इस हफ्ते प्राइमरी मार्केट में धमाल, 7 कंपनियां जुटाएंगी 6,400 करोड़ रुपये से ज्यादा

लगातार आ रहे IPO से साफ है कि प्राइमरी मार्केट में कंपनियों की फंड जुटाने की गतिविधियां तेज बनी हुई हैं. अब निवेशकों की नजर इन इश्यू की कीमत, कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और बाजार की स्थितियों पर रहेगी, जो इन IPO को मिलने वाले रिस्पॉन्स को तय करेंगे.

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
BWHindi

प्राइमरी मार्केट में अगले हफ्ते जबरदस्त हलचल देखने को मिलेगी. 17 से 21 अगस्त के बीच 7 कंपनियां अपने IPO लॉन्च करने जा रही हैं और इनके जरिए 6,400 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने की तैयारी है. Horizon Industrial Parks और Lalita Jewellery Mart जैसे बड़े नामों के साथ ज्वैलरी, एंटरटेनमेंट, एसेट मैनेजमेंट और अन्य सेक्टरों की कंपनियां भी निवेशकों के सामने अपना इश्यू लेकर आएंगी. लगातार नए इश्यू आने से प्राइमरी मार्केट में निवेशकों के लिए कई विकल्प खुलेंगे.

आज खुलेंगे दो बड़े IPO

हफ्ते की शुरुआत Horizon Industrial Parks और Lalita Jewellery Mart के IPO के साथ होगी. Blackstone समर्थित Horizon Industrial Parks 2,600 करोड़ रुपये का IPO लेकर आ रही है. यह पूरी तरह से फ्रेश इश्यू होगा और कंपनी जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी. कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड 57 से 60 रुपये प्रति शेयर तय किया है. इसी दिन Lalita Jewellery Mart का 1,700 करोड़ रुपये का IPO भी खुलेगा. इसमें 1,200 करोड़ रुपये तक का फ्रेश इश्यू और 500 करोड़ रुपये तक का Offer For Sale यानी OFS शामिल है. कंपनी ने इसका प्राइस बैंड 190 से 201 रुपये प्रति शेयर तय किया है.

18 अगस्त को इन कंपनियों की एंट्री

18 अगस्त को Shankesh Jewellers और Sunshine Pictures के IPO निवेशकों के लिए खुलेंगे. Shankesh Jewellers की योजना करीब 367 करोड़ रुपये जुटाने की है और इसके IPO का प्राइस बैंड 88 से 93 रुपये प्रति शेयर रखा गया है. वहीं, फिल्म और टेलीविजन प्रोड्यूसर Sunshine Pictures करीब 282 करोड़ रुपये का IPO लेकर आएगी. कंपनी ने इश्यू का प्राइस बैंड 342 से 360 रुपये प्रति शेयर तय किया है.

19 और 20 अगस्त को भी रहेगा IPO का जोर

19 अगस्त को Gaja Alternative Asset Management का 550 करोड़ रुपये का IPO खुलेगा. इसमें 450 करोड़ रुपये तक का फ्रेश इश्यू और 100 करोड़ रुपये तक का OFS शामिल होगा. कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड 152 से 160 रुपये प्रति शेयर तय किया है. इसके बाद 20 अगस्त को Tempsens Instruments का IPO खुलेगा. कंपनी 95 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू लाएगी, जबकि इसके साथ 1.85 करोड़ शेयरों का OFS भी शामिल होगा. कंपनी के प्राइस बैंड की घोषणा की जानी है.

21 अगस्त को Augmont Enterprises का IPO

हफ्ते का आखिरी IPO 21 अगस्त को Augmont Enterprises का होगा. कंपनी की योजना करीब 825 करोड़ रुपये जुटाने की है. इसमें 620 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और 205 करोड़ रुपये का OFS शामिल है. कंपनी के IPO का प्राइस बैंड मंगलवार को घोषित किए जाने की उम्मीद है.

अगले हफ्ते के बाद भी नहीं थमेगी रफ्तार

IPO बाजार की यह हलचल अगले हफ्ते तक सीमित नहीं रहेगी. Skyways Air Services भी 24 अगस्त को करीब 583 करोड़ रुपये का IPO लॉन्च करने की तैयारी में है. इन नए इश्यू के साथ वर्ष 2026 में IPO बाजार में उतरने वाली कंपनियों की संख्या बढ़कर करीब 55 तक पहुंचने की उम्मीद है. लगातार आ रहे IPO से साफ है कि प्राइमरी मार्केट में कंपनियों की फंड जुटाने की गतिविधियां तेज बनी हुई हैं. अब निवेशकों की नजर इन इश्यू की कीमत, कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और बाजार की स्थितियों पर रहेगी, जो इन IPO को मिलने वाले रिस्पॉन्स को तय करेंगे.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


LIC के दम पर OFS से रिकॉर्ड फंड जुटाव, 2026 में अब तक 62,730 करोड़ रुपये आए

वर्ष 2026 में अब तक 23 OFS सौदों के जरिए 20 कंपनियों ने करीब 62,730 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस रिकॉर्ड जुटाव में LIC का योगदान सबसे अहम रहा है

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
BWHindia

स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए ऑफर फॉर सेल (OFS) से रकम जुटाने का सिलसिला वर्ष 2026 में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है. अब तक हुए 23 OFS सौदों के जरिए 20 कंपनियों ने करीब 62,730 करोड़ रुपये जुटाए हैं. आंकड़े उपलब्ध होने के बाद OFS के जरिए जुटाई गई यह सबसे बड़ी रकम बताई जा रही है. इस उपलब्धि में भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC की हिस्सेदारी बिक्री का सबसे बड़ा योगदान रहा है.

सरकारी कंपनियों से आया सबसे ज्यादा पैसा

इस साल OFS के जरिए जुटाई गई कुल रकम में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी 93 फीसदी से अधिक रही है. इन कंपनियों से करीब 58,425.12 करोड़ रुपये जुटाए गए. इस दौरान इंडियन रेलवे फाइनैंस कॉर्पोरेशन यानी IRFC, आंध्र सीमेंट्स और ईस्ट इंडिया ड्रम्स एंड बैरल्स ने दो-दो बार OFS का सहारा लिया.

LIC की हिस्सेदारी बिक्री बनी सबसे बड़ा फैक्टर

सरकार ने इस महीने की शुरुआत में LIC में OFS के जरिए बड़ी हिस्सेदारी बेची थी. विनिवेश से अब तक जुटाई गई कुल रकम में OFS का योगदान 98 फीसदी से अधिक रहा है. करीब 51,787.29 करोड़ रुपये OFS के जरिए जुटाए गए, जिसमें अकेले LIC का योगदान लगभग 31,514.89 करोड़ रुपये रहा. यही वजह है कि इस साल OFS से रिकॉर्ड फंड जुटाने में LIC की हिस्सेदारी बिक्री को अहम माना जा रहा है.

सफल OFS से बढ़ा सरकार का भरोसा

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक मई में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और कोल इंडिया में हिस्सेदारी बिक्री की सफलता के बाद केंद्र सरकार का OFS के जरिए और फंड जुटाने का भरोसा बढ़ा. सरकार राजस्व बढ़ाने और विनिवेश लक्ष्य हासिल करने के लिए इस माध्यम का लगातार इस्तेमाल कर रही है.

कच्चे तेल की तेजी ने भी बढ़ाई फंड की जरूरत

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई. होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा. कच्चे तेल की महंगाई से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के आयात बिल पर असर पड़ता है, जिससे सरकार के खर्च और राजकोषीय गणित पर भी दबाव बढ़ सकता है. ऐसे माहौल में हिस्सेदारी बिक्री के जरिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना सरकार के लिए अहम हो गया.

विनिवेश लक्ष्य का दो-तिहाई हिस्सा हासिल

हिस्सेदारी बिक्री से केंद्र सरकार को अपने सालाना विनिवेश लक्ष्य का करीब दो-तिहाई हिस्सा हासिल करने में मदद मिली है. निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग यानी DIPAM के मुताबिक अब तक करीब 52,716.02 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने करीब 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है.

2019 के बाद सबसे मजबूत प्रदर्शन

विनिवेश के जरिए फंड जुटाने के लिहाज से वित्त वर्ष 2026-27, वित्त वर्ष 2018-19 के बाद सबसे मजबूत वर्षों में शामिल हो गया है. वित्त वर्ष 2018-19 में विनिवेश से करीब 84,972 करोड़ रुपये जुटाए गए थे. मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक के आंकड़े बताते हैं कि सरकार के विनिवेश कार्यक्रम में OFS सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है और LIC की हिस्सेदारी बिक्री ने इस रफ्तार को नई मजबूती दी है.
 

TAGS bw-hindi

शुक्रवार की बिकवाली के बाद बाजार में क्या होगा? आज इन बड़े शेयरों पर रखें नजर

शुक्रवार को सेंसेक्स 388.19 अंक की गिरावट के साथ 78,154.25 अंक पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 112.10 अंक टूटकर 24,471.70 अंक के स्तर पर बंद हुआ.

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
BWHindia

भारतीय शेयर बाजार में बीते कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को कमजोरी देखने को मिली. कारोबार के दौरान निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला. कमजोर वैश्विक संकेतों, मुनाफावसूली और आर्थिक व भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया.

शुक्रवार को सेंसेक्स 388.19 अंक की गिरावट के साथ 78,154.25 अंक पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 112.10 अंक टूटकर 24,471.70 अंक के स्तर पर बंद हुआ. दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के साथ सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र का अंत हुआ.

गिरावट के पीछे क्या रहे कारण?

शेयर बाजार में शुक्रवार की गिरावट के पीछे निवेशकों की मुनाफावसूली एक प्रमुख कारण रही. इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और आर्थिक व भू-राजनीतिक मोर्चे पर बनी अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों को सतर्क रखा. कई सेक्टरों में बिकवाली के दबाव से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर असर देखने को मिला.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, नए कारोबारी सत्र में रिलायंस इंडस्ट्रीज, PB Fintech, Juniper Hotels, Bank of India, Dr Reddy's Laboratories, Ather Energy, HAL, BEML, LEAP India और Eicher Motors के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. रिलायंस इंडस्ट्रीज और Rolls-Royce ने भारत के Advanced Medium Combat Aircraft यानी AMCA कार्यक्रम के लिए साथ मिलकर काम करने की योजना बनाई है और दोनों कंपनियां स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन विकसित करने की संभावनाएं तलाशेंगी. PB Fintech की इकाई Policybazaar Insurance Brokers को IRDAI से शो-कॉज नोटिस मिला है. Juniper Hotels नई दिल्ली में एक होटल परियोजना के लिए करीब 850 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जबकि Bank of India ने Medium-Term Notes के जरिए 1 अरब डॉलर तक जुटाने को मंजूरी दी है.

Dr Reddy's Laboratories की Bachupally स्थित FTO-3 यूनिट के USFDA निरीक्षण के बाद चार टिप्पणियों वाला Form 483 जारी हुआ है. Ather Energy के शेयरधारकों ने 1,200 करोड़ रुपये के preferential issue को मंजूरी दे दी है. HAL ने Adani Defence Systems and Technologies और BEML के साथ Prachand Light Combat Helicopter के fuselage structures के निर्माण के लिए साझेदारी की है. BEML को Mauritius से 6.65 मिलियन डॉलर का ऑर्डर मिला है. LEAP India में Capital Group की Smallcap World Fund Inc, Prudential Assurance Company, Habrok India Master LP, Aagam Investments और GDN Investments जैसे निवेशकों ने हिस्सेदारी खरीदी है. वहीं, Eicher Motors ने Continental GT 650 मोटरसाइकिल का अपडेटेड मॉडल लॉन्च किया है. इन सभी कॉरपोरेट अपडेट, निवेश, ऑर्डर और साझेदारियों के चलते आज इन शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी. 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


विकसित भारत की ‘सप्तधारा’: मैन्युफैक्चरिंग से AI तक, पीएम मोदी ने बताया 2047 का रोडमैप

लाल किले से पीएम मोदी ने देश की 7 बड़ी ताकतों पर रखा फोकस. 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग देने का ऐलान, मैन्युफैक्चरिंग, किसान, टेक्नोलॉजी, डिफेंस, ग्रीन एनर्जी और सॉफ्ट पावर को बताया विकसित भारत की बुनियाद

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 15 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 15 August, 2026
BWHindia

80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 2047 तक ‘विकसित भारत’ का रोडमैप पेश किया. अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश की आर्थिक और रणनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन सामने रखा. उन्होंने कहा कि आने वाले 5 से 7 साल में भारत उन क्षेत्रों में तेज प्रगति कर सकता है, जिनमें पिछले कई दशकों में अपेक्षित गति नहीं मिल सकी.

प्रधानमंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, किसानों और फूड प्रोसेसिंग से लेकर कनेक्टिविटी, रक्षा और साइबर सुरक्षा से लेकर ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की सॉफ्ट पावर तक, सात प्रमुख क्षेत्रों को देश की भविष्य की ताकत बताया. इसी कड़ी में उन्होंने अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग देने का भी बड़ा ऐलान किया.

मैन्युफैक्चरिंग: पुर्जों से लेकर पूरे प्रोडक्ट तक भारत में निर्माण

पीएम मोदी ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग में केवल बड़े उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. देश में छोटे-छोटे कंपोनेंट और पुर्जों से लेकर पूरी मशीन और तैयार उत्पाद बनाने की क्षमता विकसित करनी होगी.

उन्होंने उद्योग जगत से ग्लोबल मार्केट में भारतीय उत्पादों की पहचान मजबूत क्वालिटी और भरोसे के साथ बनाने का आह्वान किया. उनका जोर इस बात पर रहा कि भारत में बना सामान दुनिया के बाजारों तक पहुंचे और ‘मेक इन इंडिया’ को ग्लोबल सप्लाई चेन से मजबूती से जोड़ा जाए.

पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर को भी देश की आत्मनिर्भरता के लिए अहम बताया. उन्होंने कहा कि चिप आज लगभग हर आधुनिक क्षेत्र की जरूरत बन चुकी है और भारत इस सेक्टर में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है.

खेत से सीधे ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने की तैयारी

‘सप्तधारा’ की दूसरी शक्ति के रूप में प्रधानमंत्री ने किसानों और फूड प्रोडक्शन-प्रोसेसिंग सेक्टर को रखा. उन्होंने कहा कि भारत के मसाले, फल, फूल और दूसरे कृषि उत्पादों की वैश्विक बाजार में बड़ी संभावनाएं हैं.

पीएम मोदी का जोर सिर्फ कच्चे कृषि उत्पादों के निर्यात पर नहीं, बल्कि उनकी प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर भी रहा. यानी खेत से निकलने वाला उत्पाद प्रोसेस होकर अधिक मूल्य के साथ दुनिया के बाजारों तक पहुंचे.

AI, डेटा सेंटर और क्वांटम

प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ‘सप्तधारा’ की तीसरी शक्ति बताया. उन्होंने कहा कि आज का दौर डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी का है और भारत को इन उभरती तकनीकों में तेजी से आगे बढ़ना होगा. पीएम मोदी ने ऐलान किया कि अगले एक साल में देश के 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग दी जाएगी. यह कदम देश के युवाओं को नई तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया का इनोवेशन हब बनना होगा. साथ ही डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया.

गति शक्ति और कनेक्टिविटी

प्रधानमंत्री की ‘सप्तधारा’ में चौथी शक्ति गति शक्ति और बेहतर कनेक्टिविटी है. उन्होंने कहा कि देश में लोगों और सामान की आवाजाही को तेज, आसान और अधिक किफायती बनाने की जरूरत है. शहरों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने, पोर्ट और लैंड कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर फोकस रहेगा. बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, व्यापार और निवेश को भी गति मिलने की उम्मीद है.

आत्मनिर्भर भारत की सुरक्षा ढाल

पीएम मोदी ने रक्षा शक्ति को पांचवां प्रमुख स्तंभ बताया. उन्होंने कहा कि डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता भारत की रणनीतिक और आर्थिक मजबूती दोनों के लिए जरूरी है. उन्होंने साइबर सुरक्षा को भी आज की रक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया. डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ साइबर खतरे बढ़ रहे हैं और इस चुनौती से निपटने में भारत की युवा शक्ति बड़ी भूमिका निभा सकती है.

ऊर्जा सुरक्षा से समुद्री अर्थव्यवस्था तक

छठी शक्ति के तौर पर प्रधानमंत्री ने ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर जोर दिया. ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को भविष्य की अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्र बताया गया. प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को भी देश की बड़ी जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि भारत को कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा स्रोतों के लिए बाहरी निर्भरता कम करनी होगी.

सोलर एनर्जी के विस्तार और पीएम सूर्यघर योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा को आत्मनिर्भर भारत से जोड़ा. वहीं, लंबी समुद्री सीमा भारत की ब्लू इकोनॉमी के लिए बड़ी ताकत है. फिशरीज, कोस्टल टूरिज्म और समुद्री तकनीक जैसे क्षेत्रों में विकास की व्यापक संभावनाएं हैं.

योग से लेकर फिल्मों और डिजिटल कंटेंट तक

‘सप्तधारा’ की सातवीं और आखिरी शक्ति भारत की सॉफ्ट पावर है. पीएम मोदी ने कहा कि योग ने दुनिया के करोड़ों लोगों को भारत से जोड़ा है. इसके साथ ही आयुर्वेद, होलिस्टिक हेल्थकेयर, आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन, हैंडीक्राफ्ट और भारतीय संस्कृति में भी देश की मजबूत वैश्विक पहचान बनाने की क्षमता है.

उन्होंने फिल्म, गेमिंग, VFX, एनीमेशन और डिजिटल कंटेंट जैसे उभरते क्रिएटिव सेक्टर को भी भारत की सॉफ्ट पावर का हिस्सा बताया. इन क्षेत्रों के जरिए भारत सांस्कृतिक प्रभाव के साथ-साथ नई आर्थिक संभावनाएं भी पैदा कर सकता है.

आत्मनिर्भरता और ग्लोबल पहुंच, दोनों पर जोर

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भरता को बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत की जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि संकट के समय ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक, तकनीक और महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए बाहरी निर्भरता देश के सामने चुनौती बन सकती है.

हालांकि, आत्मनिर्भरता के साथ उनका जोर भारतीय उत्पादों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाने पर भी रहा. टेक्सटाइल, मशीन, दवाइयों और दूसरे भारतीय उत्पादों की दुनिया में मजबूत पहचान बनाने के लिए क्वालिटी और प्रतिस्पर्धा को अहम बताया गया.

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन भारत की अर्थव्यवस्था को सात प्रमुख आधारों पर मजबूत करने की रणनीति के रूप में सामने आया है. मैन्युफैक्चरिंग से लेकर AI तक और किसानों से लेकर ग्रीन एनर्जी तक, इन क्षेत्रों पर आने वाले वर्षों में तेजी से काम कर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
 


स्टेशनरी बेचने से IIGJ के CEO तक... देबाशीष बिस्वास की 30 साल की प्रेरक यात्रा

बैंकिंग से शिक्षा जगत तक 30 साल का सफर, 60 हजार से ज्यादा छात्रों को दे चुके हैं मार्गदर्शन देवाशीष बिस्वास

Last Modified:
Friday, 14 August, 2026
BWHindia

आज यानी 14 अगस्त को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जेम्स एंड ज्वेलरी (IIGJ) के CEO देबाशीष बिस्वास का जन्मदिन है. यह अवसर उनके तीन दशक से अधिक लंबे और बहुआयामी पेशेवर सफर को याद करने का भी है. बैंकिंग, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, मीडिया और शिक्षा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले बिस्वास ने कॉर्पोरेट लीडर और उद्यमी के साथ-साथ एक समर्पित मेंटर के रूप में भी हजारों युवाओं के भविष्य को दिशा दी है. लगातार सीखने, नई चुनौतियों को स्वीकार करने और खुद को समय के साथ ढालने की उनकी सोच ही उनकी इस प्रेरक यात्रा को खास बनाती है.

देबाशीष बिस्वास की सफलता की कहानी किसी सीधी और आसान यात्रा की तरह नहीं रही है. कॉर्पोरेट बोर्डरूम और CXO एडवाइजरी की दुनिया में पहुंचने से पहले उन्होंने दुकान-दुकान जाकर स्टेशनरी और येलो-पेज विज्ञापन बेचे. उन्होंने एक छोटी विज्ञापन कंपनी में ऑफिस असिस्टेंट के रूप में भी काम किया और एक अंतरराष्ट्रीय एनजीओ में फील्ड ऑफिसर की जिम्मेदारी भी संभाली.

इन शुरुआती अनुभवों के बाद करीब तीन दशक पहले उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय बैंक में बड़ा अवसर मिला, जिसने उनके कॉर्पोरेट करियर की मजबूत नींव रखी. इसके बाद उन्होंने HDFC Bank, Standard Chartered Bank, Amway India, Tata Teleservices, Disney Star, CIMA UK और Macmillan Education जैसी प्रमुख संस्थाओं के साथ काम किया. बाद में उन्होंने IIGJ की कमान संभाली.

जूनियर ऑफिसर से CEO तक का सफर

बिस्वास ने 1992 में एक जूनियर ऑफिसर के रूप में अपने कॉर्पोरेट करियर की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने GM, AVP और बिजनेस हेड जैसी क्षेत्रीय नेतृत्व की भूमिकाएं निभाईं. समय के साथ वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर VP South Asia, VP Global Institutional Alliances, Country Head और CEO जैसे पदों तक पहुंचे.

उन्होंने अपने करियर के दौरान कई बहुसांस्कृतिक और अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में कारोबार को विकसित और विस्तार देने का काम किया. उन्हें ब्रिटेन, UAE, इजरायल, मॉरीशस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, सिंगापुर, मलेशिया, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश में काम करने का अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी मिला.

26 साल के कॉर्पोरेट करियर के बाद चुनी उद्यमिता की राह

साल 2019 में लगातार 26 वर्षों तक कॉर्पोरेट जगत में काम करने के बाद देबाशीष बिस्वास ने उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ाया. उन्होंने CXO एडवाइजरी, मैनेजमेंट कंसल्टिंग, लीडरशिप ट्रेनिंग और कोचिंग पर केंद्रित अपना वेंचर शुरू किया.

इसके दो साल बाद उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और प्रोफेशनल्स के लिए लीडरशिप कम्युनिकेशन पर काम करने वाली एक LLP की सह-स्थापना की. यह उनके उस जुनून का विस्तार था, जिसने उनके करियर के एक बड़े हिस्से को परिभाषित किया है.

60,000 से ज्यादा छात्रों के मेंटर

युवाओं का मार्गदर्शन देवाशीष बिस्वास के करियर का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रहा है. पिछले 16 वर्षों में उन्होंने देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के 60,000 से अधिक छात्रों को मेंटर किया है.

अहमदाबाद से इलाहाबाद, भोपाल से बेंगलुरु और कोच्चि से कटक तक विभिन्न शहरों में उन्होंने युवाओं के साथ काम किया है. आज भी वे यह काम प्रो बोनो आधार पर जारी रखे हुए हैं. वे भारत और विदेशों की कई शैक्षणिक संस्थाओं और गैर-लाभकारी संगठनों के साथ मेंटर, सलाहकार और गवर्निंग काउंसिल सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं.

औसत छात्र से लगातार सीखने वाले प्रोफेशनल तक

देबाशीष बिस्वास खुद को स्कूल के दिनों में एक औसत से नीचे का छात्र बताते हैं, लेकिन उनकी शैक्षणिक यात्रा लगातार खुद को बेहतर बनाने की उनकी सोच को दर्शाती है. उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया और IMT गाजियाबाद से मार्केटिंग में MBA की डिग्री हासिल की. इसके अलावा उन्होंने मैनेजमेंट में M.Phil भी किया है. उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों में IIM कलकत्ता और IIT दिल्ली के सर्टिफिकेट प्रोग्राम, ICF-मान्यता प्राप्त लीडरशिप कोच सर्टिफिकेशन और Lean Six Sigma Black Belt भी शामिल हैं.

संगीत भी है जिंदगी का अहम हिस्सा

कॉर्पोरेट और शैक्षणिक जीवन के साथ-साथ संगीत भी देबाशीष बिस्वास की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. उन्होंने वेस्टर्न क्लासिकल वायलिन की ट्रेनिंग ली है और ट्रेनिंग के पहले ही वर्ष में गोल्ड मेडल हासिल किया था.

उनके पास ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ म्यूजिक, लंदन से ग्रेड 6 का सर्टिफिकेट भी है. वह लंबे समय तक प्रोफेशनल सिंथेसाइजर बजाते रहे हैं और गायन भी करते हैं. संगीत में किशोर कुमार और केके उनके पसंदीदा कलाकारों में शामिल हैं.

नेतृत्व का मतलब सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि प्रभाव पैदा करना

अपने जन्मदिन के अवसर पर उनके सहयोगी और मेंटीज उनके करियर की एक खास विशेषता को रेखांकित करते हैं. उनके अनुसार, देबाशीष बिस्वास के लिए नेतृत्व का अर्थ केवल बिजनेस ग्रोथ को मैनेज करना नहीं है, बल्कि लोगों को सक्षम बनाना, सकारात्मक प्रभाव पैदा करना और ऐसी संस्थाएं तैयार करना है जो बदलते समय के साथ प्रासंगिक और मजबूत बनी रहें.

देबाशीष बिस्वास की तीन दशक लंबी यात्रा यह भी दिखाती है कि करियर हमेशा एक सीधी रेखा में आगे नहीं बढ़ता. अलग-अलग भूमिकाएं, नई चुनौतियां, लगातार सीखने की इच्छा और दूसरों को आगे बढ़ाने की सोच ही एक व्यक्ति की वास्तविक पहचान और नेतृत्व क्षमता को आकार देती है.


लिस्टिंग के बाद LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया की सबसे मजबूत तिमाही, मुनाफा 27% बढ़ा

## वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी की आय 15.5 प्रतिशत बढ़कर 7,233 करोड़ रुपये पहुंच गई. वहीं, शुद्ध मुनाफा 27.2 प्रतिशत की तेजी के साथ 653 करोड़ रुपये रहा.

Last Modified:
Friday, 14 August, 2026
BWHindia

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (LG) ने लिस्टिंग के बाद अपनी सबसे मजबूत तिमाही वृद्धि दर्ज की है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी की परिचालन आय सालाना आधार पर 15.5 प्रतिशत बढ़कर 7,233 करोड़ रुपये पहुंच गई. प्रीमियम इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों की बढ़ती मांग ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी.

कंपनी का मुनाफा आय की तुलना में तेज गति से बढ़ा. पहली तिमाही में ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की आय यानी एबिट्डा 26.2 प्रतिशत बढ़कर 904 करोड़ रुपये हो गया. एबिट्डा मार्जिन 106 आधार अंक बढ़कर 12.5 प्रतिशत पहुंच गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 11.4 प्रतिशत था. वहीं, कंपनी का कर के बाद शुद्ध मुनाफा 27.2 प्रतिशत बढ़कर 653 करोड़ रुपये रहा. पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 513 करोड़ रुपये था. कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन का श्रेय प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी, अधिक बिक्री से मिलने वाले परिचालन लाभ और लागत नियंत्रण को दिया है.

हर श्रेणी में दोहरे अंकों की वृद्धि

एलजी इंडिया के मुताबिक, तिमाही के दौरान उसके सभी प्रमुख उत्पादों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई. टेलीविजन और वॉशिंग मशीन की बिक्री मजबूत रही, जबकि गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर की मांग ने भी कंपनी के कारोबार को बढ़ावा दिया.

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक होंग जू जिऑन ने कहा कि भारत का उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का बाजार तेजी से प्रीमियम, तकनीक आधारित और ऊर्जा दक्ष उत्पादों की ओर बढ़ रहा है और कंपनी का उत्पाद पोर्टफोलियो इस बदलाव के अनुरूप है. उन्होंने कहा कि कंपनी का मुनाफा आय की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ा है और हर उत्पाद श्रेणी ने इसमें योगदान दिया है. इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी की वृद्धि केवल मौसमी नहीं, बल्कि व्यापक और टिकाऊ है.

घरेलू उपकरण कारोबार से 5,577 करोड़ रुपये की आय

होम अप्लायंसेज और एयर सॉल्यूशन कारोबार से कंपनी की आय सालाना आधार पर 13.6 प्रतिशत बढ़कर 5,577 करोड़ रुपये रही. इस वृद्धि में एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर की प्रमुख भूमिका रही. गर्मी के चरम मौसम के दौरान इन उत्पादों की मांग मजबूत रही. वहीं, मौसमी मांग बढ़ने से पहले वॉशिंग मशीन की बिक्री में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई.

फ्रेंच डोर और साइड-बाय-साइड रेफ्रिजरेटर, बड़ी क्षमता वाली वॉशिंग मशीन और डिशवॉशर जैसे प्रीमियम उत्पादों का प्रदर्शन भी मजबूत रहा. कंपनी की एलजी एसेंशियल श्रृंखला का विस्तार दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों में भी जारी रहा. इस खंड का परिचालन लाभ 13.8 प्रतिशत बढ़कर 642 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि परिचालन लाभ मार्जिन 11.5 प्रतिशत रहा.

कंपनी ने कहा कि अधिक बिक्री से मिलने वाले लाभ, कीमतों में नियंत्रित बढ़ोतरी और स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने से उसे कच्चे माल की ऊंची कीमतों और मुद्रा से जुड़ी चुनौतियों का असर कम करने में मदद मिली.

टेलीविजन कारोबार सबसे तेज बढ़ा

होम एंटरटेनमेंट कारोबार कंपनी का सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाला खंड रहा. इस खंड की आय सालाना आधार पर 22.3 प्रतिशत बढ़कर 1,657 करोड़ रुपये पहुंच गई. टेलीविजन की बढ़ती मांग ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई. उपभोक्ताओं की बड़ी स्क्रीन वाले टीवी की ओर बढ़ती रुचि के साथ प्रीमियम ओएलईडी और क्यूएनईडी मॉडल की बिक्री में भी मजबूती रही. खेल आयोजनों के दौरान बढ़ी दर्शक संख्या ने भी नए और बड़े टेलीविजन खरीदने की मांग को समर्थन दिया.

इस खंड का परिचालन लाभ 48.5 प्रतिशत बढ़कर 315 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, परिचालन लाभ मार्जिन 336 आधार अंक बढ़कर 19 प्रतिशत पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 15.7 प्रतिशत था.

कंपनी के अनुसार, प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती बिक्री, प्रचार खर्च में कमी, बेहतर उत्पाद मिश्रण और सूचना प्रदर्शन कारोबार में लागत ढांचे में सुधार से मार्जिन बेहतर हुआ.

श्री सिटी से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

कंपनी ने भारत में उत्पादन, भारत के लिए उत्पादन और भारत से वैश्विक बाजारों तक पहुंच की अपनी रणनीति पर काम जारी रखा है. एलजी एसेंशियल श्रृंखला का विस्तार बड़े बाजारों में किया जा रहा है, जबकि प्रमुख वैश्विक बाजारों को निर्यात भी बढ़ रहा है.

कंपनी को उम्मीद है कि श्री सिटी में नई उत्पादन क्षमता शुरू होने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी. कंपनी बड़े आकार के रेफ्रिजरेटर को वैश्विक बाजारों के लिए तैयार कर रही है, जबकि एलजी एसेंशियल श्रृंखला का विस्तार एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका में किया जा रहा है.

त्योहारी सीजन से उम्मीदें

एलजी इंडिया को उम्मीद है कि ओणम, दुर्गा पूजा और दिवाली जैसे आगामी त्योहारों के दौरान बड़ी स्क्रीन वाले टेलीविजन, वॉशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर की मांग मजबूत बनी रहेगी. कंपनी प्रीमियम उत्पादों के पोर्टफोलियो का विस्तार करने के साथ-साथ एलजी एसेंशियल श्रृंखला को भी मजबूत करेगी. इसके अलावा, भारत में बुनियादी ढांचे और संस्थागत निवेश से जुड़े कारोबार से कंपनी को व्यवसाय से व्यवसाय क्षेत्र में भी वृद्धि के अवसर मिलने की उम्मीद है.

कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के अपने वृद्धि लक्ष्य को हासिल करने को लेकर भरोसा जताया है. हालांकि, उसने कहा कि वह भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और उनके कच्चे माल की कीमतों, मुद्रा तथा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर बनाए रखेगी. कंपनी के मुताबिक स्थानीयकरण, नियंत्रित मूल्य वृद्धि और परिचालन दक्षता आगे भी मार्जिन को सुरक्षित रखने के प्रमुख साधन बने रहेंगे.
 


जुलाई में 23.44 करोड़ तक पहुंची डीमैट खातों की संख्या, लेकिन सक्रिय निवेशक नहीं बढ़े: रिपोर्ट

जुलाई में नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तार 12.1 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन एनएसई पर सक्रिय ग्राहकों की संख्या में 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. 360 वन कैपिटल रिसर्च की रिपोर्ट में निवेशकों की बाजार भागीदारी कमजोर रहने की बात कही गई है.

Last Modified:
Friday, 14 August, 2026
BWHindia

भारत में डीमैट खातों की कुल संख्या जुलाई 2026 में बढ़कर 23.44 करोड़ हो गई. यह जून के मुकाबले 1.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. 360 वन कैपिटल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार की स्थिति में सुधार के चलते नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तार में तेजी आई है. जुलाई में करीब 29 लाख नए डीमैट खाते जुड़े, जो पिछले महीने के मुकाबले 12.1 प्रतिशत अधिक है. इससे नए निवेशकों के बाजार से जुड़ने की रफ्तार में सुधार का संकेत मिलता है. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक नए खातों के जुड़ने की औसत रफ्तार अभी वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के स्तर से नीचे बनी हुई है.

सीडीएसएल के खाते बढ़कर 18.83 करोड़

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड यानी सीडीएसएल के डीमैट खातों की संख्या जुलाई में बढ़कर 18.83 करोड़ हो गई. इसमें महीने-दर-महीने 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. जुलाई के दौरान सीडीएसएल में 23 लाख नए खाते जुड़े, जो जून के मुकाबले 11.6 प्रतिशत अधिक है. हालांकि, नए डीमैट खातों में सीडीएसएल की हिस्सेदारी 40 आधार अंक घटकर 81 प्रतिशत रह गई. इसके बावजूद जुलाई में पिछले पांच महीनों की तुलना में सबसे अधिक नए खाते सीडीएसएल से जुड़े. वहीं, नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड यानी एनएसडीएल के डीमैट खातों की संख्या बढ़कर 4.62 करोड़ हो गई. इसमें महीने-दर-महीने 1.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

एनएसडीएल में जुलाई के दौरान करीब 5.5 लाख नए खाते जुड़े. नए खातों की संख्या में पिछले महीने की तुलना में 14.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इससे कुल नए डीमैट खातों में एनएसडीएल की हिस्सेदारी बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई.

डीमैट खाते बढ़े, लेकिन सक्रिय निवेशक घटे

रिपोर्ट में सबसे अहम बात यह सामने आई कि डीमैट खातों की संख्या बढ़ने के बावजूद शेयर बाजार में सक्रिय निवेशकों की संख्या में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई पर सक्रिय ग्राहकों की संख्या 2026 के पहले सात महीनों में करीब 4.55 करोड़ के आसपास बनी रही. दिसंबर 2025 में यह संख्या करीब 4.48 करोड़ के निचले स्तर तक पहुंच गई थी.

जुलाई में एनएसई के सक्रिय ग्राहकों की संख्या महीने-दर-महीने करीब 1.8 प्रतिशत और साल-दर-साल 3.6 प्रतिशत घट गई. जून 2026 में सक्रिय ग्राहकों और कुल डीमैट खातों का अनुपात 19.4 प्रतिशत रहा, जो पिछले महीने की तुलना में 25 आधार अंक कम है. इसका मतलब है कि डीमैट खाते खुलने की रफ्तार सक्रिय निवेशकों की वृद्धि से कहीं अधिक है.

रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग डीमैट खाते तो खोल रहे हैं, लेकिन यह अभी नियमित रूप से शेयर बाजार में निवेश या कारोबार करने वाले निवेशकों की संख्या में उसी अनुपात में बदलाव नहीं दिखा रहा है.

ग्रो ने बढ़ाई बाजार हिस्सेदारी

डिस्काउंट ब्रोकिंग बाजार में जुलाई के दौरान तीन प्रमुख कंपनियों की स्थिति बनी रही, लेकिन ग्रो ने अपनी बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी की. ग्रो की बाजार हिस्सेदारी 16 आधार अंक बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई. वहीं, जेरोधा की हिस्सेदारी 8 आधार अंक घटकर 14.9 प्रतिशत रही. एंजेल वन की हिस्सेदारी 14.6 प्रतिशत पर बनी रही.

एंजेल वन के कुल ग्राहकों की संख्या जुलाई में महीने-दर-महीने 1.14 प्रतिशत बढ़कर 3.9 करोड़ हो गई. हालांकि, एनएसई पर कंपनी के सक्रिय ग्राहकों का अनुपात जून के 17.2 प्रतिशत से घटकर 17 प्रतिशत रह गया. पिछले 12 महीनों में ग्रो ने करीब 270 आधार अंक की बाजार हिस्सेदारी हासिल की है. वहीं, एंजेल वन की हिस्सेदारी में करीब 66 आधार अंक की गिरावट दर्ज की गई है.

बाजार में सुधार से बढ़ सकती है निवेशकों की भागीदारी

360 वन कैपिटल रिसर्च का मानना है कि बाजार की स्थिति में लगातार सुधार होने पर निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है. इससे नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तार और तेज हो सकती है, साथ ही ब्रोकरेज कंपनियों के सक्रिय ग्राहकों की संख्या में भी सुधार देखने को मिल सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, डिपॉजिटरी के साथ पंजीकृत सक्रिय कंपनियों की संख्या भी जुलाई में बढ़कर 1,66,757 हो गई. इसमें महीने-दर-महीने 1.19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. सीडीएसएल के साथ पंजीकृत कंपनियों की संख्या 1.09 प्रतिशत बढ़कर 50,228 हो गई, जबकि एनएसडीएल के साथ पंजीकृत कंपनियों की संख्या 1.24 प्रतिशत बढ़कर 1,16,529 पहुंच गई.

कुल मिलाकर जुलाई में डीमैट खातों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन सक्रिय निवेशकों की संख्या में गिरावट यह संकेत देती है कि नए खाते खुलने के बावजूद बाजार में नियमित भागीदारी अभी कमजोर बनी हुई है.
 


कूल किंग तेल विवाद में डाबर को राहत, 30 सितंबर तक पुराना स्टॉक बेचने की मंजूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर इंडिया को 9,020 कार्टन मौजूदा स्टॉक बेचने की अनुमति दी है. हालांकि कंपनी को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से उत्पाद हटाना होगा और 30 सितंबर के बाद बचा हुआ स्टॉक वापस लेना होगा.

Last Modified:
Friday, 14 August, 2026
BWHindia

दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर इंडिया को अपने कूल किंग ठंडा तेल के मौजूदा स्टॉक की बिक्री को लेकर सीमित राहत दी है. अदालत ने कंपनी को 30 सितंबर तक 9,020 कार्टन पुराने स्टॉक को बेचने की अनुमति दी है. यह राहत डाबर और इमामी के बीच पैकेजिंग को लेकर चल रहे विवाद के बीच दी गई है.

विवाद कूल किंग ठंडा तेल की पैकेजिंग को लेकर है. इमामी का आरोप है कि डाबर के कूल किंग की पैकेजिंग उसके नवरत्न आयुर्वेदिक तेल की पहचान, रंग संयोजन और समग्र स्वरूप से भ्रामक रूप से मिलती-जुलती है. इससे पहले अदालत ने डाबर को विवादित पैकेजिंग में कूल किंग ठंडा तेल बेचने से रोक दिया था. 22 मई को दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था.

इमामी ने लगाए थे ट्रेडमार्क उल्लंघन के आरोप
इमामी ने डाबर पर ट्रेडमार्क उल्लंघन, अपनी पहचान का अनुचित इस्तेमाल और अनुचित व्यापारिक व्यवहार के आरोप लगाए थे. खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि दोनों उत्पादों का समग्र स्वरूप, डिजाइन और रंग संयोजन उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है. इसके बाद डाबर ने अदालत से उस स्टॉक को बेचने की अनुमति मांगी थी, जिसका उत्पादन निषेधाज्ञा लागू होने से पहले किया जा चुका था.

19 जून को एकल पीठ ने कुछ शर्तों के साथ डाबर को पुराने स्टॉक की बिक्री की अनुमति दे दी थी. इनमें बिक्री का पूरा ब्योरा देने और 30 सितंबर के बाद बचा हुआ स्टॉक वापस लेने की शर्त शामिल थी.

इमामी ने फैसले को दी चुनौती
इमामी ने एकल पीठ के इस आदेश को चुनौती दी थी. कंपनी का तर्क था कि जब खंडपीठ पहले ही निषेधाज्ञा को बरकरार रख चुकी है, तो एकल पीठ उस आदेश में बदलाव नहीं कर सकती. खंडपीठ ने इमामी की इस कानूनी दलील से सहमति जताई. अदालत ने कहा कि खंडपीठ द्वारा बरकरार रखे गए आदेश में किसी तरह की राहत या बदलाव पर केवल खंडपीठ या उससे उच्च अदालत ही विचार कर सकती है. हालांकि, बाद में इमामी की ओर से कोई आपत्ति नहीं जताए जाने के बाद अदालत ने पहले से तय सुरक्षा शर्तों के साथ दाबर को मौजूदा स्टॉक बेचने की अनुमति दे दी.

ऑनलाइन बिक्री पर रोक, केवल दुकानों से बिकेगा स्टॉक
अदालत के आदेश के मुताबिक, डाबर को कूल किंग ठंडा तेल को सभी ई-कॉमर्स मंचों से हटाना होगा. कंपनी को अमेजन और बिगबास्केट सहित ऑनलाइन मंचों से उत्पाद की सूची और तस्वीरें हटाने के लिए भी कदम उठाने होंगे. बचा हुआ स्टॉक केवल थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं के भौतिक दुकानों के माध्यम से बेचा जा सकेगा. ऑनलाइन बिक्री की अनुमति नहीं होगी.

30 सितंबर के बाद यदि कोई स्टॉक बिना बिके बचता है तो डाबर को उसे बाजार से वापस लेना होगा. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि कंपनी इस अनुमति का लाभ तभी उठा सकेगी, जब वह बचे हुए स्टॉक को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी करने में सक्षम हो. यदि डाबर स्टॉक को वापस लेने में सफल नहीं होती है तो उसे विवादित पैकेजिंग में कूल किंग ठंडा तेल की बिक्री जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी. ऐसी स्थिति में कंपनी को इमामी के नवरत्न आयुर्वेदिक तेल से स्पष्ट रूप से अलग पैकेजिंग का इस्तेमाल करना होगा. फिलहाल, अदालत द्वारा लगाया गया मूल प्रतिबंध बरकरार है, यानी डाबर भविष्य में ऐसी पैकेजिंग या उत्पाद पहचान के साथ कूल किंग ठंडा तेल नहीं बेच सकेगी, जो इमामी के नवरत्न आयुर्वेदिक तेल से भ्रामक रूप से मिलती-जुलती हो.


जी के 3,100 करोड़ रुपये के फंड जुटाने पर रोक क्यों? सैट ने सेबी के फैसले पर उठाए सवाल

प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि जब दो महीने की रोक खत्म होने के बाद निवेश की अनुमति है, तो अभी इस पर रोक लगाने का आधार क्या है. सार्वजनिक शेयरधारकों के भारी समर्थन को भी न्यायाधिकरण ने अहम माना.

Last Modified:
Friday, 14 August, 2026
BWHindia

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) के 3,100 करोड़ रुपये के प्रस्तावित फंड जुटाने पर रोक लगाने के भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी के फैसले पर प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण यानी सैट ने सवाल उठाए हैं. सैट ने कहा कि जब सेबी खुद यह मान रहा है कि दो महीने की रोक अवधि समाप्त होने के बाद यह निवेश किया जा सकता है, तो फिलहाल इसे रोकने का तर्क समझ से परे है.

सैट ने शुक्रवार को अंतरिम राहत देते हुए जी को प्रमोटर समूह की इकाई के पक्ष में पूर्ण रूप से परिवर्तनीय वारंट जारी करने की अनुमति दे दी. हालांकि, न्यायाधिकरण ने सेबी के पूरे आदेश पर रोक नहीं लगाई है और जी पर प्रतिभूति बाजार तक पहुंच को लेकर लगाई गई व्यापक रोक फिलहाल जारी रहेगी.

दो महीने बाद निवेश की अनुमति तो अभी रोक क्यों?

सुनवाई के दौरान सैट ने सेबी से सीधे सवाल किया था कि क्या दो महीने की रोक अवधि खत्म होने के बाद यह निवेश कंपनी में किया जा सकता है. इस पर सेबी के वकील ने माना कि रोक अवधि समाप्त होने के बाद निवेश किया जा सकता है. यहीं से सैट ने सेबी के तर्क पर सवाल उठाया. न्यायाधिकरण ने कहा कि यदि प्रस्तावित लेनदेन दो महीने बाद कानूनी रूप से किया जा सकता है और इसके रास्ते में कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं है, तो फिलहाल इसे रोकने का आधार स्पष्ट नहीं है.

सेबी ने जी की तत्काल राहत की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि कंपनी ने आवंटन को तुरंत पूरा करने की जरूरत साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश नहीं की है. हालांकि, सैट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.

सार्वजनिक शेयरधारकों का भारी समर्थन

सैट ने अपने आदेश में इस बात को भी काफी महत्व दिया कि प्रस्तावित फंड जुटाने की योजना को बड़ी संख्या में सार्वजनिक शेयरधारकों का समर्थन मिला है. 31 जुलाई को हुई असाधारण आम बैठक में प्रमोटरों को छोड़कर 76.64 प्रतिशत शेयरधारकों ने वारंट जारी करने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था. वहीं, जी के करीब 96 प्रतिशत शेयरधारक सार्वजनिक श्रेणी के हैं.

न्यायाधिकरण ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण रूप से परिवर्तनीय वारंट जारी करने से सार्वजनिक शेयरधारकों को भी फायदा होने की संभावना है. इस वारंट निर्गम के जरिए कंपनी को करीब 3,100 करोड़ रुपये का निवेश मिल सकता है.

प्रतिभूति लेनदेन में धोखाधड़ी का आरोप नहीं

सुनवाई के दौरान सेबी ने एक और अहम बात स्वीकार की. सैट के सवाल पर सेबी ने माना कि उसके आदेश में जी के खिलाफ प्रतिभूतियों के लेनदेन से जुड़े मामले में धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार निषेध नियमों के उल्लंघन का आरोप नहीं लगाया गया है. हालांकि, सैट ने इस स्तर पर सेबी के मूल आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है. न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों की अन्य दलीलों पर अंतिम सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा.

लेकिन अंतरिम राहत देते समय इस तथ्य को अहम माना गया कि कंपनी पर प्रतिभूति लेनदेन के संबंध में धोखाधड़ी या अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप नहीं है, जबकि दूसरी ओर शेयरधारकों की मंजूरी से जुड़ा एक समयबद्ध फंड जुटाने का प्रस्ताव मौजूद है.

फंड जुटाने की अनुमति, लेकिन बाजार प्रतिबंध जारी

सैट ने सेबी के आदेश पर केवल उतनी सीमा तक रोक लगाई है, जिससे जी और पुनीत गोयनका प्रमोटर समूह की इकाई को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण रूप से परिवर्तनीय वारंट जारी कर सकें. इसके साथ ही अपीलकर्ताओं को एक सप्ताह के भीतर पूरी जुर्माना राशि जमा करनी होगी. सेबी को इस राशि को ब्याज वाले खाते में रखने का निर्देश दिया गया है.

न्यायाधिकरण ने वारंट जारी करने की समयसीमा भी एक सप्ताह बढ़ा दी है. यह समयसीमा पहले 14 अगस्त को समाप्त हो रही थी. सैट ने कंपनी को सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए म्यूचुअल फंड से जुड़े लेनदेन करने की भी अनुमति दी है. हालांकि, प्रस्तावित लाभांश के भुगतान सहित अन्य उद्देश्यों के लिए ऐसी अनुमति नहीं दी गई है.

हैदराबाद संपत्ति मामले से जुड़ा है विवाद

सेबी की कार्रवाई जी की हैदराबाद स्थित एक संपत्ति से जुड़े आरोपों के बाद हुई थी. आरोप है कि वर्ष 2016 में प्रमोटरों ने चार समूह कंपनियों के कर्ज के लिए इस संपत्ति को गिरवी रखा था. सेबी का आरोप है कि यह संपत्ति जरूरी बोर्ड या शेयरधारकों की मंजूरी के बिना गिरवी रखी गई थी. हालांकि, सैट ने अभी इन आरोपों की वैधता पर कोई फैसला नहीं दिया है.

फिलहाल सैट के अंतरिम आदेश ने यह साफ कर दिया है कि सेबी जी की बाजार तक पहुंच पर प्रतिबंध जारी रख सकता है, लेकिन इसी प्रतिबंध के आधार पर सार्वजनिक शेयरधारकों की मंजूरी वाले 3,100 करोड़ रुपये के वारंट निर्गम को अंतरिम अवधि में रोका नहीं जा सकता.

अब मामले की अंतिम सुनवाई में यह तय होगा कि सेबी के मूल निष्कर्ष और जी पर लगाए गए प्रतिबंध कानूनी जांच की कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं. लेकिन फिलहाल सैट ने सेबी के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि जब निवेश दो महीने बाद कानूनी रूप से स्वीकार्य है, तो इन दो महीनों के दौरान उसे रोकने के लिए और मजबूत आधार की जरूरत है.
 

TAGS bw-hindi

BARC बोर्ड में श्रीनिवासन स्वामी की एंट्री, हंसा रिसर्च कनेक्शन पर फिर उठे सवाल

विज्ञापन एजेंसियों के संघ ने आरके स्वामी समूह के कार्यकारी समूह अध्यक्ष श्रीनिवासन के. स्वामी को बीएआरसी बोर्ड के लिए चुना है. हालांकि 2020 के टीआरपी विवाद से जुड़े हंसा रिसर्च के साथ समूह के संबंधों को लेकर इस नियुक्ति ने बीएआरसी की विश्वसनीयता और प्रशासनिक व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है.

Last Modified:
Friday, 14 August, 2026
BWHindia

भारत की टेलीविजन रेटिंग एजेंसी बीएआरसी (BARC) के बोर्ड में श्रीनिवासन के. स्वामी की नियुक्ति ने मीडिया और विज्ञापन उद्योग में नई बहस को जन्म दे दिया है. भारतीय विज्ञापन एजेंसियों के संघ ने आरके स्वामी समूह के कार्यकारी समूह अध्यक्ष श्रीनिवासन स्वामी को बीएआरसी बोर्ड में शशि सिन्हा की जगह नामित और निर्वाचित किया है. कागजों पर यह एक सामान्य औद्योगिक नियुक्ति है. श्रीनिवासन स्वामी विज्ञापन जगत के अनुभवी नाम हैं और देश के प्रमुख विज्ञापन समूहों में से एक आरके स्वामी का नेतृत्व करते हैं. लेकिन इस नियुक्ति के साथ हंसा रिसर्च का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जो 2020 के चर्चित टीआरपी विवाद से जुड़ा रहा था.

हंसा रिसर्च कनेक्शन क्यों बना सवाल?

हंसा रिसर्च, आरके स्वामी समूह का हिस्सा है. 2020 के कथित टीआरपी हेरफेर मामले में इस कंपनी की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे. उस समय हंसा रिसर्च को मुंबई और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बीएआरसी के दर्शक मापने वाले उपकरण लगाने और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई थी.

इन उपकरणों से मिलने वाला डेटा टेलीविजन चैनलों की रेटिंग तय करने में अहम भूमिका निभाता है. यही रेटिंग विज्ञापनदाताओं, एजेंसियों और प्रसारकों के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है. मुंबई पुलिस की चार्जशीट में हंसा विजन प्राइवेट लिमिटेड, जिसे हंसा रिसर्च की होल्डिंग कंपनी बताया गया था, की भूमिका को लेकर कई आरोप लगाए गए थे. चार्जशीट के अनुसार, कंपनी के कुछ टेलीविजन चैनलों के साथ व्यावसायिक हित थे, जिनकी जानकारी बीएआरसी को नहीं दी गई थी. हालांकि, इन आरोपों को चुनौती दी गई थी और ये आरोप हंसा रिसर्च, उसके समूह या अधिकारियों के खिलाफ दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं हैं.

टीआरपी विवाद के बाद बीएआरसी की साख पर फिर सवाल

2020 के टीआरपी विवाद ने भारत की टेलीविजन दर्शक मापन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. इसके बाद बीएआरसी ने अपनी व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए.

अब श्रीनिवासन स्वामी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब बीएआरसी की विश्वसनीयता और उसके प्रशासनिक ढांचे पर पहले से ही नजर बनी हुई है. उद्योग से जुड़े कुछ अधिकारियों का मानना है कि भले ही श्रीनिवासन स्वामी के खिलाफ किसी तरह की सीधी भूमिका या संलिप्तता का आरोप नहीं है, लेकिन हंसा रिसर्च के साथ उनके समूह के संबंधों के कारण हितों के टकराव की आशंका का सवाल खड़ा हो सकता है.

मीडिया उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कोई वास्तविक हितों का टकराव है या नहीं. बल्कि यह भी है कि क्या बीएआरसी के पास ऐसे मजबूत नियम हैं, जो किसी भी संभावित व्यावसायिक प्रभाव से रेटिंग प्रणाली को अलग और निष्पक्ष रख सकें.

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की नजर से और संवेदनशील हुआ मामला

बीएआरसी का काम सिर्फ सामान्य बाजार अनुसंधान तक सीमित नहीं है. टेलीविजन रेटिंग के आधार पर विज्ञापन का पैसा, चैनलों का मूल्यांकन, कार्यक्रमों की रणनीति और पूरे टीवी कारोबार के कई अहम फैसले प्रभावित होते हैं. यही वजह है कि बीएआरसी से सामान्य उद्योग संस्था की तुलना में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है.

मौजूदा समय में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के स्तर पर भी बीएआरसी और भारत की टेलीविजन दर्शक मापन प्रणाली के भविष्य को लेकर चर्चा और समीक्षा चल रही है. ऐसे में श्रीनिवासन स्वामी की नियुक्ति को केवल एक व्यक्ति की बोर्ड में एंट्री के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे बीएआरसी के प्रशासनिक ढांचे की एक नई परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है.

श्रीनिवासन स्वामी ने क्या कहा?

E4M की ओर से भेजे गए सवालों का श्रीनिवासन स्वामी ने सीधे जवाब नहीं दिया. हालांकि, विज्ञापन एजेंसियों के संघ के सदस्यों को भेजे एक ईमेल में उन्होंने कहा कि हंसा रिसर्च समूह ही इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता था और कथित अनियमितताओं को सबसे पहले उसी ने उजागर किया था. स्वामी के मुताबिक, 6 अक्टूबर 2020 को हंसा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आंतरिक स्तर पर कथित गड़बड़ी का पता लगाया और मुंबई पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी के एक पूर्व फील्ड अधिकारी ने टीआरपी डेटा से छेड़छाड़ की थी और मामले की व्यापक जांच की मांग की गई थी.

उन्होंने कहा कि कंपनी ने केवल संबंधित कर्मचारी को हटाने के बजाय पूरे मामले की जांच कराने का रास्ता चुना और इस प्रक्रिया में कानूनी परेशानियों का भी सामना किया, लेकिन नैतिकता के साथ समझौता नहीं किया.

स्वामी ने यह भी कहा कि हंसा रिसर्च ने मुंबई पुलिस के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में आपराधिक रिट याचिका दायर की थी. उनके अनुसार, कंपनी के खिलाफ गलत कार्रवाई के आरोपों को लेकर उसे अदालत से राहत मिली थी और इससे जुड़े तथ्य न्यायिक रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं.

बीएआरसी के लिए प्रशासनिक व्यवस्था की परीक्षा

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीएआरसी ने 2020 के टीआरपी विवाद के बाद अपने प्रशासनिक ढांचे को कितना मजबूत किया है. क्या बोर्ड के सभी सदस्यों और उनसे जुड़े समूहों के संभावित व्यावसायिक हितों का पूरा खुलासा किया जाता है? क्या बीएआरसी के पास ऐसे पर्याप्त नियम हैं, जो बोर्ड के फैसलों, सेवा प्रदाताओं, प्रसारकों और रेटिंग प्रणाली को किसी व्यक्ति या समूह के व्यावसायिक हितों से अलग रख सकें?

उद्योग के जानकारों का मानना है कि श्रीनिवासन स्वामी की नियुक्ति पर अंतिम बहस उनकी व्यक्तिगत साख या अनुभव से ज्यादा बीएआरसी की संस्थागत पारदर्शिता पर केंद्रित हो सकती है. क्योंकि बीएआरसी की सबसे बड़ी ताकत भरोसा है और उसकी सबसे बड़ी चुनौती भी वही है. 2020 के टीआरपी विवाद ने दिखाया था कि रेटिंग प्रणाली में विश्वास कितना संवेदनशील हो सकता है. अब हंसा रिसर्च के पुराने विवाद से जुड़े एक समूह के प्रमुख की बीएआरसी बोर्ड में नियुक्ति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रेटिंग संस्था अपने प्रशासनिक ढांचे को लेकर उद्योग, विज्ञापनदाताओं, प्रसारकों और नियामकों का भरोसा पूरी तरह कायम रख पाएगी.

आने वाले दिनों में यह नियुक्ति बीएआरसी के लिए केवल एक बोर्ड बदलाव नहीं, बल्कि उसकी पारदर्शिता, हितों के टकराव से निपटने की क्षमता और विश्वसनीयता की एक अहम परीक्षा साबित हो सकती है.
 


Bluehill.VC ने जुटाए 400 करोड़ रुपये, अब फ्रंटियर-टेक स्टार्टअप्स पर लगाएगा बड़ा दांव

उत्तर प्रदेश और केरल सरकार समेत कई बड़े निवेशकों ने Bluehill.VC के पहले फंड में निवेश किया है.

Last Modified:
Friday, 14 August, 2026
BWHindia

चेन्नई स्थित फ्रंटियर-टेक फोकस्ड वेंचर कैपिटल फर्म Bluehill.VC ने अपने पहले 400 करोड़ रुपये के फंड का फाइनल क्लोज कर लिया है. इसमें 50 करोड़ रुपये के ग्रीनशू ऑप्शन का सब्सक्रिप्शन भी शामिल है. फंड को SIDBI, केरल और उत्तर प्रदेश सरकारों के साथ-साथ भारत और मध्य पूर्व के फैमिली ऑफिस, सफल उद्यमियों और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स यानी UHNIs का समर्थन मिला है.

Bluehill.VC का कहना है कि उसे तय समयसीमा के भीतर फंड में निवेश के लिए कई अन्य संस्थागत निवेशकों और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स से भी रुचि मिली थी. हालांकि, पहले फंड की तय सीमा के कारण सभी निवेश प्रतिबद्धताओं को शामिल नहीं किया जा सका. फर्म अब 2027 में लॉन्च किए जाने वाले अपने अगले फंड के लिए इन निवेशकों के साथ बातचीत करने की योजना बना रही है.

15-16 कंपनियों में निवेश का लक्ष्य

Bluehill.VC सीड से लेकर सीरीज A चरण तक उन स्टार्टअप्स में निवेश करेगी, जो अपनी खुद की तकनीक और बौद्धिक संपदा यानी IP आधारित प्रोडक्ट्स विकसित कर रहे हैं. फंड का लक्ष्य 15 से 16 कंपनियों का एक केंद्रित पोर्टफोलियो तैयार करना है. कंपनी पहली इंस्टीट्यूशनल फंडिंग राउंड में औसतन 10 लाख से 20 लाख डॉलर तक का निवेश करेगी. Bluehill.VC निवेश के साथ-साथ स्टार्टअप्स को बिजनेस डेवलपमेंट और ग्रोथ में सहयोग देने के अपने 'इन्वेस्ट एंड बिल्ड' मॉडल पर भी काम करेगी. फर्म अब तक अपने पोर्टफोलियो की सात कंपनियों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है. अगले छह महीनों में करीब 80 करोड़ रुपये और निवेश करने की योजना है.

डिफेंस से सेमीकंडक्टर तक कई सेक्टरों पर नजर

Bluehill.VC एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैटेरियल्स, डिफेंस, स्पेस, वाटर टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स, इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी और IoT जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स में निवेश कर रही है.

Bluehill.VC के मैनेजिंग पार्टनर और को-फाउंडर मनु अय्यर ने कहा कि पिछले दो दशकों में वेंचर कैपिटल का फोकस मुख्य रूप से कंज्यूमर, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट बिजनेस पर रहा है. लेकिन अब अगली बड़ी वैल्यू उन कंपनियों से पैदा होगी, जो इंजीनियरिंग और साइंस से जुड़ी जटिल समस्याओं का समाधान विकसित कर रही हैं. उन्होंने कहा कि भारत के पास डिफेंस, सेमीकंडक्टर, स्पेस, एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर की कंपनियां बनाने के लिए टैलेंट, पॉलिसी सपोर्ट और एंटरप्रेन्योरियल क्षमता मौजूद है.

इन कंपनियों में लगा चुका है पैसा

Bluehill.VC के मौजूदा पोर्टफोलियो में EtherealX, Zebu Intelligent Systems, Helex, Sophrosyne Technologies और optoML जैसी कंपनियां शामिल हैं. EtherealX अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष परिवहन के लिए दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले लॉन्च सिस्टम विकसित कर रही है. Zebu Intelligent Systems काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम करती है और iDEX की तीन चुनौतियां जीतने के बाद भारतीय सशस्त्र बलों के साथ मिलकर काम कर रही है.

Helex जेनेटिक किडनी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एडवांस्ड थेरेपी विकसित कर रही है. Sophrosyne Technologies एक फैबलेस सेमीकंडक्टर स्टार्टअप है, जो वियरेबल और डिजिटल हेल्थ डिवाइसेज के लिए एडवांस्ड बायोसेंसिंग सिस्टम-ऑन-चिप यानी SoCs तैयार कर रही है. वहीं, optoML एक इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल इंटरकनेक्ट के साथ FinFET आधारित Analog AI System-on-Chip प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है. कंपनी का दावा है कि इसकी टेक्नोलॉजी AI वर्कलोड के लिए ऊर्जा दक्षता को 50 गुना तक बढ़ा सकती है.

अगले छह महीनों में 80 करोड़ रुपये निवेश की तैयारी

Bluehill.VC के मैनेजिंग पार्टनर और को-फाउंडर श्रीधर पार्थसारथी ने कहा कि फ्रंटियर-टेक कंपनियों को विकसित होने में अधिक समय लगता है और इनमें निवेश के लिए गहरी तकनीकी समझ की जरूरत होती है. हालांकि, सफल होने पर ऐसी कंपनियां ऐसी तकनीक विकसित कर सकती हैं, जिन्हें दोहराना मुश्किल होता है और जो पूरे उद्योग की दिशा बदल सकती हैं.

उन्होंने कहा कि फर्म का फोकस ऐसे फाउंडर्स की पहचान करना है, जो मूल सिद्धांतों के आधार पर वास्तविक तकनीकी सफलता हासिल करने पर काम कर रहे हैं. ऐसे फाउंडर्स केवल बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों से ही नहीं, बल्कि रिसर्च लैब्स, मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स, डिफेंस प्रोग्राम्स और देशभर के विश्वविद्यालयों से भी उभर रहे हैं. मजबूत इन्वेस्टमेंट पाइपलाइन के साथ Bluehill.VC अगले छह महीनों में 80 करोड़ रुपये और निवेश करने की तैयारी में है. कंपनी का लक्ष्य भारत से ऐसी फ्रंटियर टेक कंपनियों को तैयार करना है, जो न केवल वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी दर्ज करें, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री की दिशा भी तय करें.