेयरों में बिकवाली हावी रही
दूसरी ओर, आईटी और कुछ दिग्गज शेयरों में दबाव बना रहा. टीसीएस, इटरनल, इन्फोसिस, आईटीसी, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, इंडिगो और सन फार्मा के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए.
रुपये ने भी दिखाई मजबूती
मुद्रा बाजार में भी रुपये ने मजबूती दिखाई. सप्ताह के दौरान रुपया 1.2% मजबूत होकर बंद हुआ, जो मार्च के बाद इसका सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन रहा.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी
निफ्टी50 में बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे अधिक बढ़त वाले शेयर रहे. व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप दोनों 0.44% की बढ़त के साथ बंद हुए.
ऑटो और वित्तीय शेयरों ने बाजार को दिया सहारा
सेक्टोरल इंडेक्स में ऑटो और वित्तीय शेयरों ने बाजार की बढ़त में अहम योगदान दिया, जबकि आईटी और एफएमसीजी शेयरों में कमजोरी रही. वैश्विक चिप कंपनियों के शेयरों में तेजी के बावजूद निफ्टी आईटी का लगातार पांच कारोबारी सत्रों से जारी बढ़त का सिलसिला टूट गया.
आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर
आज के कारोबार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं. जाइडस लाइफसाइंसेज को अहमदाबाद स्थित इंजेक्टेबल यूनिट के लिए USFDA से एस्टैब्लिशमेंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट (EIR) मिली है. डॉ. रेड्डीज को अमेरिका में Rituximab बायोसिमिलर के विपणन की मंजूरी मिली है.
अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर ने करीब 900 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट हासिल किए हैं. वहीं, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) को 847 करोड़ रुपये और एनसीसी को 1,052.71 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले हैं. मारुति सुजुकी के बोर्ड ने 561 करोड़ रुपये की चार कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जबकि कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR) ने अजीत कुमार पांडा को नया CMD नियुक्त किया है.
इसके अलावा, मूडीज ने JSW स्टील को Baa3 रेटिंग के साथ 'स्थिर' आउटलुक दिया है. दूसरी ओर, सेबी ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े मामले में जी एंटरटेनमेंट, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्र पर बाजार से प्रतिबंध लगाने के साथ 1.48 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. ONGC ने अपने दो संयुक्त उपक्रमों में 50% हिस्सेदारी बरकरार रखने का फैसला किया है. वहीं, इंडिगो 25 अक्टूबर 2026 को Norse Atlantic Airways के साथ अपना वाइड-बॉडी डैम्प लीज समझौता समाप्त करेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में सकल GST कलेक्शन 8.43 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 7.66 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 10.1% अधिक है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देते हुए जुलाई 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह 15.4% की सालाना बढ़ोतरी के साथ 2.11 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. घरेलू कारोबार में तेजी और आयात पर बढ़े टैक्स कलेक्शन के दम पर सरकार की कमाई में यह उछाल दर्ज किया गया. हरियाणा, गुजरात और तेलंगाना जैसे राज्यों ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि कुछ राज्यों में GST संग्रह में गिरावट भी देखने को मिली.
घरेलू कारोबार से GST संग्रह 1.31 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, आयात से मिलने वाला GST 28.8% की तेज बढ़ोतरी के साथ 66,511 करोड़ रुपये पहुंच गया. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद देश में आर्थिक गतिविधियों और उपभोक्ता मांग पर खास असर नहीं पड़ा.
रिफंड में भी दो अंकों की बढ़ोतरी
जुलाई के दौरान कारोबारियों को 29,968 करोड़ रुपये का GST रिफंड जारी किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.1% अधिक है. वहीं, ICEGATE के जरिए प्रोसेस किए गए निर्यात रिफंड में 22.7% की वृद्धि दर्ज की गई और यह 12,288 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
नेट GST कलेक्शन 1.81 लाख करोड़ रुपये
रिफंड समायोजित करने के बाद सरकार का नेट GST कलेक्शन जुलाई में 1.81 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में 15.8% अधिक है. इसमें घरेलू कारोबार से मिलने वाला नेट GST 1.27 लाख करोड़ रुपये और आयात से मिलने वाला नेट GST 54,223 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 30.3% की वृद्धि दर्ज की गई.
GST 2.0 का असर दिखने लगा
विशेषज्ञों का मानना है कि GST 2.0 लागू होने के बाद टैक्स संग्रह में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है. हर महीने 7-8% की स्थिर वृद्धि इस बात का संकेत है कि टैक्स अनुपालन बेहतर हुआ है. हालांकि, आयात से मिलने वाले टैक्स की वृद्धि घरेलू कारोबार की तुलना में अधिक रहने से यह भी संकेत मिलता है कि उपभोक्ता गैर-जरूरी खर्चों को लेकर अभी सतर्क हैं.
अप्रैल-जुलाई में 8.43 लाख करोड़ रुपये का संग्रह
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में सकल GST कलेक्शन 8.43 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 7.66 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 10.1% अधिक है. इसी अवधि में नेट GST कलेक्शन 9.2% बढ़कर 7.21 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
हरियाणा सबसे आगे, कई राज्यों में शानदार प्रदर्शन
राज्यों की बात करें तो जुलाई में GST संग्रह वृद्धि के मामले में हरियाणा 25% की बढ़ोतरी के साथ शीर्ष पर रहा. इसके बाद गुजरात और तेलंगाना में 19-19%, पंजाब और केरल में 16%, उत्तर प्रदेश में 15%, महाराष्ट्र में 13%, कर्नाटक में 12% और दिल्ली में 8% की वृद्धि दर्ज की गई.
हालांकि, कुछ राज्यों में GST संग्रह कमजोर रहा. हिमाचल प्रदेश में 22%, उत्तराखंड में 18%, पुडुचेरी में 17%, मध्य प्रदेश में 10%, आंध्र प्रदेश में 5% और तमिलनाडु में 1% की गिरावट दर्ज की गई.