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SEBI ने अलग-अलग मामलों में Nippon और Quant MF के अधिकारियों से समझौते किए स्वीकार
Nippon India MF के सीईओ संदीप सिक्का और Quant MF के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी संदीप टंडन ने बाजार उल्लंघनों के अलग-अलग मामलों में सेबी के साथ समझौता किया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
पलक शाह
बाजार नियामक सेबी (SEBI) की एक उच्च स्तरीय समिति ने निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड (Nippon India MF) और क्वांट म्यूचुअल फंड (Quant MF) के अधिकारियों से दो अलग-अलग मामलों में नियामकीय उल्लंघनों को लेकर समझौता आवेदन स्वीकार करने की संभावना जताई है. सूत्रों के अनुसार. समझौते का मतलब होता है कि सेबी मामला बंद कर देती है और तय किए गए जुर्माने को स्वीकार कर आगे की कानूनी कार्रवाई नहीं करती.
पहले मामले में, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड, इसके सीईओ संदीप सिक्का, प्रमुख फंड मैनेजर अमित त्रिपाठी और पूर्व मुख्य जोखिम अधिकारी मिलिंद नेसरिकर ने यस बैंक के एडिशनल टियर-1 (AT1) बॉन्ड्स में निवेश को लेकर सेबी के साथ समझौता किया है. सूत्रों के अनुसार, समझौते की राशि प्रति व्यक्ति 1 करोड़ रुपये से 2 करोड़ रुपये के बीच है, जबकि निप्पॉन इंडिया एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने 5 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है. यह मामला 2016-2019 के दौरान फंड द्वारा किए गए लगभग 2,850 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ा है, जब यह फंड रिलायंस म्यूचुअल फंड के नाम से जाना जाता था. हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने यस बैंक के 2020 बेलआउट के दौरान इन बॉन्ड्स को राइट-ऑफ करने को अवैध करार दिया, जिससे इन निवेशों पर पहले हुई नियामकीय जांचों को चुनौती मिली है.
एक अलग मामले में, सेबी के द्वारा क्वांट म्यूचुअल फंड के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी संदीप टंडन और उच्च निवल-मूल्य निवेशक सुमना परुचुरी से एक हाई-प्रोफाइल फ्रंट-रनिंग मामले में समझौता स्वीकार किए जाने की संभावना है. यह मामला सेबी की उस जांच से संबंधित है जो कथित फ्रंट-रनिंग और इनसाइडर ट्रेडिंग को लेकर की गई थी, जिसमें जून 2024 में क्वांट के मुंबई मुख्यालय और हैदराबाद स्थित परुचुरी के परिसर में छापेमारी की गई थी. रिपोर्टों के अनुसार, नियामक ने 70-80 करोड़ रुपये मूल्य के फ्रंट-रनिंग लेनदेन का पता लगाया. टंडन और परुचुरी ने सेबी के साथ समझौते के लिए आवेदन किया ताकि गोपनीय फंड सूचना के आधार पर अग्रिम ट्रेडिंग के माध्यम से की गई संदिग्ध बाजार हेराफेरी के आरोपों को सुलझाया जा सके.
दोनों समझौते म्यूचुअल फंड उद्योग में महत्वपूर्ण हैं. सेबी की सैटलमेंट ऑर्डर और अपराधों के कम्पाउंडिंग पर उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता जस्टिस जय नारायण पटेल, पूर्व मुख्य न्यायाधीश, कलकत्ता उच्च न्यायालय, पी.के. मल्होत्रा, पूर्व कानून सचिव, भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय, एस.के. मोहंती, आईआरएस (सेवानिवृत्त) और सेबी के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य, और एन. वेंकटराम, डेलॉयट इंडिया के पूर्व मैनेजिंग पार्टनर और सीईओ कर रहे हैं. यह समिति अपने व्यक्तिगत विचारों के आधार पर निर्णय लेती है.
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