सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए हैं. रियल्टी, पॉवर, आईटी और एनर्जी 4-6 फीसदी तक बढ़े हैं. बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 3.8 प्रतिशत तथा स्मॉलकैप सूचकांक में 4 प्रतिशत की बढ़त हुई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारतीय शेयर बाजार 12 मई को मजबूत रुख के साथ बंद हुए हैं. निफ्टी 24,900 से ऊपर पहुंच गया है. कारोबार बंद होने पर सेंसेक्स 2,975.43 अंक या 3.74 प्रतिशत बढ़कर 82,429.90 पर और निफ्टी 916.70 अंक या 3.82 प्रतिशत बढ़कर 24,924.70 पर पहुंच गया. लगभग 3375 शेयरों में बढ़त हुई, 585 शेयरों में गिरावट आई तथा 127 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.
सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए हैं. रियल्टी, पॉवर, आईटी और एनर्जी 4-6 फीसदी तक बढ़े हैं. बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 3.8 प्रतिशत तथा स्मॉलकैप सूचकांक में 4 प्रतिशत की बढ़त हुई है. निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़ने वाले शेयरों में इंफोसिस, अडानी एंटरप्राइजेज, श्रीराम फाइनेंस, ट्रेंट, एचसीएल टेक्नोलॉजीज शामिल रहे. जबकि सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में सन फार्मा और इंडसइंड बैंक शामिल रहे.
इन शेयरों में दिख रही खरीददारी
चलिए जानते हैं कि उन शेयरों के बारे में जानते हैं जिनमें मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है. उनमें Cera Sanitaryware, Syrma SGS Technology, JBM Auto, Rail Vikas Nigam Ltd, Jupiter Wagons, Reliance Power और HFCL Ltd शामिल हैं. दरअसल, इन शेयरों ने अपना 52 वीक का हाई लेवल पार कर लिया है, जो इनमें तेजी के संकेत देता है. इसलिए आज इन शेयरों पर भी नज़र बनाए रखें.
इन स्टॉक्स में मंदी के संकेत
चलिए अब जानते हैं कि मोमेंटम इंडिकेटर, मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डिवर्जेंस (MACD) ने आज के लिए क्या संकेत दिए हैं. एमएसीडी (MACD) ने KPR Mill, Jyothy Labs, IndusInd Bank, Navin Fluorine, Eris Lifesciences, Sun Pharmaceutical Industries और United Breweries के शेयर में मंदी का संकेत दिया है. इसका मतलब है कि अब इन शेयरों में गिरावट शुरू हो गई है.
इन शेयरों में दिख सकता है एक्शन
आज यानी 13 मई 2025 को कुछ शेयर (Stocks in News) एक्शन दिखाने को तैयार हैं. पॉजिटिव ट्रिगर के चलते ये शेयर आज बाजार में फोकस (Stocks to Watch) में रह सकते हैं. अगर इंट्राडे में बेहतर शेयरों की तलाश है तो इन पर नजर (Stock in Focus) रख सकते हैं. आज की इस लिस्ट में SRF, Tata Steel, Aether Industries, Kfin Technologies, Zaggle Prepaid, Paytm, Gensol Engineeriang, Morepen Laboratories जैसे नाम शामिल हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है).
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस में विलय करने का प्रस्ताव रखा है. पुनर्गठन के बाद टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी के रूप में बनाए रखने का रास्ता साफ हो सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा समूह (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के पुनर्गठन की योजना सामने आई है. टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस में विलय करने का प्रस्ताव रखा है. प्रस्तावित विलय के बाद टाटा संस के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी यानी एनबीएफसी या कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी यानी सीआईसी के रूप में वर्गीकृत होने की स्थिति खत्म हो सकती है.
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है. ट्रस्ट्स ने इस प्रस्ताव पर विचार और मंजूरी के लिए टाटा संस के निदेशक मंडल को पत्र भेजा है. प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले टाटा संस को भारतीय रिजर्व बैंक से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा.
1.05 लाख करोड़ रुपये का होगा परिचालन राजस्व
टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, पुनर्गठित इकाई का 31 मार्च 2026 तक परिचालन राजस्व 1,05,043 करोड़ रुपये था, जबकि वित्तीय परिसंपत्तियों से आय 40,072 करोड़ रुपये थी. इस तरह संयुक्त इकाई की कुल आय में परिचालन राजस्व की हिस्सेदारी 64.3 फीसदी होगी.
ट्रस्ट्स का कहना है कि इन आंकड़ों के आधार पर पुनर्गठित इकाई एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत होने के लिए जरूरी प्रमुख कारोबारी मानदंडों को पूरा नहीं करेगी. साथ ही, यह कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी पर लागू शर्तों के दायरे में भी नहीं आएगी.
प्रस्ताव के अनुसार, पुनर्गठित इकाई की कुल शुद्ध परिसंपत्तियां 2,00,158 करोड़ रुपये होंगी. इनमें समूह की कंपनियों में 1,77,120 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है. ट्रस्ट्स के मुताबिक, समूह की कंपनियों में निवेश कुल शुद्ध परिसंपत्तियों के 90 फीसदी से कम रहेगा.
भारतीय रिजर्व बैंक से लेनी होगी मंजूरी
प्रस्तावित विलय को भारतीय रिजर्व बैंक के 2025 के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के स्वैच्छिक विलय संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा. इसके तहत केंद्रीय बैंक से पहले अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना जरूरी होगा.
टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, पुनर्गठन के बाद टाटा संस के कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में योग्य नहीं रहने की स्थिति में उसे अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र भी वापस करना होगा.
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वह टाटा संस के साथ मिलकर भारतीय रिजर्व बैंक के साथ प्रस्तावित पुनर्गठन और इससे जुड़ी नियामकीय जरूरतों पर बातचीत करेगा. टाटा संस के निदेशक मंडल को भी विलय और नियामकीय प्रक्रिया के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे.
टाटा संस के पुराने कारोबारी मॉडल की वापसी
टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित ढांचा टाटा संस के उस कारोबारी मॉडल को फिर से स्थापित करेगा, जिसे कंपनी ने अपने इतिहास के बड़े हिस्से में अपनाया था. कंपनी के करीब 100 साल के इतिहास में लगभग 80 वर्षों तक टाटा संस के पास परिचालन कारोबार और उनसे होने वाला राजस्व था. इस राजस्व का इस्तेमाल टाटा समूह के नए कारोबारों को विकसित करने में किया जाता था.
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज भी 2004 में अलग सहायक कंपनी के रूप में अलग होने से पहले टाटा संस का एक कारोबारी प्रभाग थी. इसके अलावा कई अन्य परिचालन कारोबार भी पहले टाटा संस का हिस्सा रहे थे और बाद में उन्हें अलग सहायक कंपनियों में बदल दिया गया.
प्रस्तावित पुनर्गठन के बाद टाटा संस के पास फिर से अपने परिचालन कारोबार और उनसे होने वाला राजस्व होगा, जबकि वह टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी की भूमिका भी निभाता रहेगा.
टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध रखने की योजना
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि यह प्रस्ताव सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के निदेशक मंडल द्वारा जुलाई 2025 में पारित सर्वसम्मत प्रस्तावों के अनुरूप भी है. इन प्रस्तावों के तहत टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी बनाए रखने के लिए प्रयास किए जाने थे. ट्रस्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ढांचा टाटा समूह के मौजूदा संगठनात्मक मॉडल को बनाए रखते हुए उसे दीर्घकालिक रणनीतिक पहलों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा
कंपनी के IPO में 18,085,246 इक्विटी शेयर तक की बिक्री की जाएगी. प्रत्येक शेयर का फेस वैल्यू 2 रुपये है. OFS के तहत प्रमोटर शेयर बेचने वाले शेयरधारक, प्रमोटर ग्रुप का एक शेयरधारक और निवेशक शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और इमेजिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनी Tonbo Imaging India Limited को प्रस्तावित Initial Public Offering (IPO) के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मंजूरी मिल गई है. कंपनी के IPO में नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे, बल्कि Offer for Sale (OFS) के जरिए मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
OFS के जरिए 1.81 करोड़ शेयरों की बिक्री
कंपनी के IPO में 18,085,246 इक्विटी शेयर तक की बिक्री की जाएगी. प्रत्येक शेयर का फेस वैल्यू 2 रुपये है. OFS के तहत प्रमोटर शेयर बेचने वाले शेयरधारक, प्रमोटर ग्रुप का एक शेयरधारक और निवेशक शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. इस इश्यू में कोई Fresh Issue शामिल नहीं है. यानी IPO से मिलने वाली राशि कंपनी के पास नए शेयर जारी करने के जरिए नहीं आएगी, बल्कि OFS के तहत शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी.
2003 में हुई थी कंपनी की शुरुआत
Tonbo Imaging की स्थापना 2003 में हुई थी. वर्ष 2012 में कंपनी ने डिफेंस-केंद्रित उत्पादों के निर्माण की दिशा में अपना कारोबार बढ़ाया. यह बदलाव कंपनी के पूर्व पैरेंट के प्रमोटर्स द्वारा अधिग्रहण के बाद हुआ. कंपनी भारत और विदेशी बाजारों में सरकारी और डिफेंस ग्राहकों के लिए डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और इमेजिंग सिस्टम विकसित करती है.
Tonbo Imaging के निवेशकों में Qualcomm Ventures, Artiman, Celesta, Edelweiss Value and Growth Fund, HBL Engineering, Tenacity Ventures, Export-Import Bank of India और Florintree शामिल हैं.
थर्मल इमेजिंग में मजबूत मौजूदगी
कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में उद्धृत Frost & Sullivan की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच भारत में सरकारी और डिफेंस एजेंसियों को सप्लाई किए गए थर्मल इमेजिंग सिस्टम के बिक्री मूल्य के आधार पर Tonbo Imaging देश की सबसे बड़ी निर्माता थी. रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि में कंपनी ने भारत से निर्यात किए गए थर्मल इमेजिंग सिस्टम की कुल यूनिट्स में 94.3 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की.
24 देशों में 28,000 से ज्यादा सिस्टम तैनात
31 मार्च 2026 तक Tonbo Imaging ने 24 देशों में 28,000 से अधिक सिस्टम तैनात किए थे. कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में थर्मल इमेजिंग कोर, वेपन साइट्स, थर्मल बाइनोक्युलर, टारगेटिंग सिस्टम, मिसाइल सीकर्स, फायर-कंट्रोल सिस्टम और मिसाइल-गाइडेंस सिस्टम शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 से उसके पास अपनी बौद्धिक संपदा (IP) का 100 फीसदी स्वामित्व है. इसमें ऑप्टिक्स, एम्बेडेड सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी तकनीक शामिल है.
मैन्युफैक्चरिंग के लिए बाहरी साझेदारों पर निर्भरता
Tonbo Imaging अपने उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए Electronics Manufacturing Services (EMS) पार्टनर्स का इस्तेमाल करती है. इनमें Kaynes Technology India और Avalon Technology शामिल हैं. वहीं, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, सिस्टम इंटीग्रेशन और क्वालिफिकेशन टेस्टिंग जैसी गतिविधियां कंपनी अपने स्तर पर करती है. IPO के लिए JM Financial और IIFL Capital Services बुक-रनिंग लीड मैनेजर हैं.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि फिलहाल 15 अक्टूबर से लागू होने वाली प्रस्तावित चार्ज व्यवस्था पर कोई अंतरिम रोक नहीं है. इस मामले में अदालत ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई भुगतानों पर लगाए जाने वाले शुल्क की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित चार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है. हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार, यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि फिलहाल 15 अक्टूबर से लागू होने वाली प्रस्तावित चार्ज व्यवस्था पर कोई अंतरिम रोक नहीं है. इस मामले में अदालत ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई भुगतानों पर लगाए जाने वाले शुल्क की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की.
96 फीसदी लेनदेन पर नहीं लगेगा चार्ज
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन. वेंकटरमन ने अदालत को बताया कि नई व्यवस्था के तहत 96 फीसदी लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. जरूरी सेवाओं से जुड़े कुछ भुगतानों के लिए चार्ज की अधिकतम सीमा 5 रुपये तय की गई है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित चार्ज न तो कर है और न ही सरकारी शुल्क. सरकार को इन चार्ज से कोई राशि नहीं मिलेगी. उनके अनुसार, यह भुगतान एग्रीगेटर और बैंकों के बीच लगने वाला निपटान शुल्क है.
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस संबंध में सरकार से हलफनामे के जरिए विस्तृत जानकारी मांगी. पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं.
2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रस्तावित है 0.4% शुल्क
एनपीसीआई ने 15 अक्टूबर से चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर व्यापारी छूट दर यानी एमडीआर लागू करने का फैसला किया है. इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 फीसदी शुल्क प्रस्तावित है. 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है.
हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई भुगतानों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा. सरकार का कहना है कि इस बदलाव से करीब 96 फीसदी व्यापारी लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे.
छोटे दुकानदारों को शुल्क से छूट
नई व्यवस्था में छोटे व्यापारियों के लिए भी राहत का प्रावधान है. यूपीआई क्यूआर के जरिए हर महीने एक लाख रुपये तक का भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसके अलावा रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का निश्चित शुल्क प्रस्तावित किया गया है.
याचिका में क्या है चुनौती?
सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई भुगतानों पर शुल्क लगाने के फैसले को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि शून्य-शुल्क व्यवस्था में बदलाव पर्याप्त कानूनी आधार, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना किया गया है. याचिका में जनवरी 2020 से लागू शून्य-शुल्क व्यवस्था में बदलाव को भी चुनौती दी गई है.
अब सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है. फिलहाल अदालत ने प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है. मामले की अगली सुनवाई संबंधित पक्षों के जवाब मिलने के बाद होगी.
राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन ढांचा पर्यटन मंत्रालय और ONDC मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसके जरिए अलग-अलग जगहों पर बिखरी पर्यटन सेवाओं को साझा डिजिटल बुनियादी ढांचे से जोड़ा जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने पर्यटन क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की शुरुआत की है. इसका लक्ष्य दिसंबर 2028 तक 23,000 पर्यटन अनुभवों और होमस्टे को एक साझा डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है. पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, इस पहल के तहत पर्यटकों को अलग-अलग डिजिटल मंचों के बजाय एक साझा नेटवर्क के माध्यम से पर्यटन सेवाओं को खोजने और बुक करने की सुविधा मिलेगी.
पर्यटन सेवाओं को एक डिजिटल नेटवर्क पर लाने की तैयारी
राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन ढांचा पर्यटन मंत्रालय और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसके जरिए अलग-अलग जगहों पर बिखरी पर्यटन सेवाओं को साझा डिजिटल बुनियादी ढांचे से जोड़ा जाएगा.
इस पहल के तहत 14,000 पर्यटन अनुभवों और 9,000 होमस्टे को डिजिटल नेटवर्क पर लाने का लक्ष्य रखा गया है. खास तौर पर उन पर्यटन अनुभवों पर ध्यान दिया जाएगा, जो अभी डिजिटल रूप से उपलब्ध नहीं हैं या जिनकी ऑनलाइन मौजूदगी सीमित है. पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में इस परियोजना की शुरुआत की.
पहचान से लेकर भुगतान और शिकायत निवारण तक की सुविधा
मंत्रालय के अनुसार, ओएनडीसी और इंटरनेशनल सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इनोवेशन एंड एडवांसमेंट (आईसीडीआईए) के सहयोग से विकसित किए जा रहे इस डिजिटल ढांचे में कई सुविधाएं शामिल होंगी. इनमें सत्यापित पहचान और सेवा प्रदाताओं की जानकारी, खोज और सेवा चयन, भुगतान, रेटिंग और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
पर्यटन सचिव भुवनेश कुमार ने कहा कि इस पहल के सामने वाले हिस्से में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार की व्यापक योजना भविष्य में ‘एक टिकट, एक पास’ व्यवस्था विकसित करने की है, जिससे पर्यटक की यात्रा के अलग-अलग हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़ा जा सके.
उन्होंने कहा कि फिलहाल उड़ान, होटल, टैक्सी, नाव की सवारी या किसी मंदिर में आरती जैसी सेवाओं की बुकिंग के लिए अलग-अलग वेबसाइटों का इस्तेमाल करना पड़ता है. इस बिखरी हुई व्यवस्था के कारण यात्रा की योजना बनाना पर्यटकों के लिए डिजिटल रूप से मुश्किल हो जाता है.
तीन चरणों में लागू होगी योजना
परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच इसकी तैयारी और विकास का काम होगा. इसके बाद जनवरी से जून 2027 के बीच पायलट चरण चलाया जाएगा, जिसमें पर्यटन अनुभवों और होमस्टे का पहला समूह डिजिटल नेटवर्क पर उपलब्ध कराया जाएगा.
जुलाई 2027 से दिसंबर 2028 के बीच देशभर में इसका विस्तार किया जाएगा और अधिक से अधिक पर्यटन सेवाओं को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा.
मंत्रालय के अनुसार, परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है. पर्यटन मंत्रालय इसका नेतृत्व करेगा और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर पर्यटन अनुभवों को सूचीबद्ध और सत्यापित करेगा. पर्यटन उद्योग की भागीदारी के लिए एक संचालन समिति भी बनाई जाएगी.
कम चर्चित पर्यटन स्थलों पर भी बढ़ेगा ध्यान
सरकार का कहना है कि इस डिजिटल बुनियादी ढांचे का उद्देश्य पर्यटन की योजना और यात्रा को आसान, सुरक्षित और पर्यटकों की पसंदीदा भाषाओं में अधिक सुलभ बनाना है. इससे कागजी प्रक्रिया कम करने और कम चर्चित पर्यटन स्थलों तक पहुंच बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है, जब सरकार देश के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से आगे पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करने और स्थानीय समुदायों तथा छोटे पर्यटन कारोबारियों तक आर्थिक अवसर पहुंचाने पर जोर दे रही है.
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पर्यटक अब स्थानीय खान-पान, कला, परंपराओं और अन्य स्थानीय अनुभवों को भी यात्रा का हिस्सा बनाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि भारत में पर्यटन के अगले चरण में विकास का लाभ लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से आगे स्थानीय समुदायों, उद्यमियों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचना जरूरी है.
दो अन्य पर्यटन पहलों की भी शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान सरकार ने ‘कम चर्चित पर्यटन स्थलों की मांग बढ़ाने के लिए पर्यटन मांग पुनर्वितरण मिशन’ और ‘देखो अपना देश 2.0’ की भी शुरुआत की. इस अवसर पर ‘भारत पर्यटन सांख्यिकी 2026’ जारी की गई. इसके अलावा एयरबीएनबी, फ्लिक्सबस, ग्लांस डिजिटल एक्सपीरियंस, आइशर ग्रुप फाउंडेशन और मेकमायट्रिप के साथ पांच समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया गया. इन समझौतों का उद्देश्य पर्यटन स्थलों के प्रचार, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना है.
देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में तेलंगाना की हिस्सेदारी करीब 2.5 फीसदी रही. राज्य में कुल फोलियो की संख्या 82.24 लाख रही, जो देशभर के कुल म्युचुअल फंड फोलियो का करीब 2.9 फीसदी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश म्युचुअल फंड निवेश के तेजी से बढ़ते बाजार के रूप में उभर रहे हैं. जुलाई 2026 तक दोनों राज्यों का कुल म्युचुअल फंड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. खास बात यह है कि दोनों राज्यों में म्युचुअल फंड निवेशकों में करीब 25 फीसदी महिलाएं हैं. वहीं, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए नियमित निवेश की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है.
तेलंगाना का एयूएम 19 फीसदी बढ़ा
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (MFs) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में तेलंगाना का म्युचुअल फंड एयूएम 2,12,856 करोड़ रुपये रहा. जुलाई 2025 की तुलना में इसमें 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेलंगाना एयूएम के मामले में आठवें स्थान पर रहा.
देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में तेलंगाना की हिस्सेदारी करीब 2.5 फीसदी रही. राज्य में कुल फोलियो की संख्या 82.24 लाख रही, जो देशभर के कुल म्युचुअल फंड फोलियो का करीब 2.9 फीसदी है.
आंध्र प्रदेश में 23 फीसदी बढ़ा एयूएम
आंध्र प्रदेश में जुलाई 2026 में म्युचुअल फंड एयूएम 82,409 करोड़ रुपये रहा. एक साल पहले के मुकाबले इसमें 23 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में राज्य की हिस्सेदारी करीब 1 फीसदी रही. एयूएम के मामले में आंध्र प्रदेश देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 15वें स्थान पर रहा. राज्य में म्युचुअल फंड फोलियो की संख्या 79.44 लाख को पार कर गई.
हैदराबाद में तेलंगाना के एयूएम का 87 फीसदी
तेलंगाना में म्युचुअल फंड निवेश का सबसे बड़ा केंद्र हैदराबाद बना हुआ है. जुलाई में शहर का म्युचुअल फंड एयूएम 1,84,261 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल एयूएम का करीब 87 फीसदी है. एक साल में हैदराबाद के एयूएम में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
देश के शीर्ष 30 शहरों में हैदराबाद एयूएम के मामले में आठवें स्थान पर रहा. देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में शहर की हिस्सेदारी 2.10 फीसदी रही. हैदराबाद में म्युचुअल फंड फोलियो की संख्या 54.44 लाख रही, जो तेलंगाना के कुल फोलियो का 66.2 फीसदी है.
विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा भी आगे
आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम म्युचुअल फंड निवेश के मामले में सबसे आगे रहा. जुलाई में शहर का एयूएम 16,614 करोड़ रुपये रहा. इसके बाद विजयवाड़ा 8,337 करोड़ रुपये के एयूएम के साथ दूसरे स्थान पर रहा.
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि आंध्र प्रदेश में म्युचुअल फंड निवेश केवल एक शहर तक सीमित नहीं है और राज्य के प्रमुख शहरों में इसकी पहुंच बढ़ रही है.
एसआईपी के जरिए बढ़ रहा नियमित निवेश
दोनों राज्यों में एसआईपी के जरिए निवेश भी बढ़ रहा है. तेलंगाना में एसआईपी एयूएम 47,975 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल म्युचुअल फंड एयूएम का करीब 22 फीसदी है. राज्य में एसआईपी फोलियो की संख्या 26.09 लाख से ज्यादा रही.
आंध्र प्रदेश में एसआईपी एयूएम 26,820 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल एयूएम का करीब 32 फीसदी है. यहां एसआईपी फोलियो की संख्या 26.47 लाख रही.
महिलाओं की भागीदारी करीब 25 फीसदी
म्युचुअल फंड निवेश में महिलाओं की भागीदारी भी दोनों राज्यों में उल्लेखनीय है. तेलंगाना में 19.60 लाख से ज्यादा विशिष्ट निवेशक हैं, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 24.42 फीसदी है. आंध्र प्रदेश में विशिष्ट निवेशकों की संख्या 20.94 लाख रही. इनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 23.60 फीसदी है. देशभर में म्युचुअल फंड के विशिष्ट निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 26.74 फीसदी है.
आर्थिक आधार से भी निवेश को मिल रहा समर्थन
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में म्युचुअल फंड निवेश बढ़ने के पीछे दोनों राज्यों की आर्थिक गतिविधियों और आय के आधार का भी योगदान है. वित्त वर्ष 2025-26 में तेलंगाना की जीडीपी 17.82 लाख करोड़ रुपये रही, जो भारत की कुल जीडीपी का करीब 5 फीसदी है. वहीं, आंध्र प्रदेश की जीडीपी 17.62 लाख करोड़ रुपये रही, जो देश की कुल जीडीपी का करीब 4.9 फीसदी है.
एम्फी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकट एन. चलसानी ने कहा कि दोनों राज्यों में म्युचुअल फंड में भागीदारी बढ़ रही है. उनके मुताबिक, तेलंगाना में हैदराबाद की बड़ी हिस्सेदारी बनी हुई है, जबकि आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा समेत कई शहरों में निवेश का दायरा बढ़ रहा है.
उन्होंने एसआईपी के बढ़ते चलन को भी महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार, नियमित निवेश की बढ़ती हिस्सेदारी निवेशकों के बीच अनुशासित निवेश की प्रवृत्ति को दर्शाती है. म्युचुअल फंड में भागीदारी बढ़ने के साथ निवेशकों के लिए सही जानकारी के आधार पर फैसला लेना और लंबी अवधि का नजरिया बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार 2030 तक सालाना 8-10 फीसदी की दर से बढ़कर 30-35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रूम एयर कंडीशनर (RAC) इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार अगले कुछ वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है. BCG और CII की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक यह बाजार 3-3.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. इस बढ़ोतरी के साथ घरेलू स्तर पर पार्ट्स और मटीरियल के निर्माण में 40,000-50,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वैल्यूएडिशन का अवसर पैदा हो सकता है.
भारत अगले पांच वर्षों में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के प्रमुख वैश्विक बाजारों में सबसे तेज गति से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल रह सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती घरेलू आय, घरों में इन उत्पादों की पहुंच, सिंगल-फैमिली घरों की बढ़ती संख्या, आसान फाइनेंसिंग, व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग बाजार की वृद्धि के प्रमुख कारण होंगे.
2030 तक 8-10% सालाना बढ़ सकता है बाजार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार 2030 तक सालाना 8-10 फीसदी की दर से बढ़कर 30-35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रूम एयर कंडीशनर (RAC) इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकता है.
हालांकि, रिपोर्ट ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है. यदि देश में पार्ट्स और मटीरियल के उत्पादन की क्षमता पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ी, तो बाजार की बढ़ती मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा हो सकता है.
पार्ट्स के लोकल उत्पादन में अभी बड़ा अंतर
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स और मटीरियल का घरेलू उत्पादन अलग-अलग श्रेणियों में 25 फीसदी से 70 फीसदी के बीच है. रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीविजन और एयर कंडीशनर के मामले में लोकल प्रोडक्शन का स्तर अपेक्षाकृत कम है, जबकि रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन में यह अधिक है.
2030 तक विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में लोकल प्रोडक्शन 30-80 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. रिपोर्ट ने टीवी डिस्प्ले पैनल, रूम एयर-कंडीशनर कंप्रेसर, रेफ्रिजरेटर इंसुलेशन और वॉशिंग मशीन मोटर को उन प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया है, जहां घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश है.
जिन क्षेत्रों में तकनीक कुछ चुनिंदा वैश्विक कंपनियों के पास है, वहां टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और जॉइंट वेंचर की जरूरत हो सकती है. वहीं, क्लस्टर आधारित मैन्युफैक्चरिंग से बड़े पैमाने पर उत्पादन और लागत से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है.
ग्लोबल एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी 1% से कम
रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक दुनिया का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स एक्सपोर्ट 900-950 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. फिलहाल ग्लोबल ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है.
भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स एक्सपोर्ट बढ़ रहा है, लेकिन इसकी बड़ी हिस्सेदारी पड़ोसी देशों और यूएई जैसे बाजारों तक सीमित है. बड़े वैश्विक इंपोर्ट बाजारों में भारत की मौजूदगी अभी अपेक्षाकृत कम है.
रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख एक्सपोर्टर्स की तुलना में भारत को मटीरियल लागत, बड़े पैमाने पर उत्पादन, बैकवर्ड इंटीग्रेशन और टेक्नोलॉजी के मामले में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और कंप्लायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमित उपलब्धता भी एक्सपोर्ट बढ़ाने में बाधा बनती है.
रिपोर्ट में थाईलैंड का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि ग्लोबल एयर-कंडीशनर एक्सपोर्ट में उसकी हिस्सेदारी 2010 के 16 फीसदी से बढ़कर 2025 में 22 फीसदी हो गई. इससे वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एयर-कंडीशनर एक्सपोर्टर बन गया.
R&D पर खर्च बढ़ाने की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रमुख लिस्टेड कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियां अपने रेवेन्यू का 1 फीसदी से भी कम हिस्सा रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च करती हैं. इसके मुकाबले दुनियाभर की समान कंपनियां R&D पर करीब 1-4 फीसदी खर्च करती हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को केवल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के बजाय टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर भी ध्यान देना होगा. इससे घरेलू कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति बनाने और एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
AI से बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बिजनेस लीडर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिलने वाले संभावित लाभ को लेकर वैश्विक कंपनियों के मुकाबले अधिक आशावादी हैं, हालांकि वर्कफोर्स की तैयारी अभी सीमित है.
जेनरेटिव AI और एजेंटिक AI का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और कस्टमर सर्विस जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, इन तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल भारतीय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजारों में एक्सपोर्ट का विस्तार करने में मददगार हो सकता है.
बैंक कर्मचारियों की तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल अब नहीं होगी. UFBU ने रविवार को हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की. यह हड़ताल सोमवार से शुरू होनी थी और बैंकों की छमाही क्लोजिंग के समय प्रस्तावित थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल टल गई है. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने भारतीय बैंक संघ (IBA) की ओर से मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया है. इसके चलते सोमवार से बैंक शाखाओं में सामान्य रूप से कामकाज होगा.
बैंक कर्मचारियों की तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल अब नहीं होगी. UFBU ने रविवार को हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की. यह हड़ताल सोमवार से शुरू होनी थी और बैंकों की छमाही क्लोजिंग के समय प्रस्तावित थी. हड़ताल टलने के बाद ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं के लिए किसी तरह की प्रस्तावित बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और सोमवार को बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे.
5 दिन कामकाज के मुद्दे पर बनेगी समिति
हड़ताल स्थगित करने के साथ ही बैंक यूनियनों और IBA के बीच बातचीत का रास्ता खुला है. UFBU के अनुसार, सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने के मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए IBA और UFBU की एक उच्चस्तरीय समिति का तत्काल गठन किया जाएगा. समिति उपलब्ध विकल्पों पर विचार करने के साथ सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करेगी और ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास करेगी, जो ग्राहकों समेत सभी हितधारकों के लिए स्वीकार्य हो.
PLI योजना में बदलाव पर भी होगी चर्चा
बैंक यूनियनों की एक अन्य मांग प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना यानी Performance Linked Incentive (PLI) से संबंधित है. UFBU ने कहा कि स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI योजना को लेकर IBA के साथ बातचीत शुरू की जा सकती है. यूनियनों और एसोसिएशनों की आपत्तियों को दूर करने के लिए योजना में बदलाव का प्रस्ताव सरकार के सामने रखने पर भी चर्चा होगी.
आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित
UFBU ने कहा कि IBA की ओर से इन मुद्दों पर बातचीत और विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद उसने प्रस्तावित आंदोलन और तीन दिन की हड़ताल को स्थगित करने का फैसला किया. अब 5 दिन कामकाज और PLI योजना में बदलाव समेत अन्य मांगों पर आगे की बातचीत समिति के स्तर पर होगी.
शुक्रवार को सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 फीसदी चढ़कर 73,895.74 पर पहुंच गया था. वहीं, निफ्टी 77.40 अंक यानी 0.34 फीसदी की तेजी के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में आज यानी सोमवार, 28 सितंबर को कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी करीब 80 अंक फिसलकर 23,100 के आसपास आ गया है, जबकि अमेरिकी वायदा बाजारों में भी दबाव है. कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच बाजार की नजर आज ग्लोबल संकेतों, क्रूड और FII-DII गतिविधियों पर रहेगी.
शुक्रवार को सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ था. सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 फीसदी चढ़कर 73,895.74 पर पहुंच गया था. वहीं, निफ्टी 77.40 अंक यानी 0.34 फीसदी की तेजी के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 20 बढ़त और 10 गिरावट के साथ बंद हुए थे.
शुक्रवार को एक्सिस बैंक सबसे आगे
शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स पर एक्सिस बैंक 2.82 फीसदी की तेजी के साथ सबसे ज्यादा चढ़ने वाला शेयर रहा. महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.24 फीसदी, एशियन पेंट्स में 1.93 फीसदी, बजाज फाइनेंस में 1.21 फीसदी और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 1.17 फीसदी की बढ़त रही. दूसरी ओर, ट्रेंट 1.41 फीसदी, इन्फोसिस 0.81 फीसदी, कोटक महिंद्रा बैंक 0.47 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक 0.41 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए. निफ्टी में एक्सिस बैंक 3.03 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा. एशियन पेंट्स में 2.14 फीसदी और महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.75 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.
अमेरिकी वायदा बाजारों में दबाव
आज के कारोबार से पहले अमेरिकी वायदा बाजारों में कमजोरी देखने को मिल रही है. डाओ फ्यूचर्स करीब 190 अंक गिरकर 51,970 के आसपास, S&P फ्यूचर्स करीब 25 अंक टूटकर 7,780 और नैस्डैक फ्यूचर्स करीब आधे फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है. हालांकि, एशियाई बाजारों में ज्यादातर प्रमुख इंडेक्स हरे निशान में हैं.
क्रूड 106 डॉलर के करीब
कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी बाजार के लिए अहम संकेत है. ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि WTI क्रूड 93 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है. होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के ईरान के प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा खारिज किए जाने के बाद तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है.
FII की बिकवाली जारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली भी घरेलू बाजार के लिए एक अहम चिंता बनी हुई है. 25 सितंबर के प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार, FII ने 3,696 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने 2,838 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया.
गुरुवार की गिरावट के बाद शुक्रवार को संभला बाजार
इससे पहले 24 सितंबर को बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली थी. सेंसेक्स 1,247 अंक यानी 1.67 फीसदी गिरकर 73,580.54 पर और निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 फीसदी टूटकर 23,063.10 पर बंद हुआ था. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, ब्याज दरों को लेकर चिंता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये में कमजोरी जैसे कारकों के बीच बाजार पर दबाव बना था. शुक्रवार की रिकवरी के बाद अब सोमवार के कारोबार में निवेशकों की नजर इन वैश्विक और घरेलू संकेतों पर रहेगी.
इन शेयरों पर रखें नजर
आज Unichem Laboratories, Aequs, Ceigall India, Zydus Lifesciences, Wheels India, SAIL, NMDC, Prestige Estates Projects और NTPC Green Energy के शेयरों पर नजर रहेगी. Unichem Laboratories की गोवा स्थित पिलरने फॉर्मुलेशन फैसिलिटी में USFDA का निरीक्षण पूरा हुआ, जिसमें पांच टिप्पणियां दर्ज की गईं. Aequs के बोर्ड ने प्रमोटर ग्रुप की कंपनी Mellwood Trustee Services को करीब ₹650 करोड़ के 2.8 करोड़ तक वारंट जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. Ceigall India अपने Arm Ceigall Sahebganj टर्म लोन के लिए सिक्योरिटी तैयार करेगी और संबंधित SPV में अतिरिक्त ₹62 करोड़ का निवेश करेगी. Zydus Lifesciences के न्यू जर्सी ऑफिस में USFDA के फार्माकोविजिलेंस और पोस्ट-मार्केटिंग सर्विलांस सिस्टम के निरीक्षण में कोई ऑब्जर्वेशन नहीं मिला. Wheels India ने 25 सितंबर को QIP पूरा करते हुए ₹2,088 प्रति शेयर के भाव पर 11.97 लाख शेयर आवंटित किए. SAIL और Bharat Coking Coal ने पश्चिम बंगाल में कोयला ब्लॉक्स के संयुक्त विकास और संचालन के लिए MoU किया है. NMDC ने छत्तीसगढ़ के नगरनार में 2 MTPA क्षमता वाले पेलेट प्लांट का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर दिया है. Prestige Estates Projects की सब्सिडियरी Prestige Hospitality Ventures ने रणनीतिक कारणों और मौजूदा बाजार परिस्थितियों में अनिश्चितता का हवाला देते हुए अपना DRHP वापस लेने का फैसला किया है. वहीं, NTPC Green Energy ने राजस्थान के बीकानेर में Kalasar Solar Energy Project की पहली 81.34 MW क्षमता का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर दिया है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
भारत मंडपम में 26 से 28 सितंबर तक आयोजित हो रहे तीन दिवसीय बी2बी एक्सपो में 650 से अधिक प्रदर्शक, 3,000 से ज्यादा ब्रांड और 1.5 लाख से अधिक अनूठे डिजाइन प्रदर्शित किए जा रहे हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का रत्न एवं आभूषण उद्योग आने वाले वर्षों में निर्यात को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है. दिल्ली ज्वेलरी एंड जेम फेयर (DJGF) 2026 के 14वें संस्करण के उद्घाटन के दौरान उद्योग से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों ने निर्यात बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA), वैल्यू एडिशन, कारीगरों के कौशल विकास और बदलती उपभोक्ता मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया.
नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 26 से 28 सितंबर तक आयोजित हो रहे इस तीन दिवसीय बी2बी एक्सपो में 650 से अधिक प्रदर्शक, 3,000 से ज्यादा ब्रांड और 1.5 लाख से अधिक अनूठे डिजाइन प्रदर्शित किए जा रहे हैं.
‘वोकल फॉर लोकल’ से ‘लोकल टू ग्लोबल’
उद्घाटन के अवसर पर निर्यात क्षमता और कारीगरों के कौशल विकास पर बल देते हुए लोकसभा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, भारत का रत्न एवं आभूषण क्षेत्र लगभग 1.65 लाख करोड़ डॉलर के आयात के मुकाबले करीब 2.5 लाख करोड़ डॉलर के सामान का निर्यात करता है, जो इसके मजबूत निर्यात रुझान और देश के व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है. सरकार के 2030 के निर्यात लक्ष्यों की ओर बढ़ते हुए, उद्योग को निवेश, कौशल विकास और मूल्य संवर्धन के जरिए 'वोकल फॉर लोकल' से 'लोकल टू ग्लोबल' के सफर को गति देनी होगी. इसके साथ ही हमारे कारीगरों को पहचानना और उनका कौशल संवर्धन करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि उनकी कारीगरी सीधे तौर पर उत्पाद की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को तय करती है. उनकी क्षमताओं को निखारने से भारतीय आभूषण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे.
100 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य पर फोकस
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (भारत) के रीजनल सीईओ सचिन जैन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ सोने और आभूषण उद्योग के लिए बढ़ते अवसरों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में आगे बढ़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के 4.5 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. जैन ने ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ रोडमैप का उल्लेख करते हुए कहा कि अगले 5 से 7 वर्षों में भारत की सोने की खपत का करीब 20 से 25 फीसदी हिस्सा घरेलू खदानों से आ सकता है. वहीं, आभूषण निर्यात को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.
FTA से 55 अरब डॉलर के बाजार में अवसर
NJGCI के अध्यक्ष प्रमोद डेरावाला ने मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय ज्वेलरी उद्योग के लिए बाजार पहुंच बढ़ने की संभावनाओं पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि जिन देशों के साथ भारत ने FTA किए हैं, वे करीब 55 अरब डॉलर के आभूषणों का आयात करते हैं, जबकि इन बाजारों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 8 अरब डॉलर है. डेरावाला के मुताबिक, यह अंतर भारतीय ज्वेलरी उद्योग के लिए निर्यात बढ़ाने की संभावित गुंजाइश को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि सरकारी पहलों और FTA के जरिए बेहतर बाजार पहुंच के साथ विनिर्माण और निर्यात दोनों में विस्तार की संभावना है.
सोने की ऊंची कीमतों से लाइटवेट ज्वेलरी की मांग
सोने की कीमतों में तेजी का असर उपभोक्ताओं की पसंद पर भी दिखाई दे रहा है. डेरावाला के अनुसार, ग्राहक अब हल्के वजन वाले आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं. हालांकि, 90 फीसदी से अधिक हाई-वैल्यू ज्वेलरी खरीदारी अब भी फिजिकल रिटेल के माध्यम से होती है. इससे संकेत मिलता है कि ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के बावजूद महंगे आभूषणों की खरीदारी में पारंपरिक ज्वेलर्स और फिजिकल स्टोर की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है.
ग्लोबल गोल्ड ज्वेलरी डिमांड में भारत की 27% हिस्सेदारी
इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रास ने कहा कि भारतीय ज्वेलरी उद्योग वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और बदलाव के दौर से गुजर रहा है. उनके मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में वैश्विक स्वर्ण आभूषण मांग में भारत की हिस्सेदारी 27 फीसदी रही. सोने की ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ताओं और रिटेलरों के बीच हल्के वजन और कीमत के लिहाज से किफायती आभूषणों की मांग बढ़ी है. मुद्रास ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 27.72 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हाल ही में घोषित 2040 रोडमैप में इस निर्यात को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.
उद्घाटन में उद्योग जगत के प्रमुख लोग शामिल
DJGF 2026 के उद्घाटन कार्यक्रम में inD के सीईओ डेविड लिन, द बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन दिल्ली (TBJA) के अध्यक्ष रामावतार वर्मा, TBJA के वरिष्ठ अध्यक्ष नवीन कुमार जिंदल और ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा, इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया की सीनियर ग्रुप डायरेक्टर पल्लवी मेहरा सहित ज्वेलरी और जेम्स सेक्टर से जुड़े अन्य उद्योग प्रतिनिधि भी मौजूद थे.
गडकरी ने इथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का बचाव करते हुए कहा कि भारत में इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि अक्टूबर में टोयोटा (Toyota) की ऐसी इनोवा (Innova) लॉन्च की जाएगी, जो 100 फीसदी इथेनॉल पर चल सकेगी. उनके मुताबिक, इस कार को चलाने की लागत करीब ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल से चलने वाली गाड़ी के बराबर हो सकती है. गडकरी ने यह बात ऐसे समय कही है, जब पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की E20 नीति को लेकर वाहन के माइलेज और इंजन पर संभावित असर की चर्चा जारी है.
अक्टूबर में लॉन्च होगी 100% इथेनॉल वाली इनोवा
गडकरी के मुताबिक, उन्हें अक्टूबर में टोयोटा इनोवा फ्लेक्स-फ्यूल कार के लॉन्च के लिए आमंत्रित किया गया है. यह गाड़ी पेट्रोल के बजाय 100 फीसदी इथेनॉल पर चलने के लिए तैयार की गई है. उन्होंने यह भी दावा किया कि वाहन चलते समय करीब 60 फीसदी बिजली पैदा कर सकेगा.
गडकरी ने इथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का बचाव करते हुए कहा कि भारत में इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों में इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है.
क्या है गडकरी का ₹25 वाला फॉर्मूला?
गडकरी ने कहा कि 100 फीसदी इथेनॉल से चलने वाली इस कार को चलाने की लागत करीब ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल से चलने वाली कार के बराबर होगी. यानी उनका दावा वाहन की अनुमानित रनिंग कॉस्ट से जुड़ा है. इसे सीधे तौर पर पेट्रोल की कीमत ₹25 प्रति लीटर होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
इथेनॉल की कीमत और वाहन की ईंधन दक्षता के अलावा वास्तविक रनिंग कॉस्ट कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करेगी. इसलिए कार के बाजार में आने के बाद इसकी वास्तविक ईंधन खपत और लागत की तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होगी.
E20 पेट्रोल को लेकर क्या है विवाद?
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति के तहत E20 फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ाया गया है. E20 पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल और बाकी हिस्सा पेट्रोल होता है. इस नीति को लेकर कुछ वाहन मालिकों और अन्य पक्षों ने माइलेज, इंजन की उम्र और रखरखाव लागत को लेकर सवाल उठाए हैं.
गडकरी ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को लेकर देश में वाहनों से कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई है. सरकार की ओर से भी पहले कहा गया है कि वाहन कंपनियों, ऑटोमोबाइल संगठनों और उपभोक्ता समूहों से E20 के कारण माइलेज, इंजन की टिकाऊपन या रखरखाव लागत पर किसी बड़े प्रतिकूल प्रभाव की ठोस शिकायत नहीं मिली है.
सरकार ने अपने पक्ष में इंजन की ड्यूरेबिलिटी, मटीरियल कम्पैटिबिलिटी और फील्ड ट्रायल से जुड़ी स्टडी का भी हवाला दिया है.
फ्लेक्स-फ्यूल कार क्या होती है?
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे इंजन से लैस होते हैं, जो पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले ईंधन पर चल सकते हैं. आम तौर पर इन वाहनों में E20 से लेकर ज्यादा इथेनॉल मिश्रण और कुछ मामलों में लगभग शुद्ध इथेनॉल तक इस्तेमाल किया जा सकता है.
भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में वाहन कंपनियां भी काम कर रही हैं. जून में मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार पेश की थी. इसका उद्देश्य पेट्रोल के साथ अलग-अलग अनुपात में इथेनॉल वाले ईंधन के इस्तेमाल को संभव बनाना है.
इथेनॉल को बढ़ावा देने के पीछे सरकार की क्या वजह है?
सरकार लंबे समय से पेट्रोलियम ईंधन के विकल्प के तौर पर इथेनॉल, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की बात करती रही है. गडकरी का कहना है कि इथेनॉल के उत्पादन से किसानों के लिए आय के नए अवसर बन सकते हैं.
उन्होंने अलग-अलग मौकों पर मक्का समेत इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली फसलों की मांग बढ़ने का भी जिक्र किया है. सरकार की नीति का एक उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना है.
बाइक टैक्सी को लेकर भी गडकरी ने कही बात
कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने बाइक टैक्सी सेवाओं को बढ़ावा देने की भी बात कही. उनके मुताबिक, ऐप आधारित प्लेटफॉर्म उन लोगों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकते हैं, जिनके पास पहले से दोपहिया वाहन हैं.
उन्होंने राज्यों के परिवहन मंत्रियों से ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस तरह की सेवाओं के विकल्प पर विचार करने की अपील की. गडकरी का कहना है कि बाइक टैक्सी के विस्तार से बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो सकते हैं.