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SBI के मुनाफे में 14.28% की बढ़ोतरी, दूसरी तिमाही में ₹23,038 करोड़ का शुद्ध लाभ
नेट इंटरेस्ट इनकम में 14.69% का उछाल, बढ़कर ₹49,143 करोड़ हुई; बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के नतीजे जारी कर दिए हैं. बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 14.28 फीसदी बढ़कर ₹23,038 करोड़ हो गया है. पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक ने ₹20,000 करोड़ के आसपास का शुद्ध लाभ दर्ज किया था. इस दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में भी 14.69 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह ₹49,143 करोड़ पर पहुंच गई.
मंगलवार को घोषित नतीजों के मुताबिक, बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार देखने को मिला है. सितंबर 2026 के अंत में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) अनुपात घटकर 1.39 फीसदी रह गया, जो एक साल पहले 1.73 फीसदी था. हालांकि, बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) मामूली गिरावट के साथ 2.94 फीसदी पर आ गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 2.96 फीसदी था.
ब्याज से होने वाली आय में बढ़ोतरी
एसबीआई की ब्याज से होने वाली आय वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 10.46 फीसदी बढ़कर ₹1,32,019 करोड़ हो गई. वहीं, ब्याज खर्च 8.09 फीसदी बढ़कर ₹82,876 करोड़ रहा. इसके चलते बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के ₹42,847 करोड़ से बढ़कर ₹49,143 करोड़ हो गई.
इस दौरान बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 7.28 फीसदी बढ़कर ₹34,226 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹31,904 करोड़ था. बैंक की कुल आय 8.25 फीसदी बढ़कर ₹1,51,084 करोड़ हो गई. वहीं, कुल खर्च 8.54 फीसदी बढ़कर ₹1,16,859 करोड़ रहा.
गैर-ब्याज आय में 4.94 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह ₹20,056 करोड़ से घटकर ₹19,066 करोड़ रह गई. हालांकि, फीस से होने वाली आय 9.63 फीसदी बढ़कर ₹9,549 करोड़ हो गई. इसमें लोन प्रोसेसिंग चार्ज और अन्य बैंकिंग सेवाओं से होने वाली आय का योगदान रहा.
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में हिस्सेदारी बेचने से ₹7,288 करोड़ का फायदा
बैंक के दूसरी तिमाही के नतीजों में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में अपनी हिस्सेदारी बेचने से हुआ ₹7,288 करोड़ का एकमुश्त लाभ भी शामिल है. वहीं, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक को यस बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने से ₹4,593 करोड़ का एकमुश्त लाभ हुआ था.
दोनों तिमाहियों में इस एकमुश्त लाभ की रकम में अंतर का असर बैंक के सालाना मुनाफे की वृद्धि पर भी पड़ा है. एसबीआई ने अपनी एनालिस्ट प्रेजेंटेशन में इन दोनों सौदों से होने वाले लाभ का अलग से ब्योरा दिया है.
बैंक के लोन में 17.84% की बढ़ोतरी, जमा में 12.27% का इजाफा
30 सितंबर 2026 तक एसबीआई का कुल ग्रॉस एडवांस 17.84 फीसदी बढ़कर ₹52.08 लाख करोड़ हो गया. इस दौरान बैंक की कुल जमा राशि भी 12.27 फीसदी बढ़कर ₹62.78 लाख करोड़ पर पहुंच गई.
घरेलू बाजार में बैंक का एडवांस 16.94 फीसदी बढ़कर ₹43.77 लाख करोड़ रहा. वहीं, विदेशी शाखाओं का एडवांस 22.86 फीसदी बढ़कर ₹8.31 लाख करोड़ हो गया.
घरेलू एडवांस में 41.7 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले रिटेल पर्सनल लोन में सालाना आधार पर 14.54 फीसदी की वृद्धि हुई. स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज (SME) को दिए गए कर्ज में 21.97 फीसदी और कृषि क्षेत्र के कर्ज में 22.64 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, कॉरपोरेट एडवांस 16.12 फीसदी बढ़ा.
जमा के मोर्चे पर करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट (CASA) डिपॉजिट 8.13 फीसदी बढ़कर ₹22.97 लाख करोड़ हो गया. वहीं, टर्म डिपॉजिट में 14.26 फीसदी की वृद्धि हुई और यह ₹36.98 लाख करोड़ पर पहुंच गया.
घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार
एसबीआई का पूरे बैंकिंग कारोबार का नेट इंटरेस्ट मार्जिन वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 2.94 फीसदी रहा. यह पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 2.96 फीसदी से कम है. हालांकि, पिछली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 के 2.86 फीसदी के मुकाबले इसमें सुधार हुआ है.
घरेलू कारोबार का नेट इंटरेस्ट मार्जिन बढ़कर 3.11 फीसदी हो गया, जो जून 2026 में समाप्त तिमाही के दौरान 3 फीसदी और पिछले साल की समान तिमाही में 3.08 फीसदी था. इस तरह घरेलू NIM में तिमाही आधार पर 11 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ.
इस सुधार की एक वजह जमा पर बैंक की लागत में कमी आना है. सितंबर 2026 में घरेलू जमा पर लागत घटकर 4.84 फीसदी रह गई, जबकि मार्च 2026 में यह 5.04 फीसदी थी. वहीं, दिए गए कर्ज पर घरेलू यील्ड 8.22 फीसदी रही, जो मार्च 2026 में 8.50 फीसदी थी.
एनपीए में गिरावट से सुधरी एसेट क्वालिटी
एसबीआई की एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार जारी है. सितंबर 2026 के अंत में बैंक का ग्रॉस NPA अनुपात घटकर 1.39 फीसदी रह गया, जबकि सितंबर 2025 में यह 1.73 फीसदी और जून 2026 में 1.47 फीसदी था.
बैंक का ग्रॉस NPA घटकर ₹72,529 करोड़ रह गया, जो एक साल पहले ₹76,243 करोड़ था. इसी तरह नेट NPA अनुपात भी 0.42 फीसदी से घटकर 0.36 फीसदी पर आ गया. सितंबर 2026 के अंत में नेट NPA की रकम ₹18,546 करोड़ रही.
दूसरी तिमाही में नए एनपीए यानी स्लिपेज की रकम ₹5,227 करोड़ रही, जबकि पिछली तिमाही में यह ₹7,046 करोड़ थी. वहीं, लोन लॉस प्रोविजन में सालाना आधार पर 33.23 फीसदी की गिरावट आई और यह ₹2,759 करोड़ रह गया.
बैंक की क्रेडिट कॉस्ट दूसरी तिमाही में 0.22 फीसदी रही, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 0.39 फीसदी थी. वहीं, राइट-ऑफ किए गए खातों को छोड़कर प्रोविजन कवरेज रेशियो 74.43 फीसदी रहा.
कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो बढ़कर 16.09% हुआ
एसबीआई का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CRAR) सितंबर 2026 में बढ़कर 16.09 फीसदी हो गया, जो एक साल पहले 14.62 फीसदी था. वहीं, कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) रेशियो भी सितंबर 2025 के 11.47 फीसदी से बढ़कर 13.34 फीसदी पर पहुंच गया.
बैंक की बैलेंस शीट में भी विस्तार हुआ है. सितंबर 2026 के अंत में यह सालाना आधार पर 12.88 फीसदी बढ़कर ₹78.88 लाख करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में बैंक की बैलेंस शीट ₹69.87 लाख करोड़ थी.
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