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'खाते हैं जीरा, पीते हैं इलायची की चाय, तो अब पड़ेगा सोचना क्योंकि...'

सभी प्रमुख मसालों की कीमतों में पिछले एक साल में दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी हो गई है. इसका कारण है मांग का मजबूत रहना और उत्पादन में गिरावट.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्लीः बढ़ती महंगाई से वैसे ही लोगों को राहत नहीं मिल रही है. आम आदमी के लिए महंगाई मुसीबत बनती जा रही है. दाल-सब्जी में मसालों का तड़का लगाना भी महंगा हो गया है, क्योंकि हल्दी को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख मसालों की कीमतों में पिछले एक साल में दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी हो गई है. इसका कारण है मांग का मजबूत रहना और उत्पादन में गिरावट, जिसकी वजह से देश की तमाम प्रमुख मसाले की मंडियों में जीरा, धनिया, काली मिर्च और सूखी लाल मिर्च की कीमतें हद से ज्यादा बढ़ गई हैं. 

इतना हुआ कीमतों में इजाफा

इस दौरान पिछले एक साल में सूखी मिर्च (23.4%), धनिया (18.9%), जीरा (18.3%) और काली मिर्च (14.7) %) की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं. केवल हल्दी की कीमतें 6.7 फीसदी रही हैं जो स्थिर हैं. व्यापारियों का कहना है कि हल्दी की कीमतें इस साल की शुरुआत से स्थिर हैं, लेकिन कम उत्पादन और मजबूत वैश्विक मांग और आपूर्ति की कमी के कारण अन्य सभी मसालों की कीमतों में और बढ़ोतरी की उम्मीद है.

4700 रुपये के पार हुआ जीरा

जीरा की मंडी कीमत वर्तमान में दुनिया में मसाले के सबसे बड़े बाजार उंझा मंडी (गुजरात) में लगभग 4,700 रुपये प्रति 20 किलोग्राम बैग है, जबकि पिछले साल ये कीमत लगभग 2,400-2,600 रुपये प्रति 20 किलोग्राम थी. उंझा कृषि बाजार उपज समिति (एपीएमसी) के उपाध्यक्ष अरविंद पटेल ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि नवंबर तक कीमतों में और उछाल आएगा और यह 5,000 रुपये प्रति 20 किलोग्राम तक पहुंच जाएगा, क्योंकि निर्यात बाजार में गुणवत्ता वाले जीरे की मजबूत मांग है, जबकि घरेलू मांग उत्साहजनक है.

किसानों ने कम की पैदावार

चूंकि जीरे की फसल मौसम और बीमारी के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, इसलिए राजस्थान और गुजरात के प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों के एक वर्ग ने कपास, सरसों, मूंगफली, सोयाबीन और धनिया बीज जैसी अन्य फसलों की ओर रुख किया है, जिससे उत्पादन कम हो गया है.

अचार भी हो गए हैं महंगे

अचार और मसालों के प्रमुख निर्माता, निलोन्स के प्रबंध निदेशक दीपक सांघवी ने कहा कि पिछले साल मसाले की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिसमें पैकेज्ड मसालों की कीमतों में लगभग 14% की वृद्धि हुई है. दिसंबर 2021-सितंबर 2022 के दौरान कच्ची मिर्च की कीमत 120 रुपये से बढ़कर 240 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है, जबकि इसी अवधि में धनिया की कीमत 75-80 रुपये से बढ़कर 120 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है.

इन मसालों की कीमतों में भी हुई बढ़ोतरी

सांघवी के अनुसार, 2022 की शुरुआत से काली इलायची की कीमत 350 रुपये से बढ़कर 650-700 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई. जबकि हरी इलायची की कीमत 400 रुपये से बढ़कर 650-700 रुपये हो गई है. हल्दी के मामले में, मंडी की कीमतें वर्तमान में लगभग 70-75 रुपये प्रति किलोग्राम हैं, जबकि जनवरी में यह लगभग 105-107 रुपये प्रति किलोग्राम थी. कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल देश में मसालों के प्रमुख उत्पादक हैं.

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