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को-लोकेशन मामले में SEBI से मिली राहत, NSE के IPO का रास्ता हुआ साफ
बाजार नियामक सेबी ने NSE को को-लोकेशन मामले में बड़ी राहत दी है. इसके साथ ही NSE के पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ लगे आरोपों को खारिज कर दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बाजार नियामक सेबी (SEBI) से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को बड़ी राहत मिली है. सेबी ने लंबे समय से चले आ रहे को-लोकेशन मामले में NSE और अन्य संबद्ध पक्षों के खिलाफ अपनी कार्यवाही आधिकारिक तौर पर बंद कर दी है. इसके अलावा, पर्याप्त सबूतों के अभाव में NSE और उसके पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ लगे आरोपों को भी खारिज कर दिया है.
इनका भी नाम शामिल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेबी ने अपने आदेश मे कहा गया है कि इस मामले में मिलीभगत या सांठगांठ के आरोप साबित नहीं हुए हैं. NSE के पूर्व VC रवि नारायण और पूर्व CEO चित्रा रामकृष्णन को-लोकेशन में आरोपी थे. ऐसे में सेबी का ताजा फैसला इनके लिए भी बड़ी राहत है. SEBI के को-लोकेशन मामले में कार्यवाही बंद करने का मतलब है कि NSE के आईपीओ का रास्ता साफ हो गया है.
नहीं मिले कोई सबूत
सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि इस मामले में रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री, सबूत और तथ्यों के अभाव के चलते मिलीभगत या सांठगांठ साबित नहीं हो सकी है. सेबी ने यह भी कहा कि NSE के पास को-लोकेशन सुविधा के उपयोग के लिए कोई डिटेल्ड डिफाइंड पॉलिसी नहीं थी. तथ्य यह है कि 93 TMs को सेकेंडरी सर्वर पर लॉग किया गया था, जिससे मिलीभगत या सांठगांठ की संभावना कम हो जाती है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला को-लोकेशन घोटाले से जुड़ा है, जिसमें कुछ ब्रोकरों पर NSE के सिस्टम, डेटा और ट्रेडिंग सुविधाओं तक तेजी से पहुंच हासिल करके अनुचित लाभ उठाने के आरोप लगे थे. NSE ने 2009 में को-लोकेशन सुविधा शुरू की थी, जिसके तहत व्यापारियों और ब्रोकरों को शुल्क लेकर अपने IT सर्वर को उसके परिसर में स्थापित करने की अनुमति दी गई थी. अब इस मामले पर सेबी ने विराम लगा दिया है. बाजार नियामक का फैसला चित्रा रामकृष्ण, रवि नारायण के साथ-साथ आनंद सुब्रमण्यन, रवींद्र आप्टे, उमेश जैन, महेश सोपारकर और देवीप्रसाद सिंह के लिए भी राहत लेकर आया है.
सालों पुरानी योजना
माना जा रहा है कि सेबी के इस फैसले से NSE का आईपीओ का रास्ता साफ हो गया है. एनएसई की आईपीओ लाने की योजना 2016 से ही अधर में लटकी हुई है. इसी साल कंपनी ने पहली बार आईपीओ के लिए ज़रूरी ड्राफ्ट रेड-हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DHRP) दाखिल किया था. गौरतलब है कि NSE के रजिस्टर्ड यूजर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है. यह आंकड़ा 10 करोड़ को पार कर गया है. मार्च 2021 में NSE पर रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 4 करोड़ के आसपास थी, जो अब बढ़कर 10 करोड़ हो गई है.
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