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SEBI का बड़ा फैसला: वाधवान ब्रदर्स पर 5 साल का प्रतिबंध, 120 करोड़ रुपये का जुर्माना
SEBI ने DHFL के प्रमोटर्स और पूर्व अधिकारियों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप में कड़ी सजा दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने दिवालिया हुई देवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन (DHFL) के कथित फंड डाइवर्जन मामले में कड़ा कदम उठाया है. सेबी ने प्रमोटर कपिल वाधवान और धीरज वाधवान को पांच साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया. साथ ही उन्हें किसी भी लिस्टेड कंपनी में अहम पद संभालने से भी रोका गया है. इसके अलावा राकेश वाधवान और सारंग वाधवान पर चार-चार साल का बैन लगाया गया है. वहीं, पूर्व सीईओ और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर हर्षिल मेहता तथा पूर्व सीएफओ संतोष शर्मा को तीन-तीन साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है.
सबसे बड़ा जुर्माना कपिल और धीरज पर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सेबी ने सभी आरोपियों पर कुल 120 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. इसमें कपिल और धीरज वाधवान को 27-27 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा जुर्माना भरना होगा.
बांद्रा बुक एंटिटीज को लोन का आरोप
रेग्युलेटर के अनुसार DHFL ने एक धोखाधड़ी योजना के तहत 87 "बांद्रा बुक एंटिटीज" (BBEs) को लोन दिए, जो एक-दूसरे और DHFL प्रमोटर ग्रुप से जुड़े थे. इन 39 BBEs को DHFL से 5,662.44 करोड़ रुपये का लोन मिला, जिसमें से 40% रकम 48 ऐसी कंपनियों को ट्रांसफर हुई जो DHFL प्रमोटर्स से संबद्ध थीं. मार्च 2019 तक BBEs पर 14,040 करोड़ रुपये का लोन बकाया था.
रिटेल लोन के नाम पर धोखा
सेबी ने पाया कि कमजोर वित्तीय स्थिति वाले संबंधित पक्षों को दिए गए बड़े अनसिक्योर्ड लोन को “रिटेल हाउसिंग लोन” के रूप में गलत तरीके से पेश किया गया. यह फर्जीवाड़ा एक नकली वर्चुअल शाखा “बांद्रा ब्रांच” और बंद हो चुके रिटेल लोन अकाउंट्स के जरिए किया गया.
निवेशकों को गुमराह करने का आरोप
सेबी के होल टाइम सदस्य अनंत नारायण के मुताबिक, BBE लोन की छिपी हुई प्रकृति ने रेग्युलेटरी कार्रवाई में देरी की और बाजार की स्थिरता को खतरे में डाल दिया. यदि सही वित्तीय विवरण पेश किए जाते तो DHFL 2007-08 से 2015-16 तक लगातार घाटे में होती, लेकिन कंपनी ने मुनाफा दिखाकर निवेशकों को गुमराह किया.
आगे की कार्रवाई बाकी
सेबी ने सितंबर 2020 में इस मामले में अंतरिम आदेश जारी कर शुरुआती रोक लगाई थी. अब रेग्युलेटर इस धोखाधड़ी से हुए गैरकानूनी लाभ की सटीक राशि तय करेगा और आगे कार्रवाई कर सकता है.
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