होम / बिजनेस / टैरिफ और वैश्विक मंदी ने बढ़ाया भारत का व्यापार घाटा: क्रिसिल
टैरिफ और वैश्विक मंदी ने बढ़ाया भारत का व्यापार घाटा: क्रिसिल
भारत का वस्तु व्यापार घाटा जुलाई 2025 में बढ़कर आठ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिसका प्रमुख कारण वैश्विक मंदी और टैरिफ वृद्धि है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
जुलाई 2025 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर आठ महीनों के उच्चतम स्तर 27.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इस बीच, क्रिसिल की एक ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस वित्त वर्ष में टैरिफ वृद्धि और वैश्विक आर्थिक मंदी के चलते देश का वस्तु व्यापार घाटा दबाव में आ गया है. रिपोर्ट के अनुसार टैरिफ और जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं इस वर्ष वैश्विक विकास को प्रभावित करेंगी. हालांकि, भारत का चालू खाता घाटा (CAD) अब भी नियंत्रण में रहने की उम्मीद है, जिसका श्रेय सेवा व्यापार में अधिशेष, मजबूत विदेशी प्रेषण (रेमिटेंस) और नरम कच्चे तेल की कीमतों को जाता है.
जीडीपी 1.3% रहने की संभावना
क्रिसिल ने अनुमान जताया कि चालू वित्त वर्ष में CAD जीडीपी का 1.3% रहने की संभावना है, जबकि पिछले वर्ष यह 0.6% था. एसएंडपी ग्लोबल ने 2025 में वैश्विक विकास दर 2.9% रहने का अनुमान जताया है, जो 2024 के 3.3% से कम है. अमेरिका, जो भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, में विकास दर 2.8% से घटकर 1.7% रहने की संभावना है.
जुलाई में वस्तु निर्यात में सुधार
दो महीने की गिरावट के बाद जुलाई में भारत का वस्तु निर्यात 7.3% की वार्षिक वृद्धि के साथ 37.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया. यह वृद्धि अमेरिका द्वारा अगस्त से प्रस्तावित टैरिफ लागू करने से पहले देखी गई है. यह उछाल मुख्य रूप से मुख्य वस्तुओं के निर्यात में तेज वृद्धि (12.7%) और रत्न एवं आभूषण क्षेत्र (28.9%) से प्रेरित रहा. जून में ये आंकड़े क्रमशः 4.8% और -20.4% थे.
तेल निर्यात में लगातार गिरावट
हालांकि, तेल निर्यात में जुलाई में तीसरे महीने लगातार 25% की गिरावट दर्ज की गई, जो कि जून में 16% की गिरावट के मुकाबले और भी अधिक है. इसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रही. जुलाई में ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर 71 डॉलर प्रति बैरल रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16.8% कम है (जुलाई 2024 में 85.3 डॉलर प्रति बैरल).
अमेरिका को निर्यात में मजबूती
क्रिसिल ने यह भी बताया कि अमेरिका को निर्यात जुलाई में 19.9% की दर से बढ़ा, जो कि वित्त वर्ष 2025 के औसत 11.4% से कहीं अधिक है. इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी टैरिफ से पहले कंपनियां अग्रिम रूप से आपूर्ति कर रही हैं. इसके विपरीत, गैर-अमेरिकी बाजारों में निर्यात केवल 4.3% की वृद्धि दर्ज कर सका.
टैग्स