शेयर बाजार पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का असर अब कम होता नजर आ रहा है. बुधवार को मार्केट तेजी के साथ बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
शेयर बाजार (Stock Market) में रौनक लौट आई है. बुधवार को बाजार हरे निशान पर बंद हुए. इस दौरान बीएसई सेंसेक्स में 377.75 और एनएसई निफ्टी में 150.20 अंकों की तेजी दर्ज की गई. आज यानी गुरुवार को भी मार्केट में तेजी बने रहने की उम्मीद है. इसकी दो वजह हैं, पहली - रिजर्व बैंक के रेपो रेट में वृद्धि के फैसले को बाजार ने पॉजिटिव सेंस में लिया है और दूसरी - अडानी ग्रुप के शेयरों ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है.
इनमें हैं तेजी के संकेत
मोमेंटम इंडिकेटर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस यानी MACD ने आज कुछ शेयरों में तेजी के संकेत दिए हैं. इसमें जयप्रकाश एसोसिएट, RBL बैंक, NCC, अरविंदो फार्मा और ग्लैंड फार्मा शामिल हैं. चलिए जल्दी से इन स्टॉक्स के पिछले प्रदर्शन पर भी नजर डाल लेते हैं. 10 रुपए से कम वाले Jaiprakash Associates के शेयर ने कल 6.74% की शानदार तेजी दर्ज की. बीते पांच दिनों में ये 3.83% ऊपर चढ़ चुका है. इसका 52 वीक का हाई लेवल 12.50 रुपए है.
ऐसा रहा है प्रदर्शन
RBL Bank Ltd का शेयर भी बुधवार को उछाल के साथ 166.70 रुपए पर बंद हुआ. पिछले 5 दिनों में इसने 10.76% और छह महीनों में 71.94% का रिटर्न दिया है. NCC Ltd का शेयर अपने 52 वीक के हाई लेवल 96.90 को जल्द ही छू सकता है. फिलहाल यह तेजी के साथ 94.55 रुपए पर ट्रेड कर रहा है. Aurobindo Pharma भी पिछले कारोबारी दिन बढ़त के साथ बंद होने वाले स्टॉक्स में शामिल है. बुधवार को यह 6.53% के उछाल के साथ 446 रुपए के लेवल पर पहुंच गया था. बीते 5 कारोबारी दिनों में इसने 7.94% का रिटर्न दिया है. Gland Pharma फिलहाल 1,332 रुपए पर ट्रेड कर रहा है और इसका पिछले पांच दिनों का प्रदर्शन भी अच्छा रहा है.
इनके आएंगे नतीजे
आज Hindalco Industries, Hindustan Petroleum Corporation, Life Insurance Corporation of India, Lupin, Zomato, Adani Total Gas, Aurobindo Pharma, Bajaj Consumer Care, Bombay Dyeing & Manufacturing Company, Devyani International, Force Motors, General Insurance Corporation of India, Greaves Cotton, Hindustan Aeronautics, Indian Railway Catering and Tourism Corporation, Jet Airways, Kalpataru Power Transmission, MRF, Natco Pharma, Page Industries, Pfizer, Sapphire Foods India, Suzlon Energy, United Breweries, Ujjivan Financial Services और Voltas के तिमाही आय के नतीजे आ सकते हैं. नतीजे कैसे रहते हैं, इस पर इन कंपनियों के स्टॉक्स की चाल निर्भर रहेगी. इसलिए आज इन पर भी नजर बनाए रखें.
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने बढ़ाई खरीदारी, रूस से करीब 20 लाख और पश्चिम एशिया से 23 लाख बैरल प्रतिदिन हुआ आयात
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का कच्चे तेल का आयात अक्टूबर में बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. ऊर्जा क्षेत्र की आसूचना कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने इस दौरान प्रतिदिन करीब 56 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया. भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने पश्चिम एशिया और रूस से तेल की खरीद बढ़ाई. अक्टूबर में पश्चिम एशिया से भारत को करीब 23 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की आपूर्ति हुई, जबकि रूस से आयात लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन रहा.
होर्मुज स्ट्रेट से आपूर्ति में सुधार का मिला फायदा
केप्लर के प्रमुख विश्लेषक निखिल दुबे के अनुसार, जहाज से जहाज के बीच तेल हस्तांतरण (Ship-to-Ship Transfer) बढ़ने से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते कच्चे तेल की आवाजाही आसान हुई. इससे सितंबर और अक्टूबर के दौरान खाड़ी देशों से आपूर्ति में सुधार आया और भारतीय रिफाइनरियों को तेल खरीदने के अधिक विकल्प मिले. हालांकि, नवंबर और दिसंबर में रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति में कुछ कमी आने की आशंका है.
रूसी तेल की लागत बढ़ने से खरीद पर पड़ सकता है असर
काला सागर क्षेत्र में हमलों के कारण माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है. इससे रूसी कच्चा तेल भारतीय खरीदारों के लिए महंगा हो सकता है. दूसरी ओर, खाड़ी देशों के आपूर्तिकर्ता भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धी कीमतों पर तेल उपलब्ध करा रहे हैं.
दुबे के मुताबिक, यदि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की आपूर्ति दोबारा बाधित होती है, तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियां अधिक परिवहन लागत के बावजूद रूसी तेल की खरीद बढ़ा सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 16 अक्टूबर को ग्राहम अधिनियम के तहत मिली छूट से कुछ भारतीय खरीदारों की रूसी तेल खरीद से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंताएं कम हो सकती हैं. इससे रिफाइनरी कंपनियों को खरीद संबंधी फैसले लेने में अधिक लचीलापन मिलेगा.
भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी तेल करता है आयात
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 फीसदी हिस्सा आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों के साथ-साथ आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत और परिवहन लागत भी देश के लिए महत्वपूर्ण हैं. यही वजह है कि भारत की तेल खरीद केवल भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि कीमत, माल ढुलाई खर्च और आपूर्ति की सुरक्षा जैसे व्यावसायिक पहलू भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं.
शुक्रवार को सेंसेक्स 308.49 अंक यानी 0.42 फीसदी चढ़कर 74,459.53 पर बंद हुआ था. वहीं, निफ्टी 116.35 अंक यानी 0.51 फीसदी की बढ़त के साथ 23,053.10 के स्तर पर पहुंच गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 2 नवंबर को कारोबारी सप्ताह की शुरुआत तेजी के साथ होने के संकेत मिल रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी शुरुआती कारोबार में करीब 170 अंकों की बढ़त के साथ 23,265 के स्तर पर पहुंच गया. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 2 फीसदी से अधिक की गिरावट से निवेशकों को राहत मिली है. ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है. इस बीच निवेशकों की नजर रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), जियो प्लेटफॉर्म्स, एनटीपीसी, वोडाफोन आइडिया और कोल इंडिया समेत कई कंपनियों के शेयरों पर रहेगी. दूसरी तिमाही के नतीजों और कारोबारी गतिविधियों के चलते इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है.
अमेरिका-ईरान बातचीत और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए जारी कूटनीतिक प्रयासों से बाजार की धारणा को सहारा मिल सकता है. ईरानी अधिकारियों और कतर के मध्यस्थों के बीच लगातार तीसरे दिन बातचीत हुई है. इससे कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बनी चिंताएं कम होने की उम्मीद है. हालांकि, बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी.
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, हालिया रिकवरी आगे भी जारी रह सकती है, लेकिन जब तक तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक मौजूदा तेजी को लंबी अवधि की मजबूती मानना जल्दबाजी होगी.
सोमवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड वायदा 2.20 फीसदी गिरकर 110.93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 102 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से आयात बिल और महंगाई के दबाव में राहत मिल सकती है.
निफ्टी के लिए 23,285 का स्तर अहम
तकनीकी नजरिए से निफ्टी के लिए 23,175 से 23,285 का दायरा अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है. HST वेल्थ के फाउंडर और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन के मुताबिक, निफ्टी का 23,000 के ऊपर पहुंचना बाजार में रिकवरी का सकारात्मक संकेत है. यदि इंडेक्स 23,285 के ऊपर टिकता है, तो यह 23,500 से 23,600 के स्तर तक जा सकता है. वहीं, गिरावट आने पर 23,000 और 22,750 से 22,800 के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है. बाजार में व्यापक तेजी की पुष्टि के लिए बैंक निफ्टी का 55,150 के ऊपर बंद होना भी जरूरी होगा.
इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज, जियो प्लेटफॉर्म्स, एनटीपीसी, वोडाफोन आइडिया, एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी, मुथूट फाइनेंस, बैंक ऑफ बड़ौदा, एफल 3आई, पीबी फिनटेक, कोल इंडिया, सीडीएसएल और नजारा टेक्नोलॉजीज के शेयर फोकस में रहेंगे. एनटीपीसी का दूसरी तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 39 फीसदी बढ़कर 7,030 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुनाफा 32 फीसदी बढ़कर 29,250 करोड़ रुपये रहा. जियो प्लेटफॉर्म्स का नेट प्रॉफिट 13.7 फीसदी बढ़कर 8,387 करोड़ रुपये पहुंच गया. मुथूट फाइनेंस का स्टैंडअलोन मुनाफा 27 फीसदी बढ़कर 2,977 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा का मुनाफा 35.8 फीसदी बढ़कर 6,531 करोड़ रुपये रहा. सीडीएसएल का नेट प्रॉफिट भी 24.3 फीसदी की बढ़त के साथ 174 करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी का मुनाफा 57 फीसदी बढ़कर 137 करोड़ रुपये रहा, हालांकि इसके नतीजे बाजार के अनुमानों से कमजोर रहे. वोडाफोन आइडिया को वेगा एसएएस के जरिए वोडाफोन ग्रुप में 16.2 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) से मंजूरी मिली है. एफल 3आई की इजरायली सब्सिडियरी ने करीब 42 करोड़ डॉलर में पेरियन नेटवर्क के अधिग्रहण का समझौता किया है. पीबी फिनटेक का मुनाफा 42.2 फीसदी बढ़कर 192 करोड़ रुपये रहा, लेकिन कंपनी का एबिटा बाजार के अनुमान से कम रहा. दूसरी ओर, कोल इंडिया ने अक्टूबर में 7.03 करोड़ टन कोयले की रिकॉर्ड सप्लाई की, जबकि नजारा टेक्नोलॉजीज ने अपनी ब्रिटेन स्थित सब्सिडियरी में 7.7 करोड़ डॉलर का निवेश किया है.
शुक्रवार को बाजार में रही थी तेजी
पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार, 30 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी दर्ज की गई थी. सेंसेक्स 308.49 अंक यानी 0.42 फीसदी चढ़कर 74,459.53 पर बंद हुआ था. वहीं, निफ्टी 116.35 अंक यानी 0.51 फीसदी की बढ़त के साथ 23,053.10 के स्तर पर पहुंच गया था. आईटी, फार्मा और दिग्गज कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला था.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत तमिलनाडु के 4,767 गांवों तक मांग के आधार पर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी. केंद्र की वित्तीय सहायता से ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आसान होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (Amended BharatNet Programme) के तहत तमिलनाडु में 5 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को फाइबर ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सब्सिडी को मंजूरी दी है. इस पहल का उद्देश्य राज्य के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार करना और डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है.
इस संबंध में शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित संचार भवन में डिजिटल भारत निधि (DBN), तमिलनाडु सरकार और तमिलनाडु फाइबरनेट कॉरपोरेशन (TANFINET) के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. इस समझौते के तहत भारतनेट नेटवर्क का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा.
समझौते में तमिलनाडु के 4,767 गांवों तक मांग के आधार पर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने का भी प्रावधान है. केंद्र की वित्तीय सहायता से नेटवर्क के अंतिम छोर तक विस्तार में तेजी आने और ग्रामीण एवं दूरदराज के इलाकों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है.
समझौता हस्ताक्षर समारोह में डिजिटल भारत निधि के प्रशासक श्यामल मिश्रा मौजूद रहे. तमिलनाडु के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल सेवा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अतुल आनंद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए. इस दौरान भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL), TANFINET, दूरसंचार विभाग (DoT) और डिजिटल भारत निधि के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे.
5 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को होगा फायदा
इस पहल से तमिलनाडु के 5 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को फाइबर ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. इससे ग्रामीण परिवारों को हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं का लाभ मिल सकेगा.
विस्तारित नेटवर्क के जरिए ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान और नागरिकों से जुड़ी अन्य डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है. इसके अलावा, 4,767 गांवों में मांग के आधार पर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की व्यवस्था से उन क्षेत्रों तक भी ब्रॉडबैंड सेवाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी, जहां अभी डिजिटल नेटवर्क की पहुंच सीमित है.
क्या है संशोधित भारतनेट कार्यक्रम?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 अगस्त 2023 को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंजूरी दी थी. इसका उद्देश्य मौजूदा भारतनेट नेटवर्क का उन्नयन, एकीकरण और विस्तार करना है. इस कार्यक्रम के तहत सभी ग्राम पंचायतों तक मजबूत और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के साथ-साथ मांग के आधार पर गांवों तक भी इंटरनेट सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
तमिलनाडु के साथ हुआ यह समझौता राज्य के नेतृत्व वाले मॉडल के जरिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में मदद करेगा. इसके तहत भारतनेट के बुनियादी ढांचे के इस्तेमाल के लिए केंद्र सरकार वित्तीय सब्सिडी उपलब्ध कराएगी.
ग्रामीण टेलीकॉम विस्तार में डिजिटल भारत निधि की भूमिका
डिजिटल भारत निधि (Digital Bharat Nidhi) को पहले यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF) के नाम से जाना जाता था. यह संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत काम करती है.
इसकी स्थापना भारतीय टेलीग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत 1 अप्रैल 2002 से प्रभावी हुई थी. दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत इसका नाम बदलकर डिजिटल भारत निधि कर दिया गया.
इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण, दूरदराज और ऐसे शहरी क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं की सार्वभौमिक पहुंच को बढ़ावा देना है, जहां इन सेवाओं की उपलब्धता सीमित है.
भारतनेट के अलावा डिजिटल भारत निधि 4G सैचुरेशन प्रोजेक्ट जैसी कई कनेक्टिविटी योजनाओं को भी समर्थन देती है. इसमें आकांक्षी जिलों के ऐसे इलाके जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र, हिमालयी और सीमावर्ती इलाके, द्वीप समूह तथा पूर्वोत्तर राज्यों में मोबाइल सेवाओं का विस्तार शामिल है.
तमिलनाडु के साथ हुआ यह समझौता डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करने के सरकार के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है.
सरकार का लक्ष्य डिजिटल खरीदारी को बढ़ावा देने, सप्लाई चेन मजबूत करने और छोटे खुदरा कारोबारियों को कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने FMCG कंपनियों और उद्योग जगत के अन्य हितधारकों से देश की 1.4 करोड़ किराना दुकानों को डिजिटल बनाने के प्रयासों में सहयोग करने की अपील की है. सरकार ONDC की DigiDukaan पहल के माध्यम से देश के पारंपरिक खुदरा कारोबार को मजबूत करने और उसे डिजिटल इकोसिस्टम से जोड़ने की दिशा में प्रयास तेज कर रही है.
इस सिलसिले में पीयूष गोयल ने नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में आयोजित उच्चस्तरीय CEO राउंडटेबल बैठक 'भारत कॉमर्स चिंतन शिविर' की अध्यक्षता की. इस बैठक का आयोजन उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) ने किया था. इसमें प्रमुख FMCG कंपनियों के 40 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक में किराना दुकानों की खरीद प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए साझा रोडमैप तैयार करने पर चर्चा हुई.
बैठक में FMCG कंपनियों, वितरकों और अन्य हितधारकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया. इसका उद्देश्य डिजिटल खरीदारी को प्रोत्साहित करना, सप्लाई चेन को अधिक प्रभावी बनाना और छोटे खुदरा कारोबारियों की सेवाओं तक पहुंच बेहतर करना है.
DigiDukaan के जरिए खरीद प्रक्रिया होगी डिजिटल
किराना दुकानों को डिजिटल बनाने वाली पारंपरिक पहलों से अलग ONDC की DigiDukaan पहल दुकानदारों को खरीदार के रूप में डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर केंद्रित है. इसके तहत पड़ोस की किराना दुकानें एक ही डिजिटल इंटरफेस के जरिए अलग-अलग ब्रांड, वितरकों और थोक विक्रेताओं से उत्पादों की जानकारी हासिल कर सकेंगी और ऑर्डर दे सकेंगी.
इस प्लेटफॉर्म के जरिए दुकानदारों को कीमतों, व्यापारिक योजनाओं और उत्पादों की उपलब्धता के बारे में अधिक पारदर्शिता मिलेगी. खास बात यह है कि वे अपने मौजूदा वितरण नेटवर्क के साथ काम करना जारी रख सकेंगे.
इस पहल का उद्देश्य साझा डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करना भी है, जिसके माध्यम से भविष्य में किराना दुकानों को साझा लॉजिस्टिक्स, माइक्रो-वेयरहाउसिंग और औपचारिक कर्ज सुविधाओं से जोड़ा जा सके.
बैठक में हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोका-कोला इंडिया, ITC, P&G, मैरिको, कैविनकेयर, पिडिलाइट, ब्रिटानिया, अडानी विल्मर, LT फूड्स, अनमोल इंडस्ट्रीज, हल्दीराम, इमामी, वीबा और निलॉन्स सहित कई कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए. इनके अलावा लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं, टेक्नोलॉजी पार्टनर्स और ONDC नेटवर्क से जुड़े प्रतिभागियों ने भी हिस्सा लिया.
डिजिटल पहचान, लॉजिस्टिक्स और कर्ज पर जोर
बैठक में देश के पारंपरिक खुदरा कारोबार को मजबूत बनाने के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताओं की पहचान की गई. इनमें किराना दुकानों के लिए एक साझा डिजिटल पहचान विकसित करना शामिल है, ताकि वे अलग-अलग ब्रांड और सेवा प्रदाताओं से आसानी से जुड़ सकें. इसके अलावा साझा लॉजिस्टिक्स और माइक्रो-वेयरहाउसिंग नेटवर्क तैयार करने पर जोर दिया गया, जिससे वितरकों की पहुंच बढ़े और दुकानों तक अगले दिन उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके.
छोटे खुदरा कारोबारियों के लिए औपचारिक कर्ज की उपलब्धता बढ़ाना भी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. इसके लिए डिजिटल खरीदारी और लेनदेन के रिकॉर्ड से जुड़ी वित्तपोषण सुविधाएं विकसित करने पर चर्चा हुई.
इसके साथ ही प्लग-एंड-प्ले डिस्ट्रीब्यूटर मैनेजमेंट सिस्टम (DMS) कनेक्टर्स, मानकीकृत उत्पाद कैटलॉग और साझा डिजिटल इंटरफेस के जरिए टेक्नोलॉजी को जोड़ने की प्रक्रिया आसान बनाने की जरूरत बताई गई.
FMCG कंपनियों की सेल्स टीमों, वितरकों और चैनल पार्टनर्स के व्यावसायिक प्रोत्साहनों में बदलाव पर भी चर्चा हुई, ताकि डिजिटल ऑर्डरिंग, अधिक खुदरा दुकानों तक पहुंच और प्लेटफॉर्म के लगातार इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सके.
21 हजार से अधिक दुकानदार 450 ब्रांड से जुड़े
सितंबर 2026 तक DigiDukaan के जरिए हैदराबाद, जयपुर और मुंबई में 21 हजार से अधिक खुदरा दुकानदारों को 450 से ज्यादा ब्रांड से जोड़ा जा चुका है. पिछली तिमाही में यह संख्या 12 हजार से अधिक थी.
इस पहल के तहत हैदराबाद में 16 हजार से अधिक दुकानदार पंजीकृत हो चुके हैं. यहां हर महीने दोबारा ऑर्डर देने वाले दुकानदारों की दर 73 से 78 फीसदी के बीच है.
ONDC के शुरुआती अध्ययन में यह भी सामने आया कि सर्वे में शामिल 40 फीसदी दुकानदारों ने DigiDukaan के जरिए खरीदे गए उत्पादों के लिए अपने स्टॉक में कमी दर्ज की. इससे कारोबार में लगने वाली पूंजी यानी वर्किंग कैपिटल के अधिक प्रभावी इस्तेमाल की संभावना दिखाई देती है.
पीयूष गोयल ने कहा कि छोटे खुदरा कारोबारियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया ओपन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इस पहल को तेजी से आगे बढ़ा सकता है.
उन्होंने कहा, "खरीद प्रक्रिया को आसान और अधिक पारदर्शी बनाकर तथा अपने वितरकों को मजबूत करके हम किराना दुकानों को उनकी कार्यशील पूंजी बचाने और कारोबार बढ़ाने में मदद कर सकते हैं."
उन्होंने FMCG उद्योग से इस पहल को देशभर में विस्तार देने के लिए मिलकर काम करने की अपील की. साथ ही कहा कि DigiDukaan को ऐसा उदाहरण बनाया जाना चाहिए, जिससे दुनिया भारत के डिजिटल कॉमर्स मॉडल से सीख सके.
DPIIT के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि भारत के खुदरा कारोबार, खासकर किराना दुकानों के व्यापक नेटवर्क को डिजिटल बनाने में ओपन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण भूमिका है. उनके मुताबिक, DigiDukaan दिखाता है कि एक ओपन और इंटरऑपरेबल नेटवर्क किस तरह छोटे खुदरा कारोबारियों को डिजिटल खरीद के अवसर उपलब्ध करा सकता है.
FMCG कंपनियों और टेक्नोलॉजी पार्टनर्स की बढ़ रही भागीदारी
ONDC के प्रबंध निदेशक एवं CEO विभोर जैन ने कहा कि वितरकों ने बिलिंग, प्रिंटिंग और ऑर्डर देने के लिए डिजिटल टूल्स को तेजी से अपनाया है, लेकिन कई छोटे खुदरा दुकानदार अब भी मैनुअल प्रक्रियाओं पर निर्भर हैं.
उन्होंने कहा कि DigiDukaan का उद्देश्य किराना दुकानों को खरीदार के रूप में डिजिटल बनाना है, न कि मौजूदा वितरण नेटवर्क को बदलना. इसके जरिए दुकानदारों को कई ब्रांडों तक पहुंच, पारदर्शी व्यापारिक योजनाएं, तेजी से उत्पादों की आपूर्ति और भविष्य में औपचारिक कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए साझा डिजिटल आधार तैयार किया जा रहा है.
FMCG कंपनियों में HUL, मैरिको, कोलगेट-पामोलिव, इमामी और अमूल अपने वितरण नेटवर्क के जरिए इस पहल में शामिल हैं. वहीं ITC, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और ब्रिटानिया विभिन्न स्तरों पर इंटीग्रेशन या बातचीत की प्रक्रिया में हैं.
टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में Paytm for Business, Qwipo और Mulltiply.ai इस नेटवर्क पर सक्रिय हैं, जबकि Bizom, Botree, QuIDPe और ENS इसके साथ जुड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं. लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग पार्टनर्स में ElasticRun, Shiprocket, India Post और Moeving भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं.
नेशनल ट्रेडर्स वेलफेयर बोर्ड के अध्यक्ष सुनील जे. सिंघी का बोर्ड भी ONDC के साथ मिलकर किराना कारोबारियों के बीच इस पहल को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है. इसके तहत स्थानीय व्यापार संघों को सक्रिय कर खुदरा दुकानदारों की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है.
ONDC की अगली योजना मुंबई, खासकर उत्तर मुंबई में ब्रांड और वितरकों की भागीदारी बढ़ाने के साथ मौजूदा बाजारों में परिचालन को और मजबूत करने की है.
पूर्व नीति आयोग प्रमुख, RBI के डिप्टी गवर्नर, SEBI बोर्ड के सदस्य, रक्षा सचिव और LIC के चेयरमैन जैसे सार्वजनिक पदों पर रह चुके लोगों को Fairfax की भारतीय कंपनियों ने अपने साथ जोड़ा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
Fairfax का नेटवर्क
Fairfax समूह का बोर्ड सरकारी अधिकारियों के पुनर्मिलन जैसा दिखा
19 दिसंबर 2025 को गुरुमूर्ति महालिंगम Fairfax Financial Holdings के नियंत्रण वाली कंपनी थॉमस कुक इंडिया के बोर्ड में शामिल हुए.
उन्होंने अपनी एक दूसरी जिम्मेदारी भी बरकरार रखी. वह अब भी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के स्वतंत्र निदेशक थे.
LIC IDBI बैंक को बेच रही थी. Fairfax उसे खरीदने की कोशिश कर रही थी. महालिंगम दोनों पक्षों के बोर्ड में शामिल थे.
LIC के पास IDBI में 30.24 फीसदी हिस्सेदारी थी, जो बिक्री के लिए पेश की गई नियंत्रक हिस्सेदारी का आधा हिस्सा था. महालिंगम LIC के बोर्ड के साथ-साथ उसकी निवेश समिति (Investment Committee) में भी शामिल थे, जो बीमा कंपनी के निवेश की निगरानी करती है.
थॉमस कुक में उनके शामिल होने के 20 दिन बाद सरकार ने IDBI के लिए अंतिम बोलियां आमंत्रित कीं. अगले सात महीनों के दौरान पहली बोलियां विफल हुईं, आरक्षित मूल्य को खारिज कर दिया गया और Fairfax ने संशोधित प्रस्ताव जमा किया. इसके बाद उस प्रस्ताव को खोला गया. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान महालिंगम दोनों पदों पर बने रहे. एक उस कंपनी में जो बैंक को बेच रही थी और दूसरा उस कंपनी में जो खरीदार के नियंत्रण में थी.
LIC में उनका कार्यकाल 28 जुलाई 2026 को समाप्त हुआ. इसके 11 सप्ताह बाद कैबिनेट ने Fairfax को 81 रुपये प्रति शेयर के भाव पर IDBI की बिक्री को मंजूरी दी.
ऐसा कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं है, जिससे पता चलता हो कि महालिंगम ने IDBI से जुड़े LIC के किसी फैसले में हिस्सा लिया था. LIC ने यह भी नहीं बताया है कि उन्होंने थॉमस कुक में अपनी भूमिका का खुलासा किया था या बिक्री से जुड़ी चर्चाओं से खुद को अलग कर लिया था. यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिक्री की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ाई गई थी. इसी सप्ताह की शुरुआत में Businessworld ने वित्त मंत्रालय के एक आंतरिक नोट के बारे में रिपोर्ट की थी. इसमें बताया गया था कि अधिकारियों ने Fairfax की बोली खोली, अपने ही आरक्षित मूल्य को अलग रखा और उसके बाद नए मूल्यांकन का आदेश दिया, जो बोली से कम आए. सरकार का कहना है कि उसने उचित प्रक्रिया का पालन किया.
महालिंगम अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं.
Businessworld की एक जांच में सरकार, RBI, SEBI, LIC और सरकारी वित्तीय संस्थानों के 17 पूर्व अधिकारियों की पहचान की गई है, जिन्होंने Fairfax और उसकी भारतीय कंपनियों के साथ काम किया है. इनमें से 10 लोगों ने 7 अक्टूबर 2022 के बाद अपनी भूमिकाएं संभालीं. इसी दिन IDBI की बिक्री की प्रक्रिया शुरू हुई थी.
7 अक्टूबर 2022 को सरकार ने औपचारिक रूप से IDBI बैंक के निजीकरण के लिए रुचि पत्र (Expressions of Interest) आमंत्रित किए थे.
अगले चार वर्षों के दौरान, जब सरकार देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों में से एक का नियंत्रण बेचने की दिशा में काम कर रही थी, उसी दौरान Fairfax समूह के भीतर भी कुछ और हो रहा था.
उसकी भारतीय कंपनियां अपने बोर्ड में पूर्व सरकारी अधिकारियों, नियामकों और सरकारी वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों को शामिल कर रही थीं. RBI के एक पूर्व डिप्टी गवर्नर IIFL Finance से जुड़े. RBI के एक अन्य पूर्व कार्यकारी CSB बैंक के चेयरमैन बने. रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व सचिव Go Digit से जुड़े. SEBI के एक पूर्व पूर्णकालिक सदस्य थॉमस कुक इंडिया में शामिल हुए.
और नीति आयोग के पूर्व CEO Fairfax Financial के सलाहकार बन गए.
ये कोई सामान्य नियुक्तियां नहीं थीं. इनमें ऐसे लोग शामिल थे, जो भारत की वित्तीय नियामक और प्रशासनिक व्यवस्था में वरिष्ठ पदों पर रह चुके थे.
Businessworld ने Fairfax Financial, Fairfax India और उनकी भारतीय कंपनियों से जुड़े 17 पूर्व सार्वजनिक अधिकारियों की सूची तैयार की है. इनमें आठ पूर्व सिविल सेवक या नियामक हैं, आठ सरकारी वित्तीय संस्थानों के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं और एक पूर्व विदेशी सरकार का प्रमुख है.
ये नियुक्तियां अलग-अलग वर्षों में हुईं. इनमें से कई IDBI की बिक्री प्रक्रिया शुरू होने के बाद की गईं. कुछ नियुक्तियां वित्तीय बोली और मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान भी हुईं.
इनमें से किसी भी व्यक्ति पर IDBI की बिक्री को प्रभावित करने का आरोप नहीं है. न ही ऐसा कोई सार्वजनिक सबूत है. लेकिन नियुक्तियों की तारीखें, उनसे जुड़े संस्थान और Fairfax की भारतीय कंपनियों में पूर्व सार्वजनिक अधिकारियों की मौजूदगी का स्तर इस बात पर सवाल खड़े करता है कि IDBI का नियंत्रण हासिल करने की कोशिश के दौरान समूह का संस्थागत नेटवर्क कितना व्यापक था.
नियुक्तियां: तारीखों के क्रम में
IDBI की बिक्री प्रक्रिया के दौरान नियुक्तियां (7 अक्टूबर 2022 से)
तारीख व्यक्ति पूर्व सार्वजनिक पद Fairfax से जुड़ी भूमिका
7 अक्टूबर 2022 | — | — | सरकार ने IDBI बैंक के लिए बोलियां आमंत्रित कीं: बिक्री प्रक्रिया शुरू
11 मई 2023 | जेसन केनी | अल्बर्टा के प्रीमियर; कनाडा की पूर्व संघीय सरकार में मंत्री | Fairfax India के स्वतंत्र निदेशक
14 दिसंबर 2023 | रेनू कोहली | अर्थशास्त्री; RBI और IMF के साथ काम किया | CSB बैंक की स्वतंत्र निदेशक
15 मार्च 2024 | बी. के. दिवाकरा | सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक | CSB बैंक के कार्यकारी निदेशक
12 जून 2024 | दीपक माहेश्वरी | SBI में वरिष्ठ पदों पर रहे | CSB बैंक के स्वतंत्र निदेशक
13 दिसंबर 2024 | डी. एन. नरसिम्हा राजू | IAS; कर्नाटक के अतिरिक्त मुख्य सचिव | CSB बैंक के स्वतंत्र निदेशक; बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी जुड़े |
16 अप्रैल 2025 | बिस्वमोहन महापात्रा | RBI के कार्यकारी निदेशक | CSB बैंक के निदेशक
9 मई 2025 | बिस्वमोहन महापात्रा | पूर्व पद समान | CSB बैंक के अंशकालिक चेयरमैन
16 जून 2025 | बी. पी. कानूनगो | RBI के डिप्टी गवर्नर (2017-21) | IIFL Finance के स्वतंत्र निदेशक
26 जून 2025 | अमिताभ कांत | नीति आयोग के CEO (2016-22); G20 शेरपा | Fairfax Financial Holdings के वरिष्ठ सलाहकार |
1 नवंबर 2025 | गिरिधर अरमाने | रक्षा सचिव (2022-24); IRDAI के कार्यकारी निदेशक | Go Digit General Insurance के स्वतंत्र निदेशक |
19 दिसंबर 2025 | जी. महालिंगम | RBI के कार्यकारी निदेशक; SEBI के पूर्णकालिक सदस्य; LIC के कार्यरत निदेशक | थॉमस कुक इंडिया के स्वतंत्र निदेशक |
19 दिसंबर 2025 | बी. पी. कानूनगो | पूर्व पद समान | IIFL Finance के चेयरपर्सन
8 जनवरी 2026 | — | — | वित्तीय बोलियां आमंत्रित की गईं
28 जुलाई 2026 | जी. महालिंगम | — | LIC में निदेशक का कार्यकाल समाप्त
14 अक्टूबर 2026 | — | — | कैबिनेट ने 81 रुपये प्रति शेयर के भाव पर Fairfax को बिक्री की मंजूरी दी
बिक्री प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही पदों पर मौजूद थे (पृष्ठभूमि)
व्यक्ति | पूर्व सार्वजनिक पद | Fairfax से जुड़ी भूमिका
एस. बी. माथुर | LIC के चेयरमैन (2002-04) | थॉमस कुक इंडिया के स्वतंत्र निदेशक, 2015-दिसंबर 2025
महेंद्र कुमार गर्ग | यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के CMD | Go Digit के स्वतंत्र निदेशक; Quess और थॉमस कुक से भी जुड़े
प्रतीप चौधरी | SBI के चेयरमैन | Quess Corp के स्वतंत्र निदेशक, 2015-20 (बिक्री प्रक्रिया से पहले कार्यकाल समाप्त)
RBI से जुड़ाव
RBI के पूर्व डिप्टी गवर्नर बी. पी. कानूनगो 16 जून 2025 को IIFL Finance के स्वतंत्र निदेशक बने. 19 दिसंबर 2025 को वह इसके चेयरपर्सन बन गए.
RBI के पूर्व कार्यकारी निदेशक बिस्वमोहन महापात्रा 16 अप्रैल 2025 को CSB बैंक के बोर्ड में शामिल हुए और 9 मई 2025 को इसके अंशकालिक चेयरमैन बन गए.
इन दोनों नियुक्तियों के जरिए RBI के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी उन वित्तीय संस्थानों के बोर्ड या नेतृत्व में पहुंचे, जिनमें Fairfax की बड़ी हिस्सेदारी थी.
SEBI से जुड़ाव
RBI के पूर्व कार्यकारी निदेशक और SEBI के पूर्णकालिक सदस्य गुरुमूर्ति महालिंगम 19 दिसंबर 2025 को थॉमस कुक इंडिया के स्वतंत्र निदेशक बने.
उसी समय वह LIC के स्वतंत्र निदेशक भी बने हुए थे, जो IDBI बैंक के दो विक्रेताओं में से एक थी. वह LIC की निवेश समिति के सदस्य भी थे.
LIC में उनका कार्यकाल 28 जुलाई 2026 को समाप्त हुआ. थॉमस कुक में उनकी नियुक्ति पांच वर्षों के लिए थी.
यह दोहरी भूमिका IDBI की बोली प्रक्रिया के पहले दौर, मूल आरक्षित मूल्य के विफल होने, Fairfax की संशोधित बोली और उस बोली को खोले जाने की पूरी अवधि तक रही.
रक्षा और बीमा क्षेत्र से जुड़ाव
भारत के पूर्व रक्षा सचिव और IRDAI के पूर्व कार्यकारी निदेशक गिरिधर अरमाने 1 नवंबर 2025 को Go Digit General Insurance के स्वतंत्र निदेशक बने.
Go Digit Fairfax के प्रमुख भारतीय निवेशों में से एक है. यह उन कंपनियों में भी शामिल है, जिन्हें अधिग्रहण के बाद IDBI में शामिल करने का प्रस्ताव Fairfax ने दिया है.
सरकार के पूर्व शीर्ष अधिकारी
26 जून 2025 को Fairfax ने अमिताभ कांत को अपना वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त करने की घोषणा की.
कांत 2016 से 2022 तक नीति आयोग के CEO रहे थे और इसके बाद उन्होंने भारत के G20 शेरपा के रूप में काम किया.
Fairfax की घोषणा में विशेष रूप से भारत में कंपनी के लिए मौजूद अवसरों का उल्लेख किया गया था. साथ ही उसके पोर्टफोलियो में Go Digit और केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में किए गए निवेश का भी जिक्र किया गया था.
यह नियुक्ति उस समय हुई जब IDBI की बिक्री प्रक्रिया चल रही थी. ऐसा कोई सार्वजनिक सबूत नहीं है कि सरकारी सेवा के दौरान कांत की IDBI लेनदेन में कोई भूमिका थी या Fairfax के सलाहकार के रूप में उनकी जिम्मेदारी में IDBI शामिल था.
LIC से जुड़ाव
महालिंगम का मामला सबसे उल्लेखनीय दोहरी भूमिका का उदाहरण है.
सात महीने तक उन्होंने LIC और Fairfax के नियंत्रण वाली थॉमस कुक इंडिया, दोनों के बोर्ड में पद संभाले. LIC IDBI में अपनी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही थी.
LIC में उनकी समिति की सदस्यताओं में निवेश, कार्यकारी, ऑडिट और जोखिम प्रबंधन समितियां शामिल थीं.
DIPAM के नोट में यह भी दर्ज है कि LIC के प्रबंध निदेशक उन समितियों में शामिल थे, जिन्हें IDBI की सीलबंद बोलियां प्राप्त करने और खोलने की जिम्मेदारी दी गई थी.
ऐसा कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं है, जिससे यह साबित हो कि महालिंगम ने IDBI से जुड़े किसी फैसले में हिस्सा लिया था या यह लेनदेन उनके किसी समिति के सामने आया था, जिसके वह सदस्य थे. क्या उन्होंने थॉमस कुक में अपनी नियुक्ति की जानकारी LIC को दी थी और क्या उन्होंने इससे संबंधित किसी चर्चा से खुद को अलग रखा था, ये सवाल अब भी LIC से जुड़े हुए हैं.
पूरे वित्तीय तंत्र में फैला नेटवर्क
ये नियुक्तियां केवल इन पांच लोगों तक सीमित नहीं हैं.
Businessworld के रिकॉर्ड में LIC के पूर्व चेयरमैन एस. बी. माथुर, SBI के पूर्व चेयरमैन प्रतीप चौधरी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के पूर्व CMD महेंद्र कुमार गर्ग, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व कार्यकारी निदेशक बी. के. दिवाकरा और अन्य सरकारी वित्तीय संस्थानों के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.
कुछ लोग IDBI की बिक्री से कई साल पहले Fairfax से जुड़ी कंपनियों में शामिल हुए थे. अन्य ने बिक्री प्रक्रिया के दौरान अपनी भूमिकाएं संभालीं. इन नियुक्तियों और उनके कार्यकाल को एक ही समय में हुई नियुक्तियों की लहर मानने के बजाय घटनाक्रम के क्रम में समझने की जरूरत है.
ये हैं अहम सवाल
- IDBI की बिक्री प्रक्रिया के दौरान Fairfax और उसकी भारतीय सहयोगी कंपनियों ने सरकार और नियामक संस्थानों के किन पूर्व अधिकारियों को अपने साथ जोड़ा?
- क्या इनमें से कोई व्यक्ति सरकारी या सार्वजनिक संस्थानों में सेवा के दौरान IDBI लेनदेन में शामिल था?
- क्या संभावित हितों के टकराव का खुलासा संबंधित बोर्ड और नियामकों के सामने किया गया था?
- क्या सरकार ने लेनदेन का आकलन करते समय Fairfax के मौजूदा नेटवर्क की जांच की थी?
- भारत में Fairfax का सलाहकार और संस्थागत नेटवर्क कैसा है और क्या वह IDBI की बिक्री के दौरान नियुक्त सभी सलाहकारों और परामर्शदाताओं का खुलासा करेगी?
ये नियुक्तियां सार्वजनिक हैं. इनकी तारीखें भी सार्वजनिक हैं. सवाल यह है कि क्या सरकार और बिक्री में शामिल संस्थानों ने इन दोहरी भूमिकाओं और आपसी जुड़ाव की जांच की थी.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री के लेखक हैं. यह पुस्तक भारत के वित्तीय बाजारों के अंधेरे पहलुओं को उजागर करते हैं. मुंबई में करीब दो दशक तक जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने वाले पलक ने धन, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की पड़ताल की है. उनके लेख भारत के प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों, जिनमें द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं. 19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुए पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई की गैंगवार की जगह संगठित अपराध के अधिक परिष्कृत रूप ने ले ली है. इसमें कॉरपोरेट इमारतों के भीतर चलने वाली सफेदपोश वित्तीय धोखाधड़ी शामिल है. इसी अनुभव ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने भारत की 'सफेद धन' अर्थव्यवस्था की जटिल कार्यप्रणाली को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम वित्तीय दुनिया की चमकदार सतह के पीछे काम करने वाले समूहों को उजागर करता है. सच सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें भारतीय पत्रकारिता में एक ऐसी प्रभावशाली आवाज बनाती है जो यथास्थिति को चुनौती देने और खुद को कानून से ऊपर समझने वालों को बेनकाब करने से नहीं हिचकती.)
गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 2.6 अरब डॉलर की कमी, विदेशी मुद्रा संपत्ति और SDR में दर्ज हुई बढ़ोतरी; सितंबर में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद से Forex Reserve में जारी है गिरावट
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 24 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.2 अरब डॉलर घटकर 719.74 अरब डॉलर रह गया. इससे पिछले सप्ताह भी इसमें करीब 5 अरब डॉलर की गिरावट आई थी और यह घटकर 721.02 अरब डॉलर पर आ गया था.
गौरतलब है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 785.706 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. इसके बाद से इसमें गिरावट का सिलसिला जारी है. विदेशी मुद्रा भंडार में ताजा कमी के दौरान सोने के भंडार की वैल्यू में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, विदेशी मुद्रा संपत्ति में बढ़ोतरी हुई है.
रुपये को संभालने के लिए डॉलर बेच रहा RBI
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट की प्रमुख वजहों में बैंकों की ओर से विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमा के जरिए जुटाई गई रकम का इस्तेमाल और रुपये को संभालने के लिए RBI का विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप शामिल है.
जब डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने के लिए बाजार में डॉलर बेचता है. इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आ सकती है. बाजार के जानकारों के मुताबिक, हालिया गिरावट के पीछे भी ये दोनों कारक अहम हैं.
विदेशी मुद्रा संपत्ति बढ़ी, गोल्ड रिजर्व में 2.6 अरब डॉलर की कमी
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 24 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा संपत्ति (Foreign Currency Assets) 1.3 अरब डॉलर बढ़कर 593.20 अरब डॉलर हो गई. विदेशी मुद्रा भंडार में इसकी सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है.
दूसरी ओर, इसी सप्ताह देश के सोने के भंडार (Gold Reserves) की वैल्यू में 2.6 अरब डॉलर की गिरावट आई और यह घटकर 103.15 अरब डॉलर रह गई. इस तरह विदेशी मुद्रा संपत्ति में बढ़ोतरी के बावजूद सोने के भंडार के मूल्य में आई कमी का असर कुल विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा.
SDR में बढ़ोतरी, IMF में रिजर्व पोजीशन घटी
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 24 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान 27 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके बाद यह बढ़कर 18.605 अरब डॉलर हो गया.
वहीं, IMF में भारत की रिजर्व पोजीशन 4 मिलियन डॉलर घटकर 4.787 अरब डॉलर रह गई. इस तरह समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के अलग-अलग घटकों में मिला-जुला रुख देखने को मिला. विदेशी मुद्रा संपत्ति और SDR में बढ़ोतरी हुई, जबकि गोल्ड रिजर्व और IMF में रिजर्व पोजीशन में गिरावट दर्ज की गई.
ऑयल-टू-केमिकल्स और डिजिटल कारोबार के दम पर कंपनी ने दर्ज की मजबूत ग्रोथ, रिटेल कारोबार के एबिटा में आई गिरावट; ₹15,000 करोड़ जुटाने के लिए एनसीडी जारी करने को बोर्ड की मंजूरी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 40.6 फीसदी बढ़कर 25,548 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 18,165 करोड़ रुपये था. इस दौरान कंपनी के ऑपरेशंस से रेवेन्यू में भी 28.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह बढ़कर 3,32,861 करोड़ रुपये पहुंच गया.
कंपनी ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए. कंपनी के मुताबिक, तेल और केमिकल कारोबार में मजबूत प्रदर्शन के साथ डिजिटल सर्विसेज की ग्रोथ ने नतीजों को मजबूती दी है. हालांकि, रिटेल कारोबार के एबिटा में गिरावट देखने को मिली.
पिछली तिमाही के मुकाबले भी बढ़ा मुनाफा
रिलायंस इंडस्ट्रीज का प्रदर्शन पिछली तिमाही के मुकाबले भी बेहतर रहा. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 20,946 करोड़ रुपये था, जो सितंबर तिमाही में बढ़कर 25,548 करोड़ रुपये हो गया. इस तरह तिमाही आधार पर मुनाफे में करीब 22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, कंपनी का रेवेन्यू जून तिमाही के 3,11,850 करोड़ रुपये से बढ़कर सितंबर तिमाही में 3,32,861 करोड़ रुपये पहुंच गया.
सितंबर तिमाही में कंपनी का टैक्स से पहले मुनाफा 38,613 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 29,124 करोड़ रुपये था.
ऑयल-टू-केमिकल्स कारोबार का रेवेन्यू 44% बढ़ा
रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) कारोबार ने सितंबर तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया. इस सेगमेंट का रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 44.2 फीसदी बढ़कर 2,31,601 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 1,60,558 करोड़ रुपये था.
इस कारोबार का एबिटा भी करीब 68 फीसदी बढ़कर 25,203 करोड़ रुपये पहुंच गया. पिछले साल सितंबर तिमाही में यह 15,008 करोड़ रुपये था. कंपनी के कुल प्रदर्शन में इस कारोबार की अहम भूमिका रही.
डिजिटल कारोबार की कमाई में 11% की बढ़ोतरी
कंपनी के डिजिटल सर्विसेज कारोबार ने भी ग्रोथ दर्ज की. सितंबर तिमाही में इस सेगमेंट का रेवेन्यू 11.2 फीसदी बढ़कर 48,486 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 43,617 करोड़ रुपये था. डिजिटल कारोबार का एबिटा भी करीब 17.7 फीसदी बढ़कर 22,223 करोड़ रुपये पहुंच गया.
रिटेल कारोबार के एबिटा में गिरावट
दूसरी ओर, रिलायंस के रिटेल कारोबार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा. सितंबर तिमाही में इस सेगमेंट का रेवेन्यू मामूली बढ़कर 91,717 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, इसका एबिटा घटकर 6,120 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 6,817 करोड़ रुपये था.
वहीं, तेल और गैस कारोबार का रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा. सितंबर तिमाही में यह 6,020 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 6,058 करोड़ रुपये था. इस कारोबार का एबिटा भी घटकर 4,901 करोड़ रुपये रह गया.
एनसीडी के जरिए 15,000 करोड़ रुपये जुटाएगी कंपनी
तिमाही नतीजों के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज के बोर्ड ने 15,000 करोड़ रुपये तक जुटाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है. कंपनी नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करके यह रकम जुटा सकती है. इसके लिए एक या कई चरणों में प्राइवेट प्लेसमेंट का रास्ता अपनाया जाएगा.
एनसीडी ऐसे कर्ज आधारित वित्तीय साधन होते हैं, जिन्हें जारी करने वाली कंपनी निवेशकों को तय शर्तों के मुताबिक ब्याज देती है, लेकिन इन्हें शेयरों में परिवर्तित नहीं किया जा सकता. बोर्ड की मंजूरी के बाद कंपनी के पास इस माध्यम से पूंजी जुटाने का विकल्प होगा.
रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुनाफा 40.6% बढ़कर ₹25,548 करोड़ पहुंचा, रेवेन्यू में 28.6% का उछाल
नोएडा में 83 वर्षीय आर. के. सिन्हा ने ली अंतिम सांस, SIS ग्रुप की स्थापना कर भारत में निजी सुरक्षा उद्योग को नई पहचान दी; जनसंघ के दौर से भाजपा से जुड़े रहे
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) ग्रुप के संस्थापक एवं चेयरमैन रविंद्र किशोर सिन्हा (आर. के. सिन्हा) का शुक्रवार को निधन हो गया. उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से राजनीतिक, सामाजिक और कारोबारी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और उद्योग जगत की हस्तियों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है.
पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत करने वाले आर. के. सिन्हा ने राजनीति और कारोबार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय पहचान बनाई. वह न केवल भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे, बल्कि उन्होंने भारत में निजी सुरक्षा उद्योग की नींव रखने और उसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई.
पत्रकारिता का सफर
राजनीति विज्ञान और कानून की पढ़ाई करने वाले आर. के. सिन्हा ने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत पत्रकारिता से की थी. उन्होंने अपराध और राजनीतिक रिपोर्टिंग के क्षेत्र में काम किया. वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने युद्ध संवाददाता के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई. इस दौरान उनके साहसिक काम की काफी सराहना हुई. इसी दौर में उन्होंने 'जन आंदोलन' नामक पुस्तक लिखी. इसे 1970 से 1975 के बीच जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन पर शुरुआती प्रामाणिक शोध कार्यों में गिना जाता है.
दो लोगों से शुरू किया SIS ग्रुप का कारोबार
वर्ष 1971 के युद्ध के बाद पूर्व सैनिकों को रोजगार और पुनर्वास के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आर. के. सिन्हा ने 1974 में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (SIS) की स्थापना की.
पूर्वी भारत में दो लोगों की टीम और एक छोटे से किराये के कार्यालय से शुरू हुआ यह कारोबार आगे चलकर एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की प्रमुख सुरक्षा सेवा कंपनियों में शामिल हो गया. आज SIS ग्रुप के पास 36,000 से अधिक स्थायी कर्मचारी और 3,000 से ज्यादा कॉर्पोरेट ग्राहक हैं. कंपनी का कारोबार 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक बताया जाता है.
निजी सुरक्षा उद्योग में उनके योगदान के कारण उन्हें इस क्षेत्र का अग्रणी उद्यमी माना जाता था. सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग उन्हें सम्मानपूर्वक 'आर. के.' कहकर संबोधित करते थे. उन्होंने निजी सुरक्षा उद्योग से जुड़े कानूनों और नियामकीय मुद्दों पर विभिन्न सरकारी निकायों के समक्ष भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया.
वह 1999 से 2004 तक भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सलाहकार रहे. वर्ष 2006 में सिंगापुर की सुरक्षा एसोसिएशन ने उन्हें 'लॉस प्रिवेंशन प्रमोटर अवार्ड' से सम्मानित किया था.
जनसंघ के समय से भाजपा से जुड़े थे आर. के. सिन्हा
आर. के. सिन्हा का भाजपा से जुड़ाव जनसंघ के दौर से रहा. वह पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और उन्होंने संगठन में राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.
बिहार में भाजपा के चुनावी अभियानों में भी उनकी अहम भूमिका रही. उन्होंने बिहार चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष के रूप में काम किया. वर्ष 2014 में भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा के लिए नामित किया था.
संसद में अपने कार्यकाल के दौरान वह गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की स्थायी समितियों, श्रम एवं रोजगार संबंधी सलाहकार समिति और राज्यसभा की याचिकाओं से जुड़ी समिति सहित कई महत्वपूर्ण संसदीय निकायों के सदस्य रहे.
नेताओं ने जताया दुख, पटना ले जाया जाएगा पार्थिव शरीर
आर. के. सिन्हा के निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख व्यक्त किया. उन्होंने इसे हृदयविदारक बताते हुए कहा कि पत्रकारिता, समाज सेवा और सांगठनिक कार्यों में आर. के. सिन्हा का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा. उनका निधन राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है.
जनता दल (यूनाइटेड) और बिहार भाजपा ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है. नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जाना पार्टी और समाज के लिए बड़ी क्षति है.
पारिवारिक सदस्यों के अनुसार, आर. के. सिन्हा का पार्थिव शरीर दिल्ली से पटना ले जाया जाएगा. अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को पाटलिपुत्र स्थित 'अन्नपूर्णा भवन' में रखा जाएगा, जहां समर्थक, पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान राजकोषीय घाटा पूरे वित्त वर्ष के लिए तय लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत रहा. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 5.7 लाख करोड़ रुपये था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती छह महीनों में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा सालाना आधार पर 25.4 प्रतिशत बढ़कर 7.15 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान राजकोषीय घाटा पूरे वित्त वर्ष के लिए तय लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत रहा. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 5.7 लाख करोड़ रुपये था.
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल खर्च और उधारी को छोड़कर कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर होता है. जब सरकार की आय उसके खर्च से कम होती है, तो इस अंतर को पूरा करने के लिए उसे उधार लेना पड़ता है. ऐसे में राजकोषीय घाटा सरकार की वित्तीय स्थिति और उधारी की जरूरत को दर्शाने वाला एक अहम संकेतक है.
पिछले साल के मुकाबले बढ़ा राजकोषीय घाटा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में राजकोषीय घाटा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 25.4 प्रतिशत अधिक रहा. अप्रैल-सितंबर के दौरान यह 7.15 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में 5.7 लाख करोड़ रुपये था.
पूरे वित्त वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत घाटा पहली छमाही में ही दर्ज किया जा चुका है. ऐसे में वित्त वर्ष के बाकी छह महीनों में सरकार के राजस्व संग्रह और खर्च का प्रबंधन महत्वपूर्ण रहेगा.
सालाना लक्ष्य हासिल करना होगा अहम
वित्त वर्ष 2026-27 के शेष महीनों में सरकार का वित्तीय प्रदर्शन यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि राजकोषीय घाटे को पूरे साल के निर्धारित लक्ष्य के भीतर रखा जा सकेगा या नहीं. सरकार के राजस्व संग्रह और व्यय के बीच संतुलन बनाए रखना इस लिहाज से महत्वपूर्ण होगा.
अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास रफ्तार बरकरार रहने का अनुमान है. वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.35 प्रतिशत रह सकती है. औद्योगिक उत्पादन, निर्यात, जीएसटी संग्रह और बैंक कर्ज में बढ़ोतरी से आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिल रही है. हालांकि, इस दौरान खुदरा और खाद्य महंगाई में वृद्धि ने चिंता बढ़ाई है. सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत और खाद्य महंगाई 7.74 प्रतिशत पर पहुंच गई.
अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी. इसके मुकाबले दूसरी तिमाही में विकास दर थोड़ी कम रहने का अनुमान है, लेकिन इसके बावजूद अर्थव्यवस्था की वृद्धि रफ्तार मजबूत बनी हुई है.
IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. वहीं, विश्व बैंक, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है.
औद्योगिक उत्पादन में 8% की बढ़ोतरी
देश के औद्योगिक क्षेत्र से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं. अगस्त 2026 में औद्योगिक उत्पादन में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 9 प्रतिशत बढ़ा. वहीं, सितंबर में आठ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में 7.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसके अलावा बैंक कर्ज की वृद्धि दर 21.6 प्रतिशत रही. इससे कारोबार और आर्थिक गतिविधियों में कर्ज की मांग बढ़ने के संकेत मिलते हैं.
महंगाई का बढ़ता दबाव, खुदरा दर 5.54% पर पहुंची
आर्थिक विकास के बीच महंगाई का दबाव भी बढ़ा है. सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त में यह 4.83 प्रतिशत थी. खाद्य महंगाई भी बढ़कर 7.74 प्रतिशत पर पहुंच गई. प्याज, चीनी, खाद्य तेल और चावल की कीमतों में बढ़ोतरी को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है.
महंगाई के दबाव को देखते हुए RBI ने रेपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की और मौद्रिक नीति के रुख को तटस्थ से धीरे-धीरे सख्ती की ओर बदला. रेपो दर में वृद्धि का असर कर्ज की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है.
निर्यात में 11% की वृद्धि, 721 अरब डॉलर हुआ विदेशी मुद्रा भंडार
वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बावजूद भारत के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. सितंबर 2026 में वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात सालाना आधार पर 11 प्रतिशत बढ़ा. इसमें वस्तुओं के निर्यात में 23.1 प्रतिशत की वृद्धि की अहम भूमिका रही.
वहीं, 16 अक्टूबर 2026 तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार 721 अरब डॉलर पर पहुंच गया. यह राशि भारत की करीब 10.3 महीने की आयात जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से अंतरराष्ट्रीय भुगतान और बाहरी आर्थिक चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है.
कम बारिश से कृषि क्षेत्र पर दबाव
कम बारिश का असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है. 2 अक्टूबर 2026 तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई का क्षेत्र 1,115.31 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1,127.12 लाख हेक्टेयर था.
जून से सितंबर के बीच देश में सामान्य औसत के मुकाबले 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई. इससे फसल उत्पादन प्रभावित होने और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव बढ़ने का खतरा है.
मैन्युफैक्चरिंग में निवेश और रोजगार बढ़ा
वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2024-25 के मुताबिक, विनिर्माण क्षेत्र के सकल मूल्यवर्धन (GVA) में 9.59 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इस दौरान स्थिर पूंजी में 10.54 प्रतिशत और रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या में 7.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इसके अलावा, अगस्त 2026 में उद्योगों को दिए गए बैंक कर्ज में सालाना आधार पर 18.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई. ये आंकड़े विनिर्माण क्षेत्र में निवेश, रोजगार और कारोबारी गतिविधियों में बढ़ोतरी के संकेत देते हैं.