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अब 'अपनों' के निशाने पर SEBI चीफ, कर्मचारियों ने बुच की लीडरशिप पर उठाए सवाल
सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच के खिलाफ उनके अपने कर्मचारियों ने ही मोर्चा खोल दिया है. इस संबंध में वित्त मंत्रालय से शिकायत की गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की चीफ माधबी पुरी बुच की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. पहले हिंडनबर्ग ने उन पर अडानी समूह से रिश्ते के आरोप लगाए. फिर कांग्रेस ने हमला बोला. इसके बाद एस्सल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने गंभीर आरोप लगाए और अब सेबी चीफ के अपने ही कर्मचारियों ने उनके खिलाफ शिकायत की है.
टॉक्सिक वर्क कल्चर
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सेबी के अधिकारियों ने पिछले महीने वित्त मंत्रालय से शिकायत कर SEBI लीडरशिप पर गंभीर आरोप लगाया है. कर्मचारियों का कहना है कि सेबी नेतृत्व टॉक्सिक वर्क कल्चर को बढ़ावा दे रहा है. 6 अगस्त को लिखे पत्र में कहा गया है कि सेबी की बैठकों में चिल्लाना, डांटना और सार्वजनिक रूप से अपमानित करना अब आम बात हो गई है.
इतिहास में पहला मौका
फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजे पत्र में सेबी अधिकारियों ने कहा है कि माधबी पुरी बुच के नेतृत्व वाली टीम का रवैया सही नहीं है. वो सेबी स्टाफ के साथ कठोर और गैर-पेशेवर भाषा इस्तेमाल करती है. उनकी पल-पल की गतिविधि पर नजर रखी जाती है. उन्हें टारगेट दिए जाते हैं जिन्हें हासिल करना पूरी तरह नामुमकिन है. बता दें कि सभवत: सेबी के इतिहास में यह पहला मौका है जब स्टाफ ने लीडरशिप पर इस तरह के आरोप लगाए हैं.
मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सेबी नेतृत्व के इस तरह के व्यवहार से उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है. साथ ही व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के बीच तालमेल बैठाना भी मुश्किल हो गया है. अधिकारियों ने कहा कि सेबी प्रबंधन ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया, इसके चलते उन्हें वित्त मंत्रालय को पत्र लिखना पड़ा है. पत्र में यह भी कहा गया है कि सेबी बाहरी स्टेकहोल्डर्स के लिए स्थितियों में सुधारने के लिए काम कर रहा है, लेकिन उसके खुद के कर्मचारियों के बीच अविश्वास बढ़ रहा है.
इस्तीफे का बढ़ रहा दबाव
पत्र में आगे कहा गया है कि पिछले कुछ सालों से सेबी में डर का माहौल है. कर्मचारियों से अभद्र भाषा आम बात हो गई है. उधर, सेबी का कहना है कि कर्मचारियों की शिकायतों को दूर करने के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं और सभी मुद्दे हल हो चुके हैं. बाजार नियामक के अनुसार, कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले दो संघों ने 3 सितंबर को ईमेल के माध्यम से इन बदलावों को स्वीकार भी किया है. बीते कुछ दिनों में जिस तरह से माधबी पुरी बुच को लेकर नए-नए आरोप सामने आ रहे हैं, उससे उनके लिए आने वाले दिन और भी ज्यादा मुश्किल भरे हो सकते हैं. इस बात की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि बुच को पद से इस्तीफा देने के लिए कह दिया जाए.
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