शेयर बाजार में आज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. वहीं, कुछ शेयरों में तेजी के भी संकेत मिले हैं.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
शेयर बाजार (Stock Market) सोमवार की तेजी के बाद मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही नरमी रिकॉर्ड की गई. कारोबार की समाप्ति पर 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 106.98 अंक की गिरावट के साथ 65,846.50 और NSE निफ्टी 26.45 अंक फिसलकर 19,570.85 पर बंद हुआ. दरअसल, इस हफ्ते भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों को लेकर फैसला सुनाएगा. साथ ही अमेरिका के महंगाई के आंकड़े भी आएंगे. इसी को ध्यान में रखते हुए निवेशक सतर्क रुख के साथ ट्रेडिंग कर रहे हैं. वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा पूंजी निकासी भी जारी है. इन्हीं सब बातों से शेयर बाजार की चाल प्रभावित हुई है. आज भी मार्केट में उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिल सकता है.
MACD के संकेत
सबसे पहले जानते हैं कि मोमेंटम इंडिकेटर MACD ने आज किन शेयरों में तेजी के संकेत दिए हैं. MACD के मुताबिक, IT कंपनी Wipro और Tech Mahindra के साथ-साथ Bank of Maharashtra, Biocon और Suven Life Sciences के शेयरों में आज उछाल आ सकता है. वहीं, जिन शेयरों में आज MACD ने मंदी का रुख दर्शाया है उसमें IDFC, JM Financial, SAIL, GIC Housing और Indian Hotels शामिल हैं. यानी इन शेयरों में गिरावट देखने को मिल सकती है. लिहाजा सोच-समझकर निवेश का कोई फैसला लें.
इन पर रखें नजर
आज आपको कुछ शेयरों पर करीबी से नजर रखनी है, क्योंकि आर्थिक गतिविधियों के चलते उनमें उछाल की संभावना बनती दिखाई दे रही है. फार्मा कंपनी Lupin की अमेरिकी सब्सिडियरी नोवेल लैबोरेटरीज को नई दवा के लिए USA FDA से मंजूरी मिल गई है. रियल एस्टेट कंपनी 'प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स' ने जून तिमाही में अच्छा-खासा प्रॉफिट कमाया है. कंपनी का लाभ 30.3% बढ़कर 267 करोड़ रुपए पहुंच गया है. इसी तरह, डेटा पैटर्न्स इंडिया का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट जून तिमाही में 81.4% की उछाल के साथ 25.83 करोड़ पहुंचा है. इन सभी गतिविधियों का कंपनियों के शेयरों पर असर पड़ सकता है.
इनके आएंगे नतीजे
आज यानी बुधवार को IRCTC, Zee एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज, बजाज कंज्यूमर केयर, एबट इंडिया, बर्जर पेंट्स इंडिया, बाटा पावर कंपनी, भारत फोर्ज, ग्रेन्यूल्स इंडिया, मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज, PI इंडस्ट्रीज, सुला विनेयार्ड्स, ट्रेंट, सनटेक रियल्टी, केयर रेटिंग्स, कल्याण ज्वेलर्स इंडिया, ड्रीमफोक्स सर्विसेज और शंकरा बिल्डिंग प्रोडक्ट्स आदि कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले हैं. ये नतीजे ऐसे रहते हैं इस पर इन कंपनियों के शेयरों की चाल निर्भर करेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर और अपने विवेक के आधार पर ही निवेश करें).
जून 2026 में देश की थोक महंगाई (Wholesale Price Index-WPI) बढ़कर 9.87 फीसदी हो गई. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में यह दर 9.68 फीसदी थी.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है. खुदरा महंगाई (CPI) के बाद अब जून 2026 में थोक महंगाई (WPI) भी बढ़कर 9.87 फीसदी पर पहुंच गई है, जो मई में 9.68 फीसदी थी. खाद्य वस्तुओं, खनिज तेल, बेसिक मेटल और रसायन उत्पादों की कीमतों में तेजी इसकी प्रमुख वजह रही. विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन लागत में बढ़ोतरी का असर आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है.
खुदरा महंगाई के बाद WPI में भी उछाल
थोक महंगाई के आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब एक दिन पहले जारी आंकड़ों में खुदरा महंगाई (CPI) भी बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई थी. जून 2026 में देश की थोक महंगाई बढ़कर 9.87 फीसदी हो गई. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में यह दर 9.68 फीसदी थी. खाद्य वस्तुओं, मिनरल ऑयल, बेसिक मेटल और केमिकल उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते लगातार दूसरे महीने WPI महंगाई में तेजी दर्ज की गई है. वहीं, कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) के आधार पर खाद्य महंगाई 5.32 फीसदी दर्ज की गई, जो मई के 4.78 फीसदी से अधिक है. इससे साफ है कि खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है.
खाद्य वस्तुओं और कच्चे माल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
जून में प्राथमिक वस्तुओं (Primary Articles) की महंगाई 4.99 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी हो गई. खाद्य वस्तुओं की महंगाई भी 3.60 फीसदी से बढ़कर 5.49 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़कर 11.07 फीसदी हो गई. WPI फूड इंडेक्स भी 4.49 फीसदी से बढ़कर 6.14 फीसदी दर्ज किया गया, जो कृषि और खाद्य उत्पादों की बढ़ती लागत को दर्शाता है.
ईंधन महंगा, बिजली में राहत
ईंधन एवं बिजली श्रेणी की महंगाई जून में 27.41 फीसदी रही. हालांकि यह मई के 30.33 फीसदी से कुछ कम है, लेकिन अब भी काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. मिनरल ऑयल की महंगाई 46.48 फीसदी रही, जबकि कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई घटकर 34.75 फीसदी रह गई. दूसरी ओर, बिजली की कीमतों में 0.76 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लागत का दबाव बरकरार
जून में विनिर्मित उत्पादों (Manufactured Products) की महंगाई 7.48 फीसदी पर स्थिर रही. हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर खाद्य उत्पादों और टेक्सटाइल की कीमतों में तेजी देखी गई. बेसिक मेटल और केमिकल सेक्टर में भी लागत का दबाव बना रहा.
विशेषज्ञों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं और प्राथमिक उत्पादों की कीमतों में तेजी के कारण थोक महंगाई बढ़ी है. उनका कहना है कि यदि कच्चे माल और कृषि उत्पादों की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिलती, तो इसका असर खुदरा महंगाई और कंपनियों के मुनाफे दोनों पर पड़ सकता है. जून में WPI उम्मीद से अधिक बढ़ी है. उनके अनुसार, जुलाई में भी खाद्य महंगाई का दबाव बना रह सकता है, हालांकि वैश्विक कमोडिटी कीमतों में कुछ नरमी राहत दे सकती है. उन्होंने जुलाई में WPI महंगाई करीब 9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है.
SBI Funds Management ने IPO का प्राइस बैंड ₹545 से ₹574 प्रति शेयर तय किया है. यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित इश्यू है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) SBI Funds Management का ₹9,795 करोड़ का IPO मंगलवार से निवेशकों के लिए खुल गया है. इश्यू खुलने से पहले ही कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹2,663 करोड़ जुटाकर मजबूत शुरुआत की है. वहीं, ग्रे मार्केट में शेयर करीब 16-17 फीसदी प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है, जिससे शानदार लिस्टिंग की उम्मीदें बढ़ गई हैं. ब्लैकरॉक, गोल्डमैन सैक्स, LIC और HDFC Mutual Fund जैसे दिग्गज संस्थागत निवेशकों की भागीदारी ने भी इस IPO को बाजार का सबसे चर्चित इश्यू बना दिया है. बता दें, कंपनी का यह इश्यू 16 जुलाई तक सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध रहेगा.
GMP क्या बता रहा है?
IPO खुलने के बाद भी SBI Funds Management के शेयर ग्रे मार्केट में मजबूत प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं. सुबह करीब 9:30 बजे कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹93 दर्ज किया गया, जिससे शेयर का संभावित लिस्टिंग भाव करीब ₹667 आंका जा रहा है. यह इश्यू प्राइस ₹574 के मुकाबले लगभग 16.20 फीसदी अधिक है. मौजूदा GMP के आधार पर एक लॉट पर निवेशकों को करीब ₹2,400 का संभावित लिस्टिंग गेन मिल सकता है.
ब्रोकरेज फर्मों ने क्या दी सलाह?
लगभग सभी प्रमुख ब्रोकरेज हाउस इस IPO को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं.
1. आनंद राठी ने SBI की मजबूत ब्रांड वैल्यू, Amundi की साझेदारी और व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के आधार पर 'Subscribe' की सलाह दी है.
2. अरिहंत कैपिटल ने 12.51 लाख करोड़ रुपये के AUM और मजबूत मुनाफे को देखते हुए लंबी अवधि के लिए निवेश की सिफारिश की है.
एंकर निवेशकों का जबरदस्त भरोसा
कंपनी ने IPO खुलने से पहले 129 फंड्स को 4.64 करोड़ इक्विटी शेयर ₹574 प्रति शेयर के हिसाब से आवंटित किए. एंकर बुक में BlackRock, Goldman Sachs Asset Management, Fidelity, GIC, Abu Dhabi Investment Authority, Norges Bank और Capital World Investors जैसे वैश्विक निवेशकों के अलावा LIC, HDFC Mutual Fund, ICICI Prudential Mutual Fund, Nippon India Mutual Fund और HDFC Life जैसे घरेलू संस्थानों ने भी निवेश किया.
सबसे बड़े आवंटन में HDFC Mutual Fund और ICICI Prudential Mutual Fund को ₹200-200 करोड़ के शेयर मिले, जबकि GIC, Capital World Investors और LIC को ₹180-180 करोड़ का आवंटन किया गया.
प्राइस बैंड और कंपनी की वैल्यूएशन
SBI Funds Management ने IPO का प्राइस बैंड ₹545 से ₹574 प्रति शेयर तय किया है. यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित इश्यू है, जिसके जरिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और Amundi India Holding अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं.
अपर प्राइस बैंड के आधार पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹1.2 लाख करोड़ बैठता है. लिस्टिंग के बाद SBI की हिस्सेदारी 61.76 फीसदी से घटकर 55.46 फीसदी रह जाएगी, जबकि Amundi की हिस्सेदारी 32.56 फीसदी होगी.
देश की सबसे बड़ी AMC
31 मार्च 2026 तक SBI Funds Management का क्वार्टरली एवरेज एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (QAAUM) ₹12.51 लाख करोड़ था, जो इसे 15.3 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी बनाता है.
1987 में स्थापित यह कंपनी देश की सबसे पुरानी AMC में भी शामिल है. SBI के 23,000 से अधिक शाखाओं के नेटवर्क, 9.6 करोड़ से ज्यादा YONO यूजर्स और वैश्विक पार्टनर Amundi के सहयोग ने कंपनी की विकास यात्रा को मजबूत बनाया है. मार्च 2023 से दिसंबर 2025 के बीच कंपनी के रिटेल इक्विटी एसेट्स में 36.5 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि SIP के जरिए आने वाला मासिक निवेश लगभग दोगुना होकर ₹3,960 करोड़ तक पहुंच गया.
तमिलनाडु सरकार ने बिजली क्षेत्र में बड़े सुधार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए ₹15,312 करोड़ के निवेश का रोडमैप तैयार किया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
तमिलनाडु सरकार ने राज्य की बिजली व्यवस्था को अधिक मजबूत, भरोसेमंद और भविष्य के लिए तैयार बनाने के उद्देश्य से ₹15,312 करोड़ के बड़े निवेश की घोषणा की है. इस योजना के तहत बिजली ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को आधुनिक बनाया जाएगा, नए सबस्टेशन स्थापित होंगे और ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया जाएगा. सरकार का दावा है कि इससे बिजली आपूर्ति बेहतर होगी, लागत घटेगी और ऊर्जा क्षेत्र को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तमिलनाडु सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव और TNPDCL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक जे. राधाकृष्णन ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिजली आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय बनाना, वितरण प्रणाली को आधुनिक करना, लागत घटाना और नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को तेज करना है.
231 नए सबस्टेशन, पुराने नेटवर्क का होगा आधुनिकीकरण
सरकार की योजना के तहत 121 निर्माणाधीन सबस्टेशन पूरे किए जाएंगे, जबकि 231 नए सबस्टेशन स्थापित किए जाएंगे. इसके अलावा ट्रांसफॉर्मर, ट्रांसमिशन लाइन और वितरण नेटवर्क का बड़े पैमाने पर उन्नयन किया जाएगा. पुराने बिजली ढांचे के आधुनिकीकरण पर ₹8,318 करोड़ खर्च किए जाएंगे, जिससे ग्रिड की क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ेगी.
बैटरी स्टोरेज और स्मार्ट ग्रिड पर रहेगा फोकस
तमिलनाडु सरकार बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP), स्मार्ट ग्रिड और डिजिटल तकनीकों के विकास पर भी तेजी से काम करेगी. इस दिशा में रिसर्च और नई तकनीकों के विकास के लिए आईआईटी मद्रास के साथ समझौता भी किया गया है.
बिजली खरीद की नई रणनीति से होगी बचत
सरकार बिजली खरीद की रणनीति में भी बदलाव कर रही है. अब महंगी शॉर्ट-टर्म खरीद और बिजली एक्सचेंज पर निर्भरता कम की जाएगी. इसकी जगह लंबी अवधि के बिजली खरीद समझौतों, राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल पावर, फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) और स्टोरेज आधारित बिजली को प्राथमिकता दी जाएगी.
सरकार का अनुमान है कि 8.91 रुपये प्रति यूनिट की औसत लागत वाली बाजार से खरीदी जाने वाली बिजली के बजाय 6.63 रुपये प्रति यूनिट की दीर्घकालिक खरीद से गर्मियों के दौरान हर महीने करीब ₹215 करोड़ की बचत हो सकती है.
ग्रीन एनर्जी हब बनने की तैयारी
सरकार के मुताबिक, नई ग्रीन पावर कंपनी TNGECL अगले पांच वर्षों में राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी पार्क और ग्रीन एनर्जी जोन विकसित करने का प्रमुख माध्यम बनेगी. इसके साथ ही निजी निवेश, नई तकनीकों और उद्योगों के साथ साझेदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा.
वाणिज्य मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया, जो मई के 28.21 अरब डॉलर से अधिक है. एक साल पहले जून 2025 में यह आंकड़ा 19.10 अरब डॉलर था.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जून 2026 में भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 30.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात में तेज बढ़ोतरी के चलते आयात 31% उछल गया. हालांकि, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक सामान की मजबूत मांग के दम पर निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो चालू खाते के घाटे (CAD) पर दबाव बढ़ सकता है.
वाणिज्य मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया, जो मई के 28.21 अरब डॉलर से अधिक है. एक साल पहले जून 2025 में यह आंकड़ा 19.10 अरब डॉलर था. इस दौरान वस्तु आयात (Merchandise Imports) 31% बढ़कर 70.84 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि निर्यात 16% बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा.
कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात ने बढ़ाया दबाव
जून में भारत का कच्चे तेल का आयात 40% बढ़कर 19.33 अरब डॉलर हो गया. वहीं इलेक्ट्रॉनिक सामान का आयात 59% बढ़कर 13.36 अरब डॉलर और सोने का आयात 7% बढ़कर 1.97 अरब डॉलर पर पहुंच गया. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, इन वस्तुओं की ऊंची कीमतें और बढ़ती मांग आयात बढ़ने की प्रमुख वजह रहीं.
सरकार द्वारा कच्चे कपास के आयात पर शुल्क में छूट दिए जाने के बाद इसका आयात लगभग तीन गुना बढ़ गया. वहीं उर्वरक (Fertilizer) का आयात भी जून में तीन गुना बढ़कर 2.30 अरब डॉलर हो गया.
निर्यात में भी रही मजबूत बढ़ोतरी
आयात में तेज बढ़ोतरी के बावजूद भारत का निर्यात मजबूत बना रहा. जून में इंजीनियरिंग सामान का निर्यात 21% बढ़कर 11.48 अरब डॉलर हो गया. इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात 19% बढ़कर 4.93 अरब डॉलर और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 9% बढ़कर 4.87 अरब डॉलर रहा.
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद इस क्षेत्र में भारत का निर्यात 7% बढ़कर 5 अरब डॉलर पहुंच गया. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना रहा, हालांकि वहां निर्यात मामूली घटकर 8.17 अरब डॉलर रह गया.
सेवा क्षेत्र से मिली राहत
वाणिज्य मंत्रालय के शुरुआती अनुमान के अनुसार, जून में सेवा निर्यात 3% बढ़कर 33.03 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा आयात 13% बढ़कर 17.92 अरब डॉलर पहुंच गया. इससे सेवा क्षेत्र में भारत को 15.11 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) मिला. अंतिम आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस महीने के अंत में जारी करेगा.
चीन से आयात में बड़ा उछाल
जून में चीन से भारत का आयात 40% बढ़कर 13.34 अरब डॉलर हो गया, जिससे वह भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना रहा. वहीं चीन को भारत का निर्यात भी करीब 32% बढ़कर 1.81 अरब डॉलर पहुंच गया.
पहली तिमाही में भी बढ़ा व्यापार घाटा
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का कुल वस्तु निर्यात 16% बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 20% बढ़कर 216.18 अरब डॉलर पहुंच गया. इस दौरान देश का व्यापार घाटा 86.86 अरब डॉलर दर्ज किया गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में भारत का चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) जीडीपी के कम से कम 1% तक पहुंच सकता है. जून में व्यापार घाटा बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स का बढ़ा हुआ आयात है. उनका कहना है कि फिलहाल निर्यात मजबूत बना हुआ है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो चालू खाते के घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. हालांकि, RBI के विदेशी मुद्रा प्रबंधन उपाय इस जोखिम को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं.
इस सौदे के बाद कंपनी की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 9.3 गीगावाट तक पहुंच जाएगी और वह देश की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल हो जाएगी.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आदित्य बिड़ला ग्रुप ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी डील्स में से एक पर मुहर लगा दी है. दरअसल, ग्रुप की कंपनी Aditya Birla Renewables ने 17,200 करोड़ रुपये (करीब 1.8 अरब डॉलर) में Sprng Energy के अधिग्रहण का ऐलान किया है. इस सौदे के बाद कंपनी की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 9.3 गीगावाट तक पहुंच जाएगी और वह देश की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल हो जाएगी. जानकारों के अनुसार, इस डील से इस सेक्टर में पहले से मजबूत मौजूदगी रखने वाले अडानी ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज को भी कड़ी चुनौती मिल सकती है.
9.3 गीगावाट तक पहुंच जाएगी क्षमता
इस अधिग्रहण के बाद Aditya Birla Renewables की कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़कर करीब 9.3 गीगावाट-पीक (GWp) हो जाएगी. इसमें 3.3 गीगावाट की चालू परियोजनाएं और 1.7 गीगावाट निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं. कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अपनी क्षमता बढ़ाकर 20 गीगावाट-पीक से अधिक करना है.
कर्ज और इक्विटी के मिश्रण से होगी फंडिंग
कंपनी के मुताबिक, इस अधिग्रहण के लिए फंडिंग Grasim Industries और BlackRock समर्थित Global Infrastructure Partners द्वारा प्रबंधित फंड्स के जरिए कर्ज और इक्विटी के मिश्रण से की जाएगी. Shell Overseas को मिलने वाली अंतिम राशि का निर्धारण कर्ज, नकदी और अन्य वित्तीय समायोजनों के बाद किया जाएगा.
साल के अंत तक पूरी हो सकती है डील
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह अधिग्रहण आवश्यक नियामकीय मंजूरियों और अन्य औपचारिकताओं के अधीन है. कंपनी को उम्मीद है कि सभी मंजूरियां मिलने के बाद यह सौदा 2026 के अंत तक पूरा हो जाएगा.
क्या होगा इस डील का फायदा?
इस अधिग्रहण के जरिए Aditya Birla Renewables के कमर्शियल एवं इंडस्ट्रियल (C&I) कारोबार को Sprng Energy के यूटिलिटी-स्केल सोलर, विंड और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स के साथ जोड़ा जाएगा. इससे परियोजनाओं के विकास, इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण और एसेट मैनेजमेंट में बेहतर तालमेल बनेगा और परिचालन क्षमता बढ़ेगी.
आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि समूह ने हमेशा दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ वैश्विक स्तर के कारोबार खड़े किए हैं और भारत के ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) को भी उसी सोच के साथ देखता है. उनके मुताबिक यह अधिग्रहण देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को गति देने के साथ आर्थिक विकास को भी मजबूती देगा.
ग्रुप के निदेशक आर्यमान विक्रम बिड़ला ने इसे कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया. वहीं ABREL के बिजनेस हेड जयंत दुआ ने कहा कि दोनों कंपनियों के एकीकरण से परिचालन दक्षता बढ़ेगी और भविष्य की परियोजनाओं के निष्पादन में तेजी आएगी.
जनवरी 2025 से लागू नई CPI श्रृंखला के तहत यह पहला मौका है, जब खुदरा महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर पहुंची है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जून में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर है. नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला लागू होने के बाद यह पहली बार है जब महंगाई केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से आगे निकली है. ईंधन की बढ़ती कीमतों, परिवहन लागत और खाद्य महंगाई में तेजी इसकी प्रमुख वजह रही. हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में RBI फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करेगा.
इतनी बढ़ गई महंगाई
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में 3.93% रही खुदरा महंगाई जून में बढ़कर 4.38% हो गई. जनवरी 2025 से लागू नई CPI श्रृंखला के तहत यह पहला मौका है, जब खुदरा महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर पहुंची है. बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण परिवहन, खाद्य और रेस्तरां सेवाओं की लागत में इजाफा हुआ, जिससे महंगाई दर में तेजी आई.
खाद्य महंगाई ने बढ़ाया दबाव
उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) के आधार पर जून में खाद्य महंगाई बढ़कर 5.32% हो गई, जो मई में 4.78% थी. अदरक की कीमतों में 50.41% और टमाटर में 31.92% की बढ़ोतरी ने खाद्य महंगाई को ऊपर पहुंचाया. खाद्य एवं पेय पदार्थों की महंगाई भी 5.05% रही, जो नई CPI श्रृंखला में पहली बार 5% के पार पहुंची है.
ईंधन महंगा होने से बढ़ी परिवहन और सेवाओं की लागत
मई के मध्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का पूरा असर जून के आंकड़ों में देखने को मिला. परिवहन क्षेत्र में महंगाई मई के 1.75% से बढ़कर जून में 4.31% हो गई. वहीं रेस्तरां और होटल सेवाओं में महंगाई 6.91% तथा पान एवं तंबाकू श्रेणी में 6.89% दर्ज की गई.
ग्रामीण इलाकों में महंगाई ज्यादा
जून में ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई 4.74% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.92% दर्ज की गई. इससे साफ है कि महंगाई का असर गांवों में शहरों की तुलना में अधिक देखने को मिला.
क्या बढ़ेगी ब्याज दर?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि 5 अगस्त को होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल कम है. इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि अप्रैल के मुकाबले वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से दरें बढ़ाने का दबाव कम हुआ है. हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और मानसून की स्थिति पर RBI की नजर बनी रहेगी.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई?
राज्यों की बात करें तो जून में सबसे अधिक खुदरा महंगाई तेलंगाना में 6.36% दर्ज की गई. इसके बाद आंध्र प्रदेश (5.39%), तमिलनाडु (5.24%), ओडिशा (5.15%) और मध्य प्रदेश (5.09%) का स्थान रहा. विशेषज्ञों के मुताबिक, इन राज्यों में खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह रहीं.
आगे क्या है अनुमान?
DBS Bank, ICRA, Crisil और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई संस्थानों का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बना रह सकता है. क्रिसिल ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत खुदरा महंगाई 5.1% रहने का अनुमान जताया है, जबकि इक्रा का अनुमान है कि जुलाई में खुदरा महंगाई बढ़कर करीब 4.6% तक पहुंच सकती है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और खाद्य वस्तुओं के दाम आगे महंगाई की दिशा तय करेंगे.
मजबूत तिमाही नतीजों के साथ HCL Tech के बोर्ड ने निवेशकों के लिए 2 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 12 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की तीसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी HCL Technologies ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में मजबूत नतीजे पेश किए हैं. कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 20% बढ़कर 4,624 करोड़ रुपये पहुंच गया. बेहतर प्रदर्शन के साथ कंपनी ने निवेशकों के लिए 12 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है. इसके अलावा AI कारोबार पर बड़ा दांव लगाते हुए HCL Tech ने 3,500 करोड़ रुपये के निवेश से AI डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना भी पेश की है.
HCL Technologies ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 20.3% बढ़कर 4,624 करोड़ रुपये रहा. एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी ने 3,843 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था. वहीं कंपनी की परिचालन आय 14% बढ़कर 34,579 करोड़ रुपये पर पहुंच गई.
12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का ऐलान
मजबूत तिमाही नतीजों के साथ HCL Tech के बोर्ड ने निवेशकों के लिए 2 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 12 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है. कंपनी ने 17 जुलाई 2026 को रिकॉर्ड डेट और 27 जुलाई 2026 को डिविडेंड भुगतान की तारीख तय की है.
पूरे साल के लिए ग्रोथ गाइडेंस बरकरार
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान (Revenue Guidance) में कोई बदलाव नहीं किया है. HCL Tech ने पूरे वित्त वर्ष के लिए 1% से 4% राजस्व वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा है.
AI और नई तकनीकों पर रहेगा फोकस
HCL Tech की चेयरपर्सन रोशनी नाडर मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी अपने विविध पोर्टफोलियो के जरिए ग्राहकों को नई तकनीकों को अपनाने में मदद कर रही है. उन्होंने कहा कि HCL Tech कर्मचारियों को उभरती तकनीकों में प्रशिक्षित करने और पूरे संगठन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को बढ़ाने पर लगातार निवेश कर रही है.
वहीं कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं प्रबंध निदेशक सी. विजयकुमार ने बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी को 2.4 अरब डॉलर के नए ऑर्डर मिले हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा तिमाही ऑर्डर बुक है.
AI डेटा सेंटर पर 3,500 करोड़ रुपये का निवेश
HCL Tech ने AI कारोबार को विस्तार देने के लिए भारत में AI आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने की भी घोषणा की है. कंपनी का बोर्ड इस परियोजना के लिए 3,500 करोड़ रुपये तक के निवेश को मंजूरी दे चुका है.
यह निवेश नई पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों के जरिए किया जाएगा. कंपनी का लक्ष्य AI डेटा सेंटर की क्षमता को 50 मेगावॉट तक विकसित करना है. HCL Tech का कहना है कि यह निवेश डेटा सेंटर डिजाइन, AI क्लाउड ऑपरेशन और सॉफ्टवेयर सेवाओं के साथ मिलकर ग्राहकों को एंड-टू-एंड AI समाधान उपलब्ध कराने में मदद करेगा.
कर्मचारियों की संख्या में आई गिरावट
तिमाही के दौरान HCL Tech के कर्मचारियों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई. अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या 3,292 घटकर 2,23,889 रह गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 2,27,181 था.
वहीं, पिछले 12 महीनों (LTM) के आधार पर कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर (Attrition Rate) 12.7% रही, जो मार्च 2026 तिमाही में 12.5% थी. इससे संकेत मिलता है कि आईटी सेक्टर में कर्मचारियों के पलायन की चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
सोमवार को सेंसेक्स 47.01 अंक यानी 0.06% की बढ़त के साथ 77,616.40 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 4.10 अंक चढ़कर 24,211 पर बंद हुआ.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने बेहद उतार-चढ़ाव भरा सत्र देखा. कारोबार की शुरुआत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा टूट गया था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,000 के करीब फिसल गया था. हालांकि दिन के दूसरे हिस्से में आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी लौटने से बाजार ने शानदार वापसी की और दोनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए. सेंसेक्स 47.01 अंक यानी 0.06% की बढ़त के साथ 77,616.40 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 4.10 अंक चढ़कर 24,211 पर बंद हुआ. बाजार की इस रिकवरी में आईटी सेक्टर की अहम भूमिका रही.
TCS और HCL Tech ने संभाली बाजार की कमान
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 13 बढ़त के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा तेजी TCS में देखने को मिली, जिसका शेयर 5.43% चढ़ गया. इसके अलावा HCL Tech में 5.02%, Tech Mahindra में 3.34% और Infosys में 3.17% की तेजी दर्ज की गई. NTPC और Kotak Mahindra Bank भी प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे. दूसरी ओर Tata Steel, Eternal, UltraTech Cement, InterGlobe Aviation (IndiGo), Maruti Suzuki और Bharat Electronics (BEL) के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली.
ब्रॉडर मार्केट में भी रही मजबूती
मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट ने भी सकारात्मक रुख दिखाया. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.01% और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.03% की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी आईटी सबसे बड़ा गेनर रहा, जबकि एफएमसीजी और मेटल शेयरों पर दबाव बना रहा.
क्यों टूटा था बाजार?
सोमवार को शुरुआती कारोबार में बाजार पर दबाव की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा. दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई की खबरों और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा से वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई. इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 4% से ज्यादा उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई.
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात बिल और ट्रेड बैलेंस पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी, जिसका असर बाजार की शुरुआती कमजोरी के रूप में देखने को मिला. हालांकि बाद में आईटी शेयरों में खरीदारी और वैश्विक संकेतों में सुधार से बाजार ने नुकसान की भरपाई कर ली.
आज बाजार की नजर किन संकेतों पर?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों की चाल और जारी तिमाही नतीजों पर रहेगी. सोमवार की मजबूत रिकवरी यह संकेत देती है कि गिरावट पर खरीदारी की रणनीति फिलहाल बाजार को समर्थन दे रही है.
इन शेयरों पर रखें नजर
आज घरेलू शेयर बाजार में कई कंपनियों से जुड़ी अहम खबरों के चलते चुनिंदा शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. निवेशक Emcure Pharmaceuticals, Welspun Enterprises, HCL Technologies, Fino Payments Bank, Grasim Industries, Zee Entertainment, Biocon और SBI Funds Management पर नजर बनाए रखेंगे. HCL Tech ने भारत में AI डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 3,500 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है, जबकि SBI Funds Management का 9,813 करोड़ रुपये का आईपीओ आज निवेशकों के लिए खुल गया है. वहीं Grasim की सहायक कंपनी ने 17,200 करोड़ रुपये में Solenergi Power के अधिग्रहण को मंजूरी दी है. इसके अलावा Zee Entertainment को FCCB से जुड़े प्रस्ताव पर RBI की मंजूरी मिली है, जबकि Biocon में Mylan की हिस्सेदारी बिक्री की खबर भी चर्चा में है. दूसरी ओर Emcure, Welspun और Fino Payments Bank से जुड़े कॉरपोरेट अपडेट भी निवेशकों का ध्यान खींचेंगे. आज L&T Technology Services, Tata Elxsi, Anand Rathi Share and Stock Brokers, Aditya Birla Money, Jindal Saw और अन्य कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे भी जारी करेंगी, जिससे इन शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
संशोधित नियमों के तहत निवेश, वित्तीय खुलासे, नौकरी बदलने और उपहार स्वीकार करने से जुड़े प्रावधान पहले के मुकाबले अधिक सख्त कर दिए गए हैं.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने कर्मचारियों के सेवा नियमों में बड़ा बदलाव किया है. बोर्ड ने हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के मकसद से निवेश, नई नौकरी, उपहार स्वीकार करने और वित्तीय खुलासों से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है. नए प्रावधानों के तहत नौकरी छोड़ने के बाद कर्मचारी दो साल तक सेबी के समक्ष किसी भी व्यक्ति या संस्था का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेंगे.
परिवार और आश्रित की परिभाषा का दायरा बढ़ा
नए नियमों के तहत 'परिवार' और 'आश्रित' की परिभाषा को पहले से अधिक व्यापक बनाया गया है. अब इसमें गोद लिए गए बच्चे, सौतेले बच्चे और ऐसे व्यक्ति भी शामिल होंगे, जो किसी कर्मचारी पर आर्थिक रूप से काफी हद तक निर्भर हैं. इस बदलाव के बाद निवेश और अन्य वित्तीय जानकारियों के खुलासे से जुड़े नियम इन सभी लोगों पर भी लागू होंगे.
नौकरी छोड़ने के बाद दो साल तक नहीं कर सकेंगे प्रतिनिधित्व
SEBI ने पूर्व कर्मचारियों के लिए दो साल की अनिवार्य 'कूलिंग-ऑफ' अवधि लागू कर दी है. इसका मतलब है कि नौकरी छोड़ने के बाद अगले दो वर्षों तक कोई भी पूर्व कर्मचारी किसी व्यक्ति, कंपनी या संस्था की ओर से सेबी के समक्ष लंबित मामलों, सेटलमेंट, मंजूरी या अर्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) कार्यवाही में प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेगा. इसके अलावा, यदि कोई कर्मचारी नई नौकरी के लिए किसी कंपनी से बातचीत शुरू करता है, तो उसे एक महीने के भीतर इसकी जानकारी सेबी को देना अनिवार्य होगा.
निवेश नियमों में भी सख्ती
संशोधित नियमों के तहत कर्मचारियों के लिए 'अनुमत' और 'प्रतिबंधित' निवेश की स्पष्ट श्रेणियां तय की गई हैं. अब कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य सेवा अवधि के दौरान सीधे शेयरों, इक्विटी में बदलने वाले वित्तीय साधनों और डेरिवेटिव्स में नया निवेश नहीं कर सकेंगे. हालांकि म्यूचुअल फंड, REITs और अन्य विनियमित सामूहिक निवेश माध्यमों में निवेश की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी.
कुछ निवेश उत्पादों पर तय हुई सीमा
SEBI ने कुछ विनियमित निवेश उत्पादों में निवेश की अधिकतम सीमा भी तय कर दी है. नए नियमों के अनुसार, ऐसे निवेश कर्मचारी के कुल निवेश का 25% से अधिक नहीं हो सकेंगे. हालांकि जीवनसाथी को मिलने वाले Employee Stock Options (ESOPs) और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन जैसी कुछ श्रेणियों को सीमित छूट दी गई है.
गिफ्ट स्वीकार करने के नियम भी बदले
SEBI ने उपहार स्वीकार करने से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया है. अब कर्मचारियों को 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के किसी भी उपहार की जानकारी देना अनिवार्य होगा. पहले यह सीमा 10,000 रुपये थी. इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सामाजिक और पारंपरिक अवसरों पर मिलने वाले सामान्य उपहार किन परिस्थितियों में स्वीकार किए जा सकते हैं.
इस समझौते के तहत TCS ABB के ग्लोबल नेटवर्क ऑपरेशंस को AI आधारित तकनीक से आधुनिक बनाएगी.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा ग्रुप की प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयरों में सोमवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली. ABB के साथ हुई बहु-वर्षीय रणनीतिक डील की घोषणा के बाद कंपनी का शेयर करीब 6% तक चढ़ गया. दोपहर में खबर लिखे जाने तक TCS का शेयर 5.56% की बढ़त के साथ 2,184.00 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इस खबर का असर पूरे आईटी सेक्टर पर भी दिखा और निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 4% की तेजी के साथ कारोबार करता नजर आया. कंपनी ने इसके साथ ही संगठन में बड़े बदलावों का भी ऐलान किया है, जिसे भविष्य की ग्रोथ रणनीति का अहम कदम माना जा रहा है.
ABB के लिए संभालेगी ग्लोबल नेटवर्क ऑपरेशंस
एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, इस समझौते के तहत TCS, ABB के वैश्विक नेटवर्क ऑपरेशंस की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी. कंपनी सिर्फ आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और एप्लिकेशन मैनेजमेंट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि Network-as-a-Service (NaaS) मॉडल के जरिए एंड-टू-एंड नेटवर्क ऑपरेशंस का संचालन करेगी.
इस प्रोजेक्ट के तहत ABB के नेटवर्क को AI आधारित, सुरक्षित और आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बदला जाएगा. इससे यूजर एक्सपीरियंस बेहतर होगा, परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) बढ़ेगी और साइबर सुरक्षा भी मजबूत होगी.
AI रणनीति पर बड़ा दांव
TCS के मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस के प्रेसिडेंट अनुपम सिंघल ने कहा कि कंपनी AI की मदद से ऐसा स्मार्ट नेटवर्क तैयार करेगी, जो परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सके, बदलावों को समझ सके और समय के साथ लगातार बेहतर होता रहे. उनका कहना है कि यह पहल ABB को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप डिजिटल नेटवर्क उपलब्ध कराएगी.
कंपनी में हुआ बड़ा संगठनात्मक फेरबदल
ABB डील के साथ ही TCS ने अपने संगठनात्मक ढांचे में भी बड़ा बदलाव किया है. कंपनी ने पांच नए बिजनेस ग्रुप बनाए हैं, जिनमें ServiceNow, Travel & Transport, Energy & Utilities, US West Coast और Global Autonomous Business शामिल हैं. इसके अलावा बैंकिंग, साइबर सिक्योरिटी, लाइफ साइंसेज, कम्युनिकेशन और मीडिया जैसे प्रमुख कारोबारों के लिए नए बिजनेस लीडर्स की नियुक्ति भी की गई है.
बैंकिंग कारोबार पर रहेगा विशेष फोकस
TCS के कुल राजस्व का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर से आता है, जबकि उत्तर अमेरिका कंपनी का सबसे बड़ा बाजार है, जहां से करीब आधी कमाई होती है. इसी रणनीति के तहत कंपनी ने अमेरिकी बैंकिंग कारोबार को US East और US West दो हिस्सों में बांट दिया है, ताकि ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दी जा सकें.
जून तिमाही के नतीजों ने भी बढ़ाया भरोसा
पिछले सप्ताह जारी जून तिमाही के नतीजों में TCS ने बाजार के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया था. बैंकिंग सेक्टर से मजबूत मांग और रुपये में कमजोरी का फायदा कंपनी को मिला. अब ABB के साथ हुई नई डील और संगठनात्मक बदलाव को कंपनी की AI-केंद्रित रणनीति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)