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SEBI का नया प्रस्ताव: बड़ी कंपनियों के लिए IPO और शेयरहोल्डिंग नियमों में राहत
SEBI द्वारा प्रस्तावित नए नियम बड़े आकार की कंपनियों के लिए IPO प्रक्रिया को अधिक लचीला और व्यावहारिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
भारतीय पूंजी बाजार नियामक SEBI ने बड़ी कंपनियों के लिए न्यूनतम पब्लिक ऑफर (NPO) और न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (NPS) नियमों में ढील देने का प्रस्ताव पेश किया है. सेबी के इस कदम का उद्देश्य यह है कि कंपनियों को एक साथ भारी मात्रा में शेयर बेचने का बोझ न उठाना पड़े और वे घरेलू बाजार में आसानी से लिस्ट हो सकें. SEBI का कहना है कि इससे बाजार में शेयरों की अधिक आपूर्ति नहीं होगी और मौजूदा शेयरधारकों के हितों की रक्षा होगी. SEBI ने इन नए प्रस्तावों पर 8 सितंबर तक जनता से सुझाव और राय मांगी है.
रिटेल निवेशकों के लिए कोटा बरकरार
SEBI ने स्पष्ट किया है कि नए नियमों के तहत रिटेल निवेशकों के लिए 35 फीसदी कोटा बरकरार रहेगा. पहले एक प्रस्ताव था कि 5,000 करोड़ रुपये से बड़े IPO के लिए रिटेल कोटा घटाकर 25 फीसदी कर दिया जाए, लेकिन नए ड्राफ्ट में इस विचार को छोड़ दिया गया है.
कंपनियों के लिए नई शर्तें और समयसीमा
SEBI ने कंपनियों की मार्केट वैल्यू के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां तय की हैं.
1. 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये तक की कंपनियां
- NPO: कम से कम 1,000 करोड़ रुपये और 8% पोस्ट-इश्यू कैपिटल.
- MPS (25%) का लक्ष्य: 5 साल में पूरा करना होगा.
2. 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपये तक की कंपनियां
- NPO: 6,250 करोड़ रुपये और कम से कम 2.75% पोस्ट-इश्यू कैपिटल.
- पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15% से कम होने पर 5 साल में 15% और 10 साल में 25%.
- अगर पहले से 15% या ज्यादा है, तो 25% का लक्ष्य 5 साल में पूरा करना होगा.
3. 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यू वाली कंपनियां
- NPO: 15,000 करोड़ रुपये और कम से कम 1% पोस्ट-इश्यू कैपिटल.
- न्यूनतम 2.5% की बिक्री अनिवार्य.
- 15% से कम शेयरहोल्डिंग होने पर: 10 साल में 25%.
- 15% से ज्यादा होने पर: 5 साल में 25%.
क्यों जरूरी है यह बदलाव
SEBI का मानना है कि इतनी बड़ी कंपनियों के लिए एक साथ भारी शेयर बिक्री बाजार के लिए चुनौती बन जाती है. बाजार में अचानक शेयरों की अधिक आपूर्ति से कीमतों पर दबाव पड़ सकता है और निवेशकों के हित प्रभावित हो सकते हैं. हाल ही में एलआईसी और हुंडई मोटर इंडिया जैसे बड़े IPO सामने आए हैं.
2024-25 में औसत मेनबोर्ड IPO का आकार 2,057 करोड़ रुपये रहा, जो 2019-20 में 1,488 करोड़ रुपये था. ऐसे में SEBI का यह कदम बड़े IPO को भारतीय बाजार में और सहज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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