जर्मनी की लॉजिस्टिक्स दिग्गज डीएचएल ने इस साल जर्मनी में 8,000 नौकरियों में कटौती करने की योजना बनाई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
जर्मन लॉजिस्टिक्स कंपनी DHL ने बड़ा ऐलान किया है. DHL, इस साल 8,000 लोगों की छंटनी करने जा रहा है. DHL ने 2027 तक 1 बिलियन यूरो ($1.08 बिलियन) से अधिक बचत करने के लिए इस साल 8,000 नौकरियों की छंटनी करने का ऐलान किया है. जर्मन लॉजिस्टिक्स कंपनी ने बताया कि इसके वार्षिक ऑपरेशनल लाभ में 7.2% की गिरावट आई है. यह छंटनी DHL के पोस्ट एंड पार्सल जर्मनी डिवीजन में की जाएगी और यह कुल कर्मचारियों का 1% से अधिक होगी. यह कदम कंपनी के "फिट फॉर ग्रोथ" प्रोग्राम का हिस्सा है.
8000 लोगों की होगी छंटनी
DHL के CEO टोबियास मेयर ने कहा कि छंटनी जबरन नहीं होगी, बल्कि कर्मचारियों के स्वाभाविक रूप से हटने से होगी. डीएचएल के अनुसार, कंपनी दुनिया भर के 220 से अधिक देशों और क्षेत्रों में लगभग 602,000 लोगों को रोजगार देती है. पोस्ट एंड पार्सल जर्मनी डिवीजन में कंपनी के 190,000 कर्मचारी हैं. बढ़ती लागत और कागजों कमी के कारण, पोस्ट और पार्सल विभाग को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, मेयर ने कहा कि डीएचएल इस विभाग को बेचने का कोई इरादा नहीं रखता है. उन्होंने बताया कि डीएचएल में नौकरियों में कटौती का एक कारण मंगलवार को वर्डी श्रमिक संघ के साथ किए गए वेतन समझौते में था, जिसमें 5% वेतन वृद्धि और अतिरिक्त छुट्टियों के दिन शामिल थे.
कंपनी ने किया ऐलान
कंपनी के सीईओ ने कहा, "इस समझौते के कारण 2026 के अंत तक हमें लगभग 360 मिलियन यूरो का खर्च उठाना पड़ेगा." कंपनी के सीईओ मेयर ने एक बयान में कहा, "हमारी उम्मीद है कि 2025 में वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक स्थिति अस्थिर रहेगी." 2025 के लिए, कंपनी को 6 बिलियन यूरो से अधिक का ओपरेटिंग प्रॉफिट होने की उम्मीद है, जो विश्लेषकों के 6.29 बिलियन यूरो के अनुमान से कम है.
कैसी है कंपनी की वित्तीय प्रदर्शन
2024 में कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBIT) 5.89 बिलियन यूरो रहा, जो अनुमानों (5.81 बिलियन यूरो) से थोड़ा बेहतर था. हालांकि, 2025 के लिए कंपनी ने 6 बिलियन यूरो से अधिक ऑपरेटिंग प्रॉफिट का अनुमान लगाया है, जो एक्सपर्ट की अनुमान 6.29 बिलियन यूरो के से कम है. इस दौरान कंपनी को उम्मीद है कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक स्थिति में अस्थिर बनी रहेगी. कंपनी ने निवेशकों को रिटर्न देने की नीति जारी रखते हुए प्रति शेयर 1.85 यूरो का स्थिर डिविडेंड देने का प्रस्ताव रखा है. साथ ही, शेयर बायबैक प्रोग्राम को 2 बिलियन यूरो बढ़ाकर 6 बिलियन यूरो तक कर दिया गया है, जिसे 2026 तक बढ़ाया गया है.
डायमंड पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसे 435.71 करोड़ रुपये का नया कॉन्ट्रैक्ट मिला है. यह ऑर्डर हैदराबाद में विकसित हो रहे 310 मेगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर प्रोजेक्ट से जुड़ा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में तेजी के बीच मल्टीबैगर स्टॉक डायमंड पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर एक बार फिर निवेशकों के रडार पर आ गया है. कंपनी को 435.71 करोड़ रुपये का नया ऑर्डर मिलने के बाद सोमवार को इसके शेयर में 10 फीसदी का अपर सर्किट लग गया. पिछले पांच वर्षों में यह स्टॉक निवेशकों को 2.57 लाख फीसदी (257,276%) से अधिक का रिटर्न दे चुका है और नए ऑर्डर के बाद इसमें एक बार फिर खरीदारी का माहौल देखने को मिला.
435 करोड़ रुपये का मिला बड़ा ऑर्डर
डायमंड पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसे 435.71 करोड़ रुपये का नया कॉन्ट्रैक्ट मिला है. यह ऑर्डर हैदराबाद में विकसित हो रहे 310 मेगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर प्रोजेक्ट से जुड़ा है. इस परियोजना के तहत कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और ब्लू स्टार जैसी प्रमुख कंपनियों को हाई और लो टेंशन पावर केबल्स की आपूर्ति करेगी. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े ऑर्डर से कंपनी की ऑर्डर बुक और राजस्व दोनों को मजबूती मिलेगी.
ऑर्डर की खबर से शेयर में लगा अपर सर्किट
नए प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद निवेशकों ने कंपनी के शेयरों में जोरदार खरीदारी की. कारोबार के दौरान शेयर में 10 फीसदी का अपर सर्किट लगा और इसका भाव करीब 218.77 रुपये तक पहुंच गया. विश्लेषकों के अनुसार, मजबूत ऑर्डर बुक और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में कंपनी की बढ़ती हिस्सेदारी निवेशकों का भरोसा बढ़ा रही है.
5 साल में दिया 2.57 लाख फीसदी से ज्यादा रिटर्न
डायमंड पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर उन चुनिंदा शेयरों में शामिल है, जिन्होंने लंबी अवधि के निवेशकों को असाधारण रिटर्न दिया है. पिछले पांच वर्षों में इस शेयर ने 257,276.47 फीसदी का रिटर्न दिया है, जो भारतीय शेयर बाजार के सबसे चर्चित मल्टीबैगर रिटर्न में से एक माना जाता है. इसी शानदार प्रदर्शन की वजह से यह स्टॉक एक बार फिर निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.
निवेशकों की नजर आगे की ग्रोथ पर
बाजार जानकारों का मानना है कि यदि कंपनी को इसी तरह बड़े ऑर्डर मिलते रहे और परियोजनाओं का समय पर निष्पादन होता रहा, तो आने वाले समय में भी इसके प्रदर्शन पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है. हालांकि, किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, मूल्यांकन और जोखिमों का आकलन करना जरूरी है.
पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा इश्यू. 27 हाईवे प्रोजेक्ट्स और 36,842 करोड़ रुपये की AUM के साथ निवेशकों का दायरा बढ़ाने और लिक्विडिटी मजबूत करने पर कंपनी का फोकस.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए जल्द ही एक बड़ा अवसर आने वाला है. क्यूब हाईवेज ट्रस्ट (Cube InvIT) इस महीने करीब 5,000 करोड़ रुपये का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लॉन्च कर सकता है. यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, जिसमें मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. कंपनी का उद्देश्य निवेशकों की संख्या बढ़ाना, यूनिट्स की लिक्विडिटी में सुधार करना और भविष्य के विस्तार को गति देना है.
पूरी तरह OFS होगा IPO
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, क्यूब हाईवेज ट्रस्ट का प्रस्तावित IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा. यानी इस इश्यू के तहत कंपनी कोई नई यूनिट या शेयर जारी नहीं करेगी. इसके बजाय मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. ऐसे में IPO से मिलने वाली राशि कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि शेयर बेचने वाले निवेशकों को मिलेगी.
देशभर में फैला है हाईवे पोर्टफोलियो
31 मार्च 2026 तक क्यूब हाईवेज ट्रस्ट के पास 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में फैले 27 परिचालन हाईवे प्रोजेक्ट्स हैं. इनकी कुल लंबाई 8,754 लेन किलोमीटर है, जबकि इन परियोजनाओं की औसत शेष कंसेशन अवधि करीब 18 वर्ष है.
टोल और एन्युटी एसेट्स का संतुलित पोर्टफोलियो
कंपनी के पोर्टफोलियो का लगभग 85 फीसदी हिस्सा टोल रोड परियोजनाओं का है, जिससे ट्रैफिक बढ़ने और टोल दरों में समय-समय पर होने वाले संशोधन का लाभ मिलता है. वहीं, शेष 15 फीसदी हिस्सा एन्युटी एसेट्स का है, जिनसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की निर्धारित भुगतान व्यवस्था के तहत नियमित और स्थिर आय प्राप्त होती है.
कंपनी की रणनीति क्या है?
क्यूब हाईवेज ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विनय सी. सेकर ने वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि कंपनी की रणनीति अनुशासित अधिग्रहण, नियमित निवेशक वितरण, वित्तीय अनुशासन और परिचालन दक्षता पर आधारित रहेगी. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट भविष्य में भी उच्च गुणवत्ता वाली सड़क परियोजनाओं का अधिग्रहण कर अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करता रहेगा.
निवेशकों को मिला मजबूत वितरण
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान क्यूब हाईवेज ट्रस्ट ने प्रति यूनिट 13.77 रुपये का वितरण घोषित किया. पूरे वित्त वर्ष में ट्रस्ट ने अपने यूनिटधारकों को 1,851 करोड़ रुपये का कुल वितरण किया.
वित्तीय स्थिति रही मजबूत
मार्च 2026 के अंत तक ट्रस्ट की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 36,842 करोड़ रुपये हो गई. इस वृद्धि में वित्त वर्ष के दौरान किए गए 9 नए अधिग्रहणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. हालांकि, इसी अवधि में ट्रस्ट का शुद्ध कर्ज (Net Debt) बढ़कर 17,768 करोड़ रुपये रहा, जबकि नेट डेट-टू-एंटरप्राइज वैल्यू अनुपात 46.82 फीसदी दर्ज किया गया.
आगे और विस्तार की तैयारी
क्यूब हाईवेज ट्रस्ट ने करीब 7,300 करोड़ रुपये के संयुक्त एंटरप्राइज वैल्यू वाले चार नए हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए कमिटमेंट लेटर पर हस्ताक्षर किए हैं. इनके जुड़ने के बाद ट्रस्ट का पोर्टफोलियो बढ़कर 13 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 31 हाईवे एसेट्स तक पहुंच जाएगा.
इसके अलावा, ट्रस्ट ने अपने स्पॉन्सर की तीन अन्य सड़क परियोजनाओं पर राइट ऑफ फर्स्ट ऑफर (ROFO) भी हासिल किया है, जिससे भविष्य में विस्तार की संभावनाएं और मजबूत होंगी.
वित्त मंत्री के अनुसार, वर्तमान में भारत की करीब 31 फीसदी आबादी मिडिल क्लास में शामिल है. वर्ष 1995 से इस वर्ग की आबादी में औसतन 6.3 फीसदी सालाना वृद्धि दर्ज की गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की आर्थिक विकास यात्रा को लेकर बड़ा अनुमान जताया है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2036 तक देश के कुल उपभोक्ता खर्च का 93 फीसदी हिस्सा मिडिल क्लास और एस्पिरेशनल कंज्यूमर्स से आएगा, जिससे यह वर्ग भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बन जाएगा. उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहर भी देश की विकास कहानी के प्रमुख केंद्र बनेंगे.
2036 तक मिडिल क्लास बनेगा अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत
फ्रांस में आयोजित 'Rencontres Economiques d'Aix-en-Provence' सम्मेलन में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का मध्यम वर्ग अब केवल आर्थिक विकास का लाभार्थी नहीं, बल्कि उसका सबसे बड़ा चालक (Growth Engine) बनने जा रहा है. उनके मुताबिक, 2036 तक देश में होने वाले कुल उपभोक्ता खर्च का 93 फीसदी हिस्सा मिडिल क्लास और बेहतर जीवन की आकांक्षा रखने वाले उपभोक्ताओं से आएगा.
500 शहर बनेंगे नए आर्थिक केंद्र
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की आर्थिक गतिविधियां अब केवल मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं रहेंगी. आने वाले वर्षों में करीब 500 शहर नए आर्थिक केंद्र बनकर उभरेंगे. उन्होंने कहा कि भारत का मिडिल क्लास तेजी से टियर-2 और टियर-3 शहरों में विस्तार कर रहा है. इससे संपत्ति, निवेश और कारोबार का दायरा बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों तक पहुंचेगा, जिससे संतुलित आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.
तेजी से बढ़ रहा है भारत का मिडिल क्लास
वित्त मंत्री के अनुसार, वर्तमान में भारत की करीब 31 फीसदी आबादी मिडिल क्लास में शामिल है. वर्ष 1995 से इस वर्ग की आबादी में औसतन 6.3 फीसदी सालाना वृद्धि दर्ज की गई है. उन्होंने OECD के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि 2030 से 2035 के बीच मिडिल क्लास आबादी के मामले में भारत चीन को भी पीछे छोड़ सकता है.
जनधन से लेकर डिजिटल इंडिया तक, सरकार की रणनीति
निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने कम आय वाले लोगों को मिडिल क्लास में शामिल करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं. वर्ष 2014 में शुरू की गई प्रधानमंत्री जनधन योजना के जरिए करोड़ों लोगों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया. विश्व बैंक और IMF के आंकड़ों के अनुसार, 24.8 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो पहली बार बैंकिंग सिस्टम से जुड़े.
आसान लोन और डिजिटल सुविधाओं से बढ़ा कारोबार
वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने बिना गारंटी वाले आसान ऋण उपलब्ध कराकर छोटे कारोबार शुरू करने को बढ़ावा दिया. इसके साथ ही डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सेवाओं को स्मार्टफोन के अलावा फीचर फोन और क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराया गया, जिससे छोटे व्यवसायों की वित्तीय पहुंच और क्रेडिट क्षमता मजबूत हुई.
टैक्स राहत से बढ़ी लोगों की खर्च करने की क्षमता
सीतारमण ने कहा कि सरकार ने आयकर में राहत देकर मध्यम वर्ग को बड़ी सुविधा दी है. इनकम टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये किए जाने से लोगों के हाथ में अधिक डिस्पोजेबल इनकम आई है.
इसके अलावा कई वस्तुओं पर GST दरों में कटौती, हर परिवार के लिए 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा और जन औषधि केंद्रों पर 80 फीसदी तक सस्ती जेनेरिक दवाओं जैसी योजनाओं ने भी परिवारों का आर्थिक बोझ कम किया है.
युवाओं के स्किल डेवलपमेंट पर सरकार का फोकस
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए युवाओं के कौशल विकास पर विशेष जोर दे रही है. इसके तहत प्रत्येक जिले में STEM शिक्षा के लिए छात्रावासों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है और देश में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित की जा रही हैं.
साथ ही युवाओं को AVGC (Animation, Visual Effects, Gaming and Comics) जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे फिल्म, OTT और वैश्विक एक्सपोर्ट इंडस्ट्री की मांग को पूरा कर सकें.
मिडिल क्लास ही भारत की विकास यात्रा का इंजन
निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार के आर्थिक सुधारों और कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य मिडिल क्लास को मजबूत बनाना है. उनका मानना है कि जब लोगों की आय और खर्च करने की क्षमता बढ़ती है, तो इसका सीधा असर निवेश, कारोबार, रोजगार और आर्थिक विकास पर पड़ता है.
उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में भारत का मध्यम वर्ग ही देश की आर्थिक प्रगति का सबसे बड़ा आधार बनेगा और भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था की अग्रणी ताकतों में शामिल करने में अहम भूमिका निभाएगा.
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने BW Businessworld और exchange4media Group के संस्थापक डॉ. अनुराग बत्रा को मीडिया, उद्योग और प्रोफेशनल कम्युनिटी निर्माण में उल्लेखनीय योगदान के लिए विशेष सम्मान दिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मीडिया, विज्ञापन और एक्सपीरिएंशियल इकोनॉमी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले BW Businessworld के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ और exchange4media Group** के संस्थापक डॉ. अनुराग बत्रा को विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया. यह सम्मान मीडिया, उद्योग और नॉलेज कम्युनिटी को मजबूत बनाने में उनके ढाई दशक से अधिक के योगदान की पहचान है.
मीडिया और उद्योग जगत में योगदान को मिली पहचान
डॉ. अनुराग बत्रा को यह सम्मान मीडिया, विज्ञापन, मार्केटिंग, इवेंट्स, टेक्नोलॉजी और बिजनेस से जुड़े क्षेत्रों में मजबूत संस्थानों, प्रोफेशनल मंचों और उद्योग समुदायों के निर्माण के लिए दिया गया. पिछले 26 वर्षों में उन्होंने ऐसे कई प्लेटफॉर्म विकसित किए, जिन्होंने उद्योग जगत में संवाद, नवाचार और नेतृत्व को नई दिशा दी.
सम्मान मिलने पर क्या बोले डॉ. अनुराग बत्रा
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गर्व का विषय है. उन्होंने कहा कि भारत की एक्सपीरिएंशियल इकोनॉमी आज कारोबार, संस्कृति और नवाचार का मजबूत आधार बन चुकी है और इस क्षेत्र के विकास में योगदान देने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है. उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें ऐसे मंच और समुदाय विकसित करने के लिए और अधिक प्रेरित करेगा, जो समाज और उद्योग पर दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव छोड़ें.
26 वर्षों में बनाया देश का अग्रणी मीडिया नेटवर्क
डॉ. अनुराग बत्रा ने 26 वर्ष पहले exchange4media Group की स्थापना की थी. आज यह समूह मीडिया, विज्ञापन और मार्केटिंग उद्योग के सबसे प्रभावशाली नेटवर्क में शामिल है. इसके अंतर्गत exchange4media.com, samachar4media.com, IMPACT और Pitch जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड संचालित किए जा रहे हैं. समूह ने अब तक 50 से अधिक प्रमुख इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म, अवॉर्ड्स और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज विकसित की हैं, जिन्होंने विज्ञापन, डिजिटल मीडिया, ब्रॉडकास्टिंग, पब्लिक रिलेशंस, टेक्नोलॉजी और क्रिएटर इकोनॉमी से जुड़े हजारों पेशेवरों को एक मंच पर जोड़ा है.
BW Businessworld को दिया नया स्वरूप
वर्ष 2013 में डॉ. बत्रा ने BW Businessworld का अधिग्रहण किया. इसके बाद उन्होंने इस पारंपरिक बिजनेस मैगजीन को प्रिंट, डिजिटल, वीडियो, रिसर्च, इवेंट्स और प्रोफेशनल कम्युनिटी आधारित 360 डिग्री मीडिया संगठन के रूप में विकसित किया. आज यह प्लेटफॉर्म मार्केटिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा, हॉस्पिटैलिटी, टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी, गवर्नेंस और लीगल जैसे कई क्षेत्रों में विशेष प्रकाशनों और कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी मजबूत पहचान बना चुका है.
वैश्विक स्तर पर भी बनाई पहचान
डॉ. अनुराग बत्रा की पहचान केवल भारत तक सीमित नहीं है. वर्ष 2024 में उन्हें इंटरेनशनल एकेडमी ऑफ टेलीविजन आर्ट्स एंड साइंसेज (International Academy of Television Arts & Sciences) का सदस्य चुना गया, जो International Emmy Awards से जुड़ी प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था है. उन्होंने वर्ष 2024 और 2025 में नई दिल्ली में International Emmy Awards की सेमीफाइनल जजिंग की मेजबानी भी की, जिससे भारतीय मीडिया उद्योग और वैश्विक संस्थाओं के बीच सहयोग को नई मजबूती मिली.
शिक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी सक्रिय भूमिका
मीडिया उद्यमिता के अलावा डॉ. बत्रा ने प्रबंधन शिक्षा और संस्थागत विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. वे मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (MDI) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य रह चुके हैं और संस्थान के प्रमुख PGPM कार्यक्रम के पहले पूर्व छात्र थे, जिन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके अलावा उन्होंने मीडिया, टेक्नोलॉजी और उपभोक्ता क्षेत्र के कई स्टार्टअप्स में निवेश और मार्गदर्शन देकर युवा उद्यमियों को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है.
'Content, Connect and Context' रही सफलता की आधारशिला
डॉ. अनुराग बत्रा ने अपने पूरे करियर में "Content, Connect and Context" के सिद्धांत को आगे बढ़ाया है. उनका मानना है कि विश्वसनीय कंटेंट, मजबूत नेटवर्क और उद्योग की गहरी समझ का समन्वय ही किसी संस्थान को दीर्घकालिक सफलता दिलाता है.
भारत की एक्सपीरिएंशियल इकोनॉमी को दी नई दिशा
डॉ. अनुराग बत्रा के नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, समिट, अवॉर्ड्स और नेतृत्व मंचों ने हजारों उद्योग विशेषज्ञों, उद्यमियों, नीति-निर्माताओं और प्रोफेशनल्स को एक साथ जोड़ने का काम किया है. मीडिया और एक्सपीरिएंशियल इकोनॉमी को मजबूत बनाने में उनके बहुआयामी योगदान को देखते हुए केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दिया गया यह विशेष सम्मान उनकी उपलब्धियों की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है.
सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इंस्टाग्राम (Instagram) पर बच्चों के यौन शोषण (CSAM) से जुड़ी सामग्री और विज्ञापनों के प्रसार को लेकर मेटा को नोटिस जारी किया है. मंत्रालय ने कंपनी को ऐसे सभी कंटेंट को तत्काल हटाने और सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है.
7 दिन में मांगा विस्तृत स्पष्टीकरण
सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय ने मेटा से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री और उसे बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को प्लेटफॉर्म पर अनुमति कैसे मिली. सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कंपनी की विज्ञापन नीतियों और कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया पर भी जवाब मांगा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने मेटा को कड़ा नोटिस जारी करते हुए बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में उसकी जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की है.
अश्विनी वैष्णव के निर्देश पर हुई कार्रवाई
पिछले सप्ताह इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों की खबर सामने आने के बाद आईटी मंत्रालय ने मेटा और इंस्टाग्राम के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया था. केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को मामले की जांच कर कंपनी से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए थे.
Meta ने क्या दी सफाई?
मेटा ने अपने बचाव में कहा है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और ऐसे विज्ञापनों के प्रति उसकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति है. कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, मेटा नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट और अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें हटाने के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग करती है. हालांकि, कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि करोड़ों उपयोगकर्ताओं के बीच छिपे अपराधियों की पहचान करना लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.
WhatsApp फीचर पर भी पहले भेजा था नोटिस
गौरतलब है कि पिछले दो सप्ताह में यह दूसरा अवसर है जब आईटी मंत्रालय ने मेटा को नोटिस भेजा है. इससे पहले सरकार ने व्हाट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर चिंता जताते हुए उसे फिलहाल लागू नहीं करने का निर्देश दिया था. मंत्रालय का मानना है कि इस फीचर का इस्तेमाल साइबर अपराध, धोखाधड़ी और फर्जी पहचान के लिए किया जा सकता है.
WhatsApp ने सुरक्षा उपायों का दिया भरोसा
व्हाट्सऐप ने सरकार को आश्वस्त किया है कि यूजरनेम फीचर के साथ कई सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे. कंपनी के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर फोन नंबर की अनिवार्यता बनी रहेगी और फर्जी अकाउंट, प्रतिरूपण तथा दुरुपयोग को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा तंत्र भी विकसित किए गए हैं.
बच्चों की सुरक्षा पर सरकार का सख्त संदेश
सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा. मेटा से मांगे गए जवाब के आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है.
यह अत्याधुनिक मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी शिवपुरी में स्थापित होगी, इस परियोजना से 5,000 रोजगार और 50 से अधिक MSME को बढ़ावा मिलेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देने की दिशा में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी में दक्षिण एशिया के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के मिसाइल इकोसिस्टम की आधारशिला रखी है. लगभग ₹2,500 करोड़ के निवेश वाली यह परियोजना भारत के निजी रक्षा उद्योग के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है. इस अत्याधुनिक यूनिट में कच्चे माल से लेकर मिशन के लिए तैयार मिसाइल सिस्टम तक का पूरा निर्माण एक ही परिसर में किया जाएगा.
शिवपुरी बनेगा देश का नया मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग हब
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में स्थापित होने वाली यह इंटीग्रेटेड मिसाइल फैसिलिटी भारत के निजी रक्षा क्षेत्र की पहली ऐसी परियोजना होगी, जहां मिसाइल निर्माण की पूरी वैल्यू चेन एक ही छत के नीचे मौजूद होगी. इस परियोजना की आधारशिला मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्य के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में रखी गई.
₹2,500 करोड़ का निवेश, 5,000 लोगों को मिलेगा रोजगार
अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस अगले तीन वर्षों में इस परियोजना पर ₹2,500 करोड़ का निवेश करेगी. कंपनी के अनुसार, परियोजना के शुरू होने के बाद लगभग 5,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा. साथ ही 50 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनेंगे.
मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइलों का होगा निर्माण
शिवपुरी परिसर में मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों का निर्माण किया जाएगा. यहां कंपोजिट प्रोपेलेंट, TNT और अन्य विस्फोटक ग्रेड सामग्री के उत्पादन की भी सुविधा होगी. इससे देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूती मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी.
ग्वालियर-शिवपुरी मिलकर बनाएंगे डिफेंस क्लस्टर
अडानी एंटरप्राइजेज के निदेशक जीत अडानी ने कहा कि ग्वालियर और शिवपुरी की इकाइयां मिलकर मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करेंगी. वर्तमान में ग्वालियर स्थित यूनिट में लाइट मशीन गन, असॉल्ट राइफल और कार्बाइन का निर्माण किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कंपनी की लाइट मशीन गन परियोजना के तहत भारतीय सशस्त्र बलों को 2,000 हथियार निर्धारित समय से 11 महीने पहले उपलब्ध कराए जा चुके हैं.
मध्य प्रदेश में बढ़ रहा अडानी ग्रुप का निवेश
शिवपुरी परियोजना अडानी ग्रुप की मध्य प्रदेश में दीर्घकालिक निवेश रणनीति का हिस्सा है. इससे पहले समूह ने राज्य में हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज, सीमेंट, माइनिंग, स्मार्ट मीटर और थर्मल पावर परियोजनाओं में ₹1.10 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा की थी. इन परियोजनाओं के माध्यम से वर्ष 2030 तक करीब 1.2 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है.
कई जिलों में चल रही हैं बड़ी परियोजनाएं
जीत अडानी ने बताया कि समूह कटनी जिले के अमेथा और कैमोर सीमेंट संयंत्रों में ₹4,000 करोड़ से अधिक का निवेश कर चुका है. इसके अलावा अडानी पावर मध्य प्रदेश को 1,200 मेगावाट बिजली की आपूर्ति कर रही है और इसे बढ़ाकर 5,600 मेगावाट करने की दिशा में काम चल रहा है. धार, रतलाम और उज्जैन में विंड एनर्जी परियोजनाएं, उज्जैन में प्रस्तावित सीमेंट प्लांट और गुना में ₹1,060 करोड़ की सीमेंट परियोजना भी समूह की प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं.
DRDO और सेना के साथ मिलकर होगा विकास
कंपनी ने कहा कि वह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय सशस्त्र बलों के साथ मिलकर अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास पर काम कर रही है. शिवपुरी की नई मिसाइल फैसिलिटी भारत को मिसाइल निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. इससे विदेशी रक्षा आयात पर निर्भरता घटेगी और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा.
शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 261.79 अंक चढ़कर 77,763.91 पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 95.15 अंक की बढ़त के साथ 24,270.85 पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया था. आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी के दम पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE)
सेंसेक्स 261.79 अंक चढ़कर 77,763.91 पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 95.15 अंक की बढ़त के साथ 24,270.85 पर बंद हुआ. अब सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बाजार की शुरुआत सुस्त रहने के संकेत मिल रहे हैं. GIFT Nifty लगभग सपाट कारोबार कर रहा है, जबकि एशियाई बाजारों में हल्की मजबूती देखने को मिल रही है.
शुक्रवार को बाजार में रही आईटी शेयरों की चमक
शुक्रवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स 600 अंक तक उछला था. HCL Tech, टेक महिंद्रा, इंफोसिस और TCS जैसे आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली. सेंसेक्स के 30 में से 24 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. वहीं, निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी हरे निशान में रहे. हालांकि बैंकिंग और पीएसयू बैंक शेयरों में अपेक्षाकृत कमजोरी रही.
आज GIFT Nifty से सपाट शुरुआत के संकेत
सोमवार सुबह GIFT Nifty 24,354 के आसपास लगभग सपाट कारोबार करता दिखा. इससे संकेत मिल रहे हैं कि भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सीमित दायरे में या हल्की बढ़त के साथ हो सकती है. पिछले तीन सत्रों की तेजी के बाद निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं.
एशियाई बाजारों में तेजी
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन अधिकांश एशियाई बाजारों में मजबूती रही. दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 0.62 प्रतिशत और चीन का CSI 300 लगभग 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा. तकनीकी शेयरों में खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से एशियाई बाजारों को समर्थन मिला.
72 डॉलर से नीचे फिसला ब्रेंट क्रूड
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 72 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है और यह करीब 71.78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. OPEC+ देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति की उम्मीद से तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. कच्चे तेल की नरमी भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती है.
सोना-चांदी में बढ़ी चमक
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है. गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 2.11 प्रतिशत और सिल्वर फ्यूचर्स में 3.56 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई.
फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर रहेगी नजर
इस सप्ताह बाजार की सबसे बड़ी नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जून बैठक के मिनट्स पर रहेगी. निवेशक इससे ब्याज दरों और आगे की मौद्रिक नीति के संकेत तलाशेंगे. इसका असर वैश्विक शेयर बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़े अहम घटनाक्रम निवेशकों की नजर में रहेंगे. HDFC Bank, Yes Bank, Bandhan Bank, RBL Bank, L&T Finance और CreditAccess Grameen ने पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट जारी किए हैं, जिनमें लोन और डिपॉजिट ग्रोथ पर बाजार की नजर रहेगी. वहीं, PB Fintech में Temasek की सहायक कंपनी Macritchie Investments ने 2.2% हिस्सेदारी बेच दी है. Shakti Pumps को महाराष्ट्र में 353.89 करोड़ रुपये का सोलर पंप ऑर्डर मिला है, जबकि Fortis Healthcare ओडिशा में 300 बेड के मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए Dion Group के साथ साझेदारी करेगी. Manappuram Finance के CEO दीपक रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया है. इसके अलावा ICICI Prudential Life Insurance के प्रमोटर वर्गीकरण में बदलाव की योजना, Godrej Consumer Products और Dabur India के मजबूत तिमाही आउटलुक तथा Vedanta Oil & Gas के उत्पादन में गिरावट जैसे घटनाक्रम भी संबंधित शेयरों में हलचल पैदा कर सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
जिष्णु सेन को उन चुनिंदा मार्केटिंग नेताओं में गिना जाता था जिन्होंने पारंपरिक ब्रांड निर्माण और आधुनिक डिजिटल मार्केटिंग, रिटेल तथा कंज्यूमर-टेक ग्रोथ के बीच सफल संतुलन स्थापित किया. उनका निधन भारतीय विज्ञापन और मार्केटिंग उद्योग के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के विज्ञापन और मार्केटिंग क्षेत्र के दिग्गज पेशेवर जिष्णु सेन का रविवार तड़के निधन हो गया. वह ग्रे इंडिया (Grey India) के पूर्व प्रेसिडेंट और सीईओ रह चुके थे. उनके निधन से विज्ञापन, ब्रांड रणनीति और मार्केटिंग उद्योग में शोक की लहर है.
जिष्णु सेन के निधन की जानकारी उनके चचेरे भाई शुभो सेनगुप्ता ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की. उन्होंने बताया कि सेन ने विज्ञापन और मार्केटिंग जगत में लंबा और प्रतिष्ठित करियर बनाया तथा बाद में बेंगलुरु में बस गए थे. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों से वह एक बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जीवन के प्रति अपना उत्साह और सकारात्मकता बनाए रखी.
शुभो सेनगुप्ता ने भावुक संदेश में लिखा कि उन्हें आज भी वह शर्मीला बच्चा याद है, जिसने कई दशक पहले कोलकाता में उनकी मां से आइसक्रीम दिलाने की जिद की थी. उन्होंने अंत में "ॐ शांति" लिखकर श्रद्धांजलि अर्पित की.
तीन दशक से अधिक का शानदार करियर
जिष्णु सेन का करियर तीन दशकों से अधिक समय तक फैला रहा. इस दौरान उन्होंने एजेंसी लीडरशिप, ब्रांड रणनीति, रिटेल मार्केटिंग और ग्रोथ एडवाइजरी जैसे कई अहम क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत JWT से की. इसके बाद वह Young & Rubicam से जुड़े, जहां न्यूयॉर्क में रहते हुए उन्होंने Colgate Asia-Pacific के कारोबार का नेतृत्व किया.
साल 2007 में उन्होंने Grey India का दामन थामा और बाद में इसके प्रेसिडेंट एवं सीईओ बने. उनके नेतृत्व में कंपनी ने उल्लेखनीय विकास किया और डिजिटल मार्केटिंग, एक्टिवेशन तथा शॉपर मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का विस्तार किया.
कई बड़ी कंपनियों में निभाई अहम जिम्मेदारियां
एजेंसी जगत में सफल पारी के बाद जिष्णु सेन कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े. उन्होंने Essar Telecom Retail में डायरेक्टर–ब्रांड स्ट्रेटेजी और बाद में Big Bazaar में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) के रूप में कार्य किया. हाल के वर्षों में वह ग्रोथ और मार्केटिंग सलाहकार के रूप में सक्रिय रहे. उन्होंने Porter, Bergner India, DealShare और L'amar जैसी कंपनियों को ब्रांड निर्माण और विकास रणनीति पर मार्गदर्शन दिया.
कई प्रतिष्ठित ब्रांड्स के साथ किया काम
अपने लंबे करियर में जिष्णु सेन ने Future Group, Pepsi, GSK, Yum Foods, Colgate Palmolive, Britannia, Reliance Telecom और Ferrero सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ काम किया.
उद्योग के लिए अपूरणीय क्षति
जिष्णु सेन को उन चुनिंदा मार्केटिंग नेताओं में गिना जाता था जिन्होंने पारंपरिक ब्रांड निर्माण और आधुनिक डिजिटल मार्केटिंग, रिटेल तथा कंज्यूमर-टेक ग्रोथ के बीच सफल संतुलन स्थापित किया. उनका निधन भारतीय विज्ञापन और मार्केटिंग उद्योग के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है.
यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और सीमा-पार निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) 4 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है. इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और स्थिर कारोबारी माहौल उपलब्ध कराना, निवेश को बढ़ावा देना और आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देना है. वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते पर 8 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे और अब यह आधिकारिक रूप से लागू हो गया है.
निवेशकों को मिलेगा सुरक्षित और पारदर्शी माहौल
इस समझौते का उद्देश्य भारत और इजरायल के निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य निवेश ढांचा उपलब्ध कराना है. इसके साथ ही यह उनके निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, जबकि सरकारों को सार्वजनिक हित से जुड़े वैध नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार भी बनाए रखेगा.
सरकार का कहना है कि यह समझौता आधुनिक निवेश प्रशासन के सिद्धांतों पर आधारित है, जो निवेशकों की सुरक्षा और देशों की नीतिगत संप्रभुता के बीच संतुलन स्थापित करता है.
बढ़ेगा द्विपक्षीय निवेश
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि BIA लागू होने से दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह में वृद्धि होगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा. इससे विभिन्न क्षेत्रों में सीमा-पार निवेश गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत और इजरायल के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे.
कई क्षेत्रों में पहले से मजबूत है साझेदारी
पिछले कुछ वर्षों में भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ा है. दोनों देश प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, रक्षा और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश समझौते के लागू होने से दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को नई गति मिलेगी और निवेशकों को एक स्थिर कानूनी ढांचा उपलब्ध होगा, जिससे भविष्य में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे.
केंद्रीय बैंक ने पाया कि बैंक ने कुछ लोन खातों में निर्धारित दर से अधिक ब्याज वसूला और KYC से जुड़े नियमों का भी पालन नहीं किया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग नियमों के उल्लंघन पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. केंद्रीय बैंक ने ग्राहकों से अधिक ब्याज वसूलने और KYC नियमों का पालन नहीं करने के मामले में बैंक पर 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके अलावा GIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर भी नियामकीय मानकों का उल्लंघन करने पर 3.1 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है.
लोन ग्राहकों से तय दर से अधिक ब्याज वसूला
RBI की जांच में सामने आया कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने कुछ लोन खातों में ग्राहकों से निर्धारित ब्याज दर से अधिक राशि वसूली. यह 'उधार देने वालों के लिए उचित व्यवहार संहिता' (Fair Practices Code) का उल्लंघन माना गया. नियामक के मुताबिक, बैंक ग्राहकों से तय शर्तों के अनुसार ही ब्याज वसूल सकता है और इससे अधिक वसूली बैंकिंग नियमों के खिलाफ है.
KYC नियमों में भी मिली लापरवाही
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि बैंक कई ग्राहकों की KYC जानकारी तय समयसीमा के भीतर सेंट्रल KYC रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री (CKYCR) पर अपलोड नहीं कर पाया. RBI के अनुसार, यह प्रक्रिया सभी बैंकों के लिए अनिवार्य है और इसका उद्देश्य ग्राहकों के रिकॉर्ड को सुरक्षित एवं अद्यतन रखना है.
ऑडिट के बाद हुई कार्रवाई
RBI ने 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के आधार पर बैंक का निरीक्षण किया था. जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. बैंक की ओर से दिए गए लिखित जवाब, अतिरिक्त दस्तावेज और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद भी RBI संतुष्ट नहीं हुआ. इसके बाद 30 जून 2026 के आदेश के तहत बैंक पर 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.
GIC हाउसिंग फाइनेंस पर भी लगा जुर्माना
नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) की जांच में पाया गया कि GIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड खातों की जोखिम श्रेणी की हर छह महीने में समीक्षा करने की अनिवार्य व्यवस्था का पालन नहीं कर रही थी. इस उल्लंघन के चलते कंपनी पर **3.1 लाख रुपये** का अर्थदंड लगाया गया.
ग्राहकों के हितों की सुरक्षा पर RBI का जोर
RBI ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता, नियामकीय अनुपालन और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है. केंद्रीय बैंक लगातार वित्तीय संस्थानों की निगरानी कर रहा है ताकि नियमों के उल्लंघन पर समय रहते कार्रवाई की जा सके.