देशी-विदेशी स्टार्टअप्स एम्पलाइज के लिए 'संकट'; 2022 पड़ रहा है यूं भारी

भारत सहित विश्व भर में स्टार्टअप्स की बयार मंद पड़ गई है. भारत में दुनिया के 60 फीसदी स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं.

Last Modified:
Monday, 31 October, 2022
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नई दिल्लीः भारत सहित विश्व भर में स्टार्टअप्स की बयार मंद पड़ गई है. इसके कारण तो काफी है, लेकिन इस वजह से एक साल में 93 हजार से अधिक लोगों को छंटनी का शिकार होना पड़ा है. इसका असर भारत में भी देखने को मिला है. इस साल जुलाई तक भारतीय स्टार्टअप्स भी 12 हजार लोगों को नौकरी से अलविदा कह चुके थे और ये सिलसिला अभी भी जारी है. फंडिंग न मिलने से विश्लेषकों का कहना है कि इस साल के अंत तक लागत को घटाने के लिए 50,000 और लोगों को नौकरी से निकाला जा सकता है.

भारत में दुनिया के 60 फीसदी स्टार्टअप्स

भारत में दुनिया के 60 फीसदी स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं. फंडिंग की कमी और कारोबार में फायदा नहीं होने की वजह से स्टार्टअप के हालात खराब हैं. यही कारण है कि लागत घटाने के लिए कर्मचारियों की छंटनी हो रही है.सबसे ज्यादा प्रभावित होनेवाली कंपनियों में एडटेक क्षेत्र की हैं. इसमें बायजू, अनअकादमी, वेदांतू, कार्स 24, एमपीएल, लिडो लर्निंग, ट्रेल, फारआई और अन्य हैं. 

क्रिप्टो में भी मची मारामारी

कोरोना के बाद जिस तरह से क्रिप्टो का बाजार तेजी से भागा, उससे ढेर सारी कंपनियां इस क्षेत्र में आ गईं. पर अब क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में 70 फीसदी से ज्यादा गिरावट ने निवेशकों के साथ-साथ कंपनियों को भी परेशान कर दिया है. इसमें जेमिनी, वाल्ड, बिटपांडा और अन्य ने अपने कर्मचारियों की संख्या घटाने की योजना बनाई है. 

700 स्टार्टअप्स में हुई छंटनी

क्रंचबेस साइट के अनुसार जुलाई और सितंबर के बीच दुनियाभर में स्टार्टअप कंपनियों ने छह लाख करोड़ रुपये जुटाए थे. साइट द्वारा 2007 में फंडिंग के आंकड़े जुटाने के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट है. पिछले साल की समान अवधि से 53 फीसदी कम है. स्टार्टअप्स में छंटनी पर नजर रखने वाली साइट लेऑफ्सडॉटएफवाई के अनुसार 700 स्टार्टअप्स ने इस साल 93 हजार कर्मचारियों को निकाला है. 

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महिंद्रा एंड महिंद्रा का मुनाफा 25% बढ़कर ₹4,588 करोड़, ऑटो कारोबार ने दिखाई दमदार ग्रोथ

जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू भी 25% बढ़कर ₹57,553 करोड़ पहुंचा. ऑटो कारोबार का मुनाफा 55% बढ़ा, जबकि ट्रैक्टर कारोबार की बिक्री में 6% की गिरावट दर्ज की गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
BWHindia

महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है. जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 25% बढ़कर 4,588 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 3,673 करोड़ रुपये था. इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी 25% बढ़कर 57,553 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 46,106 करोड़ रुपये था.

कंपनी के कुल प्रदर्शन में ऑटो कारोबार की अहम भूमिका रही. इस सेगमेंट में मुनाफा 55% बढ़ा, जबकि वाहनों की बिक्री में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. दूसरी ओर, ट्रैक्टर और कृषि उपकरण कारोबार को त्योहारों के समय में बदलाव और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का दबाव झेलना पड़ा. इसके चलते इस कारोबार की बिक्री और मुनाफे में गिरावट आई. समूह की फाइनेंशियल सर्विसेज और टेक्नोलॉजी कारोबार ने भी बेहतर प्रदर्शन किया.

ऑटो कारोबार का मुनाफा 55% बढ़ा

महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटो कारोबार ने दूसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया. इस सेगमेंट का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 55% बढ़कर 2,388 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, रेवेन्यू 39% की बढ़ोतरी के साथ 37,756 करोड़ रुपये रहा.

तिमाही के दौरान कंपनी ने अपनी सहायक कंपनियों सहित कुल 3,30,896 वाहन बेचे, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 26% अधिक है. कंपनी की यूटिलिटी व्हीकल बिक्री करीब 1.83 लाख यूनिट रही. एसयूवी की बिक्री में भी सालाना आधार पर 26% की वृद्धि दर्ज की गई.

एसयूवी बाजार में रेवेन्यू के आधार पर कंपनी की हिस्सेदारी 24.3% रही. वहीं, इलेक्ट्रिक एसयूवी सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी 30.1% पहुंच गई. इसके अलावा 3.5 टन से कम वजन वाले हल्के कमर्शियल वाहनों के बाजार में महिंद्रा की हिस्सेदारी 52.3% और इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों में 36.2% रही.

ऑटो कारोबार का स्टैंडअलोन ब्याज और टैक्स से पहले मुनाफा (PBIT) 15% बढ़कर 2,614 करोड़ रुपये रहा. इसका पीबीआईटी मार्जिन 7.7% दर्ज किया गया. इलेक्ट्रिक एसयूवी की कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्था के प्रभाव को हटाने पर यह मार्जिन 9.1% रहा.

कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ऑटो एवं फार्म सेक्टर के सीईओ राजेश जेजुरिकर ने कहा कि एसयूवी की मजबूत मांग से ऑटो कारोबार को फायदा मिला है. ऑटो कारोबार का कंसॉलिडेटेड पीबीआईटी मार्जिन पिछली तिमाही के मुकाबले 1.1 प्रतिशत अंक बढ़कर 8.8% हो गया.

ट्रैक्टर कारोबार पर दबाव, बिक्री 6% घटी

ऑटो कारोबार की मजबूत ग्रोथ के उलट कृषि उपकरण कारोबार का प्रदर्शन कमजोर रहा. दूसरी तिमाही में महिंद्रा ने 1,16,027 ट्रैक्टर बेचे, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 1,22,936 यूनिट था. इस तरह ट्रैक्टर बिक्री में सालाना आधार पर 6% की गिरावट आई.

कृषि उपकरण कारोबार का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू भी 6% घटकर 9,572 करोड़ रुपये रह गया. वहीं, इस सेगमेंट का नेट प्रॉफिट 9% गिरकर 1,053 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, घरेलू ट्रैक्टर बाजार में कंपनी ने 41.5% हिस्सेदारी के साथ अपनी नंबर एक स्थिति बरकरार रखी.

इस कारोबार का स्टैंडअलोन पीबीआईटी 1,441 करोड़ रुपये रहा. वहीं, पीबीआईटी मार्जिन पिछले साल के मुकाबले 3 प्रतिशत अंक घटकर 16.8% रह गया.

कंपनी के मुताबिक, त्योहारों के समय में बदलाव से ट्रैक्टरों की मांग प्रभावित हुई. इसके अलावा कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी मुनाफे पर दबाव डाला. हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले कृषि उपकरण कारोबार के कंसॉलिडेटेड पीबीआईटी मार्जिन में 0.2 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ.

महिंद्रा फाइनेंस और टेक महिंद्रा का प्रदर्शन भी सुधरा

समूह के सर्विसेज कारोबार का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दूसरी तिमाही में 18% बढ़कर 1,147 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, रेवेन्यू भी 18% बढ़कर 11,821 करोड़ रुपये रहा.

महिंद्रा फाइनेंस के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 15% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. कंपनी का ग्रॉस स्टेज-3 एसेट अनुपात 3.42% रहा. वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा के हिस्से में आने वाला महिंद्रा फाइनेंस का मुनाफा 61% बढ़ा.

टेक महिंद्रा के प्रदर्शन में भी सुधार हुआ. महिंद्रा एंड महिंद्रा के हिस्से में आने वाला टेक महिंद्रा का मुनाफा 33% बढ़ा. कंपनी का एबिट मार्जिन पिछले साल के मुकाबले 2.6 प्रतिशत अंक बढ़कर 14.8% हो गया.

महिंद्रा लाइफस्पेसेज की प्री-सेल्स 41% बढ़ी

समूह की रियल एस्टेट कंपनी महिंद्रा लाइफस्पेसेज की रेजिडेंशियल प्री-सेल्स दूसरी तिमाही में 41% बढ़कर 1,100 करोड़ रुपये पहुंच गई. कंपनी ने इस दौरान 1,500 करोड़ रुपये की ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू वाले नए प्रोजेक्ट भी जोड़े.

महिंद्रा हॉलिडेज का ऑक्यूपेंसी रेट बढ़कर 76% हो गया, जो पिछले साल के मुकाबले 2.2 प्रतिशत अंक अधिक है. कंपनी के पास कुल 5,762 कमरों की क्षमता रही.

वहीं, महिंद्रा लॉजिस्टिक्स का रेवेन्यू 24% बढ़कर 2,095 करोड़ रुपये पहुंच गया. महिंद्रा एंड महिंद्रा के हिस्से में आने वाले मुनाफे के आधार पर कंपनी घाटे से निकलकर मुनाफे में आ गई. समूह के उभरते कारोबारों, जिन्हें कंपनी 'ग्रोथ जेम्स' कहती है, का कुल मुनाफा तीन गुना हो गया.

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

महिंद्रा एंड महिंद्रा के ग्रुप सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर अनीश शाह ने कहा कि दूसरी तिमाही में कंसॉलिडेटेड मुनाफे में 25% की बढ़ोतरी समूह के विभिन्न कारोबारों की मजबूती को दिखाती है. ग्राहकों की मजबूत मांग से ऑटो कारोबार में अच्छी ग्रोथ दर्ज की गई, जबकि त्योहारों के समय में बदलाव के कारण कृषि उपकरण कारोबार में गिरावट आई.

उन्होंने कहा कि महिंद्रा फाइनेंस ने अपनी ग्रोथ बरकरार रखी है और टेक महिंद्रा के प्रदर्शन में भी सुधार हुआ है. आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद कंपनी का ध्यान मुनाफे के साथ कारोबार बढ़ाने पर है.

समूह के मुख्य वित्त अधिकारी अमरज्योति बरुआ ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया है. मजबूत बैलेंस शीट और नकदी की उपलब्धता से समूह को भविष्य में नए कारोबारों में निवेश करने में मदद मिलेगी.

 


टेलीकॉम कंपनियों पर TRAI की सख्ती, इंटरकनेक्शन में देरी पर लगेगा 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना

टेलीकॉम रेगुलेटर ने इंटरकनेक्शन नियमों में संशोधन करते हुए जुर्माने का नया ढांचा पेश किया है. रिपोर्टिंग में देरी पर 25 लाख रुपये और इंटरकनेक्शन से जुड़े उल्लंघनों पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी और नियमों के उल्लंघन पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी की है. अब इंटरकनेक्शन की सुविधा देने में देरी करने, अनुरोध ठुकराने या इंटरकनेक्शन समझौता नहीं करने पर टेलीकॉम ऑपरेटरों को प्रति लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र में 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है. नियामक ने रिपोर्टिंग संबंधी नियमों के उल्लंघन पर भी रोजाना के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान किया है.

ट्राई ने टेलीकम्युनिकेशन इंटरकनेक्शन रेगुलेशंस में तीसरे संशोधन के तहत ये बदलाव किए हैं. इनका उद्देश्य अलग-अलग टेलीकॉम नेटवर्क के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना और नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों की जवाबदेही तय करना है. संशोधित प्रावधान 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे.

15 दिन बाद बढ़ जाएगा रोजाना जुर्माना

नए नियमों के तहत रिपोर्टिंग से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन करने पर पहले 15 दिनों तक रोजाना 50,000 रुपये का वित्तीय जुर्माना लगेगा. यदि देरी 15 दिनों से अधिक जारी रहती है, तो जुर्माने की राशि बढ़कर प्रतिदिन 1 लाख रुपये हो जाएगी. हालांकि, प्रत्येक उल्लंघन के लिए कुल जुर्माने की अधिकतम सीमा प्रति सेवा क्षेत्र 25 लाख रुपये तय की गई है.

ट्राई के मुताबिक, पहले एक समान जुर्माने की व्यवस्था होने से कम अवधि की देरी और लंबे समय तक नियमों का पालन नहीं करने के बीच अंतर स्पष्ट नहीं हो पाता था. इसलिए अब उल्लंघन की अवधि के आधार पर जुर्माने की अलग-अलग दरें तय की गई हैं. इसका उद्देश्य कंपनियों को जल्द से जल्द सुधारात्मक कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करना है.

इंटरकनेक्शन में देरी पर 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना

इंटरकनेक्शन उपलब्ध कराने में देरी, अनुरोध स्वीकार नहीं करने, इंटरकनेक्शन समझौता नहीं करने या इंटरकनेक्शन प्वाइंट को बंद करने अथवा उसे सरेंडर करने जैसे मामलों में कंपनियों पर ज्यादा जुर्माना लगेगा.

ऐसे उल्लंघनों के लिए पहले 15 दिनों तक रोजाना 1 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा. यदि उल्लंघन 15 दिनों से अधिक जारी रहता है, तो यह राशि बढ़कर प्रतिदिन 2 लाख रुपये हो जाएगी. प्रत्येक मामले में जुर्माने की अधिकतम सीमा प्रति लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र 1 करोड़ रुपये होगी.

नियामक की ओर से निर्धारित वित्तीय जुर्माने का भुगतान 21 दिनों के भीतर या प्राधिकरण की ओर से तय समयसीमा में करना होगा.

तीन साल में IP आधारित इंटरकनेक्शन व्यवस्था अपनानी होगी

ट्राई ने इंटरकनेक्शन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) आधारित सिस्टम अपनाना भी अनिवार्य किया है. नए इंटरकनेक्शन समझौते अब IP आधारित सिस्टम के जरिए ही किए जाएंगे.

वहीं, टेलीकॉम कंपनियों को अपने मौजूदा इंटरकनेक्शन सिस्टम को जनवरी 2027 से तीन साल के भीतर IP आधारित व्यवस्था में बदलना होगा. इस बदलाव का उद्देश्य नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना, कॉल की गुणवत्ता सुधारना और कॉल ड्रॉप की समस्या कम करना है.

इसके अलावा, ट्राई ने इंटरकनेक्शन व्यवस्था को मौजूदा लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (LDCA) और शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (SDCA) के ढांचे से धीरे-धीरे लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (LSA) स्तर पर स्थानांतरित करने का भी प्रावधान किया है.

बैंक गारंटी के मौजूदा नियम बरकरार

ट्राई ने इंटरकनेक्शन समझौते के लिए बैंक गारंटी से जुड़े मौजूदा प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया है. इसके तहत कोई टेलीकॉम सेवा प्रदाता इंटरकनेक्शन समझौते की मांग करता है, तो दूसरा सेवा प्रदाता शुरुआती इंटरकनेक्शन स्थापित होने के बाद छह महीने की अवधि को कवर करने वाली बैंक गारंटी मांग सकता है.

यह शर्त तभी लागू होगी, जब दूसरा सेवा प्रदाता बैंक गारंटी की मांग करेगा. इसकी राशि भी उसी के आधार पर तय की जाएगी. ट्राई के इन संशोधनों से टेलीकॉम कंपनियों के बीच इंटरकनेक्शन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के साथ नेटवर्क की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है.

 


LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया की ऑटो सेक्टर में एंट्री, आंध्र प्रदेश में बनाएगी ADAS और इंफोटेनमेंट सिस्टम

कंपनी श्री सिटी स्थित अपनी आगामी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में इन-व्हीकल इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमोटिव डिस्प्ले, टेलीमैटिक्स और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) का निर्माण करेगी. विस्तार योजना के लिए शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
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Thursday, 05 November, 2026
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एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (LG Electronics India) अब ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी सेक्टर में कदम रखने की तैयारी कर रही है. कंपनी आंध्र प्रदेश के श्री सिटी (Sri City) में अपनी आगामी तीसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में वाहनों से जुड़े कई तकनीकी उपकरणों का निर्माण करेगी. इसके साथ ही कंपनी का कारोबार होम अप्लायंसेज और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से आगे बढ़कर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी विस्तार करेगा.

कंपनी के बोर्ड ने 5 नवंबर को इस नए कारोबार में प्रवेश के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. नियामकीय फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी इन-व्हीकल इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमोटिव डिस्प्ले, टेलीमैटिक्स, व्हीकल कंप्यूटिंग सॉल्यूशंस, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में काम करेगी.

शेयरधारकों की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी योजना

इस नए कारोबार के लिए कंपनी ने अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MOA) में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत कंपनी को ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति मिलेगी. इस संशोधन के लिए पोस्टल बैलेट के जरिए शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी.

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के मुताबिक, इस कारोबार में निवेश चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. निवेश की राशि कारोबार के विस्तार, टेक्नोलॉजी, उपकरणों की जरूरत और बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर तय होगी. हालांकि, कंपनी ने फिलहाल इस योजना के लिए कुल निवेश का खुलासा नहीं किया है.

ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी सेक्टर में कंपनी की एंट्री ऐसे समय में हो रही है, जब वाहनों में कनेक्टेड टेक्नोलॉजी, डिजिटल डिस्प्ले और एडवांस्ड सेफ्टी सिस्टम की मांग बढ़ रही है. इस विस्तार से कंपनी को वाहन निर्माण से जुड़े तकनीकी उपकरणों और कनेक्टेड मोबिलिटी के बढ़ते बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा.

दूसरी तिमाही में मुनाफा 25.7 फीसदी बढ़ा

इस बीच, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 25.7 फीसदी बढ़कर 489 करोड़ रुपये हो गया. इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी 19.5 फीसदी बढ़कर 7,380 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

कंपनी का ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले का मुनाफा (EBITDA) 28 फीसदी बढ़कर 701 करोड़ रुपये रहा. वहीं, EBITDA मार्जिन पिछले साल की समान तिमाही के 8.9 फीसदी से बढ़कर 9.5 फीसदी हो गया.

होम अप्लायंसेज कारोबार की रेवेन्यू ग्रोथ 20.9 फीसदी

कंपनी के बड़े कारोबार होम अप्लायंसेज एंड एयर सॉल्यूशन सेगमेंट का रेवेन्यू 20.9 फीसदी बढ़कर 4,772 करोड़ रुपये रहा. वहीं, होम एंटरटेनमेंट सेगमेंट का रेवेन्यू 17.2 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2,608 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनी ने मिड-टीन्स में रेवेन्यू ग्रोथ और शुरुआती डबल-डिजिट EBITDA मार्जिन का अपना अनुमान बरकरार रखा है.

कंपनी ने यह भी बताया कि श्री सिटी स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में कंप्रेसर का उत्पादन वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है. यह यूनिट भारत में कंपनी की व्यापक विनिर्माण विस्तार योजना का हिस्सा है.

 


14,500 करोड़ रुपये की योजना को कैबिनेट की मंजूरी, 92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित होगी

सरकार के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना, बिजली ग्रिड की स्थिरता मजबूत करना और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे भरोसेमंद एवं किफायती बिजली उपलब्ध कराना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
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Thursday, 05 November, 2026
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केंद्र सरकार ने देश में बड़े स्तर पर ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Energy Storage Systems) विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता योजना को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 4 नवंबर को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding - VGF) योजना को स्वीकृति दी गई. इसके तहत देशभर में 92 गीगावॉट घंटे (GWh) की नई ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी. इस योजना की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक होगी.

सरकार के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना, बिजली ग्रिड की स्थिरता मजबूत करना और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे भरोसेमंद एवं किफायती बिजली उपलब्ध कराना है. इससे देश में ऊर्जा भंडारण से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिलेगी.

97,600 करोड़ रुपये का होगा कुल निवेश

इस योजना के तहत कुल 97,600 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं विकसित की जाएंगी. इसमें 60 GWh क्षमता की हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (PSP), 30 GWh क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और उभरती हुई वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों के जरिए 2 GWh क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है.

सरकार की ओर से दी जाने वाली 14,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से इन परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता बेहतर होगी और इनके निर्माण एवं संचालन को गति मिलेगी.

2031-32 तक 411 GWh क्षमता का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031-32 तक देश में 411 GWh की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करना है. इस योजना के तहत तैयार होने वाली 92 GWh की नई क्षमता देश में मौजूदा ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता की तुलना में लगभग 170 फीसदी अतिरिक्त होगी. इससे भविष्य में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने में मदद मिलेगी.

बैटरी निर्माण में घरेलू कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा

योजना का एक अहम उद्देश्य ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करना और आयात पर निर्भरता कम करना है. इसके लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं में कम से कम 40 फीसदी घरेलू सामग्री का इस्तेमाल अनिवार्य होगा. इस प्रावधान से देश में बैटरी और उससे जुड़े उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. साथ ही भारतीय कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर और रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

ऊर्जा भंडारण से चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति संभव

जैक्सन ग्रीन (Jakson Green) के मैनेजिंग डायरेक्टर कन्नन कृष्णन ने कहा कि 92 GWh की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता के लिए 14,500 करोड़ रुपये की VGF योजना को मंजूरी भारत की ऊर्जा यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है. भारत अब नवीकरणीय ऊर्जा से आगे बढ़कर भरोसेमंद ऊर्जा व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. ऊर्जा भंडारण से सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों से मिलने वाली बिजली को चौबीसों घंटे उपलब्ध कराना संभव होगा.

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण और ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था मिलकर स्वच्छ बिजली के पारेषण और उसकी उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करेंगे. वहीं, बैटरी परियोजनाओं में 40 फीसदी घरेलू सामग्री की अनिवार्यता और महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से घरेलू विनिर्माण मजबूत होगा तथा आयात पर निर्भरता घटेगी. इससे देश की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी.

 

विदेशी आयात पर निर्भरता होगी कम 

सोलरयान (Solaryaan) के फाउंडर, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज पटेल ने कहा, केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 92 GWh की ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) को मंजूरी मिलना, भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में एक मील का पत्थर है. इस योजना के तहत 30 GWh के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को मिलने वाला समर्थन और इन परियोजनाओं में न्यूनतम 40% स्वदेशी सामग्री की अनिवार्यता, सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'पीएलआई' जैसी सफल नीतियों का ही अगला मजबूत विस्तार है. यह फैसला भारतीय निर्माताओं को अपना उत्पादन बढ़ाने, स्थानीय सप्लाई चेन को सशक्त करने और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने का एक स्पष्ट और बड़ा अवसर देता है."

भविष्य में जैसे-जैसे ये परियोजनाएं धरातल पर उतरेंगी, प्रतिस्पर्धी टैरिफ और बेहतर प्रदर्शन से बैटरी स्टोरेज तकनीक में पूरे देश और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा. बैटरी सिस्टम, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंटेलिजेंट एनर्जी मैनेजमेंट के क्षेत्र में भारत जो स्वदेशी क्षमताएं विकसित करेगा, उसका सीधा लाभ हमारे वाणिज्यिक और औद्योगिक (C&I) क्षेत्रों को भी मिलेगाय वर्ष 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और 2070 तक 'नेट-जीरो' के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में यह कदम निर्णायक साबित होगा. 

प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए होगा परियोजनाओं का आवंटन

ऊर्जा भंडारण क्षमता का आवंटन टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा. बैटरी ऊर्जा भंडारण और हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां वित्तीय सहायता पाने की पात्र होंगी. वहीं, वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर आधारित परियोजनाओं को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियां लागू कर सकेंगी.

सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण सुविधाएं विकसित होने से सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से बनने वाली बिजली का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा. इससे बिजली आपूर्ति में स्थिरता आएगी और मांग के अनुसार बिजली उपलब्ध कराने के लिए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. यह पहल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाएगी.


आज बाजार में आएगी तेजी की सुनामी? गिफ्ट निफ्टी 1.4% चढ़ा, कच्चे तेल में 10% की गिरावट

बुधवार को सेंसेक्स 383.55 अंक चढ़कर 77,301.40 पर और निफ्टी 149.75 अंक बढ़कर 23,960.60 पर बंद हुआ था. बाजार में यह लगातार पांचवें सत्र की तेजी थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी के साथ कारोबार शुरू होने के संकेत हैं. गिफ्ट निफ्टी करीब 340 अंक यानी 1.4 फीसदी उछलकर 24,300 के पार पहुंच गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट, अमेरिकी बाजारों में तेजी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से घरेलू बाजार को मजबूती मिल सकती है. बुधवार को सेंसेक्स 383.55 अंक चढ़कर 77,301.40 पर और निफ्टी 149.75 अंक बढ़कर 23,960.60 पर बंद हुआ था. बाजार में यह लगातार पांचवें सत्र की तेजी थी.

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 93 डॉलर प्रति बैरल पर फिसल गया है. अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद वैश्विक बाजारों में निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है. वहीं, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 7,284 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की.

निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम

तकनीकी संकेतों के मुताबिक, निफ्टी में तेजी का रुझान बना हुआ है. इंडेक्स लगातार पांच सत्रों से बुलिश कैंडल बना रहा है और हायर हाई व हायर लो दर्ज कर रहा है. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी 24,000 के ऊपर टिकता है तो यह 24,400 और फिर 24,700 के स्तर तक पहुंच सकता है. निफ्टी का 200-दिन का सिंपल मूविंग एवरेज करीब 24,003 है. अगर इंडेक्स 24,000 से 24,150 के ऊपर बना रहता है तो तेजी जारी रह सकती है. वहीं, इस स्तर से नीचे फिसलने पर शुरुआती बढ़त कमजोर पड़ सकती है.

अमेरिकी बाजारों में तेजी, एशिया में मिला-जुला रुख

बुधवार को अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी रही. डाउ जोंस 3 फीसदी, एसएंडपी 500 में 1.58 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 0.91 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. हालांकि, गुरुवार सुबह एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार रहा. जापान का निक्केई करीब 1 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3 फीसदी से ज्यादा नीचे कारोबार कर रहा था.

FIIs ने खरीदे 7,284 करोड़ रुपये के शेयर

विदेशी निवेशकों की वापसी भी घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है. बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 7,284 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीदारी से भी बाजार को समर्थन मिल सकता है. हालांकि, कारोबारी सत्र के दौरान यह देखना अहम होगा कि बाजार शुरुआती तेजी को बरकरार रख पाता है या नहीं. अगर प्रमुख इंडेक्स ऊपरी स्तरों पर टिके रहते हैं, तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है.

इन शेयरों पर रहेगी नजर

बीएसई, नायका, अरबिंदो फार्मा, अपोलो हॉस्पिटल्स, लेंसकार्ट, डाबर इंडिया और अपोलो टायर्स के शेयर चर्चा में रहेंगे. सितंबर तिमाही में बीएसई का नेट प्रॉफिट 44.9 फीसदी बढ़कर 809.1 करोड़ रुपये, नायका का 206.8 फीसदी बढ़कर 101.2 करोड़ रुपये और अरबिंदो फार्मा का 32.7 फीसदी बढ़कर 1,126.1 करोड़ रुपये रहा. अपोलो हॉस्पिटल्स का मुनाफा 33.5 फीसदी और लेंसकार्ट का 122.1 फीसदी बढ़ा. डाबर और अपोलो टायर्स ने भी मुनाफे में बढ़त दर्ज की.

शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, प्रीमियर एनर्जीज, एक्साइड इंडस्ट्रीज, एनएचपीसी, हुडको, फिजिक्सवाला, टोरेंट पावर और निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस के शेयरों पर भी नजर रहेगी. पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन, जेके लक्ष्मी सीमेंट और एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर के कमजोर नतीजे भी निवेशकों के रडार पर रहेंगे.

अडानी पावर ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के साथ 1,234 मेगावाट बिजली आपूर्ति के लिए 25 साल का समझौता किया है. एचडीएफसी बैंक को कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम के तहत जमा स्वीकार करने की मंजूरी मिली है. स्विगी ने इंस्टामार्ट के 25 केंद्रों पर बैटरी स्वैपिंग स्टेशन शुरू किए हैं. क्यूपिड, केएसएच इंटरनेशनल, इंडियन होटल्स, पेट्रोनेट एलएनजी, एक्सिस बैंक और मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज भी कारोबारी घोषणाओं के कारण चर्चा में रहेंगे.

अजमेरा रियल्टी में निवेशक मुकुल अग्रवाल ने अपनी पूरी 1.93 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है. वहीं, गणेश कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में पीजीआईएम इंडिया फंड ने अतिरिक्त 0.6 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है.

आज इन कंपनियों के आएंगे नतीजे

ओएनजीसी, भारती एयरटेल, टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया, एलआईसी, भारत फोर्ज, फोर्टिस हेल्थकेयर, ग्लेनमार्क फार्मा, एम्फैसिस और संवर्धन मदरसन समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेंगी. निवेशकों की नजर इनके मुनाफे, रेवेन्यू और मार्जिन पर रहेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


मोबावेन्यू के रेवेन्यू में 48.6% की बढ़ोतरी, पहली छमाही में मुनाफा 72.2% उछला

एडटेक कंपनी मोबावेन्यू ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (H1 FY27) के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 November, 2026
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Wednesday, 04 November, 2026
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एडटेक कंपनी मोबावेन्यू (Mobavenue) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है. इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 48.6 फीसदी बढ़कर 149.6 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, कंपनी के शुद्ध मुनाफे (PAT) में 72.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) बढ़कर करीब 22.9 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह इससे कम था. इस दौरान कंपनी का EBITDA भी 59.6 फीसदी बढ़कर करीब 31.6 करोड़ रुपये हो गया.

कंपनी ने वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में भी मजबूत प्रदर्शन किया. इस दौरान उसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 41 फीसदी बढ़ा. वहीं, EBITDA में करीब 47 फीसदी और PAT में लगभग 55 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. तिमाही के दौरान कंपनी का EBITDA मार्जिन 20 फीसदी से ऊपर बना रहा.

कंपनी के आउटकम-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल में भी सुधार देखने को मिला. इसके तहत प्रति आउटकम रेवेन्यू में सालाना आधार पर करीब 10.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. यह कंपनी के विज्ञापन और कंज्यूमर ग्रोथ सॉल्यूशंस से मिलने वाली वैल्यू में वृद्धि को दर्शाता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बढ़ा योगदान

मोबावेन्यू के कारोबार की वृद्धि में अंतरराष्ट्रीय बाजारों की अहम भूमिका रही. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी के कुल रेवेन्यू में विदेशी बाजारों की हिस्सेदारी 22.3 फीसदी रही. वहीं, दूसरी तिमाही में यह बढ़कर 23.8 फीसदी हो गई, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 12.3 फीसदी थी.

फिलहाल कंपनी 13 देशों में अपने ग्राहकों को सेवाएं दे रही है. दक्षिण-पूर्व एशिया में सिंगापुर को कंपनी ने अपना प्रमुख केंद्र बनाया है. इसके अलावा, अमेरिका समेत उभरते और विकसित बाजारों में अपनी टीम का विस्तार किया जा रहा है.

कंपनी भारत में अपने टेक्नोलॉजी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को भी मजबूत कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार को बेहतर तकनीकी सहयोग मिल सके.

AI आधारित विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर फोकस

आने वाले समय में मोबावेन्यू का लक्ष्य खुद को वैश्विक स्तर पर AI आधारित विज्ञापन और कंज्यूमर ग्रोथ प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना है. इसके लिए कंपनी प्रति आउटकम रेवेन्यू बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने और मुनाफे के साथ कारोबार की वृद्धि बनाए रखने पर ध्यान दे रही है.

कंपनी का आउटकम-बेस्ड विज्ञापन मॉडल डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री में बदलते रुझानों को भी दर्शाता है. अब विज्ञापनदाता अपने मीडिया निवेश के बदले केवल पहुंच और व्यूज के बजाय मापने योग्य कारोबारी नतीजों को अधिक महत्व दे रहे हैं.

मोबावेन्यू ने कहा है कि वह कारोबार के विस्तार के साथ अनुशासित क्रियान्वयन और शेयरधारकों, ग्राहकों तथा भागीदारों के लिए लंबी अवधि में वैल्यू तैयार करने पर अपना ध्यान बनाए रखेगी.


सोने पर अभी और बढ़ेगी मंदी की मार, 11% तक गिर सकते हैं दाम: रिपोर्ट

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक आ सकता है.

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Published - Wednesday, 04 November, 2026
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Wednesday, 04 November, 2026
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सोने की कीमतों में तेजी के बाद अब गिरावट का दौर जारी है. साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड तेजी के साथ 5,500 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार करने वाला सोना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया है. इस साल अब तक सोने की कीमतों में 8 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है. बाजार में लगातार हो रही मुनाफावसूली के बीच अब ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने सोने की कीमतों में और गिरावट का अनुमान जताया है.

11% तक और सस्ता हो सकता है सोना

नोमुरा ने अपने ताजा रिसर्च नोट में अनुमान लगाया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक आ सकती है. फिलहाल सोना करीब 3,947 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है. इस लिहाज से मौजूदा स्तर से कीमतों में करीब 11 फीसदी की और गिरावट की संभावना है.

भारतीय बाजार के लिहाज से देखें तो फिलहाल 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.39 लाख रुपये है. अगर नोमुरा का अनुमान सही साबित होता है और कीमतों में 11 फीसदी की गिरावट आती है, तो सोना करीब 15,290 रुपये तक सस्ता हो सकता है. ऐसे में 10 ग्राम सोने का भाव घटकर लगभग 1.23 लाख रुपये के स्तर पर आ सकता है.

मुनाफावसूली से सोने की कीमतों पर दबाव

सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे लगातार हो रही मुनाफावसूली को एक बड़ी वजह माना जा रहा है. एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी और रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली किए जाने से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. भारी बिकवाली के चलते सोना अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है.

उनका कहना है कि सोने की कीमतों में टिकाऊ रिकवरी के लिए बाजार में नई खरीदारी जरूरी है. इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संकेतों का अनुकूल होना भी अहम रहेगा.

अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर

आने वाले दिनों में सोने की दिशा तय करने में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की अहम भूमिका हो सकती है. जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, बाजार की नजर अमेरिका के चुनाव, बेरोजगारी के आंकड़ों और नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर रहेगी. इन आंकड़ों से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं.

तकनीकी नजरिए से देखें तो भारतीय बाजार में 1,42,000 रुपये का स्तर सोने के लिए अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है. उनके मुताबिक, जब तक सोना इस स्तर के ऊपर टिककर कारोबार नहीं करता, तब तक निकट अवधि में मजबूत तेजी की संभावना सीमित रह सकती है.

अमेरिका और ईरान पर भी रहेगी नजर

कोटक महिंद्रा एएमसी के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति का सोने की कीमतों को लेकर कहा, पिछले एक सप्ताह के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में डॉलर के लिहाज से करीब 3 फीसदी की गिरावट आई है. इस दौरान सोना लगभग एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया. अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर की कमजोरी से सोने की कीमतों को समर्थन मिलना चाहिए, लेकिन फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की आशंका ने कीमतों पर दबाव बना रखा है. वहीं, ईरान में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहे हैं. इससे कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और महंगाई बढ़ने की चिंताएं भी गहरा रही हैं.

भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई से जुड़े जोखिमों के बावजूद सोने की कीमतों को समर्थन नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि बाजार का पूरा ध्यान फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आगे की रणनीति पर है. हालांकि, कीमतों में आई हालिया गिरावट से सोने में लंबी अवधि के निवेश का आधार नहीं बदलता है. खासकर इसलिए क्योंकि ऊंची ब्याज दरों को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है.

निकट अवधि में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है और इनमें उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है. ऐसे में निवेशकों को मौजूदा स्तरों पर एकमुश्त पूरी रकम निवेश करने से बचना चाहिए. इसके बजाय कीमतों में गिरावट आने पर चरणबद्ध तरीके से निवेश करने पर विचार करना चाहिए. अनिश्चितता से बचाव और निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिहाज से सोना लंबी अवधि के पोर्टफोलियो का हिस्सा बना रह सकता है.


चार दिन की तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली के संकेत, गिफ्ट निफ्टी टूटा; आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62 फीसदी उछलकर 76,917.85 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 370.05 अंक यानी 1.58 फीसदी की बढ़त के साथ 23,810.85 पर पहुंच गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 November, 2026
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Wednesday, 04 November, 2026
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भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार, 4 नवंबर का कारोबारी सत्र अहम रहने वाला है. मंगलवार को जोरदार तेजी के साथ बंद हुए बाजार में आज मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है. कारोबार शुरू होने से पहले गिफ्ट निफ्टी करीब 60-70 अंक टूटकर 23,700 के आसपास पहुंच गया था. इससे घरेलू बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं.

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गई है. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक मानी जा रही है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और रुपये की मजबूती से भी बाजार को समर्थन मिल सकता है.

सेंसेक्स 1,225 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,800 के पार

मंगलवार को शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही. बीएसई सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62 फीसदी उछलकर 76,917.85 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 370.05 अंक यानी 1.58 फीसदी की बढ़त के साथ 23,810.85 पर पहुंच गया.

मिडकैप इंडेक्स में 0.8 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.3 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. सेक्टोरल इंडेक्स में एफएमसीजी 2.5 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा. रियल्टी, प्राइवेट बैंक और ऑटो शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर, पीएसयू बैंक और एनर्जी इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बुधवार को सितंबर तिमाही के नतीजों और कारोबारी घोषणाओं के चलते एमसीएक्स, ल्यूपिन, लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी, बाटा इंडिया और मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर के शेयर फोकस में रहेंगे. एमसीएक्स का मुनाफा 130.2 फीसदी बढ़कर 454.6 करोड़ रुपये रहा, जबकि ल्यूपिन के मुनाफे में 22.2 फीसदी की गिरावट आई. लॉयड्स मेटल्स का मुनाफा 88 फीसदी और मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर का 42.7 फीसदी बढ़ा. इसके अलावा जेएनके इंडिया को 300-600 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है, जबकि हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को 198.3 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, हिंदुस्तान जिंक और पतंजलि फूड्स की कॉरपोरेट घोषणाओं पर भी निवेशकों की नजर रहेगी. बल्क डील के चलते एसएफसी एनवायरनमेंटल टेक्नोलॉजीज, वुमनकार्ट और वर्धमान पॉलीटेक्स के शेयरों में हलचल रह सकती है.

आज इन कंपनियों के आएंगे तिमाही नतीजे

बुधवार को अपोलो हॉस्पिटल्स, लेंसकार्ट, नायका, फिजिक्सवाला, अपोलो टायर्स, अरबिंदो फार्मा, बायोकॉन, डाबर इंडिया, कमिंस इंडिया, टोरेंट पावर और जायडस लाइफसाइंसेज समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. निवेशकों की नजर इन कंपनियों के मुनाफे, रेवेन्यू और भविष्य के कारोबारी अनुमानों पर रहेगी.

इन कंपनियों के शेयरों की होगी लिस्टिंग

आज एमके सन्स फाइन ज्वेल्स के शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे. इसके अलावा एसएमई प्लेटफॉर्म पर कार्वर रोबोवेल्ड और अजवा प्रोजेक्ट्स के शेयरों की भी लिस्टिंग होगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


भारत में कारोबार बढ़ाने की तैयारी में डुमारे, EV और AI टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस

डुमारे ग्रुप भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने के साथ इंजन की दक्षता बढ़ाने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंट्रोल सिस्टम और क्लीन मोबिलिटी सॉल्यूशंस पर काम कर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
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ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग क्षेत्र की कंपनी डुमारे इंडिया (Dumarey India) ने भारत में अपने नए कारोबार की शुरुआत की है. कंपनी इस नई सुविधा के जरिए भारत के ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग इकोसिस्टम में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के साथ सस्टेनेबल मोबिलिटी के क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहती है. कंपनी का लक्ष्य पारंपरिक इंजन के साथ इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड, हाइड्रोजन और इथेनॉल आधारित तकनीकों में भी अपनी क्षमताएं बढ़ाना है. बिजनेस वर्ल्ड से बातचीत में डुमारे इंडिया के प्रमुख अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि कंपनी ऑटोमोबाइल के अलावा डेटा सेंटर, निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी तकनीकी समाधान विकसित कर रही है.

ऑटोमोबाइल से डेटा सेंटर तक कारोबार का विस्तार

बिजनेस वर्ल्ड से बातचीत में डुमारे इंडिया के प्रमुख अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि कंपनी का काम केवल पारंपरिक इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) तक सीमित नहीं है. डुमारे इंडिया ट्रैक्टर, ऑफ-हाईवे वाहन और निर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के लिए भी तकनीक और सेवाएं उपलब्ध कराती है.

उन्होंने कहा कि कंपनी बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और हाइब्रिड वाहनों के लिए भी काम कर रही है. इसके अलावा हाइड्रोजन, फ्लेक्स फ्यूल, इथेनॉल, लिथियम और यूरो-7 से जुड़े एप्लिकेशन पर भी काम किया जा रहा है. कंपनी के ग्राहकों में दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियों से लेकर भारी वाणिज्यिक वाहन और निर्माण उपकरण बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं.

अग्रवाल के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर के लिए ऊर्जा समाधान विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं. कंपनी बड़े इंजनों पर काम कर रही है, जिनका इस्तेमाल पहले जहाजों में किया जाता था. अब इन्हें डेटा सेंटर के लिए सीएनजी आधारित ऊर्जा स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने के लिहाज से तैयार किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि कंपनी ऐसे काइनेटिक सिस्टम भी विकसित कर रही है, जो बिजली की मांग में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को संभाल सकें. इसके साथ ही पूरी कम्बशन प्रणाली को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है, ताकि इंजन की दक्षता 50 फीसदी तक पहुंचाई जा सके.

1 लीटर इंजन से 400 हॉर्सपावर तक की ताकत

कंपनी की भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए प्रतिनिधियों ने बताया कि डुमारे का प्रमुख लक्ष्य इंजन की दक्षता के मामले में अपनी तकनीकी क्षमता को बेहतर बनाना है. इसके लिए प्री-चैंबर कम्बशन (Pre-chamber Combustion) तकनीक पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

कंपनी के मुताबिक, उसके ज्यादातर इंजन टर्बोचार्ज्ड होंगे. कुछ इंजन एक लीटर क्षमता में 400 हॉर्सपावर तक की ताकत देने में सक्षम हैं. कंपनी पहले एक सिलेंडर के आधार पर तकनीक विकसित करती है और फिर उसी तकनीक को बड़े इंजनों में इस्तेमाल करती है.

इस तकनीक को औद्योगिक क्षेत्र में 60 लीटर क्षमता वाले V20 इंजन तक और दूसरी ओर 1.6 लीटर क्षमता वाले V6 इंजन तक इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी का मानना है कि कम्बशन तकनीक में सुधार से अलग-अलग श्रेणियों के इंजनों की दक्षता बढ़ाई जा सकती है.

इंजन मैनेजमेंट और डायग्नोस्टिक्स में AI का इस्तेमाल

डुमारे भविष्य में अपने कंट्रोल सिस्टम और सॉफ्टवेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रही है. कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि आधुनिक इंजन और वाहन लगातार अधिक जटिल होते जा रहे हैं. ऐसे में इंजन की स्थिति, उसकी उम्र, संभावित खराबियों और प्रदर्शन का अनुमान लगाने के लिए उन्नत एल्गोरिदम की जरूरत है.

कंपनी ने इसके लिए एक अलग बिजनेस यूनिट बनाई है, जो पूरी तरह AI पर केंद्रित है. यह यूनिट कंट्रोलर, डायग्नोस्टिक्स, इंजन मैनेजमेंट, कम्बशन और आफ्टर-ट्रीटमेंट जैसे क्षेत्रों में काम करेगी.

इसके अलावा कंपनी अपने ग्राहकों को भी AI आधारित सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है. इन सेवाओं के जरिए ग्राहक वाहनों और इंजनों से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण कर सकेंगे और उनके प्रदर्शन में समय के साथ होने वाले बदलावों का अनुमान लगा सकेंगे.

कंपनी के मुताबिक, इस तकनीक से किसी उत्पाद को बाजार में लाने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही इंजन की पूरी जीवन अवधि के दौरान उसकी कार्यक्षमता और संभावित खराबियों का पहले से अनुमान लगाया जा सकेगा. इसका इस्तेमाल भारी ट्रकों, बसों और यात्री कारों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है.

इलेक्ट्रिक और पारंपरिक इंजन के बीच तकनीक का मिश्रण जरूरी

भारतीय ग्राहकों के लिए संदेश देते हुए कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि किसी वाहन या इंजन की तकनीक का आकलन केवल उसमें इस्तेमाल होने वाले ईंधन के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए. इसके बजाय यह देखना जरूरी है कि एक किलोमीटर की दूरी तय करने में कितनी ऊर्जा खर्च होती है और पूरे जीवनकाल में उसकी वास्तविक लागत कितनी रहती है.

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अलग-अलग तकनीकों का मिश्रण देखने को मिलेगा. इलेक्ट्रिफिकेशन को लेकर मौजूदा धारणाओं का भी अगले 10 वर्षों में दोबारा आकलन करना पड़ सकता है.

कंपनी के प्रतिनिधियों ने तकनीक के पूरे जीवन चक्र (Cradle to Cradle) के आधार पर उसके पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने पर जोर दिया. इसमें किसी तकनीक के निर्माण से लेकर उसके इस्तेमाल, कार्बन उत्सर्जन और अंत में रिसाइक्लिंग तक के सभी पहलुओं को शामिल करना जरूरी है.

उन्होंने बैटरी रिसाइक्लिंग को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. उनके मुताबिक, बाजार में कई तरह की बैटरियां उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें रिसाइकिल करना उतना आसान नहीं है, जितना आमतौर पर माना जाता है. अगर इस चुनौती का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ी मात्रा में बैटरी कचरा लैंडफिल तक पहुंच सकता है.

भारत को बताया अहम ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग बाजार

डुमारे ग्रुप के फाउंडर गुइडो डुमारे ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग बाजारों में से एक है. गुरुग्राम में नए कॉरपोरेट ऑफिस में निवेश कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

उन्होंने कहा कि यूरोप की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को भारत की तकनीकी प्रतिभा और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के साथ जोड़कर कंपनी स्वच्छ, अधिक कुशल और टिकाऊ पावरट्रेन सॉल्यूशंस की दिशा में काम करेगी. उन्होंने कहा कि भारत में नए ऑफिस की शुरुआत स्थानीय जरूरतों के अनुरूप इंजीनियरिंग समाधान उपलब्ध कराने की कंपनी की प्रतिबद्धता का हिस्सा है. घरेलू स्तर पर कुशल कर्मचारियों और मजबूत सप्लायर नेटवर्क के साथ कंपनी अपने ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM) पार्टनर्स की बदलती जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम करेगी.

 

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बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मेटा के फेसबुक-इंस्टाग्राम पर उठे सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के एल्गोरिदम बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करते हैं. याचिकाकर्ता ने बच्चों की मानसिक सेहत, निजता और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत में विशेष सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
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बच्चों की मानसिक सेहत और ऑनलाइन सुरक्षा पर सोशल मीडिया के कथित दुष्प्रभावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मेटा (Meta) के प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. यह याचिका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम और उनके जरिए बच्चों के बीच बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता जताते हुए दायर की गई है.

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अधिवक्ता और लीगल-टेक्नोलॉजी उद्यमी श्रीरूपा चौधरी ने यह जनहित याचिका दायर की है. इसमें आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले एल्गोरिदम आधारित फीचर्स बच्चों को लगातार कंटेंट देखने और लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.

सोशल मीडिया के किन फीचर्स पर उठाए सवाल?

याचिका में इनफिनिट स्क्रॉलिंग, ऑटोप्ले रील्स, पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन और यूजर्स के व्यवहार की प्रोफाइलिंग जैसे फीचर्स पर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन फीचर्स को इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स अधिक से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताएं.

याचिका में कहा गया है कि इसका बच्चों पर गंभीर असर पड़ सकता है. इनमें सोशल मीडिया की लत, चिंता, अवसाद, नींद की कमी, शरीर की छवि को लेकर असंतोष और ऑनलाइन ग्रूमिंग जैसे खतरे शामिल हैं. इसके अलावा बच्चों के चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) के संपर्क में आने की आशंका भी जताई गई है.

भारत में फेसबुक-इंस्टाग्राम के करोड़ों यूजर्स

याचिका में भारत में मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बड़े यूजर बेस का भी उल्लेख किया गया है. DataReportal की रिपोर्ट 'Digital 2026: India' का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत में इंस्टाग्राम के करीब 48.05 करोड़ और फेसबुक के लगभग 40.3 करोड़ यूजर्स हैं.

याचिकाकर्ता के मुताबिक, भारत मेटा का दुनिया में सबसे बड़ा राष्ट्रीय बाजार है. यहां इन दोनों प्लेटफॉर्म के यूजर्स की संख्या अमेरिका के मुकाबले 2 से 2.6 गुना तक है.

याचिका में तर्क दिया गया है कि भारत में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले बच्चों की बड़ी संख्या को देखते हुए देश के लिए अलग और मजबूत चाइल्ड सेफ्टी उपायों की जरूरत है. भारतीय बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा के मामले में पश्चिमी देशों के बच्चों की तुलना में कम संरक्षण नहीं मिलना चाहिए.

बच्चों की सुरक्षा के लिए अलग फंड बनाने की मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नेशनल चाइल्ड ऑनलाइन सेफ्टी एंड वेलफेयर फंड बनाने की मांग की गई है. इसके लिए मेटा से कथित नुकसान के अनुपात में मुआवजा लेने का प्रस्ताव रखा गया है.

इसके अलावा याचिकाकर्ता ने नाबालिग यूजर्स की संख्या और बच्चों की सुरक्षा के लिए मौजूदा व्यवस्थाओं से जुड़ी भारत-विशिष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है. इसमें सुरक्षा के डिफॉल्ट विकल्प मजबूत करने, एल्गोरिदम पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने और बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को रोकने के लिए पर्याप्त सरकारी दिशा-निर्देश बनाने की मांग भी शामिल है.

मेटा से 18 अरब डॉलर के बराबर मुआवजे की मांग

याचिका में मुआवजे की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है. याचिकाकर्ता ने प्रस्तावित फंड में कम से कम उतनी राशि जमा कराने की मांग की है, जितनी मेटा ने अन्य देशों में इसी तरह के मामलों में समझौतों के तहत देने की बात कही है.

इस संबंध में अगस्त 2026 में अमेरिका में कई राज्यों के साथ हुए कम से कम 18 अरब डॉलर के कथित समझौते का हवाला दिया गया है.

याचिकाकर्ता का तर्क है कि भारत में फेसबुक और इंस्टाग्राम का यूजर बेस अमेरिका से काफी बड़ा है. ऐसे में भारतीय बच्चों को हुए कथित नुकसान के लिए मुआवजे की राशि भी यहां के यूजर बेस और भारतीय बाजार से मेटा को होने वाले कारोबारी लाभ के अनुपात में तय होनी चाहिए.

NCPCR से स्वतंत्र जांच की मांग

जनहित याचिका में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की गई है. साथ ही भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बच्चों की मानसिक सेहत पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अलग से शोध कराने का अनुरोध किया गया है.

याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यह मुकदमा जनहित में यानी प्रो बोनो पब्लिको (Pro Bono Publico) के तहत दायर किया गया है. इसमें उनका कोई व्यक्तिगत या व्यावसायिक हित नहीं है.