Sony Pictures के MD-CEO एनपी सिंह ने दिया इस्तीफा, अब निभाएंगे ये भूमिका

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया टेलीविजन चैनल ऑपरेट करती है. इसके 16 एंटरटेनमेंट चैनल और 10 स्पोर्ट्स चैनल है. इसके साथ ही कंपनी की 167 देशों में रीच है.

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Friday, 24 May, 2024
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सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के MD और CEO एनपी सिंह ने कंपनी के साथ 25 साल तक जुड़े रहने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है. हालांकि, जब तक सोनी पिक्चर्स को नया उत्तराधिकारी नहीं मिल जाता, तब तक वे कंपनी का नेतृत्व करते रहेंगे. सोनी ने बताया कि सिंह इस्तीफे के बाद भी कंपनी के साथ जुड़े रहेंगे. वह सलाहकार की भूमिका निभाएंगे. जून 1999 में एनपी सिंह सोनी इंडिया में CFO के रूप में शामिल हुए थे. 2014 में उन्हें कंपनी के MD और CEO के पद पर प्रमोट किया गया था.

इस्तीफे के बाद क्या कहा?

इस्तीफे के ऐलान के बाद एनपी सिंह सिंह ने कहा कि जब तक हमें कार्यभार संभालने के लिए उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिल जाता, मैं तब तक SPNI का नेतृत्व करता रहूंगा. हमने मेरे उत्तराधिकारी के लिए एक स्ट्रक्चर्ड सक्सेशन प्लानिंग प्रोसेस शुरू की है. उम्मीद है कि निकट भविष्य में साझा करने के लिए कोई अच्छी खबर होगी. सही व्यक्ति ढूंढना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि SPNI और इसकी सफलता के प्रति मेरी प्रतिबद्धता मजबूत बनी हुई है. यहां मेरे कार्यकाल के दौरान हमने इंडस्ट्री में एक स्टैंडर्ड स्थापित किए हैं, अपनी पहुंच का विस्तार किया है और कई शानदार उपलब्धियां हासिल की है. मैं यह सुनिश्चित करने के लिए समर्पित हूं कि हमारी सफलता की विरासत जारी रहे और नए नेतृत्व में आगे बढ़े. 

1999 से कंपनी से जुड़े थे एनपी सिंह

एनपी सिंह 1999 में सोनी इंडिया के CFO के पद से 2019 में CEO तक पहुंचे. वह कंपनी के COO भी थे. दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के छात्र रहे सिंह ने संस्थान से अपना मास्टर कार्यक्रम पूरा किया और दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. इससे पहले सिंह ने मोदी ज़ेरॉक्स, स्पाइस टेलीकॉम, मोदीकॉर्प और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड जैसे संगठनों में फाइनेंस और मैनेजमेंट में कई सीनियर पदों पर कार्य किया.

सोनी के 16 एंटरटेनमेंट और 10 स्पोर्ट्स चैनल

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया टेलीविजन चैनल ऑपरेट करती है. इसके 16 एंटरटेनमेंट चैनल और 10 स्पोर्ट्स चैनल है. 1995 में इसने भारत में अपनी पहला चैनल लॉन्च किया था. इसका एक डिजिटल प्लेटफॉर्म सोनी लिव भी है. सोनी नेटवर्क्स इंडिया का नाम अब कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड हो गया है. यह जापान की कंपनी सोनी ग्रुप कॉर्पोरेशन की सहायक कंपनी है, कंपनी की 167 देशों में रीच है.
 


मुंबई पोर्ट में ₹3,541 करोड़ का निवेश, कार्गो और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

प्राधिकरण के अनुसार, 132.29 करोड़ रुपये की सात परियोजनाएं उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 1,354.59 करोड़ रुपये की 34 परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी.

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Friday, 26 June, 2026
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मुंबई पोर्ट प्राधिकरण (MBPA) ने अपने 154वें स्थापना दिवस पर ₹3,541 करोड़ से अधिक की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की घोषणा की है. इन योजनाओं के तहत कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने, कनेक्टिविटी मजबूत करने, मरीना और वाटरफ्रंट विकसित करने के साथ-साथ पर्यटन और गैर-पोर्ट राजस्व को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल की मौजूदगी में घोषित इन परियोजनाओं से मुंबई पोर्ट के बुनियादी ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद है.

₹3,541 करोड़ की परियोजनाओं का ऐलान

मुंबई पोर्ट प्राधिकरण ने 3,541.29 करोड़ रुपये की कई बड़ी परियोजनाओं की घोषणा की है. इनमें बर्थ आधुनिकीकरण, कनेक्टिविटी अपग्रेड, कार्गो अवसंरचना का विस्तार, मरीना विकास और वाटरफ्रंट परियोजनाएं शामिल हैं. इन पहलों का उद्देश्य बंदरगाह की परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ नए राजस्व स्रोत विकसित करना है.

स्थापना दिवस समारोह में हुई घोषणा

इन परियोजनाओं की घोषणा मुंबई पोर्ट के 154वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान की गई. इस अवसर पर केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल मौजूद रहे. समारोह में बंदरगाह के भविष्य के विकास रोडमैप को भी प्रस्तुत किया गया.

41 नई परियोजनाओं को मिलेगी गति

प्राधिकरण के अनुसार, 132.29 करोड़ रुपये की सात परियोजनाएं उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 1,354.59 करोड़ रुपये की 34 परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी. इससे बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को व्यापक स्तर पर मजबूती मिलेगी.

कार्गो क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर

प्रमुख परियोजनाओं में इंदिरा डॉक पर बर्थ का आधुनिकीकरण, कार्गो भंडारण सुविधाओं का विस्तार, क्रूड ऑयल बर्थ का विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और डिजिटल निगरानी प्रणाली शामिल हैं. इसके अलावा रूफटॉप सोलर पैनलों की स्थापना और डिजिटलीकरण परियोजनाओं के जरिए परिचालन को अधिक आधुनिक और टिकाऊ बनाया जाएगा.

पर्यटन और वाटरफ्रंट विकास को बढ़ावा

मुंबई पोर्ट ने मुंबई मरीना और वाटरफ्रंट परियोजना के विकास की भी योजना तैयार की है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य पर्यटन, मनोरंजन और समुद्री गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जिससे गैर-पोर्ट राजस्व में भी वृद्धि होने की उम्मीद है.

संपत्ति मुद्रीकरण रणनीति को मिली रफ्तार

एमबीपीए ने अपनी एसेट मॉनेटाइजेशन रणनीति के तहत इंदिरा डॉक के बर्थ क्लस्टरों के संचालन और रखरखाव के लिए समझौतों का आदान-प्रदान किया. पहले क्लस्टर के 10 बर्थ को जे एम बक्शी पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स को 10 वर्षों के लिए सौंपा गया है, जिससे 770 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा. वहीं, दूसरे क्लस्टर के 11 बर्थ एम डिनशॉ एंड कंपनी को आवंटित किए गए हैं, जिससे 217 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है.

‘समग्र समुद्री अर्थव्यवस्था वाला अनूठा बंदरगाह’

मुंबई पोर्ट प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. एम. अंगमुथु ने कहा कि मुंबई पोर्ट देश का ऐसा बंदरगाह है, जहां एक व्यापक और समग्र समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र सफलतापूर्वक विकसित हो रहा है. उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं बंदरगाह को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.


IRFC के OFS को मिला शानदार रिस्पॉन्स, सरकार ने जुटाए ₹2,100 करोड़

निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव अरुणिश चावला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि दो दिनों तक चले OFS के दौरान कुल 22.88 करोड़ शेयरों की बिक्री हुई.

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Friday, 26 June, 2026
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इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) के ऑफर फॉर सेल (OFS) को निवेशकों से जबरदस्त समर्थन मिला है. सरकार ने इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए करीब ₹2,100 करोड़ जुटाए हैं. खास बात यह रही कि रिटेल निवेशकों के साथ-साथ संस्थागत निवेशकों ने भी इस ऑफर में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे सरकार के विनिवेश कार्यक्रम को नई मजबूती मिली है.

दो दिनों में बिके 22.88 करोड़ शेयर

निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि दो दिनों तक चले OFS के दौरान कुल 22.88 करोड़ शेयरों की बिक्री हुई. इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को लगभग ₹2,084 करोड़ प्राप्त हुए. उन्होंने निवेशकों के भरोसे और उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए धन्यवाद भी दिया.

सरकार ने अपनाया ग्रीन शू ऑप्शन

सरकार ने इस OFS में ग्रीन शू ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया. इसके तहत रेलवे मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी IRFC में अतिरिक्त 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची गई. इस कदम से सरकार को अधिक राशि जुटाने में मदद मिली. DIPAM ने OFS के लिए ₹91 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया था, जो पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव से लगभग 7.8 प्रतिशत कम था. गुरुवार को बीएसई पर IRFC का शेयर 0.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹91.78 पर बंद हुआ.

चालू वित्त वर्ष में ₹16,480 करोड़ का विनिवेश

IRFC से पहले सरकार चालू वित्त वर्ष के दौरान Coal India, NHPC, GIC, Central Bank of India और NLC India में भी हिस्सेदारी बेच चुकी है. इन सभी विनिवेश सौदों को मिलाकर सरकार अब तक लगभग ₹16,480 करोड़ जुटा चुकी है. इससे स्पष्ट है कि सरकार अपने विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है.

बढ़त के साथ बंद हुआ शेयर बाजार

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए. बीएसई सेंसेक्स 109.25 अंक की तेजी के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 34.35 अंक चढ़कर 24,056 के स्तर पर पहुंच गया. हालांकि कारोबार के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखने को मिली थी, लेकिन दिन के अंत में आईटी, मेटल, ऑयल और गैस सेक्टर के शेयरों में कमजोरी और मुनाफावसूली के कारण बाजार की बढ़त सीमित रह गई.

निवेशकों का भरोसा बढ़ा

IRFC के OFS को मिली मजबूत प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि सरकारी कंपनियों में निवेशकों का भरोसा लगातार बना हुआ है. रिटेल निवेशकों की सक्रिय भागीदारी और संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग ने इस हिस्सेदारी बिक्री को सफल बना दिया है.


विकास गर्ग की मुश्किलें बढ़ीं, दिल्ली कोर्ट ने रोका Advik Laboratories का राइट्स इश्यू

यह फैसला ऐसे समय आया है जब विकास गर्ग और उनके कारोबारी सहयोगी पहले से ही विभिन्न नियामकीय और कानूनी जांचों का सामना कर रहे हैं. अदालत के इस आदेश से कंपनी की पूंजी जुटाने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है.

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Friday, 26 June, 2026
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अद्विक लैबोरेट्रीज (Advik Laboratories Limited) और उसके प्रमोटर विकास गर्ग की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कंपनी के प्रस्तावित राइट्स इश्यू पर अंतरिम रोक लगा दी है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब विकास गर्ग और उनके कारोबारी सहयोगी पहले से ही विभिन्न नियामकीय और कानूनी जांचों का सामना कर रहे हैं. अदालत के इस आदेश से कंपनी की पूंजी जुटाने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है.

कोर्ट ने राइट्स इश्यू पर लगाई रोक

पटियाला हाउस कोर्ट के जिला न्यायाधीश ने Advik Laboratories को मौजूदा राइट्स इश्यू के तहत किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई करने से रोक दिया है. अदालत के आदेश के अनुसार कंपनी फिलहाल:

- भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास लेटर ऑफ ऑफर दाखिल नहीं कर सकेगी.
- शेयरधारकों को ऑफर से जुड़े दस्तावेज नहीं भेज सकेगी.
- सार्वजनिक या निजी सदस्यता प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकेगी.
- निवेशकों से आवेदन राशि स्वीकार नहीं कर सकेगी.

अल्पांश शेयरधारक ने दायर की याचिका

यह आदेश Fairplan Distributors Pvt. Ltd. की ओर से दायर याचिका के बाद आया है. कंपनी के पास Advik Laboratories में करीब 23.46 प्रतिशत हिस्सेदारी है. याचिकाकर्ता ने कंपनी प्रबंधन पर धोखाधड़ी, धन के दुरुपयोग और प्रबंधन संबंधी अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ये प्रारंभिक टिप्पणियां हैं और प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा.

चार साल में तीसरी बार फंड जुटाने की कोशिश

याचिकाकर्ता के अनुसार, पिछले चार वर्षों में कंपनी द्वारा फंड जुटाने का यह तीसरा प्रयास था. कंपनी और उसके प्रबंधन के खिलाफ विभिन्न कानूनी मंचों पर पहले भी कई शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त 2026 को तय की है. तब तक कंपनी की फंड जुटाने की योजना पर रोक बनी रहेगी.

विकास गर्ग पर बढ़ा कानूनी दबाव

अदालत का ताजा आदेश विकास गर्ग और उनसे जुड़ी कंपनियों पर बढ़ते कानूनी और नियामकीय दबाव के बीच आया है. वे पहले से कई दीवानी और आपराधिक मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं.

शेयर ट्रांसफर मामले में भी जांच

वर्ष 2025 में पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को GTM Builders की ओर से दायर आपराधिक शिकायतों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने का निर्देश दिया था. इन शिकायतों में विकास गर्ग और उनके सहयोगियों पर कथित तौर पर शेयरों के अनधिकृत और धोखाधड़ीपूर्ण हस्तांतरण के आरोप लगाए गए थे.

SEBI ने भी की थी कार्रवाई

बाजार नियामक SEBI भी विकास गर्ग और Advik Capital Ltd. के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है. यह कार्रवाई शेयर अधिग्रहण एवं टेकओवर नियमों (SAST Regulations) के तहत जरूरी खुलासों में देरी को लेकर की गई थी. रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मामलों में यह देरी 234 दिनों तक पहुंच गई थी.

CBI जांच और अन्य आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विकास गर्ग की पूर्व कारोबारी गतिविधियों को लेकर भी जांच एजेंसियां सक्रिय रही हैं. इन मामलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं, शेल कंपनियों के नेटवर्क और फर्जी बिलिंग के जरिए कर चोरी से जुड़े आरोपों की भी जांच की गई है.

अदालत के आदेश से Advik Laboratories की फंड जुटाने की योजना फिलहाल रुक गई है. वहीं, विकास गर्ग से जुड़े कॉरपोरेट नेटवर्क पर विभिन्न नियामकीय एजेंसियों की जांच जारी है. अब बाजार और निवेशकों की नजर 22 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां अदालत के समक्ष कंपनी और अन्य प्रतिवादी अपना पक्ष रखेंगे.
 


अमेजन का भारत पर बड़ा दांव, PM मोदी से मुलाकात के बाद 13 अरब डॉलर के नए निवेश की घोषणा

कंपनी का कहना है कि यह निवेश डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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Friday, 26 June, 2026
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भारत के डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र पर अमेजन (Amazon) ने एक बार फिर बड़ा भरोसा जताया है. कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भारत में 13 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश का ऐलान किया है. इस नई घोषणा के साथ 2030 तक कंपनी का कुल नियोजित निवेश बढ़कर 48 अरब डॉलर हो जाएगा. इससे भारत अमेजन के सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक बाजारों में शामिल हो जाएगा.

PM मोदी से मुलाकात के बाद बड़ा ऐलान

अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भारत में 13 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश की घोषणा की. कंपनी का कहना है कि यह निवेश डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

2030 तक 48 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य

इस साल की शुरुआत में अमेजन ने 2030 तक भारत में अपने विभिन्न कारोबारों में 35 अरब डॉलर निवेश करने की योजना की घोषणा की थी. अब अतिरिक्त 13 अरब डॉलर के निवेश के साथ कंपनी का कुल नियोजित निवेश बढ़कर 48 अरब डॉलर हो गया है. कंपनी का अनुमान है कि वर्ष 2010 से 2030 के बीच भारत में उसका कुल निवेश 88 अरब डॉलर से अधिक पहुंच जाएगा.

AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा बड़ा फोकस

कुल निवेश में से करीब 21 अरब डॉलर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर खर्च किए जाएंगे. इसके तहत मुंबई और हैदराबाद में AWS डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाई जाएगी. इस निवेश से स्टार्टअप, उद्यमों और सरकारी संस्थानों को एआई चिप, मैनेज्ड एआई सेवाएं, सुरक्षित क्लाउड तकनीक और डेवलपर टूल्स तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी.

ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कारोबार का होगा विस्तार

अमेजन ने कहा है कि वह अपने ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कारोबार में भी निवेश जारी रखेगी. कंपनी इस वर्ष 20 से अधिक नए फुलफिलमेंट सेंटर और 100 से ज्यादा डिलीवरी केंद्र शुरू करने की योजना बना रही है. इस विस्तार से देशभर में ग्राहकों तक तेज डिलीवरी सेवा पहुंचाने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी.

रोजगार और छोटे कारोबारों को मिलेगा लाभ

कंपनी का कहना है कि यह निवेश रोजगार सृजन, छोटे व्यवसायों के डिजिटलीकरण और निर्यात को बढ़ावा देने में सहायक होगा. अमेजन का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण विकास बाजारों में से एक बन सकता है.

क्या बोले एंडी जेसी

एंडी जेसी ने कहा कि भारत में अमेजन की व्यावसायिक प्राथमिकताएं देश की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी एआई को आम लोगों तक पहुंचाने, छोटे व्यवसायों को डिजिटल बनाने, रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि अमेज नप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के विजन से प्रेरित है और देश की विकास यात्रा में दीर्घकालिक भागीदार बना रहेगा.


कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज की वापसी कितनी व्यावहारिक? जानिए क्या कहते हैं बाजार विशेषज्ञ

विशेषज्ञों की राय बताती है कि CSE का पुनर्जीवन केवल एक ऐतिहासिक संस्था को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह पूर्वी भारत के वित्तीय भविष्य से जुड़ा मुद्दा भी बन सकता है.

रितु राणा by
Published - Thursday, 25 June, 2026
Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
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पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 118 साल पुराने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) को पुनर्जीवित करने की पहल ने वित्तीय जगत में नई बहस छेड़ दी है. हाल ही में राज्य सरकार ने बजट में एक्सचेंज को दोबारा शुरू करने की मंशा जाहिर की थी, जिसके बाद CSE के भविष्य और उसकी संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में बाजार और निवेश जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि CSE की वापसी केवल एक ऐतिहासिक संस्थान के पुनर्जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वी भारत के लिए नए वित्तीय इकोसिस्टम और पूंजी बाजार के विकास का अवसर भी बन सकती है. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि NSE और BSE के वर्चस्व वाले मौजूदा दौर में CSE के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी होंगी. 

CSE सिर्फ एक्सचेंज नहीं, 'कैपिटल एक्सेस हब' बन सकता है

एसआईपी यात्रा के संस्थापक और वित्त विशेषज्ञ हर्ष गुप्ता का मानना है कि CSE को केवल एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के रूप में देखना इसकी भूमिका को सीमित करना होगा. उनके मुताबिक, पूर्वी भारत में MSME, स्टार्टअप और क्षेत्रीय उद्योगों के लिए पूंजी तक पहुंच अभी भी एक बड़ी चुनौती है. यदि CSE को आधुनिक तकनीक, मजबूत नियामकीय ढांचे और निवेशक शिक्षा के साथ दोबारा विकसित किया जाता है, तो यह पूर्वी भारत के लिए एक 'कैपिटल एक्सेस हब' बन सकता है.

हालांकि, उन्होंने कहा कि इस स्तर पर CSE की तुलना GIFT City से करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि GIFT City की सफलता अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं, कर प्रोत्साहनों और वैश्विक पूंजी प्रवाह पर आधारित है.

NSE और BSE के बीच तीसरे एक्सचेंज की राह आसान नहीं

गौरव भगत अकादमी के संस्थापक गौरव भगत का कहना है कि CSE का ऐतिहासिक महत्व जरूर है, लेकिन केवल भावनात्मक आधार पर किसी एक्सचेंज को सफल नहीं बनाया जा सकता. उन्होंने कहा कि भारतीय पूंजी बाजार में आज NSE और BSE की मजबूत पकड़ है. ऐसे में किसी तीसरे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के लिए जगह बनाना चुनौतीपूर्ण होगा.

उनके अनुसार, यदि पश्चिम बंगाल सरकार फिनटेक, वैकल्पिक निवेश फंड, स्टार्टअप कैपिटल और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने वाला व्यापक वित्तीय इकोसिस्टम तैयार करती है, तभी CSE की कहानी पुनर्जीवन से आगे बढ़कर बदलाव की कहानी बन सकती है.

लिक्विडिटी और वॉल्यूम सबसे बड़ी चुनौती

129 Wealth के फंड मैनेजर और Paul Asset के रिसर्च एनालिस्ट प्रसनजीत पॉल का मानना है कि आज के दौर में स्टॉक एक्सचेंज स्थान से नहीं, बल्कि लिक्विडिटी और टेक्नोलॉजी से चलते हैं. उन्होंने कहा कि कोलकाता के निवेशकों को पहले से ही NSE और BSE तक आसान पहुंच प्राप्त है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती ट्रेडिंग वॉल्यूम और निवेशकों का भरोसा दोबारा हासिल करना होगी.

प्रसनजीत पॉल के अनुसार, CSE को NSE और BSE से सीधी प्रतिस्पर्धा करने के बजाय MSME, स्टार्टअप्स और क्षेत्रीय व्यवसायों के लिए एक विशेष प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जाना चाहिए.

क्या बन सकता है पूर्वी भारत का GIFT City?

विशेषज्ञों की राय में CSE के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह केवल एक पुराने स्टॉक एक्सचेंज के रूप में लौटेगा या फिर पूर्वी भारत के लिए नए वित्तीय इकोसिस्टम का आधार बनेगा. GIFT City की तरह किसी वित्तीय केंद्र के विकास के लिए कर प्रोत्साहन, नीतिगत समर्थन, वैश्विक पूंजी, फिनटेक इकोसिस्टम और दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत होती है. ऐसे में CSE का भविष्य काफी हद तक सरकार की नीतियों, नियामकीय मंजूरी और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगा.

एक समय BSE को भी देता था कड़ी टक्कर

बता दें, कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज कभी देश के सबसे सक्रिय क्षेत्रीय स्टॉक एक्सचेंजों में शामिल था. 1990 के दशक के आखिर और 2000 के शुरुआती वर्षों में कई मौकों पर CSE का दैनिक कारोबार हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. एक समय यहां 4,000 से अधिक कंपनियां सूचीबद्ध थीं और यह देश का दूसरा सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज माना जाता था. 

क्षेत्रीय एक्सचेंजों का दौर लगभग खत्म हो चुका है

विशेषज्ञों के अनुसार, देश में कभी 20 से अधिक क्षेत्रीय स्टॉक एक्सचेंज सक्रिय हुआ करते थे, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग, ऑनलाइन ब्रोकिंग और केंद्रीकृत क्लियरिंग सिस्टम के विस्तार के बाद अधिकांश क्षेत्रीय एक्सचेंज बंद हो गए. आज भारतीय शेयर बाजार में NSE और BSE का दबदबा है, जबकि अन्य एक्सचेंजों की हिस्सेदारी बेहद सीमित है. ऐसे में CSE के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों और ब्रोकरों को दोबारा आकर्षित करने की होगी. 

तकनीक और लिक्विडिटी बनेगी सफलता की कुंजी

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक पूंजी बाजार में किसी स्टॉक एक्सचेंज की सफलता उसकी भौगोलिक स्थिति से ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम, तकनीकी क्षमता और लिक्विडिटी पर निर्भर करती है. यदि किसी एक्सचेंज पर पर्याप्त कारोबार नहीं होता, तो निवेशकों और ब्रोकरों की रुचि भी सीमित रह जाती है. यही कारण है कि CSE के पुनर्जीवन में तकनीकी प्लेटफॉर्म और बाजार सहभागिता दोनों अहम भूमिका निभाएंगे. 

राज्य सरकार की व्यापक वित्तीय रणनीति

पश्चिम बंगाल सरकार केवल CSE के पुनर्जीवन तक सीमित नहीं रहना चाहती. राज्य सरकार लाभ में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भी पूंजी बाजार में सूचीबद्ध करने की संभावनाएं तलाश रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य की कंपनियां भविष्य में सूचीबद्ध होती हैं, तो इससे CSE को शुरुआती कारोबार और लिस्टिंग गतिविधियों का आधार मिल सकता है.

पूर्वी भारत के लिए नया अवसर

पूर्वी भारत में MSME, स्टार्टअप, विनिर्माण और निर्यात आधारित उद्योगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. यदि CSE क्षेत्रीय उद्यमों, SME कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्लेटफॉर्म विकसित करता है, तो यह पूर्वी भारत में पूंजी तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. यही कारण है कि कई विशेषज्ञ CSE को पारंपरिक एक्सचेंज के बजाय एक विशेष क्षेत्रीय वित्तीय मंच के रूप में विकसित करने की वकालत कर रहे हैं.
 


AI, डेटा और साइबर सुरक्षा से बदलेगा मैन्युफैक्चरिंग का भविष्य, KPMG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब केवल तकनीक के प्रयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर AI को अपने संचालन, सप्लाई चेन और उत्पादन प्रक्रियाओं में शामिल कर रही हैं.

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
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भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में व्यवधान और तेजी से बदलती तकनीकों के बीच वैश्विक औद्योगिक विनिर्माण (इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. KPMG की ग्लोबल टेक रिपोर्ट 2026 के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा आधारित निर्णय और तकनीक आधारित लचीलापन इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब केवल तकनीक के प्रयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर AI को अपने संचालन, सप्लाई चेन और उत्पादन प्रक्रियाओं में शामिल कर रही हैं.

22 देशों के 258 टेक लीडर्स की राय

KPMG Global Tech Report 2026 – Industrial Manufacturing में 22 देशों और क्षेत्रों के 258 तकनीकी नेताओं की राय शामिल की गई है. इसमें मेटल्स, एडवांस्ड मैटेरियल्स, इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स, स्पेस, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे सेक्टरों को शामिल किया गया है. रिपोर्ट उद्योग क्षेत्र में चल रहे डिजिटल बदलाव और तकनीकी निवेश की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है.

भारत में तेज हो रहा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में औद्योगिक कंपनियां तेजी से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं, बढ़ती डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता और उद्योगों में डिजिटलीकरण इस बदलाव को गति दे रहे हैं. हालांकि, डेटा इंटीग्रेशन, साइबर सुरक्षा, कुशल प्रतिभा की कमी और पुरानी तकनीकी व्यवस्था जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं. ऐसे में कंपनियां अपने ऑपरेटिंग मॉडल को आधुनिक बनाने और तकनीकी आधार को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं.

AI का बढ़ता इस्तेमाल

मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब AI का इस्तेमाल केवल प्रयोग के तौर पर नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर कर रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां ऑपरेशनल एफिशिएंसी, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, क्वालिटी कंट्रोल और सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन के लिए AI का उपयोग बढ़ा रही हैं. इसके साथ ही आईटी, बिजनेस और रिस्क मैनेजमेंट टीमों के बीच सहयोग भी बढ़ रहा है, जिससे जिम्मेदार AI और साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जा सके.

भारत में तकनीक बनेगी ग्रोथ का इंजन

KPMG इंडिया के पार्टनर और नेशनल सेक्टर लीडर (इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग) एस. सतीश ने कहा कि भारतीय कंपनियां अब तकनीक को केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि बिजनेस ग्रोथ के महत्वपूर्ण साधन के रूप में देख रही हैं. उन्होंने कहा कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी निवेश और AI को बढ़ती स्वीकृति भारत में इंडस्ट्रियल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही है. जो कंपनियां डेटा, स्केलेबल प्लेटफॉर्म, स्किल डेवलपमेंट और साइबर सुरक्षा में निवेश करेंगी, वे भविष्य में अधिक मजबूत स्थिति में होंगी.

रिपोर्ट की प्रमुख बातें

1. 87 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग अधिकारियों का मानना है कि एडवांस टेक्नोलॉजी भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगी.
2. 80 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि तकनीक निवेश से बेहतर मूल्य सृजित हो रहा है.
3. 70 प्रतिशत कंपनियां AI लागू करने के लिए केंद्रीकृत मॉडल अपना रही हैं.
4. 76 प्रतिशत अधिकारियों ने खराब या अविश्वसनीय डेटा को AI के लिए सबसे बड़ा जोखिम बताया.
5. 68 प्रतिशत कंपनियां अगले 12 महीनों में बड़े स्तर पर AI लागू करने की तैयारी कर रही हैं.
6. 48 प्रतिशत कंपनियां साइबर सुरक्षा निवेश में बड़ी बढ़ोतरी की योजना बना रही हैं.
7. 49 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि AI आधारित उपयोग से उन्हें वास्तविक व्यावसायिक लाभ मिल रहा है.
8. 89 प्रतिशत अधिकारियों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में AI एजेंट्स का प्रबंधन एक महत्वपूर्ण कार्य कौशल बन जाएगा.

साइबर सुरक्षा और डेटा पर बढ़ा फोकस

रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा प्रबंधन का महत्व भी तेजी से बढ़ रहा है. कंपनियां अब केवल तकनीकी निवेश नहीं कर रहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल ढांचा तैयार करने पर भी जोर दे रही हैं.

भविष्य की औद्योगिक वृद्धि में तकनीक की बड़ी भूमिका

KPMG की रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है. जो कंपनियां AI को बड़े स्तर पर अपनाने, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने और कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करने में सफल होंगी, वही आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास की अगुवाई करेंगी.
 


महाराष्ट्र में निवेश बढ़ाने की तैयारी, अमेजन CEO एंडी जेसी से मिले फडणवीस; डेटा सेंटर और AI पर जोर

मुंबई में हुई अहम बैठक, महाराष्ट्र सरकार ने डेटा सेंटर, हेल्थकेयर और AI स्किल डेवलपमेंट में नए निवेश का दिया न्योता

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को मुंबई में अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एंडी जेसी से मुलाकात की और कंपनी को राज्य में डेटा सेंटर, हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कौशल विकास के क्षेत्रों में नए निवेश के लिए आमंत्रित किया. मुख्यमंत्री ने इस बैठक को महाराष्ट्र और अमेजन के बीच एक दशक पुराने सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.

2016 से मजबूत हो रही साझेदारी

देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अमेजन ने जून 2016 में मुंबई को भारत में अपने पहले क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर रीजन के रूप में चुना था. इसके बाद से महाराष्ट्र और अमेजन के बीच सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और राज्य देश की टेक्नोलॉजी राजधानी के रूप में उभरा है. उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में महाराष्ट्र अमेजन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है.

8.3 अरब डॉलर के निवेश पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक के दौरान 2025 में दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान AWS के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई. इस समझौते के तहत महाराष्ट्र में 8.3 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की गई थी, जो किसी एक राज्य में अमेजन की अब तक की सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धता मानी जा रही है. इस निवेश से भारत में करीब 83,100 रोजगार सृजित होने का अनुमान है.

महाराष्ट्र में तेजी से बढ़ रहा अमेजन का नेटवर्क

फडणवीस ने बताया कि अमेजन वर्तमान में महाराष्ट्र में छह फुलफिलमेंट सेंटर और 200 से अधिक डिलीवरी स्टेशनों का संचालन कर रहा है. इसके जरिए कंपनी देश और विदेश के ग्राहकों तक सेवाएं पहुंचा रही है.

राज्य के 22,000 से अधिक उद्यमी और छोटे व्यवसाय अमेजन के प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैश्विक बाजारों में अपने उत्पादों का निर्यात कर रहे हैं. ठाणे, मुंबई, पुणे और कोल्हापुर देश के शीर्ष 50 निर्यातक शहरों में शामिल हैं.

पर्यावरण और सामाजिक परियोजनाओं में भी योगदान

मुख्यमंत्री ने राज्य में अमेजन की पर्यावरणीय और सामाजिक पहलों की भी सराहना की. उन्होंने बताया कि कंपनी ने वैतरणा हाइड्रोबेसिन परियोजना में 10 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिससे हर वर्ष 1.3 अरब लीटर पानी के पुनर्भरण का लक्ष्य है और करीब 700 किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा, पश्चिमी घाट में तीन लाख पेड़ लगाने और ठाणे क्रीक के आसपास फ्लेमिंगो पक्षियों के आवास संरक्षण के लिए 12 लाख डॉलर की परियोजना भी चलाई जा रही है.

युवाओं के कौशल विकास पर फोकस

अमेजन राज्य में युवाओं को नई तकनीकों और डिजिटल कौशलों का प्रशिक्षण देने पर भी काम कर रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की कार्यबल तैयार करने में कंपनी की यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

तकनीक, रोजगार और स्थिरता पर आगे बढ़ेगा सहयोग

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार तकनीक, रोजगार सृजन, स्थिरता और डिजिटल विकास के क्षेत्रों में अमेजन के साथ सहयोग को और गहरा करना चाहती है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और अमेजन के बीच यह साझेदारी आने वाले वर्षों में निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर पैदा कर सकती है.
 


LEAD Group में बड़ा नेतृत्व बदलाव, ग्रोथ और AI इनोवेशन को मिलेगी नई रफ्तार

2030 तक 1.2 करोड़ छात्रों और 25,000 स्कूलों तक पहुंचने के लक्ष्य के बीच कंपनी ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी नई जिम्मेदारियां

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
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देश की प्रमुख स्कूल लर्निंग सिस्टम कंपनी LEAD Group ने अपने अगले विकास चरण और तकनीकी नवाचार को गति देने के लिए नेतृत्व स्तर पर कई अहम बदलावों की घोषणा की है. कंपनी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपते हुए संगठन को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है. कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 1.2 करोड़ छात्रों और 25,000 स्कूलों तक अपनी पहुंच बनाना है. इसके लिए LEAD Group तकनीक आधारित शिक्षा समाधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बेहतर शिक्षण परिणामों पर विशेष फोकस कर रही है.

अजय कश्यप संभालेंगे Ms Curie.AI की कमान

नई नियुक्तियों के तहत अजय कश्यप को LEAD Group की AI-आधारित सॉल्यूशंस इकाई **Ms Curie.AI** का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया गया है. नई भूमिका में अजय कश्यप व्यक्तिगत शिक्षण (Personalised Learning) और शिक्षकों को सशक्त बनाने के लिए AI आधारित उत्पादों के विकास का नेतृत्व करेंगे. कंपनी का मानना है कि ये समाधान भविष्य की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा दे सकते हैं.

सोहम मुखर्जी बने चीफ ग्रोथ ऑफिसर

कंपनी ने सोहम मुखर्जी को चीफ ग्रोथ ऑफिसर (CGO) नियुक्त किया है. वह देशभर में स्कूलों के साथ साझेदारी बढ़ाने, नए व्यावसायिक अवसर तलाशने और कंपनी की पहुंच को और मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे. उनकी भूमिका अधिक से अधिक छात्रों तक LEAD Group की सेवाएं पहुंचाने में अहम मानी जा रही है.

इंद्रनील बनर्जी को मिली प्रोडक्ट की जिम्मेदारी

इंद्रनील बनर्जी को चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर (CPO) बनाया गया है. वह कंपनी के उत्पाद विकास और नवाचार रणनीति का नेतृत्व करेंगे. उनका फोकस ऐसे छात्र-केंद्रित समाधानों को विकसित करने पर रहेगा, जो कक्षाओं में बेहतर प्रभाव डालें और सीखने के परिणामों को मजबूत करें.

गुरुप्रसाद होला बने चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर

गुरुप्रसाद होला को कंपनी का नया चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) नियुक्त किया गया है. वह कंपनी की तकनीकी रणनीति का नेतृत्व करते हुए सुरक्षित, स्केलेबल और भविष्य के लिए तैयार तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित करने पर काम करेंगे, जिससे बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके.

कंपनी ने आंतरिक प्रतिभाओं पर जताया भरोसा

LEAD Group के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमीत मेहता ने कहा कि कंपनी विकास, नवाचार और प्रभाव के नए चरण में प्रवेश कर रही है, ऐसे में नेतृत्व टीम को मजबूत करना बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि अजय कश्यप, इंद्रनील बनर्जी, गुरुप्रसाद होला और सोहम मुखर्जी ने कंपनी की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और संगठन के भीतर मौजूद प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना कंपनी की प्राथमिकता है.

2030 के विजन पर रहेगा फोकस

कंपनी का कहना है कि ये नेतृत्व परिवर्तन एक ऐसे भविष्य-उन्मुख संगठन के निर्माण की दिशा में उठाया गया कदम है, जो स्थायी विकास के साथ-साथ देशभर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच को बढ़ा सके. मजबूत नेतृत्व टीम के साथ LEAD Group आने वाले वर्षों में स्कूल शिक्षा को नई दिशा देने और हर बच्चे को उसकी पूरी क्षमता तक पहुंचाने के अपने मिशन को आगे बढ़ाने पर जोर देगी.
 


42% कम बारिश से 315 जिलों पर संकट, खरीफ फसलों को बचाने के लिए सरकार का एक्शन प्लान तैयार

केंद्र सरकार ने राज्यों को जिला-स्तरीय कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि कम बारिश और सिंचाई संकट के बावजूद किसानों को राहत मिल सके और फसल उत्पादन पर असर कम किया जा सके.

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Thursday, 25 June, 2026
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कमजोर मानसून और अल नीनो के बढ़ते खतरे ने देश की कृषि व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. 23 जून तक देश में सामान्य से 42 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके बाद केंद्र सरकार ने अलर्ट जारी करते हुए 315 संवेदनशील जिलों की पहचान की है. इन जिलों में खरीफ फसलों पर संकट गहराने की आशंका को देखते हुए आपातकालीन योजनाओं पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है.

केंद्र सरकार ने राज्यों को जिला-स्तरीय कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि कम बारिश और सिंचाई संकट के बावजूद किसानों को राहत मिल सके और फसल उत्पादन पर असर कम किया जा सके.

कमजोर मानसून ने बढ़ाई सरकार की चिंता

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को देश में कमजोर मानसून की स्थिति की समीक्षा की. उन्होंने जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक बुआई पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया.

विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो का प्रभाव आमतौर पर सामान्य से कम बारिश, सूखे की स्थिति और खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट से जुड़ा रहा है. यही कारण है कि सरकार ने समय रहते तैयारी शुरू कर दी है.

315 जिलों की पहचान, 111 जिले सबसे ज्यादा जोखिम में

कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने संयुक्त रूप से वर्षा के पैटर्न, सिंचाई सुविधाओं और स्थानीय मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर 315 जिलों को जोखिम वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया है. इनमें 111 जिलों को हाई प्रायोरिटी श्रेणी में रखा गया है, जहां सिंचाई सुविधा 25 प्रतिशत से भी कम है. 76 जिलों को मीडियम प्रायोरिटी श्रेणी में रखा गया है, जहां सिंचाई का दायरा 25 से 50 प्रतिशत के बीच है.

वहीं, 128 जिलों को अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला माना गया है, क्योंकि इन क्षेत्रों में जलाशयों और अन्य जल स्रोतों के माध्यम से बेहतर सिंचाई उपलब्ध है.

इन राज्यों में सबसे ज्यादा असर की आशंका

कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव से प्रभावित जिलों की सबसे अधिक संख्या मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में है. इन राज्यों में कृषि उत्पादन पर प्रभाव को कम करने के लिए विशेष निगरानी की जा रही है.

खरीफ उत्पादन का लक्ष्य बरकरार

सरकार ने वर्ष 2026 के खरीफ सीजन के लिए लगभग 17.6 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष के उत्पादन के बराबर है. हालांकि, कम बारिश के बावजूद 22 जून तक 1.19 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष के 1.17 करोड़ हेक्टेयर से अधिक है. कृषि मंत्री ने माना कि सोयाबीन की बुआई अभी भी अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है.

किसानों के लिए तैयार किया गया बैकअप प्लान

बारिश की संभावित कमी से निपटने के लिए ICAR ने जिला स्तर पर आपातकालीन योजनाएं तैयार की हैं. इन योजनाओं में कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों की खेती, बुआई के समय में बदलाव और फसल प्रबंधन के नए तरीकों की सिफारिश की गई है. सरकार का मानना है कि समय रहते की गई यह तैयारी किसानों की आय और उत्पादन दोनों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है.

अल नीनो और कमजोर मानसून से बढ़ सकती हैं चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले सप्ताहों में मानसून की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कृषि उत्पादन, ग्रामीण आय और खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है. ऐसे में सरकार की तैयारियां और जिला स्तर पर बनाई गई रणनीति आने वाले महीनों में अहम भूमिका निभाएगी.
 


बेंगलुरु रोडशो में यूपी को ₹50,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, GCC हब बनने की ओर बड़ा कदम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में 15 से अधिक कंपनियों ने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए.

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Thursday, 25 June, 2026
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उत्तर प्रदेश ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक और बड़ी सफलता हासिल की है. बेंगलुरु में आयोजित निवेशक रोडशो के दौरान राज्य को 50,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में 15 से अधिक कंपनियों ने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए. यह निवेश प्रस्ताव ‘उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026’ के दौरान सामने आए. राज्य सरकार उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत देश और विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.

रियल एस्टेट और बिजनेस पार्क सेक्टर से सबसे बड़े निवेश प्रस्ताव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सबसे अधिक निवेश प्रस्ताव रियल एस्टेट, औद्योगिक पार्क और बिजनेस पार्क सेक्टर से मिले हैं. होराइजन (ब्लैकस्टोन) ने 10,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है. वहीं, एम्बेसी और रहेजा माइंडस्पेस REIT ने 5,000-5,000 करोड़ रुपये निवेश की प्रतिबद्धता जताई है.

प्रेस्टीज ग्रुप ने 15,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना पेश की है, जबकि सत्वा डेवलपर्स ने 4,000 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव रखा है. श्रीराम प्रॉपर्टीज ने भी राज्य में निजी औद्योगिक और बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए समझौता किया है.

GCC सेक्टर में भी बढ़ी वैश्विक कंपनियों की दिलचस्पी

उत्तर प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) क्षेत्र में भी नई कंपनियों की रुचि मिली है. एलजी, एऑन, मेटलाइफ और टेबल स्पेस जैसी कंपनियों ने राज्य में निवेश को लेकर समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए. वहीं, टीमलीज ने उत्तर प्रदेश में GCC के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से गैर-वित्तीय समझौता किया है. इसका उद्देश्य राज्य में प्रशिक्षित पेशेवरों की मजबूत पाइपलाइन तैयार करना है.

निवेशकों के साथ बंद कमरे में हुई अहम बैठकें

बेंगलुरु दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैश्विक निवेशकों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ तीन बंद कमरे की गोलमेज बैठकों में हिस्सा लिया. इन बैठकों में शहरी अवसंरचना, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी सेवाएं और राज्य में बढ़ते प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने राज्य की औद्योगिक नीतियों, तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक सुधारों को दीर्घकालिक निवेश के लिए अनुकूल बताया.

2031 तक 500 GCC स्थापित करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख GCC हब बनाने का रोडमैप भी पेश किया. इसके तहत वर्ष 2031 तक 4 करोड़ वर्गफुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस विकसित करने और 500 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है. राज्य सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश के शीर्ष तीन एफडीआई गंतव्यों में शामिल करना है.

गूगल क्लाउड के साथ AI और डिजिटल तकनीक पर चर्चा

बेंगलुरु प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गूगल क्लाउड के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की. इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा आधारित तकनीकों के उपयोग पर चर्चा हुई. बैठक में शासन व्यवस्था, कृषि, एमएसएमई और स्टार्टअप सेक्टर में डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार किया गया. राज्य सरकार का मानना है कि नई तकनीकों के जरिए सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सकती है और किसानों, युवाओं तथा छोटे कारोबारियों को अधिक लाभ पहुंचाया जा सकता है.

उत्तर प्रदेश को निवेश केंद्र बनाने की रणनीति

राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक नीतियां, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े निवेश केंद्रों में बदल सकते हैं. बेंगलुरु रोडशो में मिले निवेश प्रस्ताव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माने जा रहे हैं.