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सोने के Financialization को लेकर Industry को है बजट से है ये उम्‍मीद 

उद्योगों का मानना है कि सरकार को इसके लिए लॉन्‍ग टर्म कैंपिटल गेन्‍स टैक्‍स को घटाकर 10 प्रतिशत करना चाहिए. उद्योगों का मानना है जैसा ब्रिटेन ने किया है वो बेहद अच्‍छा कदम है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

AMFI ने सरकार से गोल्ड फंड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स घटाकर 10% करने को कहा है. वर्तमान में गोल्ड फंड पर LTCG टैक्स इंडेक्सेशन बेनिफिट्स के साथ 20% है. AMFI ने यह भी कहा कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्सेशन का लाभ उठाने के लिए होल्डिंग अवधि को 3 साल की मौजूदा अवधि से घटाकर 1 साल किया जाना है.


म्‍यूचुअल फंड की ओर डॉयवर्ट हो ग्राहक 
ऐसा प्रस्‍ताव AMFI दिया था कि खुदरा निवेशकों को सीधे सोना खरीदने के बजाय म्यूचुअल फंड मार्ग के माध्यम से सोने में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. उसने ये भी सुझाव दिया था कि गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड ऑफ फंड्स पर एलटीसीजी को केंद्रीय बजट 2023 में नीचे लाया जाना चाहिए. बजट से पहले उद्योग निकाय द्वारा ये प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा गया था. अब सवाल ये है कि क्‍या बजट के दिन ये प्रस्ताव दिखेगा?  म्यूचुअल फंड मैनेजरों का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो ये सोने के वित्तीयकरण की दिशा में यह एक अहम कदम होगा.

वर्तमान में, एक गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड लिंक्ड एमएफ योजनाओं को इनकम टैक्‍स के उद्देश्यों के लिए इक्विटी ओरिएंटेड फंड के विकल्‍प के रूप में माना जाता है. गोल्ड ईटीएफ में पूंजीगत लाभ कर उद्देश्यों के लिए लॉन्‍ग टर्म  के निवेश के रूप में माने जाने की न्यूनतम अवधि तीन साल है, जिसमें इंडेक्सेशन के साथ 20% पर एलटीसीजी टैक्स लगता है, जबकि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर लागू कराधान की सीमांत दर पर कर लगाया जाता है.


क्‍या कहती है इंडस्‍ट्री 
उद्योग निकाय का मानना है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) के लॉन्च ने गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड लिंक्ड एमएफ स्कीम को कम आकर्षक बना दिया है, जिसके परिणामस्वरूप गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड में रुचि कम हो गई है. लिक्विडिटी के दृष्टिकोण से, गोल्ड ईटीएफ और फंड एसजीबी की तुलना में बेहतर हैं, क्योंकि गोल्ड ईटीएफ इनवेसटरों को लगातार लिक्‍विडिटी प्रदान करते हैं, एएमएफआई ने वित्त मंत्रालय को अपने नोट में कहा है.


ब्रिटेन ने उठाया है इस दिशा में अहम कदम 
फिलहाल, गोल्ड फंड और ईटीएफ पर लगने वाला टैक्‍स भौतिक तौर पर यानी सीधे दुकान से खरीदे जाने वाले  सोने के कराधान के अनुरूप है. यदि हम परिवारों के पास मौजूद खरबों डॉलर के सोने के फाइनेंशिएलाइजेशन वित्तीयकरण के बारे में गंभीर हैं, तो हमें निवेश के रूप में सोने के प्रति भौतिक लगाव की आदत को बदलना होगा. यह तभी किया जा सकता है जब हम गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड जैसे उत्पादों को प्रोत्साहित करें. यूके जैसे देशों ने सोने से जुड़े वित्तीय उत्पादों पर कोई वैट न लगाकर वित्तीयकरण के लिए एक मिसाल कायम की है.
हमारा मानना है कि बजट 2023 शॉर्ट टर्म और लॉन्‍ग टर्म लाभ पर विभिन्न कैटेगिरी की एसेट पर करों को सरल बनाकर निवेशकों की दुविधा को कम कर सकता है. एएमएफआई ने प्रस्तावित किया है कि गोल्ड ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स जो गोल्ड ईटीएफ की इकाइयों में 90% या उससे अधिक का निवेश करते हैं, उन पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20% के बजाय 10% पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगाया जाना चाहिए. इससे एमएफ इकाइयों का कराधान आसान हो जाएगा और 1 साल की होल्डिंग अवधि का फायदा होगा. हालांकि, अगर हम मान लें तो इससे कम प्रभावी टैक्‍स रेट नहीं हो सकती है। 
 


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