अहितकर उत्पादों पर नए कराधान बिल सरकार के राजस्व ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देते हैं. जहां केंद्र स्वास्थ्य और सुरक्षा को मजबूत आधार देने के लिए अतिरिक्त आय जुटाना चाहता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
केंद्र सरकार ने तंबाकू और पान मसाला जैसे अहितकर उत्पादों पर अतिरिक्त राजस्व जुटाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण टैक्सेशन बिल संसद में पेश किए हैं. इन नए प्रस्तावों से जहां स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खर्चों को मजबूती मिलेगी, वहीं राज्यों के साथ उपकर साझा करने की पुरानी व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव होगा.
तंबाकू और पान मसाला पर नए कर प्रस्ताव
सोमवार को लोक सभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तंबाकू उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क बढ़ाने तथा पान मसाले पर उपकर लगाने से जुड़े दो अहम विधेयक पेश किए. सरकार के मुताबिक इसका लक्ष्य स्वास्थ्य व सुरक्षा संबंधी व्यय के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना है. केंद्र जुलाई 2017 से इन उत्पादों पर उपकर वसूल रहा था और जीएसटी लागू होने के बाद इसे राज्यों के साथ साझा किया जाता था. लेकिन अब नई व्यवस्था में केंद्र इस अतिरिक्त राजस्व को राज्यों के साथ साझा नहीं करेगा.
जीएसटी सुधार और राजस्व क्षति की भरपाई
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी.के. श्रीवास्तव का मानना है कि सरकार इस कदम के जरिए जीएसटी सुधारों से हुई राजस्व क्षति को आंशिक रूप से पूरा करना चाहती है. उनका कहना है कि नवंबर के आंकड़ों से स्पष्ट है कि जीएसटी संग्रह की रफ्तार धीमी हुई है. पहले उपकर का इस्तेमाल राज्यों को मुआवजा देने और कोविड काल के दौरान लिए गए ऋण को चुकाने में हुआ, लेकिन अब इसका उद्देश्य विस्तृत राष्ट्रीय जरूरतों की पूर्ति है.
विपक्ष का विरोध और स्वास्थ्य से जुड़े सवाल
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने लोक सभा में दोनों बिलों का विरोध किया. उनका तर्क था कि सरकार तंबाकू उत्पादों से राजस्व तो चाहती है, लेकिन विधेयकों में तंबाकू के स्वास्थ्य खतरों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है. उन्होंने सरकार पर केवल उत्पाद शुल्क बढ़ाने पर ध्यान देने और स्वास्थ्य सुरक्षा को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया.
वहीं, वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि जीएसटी लागू होने के बाद तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में कमी इसलिए की गई थी, ताकि मुआवजा उपकर के लिए जगह बनाई जा सके.
अब जबकि मुआवजा उपकर को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, सरकार इन संशोधनों के जरिए वित्तीय गुंजाइश बढ़ाना चाहती है.
अडानी समूह मुंबई, नवी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर और गुवाहाटी एयरपोर्ट के आसपास करीब 655 एकड़ क्षेत्र को विकसित करेगा. पहले चरण में लगभग 2.2 करोड़ वर्ग फुट मिक्स्ड-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी समूह ने देश के एविएशन और शहरी विकास क्षेत्र में बड़ा दांव खेलते हुए मुंबई, नवी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर और गुवाहाटी में आधुनिक एयरपोर्ट सिटी विकसित करने की घोषणा की है. करीब ₹20,000 करोड़ के निवेश से 655 एकड़ क्षेत्र में बनने वाली इन परियोजनाओं में होटल, शॉपिंग मॉल, ऑफिस, मनोरंजन केंद्र और कन्वेंशन सुविधाएं विकसित की जाएंगी. कंपनी का लक्ष्य एयरपोर्ट को केवल हवाई यात्रा का केंद्र नहीं, बल्कि व्यापार, पर्यटन और निवेश के बड़े हब के रूप में विकसित करना है.
₹20,000 करोड़ के निवेश से विकसित होंगी एयरपोर्ट सिटी
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी अडानी एयरपोर्ट सिटी लिमिटेड (AACL) ने छह प्रमुख शहरों में एयरपोर्ट सिटी प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा की है. कंपनी पहले चरण में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी. इन परियोजनाओं को मुंबई, नवी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर और गुवाहाटी एयरपोर्ट के आसपास करीब 655 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा. पहले चरण में लगभग 2.2 करोड़ वर्ग फुट मिक्स्ड-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा.
मुंबई और नवी मुंबई पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस
कंपनी के अनुसार, कुल निवेश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा मुंबई और नवी मुंबई एयरपोर्ट सिटी परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा. इन दोनों शहरों में करीब 440 एकड़ क्षेत्र में विकास कार्य किए जाएंगे. इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद मुंबई क्षेत्र देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट आधारित शहरी केंद्रों में शामिल हो सकता है.
होटल, मॉल और ऑफिस का बनेगा एकीकृत हब
एयरपोर्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में होटल, शॉपिंग मॉल, कमर्शियल ऑफिस, मनोरंजन केंद्र और कन्वेंशन सुविधाएं एक ही परिसर में विकसित की जाएंगी. इन परियोजनाओं को एयरपोर्ट, मेट्रो और शहर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. इससे यात्रियों, कारोबारियों और स्थानीय लोगों को एक ही स्थान पर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी.
दुनिया के बड़े एयरपोर्ट मॉडल से प्रेरित होगी परियोजना
कंपनी ने बताया कि इन एयरपोर्ट सिटी को सिंगापुर के चांगी, दुबई इंटरनेशनल, एम्स्टर्डम के शिफोल और सियोल के इंचियोन जैसे विश्वस्तरीय एयरपोर्ट डिस्ट्रिक्ट्स की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. इसका उद्देश्य एयरपोर्ट को केवल उड़ानों के केंद्र तक सीमित न रखकर व्यापार, पर्यटन, निवेश और शहरी विकास का प्रमुख केंद्र बनाना है.
जीत अडानी ने बताई कंपनी की रणनीति
AAHL के निदेशक जीत अडानी ने कहा कि दुनिया के कई सफल एयरपोर्ट आज व्यापार, पर्यटन और शहरी विकास के बड़े केंद्र बन चुके हैं. भारत में तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर को देखते हुए एयरपोर्ट को आधुनिक शहरी केंद्रों के रूप में विकसित करना समय की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से निवेश, रोजगार, बेहतर यात्री अनुभव और शहरों के दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.
पैदल घूमने योग्य आधुनिक शहरी केंद्र होंगे विकसित
एयरपोर्ट सिटी को इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि लोग आसानी से पैदल चल सकें. यहां होटल, रिटेल स्टोर, ऑफिस, रेस्टोरेंट, मनोरंजन केंद्र और कन्वेंशन सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध होंगी. इससे यात्रियों और स्थानीय नागरिकों दोनों को बेहतर अनुभव मिलेगा.
पांच लग्जरी होटल खोलने की तैयारी
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने IHG होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के साथ पांच लग्जरी और प्रीमियम होटल विकसित करने का समझौता किया है. इसके तहत पहली बार किम्पटन होटल ब्रांड भी भारत में प्रवेश करेगा. कंपनी होटल, फूड एंड बेवरेज, रिटेल और एंटरटेनमेंट क्षेत्र की कई भारतीय और विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी पर भी काम कर रही है.
पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर
कंपनी के मुताबिक, सभी एयरपोर्ट सिटी परियोजनाओं को यूएस ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल से LEED गोल्ड प्री-सर्टिफिकेशन मिल चुका है. इन परियोजनाओं में ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण और पैदल चलने योग्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
कई बड़ी कंपनियां होंगी साझेदार
इन परियोजनाओं में डिजाइन, निर्माण और परामर्श सेवाओं के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां जुड़ी हैं. इनमें कोहन पेडरसन फॉक्स, बेनॉय, ज़नेरा स्पेस, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा प्रोजेक्ट्स, पीएसपी प्रोजेक्ट्स, सीबीआरई, जेएलएल और कुशमैन एंड वेकफील्ड शामिल हैं. वर्तमान में अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स देश की सबसे बड़ी निजी एयरपोर्ट ऑपरेटिंग कंपनी है और मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी, मंगलुरु और तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट का संचालन करती है. कंपनी नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकास भी कर रही है.
कंपनी के मनोरंजन चैनलों के मजबूत प्रदर्शन और हाल ही में लॉन्च किए गए यूनाइट8 स्पोर्ट्स चैनलों की सफलता ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEE) ने वर्ष 2026 के 24वें सप्ताह में 20 प्रतिशत नेटवर्क शेयर हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाया है. पिछले लगभग आठ वर्षों में यह कंपनी का सबसे बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है. मनोरंजन और खेल कंटेंट की मजबूत पेशकश तथा फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण ने कंपनी की दर्शक संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है.
20% नेटवर्क शेयर के साथ नया रिकॉर्ड
कंपनी ने 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के शहरी दर्शकों के बीच 20 प्रतिशत नेटवर्क शेयर दर्ज किया है. यह उपलब्धि पिछले करीब आठ वर्षों में कंपनी के लिए सबसे ऊंचा स्तर है. कंपनी के मनोरंजन चैनलों के मजबूत प्रदर्शन और हाल ही में लॉन्च किए गए यूनाइट8 स्पोर्ट्स चैनलों की सफलता ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है.
फीफा वर्ल्ड कप 2026 से मिला बड़ा फायदा
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण ने यूनाइट8 स्पोर्ट्स नेटवर्क को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. कंपनी के मुताबिक, स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो ने 6 करोड़ नए दर्शकों को जोड़ा है और यह देश का दूसरा सबसे बड़ा लीनियर स्पोर्ट्स नेटवर्क बनकर उभरा है. लाइव मैचों के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में कमेंट्री, विशेषज्ञों का विश्लेषण और फुटबॉल आधारित विशेष कार्यक्रमों ने दर्शकों को आकर्षित किया है.
300 मिलियन से अधिक दर्शकों तक पहुंचा स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो
कंपनी के स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो ने 1 जून 2026 से अब तक अपने लीनियर प्लेटफॉर्म, जी5 और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से 300 मिलियन से अधिक यूनिक दर्शकों तक पहुंच बनाई है. इस उपलब्धि के साथ कंपनी ने खुद को मनोरंजन और खेल सामग्री के प्रमुख मल्टी-प्लेटफॉर्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित किया है.
यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 बना नंबर-1 अंग्रेजी स्पोर्ट्स चैनल
कंपनी के अनुसार, यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 ने भारत के सभी अंग्रेजी स्पोर्ट्स चैनलों के बीच शीर्ष स्थान हासिल किया है. भाषा आधारित कमेंट्री और विशेष कंटेंट रणनीति ने चैनल को दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया है.
फीफा वर्ल्ड कप 2022 से भी बेहतर प्रदर्शन
कंपनी के लीनियर पोर्टफोलियो ने इसी अवधि के दौरान फीफा वर्ल्ड कप 2022 की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक लाइव रीच दर्ज की है. इससे कंपनी के खेल प्रसारण कारोबार को नई मजबूती मिली है.
डिजिटल और टीवी प्लेटफॉर्म पर बढ़ी दर्शक संख्या
यूनाइट8 स्पोर्ट्स और जी5 जैसे कंपनी के डिजिटल एवं लीनियर प्लेटफॉर्म लगातार मजबूत दर्शक वृद्धि दर्ज कर रहे हैं. मल्टी-प्लेटफॉर्म रणनीति ने दर्शकों को विभिन्न स्क्रीन पर सहज अनुभव प्रदान किया है.
जी एंटरटेनमेंट के यूनाइट8 स्पोर्ट्स के मुख्य व्यवसाय अधिकारी बवेश जनावलेकर ने कहा कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 को दर्शकों से मिली शानदार प्रतिक्रिया कंपनी के खेल कारोबार के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है. उन्होंने कहा कि कंपनी दर्शकों को मैचों से आगे भी जोड़े रखने के लिए नए प्रोग्रामिंग प्रयोग कर रही है और वैश्विक स्तर का प्रीमियम स्पोर्ट्स कंटेंट बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.
क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में अब करीब 100 बेसिस प्वाइंट की गिरावट का अनुमान है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और युद्धविराम की स्थिति बनने से भारतीय कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और गैस आपूर्ति के सामान्य होने से कंपनियों पर लागत का दबाव कम होगा, जिससे कॉरपोरेट मुनाफे पर पड़ने वाला असर पहले के अनुमान से काफी कम रह सकता है.
मुनाफे पर असर का अनुमान हुआ कम
क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में अब करीब 100 बेसिस प्वाइंट की गिरावट का अनुमान है. यह अनुमान लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने की स्थिति में लगाए गए पहले के अनुमान का लगभग आधा है. भूराजनतिक तनाव में कमी और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से ऊर्जा बाजारों में स्थिरता आई है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था में सुधार हुआ है.
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से राहत
क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने अनुमान में बदलाव करते हुए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है. इससे पहले तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए 110 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया गया था. वहीं, गैस आपूर्ति में व्यवधान अब केवल चार महीने तक रहने की संभावना जताई गई है, जबकि पहले इसके तीन तिमाहियों तक बने रहने का अनुमान था.
कम क्षेत्रों पर पड़ेगा दबाव
संशोधित अनुमान के अनुसार, अब केवल 10 सेक्टरों पर ही मार्जिन दबाव पड़ने की आशंका है, जबकि पहले 22 सेक्टरों पर असर पड़ने की संभावना जताई गई थी. भारत इंक का कुल ऑपरेटिंग मार्जिन अब लगभग 11 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि संघर्ष से पहले यह 12 प्रतिशत रहने की उम्मीद थी.
एयरलाइंस और सिरेमिक सेक्टर पर रहेगा दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, एयरलाइंस और सिरेमिक उद्योग अभी भी दबाव में रह सकते हैं. इसकी वजह ईंधन लागत में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और सीमित मूल्य निर्धारण क्षमता है. इसके अलावा स्पेशियलिटी केमिकल्स, फ्लेक्सिबल पैकेजिंग और पॉलिएस्टर टेक्सटाइल जैसे कमोडिटी आधारित सेक्टरों में भी मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है.
तेल विपणन और उर्वरक कंपनियों को फायदा
दूसरी ओर, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और उर्वरक निर्माताओं को कच्चे माल की लागत घटने और आपूर्ति की स्थिति में सुधार का लाभ मिल सकता है. इन क्षेत्रों में लागत कम होने से मुनाफे में सुधार की संभावना जताई गई है.
मांग मजबूत, लेकिन जोखिम बरकरार
क्रिसिल का कहना है कि सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और स्थिर उपभोग मांग के कारण अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है. हालांकि रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी समझ अभी अस्थायी है. इसके अलावा दोबारा बढ़ने वाले भूराजनतिक तनाव और कमजोर मानसून जैसी चुनौतियां कॉरपोरेट मुनाफे पर असर डाल सकती हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि एशिया की औसत 12 प्रतिशत और वैश्विक 10 प्रतिशत की वृद्धि दर से काफी अधिक रही, जिससे भारत ग्रीन इकॉनमी के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ देश बन गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत ने ग्रीन इकॉनमी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 2025 में 110 बिलियन डॉलर का ग्रीन रेवेन्यू दर्ज किया है. दरअसल, लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) की रिपोर्ट के मुताबिक, सोलर, विंड एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में तेज वृद्धि के दम पर भारत एशिया की सबसे तेजी से बढ़ती ग्रीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है.
$110 बिलियन के ग्रीन रेवेन्यू का नया रिकॉर्ड
LSEG की ‘इन्वेस्टिंग इन द ग्रीन इकॉनमी 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2025 में ग्रीन बिजनेस से 110 बिलियन डॉलर का राजस्व अर्जित किया. पिछले पांच वर्षों में देश का ग्रीन रेवेन्यू 20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है. यह वृद्धि एशिया की औसत 12 प्रतिशत और वैश्विक 10 प्रतिशत की वृद्धि दर से काफी अधिक रही, जिससे भारत ग्रीन इकॉनमी के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ देश बन गया है.
बायोगैस और सिंचाई उपकरणों में भारत की मजबूत पकड़
रिपोर्ट के मुताबिक, बायोगैस ऊर्जा उपकरणों के क्षेत्र में एशिया के कुल ग्रीन रेवेन्यू में भारत की हिस्सेदारी 87 प्रतिशत रही. वहीं एडवांस्ड इरिगेशन सिस्टम और उपकरणों में देश का योगदान 75 प्रतिशत तक पहुंच गया. ये आंकड़े बताते हैं कि कृषि, ग्रामीण अवसंरचना, वेस्ट-टू-एनर्जी और विकेंद्रीकृत ऊर्जा प्रणालियों से जुड़े क्षेत्रों में भारत लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.
एशिया बना दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन बाजार
2025 में वैश्विक ग्रीन रेवेन्यू में एशियाई कंपनियों की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत रही. चीन, जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया इस क्षेत्र के प्रमुख खिलाड़ी बने हुए हैं. एशिया के ग्रीन रेवेन्यू में चीन की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत रही, जबकि जापान 28 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा. हांगकांग, दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाद भारत का हिस्सा लगभग 4 प्रतिशत दर्ज किया गया.
क्लीन एनर्जी में भारत का बड़ा निवेश
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने क्लीन एनर्जी सेक्टर में लगभग 100 बिलियन डॉलर का निवेश किया है. यह देश के कुल पावर सेक्टर कैपिटल एलोकेशन का 83 प्रतिशत है. वहीं, चीन ने रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, न्यूक्लियर और ऊर्जा दक्षता से जुड़े क्षेत्रों में करीब 625 बिलियन डॉलर का निवेश किया.
ग्रीन ग्रोथ के साथ चुनौतियां भी बरकरार
रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया को ग्रीन एनर्जी की तेज वृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा. क्षेत्र के कई देश अभी भी आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भर हैं. चीन, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में कोयले की मांग अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जिससे ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.
तेजी से उभर रही भारत की ग्रीन इकॉनमी
हालांकि भारत अभी एशिया के कुल ग्रीन रेवेन्यू पूल में अपेक्षाकृत छोटा खिलाड़ी है, लेकिन इसकी वृद्धि दर क्षेत्र के अधिकांश देशों से कहीं अधिक है. बायोगैस उपकरण और एडवांस्ड सिंचाई प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में भारत ने नेतृत्व की स्थिति भी हासिल कर ली है.
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन रेवेन्यू उन सूचीबद्ध कंपनियों की आय को दर्शाता है, जो पर्यावरण अनुकूल उत्पादों और सेवाओं से कमाई करती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की ग्रीन इकॉनमी और तेजी से विस्तार कर सकती है.
प्राधिकरण के अनुसार, 132.29 करोड़ रुपये की सात परियोजनाएं उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 1,354.59 करोड़ रुपये की 34 परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुंबई पोर्ट प्राधिकरण (MBPA) ने अपने 154वें स्थापना दिवस पर ₹3,541 करोड़ से अधिक की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की घोषणा की है. इन योजनाओं के तहत कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने, कनेक्टिविटी मजबूत करने, मरीना और वाटरफ्रंट विकसित करने के साथ-साथ पर्यटन और गैर-पोर्ट राजस्व को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल की मौजूदगी में घोषित इन परियोजनाओं से मुंबई पोर्ट के बुनियादी ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद है.
₹3,541 करोड़ की परियोजनाओं का ऐलान
मुंबई पोर्ट प्राधिकरण ने 3,541.29 करोड़ रुपये की कई बड़ी परियोजनाओं की घोषणा की है. इनमें बर्थ आधुनिकीकरण, कनेक्टिविटी अपग्रेड, कार्गो अवसंरचना का विस्तार, मरीना विकास और वाटरफ्रंट परियोजनाएं शामिल हैं. इन पहलों का उद्देश्य बंदरगाह की परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ नए राजस्व स्रोत विकसित करना है.
स्थापना दिवस समारोह में हुई घोषणा
इन परियोजनाओं की घोषणा मुंबई पोर्ट के 154वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान की गई. इस अवसर पर केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल मौजूद रहे. समारोह में बंदरगाह के भविष्य के विकास रोडमैप को भी प्रस्तुत किया गया.
41 नई परियोजनाओं को मिलेगी गति
प्राधिकरण के अनुसार, 132.29 करोड़ रुपये की सात परियोजनाएं उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 1,354.59 करोड़ रुपये की 34 परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी. इससे बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को व्यापक स्तर पर मजबूती मिलेगी.
कार्गो क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर
प्रमुख परियोजनाओं में इंदिरा डॉक पर बर्थ का आधुनिकीकरण, कार्गो भंडारण सुविधाओं का विस्तार, क्रूड ऑयल बर्थ का विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और डिजिटल निगरानी प्रणाली शामिल हैं. इसके अलावा रूफटॉप सोलर पैनलों की स्थापना और डिजिटलीकरण परियोजनाओं के जरिए परिचालन को अधिक आधुनिक और टिकाऊ बनाया जाएगा.
पर्यटन और वाटरफ्रंट विकास को बढ़ावा
मुंबई पोर्ट ने मुंबई मरीना और वाटरफ्रंट परियोजना के विकास की भी योजना तैयार की है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य पर्यटन, मनोरंजन और समुद्री गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जिससे गैर-पोर्ट राजस्व में भी वृद्धि होने की उम्मीद है.
संपत्ति मुद्रीकरण रणनीति को मिली रफ्तार
एमबीपीए ने अपनी एसेट मॉनेटाइजेशन रणनीति के तहत इंदिरा डॉक के बर्थ क्लस्टरों के संचालन और रखरखाव के लिए समझौतों का आदान-प्रदान किया. पहले क्लस्टर के 10 बर्थ को जे एम बक्शी पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स को 10 वर्षों के लिए सौंपा गया है, जिससे 770 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा. वहीं, दूसरे क्लस्टर के 11 बर्थ एम डिनशॉ एंड कंपनी को आवंटित किए गए हैं, जिससे 217 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है.
‘समग्र समुद्री अर्थव्यवस्था वाला अनूठा बंदरगाह’
मुंबई पोर्ट प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. एम. अंगमुथु ने कहा कि मुंबई पोर्ट देश का ऐसा बंदरगाह है, जहां एक व्यापक और समग्र समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र सफलतापूर्वक विकसित हो रहा है. उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं बंदरगाह को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.
निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव अरुणिश चावला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि दो दिनों तक चले OFS के दौरान कुल 22.88 करोड़ शेयरों की बिक्री हुई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) के ऑफर फॉर सेल (OFS) को निवेशकों से जबरदस्त समर्थन मिला है. सरकार ने इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए करीब ₹2,100 करोड़ जुटाए हैं. खास बात यह रही कि रिटेल निवेशकों के साथ-साथ संस्थागत निवेशकों ने भी इस ऑफर में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे सरकार के विनिवेश कार्यक्रम को नई मजबूती मिली है.
दो दिनों में बिके 22.88 करोड़ शेयर
निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि दो दिनों तक चले OFS के दौरान कुल 22.88 करोड़ शेयरों की बिक्री हुई. इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को लगभग ₹2,084 करोड़ प्राप्त हुए. उन्होंने निवेशकों के भरोसे और उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए धन्यवाद भी दिया.
सरकार ने अपनाया ग्रीन शू ऑप्शन
सरकार ने इस OFS में ग्रीन शू ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया. इसके तहत रेलवे मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी IRFC में अतिरिक्त 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची गई. इस कदम से सरकार को अधिक राशि जुटाने में मदद मिली. DIPAM ने OFS के लिए ₹91 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया था, जो पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव से लगभग 7.8 प्रतिशत कम था. गुरुवार को बीएसई पर IRFC का शेयर 0.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹91.78 पर बंद हुआ.
चालू वित्त वर्ष में ₹16,480 करोड़ का विनिवेश
IRFC से पहले सरकार चालू वित्त वर्ष के दौरान Coal India, NHPC, GIC, Central Bank of India और NLC India में भी हिस्सेदारी बेच चुकी है. इन सभी विनिवेश सौदों को मिलाकर सरकार अब तक लगभग ₹16,480 करोड़ जुटा चुकी है. इससे स्पष्ट है कि सरकार अपने विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है.
बढ़त के साथ बंद हुआ शेयर बाजार
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए. बीएसई सेंसेक्स 109.25 अंक की तेजी के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 34.35 अंक चढ़कर 24,056 के स्तर पर पहुंच गया. हालांकि कारोबार के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखने को मिली थी, लेकिन दिन के अंत में आईटी, मेटल, ऑयल और गैस सेक्टर के शेयरों में कमजोरी और मुनाफावसूली के कारण बाजार की बढ़त सीमित रह गई.
निवेशकों का भरोसा बढ़ा
IRFC के OFS को मिली मजबूत प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि सरकारी कंपनियों में निवेशकों का भरोसा लगातार बना हुआ है. रिटेल निवेशकों की सक्रिय भागीदारी और संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग ने इस हिस्सेदारी बिक्री को सफल बना दिया है.
यह फैसला ऐसे समय आया है जब विकास गर्ग और उनके कारोबारी सहयोगी पहले से ही विभिन्न नियामकीय और कानूनी जांचों का सामना कर रहे हैं. अदालत के इस आदेश से कंपनी की पूंजी जुटाने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अद्विक लैबोरेट्रीज (Advik Laboratories Limited) और उसके प्रमोटर विकास गर्ग की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कंपनी के प्रस्तावित राइट्स इश्यू पर अंतरिम रोक लगा दी है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब विकास गर्ग और उनके कारोबारी सहयोगी पहले से ही विभिन्न नियामकीय और कानूनी जांचों का सामना कर रहे हैं. अदालत के इस आदेश से कंपनी की पूंजी जुटाने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है.
कोर्ट ने राइट्स इश्यू पर लगाई रोक
पटियाला हाउस कोर्ट के जिला न्यायाधीश ने Advik Laboratories को मौजूदा राइट्स इश्यू के तहत किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई करने से रोक दिया है. अदालत के आदेश के अनुसार कंपनी फिलहाल:
- भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास लेटर ऑफ ऑफर दाखिल नहीं कर सकेगी.
- शेयरधारकों को ऑफर से जुड़े दस्तावेज नहीं भेज सकेगी.
- सार्वजनिक या निजी सदस्यता प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकेगी.
- निवेशकों से आवेदन राशि स्वीकार नहीं कर सकेगी.
अल्पांश शेयरधारक ने दायर की याचिका
यह आदेश Fairplan Distributors Pvt. Ltd. की ओर से दायर याचिका के बाद आया है. कंपनी के पास Advik Laboratories में करीब 23.46 प्रतिशत हिस्सेदारी है. याचिकाकर्ता ने कंपनी प्रबंधन पर धोखाधड़ी, धन के दुरुपयोग और प्रबंधन संबंधी अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ये प्रारंभिक टिप्पणियां हैं और प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा.
चार साल में तीसरी बार फंड जुटाने की कोशिश
याचिकाकर्ता के अनुसार, पिछले चार वर्षों में कंपनी द्वारा फंड जुटाने का यह तीसरा प्रयास था. कंपनी और उसके प्रबंधन के खिलाफ विभिन्न कानूनी मंचों पर पहले भी कई शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त 2026 को तय की है. तब तक कंपनी की फंड जुटाने की योजना पर रोक बनी रहेगी.
विकास गर्ग पर बढ़ा कानूनी दबाव
अदालत का ताजा आदेश विकास गर्ग और उनसे जुड़ी कंपनियों पर बढ़ते कानूनी और नियामकीय दबाव के बीच आया है. वे पहले से कई दीवानी और आपराधिक मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं.
शेयर ट्रांसफर मामले में भी जांच
वर्ष 2025 में पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को GTM Builders की ओर से दायर आपराधिक शिकायतों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने का निर्देश दिया था. इन शिकायतों में विकास गर्ग और उनके सहयोगियों पर कथित तौर पर शेयरों के अनधिकृत और धोखाधड़ीपूर्ण हस्तांतरण के आरोप लगाए गए थे.
SEBI ने भी की थी कार्रवाई
बाजार नियामक SEBI भी विकास गर्ग और Advik Capital Ltd. के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है. यह कार्रवाई शेयर अधिग्रहण एवं टेकओवर नियमों (SAST Regulations) के तहत जरूरी खुलासों में देरी को लेकर की गई थी. रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मामलों में यह देरी 234 दिनों तक पहुंच गई थी.
CBI जांच और अन्य आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विकास गर्ग की पूर्व कारोबारी गतिविधियों को लेकर भी जांच एजेंसियां सक्रिय रही हैं. इन मामलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं, शेल कंपनियों के नेटवर्क और फर्जी बिलिंग के जरिए कर चोरी से जुड़े आरोपों की भी जांच की गई है.
अदालत के आदेश से Advik Laboratories की फंड जुटाने की योजना फिलहाल रुक गई है. वहीं, विकास गर्ग से जुड़े कॉरपोरेट नेटवर्क पर विभिन्न नियामकीय एजेंसियों की जांच जारी है. अब बाजार और निवेशकों की नजर 22 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां अदालत के समक्ष कंपनी और अन्य प्रतिवादी अपना पक्ष रखेंगे.
कंपनी का कहना है कि यह निवेश डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र पर अमेजन (Amazon) ने एक बार फिर बड़ा भरोसा जताया है. कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भारत में 13 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश का ऐलान किया है. इस नई घोषणा के साथ 2030 तक कंपनी का कुल नियोजित निवेश बढ़कर 48 अरब डॉलर हो जाएगा. इससे भारत अमेजन के सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक बाजारों में शामिल हो जाएगा.
PM मोदी से मुलाकात के बाद बड़ा ऐलान
अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भारत में 13 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश की घोषणा की. कंपनी का कहना है कि यह निवेश डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
2030 तक 48 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य
इस साल की शुरुआत में अमेजन ने 2030 तक भारत में अपने विभिन्न कारोबारों में 35 अरब डॉलर निवेश करने की योजना की घोषणा की थी. अब अतिरिक्त 13 अरब डॉलर के निवेश के साथ कंपनी का कुल नियोजित निवेश बढ़कर 48 अरब डॉलर हो गया है. कंपनी का अनुमान है कि वर्ष 2010 से 2030 के बीच भारत में उसका कुल निवेश 88 अरब डॉलर से अधिक पहुंच जाएगा.
AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा बड़ा फोकस
कुल निवेश में से करीब 21 अरब डॉलर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर खर्च किए जाएंगे. इसके तहत मुंबई और हैदराबाद में AWS डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाई जाएगी. इस निवेश से स्टार्टअप, उद्यमों और सरकारी संस्थानों को एआई चिप, मैनेज्ड एआई सेवाएं, सुरक्षित क्लाउड तकनीक और डेवलपर टूल्स तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी.
ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कारोबार का होगा विस्तार
अमेजन ने कहा है कि वह अपने ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कारोबार में भी निवेश जारी रखेगी. कंपनी इस वर्ष 20 से अधिक नए फुलफिलमेंट सेंटर और 100 से ज्यादा डिलीवरी केंद्र शुरू करने की योजना बना रही है. इस विस्तार से देशभर में ग्राहकों तक तेज डिलीवरी सेवा पहुंचाने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
रोजगार और छोटे कारोबारों को मिलेगा लाभ
कंपनी का कहना है कि यह निवेश रोजगार सृजन, छोटे व्यवसायों के डिजिटलीकरण और निर्यात को बढ़ावा देने में सहायक होगा. अमेजन का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण विकास बाजारों में से एक बन सकता है.
क्या बोले एंडी जेसी
एंडी जेसी ने कहा कि भारत में अमेजन की व्यावसायिक प्राथमिकताएं देश की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी एआई को आम लोगों तक पहुंचाने, छोटे व्यवसायों को डिजिटल बनाने, रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि अमेज नप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के विजन से प्रेरित है और देश की विकास यात्रा में दीर्घकालिक भागीदार बना रहेगा.
विशेषज्ञों की राय बताती है कि CSE का पुनर्जीवन केवल एक ऐतिहासिक संस्था को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह पूर्वी भारत के वित्तीय भविष्य से जुड़ा मुद्दा भी बन सकता है.
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रितु राणा
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 118 साल पुराने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) को पुनर्जीवित करने की पहल ने वित्तीय जगत में नई बहस छेड़ दी है. हाल ही में राज्य सरकार ने बजट में एक्सचेंज को दोबारा शुरू करने की मंशा जाहिर की थी, जिसके बाद CSE के भविष्य और उसकी संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में बाजार और निवेश जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि CSE की वापसी केवल एक ऐतिहासिक संस्थान के पुनर्जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वी भारत के लिए नए वित्तीय इकोसिस्टम और पूंजी बाजार के विकास का अवसर भी बन सकती है. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि NSE और BSE के वर्चस्व वाले मौजूदा दौर में CSE के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी होंगी.
CSE सिर्फ एक्सचेंज नहीं, 'कैपिटल एक्सेस हब' बन सकता है
एसआईपी यात्रा के संस्थापक और वित्त विशेषज्ञ हर्ष गुप्ता का मानना है कि CSE को केवल एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के रूप में देखना इसकी भूमिका को सीमित करना होगा. उनके मुताबिक, पूर्वी भारत में MSME, स्टार्टअप और क्षेत्रीय उद्योगों के लिए पूंजी तक पहुंच अभी भी एक बड़ी चुनौती है. यदि CSE को आधुनिक तकनीक, मजबूत नियामकीय ढांचे और निवेशक शिक्षा के साथ दोबारा विकसित किया जाता है, तो यह पूर्वी भारत के लिए एक 'कैपिटल एक्सेस हब' बन सकता है.
हालांकि, उन्होंने कहा कि इस स्तर पर CSE की तुलना GIFT City से करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि GIFT City की सफलता अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं, कर प्रोत्साहनों और वैश्विक पूंजी प्रवाह पर आधारित है.
NSE और BSE के बीच तीसरे एक्सचेंज की राह आसान नहीं
गौरव भगत अकादमी के संस्थापक गौरव भगत का कहना है कि CSE का ऐतिहासिक महत्व जरूर है, लेकिन केवल भावनात्मक आधार पर किसी एक्सचेंज को सफल नहीं बनाया जा सकता. उन्होंने कहा कि भारतीय पूंजी बाजार में आज NSE और BSE की मजबूत पकड़ है. ऐसे में किसी तीसरे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के लिए जगह बनाना चुनौतीपूर्ण होगा.
उनके अनुसार, यदि पश्चिम बंगाल सरकार फिनटेक, वैकल्पिक निवेश फंड, स्टार्टअप कैपिटल और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने वाला व्यापक वित्तीय इकोसिस्टम तैयार करती है, तभी CSE की कहानी पुनर्जीवन से आगे बढ़कर बदलाव की कहानी बन सकती है.
लिक्विडिटी और वॉल्यूम सबसे बड़ी चुनौती
129 Wealth के फंड मैनेजर और Paul Asset के रिसर्च एनालिस्ट प्रसनजीत पॉल का मानना है कि आज के दौर में स्टॉक एक्सचेंज स्थान से नहीं, बल्कि लिक्विडिटी और टेक्नोलॉजी से चलते हैं. उन्होंने कहा कि कोलकाता के निवेशकों को पहले से ही NSE और BSE तक आसान पहुंच प्राप्त है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती ट्रेडिंग वॉल्यूम और निवेशकों का भरोसा दोबारा हासिल करना होगी.
प्रसनजीत पॉल के अनुसार, CSE को NSE और BSE से सीधी प्रतिस्पर्धा करने के बजाय MSME, स्टार्टअप्स और क्षेत्रीय व्यवसायों के लिए एक विशेष प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जाना चाहिए.
क्या बन सकता है पूर्वी भारत का GIFT City?
विशेषज्ञों की राय में CSE के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह केवल एक पुराने स्टॉक एक्सचेंज के रूप में लौटेगा या फिर पूर्वी भारत के लिए नए वित्तीय इकोसिस्टम का आधार बनेगा. GIFT City की तरह किसी वित्तीय केंद्र के विकास के लिए कर प्रोत्साहन, नीतिगत समर्थन, वैश्विक पूंजी, फिनटेक इकोसिस्टम और दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत होती है. ऐसे में CSE का भविष्य काफी हद तक सरकार की नीतियों, नियामकीय मंजूरी और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगा.
एक समय BSE को भी देता था कड़ी टक्कर
बता दें, कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज कभी देश के सबसे सक्रिय क्षेत्रीय स्टॉक एक्सचेंजों में शामिल था. 1990 के दशक के आखिर और 2000 के शुरुआती वर्षों में कई मौकों पर CSE का दैनिक कारोबार हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. एक समय यहां 4,000 से अधिक कंपनियां सूचीबद्ध थीं और यह देश का दूसरा सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज माना जाता था.
क्षेत्रीय एक्सचेंजों का दौर लगभग खत्म हो चुका है
विशेषज्ञों के अनुसार, देश में कभी 20 से अधिक क्षेत्रीय स्टॉक एक्सचेंज सक्रिय हुआ करते थे, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग, ऑनलाइन ब्रोकिंग और केंद्रीकृत क्लियरिंग सिस्टम के विस्तार के बाद अधिकांश क्षेत्रीय एक्सचेंज बंद हो गए. आज भारतीय शेयर बाजार में NSE और BSE का दबदबा है, जबकि अन्य एक्सचेंजों की हिस्सेदारी बेहद सीमित है. ऐसे में CSE के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों और ब्रोकरों को दोबारा आकर्षित करने की होगी.
तकनीक और लिक्विडिटी बनेगी सफलता की कुंजी
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक पूंजी बाजार में किसी स्टॉक एक्सचेंज की सफलता उसकी भौगोलिक स्थिति से ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम, तकनीकी क्षमता और लिक्विडिटी पर निर्भर करती है. यदि किसी एक्सचेंज पर पर्याप्त कारोबार नहीं होता, तो निवेशकों और ब्रोकरों की रुचि भी सीमित रह जाती है. यही कारण है कि CSE के पुनर्जीवन में तकनीकी प्लेटफॉर्म और बाजार सहभागिता दोनों अहम भूमिका निभाएंगे.
राज्य सरकार की व्यापक वित्तीय रणनीति
पश्चिम बंगाल सरकार केवल CSE के पुनर्जीवन तक सीमित नहीं रहना चाहती. राज्य सरकार लाभ में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भी पूंजी बाजार में सूचीबद्ध करने की संभावनाएं तलाश रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य की कंपनियां भविष्य में सूचीबद्ध होती हैं, तो इससे CSE को शुरुआती कारोबार और लिस्टिंग गतिविधियों का आधार मिल सकता है.
पूर्वी भारत के लिए नया अवसर
पूर्वी भारत में MSME, स्टार्टअप, विनिर्माण और निर्यात आधारित उद्योगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. यदि CSE क्षेत्रीय उद्यमों, SME कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्लेटफॉर्म विकसित करता है, तो यह पूर्वी भारत में पूंजी तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. यही कारण है कि कई विशेषज्ञ CSE को पारंपरिक एक्सचेंज के बजाय एक विशेष क्षेत्रीय वित्तीय मंच के रूप में विकसित करने की वकालत कर रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब केवल तकनीक के प्रयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर AI को अपने संचालन, सप्लाई चेन और उत्पादन प्रक्रियाओं में शामिल कर रही हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में व्यवधान और तेजी से बदलती तकनीकों के बीच वैश्विक औद्योगिक विनिर्माण (इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. KPMG की ग्लोबल टेक रिपोर्ट 2026 के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा आधारित निर्णय और तकनीक आधारित लचीलापन इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब केवल तकनीक के प्रयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर AI को अपने संचालन, सप्लाई चेन और उत्पादन प्रक्रियाओं में शामिल कर रही हैं.
22 देशों के 258 टेक लीडर्स की राय
KPMG Global Tech Report 2026 – Industrial Manufacturing में 22 देशों और क्षेत्रों के 258 तकनीकी नेताओं की राय शामिल की गई है. इसमें मेटल्स, एडवांस्ड मैटेरियल्स, इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स, स्पेस, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे सेक्टरों को शामिल किया गया है. रिपोर्ट उद्योग क्षेत्र में चल रहे डिजिटल बदलाव और तकनीकी निवेश की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है.
भारत में तेज हो रहा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में औद्योगिक कंपनियां तेजी से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं, बढ़ती डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता और उद्योगों में डिजिटलीकरण इस बदलाव को गति दे रहे हैं. हालांकि, डेटा इंटीग्रेशन, साइबर सुरक्षा, कुशल प्रतिभा की कमी और पुरानी तकनीकी व्यवस्था जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं. ऐसे में कंपनियां अपने ऑपरेटिंग मॉडल को आधुनिक बनाने और तकनीकी आधार को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं.
AI का बढ़ता इस्तेमाल
मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब AI का इस्तेमाल केवल प्रयोग के तौर पर नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर कर रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां ऑपरेशनल एफिशिएंसी, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, क्वालिटी कंट्रोल और सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन के लिए AI का उपयोग बढ़ा रही हैं. इसके साथ ही आईटी, बिजनेस और रिस्क मैनेजमेंट टीमों के बीच सहयोग भी बढ़ रहा है, जिससे जिम्मेदार AI और साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जा सके.
भारत में तकनीक बनेगी ग्रोथ का इंजन
KPMG इंडिया के पार्टनर और नेशनल सेक्टर लीडर (इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग) एस. सतीश ने कहा कि भारतीय कंपनियां अब तकनीक को केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि बिजनेस ग्रोथ के महत्वपूर्ण साधन के रूप में देख रही हैं. उन्होंने कहा कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी निवेश और AI को बढ़ती स्वीकृति भारत में इंडस्ट्रियल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही है. जो कंपनियां डेटा, स्केलेबल प्लेटफॉर्म, स्किल डेवलपमेंट और साइबर सुरक्षा में निवेश करेंगी, वे भविष्य में अधिक मजबूत स्थिति में होंगी.
रिपोर्ट की प्रमुख बातें
1. 87 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग अधिकारियों का मानना है कि एडवांस टेक्नोलॉजी भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगी.
2. 80 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि तकनीक निवेश से बेहतर मूल्य सृजित हो रहा है.
3. 70 प्रतिशत कंपनियां AI लागू करने के लिए केंद्रीकृत मॉडल अपना रही हैं.
4. 76 प्रतिशत अधिकारियों ने खराब या अविश्वसनीय डेटा को AI के लिए सबसे बड़ा जोखिम बताया.
5. 68 प्रतिशत कंपनियां अगले 12 महीनों में बड़े स्तर पर AI लागू करने की तैयारी कर रही हैं.
6. 48 प्रतिशत कंपनियां साइबर सुरक्षा निवेश में बड़ी बढ़ोतरी की योजना बना रही हैं.
7. 49 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि AI आधारित उपयोग से उन्हें वास्तविक व्यावसायिक लाभ मिल रहा है.
8. 89 प्रतिशत अधिकारियों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में AI एजेंट्स का प्रबंधन एक महत्वपूर्ण कार्य कौशल बन जाएगा.
साइबर सुरक्षा और डेटा पर बढ़ा फोकस
रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा प्रबंधन का महत्व भी तेजी से बढ़ रहा है. कंपनियां अब केवल तकनीकी निवेश नहीं कर रहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल ढांचा तैयार करने पर भी जोर दे रही हैं.
भविष्य की औद्योगिक वृद्धि में तकनीक की बड़ी भूमिका
KPMG की रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है. जो कंपनियां AI को बड़े स्तर पर अपनाने, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने और कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करने में सफल होंगी, वही आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास की अगुवाई करेंगी.