Tata Power ने वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही के परिणामों की घोषणा की है. इसमें कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 10 प्रतिशत बढ़कर 1188 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
टाटा पावर (Tata Power) ने 4 फरवरी को वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए, जिनमें कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार दिखा. अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में, टाटा पावर का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 1188 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 1076 करोड़ रुपये था.इस वित्तीय सफलता का श्रेय टाटा पावर ने अपनी मजबूत बैलेंस शीट, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और विभिन्न बिजनेस समूहों के बीच तालमेल को दिया. इन परिणामों के बाद कंपनी के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली, जो कंपनी के लगातार बढ़ते कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन को दर्शाता है.तो आइए कंपनी के वित्तीय परिणाम पर एक नजर डालते हैं.
इतना बढ़ा रेवेन्यू
अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में, कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 10% बढ़कर 1188 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 1076 करोड़ रुपये था। इसके साथ ही, कंपनी ने इस तिमाही में 15,793 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू हासिल किया, जो पिछले वर्ष के 15,294 करोड़ रुपये से 3% अधिक है. टाटा पावर ने अपनी वित्तीय सफलता का श्रेय अपनी मजबूत बैलेंस शीट, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और विभिन्न बिजनेस समूहों के बीच तालमेल को दिया. कंपनी के EBITDA (एर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डिप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन) में भी 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो 3,481 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
शेयरों में दिखी तेजी
इन परिणामों के बाद टाटा पावर के शेयरों में कारोबार के दौरान 2.06 प्रतिशत की तेजी देखी गई, और स्टॉक BSE पर 362.15 रुपये के स्तर पर बंद हुआ. वहीं. एनएसई में ये शेयर 1.96 प्रतिशत की तेजी के साथ 361.85 रुपये पर बंद हुआ. इस वित्तीय परिणाम से कंपनी के भविष्य के लिए उम्मीदें और भी मजबूत हो गई हैं, और यह टाटा पावर के लगातार बढ़ते कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन को दर्शाता है.
रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के डेवलपमेंट पर काम कर रही कंपनी
टाटा पावर के CEO और MD प्रवीर सिन्हा ने कहा कि कंपनी ने पिछली 21 तिमाहियों में लगातार PAT ग्रोथ दर्ज किया है और सभी बिजनेस इस ग्रोथ में योगदान दे रहे हैं. उन्होंने आगे कहा, "हम मैन्युफैक्चरिंग, EPC और रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के डेवलपमेंट के साथ-साथ ग्रुप कैप्टिव के माध्यम से रिटेल सप्लाई की पूरी वैल्यू चेन में मौजूदगी के साथ क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में लीडर के रूप में उभरे हैं. एक इंटीग्रेटेड पावर कंपनी के रूप में, हम सभी के लिए सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए जनरेशन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सॉल्यूशन के अपने पोर्टफोलियो के लिए कंप्लीट एनर्जी सर्विसेज प्रोवाइड करते हैं.
क्लीन और ग्रीन एनर्जी सेगमेंट में कंपनी की उपलब्धि
31 दिसंबर 2024 तक कंपनी की क्लीन और ग्रीन एनर्जी सेगमेंट में ऑपरेशनल कैपिसिटी 6.7 गीगावाट (GW) थी, जिससे 11,700+ मिलियन यूनिट (MUs) ग्रीन पावर जनरेट हुआ. इसके अलावा, 10 गीगावाट के प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन हैं, जो इसकी कुल क्लीन एनर्जी कैपिसिटी को बढ़ाकर 16.7 गीगावाट तक ले जाएंगे. टाटा पावर की सब्सिडियरी कंपनी टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (TPREL) ने ओंकारेश्वर में 126 MWp का भारत के सबसे बड़े फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स में से एक और मध्य प्रदेश के नीमच में 431 मेगावाट DC सोलर प्लांट को चालू किया. नीमच प्लांट भारत का पहला सोलर प्लांट है, जिसमें सिंगल-एक्सिस ट्रैकर और बाइ-फेशियल मॉड्यूल का यूनिक कॉम्बिनेशन शामिल किया गया है. इसके अलावा, कंपनी ने मुंबई, दिल्ली और ओडिशा में अपने डिस्कॉम्स के माध्यम से 16 लाख स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन का बड़ा मुकाम हासिल किया है.
अडानी ग्रुप और अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) ने 50:50 के संयुक्त उद्यम के तहत ओडिशा में एक एकीकृत एल्युमिनियम परियोजना विकसित करने का फैसला किया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सीमेंट और तांबा कारोबार में विस्तार के बाद अब अडानी ग्रुप ने एल्युमिनियम उद्योग में भी बड़ी एंट्री की तैयारी कर ली है. समूह अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) के साथ संयुक्त उद्यम के जरिए ओडिशा में करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये का एकीकृत एल्युमिनियम परियोजना स्थापित करेगा. यह निवेश भारत के धातु क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल होगा और देश के एल्युमिनियम बाजार में लंबे समय से मजबूत पकड़ रखने वाली हिंडाल्को और वेदांता के लिए नई प्रतिस्पर्धा खड़ी कर सकता है.
IHC के साथ संयुक्त उद्यम में बनेगा मेगा प्रोजेक्ट
अडानी ग्रुप और अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) ने 50:50 के संयुक्त उद्यम के तहत ओडिशा में एक एकीकृत एल्युमिनियम परियोजना विकसित करने का फैसला किया है. करीब 11.5 अरब डॉलर (लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये) की इस परियोजना में एल्युमिना रिफाइनरी, एल्युमिनियम स्मेल्टर, कैप्टिव पावर प्लांट और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग पार्क स्थापित किए जाएंगे.
हिंडाल्को और वेदांता के दबदबे वाले बाजार में नई चुनौती
भारत के एल्युमिनियम उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा फिलहाल हिंडाल्को और वेदांता के पास है. ऐसे बाजार में नए खिलाड़ी के लिए प्रवेश आसान नहीं माना जाता, क्योंकि इसके लिए खनन, रिफाइनिंग, बिजली और लॉजिस्टिक्स का मजबूत नेटवर्क जरूरी होता है. अडानी ग्रुप की प्रस्तावित परियोजना पूरी तरह एकीकृत होगी, जिससे उत्पादन लागत और आपूर्ति श्रृंखला दोनों पर बेहतर नियंत्रण रहेगा.
20 लाख टन एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता होगी
परियोजना के तहत सालाना 40 लाख टन क्षमता की एल्युमिना रिफाइनरी, 20 लाख टन क्षमता का एल्युमिनियम स्मेल्टर, 4,000 मेगावाट का कैप्टिव पावर प्लांट और 10 लाख टन क्षमता का डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाया जाएगा. वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल एल्युमिनियम उत्पादन करीब 42 लाख टन रहा था. ऐसे में अकेले इस परियोजना से देश की उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा.
बढ़ती मांग को देखते हुए लगाया जा रहा दांव
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एल्युमिनियम उत्पादक होने के बावजूद अपनी जरूरतों का एक हिस्सा आयात से पूरा करता है. सरकारी अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में देश में एल्युमिनियम की मांग करीब 55 लाख टन रही, जो 2030 तक 85 लाख टन और 2047 तक 2.8 करोड़ टन तक पहुंच सकती है. वहीं प्रति व्यक्ति एल्युमिनियम खपत अभी वैश्विक औसत से काफी कम है, जिससे भविष्य में इस धातु की मांग तेज़ी से बढ़ने की संभावना है.
सस्ती बिजली बनेगी सबसे बड़ी ताकत
एल्युमिनियम उत्पादन में ऊर्जा लागत सबसे महत्वपूर्ण होती है. अडानी ग्रुप के पास पहले से बड़ा बिजली उत्पादन पोर्टफोलियो है, जिसका लाभ इस परियोजना को मिलेगा. प्रस्तावित 4,000 मेगावाट के कैप्टिव पावर प्लांट के साथ 400 मेगावाट हरित ऊर्जा क्षमता भी जोड़ी जाएगी. इससे उत्पादन लागत कम रखने और प्रतिस्पर्धी बढ़त हासिल करने में मदद मिलेगी.
ओडिशा क्यों चुना गया?
इस परियोजना के लिए ओडिशा का चयन रणनीतिक रूप से किया गया है. भारत के आधे से अधिक बॉक्साइट भंडार इसी राज्य में हैं, जो एल्युमिनियम उत्पादन का प्रमुख कच्चा माल है. एल्युमिना रिफाइनरी रायगड़ा जिले में खदानों के निकट स्थापित की जाएगी, जबकि एल्युमिनियम स्मेल्टर सुंदरगढ़ में बनाया जाएगा. परियोजना के लिए कच्चा माल बल्लाडा, कुत्रुमाली समेत अन्य खदानों से आएगा. वहीं तैयार उत्पाद और कच्चे माल के परिवहन के लिए अडानी समूह के धामरा बंदरगाह और विशेष रेल एवं कन्वेयर नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा.
मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी और ऑटोमोबाइल, बिजली, निर्माण, रक्षा तथा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों को घरेलू स्तर पर एल्युमिनियम की बेहतर उपलब्धता मिलेगी. साथ ही, अडानी समूह अपने बंदरगाह, डेटा सेंटर और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भी इस धातु का उपयोग कर आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत कर सकेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, शिक्षा, स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिजों और बंदरगाह विकास समेत कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, शिक्षा, स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिजों और बंदरगाह विकास समेत कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान इंडोनेशिया ने भारत की स्वदेशी ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलें खरीदने का फैसला किया, वहीं दोनों देशों ने यूपीआई को इंडोनेशिया के भुगतान तंत्र से जोड़ने, सबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास और इंडोनेशिया में आईआईएम बेंगलुरु का कैंपस खोलने पर भी सहमति जताई. यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बिंतांग आदिपूर्णा' से भी सम्मानित किया.
ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों की खरीद पर बनी सहमति
भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा सहयोग को नई मजबूती देते हुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली की खरीद पर सहमति बनाई है. इस समझौते के तहत भारत डायनेमिक्स लिमिटेड इंडोनेशियाई सेना को इन मिसाइल प्रणालियों की आपूर्ति करेगी. दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई.
सबांग पोर्ट का होगा संयुक्त विकास
दोनों देशों ने इंडोनेशिया के रणनीतिक महत्व वाले सबांग बंदरगाह को संयुक्त रूप से विकसित करने का फैसला किया है. मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित यह बंदरगाह भारत की ग्रेट निकोबार पोर्ट परियोजना के काफी करीब है. माना जा रहा है कि इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री कनेक्टिविटी मजबूत होगी और प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट हब को भी गति मिलेगी.
इंडोनेशिया में भी चलेगा भारत का UPI
दोनों देशों ने भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली से जोड़ने का निर्णय लिया है. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और सीमा-पार भुगतान पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो सकेंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पहल कारोबार करने में सुगमता बढ़ाने के साथ डिजिटल आर्थिक सहयोग को भी नई दिशा देगी.
इंडोनेशिया में खुलेगा IIM बेंगलुरु का कैंपस
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की है कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरु इंडोनेशिया में अपना कैंपस स्थापित करेगा. इसका उद्देश्य शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को मजबूत करना है. इसके अलावा दोनों देशों ने विशेष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के विकास और चुनावी सहयोग पर भी सहमति जताई.
क्रिटिकल मिनरल्स और उद्योगों में बढ़ेगा सहयोग
भारत और इंडोनेशिया ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर भी सहमति बनाई है. भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकल और रेयर-अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण संयंत्रों में निवेश की योजना बना रहा है. इसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है.
स्वास्थ्य, कृषि और सामाजिक योजनाओं में भी साझेदारी
दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है, जिससे भारतीय दवाओं और चिकित्सा उत्पादों की पहुंच इंडोनेशिया तक आसान होगी. भारत इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण में भी सहयोग करेगा. इसके अलावा कृषि, दूरसंचार, आपदा प्रबंधन और दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच भी कई समझौते हुए. भारत अपनी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और मिड-डे मील जैसी सफल सामाजिक योजनाओं का अनुभव भी इंडोनेशिया के साथ साझा करेगा.
प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण में करेगा सहयोग
सांस्कृतिक सहयोग के तहत भारत और इंडोनेशिया ने इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन हिंदू मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार में सहयोग करने पर भी सहमति जताई. इससे दोनों देशों के सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
प्रधानमंत्री मोदी बोले- भारत-इंडोनेशिया संबंधों का शुरू हुआ 'स्वर्णिम अध्याय'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है. उन्होंने कहा कि दोनों देश रक्षा, सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री व्यापार, तकनीक, शिक्षा और संस्कृति सहित हर क्षेत्र में नए अवसरों पर साथ काम कर रहे हैं. प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों के 'स्वर्णिम अध्याय' की शुरुआत साबित होगी, जिसका सकारात्मक प्रभाव पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक व्यवस्था पर पड़ेगा.
एक्ट ईस्ट नीति को मिलेगी नई मजबूती
प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन दिवसीय यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. जकार्ता उनके तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव है. इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया सहित कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि भारत संवाद, कूटनीति और टू-स्टेट समाधान के माध्यम से स्थायी शांति का समर्थन करता है.
सेबी ने 24 जून 2026 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के कंपनी सचिव एवं कंप्लायंस अधिकारी को प्रशासनिक चेतावनी पत्र जारी किया. यह पत्र कंपनी को 6 जुलाई को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के माध्यम से प्राप्त हुआ.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में प्रशासनिक चेतावनी जारी की है. जांच में कंपनी के दो कर्मचारियों और एक कर्मचारी के करीबी रिश्तेदार द्वारा अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी (UPSI) के दौरान शेयरों में ट्रेडिंग करने का मामला सामने आया है. हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एहतियाती चेतावनी है और इससे कंपनी के वित्तीय या परिचालन कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
क्या है पूरा मामला?
सेबी ने 1 जून 2024 से 30 अगस्त 2024 के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में हुई ट्रेडिंग की जांच की थी. इस दौरान नियामक ने सेबी (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 के तहत नियमों के अनुपालन की समीक्षा की. जांच में पाया गया कि कंपनी के दो कर्मचारियों और एक कर्मचारी के करीबी रिश्तेदार ने अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी (UPSI) की अवधि के दौरान कंपनी के शेयरों में कारोबार किया, जो इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन माना गया.
कंपनी को मिला चेतावनी पत्र
सेबी ने 24 जून 2026 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के कंपनी सचिव एवं कंप्लायंस अधिकारी को प्रशासनिक चेतावनी पत्र जारी किया. यह पत्र कंपनी को 6 जुलाई को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के माध्यम से प्राप्त हुआ. इसके बाद रिलायंस ने स्टॉक एक्सचेंजों को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह केवल एहतियाती कदम है और इसका कंपनी के कारोबार या वित्तीय स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
किन लोगों के नाम आए सामने?
सेबी ने अपने पत्र के परिशिष्ट (Annexure) में तीन लोगों का उल्लेख किया है.
1. हर्ष जैन ने 5 जुलाई 2024 को 6,385 रुपये में रिलायंस इंडस्ट्रीज के दो शेयर खरीदे.
2. कामिनी जैन, जो एक कर्मचारी की करीबी रिश्तेदार हैं, ने 10 जुलाई 2024 को 35 शेयर 1,09,695.25 रुपये में बेचे और अगले ही दिन 25 शेयर 78,871.25 रुपये में खरीद लिए.
3. हिराई उमंग दोषी ने 18 जुलाई 2024 को 15 शेयर 47,625 रुपये में बेचे.
सेबी ने क्या कहा?
बाजार नियामक के अनुसार, ये लेनदेन सेबी (इनसाइडर ट्रेडिंग निषेध) विनियम, 2015 के विनियम 4(1) तथा सेबी अधिनियम की धारा 12A(d) और 12A(e) का उल्लंघन हैं. सेबी ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि रिलायंस इंडस्ट्रीज को इन लेनदेन की जानकारी तब मिली, जब नियामक ने स्वयं कंपनी को इसकी सूचना दी.
भविष्य के लिए दी सख्त चेतावनी
सेबी ने कंप्लायंस अधिकारी को भविष्य में अधिक सतर्क रहने और इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की सलाह दी है. नियामक ने कहा कि यदि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई गईं तो सेबी अधिनियम के तहत उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज का जवाब
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि वह सेबी की ओर से उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी. हालांकि, कंपनी ने अभी तक यह नहीं बताया है कि जिन कर्मचारियों और संबंधित व्यक्ति के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ कोई आंतरिक कार्रवाई की गई है या नहीं.
याप डिजिटल के अलावा अतुल हेगड़े भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे. नवाचार को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी के उद्यमियों को सहयोग देना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल था.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के विज्ञापन और डिजिटल मार्केटिंग उद्योग के प्रमुख नामों में शामिल याप डिजिटल (Yaap Digital) के संस्थापक एवं चेयरमैन अतुल हेगड़े का मंगलवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वह 57 वर्ष के थे. उनके निधन से देश के विज्ञापन, मार्केटिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बड़ा झटका लगा है.
25 वर्षों से अधिक समय तक उद्योग में निभाई अहम भूमिका
अतुल हेगड़े ने विज्ञापन, ब्रांडिंग और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक समय तक काम किया. इस दौरान उन्होंने खुद को एक दूरदर्शी उद्यमी और डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस लीडर के रूप में स्थापित किया. उन्होंने रचनात्मकता, प्रौद्योगिकी और नवाचार के मेल से भारत के बदलते मार्केटिंग परिदृश्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
याप डिजिटल दिलाई वैश्विक पहचान
हेगड़े ने याप डिजिटल की स्थापना की और इसे एक एकीकृत मार्केटिंग एवं टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में विकसित किया, जिसकी मौजूदगी भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी है. उनके नेतृत्व में कंपनी ने डिजिटल मीडिया, कंटेंट, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, डेटा एनालिटिक्स और प्रौद्योगिकी आधारित मार्केटिंग समाधानों के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई.
स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी दिया बढ़ावा
याप डिजिटल के अलावा अतुल हेगड़े भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे. उन्होंने रेनमेकर वेंचर्स (Rainmaker Ventures) की सह-स्थापना की और इसके माध्यम से कई शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स में निवेश किया तथा युवा उद्यमियों का मार्गदर्शन किया. नवाचार को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी के उद्यमियों को सहयोग देना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल था.
विज्ञापन से शुरू हुआ था करियर
अतुल हेगड़े ने अपने करियर की शुरुआत विज्ञापन उद्योग से की थी. उन्होंने ब्रांडिंग, संचार और डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में व्यापक अनुभव हासिल किया, जिसके बाद याप डिजिटल की स्थापना की. उनका उद्देश्य एक ऐसी स्वतंत्र और प्रौद्योगिकी आधारित एजेंसी नेटवर्क तैयार करना था, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके.
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का प्रदर्शन रहा मजबूत
हाल के वर्षों में अतुल हेगड़े याप डिजिटल के विस्तार का नेतृत्व कर रहे थे. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा और उसका कर-पश्चात लाभ (PAT) लगभग दोगुना हो गया. उन्होंने कंपनी को तकनीक आधारित, पूर्ण-सेवा (फुल-स्टैक) मार्केटिंग कंपनी के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी रणनीति तैयार की थी.
एआई और वैश्विक विस्तार पर था फोकस
हाल ही में उन्होंने कंपनी के अगले चरण के विस्तार की योजना साझा की थी. इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वामित्व वाले प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म, रणनीतिक अधिग्रहण और अंतरराष्ट्रीय विस्तार को कंपनी की भविष्य की प्रमुख रणनीति बताया गया था. उनका विजन डेटा, रचनात्मकता, कंटेंट और प्रौद्योगिकी को एकीकृत कर ब्रांडों की बदलती जरूरतों के अनुरूप समाधान उपलब्ध कराना था.
उद्योग के सम्मानित विचारक थे अतुल हेगड़े
अतुल हेगड़े को डिजिटल परिवर्तन, उपभोक्ता व्यवहार, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के भविष्य पर उनके विचारों के लिए उद्योग में काफी सम्मान दिया जाता था. वह विभिन्न मंचों पर अपने अनुभव और दृष्टिकोण साझा करते रहते थे. पेशेवर जीवन के अलावा उन्हें स्नीकर्स और समकालीन संस्कृति का भी विशेष शौक था, जो उनकी अलग पहचान का हिस्सा माना जाता था. उनके निधन से भारतीय विज्ञापन और डिजिटल मार्केटिंग उद्योग ने एक दूरदर्शी उद्यमी और मार्गदर्शक को खो दिया.
कंपनी ने 25 मार्च 2026 को IPO के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल किए थे. प्रस्तावित IPO में 8,000 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बेंगलुरु स्थित मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल चेन मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Manipal Health Enterprises) को अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से अंतिम मंजूरी मिल गई है. कंपनी ने 25 मार्च 2026 को IPO के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल किए थे.
8,000 करोड़ रुपये का होगा फ्रेश इश्यू
प्रस्तावित IPO में 8,000 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे. इसके अलावा, प्रमोटर इम्पीरियस हेल्थकेयर इन्वेस्टमेंट्स पीटीई. लिमिटेड और मणिपाल एजुकेशन एंड मेडिकल ग्रुप इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 4,32,27,668 इक्विटी शेयरों की बिक्री पेशकश (Offer for Sale-OFS) भी शामिल होगी. OFS के तहत TPG SG Magazine Pte. Ltd, Seventy Second Investment Company LLC, Ammar Sdn Bhd, Novo Holdings Invest Asia A/S और Phoenix Bear Investments LLC भी अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
जुटाई गई राशि का कहां होगा इस्तेमाल?
कंपनी ने बताया कि फ्रेश इश्यू से जुटाई जाने वाली राशि में से करीब 5,378 करोड़ रुपये का उपयोग उसकी प्रमुख सहायक कंपनी मणिपाल हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड के बकाया कर्ज और उस पर देय ब्याज के पूर्ण या आंशिक भुगतान के लिए किया जाएगा. इसके अलावा, 574 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी सह्याद्री हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड में अल्पांश हिस्सेदारी (Minority Stake) के अधिग्रहण के लिए किया जाएगा. शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए होगा.
प्री-IPO प्लेसमेंट पर भी विचार
कंपनी ने कहा कि वह बुक रनिंग लीड मैनेजर्स के साथ मिलकर 1,600 करोड़ रुपये तक के प्री-IPO प्लेसमेंट पर भी विचार कर सकती है. यदि यह प्लेसमेंट पूरा हो जाता है, तो फ्रेश इश्यू का आकार उसी अनुपात में घटा दिया जाएगा.
देशभर में 38 अस्पतालों का नेटवर्क
मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज देशभर में मल्टीस्पेशियलिटी अस्पतालों का संचालन करती है, जहां बाह्य रोगी सेवाओं (OPD) से लेकर जटिल तृतीयक और चतुर्थक स्तर के उपचार उपलब्ध कराए जाते हैं. 30 सितंबर 2025 तक कंपनी के पास 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 38 अस्पताल (प्रो-फॉर्मा आधार पर 48 अस्पताल) थे, जिनमें 10,761 लाइसेंस प्राप्त बेड (प्रो-फॉर्मा आधार पर 12,367 बेड) उपलब्ध थे.
CRISIL की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पतालों की भौगोलिक मौजूदगी के लिहाज से यह भारत की सबसे बड़ी निजी अस्पताल श्रृंखला है. वहीं बेड क्षमता के आधार पर यह देश की सबसे बड़ी पैन-इंडिया मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल नेटवर्क और अस्पतालों की संख्या के आधार पर दूसरी सबसे बड़ी निजी अस्पताल श्रृंखला है.
नवंबर 2025 में शुरू किया 49वां अस्पताल
कंपनी ने नवंबर 2025 में बेंगलुरु में अपना 49वां अस्पताल शुरू किया, जिसके बाद 31 दिसंबर 2025 तक उसकी लाइसेंस प्राप्त बेड क्षमता बढ़कर 12,631 हो गई. वित्त वर्ष 2025 में कंपनी ने प्रो-फॉर्मा आधार पर 9,263.56 करोड़ रुपये का परिचालन राजस्व दर्ज किया, जो भारत की निजी अस्पताल श्रृंखलाओं में दूसरा सबसे अधिक था. वहीं वास्तविक आधार पर कंपनी का परिचालन राजस्व 8,242.25 करोड़ रुपये रहा.
छह महीने में 571.8 करोड़ रुपये का मुनाफा
30 सितंबर 2025 को समाप्त छह महीने की अवधि में कंपनी का परिचालन राजस्व 4,713 करोड़ रुपये रहा, जबकि इसी अवधि में उसका शुद्ध लाभ 571.8 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.
सरकार ने OFS का फ्लोर प्राइस 1,400 रुपये प्रति शेयर तय किया है. संस्थागत निवेशक 7 जुलाई और खुदरा निवेशक 8 जुलाई को इस पेशकश में हिस्सा ले सकेंगे.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोचिन शिपयार्ड (Cochin Shipyard) में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है. इसके लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लाया गया है, जिसके तहत निवेशकों को बाजार कीमत से कम दाम पर शेयर खरीदने का मौका मिलेगा. सरकार ने OFS का फ्लोर प्राइस 1,400 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जो सोमवार के बंद भाव से करीब 7% कम है. संस्थागत निवेशक 7 जुलाई और खुदरा निवेशक 8 जुलाई को इस पेशकश में हिस्सा ले सकेंगे.
5.04% तक हिस्सेदारी बेच सकती है सरकार
सरकार पहले चरण में कोचिन शिपयार्ड की 2.52% हिस्सेदारी बेचेगी. यदि निवेशकों की ओर से अच्छी मांग मिलती है, तो अतिरिक्त 2.52% हिस्सेदारी भी बिक्री के लिए लाई जाएगी. इस तरह कुल 5.04% हिस्सेदारी OFS के जरिए बेची जा सकती है.
बाजार भाव से कम रखा गया फ्लोर प्राइस
सरकार ने OFS के लिए 1,400 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है. सोमवार को कोचिन शिपयार्ड का शेयर 1,504.75 रुपये पर बंद हुआ था. इस तरह निवेशकों को बाजार मूल्य की तुलना में करीब 7% कम कीमत पर शेयर खरीदने का अवसर मिलेगा.
कब मिलेगा निवेश का मौका?
OFS के तहत आज यानी 7 जुलाई को संस्थागत निवेशक (Non-Retail Investors) बोली लगा सकेंगे. वहीं 8 जुलाई को खुदरा निवेशकों (Retail Investors) के लिए इश्यू खुलेगा.
क्या होता है OFS?
ऑफर फॉर सेल (OFS) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके जरिए सरकार या किसी सूचीबद्ध कंपनी का बड़ा शेयरधारक अपनी मौजूदा हिस्सेदारी निवेशकों को बेचता है. इसमें कंपनी नए शेयर जारी नहीं करती, बल्कि पहले से जारी शेयरों की बिक्री की जाती है.
सरकार के पास कितनी हिस्सेदारी?
31 मार्च 2026 तक कोचिन शिपयार्ड में केंद्र सरकार की 67.92% हिस्सेदारी थी. OFS के बाद यह हिस्सेदारी कुछ कम हो जाएगी. यह बिक्री सरकार की विनिवेश रणनीति का हिस्सा है. केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण (Asset Monetisation) के जरिए 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है.
शेयर पर दिखा दबाव
OFS की घोषणा के बाद सोमवार को कोचिन शिपयार्ड का शेयर 1.25% की गिरावट के साथ 1,504.75 रुपये पर बंद हुआ. इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,523.75 रुपये पर बंद हुआ था. निवेशकों की नजर अब OFS को मिलने वाली प्रतिक्रिया और शेयर की आगे की चाल पर रहेगी.
सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि सरकार जल्द ही 'भारत टैक्सी' की तर्ज पर सहकारी यूटिलिटी एग्रीगेटर शुरू करेगी.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार सहकारिता क्षेत्र को वित्तीय सेवाओं में मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि सरकार जल्द ही इफ्को-टोक्यो की तर्ज पर एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित करेगी. इसके साथ ही 'भारत टैक्सी' मॉडल पर आधारित एक सहकारी यूटिलिटी एग्रीगेटर भी शुरू किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इन पहलों से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बीमा सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और सहकारी समितियों की भूमिका और मजबूत होगी.
सहकारिता क्षेत्र में बीमा सेवाओं का होगा विस्तार
सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि सरकार जल्द ही 'भारत टैक्सी' की तर्ज पर सहकारी यूटिलिटी एग्रीगेटर शुरू करेगी. उन्होंने कहा कि सामान्य बीमा क्षेत्र में इफ्को-टोक्यो की सफलता से प्रेरणा लेते हुए अब सहकारी जीवन बीमा कंपनी बनाई जाएगी, जिससे बीमा क्षेत्र में सहकारी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ेगी.
इफ्को-टोक्यो मॉडल से मिलेगी प्रेरणा
इफ्को-टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की स्थापना वर्ष 2000 में इफ्को और जापान के टोक्यो मरीन ग्रुप के संयुक्त उद्यम के रूप में हुई थी. कंपनी में इफ्को की 51% और टोक्यो मरीन ग्रुप की 49% हिस्सेदारी है. सरकार अब इसी मॉडल को आधार बनाकर सहकारी जीवन बीमा कंपनी विकसित करने की तैयारी कर रही है.
'भारत टैक्सी' का होगा विस्तार
अमित शाह ने कहा कि सहकारी मॉडल के तहत शुरू की गई 'भारत टैक्सी' योजना को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है. सरकार अगले दो वर्षों में इसका विस्तार देश के 500 शहरों तक करने की योजना बना रही है.
वित्तीय समावेशन को मिलेगा बढ़ावा
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर एवं फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क लीडर विवेक अय्यर ने कहा कि यह पहल सहकारिता मंत्रालय के वित्तीय समावेशन के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है. उनके अनुसार, सहकारी संस्थाएं पहले से ही सहकारी बैंकों के माध्यम से ऋण और इफ्को-टोक्यो के जरिए सामान्य बीमा क्षेत्र में सक्रिय हैं. अब यह मॉडल जीवन बीमा क्षेत्र तक विस्तारित किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं की मजबूत पकड़ और लोगों के साथ उनके भरोसेमंद संबंध बीमा की पहुंच बढ़ाने और ग्राहकों तक कम लागत में सेवाएं पहुंचाने में मदद करेंगे. हालांकि, किसी भी सहकारी बीमा कंपनी की सफलता के लिए मजबूत नियामकीय निगरानी और स्पष्ट संचालन व्यवस्था जरूरी होगी.
शुरुआती चरण में है योजना
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सहकारी जीवन बीमा कंपनी की योजना फिलहाल प्रारंभिक चरण में है. शुरुआती चर्चा के मुताबिक, कंपनी के प्रवर्तक देश की प्रमुख सहकारी संस्थाएं होंगी और बाद में अन्य भागीदारों को भी शामिल किया जा सकता है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कंपनी का ढांचा उन बहु-राज्य सहकारी समितियों की तरह हो सकता है, जिन्हें बीज, जैविक खेती और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अमूल, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), इफ्को, कृभको और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने मिलकर स्थापित किया है.
देश में पहले से हैं 26 जीवन बीमा कंपनियां
वर्तमान में भारत में 26 जीवन बीमा कंपनियां संचालित हो रही हैं. प्रस्तावित सहकारी जीवन बीमा कंपनी के शुरू होने से सहकारी क्षेत्र की भागीदारी इस उद्योग में और मजबूत होगी, साथ ही ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बीमा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 521.16 अंक चढ़कर 78,285.07 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 159.50 अंक की बढ़त के साथ 24,430.35 पर बंद हुआ था.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने सोमवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया था. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 521.16 अंक चढ़कर 78,285.07 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 159.50 अंक की बढ़त के साथ 24,430.35 पर बंद हुआ था. मजबूत मॉनसून की उम्मीद, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बैंकिंग शेयरों में तेजी ने बाजार को सहारा दिया. आज बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह तेजी बरकरार रहती है. खासतौर पर HDFC Bank, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक जैसे शेयर फोकस में रह सकते हैं.
HDFC Bank समेत इन शेयरों ने दिखाई मजबूती
सोमवार को सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 13 बढ़त के साथ बंद हुए. HDFC Bank में सबसे अधिक 3.59% की तेजी दर्ज की गई. इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, इटरनल, सन फार्मा, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, टाइटन और लार्सन एंड टुब्रो के शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए. वहीं दूसरी ओर कोटक महिंद्रा बैंक में सबसे अधिक 3.93% की गिरावट रही. इसके अलावा TCS, बजाज फिनसर्व, पावर ग्रिड, HCL Tech, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, इंफोसिस, ITC, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ट्रेंट, हिंदुस्तान यूनिलीवर और NTPC के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई.
ब्रॉडर मार्केट में भी रही खरीदारी
ब्रॉडर मार्केट में भी निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहा. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.45% और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.75% की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी रियल्टी इंडेक्स छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी ऑटो इंडेक्स एक महीने के उच्च स्तर पर बंद हुआ. निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली.
आज इन शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर
आज के कारोबार में कई शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं. राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स और जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स के विलय को मंजूरी दे दी है. वरुण बेवरेजेज की केन्या इकाई ने करीब 305 करोड़ रुपये में देवयानी फूड इंडस्ट्रीज केन्या के डेयरी बेवरेज, जूस और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर कारोबार के अधिग्रहण का समझौता किया है. हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज ने अमेरिकी कंपनी स्मार्टरेंट के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित समाधान विकसित करने के लिए रणनीतिक साझेदारी की है. एम्बेसी डेवलपमेंट्स 1,170 करोड़ रुपये तक के डिबेंचर जारी कर अतिरिक्त पूंजी जुटाएगी. RITES को दक्षिण अफ्रीका से 35.82 मिलियन डॉलर का लोकोमोटिव आपूर्ति ऑर्डर मिला है. प्रिमो केमिकल्स ने फ्लो टेक केमिकल्स में शेष 51% हिस्सेदारी खरीदने को मंजूरी दी है. कॉनकॉर्ड एनवायरो सिस्टम्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी अनीश गोयल ने इस्तीफा दे दिया है. सेजवन के ग्रोथ ओई फंड ने कर्णिका इंडस्ट्रीज में 3.2% हिस्सेदारी खरीदी है. एवेन्यू सुपरमार्ट्स (डीमार्ट) ने 300 करोड़ रुपये के कमर्शियल पेपर्स जारी किए हैं, जबकि ब्लू जेट हेल्थकेयर ने अपना क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) शुरू कर 531.70 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है. इसके अलावा जून तिमाही के कारोबारी अपडेट भी निवेशकों के फोकस में रहेंगे. ट्रेंट का स्टैंडअलोन राजस्व 19% बढ़कर 5,666 करोड़ रुपये, जुबिलेंट फूडवर्क्स का समेकित राजस्व 14.1% बढ़कर 2,569.3 करोड़ रुपये और टाइटन कंपनी का घरेलू कारोबार 37% तथा अंतरराष्ट्रीय कारोबार 128% बढ़ा है. इन सभी घटनाक्रमों के चलते आज इन शेयरों में अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
मेटागो को क्राउडफंडिंग मंच केट्टो (Ketto) के संस्थापकों ने तैयार किया है. कंपनी का कहना है कि भारत में तेजी से बढ़ रही मोटापा और उपापचय संबंधी बीमारियों की चुनौती से निपटने के लिए यह एक समग्र स्वास्थ्य सेवा मॉडल लेकर आई है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अभिनेता और उद्यमी कुणाल कपूर ने सोमवार को 'मेटागो' (MetaGO) नामक एक डॉक्टर-आधारित उपापचय स्वास्थ्य मंच (मेटाबॉलिक हेल्थ प्लेटफॉर्म) लॉन्च करने की घोषणा की. यह मंच मोटापा और उससे जुड़ी उपापचय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को संगठित चिकित्सा देखभाल, जांच सुविधाएं और दीर्घकालिक चिकित्सकीय सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है.
मेटागो को क्राउडफंडिंग मंच केट्टो (Ketto) के संस्थापकों ने तैयार किया है. कंपनी का कहना है कि भारत में तेजी से बढ़ रही मोटापा और उपापचय संबंधी बीमारियों की चुनौती से निपटने के लिए यह एक समग्र स्वास्थ्य सेवा मॉडल लेकर आई है.
केट्टो के अनुभव से जन्मा मेटागो का विचार
मेटागो के संस्थापक कुणाल कपूर, वरुण शेट और जहीर अडेनवाला को इस मंच का विचार केट्टो के साथ एक दशक से अधिक समय तक काम करने के दौरान मिला. इस दौरान उन्होंने हजारों ऐसे परिवारों के साथ काम किया, जो गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता जुटा रहे थे.
संस्थापकों ने देखा कि टाइप-2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes), हृदय रोग, मोटापा और अन्य उपापचय संबंधी बीमारियां न केवल मरीजों बल्कि उनके परिवारों पर भी भारी आर्थिक और मानसिक बोझ डालती हैं. उनका मानना है कि इन बीमारियों की शुरुआत कई वर्ष पहले ही हो जाती है, लेकिन उपचार तब शुरू होता है, जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है.
डॉक्टरों की निगरानी में मिलेगा व्यक्तिगत उपचार
मेटागो का उद्देश्य केवल वजन कम कराना नहीं, बल्कि लोगों के उपापचय स्वास्थ्य में दीर्घकालिक सुधार लाना है. यह मंच डॉक्टरों की सलाह, उपापचय आकलन, व्यक्तिगत उपचार योजना, चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त जीएलपी-1 उपचार, पोषण संबंधी मार्गदर्शन, व्यायाम प्रशिक्षण और नियमित स्वास्थ्य निगरानी जैसी सेवाओं को एक साथ उपलब्ध कराता है.
इस मॉडल में वजन प्रबंधन को अल्पकालिक उपाय के बजाय एक निरंतर स्वास्थ्य यात्रा के रूप में देखा गया है, जिससे लोग समय के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपना सकें.
'हम वजन घटाने वाली कंपनी नहीं बना रहे' : कुणाल कपूर
मेटागो के सह-संस्थापक कुणाल कपूर ने कहा, "केट्टो के साथ 14 वर्षों तक काम करने के दौरान हमने हजारों परिवारों को गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करते देखा. इससे यह स्पष्ट हुआ कि मधुमेह, मोटापा और अन्य उपापचय संबंधी बीमारियां वर्षों पहले ही विकसित होना शुरू हो जाती हैं.
यही सोच मेटागो की शुरुआत का कारण बनी. हम कोई वजन घटाने वाली कंपनी नहीं बना रहे हैं. हमारा ध्यान उस समय पर है, जब सही हस्तक्षेप शल्य चिकित्सा नहीं बल्कि डॉक्टर की सलाह हो सकती है."
उन्होंने कहा कि जीएलपी-1 उपचार ने मोटापे के इलाज में नई संभावनाएं पैदा की हैं, लेकिन केवल दवा पर्याप्त नहीं है. स्थायी परिणाम तभी मिलते हैं, जब दवा के साथ डॉक्टरों की निगरानी, संतुलित पोषण, व्यवहार में बदलाव और निरंतर सहयोग भी मिले.
विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं घर-घर तक पहुंचाने का लक्ष्य
मेटागो के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी वरुण शेट ने कहा कि भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब आवश्यकता ऐसी व्यवस्था की है, जो उपापचय संबंधी देखभाल को निरंतर और अधिक समन्वित बनाए.
उन्होंने कहा कि मेटागो शुरुआत से ही डॉक्टर-आधारित मॉडल पर काम करेगा और सेवाएं लोगों के घर तक पहुंचाएगा. कंपनी का लक्ष्य उन उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं को हर भारतीय तक पहुंचाना है, जो अब तक सीमित वर्ग के लोगों के लिए उपलब्ध थीं.
चिकित्सकीय निगरानी में अधिक प्रभावी है जीएलपी-1 उपचार
मेटागो की चिकित्सा सलाहकार समिति के सदस्य और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कौशल पटेल ने कहा कि जीएलपी-1 उपचार ने मोटापे के इलाज के विकल्पों का विस्तार किया है, लेकिन इसका अधिकतम लाभ तभी मिलता है, जब इसे चिकित्सकीय निगरानी, नियमित उपापचय परीक्षण और स्वस्थ जीवनशैली के साथ जोड़ा जाए.
35 से अधिक जैव संकेतकों की होगी जांच
मेटागो से जुड़ने वाले प्रत्येक सदस्य का 35 से अधिक जैव संकेतकों (बायोमार्कर्स) के आधार पर विस्तृत उपापचय परीक्षण किया जाएगा. इसके साथ विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन भी होगा. रिपोर्ट के आधार पर अंतःस्रावी रोग विशेषज्ञ, मधुमेह विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ या आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और लक्ष्यों के अनुरूप व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करेंगे.
जहां चिकित्सकीय रूप से आवश्यक होगा, वहां जीएलपी-1 उपचार भी योजना का हिस्सा होगा. इसके साथ डॉक्टरों की नियमित निगरानी, पोषण विशेषज्ञों की सलाह, व्यायाम प्रशिक्षण और समय-समय पर स्वास्थ्य समीक्षा जारी रहेगी.
मुंबई पुलिस के लिए लगाया निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर
समुदाय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत मेटागो ने हाल ही में मुंबई पुलिस (Mumbai Police) के लिए एक निःशुल्क उपापचय स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया, जिसमें रक्त जांच और मौके पर चिकित्सकों से परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई गई.
कंपनी ने बताया कि आने वाले महीनों में विभिन्न पेशेवर समूहों के लिए भी ऐसे सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि उपापचय स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके.
सरकार जिस योजना को तीसरी बार नए रूप में लॉन्च करने के संकेत दे रही है, जिसने एक दशक में केवल 38 टन सोना जुटाया था, उसी काम को दो पन्नों के एक एक्सचेंज सर्कुलर ने चुपचाप कर दिखाया है, जो बैंक नहीं कर सके: एक ऐसी व्यवस्था तैयार कर दी है, जो घरेलू सोने को रिफाइनरी की भट्ठी से सीधे फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट तक पहुंचाती है, न बैंक, न डिपॉजिट सर्टिफिकेट, न कोई योजना.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
पिछले दो सप्ताह से सोने का बाजार सांस रोके हुए है. सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों में कहा गया है कि केंद्र सरकार जल्द ही गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का नया संस्करण घोषित करने वाली है, ज्वैलर्स को "कलेक्शन पार्टनर" बनाया जाएगा, 1,000 टन से अधिक सोना जुटाने का लक्ष्य होगा और घोषणा "अगले दो सप्ताह के भीतर" की जाएगी. इसकी वजह, कथित तौर पर, प्रधानमंत्री की नागरिकों से एक वर्ष तक सोने की खरीद टालने की अपील को बताया जा रहा है. उद्योग संगठनों ने भी उत्साहपूर्वक अपने अनुमान पेश किए हैं: यदि भारत के घरों में मौजूद 25,000 टन सोने का केवल 5% भी मोनेटाइज कर लिया जाए, तो 90 अरब डॉलर की तरलता उपलब्ध हो सकती है.
हालांकि, सरकार की सोच से परिचित लोगों का कहना है कि ऐसी कोई योजना आने वाली नहीं है. और यहां वह असहज करने वाला तथ्य है, जिसे पहले से प्रेस विज्ञप्तियां तैयार कर रहे लोगों को समझना चाहिए: ऐसी किसी योजना की आवश्यकता भी नहीं है. भारतीय परिवारों के सोने का मोनेटाइजेशन पहले ही शुरू हो चुका है, किसी मंत्रालय के जरिए नहीं, बल्कि 1 जुलाई को जारी और 13 जुलाई से प्रभावी MCX सर्कुलर संख्या MCX/PMT/375/2026 के माध्यम से, जिसे बुलियन कारोबार से बाहर शायद ही किसी ने पढ़ने की जहमत उठाई हो.
सर्कुलर वास्तव में क्या करता है
यह सर्कुलर, BIS मानक वाले सोने के लिए मई में MCX द्वारा किए गए गुड डिलीवरी नॉर्म्स संशोधन की निरंतरता में जारी किया गया है. इसके तहत तीन घरेलू रिफाइनरों M. D. Overseas, Kundan Refinery और Zaveri and Company को पैनल में शामिल किया गया है. साथ ही पहले से सूचीबद्ध चार रिफाइनरों, Titan (Tanishq), Augmont, Parker Precious Metals और Sovereign Metals की गुड डिलीवरी सूची का विस्तार MCX के सभी गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स तक किया गया है, जिसमें विशेष रूप से बेंचमार्क 1 किलोग्राम गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट भी शामिल है. अब सात भारतीय रिफाइनर LBMA सप्लायर्स के साथ मिलकर भारत के सबसे अधिक तरल गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट के निपटान के लिए क्रमांकित, 995 शुद्धता वाले गोल्ड बार डिलीवर कर सकते हैं.
यदि परिशिष्टों से आगे पढ़ा जाए, तो इसका महत्व समझना कठिन नहीं है. ये रिफाइनर सोना खनन नहीं करते. उनका कच्चा माल मुख्य रूप से पुनर्चक्रित (रीसाइकल्ड) सोना होता है, पुराने आभूषण, सिक्के और स्क्रैप, जिन्हें वे परिवारों, ज्वैलर्स और एग्रीगेटर्स से खुले बाजार में खरीदते हैं. अब तक इस रीसाइक्लिंग प्रक्रिया का उत्पाद अपारदर्शी भौतिक बाजार तक ही सीमित रहता था.
13 जुलाई से यह प्रक्रिया एक अनिवार्य डिलीवरी वाले फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट पर समाप्त होगी, जिसमें पारदर्शी एक्सचेंज-आधारित मूल्य निर्धारण, चरणबद्ध टेंडर, रैंडम आवंटन और क्लियरिंग कॉरपोरेशन द्वारा गारंटीकृत सेटलमेंट होगा. अब रुद्रपुर या रामपुरा में किसी घर के लॉकर में रखा एक ग्राम सोना भी औपचारिक वित्तीय प्रणाली तक पहुंचने का एक पूर्ण और ऑडिट योग्य मार्ग रखता है: रिफाइनर उसे खरीदेगा, BIS मानक वाले बार में पिघलाएगा और अहमदाबाद, मुंबई या नई दिल्ली में GOLD फ्यूचर्स शॉर्ट के विरुद्ध उसकी डिलीवरी करेगा. न बैंक शाखा. न डिपॉजिट रसीद. न ब्याज दर पर मोलभाव. न कोई योजना.
अर्थशास्त्र भी पहले ही इसके पक्ष में खड़ा हो चुका है. आयात शुल्क के कारण विदेशी सोने की लैंडेड लागत बढ़ गई है, जिससे पुनर्चक्रित घरेलू सोना किसी भी रिफाइनर के लिए सबसे सस्ता कच्चा माल बन गया है. वहीं प्रधानमंत्री की खरीद टालने की अपील के बाद ज्वैलर्स का कहना है कि उनके कारोबार का 40–60% हिस्सा पुराने सोने की रीसाइक्लिंग और एक्सचेंज की ओर स्थानांतरित हो गया है. यानी आपूर्ति स्वयं बाजार तक पहुंच रही है. MCX का यह सर्कुलर उसे संस्थागत रूप से आगे बढ़ने का रास्ता देता है.
जो योजना दो बार विफल हुई, उसे तीसरी बार फिर बेचा जा रहा है
इसकी तुलना उस व्यवस्था के रिकॉर्ड से कीजिए, जिसे सरकार बार-बार पुनर्जीवित करने का वादा करती रही है. गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) को 2015 में ठीक उसी उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था, जिसकी आज फिर चर्चा हो रही है: सोने के आयात को कम करना, चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना और घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को आर्थिक गतिविधि में लाना. एक दशक बाद, वित्त मंत्रालय के अपने आंकड़े बताते हैं कि इस योजना के तहत लगभग 38 टन सोना ही जुटाया जा सका, जबकि भारतीय परिवारों के पास लगभग 25,000 टन सोना होने का अनुमान है. यानी सफलता की दर लगभग 0.15% रही. मार्च 2025 में सरकार ने चुपचाप इस योजना की मध्यम अवधि और दीर्घकालिक जमा योजनाओं को, नवीनीकरण सहित, समाप्त कर दिया और केवल अल्पकालिक बैंक जमा को किसी तरह जारी रखा.
और "ज्वैलर्स को शामिल करने" का विचार भी नया नहीं है. यह वही पुराना विचार है, जिसे सोने से भी कम सावधानी से दोबारा प्रस्तुत किया जा रहा है. अप्रैल 2021 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा GMS में किए गए संशोधनों में यही व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी थी, ज्वैलर्स और रिफाइनर Collection and Purity Testing Centres (CPTCs) तथा Gold Mobilisation Collection Testing Agents बन सकते थे, और बैंक उन्हें हैंडलिंग इंसेंटिव के रूप में 1.5% तक भुगतान कर सकते थे. पूरी संरचना पहले से मौजूद थी. संक्षिप्त नाम (Acronyms) भी मौजूद थे. केवल सोना नहीं आया, क्योंकि इस योजना का मूल प्रस्ताव भारतीय परिवारों के व्यवहार के सामने कभी टिक नहीं पाया: अपने आभूषण बैंक को पिघलाने के लिए सौंप दीजिए, बदले में 2.25–2.5% ब्याज और एक टैक्स ट्रेल प्राप्त कीजिए, और अंत में अपने कंगन नहीं, बल्कि एक सोने की बार वापस लीजिए. भारतीय परिवारों ने लगातार दस वर्षों तक इसे तर्कसंगत रूप से अस्वीकार किया. CPTCs का नाम बदलकर "कलेक्शन पार्टनर" कर देने से उत्तर नहीं बदलता, केवल प्रेस विज्ञप्ति बदलती है.
1,000 टन सोना जुटाने का अनुमान विशेष रूप से आलोचना का पात्र है. जनता से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह विश्वास करे कि जो ढांचा दस वर्षों में केवल 38 टन सोना जुटा सका, वही अब उससे 26 गुना अधिक सोना जुटा लेगा, केवल इसलिए क्योंकि जिन ज्वैलर्स को 2021 में पहले ही शामिल किया जा चुका था, उन्हें इस बार "एजेंट" के बजाय "पार्टनर" कहा जाएगा. अब तक सामने आई किसी भी व्यवस्था में यह नहीं बताया गया है कि यह अतिरिक्त शून्य आखिर आएगा कहां से.
बाजार ने दिल्ली का इंतजार नहीं किया
असल कहानी यह है कि समस्या का समाधान किसने किया. गोल्ड मोनेटाइजेशन हमेशा एक ऐसी तकनीकी व्यवस्था (Plumbing Problem) थी, जिसे नीति (Policy) का रूप दे दिया गया था: घरेलू सोने के लिए एक विश्वसनीय मूल्यांकनकर्ता (Assayer), एक मानकीकृत उत्पाद, पारदर्शी मूल्य और एक सुनिश्चित खरीदार की आवश्यकता थी. GMS ने यह चारों काम बैंकों से कराने की कोशिश की. लेकिन जिन बैंकों का मंगलसूत्र पिघलाने के कारोबार से स्वाभाविक रूप से कोई संबंध नहीं था, वे इनमें से कोई भी काम प्रभावी ढंग से नहीं कर पाए. इसके विपरीत, रिफाइनर-से-एक्सचेंज की व्यवस्था अपने ढांचे में ही ये चारों सुविधाएं उपलब्ध कराती है, BIS मानक की शुद्धता, क्रमांकित बार, स्पॉट मार्केट से जुड़े सेटलमेंट मूल्य और क्लियरिंग कॉरपोरेशन को प्रतिपक्ष (Counterparty) के रूप में. परिवार को जमा पर 2.5% ब्याज नहीं मिलता, बल्कि उसे उस सोने का पूरा, तत्काल और एक्सचेंज-आधारित मूल्य मिल जाता है, जिसे वह वैसे भी कभी बैंक में जमा नहीं कराने वाला था. यह मोनेटाइजेशन का कोई कमतर रूप नहीं है. वास्तव में यही वह एकमात्र तरीका है, जिसने दुनिया में कहीं भी बड़े पैमाने पर सफलता हासिल की है: रीसाइक्लिंग के माध्यम से एक तरल बाजार में प्रवेश.
बिना कोई बदलाव किए, केवल हिंदी अनुवाद
यहां एक विडंबना है, जिसका आनंद लिया जाना चाहिए. वही नीति-तंत्र, जो अब GMS का तीसरा संस्करण तैयार कर रहा है, उसने इसी महीने पूंजी बाजारों में बैंकों की भागीदारी को सीमित करने के कदम उठाए हैं, RBI के नए कोलेटरल संबंधी निर्देशों ने 1 जुलाई से एक्सचेंजों में कारोबार की मात्रा को बुरी तरह प्रभावित किया है. एक ओर नियामक बैंकों को बाजार की इस संरचना (Market Plumbing) से बाहर निकाल रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार बैंकों (और अब बैंकों को रिपोर्ट करने वाले ज्वैलर्स) को फिर उसी सोना संग्रह (Gold Collection) के कारोबार में धकेलना चाहती है, जिसमें वे दो बार विफल हो चुके हैं. इस बीच, एक्सचेंज इकोसिस्टम ने स्वयं पहल करते हुए और 2019 से लागू मौजूदा SEBI विनियमों के तहत, बिना किसी प्रोत्साहन राशि, कर छूट या लॉन्च कार्यक्रम की मांग किए, पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक जोड़ दिया है.
यदि सरकार वास्तव में मदद करना चाहती है, तो उसके लिए ईमानदार कार्यसूची छोटी और साधारण है: रीसाइक्लिंग के लिए बेचे जाने वाले सोने पर पूंजीगत लाभ (Capital Gains) के कर प्रावधानों को तर्कसंगत बनाया जाए, BIS Assaying प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखी जाए और पैनल में शामिल रिफाइनरों की सूची का विस्तार होने दिया जाए. बाजार को जिस चीज़ की आवश्यकता नहीं है, वह है उस योजना का चौथा संस्करण, जिसका पूरे एक दशक का परिणाम एक मध्यम आकार के बैंक के एक ही वॉल्ट में समा सकता है और जिसकी घोषणा, एक बार फिर, "अगले दो सप्ताह में" किए जाने की बात कही जा रही है.
सोना पहले ही चलना शुरू हो चुका है. वह चंगोदर, मानेसर, होसुर और नरोदा से होकर गुजर रहा है, 995 शुद्धता वाले गोल्ड बार में परिवर्तित हो रहा है और MCX तक पहुंच रहा है. गोल्ड मोनेटाइजेशन पर समाचार मीडिया में आ रही रिपोर्टों के सूत्रों को शायद कोई यह बात बता दे.
MCX सर्कुलर संख्या MCX/PMT/375/2026 दिनांक 1 जुलाई 2026, 13 जुलाई 2026 से प्रभावी, 17 मई 2026 के सर्कुलर MCX/PMT/292/2026 की निरंतरता में जारी किया गया. GMS के तहत जुटाए गए सोने के आंकड़े मार्च 2025 तक के वित्त मंत्रालय के डेटा पर आधारित हैं. पुनर्गठित (Revamped) योजना की कोई घोषणा नहीं होने का दावा इस विषय से परिचित लोगों पर आधारित है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)