शेयर बाजार में कल सुनामी देखने को मिली. लोकसभा चुनाव के परिणाम से बाजार नाखुश नजर आया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
लोकसभा चुनाव में भाजपा के मनमाफिक प्रदर्शन नहीं करने पाने से शेयर बाजार (Stock Market) भी उदास हो गया. मंगलवार को बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आई कि एक ही झटके में निवेशकों को कंगाल वाली फीलिंग होने लगी. चौतरफा बिकवाली के बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 4,389.73 अंकों (5.74%) के भारी-भरकम नुकसान के साथ दो महीने के निचले स्तर 72,079.05 पर पहुंच गया. कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 6,234.35 अंकों का गोता लगा गया था. इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 1,379.40 अंक (5.93%) गिरकर 21,884.50 पर बंद हुआ. चलिए जानते हैं कि कल मिले जख्मों को आज कौनसे शेयर कुछ हद तक भरने का काम कर सकते हैं.
MACD ने दिए ये संकेत
सबसे पहले बात करते हैं मोमेंटम इंडिकेटर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डिवर्जेंस (MACD) की. MACD ने आज के लिए Sobha, Phoenix Mills, Container Corporation of India और Solar Industries में तेजी का रुख दर्शाया है. इसका मतलब है कि इन शेयरों में आज उछाल आ सकता है. ऐसे में अगर आप दांव लगते हैं तो मुनाफा कमाने की गुंजाइश भी बन सकती है. हालांकि, BW हिंदी आपको सलाह देता है कि शेयर बाजार में निवेश से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से परामर्श जरूर कर लें अन्यथा आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. इसी तरह, MACD ने Havells India, Bajaj Steel Industries, HG Infra Engineering, Vijaya Diagnostics Centre और MM Forgings में मंदी का रुख दर्शाया है. यानी इनमें गिरावट आ सकती है.
आज इन पर भी रखें नजर
अब उन शेयरों के बारे में जानते हैं जिनमें मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है. इस लिस्ट में Hero MotoCorp, Blue Star, Marico, Britannia, Emami, Phoenix Mills और Finolex Industries का नाम शामिल है. वहीं, India Cement, Zee Entertainment Enterprises, Gujarat Fluorochemicals, Dalmia Bharat, Sterlite Technologies और Bandhan Bank में बिकवाली का दबाव नजर आ रही है. लिहाजा इन शेयरों में निवेश को लेकर फिलहाल सावधान रहें. India Cement के शेयरों में कल सुनामी देखने को मिली थी. कंपनी के शेयर 14% से अधिक की गिरावट के साथ 184.85 रुपए पर बंद हुए.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है).
रिपोर्ट के अनुसार, Nestle India, PepsiCo और Dabur India जैसी कंपनियों के साथ JW Marriott जैसे होटल संचालकों को भी नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में जवाब देना पड़ा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
10 मिनट में घर तक सामान पहुंचाने वाली क्विक कॉमर्स कंपनियों Blinkit, Swiggy Instamart और Amazon Now के लिए आने वाले दिनों में खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियम सख्त हो सकते हैं. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की जानकारी, उनकी स्टोरेज व्यवस्था और उत्पादों से जुड़े दावों की निगरानी बढ़ाने पर विचार कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पादों के बारे में सही जानकारी उपलब्ध कराना और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर रोक लगाना है.
FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राजित पुनहानी के मुताबिक, नियामक इन कंपनियों के लिए नियमों को सख्त बनाने और उनकी जवाबदेही तय करने की दिशा में काम कर रहा है. हालांकि, प्रस्तावित बदलावों को लेकर अंतिम नियमों की स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है.
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखानी पड़ सकती है पूरी जानकारी
प्रस्तावित नियमों के तहत क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म पर खाद्य उत्पादों की लिस्टिंग में मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर जैसी जानकारियां दिखाना जरूरी हो सकता है. इससे ग्राहकों को खरीदारी से पहले उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी उपयोग अवधि के बारे में जानकारी मिल सकेगी.
इसके अलावा, अगर किसी उत्पाद को लेकर भ्रामक दावा किया जाता है, तो ऐसे मामलों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है. इससे कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध खाद्य उत्पादों की जानकारी और उनसे जुड़े दावों की निगरानी अधिक सावधानी से करनी पड़ सकती है.
डार्क स्टोर और डार्क किचन की बढ़ सकती है जांच
FSSAI खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डार्क स्टोर की जांच बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है. क्विक कॉमर्स कंपनियां इन स्टोर का इस्तेमाल सामान को नजदीकी इलाकों में रखने और कम समय में ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए करती हैं.
जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि खाद्य पदार्थों को निर्धारित तापमान और सुरक्षित परिस्थितियों में रखा जा रहा है या नहीं. इसमें फ्रोजन फूड यानी जमे हुए खाद्य पदार्थों के भंडारण पर भी ध्यान दिया जा सकता है. वहीं, डार्क किचन की तस्वीर और पता उपलब्ध कराना अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर भी विचार हो रहा है. डार्क किचन ऐसे स्थान होते हैं, जहां डिलीवरी के लिए खाना तैयार किया जाता है, लेकिन ग्राहकों के बैठकर खाने की व्यवस्था नहीं होती. इस कदम से खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली जगहों की पहचान और उनकी निगरानी आसान हो सकती है.
Blinkit, Instamart और Amazon पर पहले भी हुई कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए FSSAI ने पिछले कुछ महीनों में जांच और नियामकीय कार्रवाई तेज की है. रिपोर्ट के मुताबिक, Blinkit, Swiggy Instamart, Flipkart और Amazon के भारतीय कारोबार को अलग-अलग मामलों में कार्रवाई का सामना करना पड़ा है. इन मामलों में उत्पादों की गलत ब्रांडिंग, प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री और वैध लाइसेंस से संबंधित गड़बड़ियां शामिल हैं.
जुलाई में FSSAI की जांच के बाद Swiggy Instamart ने कहा था कि वह नियामक की ओर से चिह्नित उत्पादों की लिस्टिंग की समीक्षा कर रहा है और मामले को सुलझाने के लिए अधिकारियों के संपर्क में है. वहीं, Amazon ने कहा कि उसका प्लेटफॉर्म एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस है, जहां स्वतंत्र विक्रेता अपने उत्पाद बेचते हैं. कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, नियमों का पालन नहीं करने वाले उत्पादों को हटाया जाता है और संबंधित उत्पाद को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था.
खाद्य कंपनियां, होटल और रेस्टोरेंट भी निगरानी के दायरे में
FSSAI की सख्ती केवल क्विक कॉमर्स कंपनियों तक सीमित नहीं है. खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों, होटलों और रेस्टोरेंट की गतिविधियां भी नियामक की निगरानी में हैं. उत्पादों की लेबलिंग, विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों, बच्चों के लिए बनाए जाने वाले उत्पादों की मार्केटिंग और खाद्य पदार्थों के भंडारण जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, Nestle India, PepsiCo और Dabur India जैसी कंपनियों के साथ JW Marriott जैसे होटल संचालकों को भी नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में जवाब देना पड़ा है.
कुल मिलाकर, FSSAI के प्रस्तावित कदम ऑनलाइन खाद्य कारोबार में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ा सकते हैं. यदि नए नियम लागू होते हैं, तो क्विक कॉमर्स कंपनियों को उत्पादों की जानकारी, खाद्य पदार्थों के भंडारण और सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर अधिक ध्यान देना होगा. इससे ग्राहकों को खरीदारी के समय बेहतर जानकारी मिलने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है.
नेट इंटरेस्ट इनकम में 37% की बढ़ोतरी, एडवांस 42% और जमा राशि 34% बढ़ी; एसेट क्वालिटी में भी सुधार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आरबीएल (RBL) बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. बैंक का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) सालाना आधार पर 170% बढ़कर ₹482 करोड़ पर पहुंच गया. पिछले साल की समान तिमाही में बैंक का मुनाफा इससे काफी कम था. बैंक ने 12 अक्टूबर 2026 को अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा की. मुनाफे में इस बढ़ोतरी के पीछे ब्याज आय में वृद्धि, कर्ज वितरण में तेजी और परिचालन लाभ में सुधार प्रमुख कारण रहे.
नेट इंटरेस्ट इनकम में 37% की बढ़ोतरी
बैंक की शुद्ध ब्याज आय (Net Interest Income) सालाना आधार पर 37% बढ़कर ₹2,131 करोड़ हो गई. वहीं, शुद्ध ब्याज मार्जिन (Net Interest Margin) बढ़कर 4.61% पर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 4.51% था.
बैंक का परिचालन मुनाफा (Operating Profit) 92% बढ़कर ₹1,396 करोड़ हो गया. इस दौरान कुल शुद्ध आय (Net Total Income) 29% बढ़कर ₹3,208 करोड़ रही. अन्य आय में 16% की वृद्धि हुई और यह ₹1,077 करोड़ पर पहुंच गई. इसमें मुख्य शुल्क आय (Core Fee Income) का योगदान रहा, जो 12% बढ़कर ₹1,040 करोड़ हो गई.
बैंक का परिचालन खर्च 3% बढ़कर ₹1,812 करोड़ रहा. हालांकि, आय के मुकाबले खर्च के अनुपात यानी कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो में सुधार हुआ. यह वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के 70.67% से घटकर 56.48% पर आ गया.
कर्ज वितरण और जमा राशि में तेजी
30 सितंबर 2026 तक RBL बैंक का शुद्ध एडवांस यानी वितरित कर्ज सालाना आधार पर 42% बढ़कर ₹1.42 लाख करोड़ हो गया. वहीं, कुल जमा राशि 34% की बढ़ोतरी के साथ ₹1.56 लाख करोड़ पर पहुंच गई.
रिटेल एडवांस 32% बढ़कर ₹79,465 करोड़ रहा. इसमें सुरक्षित रिटेल कर्ज (Secured Retail Advances) 52% बढ़कर ₹51,933 करोड़ हो गया. दूसरी ओर, असुरक्षित रिटेल कर्ज (Unsecured Retail Advances) में 6% की वृद्धि हुई और यह ₹27,532 करोड़ पर पहुंच गया. थोक कर्ज (Wholesale Advances) 56% बढ़कर ₹62,849 करोड़ रहा, जबकि कमर्शियल बैंकिंग एडवांस में 47% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
जमा राशि में मजबूत वृद्धि के बावजूद बैंक का करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट (CASA) अनुपात घटकर 27.2% रह गया. हालांकि, CASA जमा सालाना आधार पर 14% बढ़कर ₹42,526 करोड़ हो गई. ₹3 करोड़ से कम की जमा राशि वाली श्रेणी में जमा 16% बढ़कर ₹68,877 करोड़ रही. इसका कुल जमा राशि में हिस्सा 44% था.
RBL बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आर. सुब्रमण्यकुमार ने कहा कि तिमाही के दौरान बैंक की परिसंपत्तियों और देनदारियों, दोनों में वृद्धि दर्ज की गई. उन्होंने बताया कि विदेशी मुद्रा में गैर-निवासी जमा (FCNR Deposits) जुटाने से बैंक की फंडिंग स्थिति मजबूत हुई है. इससे भविष्य में कारोबार बढ़ाने के लिए बैंक को अतिरिक्त लचीलापन मिला है.
एसेट क्वालिटी में सुधार, NPA घटा
RBL बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ है. वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बैंक का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) अनुपात घटकर 1.02% रह गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 2.32% था.
इसी तरह, नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NNPA) अनुपात भी 0.57% से घटकर 0.29% पर आ गया. तकनीकी राइट-ऑफ सहित प्रोविजन कवरेज रेशियो 95.31% रहा.
हालांकि, इस दौरान क्रेडिट कॉस्ट में बढ़ोतरी हुई. यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹503 करोड़ से बढ़कर ₹771 करोड़ हो गई. क्रेडिट कॉस्ट रेशियो भी 0.54% से बढ़कर 0.63% पर पहुंच गया.
कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो में गिरावट
सितंबर 2026 के अंत में बैंक का कुल कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 30.1% रहा, जो जून 2026 के अंत में 33.3% था. इसी अवधि में कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) अनुपात भी 32.2% से घटकर 29% पर आ गया. वहीं, तिमाही के दौरान बैंक का औसत लिक्विडिटी कवरेज रेशियो 148% रहा.
कुल मिलाकर, RBL बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मुनाफे, ब्याज आय और कर्ज वितरण के मोर्चे पर मजबूत वृद्धि दर्ज की. साथ ही, बैंक के खराब कर्ज के अनुपात में कमी आई है. हालांकि, क्रेडिट कॉस्ट में बढ़ोतरी और कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो में गिरावट पर भी नजर रहेगी.
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2011 से 2023 के बीच भारत में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले. इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में गरीबी की दर शहरी क्षेत्रों से दोगुने से ज्यादा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में पिछले एक दशक में गरीबी कम करने के मोर्चे पर बड़ी प्रगति हुई है, लेकिन आगे इस रफ्तार को बनाए रखना आसान नहीं होगा. विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की गरीबी और समानता रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 4.20 डॉलर प्रतिदिन की आय सीमा के आधार पर गरीबी दर 2026 में अनुमानित 14.2 फीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 फीसदी पर आ सकती है. हालांकि, रोजगार की गुणवत्ता, कम आय और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी की अधिकता अब भी बड़ी चुनौतियां हैं.
2011 से 2023 के बीच गरीबी में बड़ी गिरावट
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, निम्न मध्यम आय वाले देशों के लिए निर्धारित गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली भारत की आबादी का हिस्सा 2011 में 57.7 फीसदी था. यह 2023 में घटकर 16.1 फीसदी रह गया. इस दौरान करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले.
अत्यंत गरीबी के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है. क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर 3 डॉलर प्रतिदिन की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा के अनुसार, भारत में अत्यंत गरीब आबादी का हिस्सा 2011 के 27.1 फीसदी से घटकर 2023 में 2.6 फीसदी रह गया.
हालांकि, ऊंची आय सीमा के आधार पर तस्वीर अब भी चिंताजनक है. रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारत की करीब 80 फीसदी आबादी 8.30 डॉलर प्रतिदिन की उच्च मध्यम आय वाले देशों की गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रही थी.
रोजगार और सरकारी योजनाओं से मिली मदद
विश्व बैंक ने गरीबी में कमी के पीछे कई प्रमुख कारण बताए हैं. इनमें लोगों के उपभोग खर्च में बढ़ोतरी, रोजगार के अवसरों का विस्तार, महिलाओं की रोजगार में बढ़ती भागीदारी और खाद्य सब्सिडी समेत सामाजिक सहायता योजनाओं का विस्तार शामिल है.
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक, ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स सेवाओं के विस्तार से बड़ी संख्या में रोजगार पैदा हुए हैं. हालांकि, इन क्षेत्रों में मिलने वाले ज्यादातर काम कम कौशल वाले हैं. इसके अलावा, मुफ्त खाद्यान्न और सामाजिक सहायता योजनाओं से लोगों को राहत मिली है. इससे उनके पास गैर-खाद्य वस्तुओं पर खर्च करने के लिए अधिक पैसा बचा है.
ग्रामीण भारत में अब भी ज्यादा गरीबी
गरीबी में कमी के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दर 19.3 फीसदी थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.6 फीसदी रही.
उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले राज्यों में गरीब आबादी का बड़ा हिस्सा केंद्रित है. इन राज्यों की हिस्सेदारी देश की कुल गरीब आबादी में करीब 57 फीसदी थी.
बच्चों और कम शिक्षित लोगों में भी गरीबी की दर अधिक पाई गई. 0 से 14 वर्ष की उम्र के करीब 21.8 फीसदी लोग 4.20 डॉलर प्रतिदिन की आय सीमा से नीचे जीवनयापन कर रहे थे. वहीं, 15 से 64 वर्ष की उम्र के लोगों में यह दर 14.4 फीसदी थी.
शिक्षा के स्तर के आधार पर भी बड़ा अंतर सामने आया. 16 वर्ष या उससे अधिक उम्र के ऐसे लोगों में गरीबी दर 21.3 फीसदी थी, जिन्होंने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी. इसके मुकाबले उच्च शिक्षा या माध्यमिक शिक्षा के बाद की पढ़ाई करने वाले लोगों में यह दर 7.4 फीसदी थी.
रोजगार बढ़े, लेकिन कमाई में नहीं हुआ खास सुधार
रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या करीब 13.4 करोड़ बढ़ी. यह कामकाजी उम्र की आबादी में हुई बढ़ोतरी से लगभग दोगुनी थी. इस वृद्धि में ग्रामीण महिलाओं का वेतन वाले कामों में शामिल होना और परिवार में कमाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ना अहम रहा.
हालांकि, रोजगार की संख्या बढ़ने का फायदा वास्तविक कमाई में बड़े सुधार के रूप में नहीं दिखा. रिपोर्ट के मुताबिक, वास्तविक कमाई लगभग पहले के स्तर पर बनी रही. इसकी एक वजह यह है कि रोजगार के ज्यादातर नए अवसर ऐसे क्षेत्रों में पैदा हुए, जहां उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है.
युवाओं में बेरोजगारी भी चिंता का विषय बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में युवाओं की बेरोजगारी दर 14.6 फीसदी थी, जो वित्त वर्ष 2027 की इसी तिमाही में बढ़कर 15.9 फीसदी हो गई. ग्रामीण युवा महिलाओं में यह वृद्धि खास तौर पर देखी गई.
टिकाऊ गरीबी उन्मूलन के लिए जरूरी हैं बेहतर रोजगार
मदन सबनवीस के मुताबिक, गरीबी में लगातार और टिकाऊ कमी लाने के लिए अधिक रोजगार पैदा करना जरूरी है. उनका कहना है कि जब लोगों के पास काम नहीं होता, तो उन्हें नकद सहायता और अन्य सरकारी मदद पर निर्भर रहना पड़ता है. ऐसी सहायता लंबे समय तक जारी रखना आर्थिक रूप से कितना टिकाऊ होगा, यह भी एक अहम सवाल है.
उन्होंने आगाह किया कि यदि लोगों को मिलने वाली सहायता बंद हो जाती है और उनके पास स्थायी आय का स्रोत नहीं होता, तो वे दोबारा गरीबी के दायरे में आ सकते हैं.
गरीबी के आकलन में भी हो सकती है चुनौती
विश्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि गरीबी के ताजा अनुमानों में जीवन स्तर में वास्तविक सुधार के साथ-साथ मापने के तरीकों में बदलाव का असर भी शामिल हो सकता है. इसके अलावा, सर्वेक्षणों में अमीर परिवारों के उपभोग का पूरा आकलन नहीं हो पाने के कारण आय और उपभोग की असमानता वास्तविक स्तर से कम दिखाई दे सकती है.
इस तरह, भारत ने गरीबी घटाने में बड़ी उपलब्धि हासिल की है, लेकिन आगे की चुनौती केवल गरीबी रेखा से लोगों को ऊपर लाने तक सीमित नहीं है. स्थायी रोजगार, बेहतर वेतन, कौशल विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में आय के अवसर बढ़ाना गरीबी में लंबे समय तक कमी बनाए रखने के लिए अहम होगा
विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर 20% नकद जमा की अनिवार्यता और 20 लाख डॉलर की सीमा को लेकर बैंकों ने RBI से नियमों में बदलाव की मांग की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय बैंकों ने विदेशी मुद्रा से जुड़े नए नियमों में राहत के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का रुख किया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों ने कुछ करेंसी डेरिवेटिव सौदों पर 20% नकद जमा करने की अनिवार्यता के बदले वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही उन्होंने 20 लाख डॉलर की सीमा हटाने और विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज के ब्याज भुगतान की हेजिंग पर नियमों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.
RBI ने 10 अक्टूबर को रुपये पर दबाव कम करने के उद्देश्य से ये उपाय घोषित किए थे. ऊंची तेल कीमतों और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच कंपनियों की ओर से भविष्य में डॉलर खरीदने की बढ़ती मांग रुपये पर दबाव डाल रही थी.
20% कैश जमा के बदले सीधे शुल्क का प्रस्ताव
नए नियमों के तहत बैंकों को चालू खाते से जुड़े जोखिमों की हेजिंग के लिए किए जाने वाले कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के अनुमानित मूल मूल्य (नॉशनल वैल्यू) का 20% नकद जमा के रूप में अलग रखना होगा.
बैंकों ने उद्योग संगठन फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FEDAI) के माध्यम से इस व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. वे चाहते हैं कि नकद जमा की अनिवार्यता के बजाय कंपनियों से एक निश्चित शुल्क लिया जाए, जो फॉरवर्ड डॉलर या अन्य डेरिवेटिव के जरिए हेजिंग करती हैं.
बैंकों का तर्क है कि सीधे शुल्क से हेजिंग की लागत तो बढ़ेगी, लेकिन उनकी ट्रेजरी गतिविधियों में नकदी नहीं फंसेगी. इस अतिरिक्त लागत का बोझ कंपनियों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि बैंक इसे अपने कॉरपोरेट ग्राहकों से वसूल सकते हैं.
20 लाख डॉलर की सीमा हटाने की मांग
बैंकों ने 20 लाख डॉलर की उस सीमा को हटाने की भी मांग की है, जिसके ऊपर संबंधित सौदों पर नकद जमा की शर्त लागू होती है. उनका कहना है कि कंपनियां बड़े हेजिंग सौदों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इस सीमा से बचने की कोशिश कर सकती हैं.
ऐसे मामलों की निगरानी करना बैंकों के लिए मुश्किल हो सकता है. रॉयटर्स के मुताबिक, बैंक अधिकारियों ने कहा कि कई छोटे सौदों के जरिए नियमों से बचने की कोशिश की पहचान करना आसान नहीं होगा. इसलिए बैंक इस सीमा को लागू करने के तरीके पर भी स्पष्टता चाहते हैं.
विदेशी मुद्रा कर्ज के ब्याज भुगतान पर भी स्पष्टीकरण मांगा
बैंकों ने RBI से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज पर ब्याज भुगतान के जोखिम से बचाव के लिए किए गए हेजिंग सौदे भी नए नियमों के दायरे में आएंगे या नहीं.
नियमों में विदेशी कर्ज के मूलधन के भुगतान से जुड़ी हेजिंग को शामिल नहीं किया गया है. हालांकि, ब्याज भुगतान के लिए की जाने वाली हेजिंग पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण बैंक केंद्रीय बैंक से मार्गदर्शन चाहते हैं.
रुपये को स्थिर करने के लिए RBI के कदम
RBI के नए उपायों का उद्देश्य कुछ प्रकार की करेंसी हेजिंग को महंगा बनाकर कंपनियों की फॉरवर्ड डॉलर की मांग कम करना और रुपये पर दबाव घटाना है. केंद्रीय बैंक की घोषणा के बाद सोमवार को रुपये में करीब 1% की मजबूती दर्ज की गई.
इसके अलावा, RBI ने तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों को केंद्रीय बैंक के जरिए सीधे डॉलर खरीदने की सुविधा देने के लिए एक विशेष व्यवस्था भी शुरू की है. इससे इन कंपनियों की डॉलर खरीद का कुछ हिस्सा हाजिर विदेशी मुद्रा बाजार से हटाया जा सकेगा. बैंकों की मांग पर RBI का फैसला अहम होगा, क्योंकि इससे कंपनियों के लिए मुद्रा जोखिम से बचाव की लागत और बैंकों की नकदी प्रबंधन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती से भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने का अनुमान है. IMF ने वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% किया, जबकि वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया संघर्ष और महंगाई का जोखिम बरकरार है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है. ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 और 2028 में भारत की GDP ग्रोथ 7% रहने की उम्मीद है. पहले FY27 के लिए 6.4% और FY28 के लिए 6.7% वृद्धि का अनुमान था. IMF के इस आकलन को घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से समर्थन मिला है. इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.1% किया था. विश्व बैंक ने भी पिछले सप्ताह इसी वित्त वर्ष के लिए 7.1% वृद्धि का अनुमान जताया था.
घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र से सहारा
IMF के अनुसार, भारत की आर्थिक रफ्तार मजबूत बनी हुई है. बड़े घरेलू बाजार, अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति और लगातार हो रहे संरचनात्मक सुधारों से भी विकास की संभावनाओं को बल मिल रहा है. घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे सकती है.
वैश्विक ग्रोथ के अनुमान में मामूली बढ़ोतरी
IMF ने 2026 के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर का अनुमान 3% से बढ़ाकर 3.1% किया है. हालांकि, 2027 के लिए इसे 3.4% पर बरकरार रखा गया है. 2026 में विकसित अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ 2.1% रहने का अनुमान है, जो पहले 1.7% था. इसके उलट, उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए अनुमान 3.8% से घटाकर 3.7% कर दिया गया है.
देशों की बात करें तो जर्मनी की ग्रोथ का अनुमान 0.7% से बढ़ाकर 1.3% और ब्रिटेन का 1% से बढ़ाकर 1.3% किया गया है. चीन के लिए 2026 और 2027 के अनुमान क्रमशः 4.5% और 4% हैं. वहीं, 2026 में ब्राजील की अर्थव्यवस्था 2.2% और रूस की 0.9% बढ़ने का अनुमान है.
पश्चिम एशिया संघर्ष से महंगाई का खतरा
IMF ने चेताया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. तनाव लंबा खिंचने पर महंगाई बढ़ने और वैश्विक आर्थिक विकास धीमा पड़ने का जोखिम है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन, इराक, कुवैत और कतर की अर्थव्यवस्थाओं पर ऊर्जा उत्पादन और ढुलाई में रुकावटों का गंभीर असर पड़ सकता है. इन देशों में 2026 के दौरान आर्थिक संकुचन का अनुमान है. सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था के लिए भी अनुमान कमजोर हुआ है. जुलाई में 1.7% वृद्धि की उम्मीद के मुकाबले अब 3.3% गिरावट का अनुमान जताया गया है.
IMF की मुख्य अर्थशास्त्री सिलवाना टेनरेरो के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव लंबा चलने से महंगाई बढ़ सकती है और ग्रोथ पर दबाव पड़ सकता है. सरकारों की कमजोर वित्तीय स्थिति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिलने वाले संभावित लाभ को लेकर अनिश्चितता और गंभीर मौसमी घटनाएं भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम हैं.
नीति-निर्माताओं के सामने दोहरी चुनौती
IMF के मुताबिक, संकट का असर देशों पर उनकी ऊर्जा निर्भरता और संघर्ष से दूरी के आधार पर अलग-अलग हो सकता है. ऐसे में सरकारों को महंगाई, कर्ज और वित्तीय जोखिमों से निपटने के साथ बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने पर भी ध्यान देना होगा.
भारत के लिए बढ़ा हुआ ग्रोथ अनुमान घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं आगे भी आर्थिक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं.
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली. सेंसेक्स 547 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी 157 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार मंगलवार, 13 अक्टूबर को कई घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच कारोबार करेगा. सोमवार को बाजार में शुरुआती तेजी के बावजूद आखिरी घंटों में बिकवाली हावी रही. आज गिफ्ट निफ्टी में तेजी से बाजार को शुरुआती सहारा मिलने की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों की सतर्कता बनी रह सकती है. इसके अलावा, सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 फीसदी पहुंचने से भी बाजार की धारणा प्रभावित हो सकती है. ऐसे में निवेशकों की नजर गिफ्ट निफ्टी, एशियाई बाजारों, कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों के रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी.
गिफ्ट निफ्टी में तेजी, क्या आज हरे निशान में खुलेगा बाजार?
मंगलवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 22,423 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. यह पिछले संदर्भ स्तर से करीब 40-50 अंक ऊपर था. इससे भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक शुरुआत के संकेत मिले. हालांकि, शुरुआती संकेतों के बावजूद बाजार में तेजी टिकेगी या नहीं, यह वैश्विक बाजारों के रुख और घरेलू निवेशकों की खरीदारी पर निर्भर करेगा. बाजार के लिए चिंता की बात यह है कि एशियाई बाजारों में मंगलवार सुबह तेज गिरावट देखने को मिली. वहीं, अमेरिकी बाजारों में सोमवार को मिला-जुला कारोबार रहा. पश्चिम एशिया में तनाव, महंगे कच्चे तेल और महंगाई से जुड़ी चिंताओं के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.
कल शेयर बाजार में क्या हुआ था?
सोमवार, 12 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ. कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 400 अंक चढ़ा था, लेकिन बाद में बिकवाली बढ़ने से बाजार की बढ़त खत्म हो गई. बीएसई का सेंसेक्स 547.65 अंक यानी 0.76 फीसदी गिरकर 71,924.68 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 950 अंक नीचे आ गया. वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 भी 157.10 अंक यानी 0.70 फीसदी फिसलकर 22,363.35 पर बंद हुआ.
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल 7 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 23 में गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी 50 के 13 शेयरों में तेजी रही, 36 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए और एक शेयर में कोई बदलाव नहीं हुआ.
पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली बाजार पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारक रहे. आईटी और एफएमसीजी शेयरों में कमजोरी ने भी प्रमुख सूचकांकों की गिरावट में योगदान दिया.
एशियाई बाजारों में गिरावट, कोस्पी और निक्केई दबाव में
मंगलवार सुबह एशियाई बाजारों में बिकवाली देखने को मिली. दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में करीब 4.3 फीसदी गिर गया, जबकि जापान का निक्केई 225 करीब 2.3 फीसदी नीचे कारोबार करता दिखा. दक्षिण कोरिया के कोस्डैक में भी तेज गिरावट दर्ज की गई.
अमेरिकी टेक शेयरों में कमजोरी का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया. जापान और दक्षिण कोरिया की कई टेक्नोलॉजी तथा सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली. क्षेत्रीय बाजारों में कमजोरी के बीच भारतीय निवेशक भी सतर्क रह सकते हैं.
कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती महंगाई बनी चिंता
कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम जोखिम बनी हुई हैं. सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.8 फीसदी बढ़कर 106.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था. मंगलवार सुबह इसमें कुछ नरमी आई और ब्रेंट क्रूड करीब 106.10 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में तेल की कीमतें ऊंची रहने से आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव पड़ सकता है और कंपनियों की लागत में इजाफा हो सकता है. इससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंताएं भी बढ़ सकती हैं. महंगाई के मोर्चे पर भी बाजार के लिए संकेत उत्साहजनक नहीं हैं. भारत में सितंबर की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 फीसदी हो गई, जो अगस्त में 4.83 फीसदी थी. महंगाई में इस बढ़ोतरी से रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ सकती हैं.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार इस समय एक अहम मोड़ पर है. हालिया रिकवरी के बाद निवेशकों को आगे खरीदारी की उम्मीद थी, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार में तेजी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. विशेषज्ञों ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली को बाजार के लिए बड़ी चिंता बताया. उनके मुताबिक, केवल एक या दो कारोबारी सत्रों में तेजी आने से बाजार में ट्रेंड बदलने की पुष्टि नहीं की जा सकती.
आज किन शेयरों पर रहेगी नजर?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार, 13 अक्टूबर को HCL टेक्नोलॉजीज, RBL बैंक, ICICI प्रूडेंशियल AMC, IRCON इंटरनेशनल और नजारा टेक्नोलॉजीज समेत कई शेयर फोकस में रह सकते हैं. HCL टेक्नोलॉजीज ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 5,132 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही से 21.2 फीसदी अधिक है. कंपनी ने 12 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है और AI कंपनी Anthropic के साथ साझेदारी भी की है. RBL बैंक का सितंबर तिमाही का नेट प्रॉफिट तीन गुना से अधिक बढ़कर 481.7 करोड़ रुपये रहा. वहीं, ICICI प्रूडेंशियल AMC ने मुनाफे में 6.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की और 30 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया. IRCON इंटरनेशनल को ईस्ट सेंट्रल रेलवे से 862.46 करोड़ रुपये का EPC कॉन्ट्रैक्ट मिला है. नजारा टेक्नोलॉजीज में वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर हुए बदलावों के कारण भी निवेशकों की नजर रह सकती है. इन कंपनियों से जुड़े नतीजों और घोषणाओं के आधार पर शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
JIO के इश्यू का आकार करीब ₹37,000 करोड़ से घटकर ₹30,000 करोड़ रह गया है, वैल्यूएशन ₹10.3 लाख करोड़ और ग्रे-मार्केट प्रीमियम ₹50 पर आ गया है. मस्क के चार दिनों तक चले हमले में रिलायंस ग्रुप के प्रमुख को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहे जाने के बाद, भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की तैयारी में लगा यह इश्यू हुंडई से आगे निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
एंकर निवेशक निभा रहे हैं अहम भूमिका, वैश्विक फंड छूट की मांग कर रहे हैं. भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम (IPO) का आकार घटा दिया गया है. हालांकि, इसकी कीमत अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी से कम नहीं रखी जा रही है.
सौदे से परिचित लोगों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स (JIO) 21 अक्टूबर को अपना इश्यू खुलने पर आम निवेशकों से करीब ₹26,000 करोड़ जुटाएगी. बैंकरों को ₹36,000-38,000 करोड़ जुटाए जाने की उम्मीद थी, जबकि पहले की रिपोर्टों में इश्यू का आकार ₹37,700 करोड़ बताया गया था. इस आकार के साथ यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता था. इश्यू के आकार में ₹6,000 करोड़ से ₹7,000 करोड़ तक की कटौती की गई है, जो कुल इश्यू का करीब 20% है.
कर्मचारी और शेयरधारक कोटे को जोड़ने के बाद कुल राशि लगभग ₹30,200 करोड़ या करीब 3.1 अरब डॉलर बैठती है. यह आंकड़ा सोच-समझकर चुना गया है. इससे जियो यह दावा कर सकती है कि उसका इश्यू अक्टूबर 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,870 करोड़ के आईपीओ से थोड़ा बड़ा है, जिसे भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बताया गया था.
हालांकि, डॉलर में तस्वीर अलग है. हुंडई ने करीब 3.3 अरब डॉलर जुटाए थे. डॉलर के मुकाबले रुपया करीब ₹97 पर होने के कारण जियो का तथाकथित रिकॉर्ड इससे कम रह जाता है. वैश्विक निवेशकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पैमाने पर भारत का सबसे बड़ा आईपीओ उस इश्यू से छोटा है, जिसे पीछे छोड़ने का वह दावा कर रहा है.
160 अरब डॉलर से घटकर ₹10.3 लाख करोड़ का वैल्यूएशन
जियो के शेयर का इश्यू प्राइस ₹1,119 तय किया गया है. इससे कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹10.3 लाख करोड़ या लगभग 106 अरब डॉलर बैठता है.
एक समय जियो का वैल्यूएशन 160 अरब डॉलर तक बताया जा रहा था. पिछले सप्ताह तक बाजार की रिपोर्टों में कहा जा रहा था कि जियो, भारती एयरटेल की तुलना में प्रीमियम वैल्यूएशन की मांग करेगी. लेकिन रोडशो से परिचित लोगों के अनुसार, वैश्विक फंडों ने एयरटेल की तुलना में करीब 30% की छूट की मांग की. उन्होंने बैंकरों से कहा कि वे जियो के लिए अधिक कीमत चुकाने के बजाय रिलायंस के शेयर खरीदना पसंद करेंगे. कारोबार शुरू होने से पहले ही वैल्यूएशन में करीब 54 अरब डॉलर की कमी आ चुकी है.
ग्रे मार्केट में भी उत्साह ठंडा पड़ गया है. पहले की रिपोर्टों में ग्रे-मार्केट प्रीमियम करीब ₹160 बताया गया था. अब यह लगभग ₹50 रह गया है, जो इश्यू प्राइस से 5% से भी कम अधिक है.
एंकर निवेशकों के भरोसे आईपीओ
₹26,000 करोड़ के इश्यू में से करीब ₹8,000 करोड़, यानी लगभग एक-तिहाई हिस्सा, सार्वजनिक निर्गम खुलने से पहले एंकर निवेशकों को आवंटित किया जाएगा. संस्थागत निवेशकों से बाकी बुक में केवल करीब ₹5,000 करोड़ की राशि है.
पहले दिन से ही करीब एक-तिहाई राशि के लिए प्रतिबद्धता मिलने के कारण सब्सक्रिप्शन के आंकड़े अच्छे दिखाई देंगे, चाहे खुदरा निवेशक कैसी भी प्रतिक्रिया दें. शेयरधारक कोटे के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्सेदारी से भी इश्यू को खरीदारों का एक अतिरिक्त समूह मिल जाता है.
2020 के निवेशकों को फिर नुकसान
2020 में जियो में 20.3 अरब डॉलर का निवेश करने वाले 13 वैश्विक निवेशकों को कम कीमत के कारण एक बार फिर सबसे अधिक नुकसान हो रहा है. इनमें मेटा, गूगल, सऊदी अरब का पीआईएफ, केकेआर, सिल्वर लेक, विस्टा, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, जनरल अटलांटिक, एल कैटरटन, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम शामिल हैं.
जियो के ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस में दिए गए आवंटन के विश्लेषण के अनुसार, ₹1,119 प्रति शेयर की कीमत पर उनकी हिस्सेदारी का मूल्य करीब 34 अरब डॉलर है. छह वर्षों में यह उनके निवेश का 1.67 गुना है, यानी डॉलर में सालाना करीब 8.7% का रिटर्न.
केकेआर, पीआईएफ, सिल्वर लेक और विस्टा जैसे फंडों ने ₹549 प्रति शेयर की कीमत पर निवेश किया था. उनके लिए सालाना रिटर्न करीब 7.6% है. रुपये में ₹549 का निवेश लगभग दोगुना होकर ₹1,119 हो गया है. लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपया करीब ₹75 से गिरकर ₹97 पर आ गया है, जिससे उनके डॉलर में मिलने वाले रिटर्न में करीब 10 अरब डॉलर की कमी आई है. वहीं, ₹488 प्रति शेयर की कीमत पर निवेश करने वाले मेटा और गूगल का सालाना रिटर्न करीब 9.5-10% है.
रिलायंस की स्थिति इससे बिल्कुल अलग है. उसके अधिकांश शेयर ₹10 की कीमत पर हासिल किए गए थे. कम की गई कीमत पर भी उसकी हिस्सेदारी का मूल्य करीब ₹6.6 लाख करोड़ या लगभग 69 अरब डॉलर है.
जन्मदिन के करीब इश्यू बंद, बुधवार को होगी लिस्टिंग
यह इश्यू बुधवार, 21 अक्टूबर से शुक्रवार, 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा. इश्यू बंद होने का दिन मुकेश अंबानी के जुड़वां बच्चों आकाश और ईशा का 35वां जन्मदिन है. आकाश रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन हैं. शेयरों की लिस्टिंग बुधवार, 28 अक्टूबर को होने की संभावना है.
उस समय तक ऑर्डर बुक की स्थिति कैसी रहती है, इसी पर निर्भर करेगा कि जश्न मनाने की कोई वजह होगी या नहीं.
मस्क का चार दिनों तक हमला
इश्यू के आकार में कटौती ऐसे समय हुई है, जब जियो का रोडशो जारी रहने के दौरान एलन मस्क ने लगातार चार दिनों तक एक्स पर मुकेश अंबानी को निशाना बनाया.
7 अक्टूबर को मस्क ने लिखा कि स्टारलिंक को “कुछ उद्योगपतियों द्वारा भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकारवादी पकड़ बनाए रखने के लिए रोका जा रहा है.” उन्होंने इसे “भारत के लोगों के खिलाफ अपराध” बताया. अगले दिन उन्होंने उस व्यक्ति का नाम लिया, जिसका वह जिक्र कर रहे थे. उन्होंने पूछा, “क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?”
शुक्रवार को उन्होंने ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ के नाम एक काल्पनिक खुला पत्र पोस्ट किया. इसमें लिखा था, “यह न समझ पाने के लिए कृपया मेरी विनम्र माफी स्वीकार करें कि आप ही भारत के असली बॉस हैं.” उन्होंने अंबानी पर “भारत के महान लोगों का एकाधिकारवादी शोषण जारी रखने” को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया. इसके बाद उन्होंने पूछा, “क्या फिर भी आप स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देने पर विचार करेंगे?”
शनिवार को उन्होंने किफायती कीमतों का वादा किया और कहा, “अंबानी का मुनाफा कम होगा, लेकिन उनका कारोबार बंद नहीं होने वाला.” जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस बहस में शामिल हुए, तो मस्क ने जवाब दिया, “यह वाकई चिंताजनक है.”
सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है. संचार मंत्रालय ने अपने सैटेलाइट नियमों को “निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण” बताया और आरोपों को “निराधार और गलत धारणा पर आधारित” करार दिया. मंत्रालय ने कहा कि जियो के अपने सैटेलाइट कारोबार सहित लाइसेंस प्राप्त तीनों ऑपरेटर एक ही सुरक्षा मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं. दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत “किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता.” रिलायंस ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
किसी भी निवेशक ने यह नहीं कहा है कि इन पोस्ट से उनका निवेश संबंधी फैसला बदला है. लेकिन लगातार चार दिनों तक, जब जियो के बैंकर वैश्विक फंडों से कंपनी के बाजार में दबदबे के लिए अधिक कीमत चुकाने को कह रहे थे, तब दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एक्स पर सवाल उठा रहे थे कि यह दबदबा हासिल कैसे किया गया.
इसका क्या मतलब है
जियो के आईपीओ की योजना एक बड़े बयान के रूप में बनाई गई थी: भारत की सबसे बड़ी कंपनी, देश के सबसे बड़े आईपीओ के साथ और ऐसा वैल्यूएशन जो वैश्विक टेक कंपनियों को टक्कर दे सके. लेकिन अब बाजार में जो इश्यू आ रहा है, उसका आकार छोटा है, कीमत कम है, ग्रे-मार्केट प्रीमियम सीमित है और बुक को बड़े पैमाने पर एंकर निवेशकों का समर्थन मिला हुआ है.
जियो रुपये के लिहाज से सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड बनाने का दावा अब भी कर सकती है. लेकिन जिन वैश्विक निवेशकों से उसके वैल्यूएशन को मान्यता मिलने की उम्मीद थी, उन्होंने इसके बजाय वैल्यूएशन को नीचे धकेल दिया है.
नोट: रिटर्न शुल्क और करों से पहले के सकल रिटर्न हैं. इनकी गणना जियो प्लेटफॉर्म्स के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (19 जून, 2026) और ईसीबी की डॉलर/रुपया विनिमय दरों के आधार पर की गई है. डॉलर से जुड़े आंकड़ों के लिए ₹96.73 प्रति डॉलर की दर का इस्तेमाल किया गया है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
नायक ने इस इस्तीफे के पीछे पूर्णकालिक परिचालन भूमिका की व्यस्तताओं और अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की इच्छा का हवाला दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डिजिटल मार्केटिंग कंपनी YAAP Digital के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) राज नायक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इसी साल जुलाई में कंपनी के संस्थापक, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. अतुल हेगड़े के निधन के बाद राज नायक को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. नायक ने इस्तीफे के पीछे पूर्णकालिक परिचालन भूमिका की व्यस्तताओं और अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की इच्छा का हवाला दिया है.
पूर्णकालिक भूमिका की व्यस्तताओं का दिया हवाला
अपने इस्तीफे के पत्र में राज नायक ने कहा कि उन्होंने काफी विचार-विमर्श के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है. उनके मुताबिक, पूर्णकालिक परिचालन भूमिका की जिम्मेदारियां और काम का दबाव इस समय उनकी अपेक्षा से अधिक है.
नायक ने इसे एक कठिन निर्णय बताते हुए कहा कि उन्हें कंपनी की टीम के साथ काम करने का अनुभव अच्छा रहा है. उन्होंने YAAP Digital के भविष्य को लेकर भरोसा भी जताया. अब वह अपने उद्यमशीलता से जुड़े प्रयासों और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर अधिक ध्यान देना चाहते हैं.
जुलाई में संभाली थी कंपनी की कमान
YAAP Digital Limited ने 7 जुलाई 2026 को संस्थापक, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. अतुल हेगड़े के निधन के बाद राज नायक को चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने की घोषणा की थी. नायक की नियुक्ति इसी साल जुलाई में हुई थी. उनके इस्तीफे के बाद कंपनी के नेतृत्व में आगे क्या बदलाव होगा, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई घोषणा नहीं की गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई को ध्यान में रखते हुए वास्तविक ब्याज दर कम से कम 1 फीसदी बनाए रखने के लिए रेपो रेट को बढ़ाकर 6.5-7 फीसदी तक करना पड़ सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में आने वाली तिमाहियों में महंगाई दर बढ़कर 6-7 फीसदी तक पहुंच सकती है. Systematix Institutional Equities की एक रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेपो रेट में मौजूदा स्तर से 100-150 बेसिस पॉइंट तक की और बढ़ोतरी कर सकता है. रिपोर्ट में कंपनियों की बढ़ती लागत, घरेलू स्तर पर महंगाई की ऊंची उम्मीदों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों को महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह बताया गया है.
महंगाई बढ़ने का क्यों है खतरा?
Systematix की रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई का जोखिम RBI के मौजूदा आकलन से अधिक हो सकता है. सितंबर 2026 में परिवारों की औसत महंगाई संबंधी उम्मीदें 9.1 फीसदी रहीं, जो मौजूदा महंगाई दर से काफी अधिक हैं. इससे संकेत मिलता है कि लोगों को आने वाले समय में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ने की आशंका है.
RBI का महंगाई प्रसार सूचकांक (Inflation Diffusion Index) भी संकेत देता है कि कीमतों का दबाव अब ज्यादा श्रेणियों में फैल रहा है. इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में गैर-वित्तीय कंपनियों की इनपुट लागत सालाना आधार पर करीब 40 फीसदी बढ़ी.
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. बढ़ती लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाने के कारण कंपनियों के सकल मार्जिन में 650-800 बेसिस पॉइंट की कमी आई. इससे कंपनियों की लाभप्रदता पर दबाव बढ़ा है.
मानसून और कच्चे तेल की कीमतें भी चिंता
रिपोर्ट में महंगाई बढ़ने के पीछे सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों को भी अहम बताया गया है. दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी, अल नीनो की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.
इसके अलावा, पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण पैदा हुए महंगाई के असर को कम करने में खाद्य पदार्थों, ऊर्जा और उर्वरकों पर सरकारी सब्सिडी की भूमिका रही है. तेल विपणन कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई भी कीमतों के दबाव को सीमित करने में मदद करती है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सरकार की ओर से मिलने वाली वित्तीय सहायता कम होती है, तो महंगाई और बढ़ सकती है.
रेपो रेट 6.5-7% तक जाने का अनुमान
RBI ने हाल में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया था. हालांकि, Systematix का मानना है कि महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने के लिए यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं हो सकती.
रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई को ध्यान में रखते हुए वास्तविक ब्याज दर कम से कम 1 फीसदी बनाए रखने के लिए रेपो रेट को बढ़ाकर 6.5-7 फीसदी तक करना पड़ सकता है. इसके लिए मौजूदा 5.50 फीसदी के स्तर से 100-150 बेसिस पॉइंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत हो सकती है.
यह रिपोर्ट का अनुमान है, RBI की ओर से घोषित नीतिगत फैसला नहीं. रेपो रेट को लेकर केंद्रीय बैंक का अगला कदम महंगाई के वास्तविक आंकड़ों और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% किया गया
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान पहले के 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया है. इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने महंगाई के अनुमान में भी संशोधन किया है. वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में महंगाई दर 6 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि पहले इसके 5.9 फीसदी रहने की संभावना जताई गई थी.
इस तरह आर्थिक विकास की संभावनाओं के साथ महंगाई का जोखिम भी बना हुआ है. यदि कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो RBI को ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है.
शेयर बाजार और बॉन्ड यील्ड पर पड़ सकता है असर
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहने और ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी से वित्तीय बाजारों पर दबाव पड़ सकता है. ऊंची ब्याज दरें शेयरों के मूल्यांकन को प्रभावित कर सकती हैं. वहीं, कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा होने और इनपुट लागत बढ़ने से उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है.
भारत की 10 साल की बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड करीब 7.24 फीसदी के स्तर पर है. रिपोर्ट के मुताबिक, यदि महंगाई अनुमान से ज्यादा बढ़ती है और RBI मौद्रिक नीति को सख्त करता है, तो बॉन्ड यील्ड 7.5 फीसदी से ऊपर जा सकती है. हालांकि, रेपो रेट में आगे कितनी बढ़ोतरी होगी, यह महंगाई के रुझान और RBI के नीतिगत आकलन पर निर्भर करेगा.
कंपनी इस विस्तार पर 550 करोड़ रुपये खर्च करेगी और 2027 तक प्लांट शुरू करने की योजना है. कारोबारी सत्र के दौरान शेयर में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज हुई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी सुजलॉन ग्रुप तमिलनाडु, गुजरात और कर्नाटक में विंड ब्लेड बनाने के लिए तीन नई फैक्ट्रियां स्थापित करने जा रही है. कंपनी इस विस्तार पर 550 करोड़ रुपये खर्च करेगी और 2027 तक प्लांट शुरू करने की योजना है. इन परियोजनाओं से करीब 3,000 प्रत्यक्ष और 12,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. इस घोषणा के बाद सोमवार को सुजलॉन एनर्जी के शेयर में भी तेजी देखने को मिली. कारोबारी सत्र के दौरान शेयर में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज हुई.
तीन राज्यों में होगा निवेश
सुजलॉन ग्रुप की योजना के मुताबिक, तमिलनाडु में नई फैक्ट्री स्थापित करने पर 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. वहीं, गुजरात और कर्नाटक में प्लांट लगाने के लिए कुल 350 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. कंपनी के को-फाउंडर गिरीश टांटी के अनुसार, इस निवेश के लिए आंतरिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा.
नई फैक्ट्रियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों की मदद से विंड ब्लेड का उत्पादन किया जाएगा. कंपनी का लक्ष्य उत्पादन प्रक्रिया को बेहतर बनाना, उत्पादों की गुणवत्ता पर नजर रखना और विनिर्माण के दौरान होने वाली गलतियों को कम करना है.
15,000 रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद
इन तीन परियोजनाओं से करीब 3,000 लोगों को सीधे और 12,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है. कंपनी के मुताबिक, इनसे पैदा होने वाले लगभग 80 फीसदी रोजगार ग्रामीण क्षेत्रों में हो सकते हैं.
नए प्लांट पवन ऊर्जा परियोजनाओं के नजदीक स्थापित किए जाएंगे. इससे विंड ब्लेड की ढुलाई में लगने वाला समय और लागत कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही, कंपनी को अपने मौजूदा ऑर्डर समय पर पूरे करने में भी सुविधा होगी.
विनिर्माण नेटवर्क का होगा विस्तार
सुजलॉन फिलहाल जैसलमेर, भुज, रतलाम, धुले और अनंतपुर में विंड ब्लेड बनाने वाली पांच फैक्ट्रियां संचालित कर रही है. तीन नए प्लांट शुरू होने के बाद कंपनी अपने विनिर्माण नेटवर्क और उत्पादन क्षमता का विस्तार करेगी. कंपनी के मुताबिक, उसका विनिर्माण नेटवर्क 18 फैक्ट्रियों तक पहुंचने की उम्मीद है.
पवन ऊर्जा उपकरणों की घरेलू मांग को पूरा करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिहाज से भी यह विस्तार अहम है. नई इकाइयों में AI और डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल कंपनी की स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक कदम होगा.
सुजलॉन एनर्जी के शेयर में तेजी
नए प्लांट और निवेश की घोषणा के बाद सोमवार को सुजलॉन एनर्जी के शेयर में तेजी दर्ज की गई. खबर लिखे जाने तक शेयर 5.24 फीसदी की बढ़त के साथ 39.57 रुपये पर कारोबार कर रहा था. हालांकि, इस तेजी के बावजूद शेयर के प्रदर्शन को लंबी अवधि के संदर्भ में देखना जरूरी है. खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सुजलॉन एनर्जी के शेयर में इस साल अब तक करीब 25 फीसदी की गिरावट आई थी. नए निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना से कंपनी के कारोबार पर क्या असर पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा.