UltraTech Cement का मार्च तिमाही में 10% बढ़ा प्रॉफिट! हर शेयर पर 77.5% का मिलेगा डिविडेंड

कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए शेयरहोल्डरों को 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर 77.50 रुपये का डिविडेंड दिया जाएगा.

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Tuesday, 29 April, 2025
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अल्ट्राटेक सीमेंट ने शेयर मार्केट बंद होने के बाद दो बड़ी जानकारी दी है.पहली– कंपनी ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2025 का मार्च क्वार्टर रिजल्ट जारी कर दिया है. दूसरी– कंपनी ने अपने इन्वेस्टर को बड़ा डिविडेंड देने का ऐलान किया है.इन दोनों खबरों का असर आगामी 29 अप्रैल दिन मंगलवार के सत्र में देखने को मिल सकता है.

प्रॉफिट और रेवेन्यू में बढ़िया उछाल

फिलहाल, अल्ट्राटेक सीमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 2025 के मार्च क्वार्टर रिजल्ट को जारी करते हुए बताया कि उनका मार्च क्वार्टर में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 10 फ़ीसदी से बढ़कर के 2482 करोड़ रुपए के लेवल पर रिपोर्ट हुआ है.वहीं इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 13 फ़ीसदी से बढ़कर के 23063 करोड़ रुपए था.

77.50 रुपए का डिविडेंड

अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के बोर्ड में आज अपने इन्वेस्टर को 31 मार्च 2025 के लिए समाप्त हो रहे फाइनेंशियल ईयर के लिए हर एक शेयर पर 77.50 रुपए के हिसाब से डिविडेंड देने का ऐलान किया है. मार्च क्वार्टर के दौरान अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी का सालाना आधार पर Ebitda करीब 11 फ़ीसदी से बढ़कर के 4721 करोड़ रुपए के लेवल पर रिपोर्ट हुआ है.Ebitda में यह बढ़त कंपनी के लोअर इनपुट कॉस्ट और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के चलते देखने को मिली है.

ग्रे सीमेंट का वॉल्यूम में तेजी

मार्च क्वार्टर के दौरान अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी का घरेलू मोर्चे पर ग्रे सीमेंट का वॉल्यूम सालाना आधार पर 10 फ़ीसदी से उछल करके 36.46 मिलियन टन पर है.ग्रे सीमेंट की वैल्यू में आई उछाल के पीछे का प्रमुख कारण हाउसिंग और कमर्शियल सेगमेंट से मजबूत डिमांड के चलते देखने को मिली है.

अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी ने भारत सीमेंट्स और केसरम सीमेंट कंपनी के बिजनेस का अधिग्रहण किया है.जिसके बाद अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी का कुल ग्रे सीमेंट कैपेसिटी 183.4 मिलियन टन पर एनम पर पहुंच गया है.अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के मैनेजमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 2027 तक के लिए अपनी कैपेसिटी को 210.5 मिलियन टन पर एनम तक बढ़ाने का टारगेट रखा है ध्यान रहे इसमें ब्राउन फील्ड और ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट का भी मिक्स होगा.
 


वित्त मंत्री सीतारमण ने कतर से बढ़ाया आर्थिक सहयोग, निवेश समझौते में तेजी पर जोर

मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 में भारत का सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह 94.53 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले 15 वर्षों में सबसे अधिक है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
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Wednesday, 30 September, 2026
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भारत ने कतर और अन्य खाड़ी देशों के साथ सामान्य व्यापार व्यवस्था बहाल रखने पर जोर दिया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कतर के साथ बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए निर्बाध समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने की जरूरत उठाई. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) को जल्द पूरा करने और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.

वित्त मंत्रालय के अनुसार, सीतारमण ने 29 सितंबर को दोहा में एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की 2026 की वार्षिक बैठक के दौरान कतर के विदेश व्यापार राज्य मंत्री अहमद बिन मोहम्मद अल-सैयद से मुलाकात की. इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय समुद्री मार्गों में जारी व्यवधानों पर चर्चा हुई.

BIT पर बातचीत तेज करने पर सहमति

बैठक में भारत और कतर के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर जारी बातचीत की भी समीक्षा की गई. दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत तेज करने पर सहमति जताई.

कतर के मंत्री ने भारत में निवेश की व्यापक संभावनाओं का उल्लेख किया. उन्होंने बंदरगाह, हवाई अड्डे, राजमार्ग और बिजली समेत बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में निवेश के अवसरों की बात कही. इसके अलावा कतर में भारतीय कंपनियों के लिए खाद्य सुरक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में अवसरों का भी जिक्र किया.

भारत और कतर ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा करीब 14 अरब डॉलर से बढ़ाकर 30 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है. दोनों देशों ने फरवरी 2025 में कतर के अमीर की भारत यात्रा के दौरान अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था. व्यापार और निवेश को इस साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया था.

होर्मुज संकट के बीच ऊर्जा आपूर्ति पर नजर

भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य महत्वपूर्ण है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से होने वाले ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है. 2025 में रणनीतिक साझेदारी की घोषणा के समय कतर भारत के LNG आयात में करीब 48 फीसदी और LPG आयात में करीब 29 फीसदी हिस्सेदारी रखता था.

होर्मुज के रास्ते शिपिंग में व्यवधान के बीच भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान दे रहा है. इसी क्रम में भारत की सरकारी LPG आयातक कंपनियों ने अमेरिका से भी आपूर्ति हासिल करने की कोशिश की है, ताकि खाड़ी क्षेत्र से होने वाली आपूर्ति में संभावित रुकावट का असर कम किया जा सके.

कतर के कारोबारियों से भी मिलीं वित्त मंत्री

सीतारमण ने दोहा में कतर बिजनेसमैन एसोसिएशन (QBA) के बिजनेस राउंडटेबल में भी हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने दोनों देशों में उभरते आर्थिक अवसरों पर चर्चा की और व्यापार एवं निवेश साझेदारी को बढ़ाने के लिए कतर के कारोबारियों से सक्रिय रूप से अवसर तलाशने का आह्वान किया.

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, वित्त मंत्री ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 फीसदी और निवेश वृद्धि 11.9 फीसदी रहने का उल्लेख किया.

उन्होंने जापान क्रेडिट रेटिंग (JCR) की ओर से भारत की दीर्घकालिक जारीकर्ता रेटिंग को BBB+ से बढ़ाकर A- किए जाने का भी जिक्र किया.

मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 में भारत का सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह 94.53 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले 15 वर्षों में सबसे अधिक है.

भारत के लिए कतर के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करना ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही में व्यवधान से ऊर्जा और अन्य आयातों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है.


अल नीनो की आशंका के बीच सरकार ने तय किया 37.39 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य

2025-26 के वास्तविक उत्पादन से करीब 26 लाख टन कम है लक्ष्य; धान, मक्का, सोयाबीन और कपास के रकबे में कमी, दालों और तिलहनों की बोआई बढ़ी

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
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अल नीनो के प्रभाव और देश के कुछ हिस्सों में सूखे की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने फसल वर्ष 2026-27 के लिए 37.393 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य तय किया है. यह लक्ष्य पिछले फसल वर्ष के 37.656 करोड़ टन के वास्तविक उत्पादन से करीब 26 लाख टन कम है. सरकार ने हालांकि कहा है कि मौजूदा बारिश की कमी से इस साल खाद्यान्न उत्पादन पर बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है.

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो दिवसीय राष्ट्रीय रबी अभियान सम्मेलन के दौरान कहा कि सरकार ने राज्यों से मिली जानकारी, जल उपलब्धता और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उत्पादन लक्ष्य तय किए हैं. उन्होंने बताया कि 2025-26 में खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 36.26 करोड़ टन था, जबकि वास्तविक उत्पादन बढ़कर 37.656 करोड़ टन रहा.

रबी में 17.77 करोड़ टन उत्पादन का लक्ष्य

फसल वर्ष 2026-27 में रबी सीजन के लिए खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 17.772 करोड़ टन रखा गया है. यह पिछले साल के 17.451 करोड़ टन के वास्तविक उत्पादन से अधिक है. गेहूं रबी सीजन की प्रमुख फसल है. वहीं, खरीफ सीजन के लिए 19.621 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है. पिछले साल इसी सीजन में वास्तविक उत्पादन 17.414 करोड़ टन रहा था.

चौहान ने कहा कि हालांकि खरीफ की कुछ प्रमुख फसलों के रकबे में कमी आई है, लेकिन कुल बोया गया क्षेत्र पिछले साल के आसपास ही है.

धान के रकबे में सबसे ज्यादा कमी

इस खरीफ सीजन में धान की खेती का रकबा करीब 16.32 लाख हेक्टेयर घटा है. इसके अलावा मक्का, सोयाबीन और कपास के रकबे में भी कमी दर्ज की गई है. इसके विपरीत उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर जैसी फसलों की बोआई का रकबा बढ़ा है.

सरकार का कहना है कि कम बारिश और सीमित जल उपलब्धता वाले इलाकों में अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के बजाय दालों और तिलहनों जैसी फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई जा रही है.

12 फीसदी कम बारिश, इन राज्यों में चिंता

चौहान के अनुसार, देश में अब तक बारिश सामान्य से करीब 12 फीसदी कम रही है. हालांकि उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर सूखे की स्थिति तब मानी जाती है, जब संबंधित अवधि में बारिश की कमी 20 फीसदी से अधिक हो. उन्होंने कहा कि मौजूदा बारिश की कमी से खाद्यान्न उत्पादन पर महत्वपूर्ण असर पड़ने की आशंका नहीं है. उत्पादन के अंतिम अनुमान जल्द जारी किए जाएंगे.

कृषि मंत्रालय के अनुसार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, रायलसीमा और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, तेलंगाना तथा राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में फसल और जल उपलब्धता को लेकर चिंता सामने आई है. राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट अभी आना बाकी है.

कर्नाटक और महाराष्ट्र में भेजी जाएंगी केंद्रीय टीमें

कर्नाटक ने स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम भेजने का अनुरोध किया है. केंद्रीय टीम 3 अक्टूबर को राज्य का दौरा करेगी. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी केंद्रीय मूल्यांकन दल भेजने का अनुरोध किया है और वहां भी टीम भेजी जाएगी.

कृषि मंत्री ने कहा कि वह प्रभावित राज्यों का खुद दौरा करेंगे और राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे. उन्होंने कहा कि तत्काल प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई कृषि क्षेत्र खाली न रहे.

किसानों को FTA के फायदे बताने के लिए अभियान

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार भारत द्वारा किए गए विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से किसानों को मिलने वाले संभावित लाभों के बारे में जागरूक करने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी.

उन्होंने कहा कि कई भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में शून्य आयात शुल्क का लाभ मिल सकता है. सरकार किसानों को इन व्यापार समझौतों से उपलब्ध अवसरों का बेहतर इस्तेमाल करने के तरीके बताएगी.
 


पाकिस्तान एयरस्पेस प्रतिबंध के बीच चीन के रास्ते नया एयर कॉरिडोर तलाश रहा भारत

होटन के रास्ते वैकल्पिक रूट पर चीन से बातचीत जारी, भारतीय एयरलाइंस की उड़ानों का समय और परिचालन लागत घटाने की कोशिश

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
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Wednesday, 30 September, 2026
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पाकिस्तान के लगातार जारी एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण भारतीय एयरलाइंस पर बढ़ रहे अतिरिक्त उड़ान समय और परिचालन खर्च को कम करने के लिए भारत चीन के शिनजियांग क्षेत्र के रास्ते एक वैकल्पिक एयर कॉरिडोर की संभावना तलाश रहा है. नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को बताया कि इस संबंध में चीन के साथ बातचीत चल रही है.

भारत और चीन के बीच दक्षिण-पश्चिमी शिनजियांग के होटन के रास्ते एक संभावित एयर रूट पर चर्चा हो रही है. यह मार्ग भारतीय एयरलाइंस को पश्चिम की ओर जाने वाली उड़ानों के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध करा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय करीब एक साल से इस प्रस्ताव को लेकर चीनी अधिकारियों के संपर्क में है.

नायडू ने कहा कि सरकार वैकल्पिक रूटिंग विकल्पों की समीक्षा कर रही है, जिसमें होटन कॉरिडोर भी शामिल है. इस मामले में विदेश मंत्रालय के जरिए चीन के साथ बातचीत जारी है. हालांकि, प्रस्तावित रूट के लिए अभी तक कोई समझौता या परिचालन मंजूरी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है.

दिल्ली-मुंबई से होटन के रास्ते यूरोप तक रूट की संभावना

प्रस्तावित रूट के तहत दिल्ली और मुंबई से उड़ानें लेह की ओर जा सकती हैं और होटन के पास चीनी एयरस्पेस में प्रवेश करने के बाद किर्गिस्तान की ओर बढ़ सकती हैं. इसके बाद ये उड़ानें यूरोप, ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका के लिए पहले से मौजूद एयर रूट से जुड़ सकती हैं. हालांकि, इस तरह के कॉरिडोर के लिए भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय मंजूरी, एयर ट्रैफिक समन्वय और अन्य परिचालन मंजूरियों की जरूरत होगी.

पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने से बढ़ा उड़ान समय

भारत की ओर से वैकल्पिक एयर रूट तलाशने की जरूरत अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद किए जाने के बाद बढ़ी है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने इस प्रतिबंध को कई बार बढ़ाया है और फिलहाल यह 24 अक्टूबर 2026 तक लागू रहने वाला है.

एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण भारतीय एयरलाइंस को कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबे रूट अपनाने पड़ रहे हैं. इससे उड़ान समय, ईंधन की खपत और क्रू की जरूरत बढ़ गई है. उत्तरी और पश्चिमी भारत से यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका जाने वाली कुछ उड़ानों को पाकिस्तान के एयरस्पेस से बचने के लिए वैकल्पिक रास्तों से जाना पड़ रहा है, जिससे यात्रा में करीब 45 मिनट से लेकर दो घंटे तक अतिरिक्त समय लग रहा है.

एयर इंडिया पर भी पड़ा असर

पाकिस्तान के एयरस्पेस प्रतिबंधों का असर खास तौर पर एयर इंडिया के लंबी दूरी वाले नेटवर्क पर पड़ा है, क्योंकि दिल्ली और मुंबई से उसकी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित होती हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैंपबेल विल्सन ने 2025 में अनुमान लगाया था कि पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद होने के कारण एयरलाइन को करीब 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

भारतीय एयरलाइंस फिलहाल पाकिस्तान के एयरस्पेस से बचने के लिए L639 रूट का इस्तेमाल कर रही हैं. इससे कुछ उड़ानों के यात्रा समय में करीब दो घंटे की बढ़ोतरी हो रही है.

रिपोर्ट में एक अन्य व्यक्ति के हवाले से कहा गया है कि होटन कॉरिडोर के जरिए जॉर्जिया, बाकू, मध्य एशिया और उत्तरी यूरोप जैसे बाजारों के लिए संचालित उड़ानों में महत्वपूर्ण लागत बचत हो सकती है.

Routes Asia 2027 के जरिए अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी पर जोर

राम मोहन नायडू की यह टिप्पणी Routes Asia 2027 के कर्टन-रेजर कार्यक्रम के दौरान आई. भारत अगले साल 16 से 18 मार्च के बीच नई दिल्ली के भारत मंडपम में Routes Asia 2027 की मेजबानी करेगा.

कार्यक्रम में 55 से अधिक देशों और करीब 115 एयरलाइंस के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है. इसके अलावा करीब 2,500 आमने-सामने की कारोबारी बैठकें होने की संभावना है.

नायडू ने कहा कि दुनिया के तीसरे सबसे बड़े घरेलू विमानन बाजार के रूप में भारत के विस्तार को मजबूत अंतरराष्ट्रीय एयर कनेक्टिविटी का समर्थन जरूरी है. सरकार Routes Asia 2027 के जरिए एयरलाइंस और दूसरे देशों के साथ नए हवाई संपर्क विकसित करने और विमानन क्षेत्र में नए अवसर तलाशने पर चर्चा करेगी.

66 एयरपोर्ट पर चल रहा विकास कार्य

नायडू के अनुसार, देश में फिलहाल 66 एयरपोर्ट विकास के अलग-अलग चरणों में हैं. एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ अब सरकार का फोकस कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर है. उन्होंने कहा कि बेहतर एयर कनेक्टिविटी से व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है. खास तौर पर भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई-चेन इकोसिस्टम से जुड़े बाजारों के लिए मजबूत हवाई संपर्क महत्वपूर्ण है.

नायडू के मुताबिक, पिछले 15 महीनों में भारत ने 55 अंतरराष्ट्रीय एयर रूट जोड़े हैं. सरकार एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय रूट के विस्तार के जरिए भारत के विदेशी बाजारों और प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ संपर्क को मजबूत करने पर काम कर रही है.
 


कच्चे माल की ऊंची कीमतों से FY27 की दूसरी तिमाही में कंज्यूमर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव: नोमुरा

ब्रेंट और एचडीपीई की कीमतों में सालाना आधार पर तेज बढ़ोतरी, चीनी, पाम ऑयल और लिक्विड पैराफिन भी महंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
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भारतीय कंज्यूमर कंपनियों को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (2QFY27) में मार्जिन के मोर्चे पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है. कच्चे माल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और कंपनियों की ओर से वित्त वर्ष की पहली तिमाही में की गई कीमत बढ़ोतरी इनपुट लागत में हुई वृद्धि की पूरी तरह भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं रही है. नोमुरा की 28 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, निकट अवधि में यह अंतर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बनाए रख सकता है और आगे कीमतों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है.

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में ज्यादातर कच्चे माल की कीमतें या तो सीमित दायरे में रहीं या महीने-दर-महीने आधार पर नरम हुईं. हालांकि, सालाना और तिमाही आधार पर कई प्रमुख इनपुट अभी भी काफी महंगे हैं.

ब्रेंट और एचडीपीई से बढ़ी लागत की चिंता

ब्रेंट क्रूड और एचडीपीई कंज्यूमर कंपनियों के लिए प्रमुख लागत दबाव बनकर उभरे हैं. नोमुरा के अनुसार, सितंबर में ब्रेंट क्रूड की कीमत सालाना आधार पर करीब 40 फीसदी अधिक रही, जबकि एचडीपीई की कीमत में 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. ऊंची एचडीपीई कीमतों से पैकेजिंग लागत बढ़ने की आशंका है. वहीं, पेंट कंपनियों के लिए भी कच्चे माल की लागत पर इसका असर पड़ सकता है.

चीनी और पाम ऑयल भी बढ़ा रहे दबाव

सितंबर में चीनी की कीमतों में महीने-दर-महीने 8 फीसदी की गिरावट आई है और सरकारी कदमों के बाद यह अपने उच्चतम स्तर से करीब 21 फीसदी नीचे आ चुकी है. सरकार ने कीमतों पर दबाव कम करने के लिए शुल्क-मुक्त आयात और स्टॉक जारी करने जैसे कदम उठाए हैं.

इसके बावजूद चीनी की कीमत सालाना आधार पर 18 फीसदी और तिमाही आधार पर 16 फीसदी अधिक है. इससे ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, नेस्ले इंडिया, डाबर इंडिया, आईटीसी के फूड कारोबार और हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है.

पाम ऑयल की कीमतें सितंबर में स्थिर रहीं, लेकिन रुपये में सालाना आधार पर करीब 21 फीसदी अधिक हैं. सरकार ने 24 सितंबर से क्रूड पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी है. नोमुरा के मुताबिक, इससे गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी साबुन बनाने वाली कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है.

लिक्विड पैराफिन की कीमतों में महीने-दर-महीने 5 फीसदी की कमी आई है, लेकिन यह अभी भी सालाना आधार पर 38 फीसदी अधिक है. इसका असर डाबर और Marico जैसी हेयर ऑयल कंपनियों तथा पर्सनल केयर कारोबार पर पड़ सकता है.

कॉफी और कोपरा से कुछ राहत

हालांकि, सभी कमोडिटी की कीमतों में तेजी नहीं है. रोबस्टा कॉफी की कीमत सितंबर में महीने-दर-महीने 5 फीसदी और सालाना आधार पर 11 फीसदी कम हुई. इससे नेस्ले इंडिया और हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्जिन को कुछ फायदा मिल सकता है.

अरबिका कॉफी की कीमत में महीने-दर-महीने 12 फीसदी और सालाना आधार पर 5 फीसदी की गिरावट आई है. नोमुरा के मुताबिक, इससे टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के कॉफी कारोबार को फायदा हो सकता है.

कोपरा की कीमतें भी महीने-दर-महीने 3 फीसदी नरम हुई हैं और सालाना आधार पर 32 फीसदी नीचे हैं. नोमुरा का अनुमान है कि इससे मैरिको पर मार्जिन दबाव कम हो सकता है, हालांकि इससे कीमतों में आगे कटौती जरूरी नहीं होगी.

इस बीच, सितंबर में सोने की कीमतें स्थिर रहीं. सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 14 फीसदी नीचे आ चुका है. नोमुरा के मुताबिक, इससे आगामी त्योहारी और शादी के सीजन में ज्वेलरी की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही और बिक्री को समर्थन मिल सकता है.

कंपनियों पर अलग-अलग असर

नोमुरा के अनुसार, कच्चे माल की मौजूदा कीमतों का असर सभी कंज्यूमर कंपनियों पर एक जैसा नहीं होगा. गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स पर क्रूड डेरिवेटिव्स और पाम ऑयल/PFAD की ऊंची कीमतों का दबाव रह सकता है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में करीब 5 फीसदी कीमत बढ़ाई थी, लेकिन नोमुरा का अनुमान है कि दूसरी और तीसरी तिमाही में भी आगे कीमत बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है.

कोलगेट-पामओलिव इंडिया के मार्जिन पर मक्का और मेंथा ऑयल की बढ़ती कीमतों का असर पड़ सकता है. कंपनी की पैकेजिंग लागत में भी अपेक्षाकृत अधिक हिस्सेदारी है. टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के लिए चाय की महंगाई और एचडीपीई की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कॉफी की कम कीमतों से मिलने वाले फायदे को सीमित कर सकते हैं.

पेंट कंपनियों पर भी लागत का दबाव

पेंट कंपनियों के लिए स्थिति अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. ऊंची क्रूड कीमतों, महंगे इन्वेंटरी खर्च और सीजनल तौर पर कमजोर तिमाही का एक साथ असर पड़ सकता है. नोमुरा के अनुसार, पेंट कंपनियों ने पहली तिमाही में करीब 12 फीसदी कीमत बढ़ोतरी की थी, लेकिन यह इनपुट लागत में हुई वृद्धि से कम है. ऐसे में दूसरी तिमाही में इनके मार्जिन पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है.

मौसम और कृषि जोखिम बढ़ा रहे अनिश्चितता

कमोडिटी कीमतों का आउटलुक मौसम और कृषि संबंधी जोखिमों से भी प्रभावित हो रहा है. नोमुरा के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश दीर्घकालिक औसत से 12 फीसदी कम रही है. वहीं, महाराष्ट्र और कर्नाटक के करीब 75 फीसदी हिस्से में सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा था.

ब्रोकरेज ने अल नीनो के मजबूत होने और फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना का भी उल्लेख किया है, हालांकि, खरीफ उत्पादन में सालाना आधार पर गिरावट करीब 1.5 फीसदी तक सीमित रही है. 1 जुलाई 2026 तक सरकार के पास चावल और गेहूं का बफर स्टॉक संबंधित मानकों से क्रमशः करीब तीन गुना और 1.8 गुना था. नोमुरा के अनुसार, ये स्टॉक खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं और कुछ राहत दे सकते हैं.

नोमुरा का मानना है कि मजबूत उत्पाद पोर्टफोलियो, कीमत बढ़ाने की क्षमता और बेहतर क्रियान्वयन वाली कंज्यूमर कंपनियां ऐसे समय में लागत और मांग से जुड़ी बढ़ती अनिश्चितता से निपटने में सक्षम हो सकती हैं.


2049 तक बदल जाएगी भारत की जनसांख्यिकी, ‘वृद्ध समाज’ बनने से बढ़ेंगी आर्थिक चुनौतियां: मूडीज

प्रजनन दर में गिरावट और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी से पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी वित्त पर बढ़ सकता है दबाव; उत्पादकता बढ़ाना और श्रमबल का विस्तार होगा अहम

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Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
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भारत तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव के दौर से गुजर रहा है. वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज के मुताबिक, देश 2049 तक ‘वृद्ध समाज’ और करीब 2065 तक ‘अति वृद्ध समाज’ की श्रेणी में पहुंच सकता है. इसका असर आने वाले दशकों में सिर्फ पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि श्रमबल की उपलब्धता, खपत, सरकारी वित्त और आर्थिक विकास की रफ्तार पर भी पड़ सकता है.

मूडीज की वैश्विक जनसांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार, भारत करीब 2024 में ‘बुजुर्ग होती आबादी’ वाले समाज की श्रेणी में शामिल हो चुका है. जिस समाज में 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 7 फीसदी होती है, उसे ‘एजिंग’ समाज माना जाता है. यह हिस्सेदारी 14 फीसदी होने पर ‘वृद्ध’ और 21 फीसदी पहुंचने पर ‘अति वृद्ध’ समाज की श्रेणी बनती है.

कुछ दशकों में तेजी से बदलेगी आबादी की उम्र संरचना

मूडीज का अनुमान है कि भारत 2049 तक ‘वृद्ध’ और करीब 2065 तक ‘अति वृद्ध’ समाज बन सकता है. यानी भारत को इन दोनों चरणों तक पहुंचने में अपेक्षाकृत कम समय लगेगा. तुलना में अमेरिका के 2033-34 के आसपास ‘अति वृद्ध’ समाज बनने का अनुमान है, जबकि इंडोनेशिया के लिए यह समय करीब 2077-78 बताया गया है.

मूडीज के मुताबिक, भारत की आबादी अभी भी अपेक्षाकृत युवा है, लेकिन इसकी उम्र संरचना में बदलाव शुरू हो चुका है. देश की प्रजनन दर भी 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से नीचे आ गई है. इससे इस सदी के उत्तरार्ध में बुजुर्ग आबादी का अनुपात काफी बढ़ सकता है.

घटता श्रमबल बनेगा बड़ी चुनौती

रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, लंबे समय तक बढ़ती आबादी भारत के आर्थिक विकास और साख के लिए अनुकूल रही है. हालांकि, घटती प्रजनन दर अब इस तस्वीर को बदल रही है. कम कामगारों से उत्पादन क्षमता पर असर पड़ सकता है, जबकि परिवारों और उपभोक्ताओं की संख्या घटने से मांग भी कमजोर हो सकती है.

मूडीज ने कहा कि ऐसे माहौल में आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए देशों को उत्पादकता बढ़ाने पर अधिक निर्भर रहना होगा. हालांकि, भारत के पास श्रमबल की भागीदारी बढ़ाने की अभी काफी गुंजाइश है. रिपोर्ट में शामिल 19 अर्थव्यवस्थाओं में भारत की महिला श्रमबल भागीदारी दर 32 फीसदी के साथ सबसे कम बताई गई है.

पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ेगा दबाव

बुजुर्ग आबादी बढ़ने के साथ पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और दीर्घकालिक देखभाल पर सरकारी खर्च बढ़ सकता है. इसके साथ ही सार्वजनिक वित्त और स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ने की संभावना है.

मूडीज के मुताबिक, आबादी के उम्रदराज होने और आश्रितों का अनुपात बढ़ने के साथ पेंशन व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और राजकोषीय ढांचे में बदलाव करना जरूरी होगा. जो देश इन बदलावों के लिए समय रहते तैयारी करेंगे, वे जनसांख्यिकीय दबावों से बेहतर तरीके से निपट सकते हैं.

प्रजनन दर घटने के पीछे कई कारण

मूडीज ने प्रजनन दर में गिरावट के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण बताए हैं. शिक्षा का स्तर बढ़ने और महिलाओं की श्रमबल में भागीदारी बढ़ने से परिवार शुरू करने में देरी हो रही है. वहीं, आवास, बच्चों की देखभाल, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत ने बच्चों के पालन-पोषण को महंगा बना दिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि सोशल मीडिया और वैश्विक स्तर पर बढ़ते संपर्क से कम प्रजनन दर की प्रवृत्ति अलग-अलग देशों में तेजी से फैल रही है. वहीं, अन्य शोधकर्ता आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक अस्थिरता और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं को परिवार के आकार से जुड़े फैसलों का कारण मानते हैं.

कारोबार और वित्तीय बाजारों पर भी पड़ेगा असर

बढ़ती उम्रदराज आबादी का असर कारोबार के स्वरूप पर भी पड़ सकता है. कंपनियों को ऐसे उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों और खर्च की प्राथमिकताओं के अनुरूप अपने उत्पादों और सेवाओं में बदलाव करना होगा. वहीं, वित्तीय बाजारों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है. मूडीज के मुताबिक, आने वाले वर्षों में बुजुर्ग पीढ़ियों के पास मौजूद बड़ी मात्रा में संपत्ति उनके उत्तराधिकारियों, परोपकारी संस्थाओं और अन्य लाभार्थियों को हस्तांतरित होगी. इससे पूंजी के प्रवाह और निवेश के पैटर्न में बदलाव आ सकता है.

तकनीक और उत्पादकता पर बढ़ेगी निर्भरता

मूडीज का कहना है कि नीतिगत उपाय और तकनीक उम्रदराज होती आबादी के साथ तालमेल बैठाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन वे जनसांख्यिकीय रुझानों को पूरी तरह पलट नहीं सकते. ऐसे में श्रमबल का विस्तार, उत्पादकता में वृद्धि और संस्थागत सुधार भारत जैसे देशों के लिए महत्वपूर्ण होंगे.

आने वाले दशकों में आर्थिक और साख संबंधी परिणाम इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेंगे कि देश घटते श्रमबल की चुनौती से कैसे निपटते हैं, महिलाओं की श्रमबल भागीदारी कितनी बढ़ती है और उत्पादकता को किस तरह मजबूत किया जाता है.


टाटा संस की लिस्टिंग से ग्रुप कंपनियों की रेटिंग पर क्या होगा असर? S&P ने दिया बड़ा अपडेट

S&P के मुताबिक, टाटा समूह की रेटिंग वाली कंपनियां स्वतंत्र पेशेवर प्रबंधन के तहत काम करती हैं, लेकिन टाटा संस उनकी रणनीतिक दिशा को प्रभावित करती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
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टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग और टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने अहम आकलन पेश किया है. एजेंसी के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में टाटा संस की लिस्टिंग या नेतृत्व में बदलाव से टाटा समूह की रेटिंग वाली कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग पर तत्काल कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है. हालांकि, लंबी अवधि में समूह की संरचना, रणनीति, पूंजी आवंटन और कमजोर कंपनियों को मिलने वाले समर्थन में बदलाव होने पर क्रेडिट आकलन प्रभावित हो सकता है.**

S&P Global Ratings ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि टाटा समूह के लंबे इतिहास और अपेक्षाकृत रूढ़िवादी प्रबंधन दृष्टिकोण को देखते हुए वित्तीय नीतियों में किसी भी बदलाव के धीरे-धीरे होने की संभावना है. एजेंसी के अनुसार, टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और समूह में नेतृत्व परिवर्तन फिलहाल समूह की कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल के लिए तटस्थ रहने की उम्मीद है.

टाटा संस का ग्रुप कंपनियों पर कितना प्रभाव?

S&P के मुताबिक, टाटा समूह की रेटिंग वाली कंपनियां स्वतंत्र पेशेवर प्रबंधन के तहत काम करती हैं, लेकिन टाटा संस उनकी रणनीतिक दिशा को प्रभावित करती है. एजेंसी फिलहाल टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा पावर, टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी, टाटा कैपिटल और जगुआर लैंड रोवर की रेटिंग करती है.

रेटिंग एजेंसी इन कंपनियों को टाटा संस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानती है. समूह से मिलने वाले समर्थन को देखते हुए इन कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग में अधिकतम तीन पायदान तक का लाभ शामिल किया जाता है.

लिस्टिंग से तुरंत नहीं बदलेगा क्रेडिट प्रोफाइल

S&P ने कहा कि टाटा संस की मौजूदा संरचना में सामान्य तरीके से लिस्टिंग होने की स्थिति में समूह की कंपनियों के क्रेडिट प्रोफाइल पर तत्काल कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, लिस्टिंग के बाद सार्वजनिक शेयरधारकों की हिस्सेदारी बढ़ने से निवेश संबंधी फैसलों, पूंजी आवंटन और कमजोर समूह कंपनियों को समर्थन देने की प्रक्रिया पर अधिक निगरानी हो सकती है.

एजेंसी के मुताबिक, संभावित आईपीओ का आकार बड़ा होने और सार्वजनिक शेयरधारकों को स्वामित्व ढांचे में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल करने में समय लगने के कारण लिस्टिंग का प्रभाव धीरे-धीरे सामने आ सकता है.

लंबी अवधि में इन बदलावों पर रहेगी नजर

S&P के अनुसार, टाटा समूह की लीडरशिप, ग्रुप स्ट्रक्चर या लाभार्थियों की प्राथमिकताओं में बदलाव होने पर लंबी अवधि में समूह की रणनीति और वित्तीय नीति की निरंतरता पर सवाल उठ सकते हैं. इसका असर खासतौर पर टाटा स्टील, टाटा पावर और टाटा कैपिटल जैसी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनकी विस्तार योजनाएं बड़ी हैं. वहीं, जगुआर लैंड रोवर फिलहाल कारोबारी बदलाव के दौर से गुजर रही है. ऐसे में समूह की रणनीतिक प्राथमिकताओं और कंपनियों को मिलने वाले समर्थन की निरंतरता S&P के भविष्य के क्रेडिट आकलन में अहम कारक रह सकती है.

फिलहाल 'न्यूट्रल' है आकलन

कुल मिलाकर, S&P का मौजूदा आकलन यह है कि टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और नेतृत्व परिवर्तन का टाटा समूह की रेटिंग वाली कंपनियों के क्रेडिट प्रोफाइल पर **शॉर्ट टर्म में कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा**. हालांकि, आगे चलकर टाटा संस की भूमिका, स्वामित्व संरचना, पूंजी आवंटन और समूह की कंपनियों को समर्थन देने की नीति में किसी महत्वपूर्ण बदलाव पर रेटिंग एजेंसी की नजर रहेगी.
 


कच्चा तेल नरम, एशियाई बाजार मजबूत, फिर भी गिफ्ट निफ्टी कमजोर; आज कैसी होगी शुरुआत?

मंगलवार को सेंसेक्स 242.65 अंक यानी 0.33 फीसदी की गिरावट के साथ 72,529.07 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी इंडेक्स 64.05 अंक यानी 0.28 फीसदी की गिरावट के साथ 22,716.20 पर बंद हुआ.

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Published - Wednesday, 30 September, 2026
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Wednesday, 30 September, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र गिरावट के बावजूद मंगलवार को निचले स्तरों से मजबूत रिकवरी देखने को मिली. हालांकि, बुधवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 60 अंक कमजोर होकर 22,800 के आसपास कारोबार करता दिखा, जिससे बाजार की शुरुआत दबाव में रहने के संकेत मिल रहे हैं. कच्चे तेल की कीमतों में ऊपरी स्तरों से नरमी और एशियाई बाजारों में तेजी कुछ राहत दे सकती है, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव बाजार की दिशा के लिए अहम बने हुए हैं.

कल क्या था बाजार का हाल
मंगलवार को घरेलू बाजार में कारोबार की शुरुआत कमजोर रही. सेंसेक्स करीब 200 अंक गिरकर 72,633.68 पर खुला और दिन के दौरान 700 अंकों से अधिक फिसल गया. हालांकि, निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने से इंडेक्स ने मजबूत रिकवरी की और अंत में 242.65 अंक यानी 0.33 फीसदी की गिरावट के साथ 72,529.07 पर बंद हुआ. निफ्टी भी 22,732.45 पर खुलने के बाद 22,569.65 के निचले स्तर तक फिसला. बाद में इसमें भी निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिली और इंडेक्स 64.05 अंक यानी 0.28 फीसदी की गिरावट के साथ 22,716.20 पर बंद हुआ. इस तरह बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी का रुझान जरूर दिखा, लेकिन लगातार दूसरे दिन दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए.

अडानी पोर्ट्स, टाटा स्टील में खरीदारी

मंगलवार के कारोबार में चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली. सेंसेक्स में अडानी पोर्ट्स 4.39 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा. सनफार्मा 1.09 फीसदी, टाटा स्टील 1.05 फीसदी, कोटक महिंद्रा बैंक 1 फीसदी और एनटीपीसी 0.92 फीसदी चढ़े. इसके उलट टाइटन 2.72 फीसदी की गिरावट के साथ सेंसेक्स का सबसे बड़ा लूजर रहा. एचसीएल टेक 2.29 फीसदी, टीसीएस 1.72 फीसदी, अल्ट्राटेक सीमेंट 1.57 फीसदी और हिंदुस्तान यूनिलीवर 1.53 फीसदी टूटे.

निफ्टी में अडानी एंटरप्राइजेज 5.01 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे ज्यादा चढ़ा. अडानी पोर्ट्स 4.49 फीसदी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज 2.53 फीसदी, सनफार्मा 1.47 फीसदी और इन्फोसिस 1.22 फीसदी मजबूत हुए. वहीं, टाइटन 3 फीसदी, विप्रो 2.95 फीसदी, एचसीएल टेक 2.44 फीसदी, अपोलो हॉस्पिटल्स 2.27 फीसदी और टेक महिंद्रा 2.06 फीसदी कमजोर रहे.

गिफ्ट निफ्टी से शुरुआती दबाव के संकेत

बुधवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 60 अंक टूटकर 22,800 के आसपास कारोबार कर रहा था. ऐसे में घरेलू बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं. हालांकि, एशियाई बाजारों में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी बाजार के लिए कुछ सकारात्मक संकेत दे रही है.

Enrich Money के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय बाजार को शुरुआती कारोबार में राहत मिल सकती है. उनके अनुसार WTI क्रूड 89-90 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 95-96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है. एशियाई बाजारों में तेजी और टेक शेयरों में मजबूती भी बाजार को शुरुआती सहारा दे सकती है.

हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते कच्चे तेल में फिर उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर बाजार की रिकवरी को सीमित कर सकता है. टिकाऊ तेजी के लिए कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में नरमी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी अहम होगी.

कच्चे तेल की चाल भी अहम

कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को ऊपरी स्तरों से नरमी आई. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.6 फीसदी टूटकर 102.59 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. हालांकि, बुधवार सुबह इसमें करीब 1.25 फीसदी की तेजी के साथ कीमत 103.73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि लंबे समय तक ऊंची कीमतों से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है.

आज इन शेयरों पर भी रहेगी नजर

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की व्यापक दिशा के साथ कुछ कंपनियों से जुड़ी खबरें भी बुधवार के कारोबार में शेयरों की चाल प्रभावित कर सकती हैं. रामको सीमेंट्स ने आंध्र प्रदेश के जयंतीपुरम संयंत्र में क्षमता विस्तार पूरा किया है. जेएसडब्ल्यू सीमेंट के बोर्ड ने शिवा सीमेंट के विलय को मंजूरी दी है. एवलॉन टेक्नोलॉजीज में प्रमोटर समूह से जुड़े निवेशकों द्वारा ब्लॉक डील के जरिए 6 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने की खबर है.

टाटा स्टील ने टी स्टील होल्डिंग्स के 393.51 करोड़ शेयर 34 करोड़ डॉलर में खरीदे हैं. साथ ही एक कर मामले में कंपनी की देनदारी 427 करोड़ रुपये घटकर 1,259 करोड़ रुपये रह गई है. एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट ने अमोल जोशी को नया CFO नियुक्त किया है.

बीएसई में गोल्डमैन सैक्स और बीएनपी पारिबा फाइनेंशियल मार्केट्स ने कुल करीब 2,186 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जबकि यूटीआई म्युचुअल फंड और निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड ने खरीदारी की है. केएसबी को डांगोटे प्रोजेक्ट्स फ्री जोन एंटरप्राइज से 118 करोड़ रुपये तक का निर्यात ऑर्डर मिला है. वहीं, कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल से जुड़ी संयुक्त उद्यम इकाई के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने मध्यस्थता के फैसले को बरकरार रखा है.

बाजार के लिए आज क्या अहम?

कुल मिलाकर, मंगलवार की गिरावट के बाद निचले स्तरों से आई रिकवरी ने बाजार में खरीदारी की कोशिश जरूर दिखाई है, लेकिन बुधवार सुबह कमजोर गिफ्ट निफ्टी इस रिकवरी की स्थिरता को लेकर सतर्क संकेत दे रहा है. ऐसे में निवेशकों की नजर निफ्टी के 22,600-22,800 के दायरे, कच्चे तेल की कीमतों, एशियाई बाजारों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर रहेगी. बाजार की आगे की दिशा इन घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच बनने वाले संतुलन पर निर्भर करेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


यूएई भारत में करेगा 25 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश, पोर्ट, एनर्जी और स्पेस पर फोकस

2032 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य, भारत में पहले ही करीब 25 अरब डॉलर का निवेश कर चुका है यूएई

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत में करीब 25 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश करने की योजना बना रहा है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि संभावित निवेश के लिए पोर्ट, शिपबिल्डिंग, ऊर्जा, स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों की पहचान की गई है. यह प्रस्तावित निवेश भारत में यूएई के पहले से किए गए करीब 25 अरब डॉलर के निवेश के अतिरिक्त होगा.

यूएई ने भारत में लंबी अवधि में 100 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा है. वहीं, दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है.

पोर्ट और शिपबिल्डिंग पर विशेष जोर

समुद्री बुनियादी ढांचा यूएई के संभावित निवेश के प्रमुख क्षेत्रों में उभरकर सामने आया है. दोनों देशों ने सहयोग के छह क्षेत्रों को कवर करने वाले एक द्विपक्षीय वर्किंग ग्रुप की स्थापना पर सहमति जताई है. इनमें जहाजों का स्वामित्व, आधुनिक पोर्ट का विकास, शिपबिल्डिंग, जहाजों की मरम्मत और रखरखाव, जहाजों को तोड़ना और कंटेनर निर्माण शामिल हैं.

पीयूष गोयल ने कहा कि यूएई के निवेशक नए पोर्ट के निर्माण के साथ-साथ मौजूदा पोर्ट सुविधाओं के विस्तार में भी भाग ले सकते हैं. इसमें महाराष्ट्र में बन रहे वधावन पोर्ट के अलावा भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर मौजूद विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं.

सरकार के अनुसार, भारत और यूएई के बीच आर्थिक साझेदारी ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी और अन्य क्षेत्रों में लगातार विस्तार कर रही है. दोनों देश 200 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

ऊर्जा क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग

ऊर्जा सुरक्षा भी दोनों देशों के बीच बातचीत का एक प्रमुख विषय रही. भारत और यूएई रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं. भारत में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता बढ़ाने की संभावना का अध्ययन किया जा रहा है और इस क्षेत्र में यूएई की ओर से आगे निवेश किए जाने की उम्मीद है.

भारत यूएई से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और अन्य गैसों की आपूर्ति बढ़ाने की संभावनाएं भी तलाश रहा है. भारत तक गैस पहुंचाने के लिए समुद्र के नीचे पाइपलाइन बिछाने की व्यवहार्यता का भी अध्ययन किया जा रहा है. इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग का एक और नया क्षेत्र खुल सकता है.

भारत और यूएई के बीच व्यापक निवेश सहयोग के साथ ऊर्जा संबंध भी मजबूत हो रहे हैं. वित्त वर्ष 2024-25 में यूएई भारत के कच्चे तेल, LNG और LPG के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था.

स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप में निवेश की तैयारी

यूएई स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी भारत में निवेश बढ़ाने पर विचार कर रहा है. इसमें ऑर्बिटल डेब्रिस यानी अंतरिक्ष में मौजूद मलबे से संबंधित तकनीक विकसित करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं.

दोनों देशों ने पहले ही स्पेस इंडस्ट्री के विकास और कमर्शियल सहयोग को गहरा करने के क्षेत्रों की पहचान की थी. इसमें स्पेस स्टार्टअप्स को समर्थन देना भी शामिल है.

इसके अलावा, भारत और यूएई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती तकनीकों और फिनटेक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. बातचीत में भारत के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी क्षमताओं के साथ जोड़कर वित्तीय सेवाओं में सहयोग बढ़ाने के विकल्प भी शामिल हैं.

यूएई के निवेशक भारतीय इक्विटी बाजारों में भी निवेश के अवसर देख रहे हैं. वित्तीय क्षेत्र में सहयोग के तहत स्थानीय मुद्रा में लेनदेन, पेमेंट और मैसेजिंग सिस्टम तथा सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी से जुड़े मुद्दों पर भी काम किया जा रहा है.

CEPA के तहत व्यापार संबंध मजबूत करने पर जोर

भारत और यूएई के बीच निवेश और व्यापार बढ़ाने की ये बातचीत दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के तहत व्यापार संबंधों को और मजबूत करने के प्रयासों के बीच हो रही है.

सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार 101.25 अरब डॉलर रहा. वहीं, 2025 में दोनों देशों के बीच गैर-तेल व्यापार 76.2 अरब डॉलर रहा.

खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात पर भी सहयोग

निवेश और व्यापार के अलावा, दोनों देश खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और ब्रांडिंग जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं. इसका उद्देश्य भारतीय किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को खाद्य और समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने में मदद करना है.

इस तरह भारत और यूएई के बीच आर्थिक सहयोग अब पारंपरिक व्यापार और ऊर्जा क्षेत्रों से आगे बढ़कर पोर्ट, शिपबिल्डिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, फिनटेक और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों तक पहुंच रहा है.


बॉम्बे रेयॉन की दिवाला जांच: बिना बही-खातों के ₹483 करोड़ के सप्लायर बिल

भाग 2: बॉम्बे रेयॉन की दिवाला प्रक्रिया में उसके सप्लायर्स द्वारा किए गए कुल दावों में से आधे से अधिक का कंपनी के अपने रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो सका, इनमें से ₹317 करोड़ चार ट्रेडिंग कंपनियों के थे, जिनके पास कोई मिल नहीं है. संबंधित पक्ष के तौर पर चिन्हित किए गए केवल दो दावे प्रमोटर्स से जुड़े थे, और दोनों का पूरा भुगतान किया गया, जबकि 2,027 कर्मचारियों को प्रति रुपये पर 14 पैसे की वसूली हुई. यह वही कंपनी है, जिसकी खरीद के आधार पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कर्ज दिया, तीन बार पुनर्गठन किया और अंततः ₹1,300 करोड़ से अधिक की रकम को बट्टे खाते में डाल दिया.

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Published - Tuesday, 29 September, 2026
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Tuesday, 29 September, 2026
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पलक शाह

उन बही-खातों की अंदरूनी कहानी, जिनका मिलान नहीं हो सका

जब कोई मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ढह जाती है, तो उसके सप्लायर बिल इस बात की कहानी बताते हैं कि उसने क्या खरीदा — धागा, डाई, केमिकल और वे चीजें जो कपड़े में इस्तेमाल होती हैं. ये सप्लायर्स दिवाला प्रक्रिया में उस रकम के लिए दावे दाखिल करते हैं, जो अभी उन्हें मिलनी बाकी होती है, और एक रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल हर दावे का कंपनी के अपने बही-खातों और दस्तावेजों से मिलान करता है.

बॉम्बे रेयॉन फैशंस लिमिटेड में इस बिलिंग का आधे से अधिक हिस्सा जांच में टिक नहीं सका.

सप्लायर्स ने ₹853.04 करोड़ के दावे पेश किए. जब 31 अगस्त 2023 को सूची को अंतिम रूप दिया गया, तो ₹314.41 करोड़ के दावे स्वीकार किए गए. ₹483.10 करोड़ को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया गया.

किसी दावे को खारिज करना उस भुगतान में कटौती नहीं है, जिसकी उम्मीद दिवाला प्रक्रिया में हर क्रेडिटर करता है. यह उस कर्ज को पहली जगह मान्यता देने से इनकार है: कंपनी के रिकॉर्ड में बिल में बताए गए लेनदेन का कोई उल्लेख नहीं है. भुलोक इंटरनेशनल रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दाखिल किए गए ऐसे ही एक खारिज दावे के खिलाफ रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने साफ शब्दों में कारण दर्ज किया, इसे "बही-खातों में उपलब्ध नहीं होने और दस्तावेजों से प्रमाणित नहीं किए जाने" के कारण स्वीकार नहीं किया गया. चार सबसे बड़े खारिज दावों के लिए फाइल में कोई कारण दर्ज नहीं है.

यह वही कंपनी है, जिसकी खरीद और बिक्री के आधार पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एक कंसोर्टियम ने हजारों करोड़ रुपये का कर्ज दिया, तीन बार कर्ज का पुनर्गठन किया और अंततः सार्वजनिक धन के ₹1,300 करोड़ से अधिक को बट्टे खाते में डाल दिया.

ये आंकड़े भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड के पास दाखिल किए गए क्रेडिटर्स की सूचियों से लिए गए हैं, जो सार्वजनिक दस्तावेज हैं. इनकी पहले रिपोर्टिंग नहीं हुई है. ये ऐसे समय सामने आए हैं जब सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) ने कंपनी के मामलों की जांच शुरू की है.

जनार्दन अग्रवाल और प्रशांत अग्रवाल ने बॉम्बे रेयॉन को प्रमोट किया था, जिसकी महाराष्ट्र, बेंगलुरु, केरल और इंदौर में टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स थीं. प्रमोटर्स कर्ज चुकाने में विफल रहे और उन्हें कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग और कई राहत पैकेज मिले.

SFIO की जांच और बैंक का रेस्क्यू

BW द्वारा देखे गए 5 अगस्त 2026 के समन में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 212(1)(c) के तहत 30 अक्टूबर 2025 को जांच का आदेश दिया था. SFIO के निदेशक ने दो इंस्पेक्टरों के साथ एक जांच अधिकारी नियुक्त किया है और कंपनी से जुड़े लोगों को नई दिल्ली में पूछताछ के लिए समन भेजना शुरू कर दिया है.

जांचकर्ता एक लंबी कहानी के अंत में पहुंचे हैं. 2013 से 2017 के बीच SBI के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने BRFL को तीन बार बचाया: 2013 में कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग, 2016 में ₹934.26 करोड़ के कर्ज और बकाया ब्याज को इक्विटी में बदलना और 2017 में S4A पैकेज, जिसके तहत लेंडर्स को कंपनी की करीब 40% हिस्सेदारी मिली. उस आखिरी रेस्क्यू के 15 महीने बाद SBI ने BRFL में अपनी ₹2,260.79 करोड़ की एक्सपोजर को JM Financial ARC को ₹900 करोड़ में बेच दिया.

हर रेस्क्यू इसी धारणा पर आधारित था कि पैसा एक चल रहे टेक्सटाइल कारोबार के जरिए आ-जा रहा है. दिवाला रिकॉर्ड इस बारे में एक कठिन सवाल उठाते हैं कि वास्तव में पैसा कहां जा रहा था और किसके पास जा रहा था.

चार दावेदार, ₹317 करोड़, केवल ₹77 लाख मान्यता प्राप्त

खारिज किए गए कुल दावों में से दो-तिहाई हिस्से के लिए चार नाम जिम्मेदार हैं.

दावेदार                           दावा                          स्वीकार किया गया

कृष्णा कंपनी                   ₹122.11 करोड़               शून्य

ग्रीन शीड एंटरप्राइजेज      ₹102.79 करोड़               शून्य

प्रध्वी मल्टीट्रेड                 ₹59.13 करोड़                 शून्य

दशबाहु मल्टीट्रेड             ₹33.07 करोड़                 ₹77.37 लाख

इन चारों ने मिलकर एक टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर से ₹317 करोड़ की मांग की और उनके बीच केवल ₹77 लाख की राशि को मान्यता दी गई.

ये टेक्सटाइल मिलें नहीं हैं

मुंबई में पंजीकृत प्रध्वी मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के कंपनी रिकॉर्ड के मुताबिक, इसे फरवरी 2011 में ₹2 करोड़ की पेड-अप कैपिटल के साथ शुरू किया गया था. इसे होलसेल और कमीशन-एजेंट श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है और इसका पता रूम नंबर 12, माता रामदेवी निवास, एन.एस. रोड, मुलुंड वेस्ट है. इसके निदेशक सुधीर विजय गोयल और राजपाल सिंह दौधर हैं; इसकी आखिरी दाखिल बैलेंस शीट मार्च 2020 को समाप्त हुए वर्ष की है और CRISIL ने दर्ज किया था कि इसने रेटिंग एजेंसी के साथ सहयोग करना बंद कर दिया था.

मुंबई में पंजीकृत ग्रीन शील्ड एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना जुलाई 2008 में ₹2 करोड़ की पेड-अप कैपिटल के साथ हुई थी. इसे "बिजनेस एक्टिविटीज एन.ई.सी." के तहत वर्गीकृत किया गया है और इसका पता रूम नंबर 5, हेतल अपार्टमेंट, एन.एस. रोड, मुलुंड वेस्ट है, यही सड़क. इसके निदेशक सुधीर विजय गोयल हैं, जो प्रध्वी के बोर्ड में भी हैं, और आरती आशीष कनोडिया हैं. ग्रीन शील्ड की मौजूदा स्थिति "Under CIRP" है: यानी वह खुद भी दिवाला प्रक्रिया में जा चुकी है.

₹2 करोड़ की पूंजी वाली दो कंपनियां, एक ही निदेशक और मुलुंड वेस्ट की एक ही सड़क साझा करती हैं, जिन्होंने एक मुंबई की टेक्सटाइल कंपनी से ₹162 करोड़ का दावा किया और कुछ भी स्वीकार नहीं किया गया.

इसकी तुलना उन सप्लायर्स से करें जिनके दावे स्वीकार किए गए: मिलें, डाई वर्क्स, केमिकल कंपनियां, ट्रांसपोर्टर्स, पैकेजिंग फर्म्स, ऐसे कारोबार जिनके पास प्लांट और पेरोल हैं.

इसमें एक और कनेक्शन है. सुधीर गोयल नाम का एक व्यक्ति बॉम्बे रेयॉन की कर्मचारी क्रेडिटर्स की अपनी सूची में भी दिखाई देता है, जिसमें ₹22.81 लाख का दावा पूरी तरह स्वीकार किया गया. क्या यह वही व्यक्ति है जो प्रध्वी मल्टीट्रेड और ग्रीन शील्ड का निदेशक है? एक सुधीर गोयल को कर्मचारी के रूप में और दूसरे को बॉम्बे रेयॉन से पैसे का दावा करने वाली कंपनी के निदेशक के रूप में दिखाया गया है. सूत्रों का कहना है कि दोनों एक ही व्यक्ति हो सकते हैं.

वह अवधि जब ₹472 करोड़ ध्वस्त हो गए

दावों को धीरे-धीरे खारिज नहीं किया गया. वे एक ही बार में बड़ी संख्या में खारिज हुए.

18 नवंबर 2022 की सूची में सप्लायर के ₹624.89 करोड़ के दावे अभी भी "सत्यापन के तहत" दर्ज थे और केवल ₹74,43,673 को खारिज किया गया था. चारों सबसे बड़े दावे, कृष्णा कंपनी के ₹122.11 करोड़, ग्रीन शीड एंटरप्राइजेज के ₹102.79 करोड़, प्रध्वी मल्टीट्रेड के ₹59.13 करोड़ और दशबाहु मल्टीट्रेड के ₹32.30 करोड़, इसी कॉलम में लंबित थे.

13 फरवरी 2023 की अगली सूची तक स्वीकार नहीं किए गए दावे बढ़कर ₹471.94 करोड़ हो गए थे. इसी अवधि में नवंबर में एक सामान्य सप्लायर के रूप में दर्ज और संबंधित पक्ष नहीं मानी गई स्कॉट्स प्लांटेशंस की ₹65.70 करोड़ की दावे की राशि को अलग श्रेणी में ले जाकर संबंधित पक्ष के तौर पर चिन्हित किया गया.

नवंबर 2022 के मध्य और फरवरी 2023 के मध्य के बीच हुई किसी जांच के कारण करीब आधा अरब रुपये की सप्लायर बिलिंग खारिज कर दी गई और प्रमोटर से जुड़ी एक कंपनी को दोबारा वर्गीकृत किया गया. वह जो भी था, बही-खातों का मिलान, लेनदेन का ऑडिट, फॉरेंसिक समीक्षा, उसके निष्कर्ष कभी सार्वजनिक नहीं किए गए.

संबंधित के तौर पर चिन्हित दो दावे, दोनों प्रमोटर परिवार से

क्रेडिटर की सूचियों में एक कॉलम है, जिसका शीर्षक है "क्या संबंधित पक्ष?" इसका एक कारण है. दिवाला कानून के तहत संबंधित पक्षों के साथ अलग व्यवहार किया जाता है: संबंधित पक्ष के वित्तीय क्रेडिटर के पास क्रेडिटर्स की समिति में वोट नहीं होता और संबंधित पक्ष के लेनदेन वे चीजें हैं, जिनकी जांच रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को प्राथमिकता, कम मूल्यांकन या धोखाधड़ी वाले लेनदेन के लिए करनी होती है.

हर एनेक्सर में 413 ऑपरेशनल क्रेडिटर्स, 36 सरकारी विभाग, पांच अनसिक्योर्ड फाइनेंशियल क्रेडिटर्स, 2,027 वर्कमेन और 423 कर्मचारी, यह कॉलम ठीक दो दावों के लिए भरा गया है. दोनों अग्रवाल परिवार से संबंधित हैं.

पहला दावा अपनी अलग श्रेणी में है. स्कॉट्स प्लांटेशंस प्राइवेट लिमिटेड, कर्नाटक की एक कंपनी, जिसमें BRFL के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशांत जनार्दन अग्रवाल निदेशक हैं, ने 23 जून 2022 को ₹65.69 करोड़ का दावा किया. रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने NIL स्वीकार किया, पूरी राशि को अस्वीकार के रूप में दर्ज किया और दावेदार को संबंधित पक्ष: हां के रूप में चिन्हित किया. यह दावा पहले सामान्य सप्लायर्स में जून 2022 की सूची में क्रम संख्या 150 पर दिखाई दिया था, बाद में इसे वहां से हटा दिया गया.

स्कॉट्स प्लांटेशंस की अपनी भी परेशानियां हैं. इसे JM Financial Asset Reconstruction Company की ओर से रिकवरी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, यही वह ARC है जिसने 2018 में SBI की BRFL में ₹2,260.79 करोड़ की एक्सपोजर को ₹900 करोड़ में खरीदा था और जिसके ₹6,080 करोड़ के दावे ने बाद में उसे 90.80% वोट दिए, जिससे BRFL को लिक्विडेशन में भेजा गया.

दूसरा चिन्हित दावा कर्मचारियों की सूची में है. बॉम्बे रेयॉन के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अमन जनार्दन अग्रवाल ने ₹2,15,15,008 का कर्मचारी दावा दाखिल किया, जिसे संबंधित पक्ष के तौर पर चिन्हित किया गया और पूरी तरह स्वीकार किया गया. प्रशांत अग्रवाल ने ₹1,03,78,125 का कर्मचारी दावा दाखिल किया, जिसे भी पूरी तरह स्वीकार किया गया.

अब इसकी तुलना शॉप फ्लोर से करें. 2,027 वर्कमेन ने बकाया भुगतान के रूप में ₹29.93 करोड़ का दावा किया. ₹4.10 करोड़ स्वीकार किए गए  यानी प्रति रुपये करीब 14 पैसे. बाकी अधिकांश राशि को आकस्मिक के रूप में वर्गीकृत किया गया है, क्योंकि बॉम्बे रेयॉन फैशंस लिमिटेड कामगार संघ के जरिए दाखिल बेंगलुरु प्रोसेसिंग मिल के कर्मचारियों के दावे अभी असिस्टेंट लेबर कमिश्नर के सामने लंबित हैं.

दो प्रमोटर्स, उनके बीच ₹3.19 करोड़, पूरी तरह स्वीकार किए गए. दो हजार कर्मचारी, ₹29.93 करोड़, जिनमें से ₹4.10 करोड़ स्वीकार किए गए.

और वे दो सब्सिडियरीज जिन्हें चिन्हित नहीं किया गया

यही कॉलम फाइल में कहीं और एक विपरीत कहानी बताता है.

BRFL इटालिया, बॉम्बे रेयॉन होल्डिंग्स लिमिटेड के जरिए रखी गई इटली की सब्सिडियरी, ने ₹55.52 करोड़ का दावा किया. रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने ₹1 की सांकेतिक राशि स्वीकार की और दर्ज किया कि कॉरपोरेट डेटर की बही-खातों में कोई बकाया नहीं था और यह मामला अदालतों के सामने विवादित था, जबकि बाकी राशि को आकस्मिक के रूप में वर्गीकृत किया गया.

BRFL टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड, जिसे अगस्त 2020 में BRFL का तारापुर उपक्रम हासिल करने के लिए बनाया गया था और जिसका 70% स्वामित्व BRFL के पास था, ने ₹7.46 करोड़ का दावा किया. इसे शून्य पर स्वीकार किया गया और दर्ज किया गया कारण चौंकाने वाला है. मिलान किए गए आंकड़े सब्सिडियरी को भेजे गए थे, सबसे हाल में 11 जुलाई 2023 को ईमेल के जरिए, जिसमें सब्सिडियरी द्वारा BRFL को देय राशि दिखाई गई थी और कभी कोई जवाब नहीं मिला.

दोनों को संबंधित पक्ष नहीं माना गया. चेयरमैन और उसके भाई द्वारा निर्देशित एक कंपनी की पहचान करने के बाद, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने किस आधार पर BRFL की दो सब्सिडियरीज को असंबंधित दर्ज किया? इसका जवाब केवल सतीश कुमार गुप्ता दे सकते हैं और यह उन शुरुआती सवालों में से एक है, जो SFIO और CBI को उनसे पूछने चाहिए.

टैक्स विभाग का ₹173 करोड़ का दावा और धारा 66 का संकेत

सरकार के दावे अपनी अलग कहानी बताते हैं. विभागों ने कुल ₹742.12 करोड़ के 36 दावे दाखिल किए.

सबसे बड़ा दावा डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ GST इंटेलिजेंस, मुंबई का है, जिसने 2 सितंबर 2022 को ₹1,73,20,06,258 का दावा दाखिल किया. इसे पूरी तरह स्वीकार किया गया.

यह अगस्त 2021 में DGGI द्वारा BRFL के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशांत अग्रवाल को गिरफ्तार किए जाने के समय लगाए गए ₹55.8 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट फ्रॉड के आरोप से तीन गुना से भी अधिक है.

इसके साथ लगी टिप्पणी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी रकम. दावा विभाग द्वारा दाखिल DRC-01A के आधार पर स्वीकार किया गया था, यानी देय निर्धारित टैक्स की सूचना और यह "इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 की धारा 43 से 51 और 66 के तहत जांच के अधीन" था. धारा 66 धोखाधड़ी वाले कारोबार से संबंधित प्रावधान है.

कर्मचारियों का बकाया इसी सूची में है: बेंगलुरु प्रोविडेंट फंड कार्यालय को ₹23.68 करोड़, EPFO कांदिवली को ₹23.30 करोड़, EPFO ठाणे द्वारा दावा किए गए ₹57.47 करोड़ में से ₹18.51 करोड़ स्वीकार किए गए, ESIC पीण्या को ₹10.16 करोड़ और अन्य. दो मामलों में EPFO ने कंपनी के बैंक खातों को अटैच किया था; मार्च 2023 में NCLT द्वारा आदेश दिए जाने के बाद कि प्रोविडेंट फंड योगदान के बराबर रकम उन शेष राशियों से अलग रखकर जमा की जाए, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने उस आदेश के खिलाफ NCLAT में अपील की.

एक ऐसी देनदारी भी है, जो बही-खातों में दिखाई नहीं देती थी. मैनेजमेंट ने रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को बताया कि एडवांस और EPCG लाइसेंस के बदले करीब ₹29.80 करोड़ की कस्टम ड्यूटी बकाया थी, लेकिन नोट में दर्ज है कि यह कंपनी की बही-खातों या वार्षिक रिपोर्ट में दर्ज नहीं है.

क्या ये दावेदार वास्तविक हैं? इसकी जांच जरूरी है

हर बड़े दावे को खारिज नहीं किया गया और सूची यह स्पष्ट करती है कि वास्तविक क्रेडिटर्स कौन थे.

केडिया समूह सबसे बड़ा सप्लायर ब्लॉक है: केडिया ब्रदर्स ने ₹162.53 करोड़ का दावा किया और ₹105.13 करोड़ स्वीकार किए गए; केडिया टेक्सफैब एंड इंडस्ट्रीज ने ₹44.49 करोड़ का दावा किया और ₹21.96 करोड़ स्वीकार किए गए; केडिया एंटरप्राइजेज ने ₹4.95 करोड़ का दावा किया. वित्तीय कर्ज के तौर पर दाखिल छोटे दावों के साथ, एक परिवार के समूह का BRFL में ₹200 करोड़ से अधिक का पैसा लगा हुआ था.

यार्न सप्लायर्स भी सूची में हैं: वीएम यार्न्स ने ₹29.75 करोड़ का दावा किया और ₹12.75 करोड़ स्वीकार किए गए; चिरंजी लाल यार्न्स प्राइवेट लिमिटेड ने ₹5.32 करोड़ का दावा किया; और चिरंजी लाल यार्न ट्रेडर्स, वह छोटा ट्रेडर जिसके ₹1.61 करोड़ के बकाया ने अंततः BRFL को दिवाला प्रक्रिया में पहुंचाया, का ₹97.87 लाख का दावा स्वीकार किया गया.

इन सबके मुकाबले, दो सिक्योर्ड फाइनेंशियल क्रेडिटर्स JM Financial ARC और एक्सिस बैंक  ने ₹6,690.98 करोड़ का दावा किया, जो अंततः स्वीकार किए गए ₹7,358.95 करोड़ का 90.92% था.

गणित को एक साथ देखना जरूरी है. केडिया समूह जैसे वास्तविक सप्लायर्स ने ₹200 करोड़ से अधिक की रकम पर कटौती झेली. कर्मचारियों को ₹29.93 करोड़ में से ₹4.10 करोड़ की वसूली हुई. प्रोविडेंट फंड और ESIC कार्यालय अभी भी करोड़ों रुपये की वसूली के लिए प्रयासरत हैं. प्रमोटर्स के अपने कर्मचारी दावों का पूरा भुगतान किया गया. और ₹317 करोड़ की बिलिंग चार ऐसी कंपनियों से आई, जिनके पास कोई मिल नहीं है.

SFIO और CBI को क्या पूछना चाहिए

किसी दावे को खारिज करने का मतलब केवल इतना है कि रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल इस बात से संतुष्ट नहीं था कि कर्ज देय था. लेकिन किसी कंपनी की अपनी दिवाला प्रक्रिया के भीतर ₹483 करोड़ की सप्लायर बिलिंग का सत्यापन में विफल होना स्पष्टीकरण की मांग करता है और ये स्पष्टीकरण उन दस्तावेजों में मौजूद हैं, जिन्हें जांचकर्ता हासिल कर सकते हैं.

कृष्णा कंपनी, ग्रीन शीड एंटरप्राइजेज, प्रध्वी मल्टीट्रेड और दशबाहु मल्टीट्रेड के दावे किन आधारों पर खारिज किए गए और इन कंपनियों ने क्या सप्लाई किया था?

नवंबर 2022 और फरवरी 2023 के बीच क्या जांच की गई और क्या ट्रांजैक्शन ऑडिट किया गया था?

क्या इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 43, 45 या 66 के तहत NCLT के समक्ष आवेदन दाखिल किए गए थे और DGGI के दावे पर रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के फ्लैग का क्या हुआ?

स्कॉट्स प्लांटेशंस का ₹65.70 करोड़ का दावा किससे संबंधित था और चेयरमैन के ₹2.15 करोड़ के कर्मचारी दावे का आधार क्या था?

और उन दोनों को चिन्हित करने के बाद, 70% स्वामित्व वाली एक भारतीय सब्सिडियरी और एक इटली की सब्सिडियरी को दोनों को असंबंधित क्यों दर्ज किया गया?

 

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 

 


त्योहारी सीजन से पहले फ्लिपकार्ट की बड़ी तैयारी, 1.4 करोड़ क्यूबिक फीट बढ़ी वेयरहाउसिंग क्षमता

लेह, कारगिल और पूर्वोत्तर के कई नए इलाकों तक पहुंचा ‘द बिग बिलियन डेज’; ईकार्ट नेटवर्क में जुड़े 750 से ज्यादा नए पिन कोड

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
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त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली ई-कॉमर्स मांग को संभालने के लिए फ्लिपकार्ट ने अपनी सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार किया है. कंपनी के लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म ईकार्ट ने 1.4 करोड़ क्यूबिक फीट नई वेयरहाउसिंग क्षमता जोड़ी है. इससे उसकी कुल स्टोरेज क्षमता में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ ही 750 से ज्यादा नए पिन कोड को नेटवर्क में जोड़ा गया है, जिनमें लेह, कारगिल और पूर्वोत्तर भारत के कई ऐसे इलाके शामिल हैं, जहां अब तक लॉजिस्टिक्स की पहुंच सीमित रही है.

कंपनी के मुताबिक, इस विस्तार का उद्देश्य आगामी ‘द बिग बिलियन डेज’ और त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ने वाली मांग के बीच ऑर्डर प्रोसेसिंग और डिलीवरी क्षमता को मजबूत करना है. तकनीक और ऑटोमेशन में किए गए सुधारों के बाद ईकार्ट की पीक प्रोसेसिंग क्षमता में भी 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है.

8,200 से ज्यादा लॉजिस्टिक्स सुविधाएं

तेज डिलीवरी की मांग को देखते हुए ईकार्ट ने देशभर में 900 से अधिक अतिरिक्त डिलीवरी हब जोड़े हैं. इसके बाद ईकार्ट के फुलफिलमेंट सेंटर, सॉर्टेशन हब और लास्ट-माइल डिलीवरी ऑपरेशंस समेत कुल नेटवर्क सुविधाओं की संख्या 8,200 से अधिक हो गई है.

इसके अलावा, 150 से अधिक शहरों में फ्लिपकार्ट मिनट्स के करीब 1,200 माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर संचालित हो रहे हैं. कंपनी का कहना है कि इन सुविधाओं के विस्तार से त्योहारी सीजन में सेम-डे और नेक्स्ट-डे डिलीवरी को सपोर्ट मिलेगा.

2.5 करोड़ से ज्यादा उत्पाद पहले से स्टॉक

त्योहारी मांग के दौरान ऑर्डर्स की तेजी से पूर्ति के लिए ईकार्ट के फुलफिलमेंट सेंटरों में एमएसएमई, छोटे विक्रेताओं, बुनकरों और कारीगरों के 2.5 करोड़ से ज्यादा उत्पाद पहले ही पहुंचाए जा चुके हैं. इसके अलावा, प्रमुख सेलर हब्स पर 70 नए पिक-अप स्टेशन जोड़े गए हैं. इनका उद्देश्य सेलर्स से उत्पादों के उठाव और फुलफिलमेंट में लगने वाले समय को कम करना है.

ईकार्ट के 3पीएल यानी थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स फ्रेंचाइज नेटवर्क का भी विस्तार किया गया है. कंपनी के अनुसार, लॉन्च के दो महीने के भीतर यह नेटवर्क दोगुना होकर 600 तक पहुंच गया है. इसके जरिए फ्लिपकार्ट मार्केटप्लेस के बाहर काम करने वाले सेलर्स और एमएसएमई को भी देशभर में लॉजिस्टिक्स सेवाओं का इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा.

लेह, कारगिल और पूर्वोत्तर के नए इलाकों तक पहुंच

फ्लिपकार्ट ने अपने नेटवर्क में 750 से अधिक नए पिन कोड जोड़े हैं. इनमें लद्दाख के लेह और कारगिल के अलावा राजस्थान और मध्य प्रदेश के दूरदराज के इलाके तथा पूर्वोत्तर के कई क्षेत्र शामिल हैं.

पूर्वोत्तर में मिजोरम के कमलानगर और जामुआंग, मेघालय के तुरासिटी, रेसुबेलपारा और राजाबाला तथा अरुणाचल प्रदेश के बोमडिला और तेजू जैसे इलाकों को नेटवर्क में जोड़ा गया है. कंपनी के मुताबिक, इन क्षेत्रों में इस साल पहली बार ‘द बिग बिलियन डेज’ की पहुंच होगी.

डिलीवरी पार्टनर्स के लिए बीमा और इंसेंटिव

त्योहारी सीजन के दौरान डिलीवरी नेटवर्क को मजबूत बनाए रखने के लिए फ्लिपकार्ट ने अपने डिलीवरी पार्टनर्स यानी विशमास्टर्स के लिए बीमा और कमाई से जुड़े प्रावधान भी किए हैं. कंपनी के अनुसार, प्रत्येक विशमास्टर को टर्म लाइफ इंश्योरेंस, पर्सनल एक्सीडेंट कवर और मेडिक्लेम की सुविधा दी जाती है. इसके अलावा, विशमास्टर्स और उनके परिवार के लिए ‘डॉक्टर ऑन कॉल’ सेवा भी उपलब्ध कराई गई है.

इस त्योहारी सीजन में विशमास्टर्स को जॉइनिंग और रिटेंशन बोनस के साथ रेफरल इंसेंटिव का भी लाभ मिलेगा. वहीं, ‘फ्लिपकार्ट डिलीवरी पार्टनर्स ऐप’ के जरिए एआई आधारित बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया जाता है. कंपनी के मुताबिक, इस प्रक्रिया से 10 मिनट से कम समय में ऑनबोर्डिंग पूरी की जा सकती है. ऐप के जरिए नए डिलीवरी पार्टनर्स को पहली शिफ्ट से पहले जरूरी ट्रेनिंग भी दी जाती है.

फ्लिपकार्ट समूह के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और सप्लाई चेन प्रमुख हेमंत बद्री ने कहा, “हर साल ‘द बिग बिलियन डेज’ ग्राहकों की उम्मीदों को नई ऊंचाई देता है, खासकर तेज डिलीवरी और व्यापक पहुंच के मामले में. इस साल लेह और कारगिल के ग्राहक पहली बार बिग बिलियन डेज का अनुभव करेंगे. ईकार्ट और फ्लिपकार्ट मिनट्स को मिलाकर हमारे पास अब 8,200 से अधिक सुविधाएं हैं, जो हमें ज्यादा ग्राहकों तक त्योहारी खरीदारी पहुंचाने और विक्रेताओं को नए खरीदारों तक पहुंचने में मदद करती हैं.”

2.5 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर

फ्लिपकार्ट ने इस त्योहारी सीजन के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 2.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने की भी घोषणा की है. इनमें करीब 75,000 अवसर ऐसे लोगों के लिए हैं, जो पहली बार वर्कफोर्स में शामिल हो रहे हैं.

कंपनी के अनुसार, इन नए रोजगार अवसरों में करीब 60 प्रतिशत लास्ट-माइल डिलीवरी से जुड़े हैं. यह त्योहारी मांग के दौरान डिलीवरी नेटवर्क में बढ़ने वाली जरूरत के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 बाजारों में फ्लिपकार्ट मिनट्स के विस्तार से भी जुड़ा है.