सैमसंग ने भारत में दिसंबर 1995 में कदम रखा था, तब से अब तक कंपनी ग्राहकों का विश्वास बनाए रखे हुए है. उसके प्रोडक्ट्स को काफी पसंद किया जाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
मोबाइल से लेकर TV, फ्रिज तक बनाने वाली दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनी सैमसंग (Samsung) भारत में जमकर कमाई कर रही है. यह कहना गलत नहीं होगा कि Samsung के Bharat में 'अच्छे दिन' चल रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिण कोरिया की यह कंपनी भारत में एक लाख करोड़ रुपए के सालाना रिवेन्यु के करीब पहुंच गई है. सैमसंग के पूर्ण स्वामित्व वाली सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की 2022-23 में कुल इनकम 98,924 करोड़ रुपए रही. बता दें कि सैमसंग ने लगभग 27 वर्ष पहले भारत में अपना ऑपरेशन शुरू किया था.
बिक्री में 16 प्रतिशत का उछाल
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज मेकर सैमसंग इंडिया की वित्त वर्ष 2023 में बिक्री FMCG कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर और ITC लिमिटेड से भी ज्यादा है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि फाइनेंशियल ईयर में 2023 में सैमसंग की सेल में 16% की तेजी आई है. हालांकि, पिछले साल के मुकाबले उसके नेट प्रॉफिट में जरूर कुछ कमी देखने को मिली है. इस वित्त वर्ष में सैमसंग का मोबाइल फोन बिजनेस से आने वाला रिवेन्यु बढ़ा है. कंपनी ने इस बिजनेस से कुल 70,292 करोड़ रुपए जुटाए हैं. पिछले साल सैमसंग इंडिया के स्मार्टफोन की बिक्री में कम से कम 27 फीसदी का उछाल आया है.
इस वजह से मिला कंपनी को बूस्ट
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अल्ट्रा-प्रीमियम गैलेक्सी Z सीरीज की सफलता से सैमसंग के मोबाइल बिजनेस को बूस्ट मिला है. गौर करने वाली बात ये है कि ओवरऑल मार्केट में नरमी के बावजूद पिछले साल सैमसंग के मोबाइल फोन की बिक्री में तेजी आई है. भारत में सैमसंग के टोटल बिजनेस में मोबाइल सेगमेंट की अच्छी-खासी हिस्सेदारी है. एक अनुमान के मुताबिक, यह आंकड़ा इस वित्त वर्ष 71 प्रतिशत रहा है, जो फाइनेंशियल ईयर 2022 में 67% था. यानी इसमें सीधे 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
जमकर बिके होम अप्लायंसेज
भारत के मोबाइल मार्केट में सैमसंग की हिस्सेदारी की बात करें, तो यह 18 प्रतिशत है. जबकि चीनी कंपनी Vivo की 17, रियलमी की 12 और Oppo की करीब 11 फीसदी है. मोबाइल के बाद सैमसंग की कमाई का दूसरा बड़ा सोर्स होम अप्लायंसेज हैं. FY-2023 में कंपनी ने 11,844 करोड़ रुपए के होम अप्लायंसेज बेचे, जो पिछले साल के मुकाबले 18 प्रतिशत अधिक है. सैमसंग के TV को भी काफी ज्यादा पसंद किया जाता है. इस सेगमेंट में तमाम कंपनियां मौजूद हैं, लेकिन सैमसंग का अपना एक अलग स्थान है.
वार्ता के बाद भारत और इटली ने द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना (Military Cooperation Plan) 2026-27 का अनावरण किया. यह योजना दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, अभ्यास और रणनीतिक समन्वय को और बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और इटली ने बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने का फैसला किया है. भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो (Guido Crosetto) के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने सैन्य साजो-सामान के सह-उत्पादन और रक्षा औद्योगिक ढांचा विकसित करने पर सहमति जताई. इस कदम से न केवल सुरक्षा सहयोग मजबूत होगा, बल्कि रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा.
सह-उत्पादन और तकनीकी सहयोग पर जोर
बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया. इसके साथ ही आधुनिक तकनीकों के आदान-प्रदान और सार्वजनिक-निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करने पर भी सहमति बनी. यह पहल भविष्य में उन्नत और घातक हथियार प्रणालियों के विकास का रास्ता खोल सकती है.
MCP 2026-27 का अनावरण
वार्ता के बाद भारत और इटली ने द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना (Military Cooperation Plan) 2026-27 का अनावरण किया. यह योजना दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, अभ्यास और रणनीतिक समन्वय को और बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.
वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा
इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
आत्मनिर्भर भारत और इटली की पहल का मेल
राजनाथ सिंह ने कहा, भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ कार्यक्रम और इटली की रक्षा सहयोग पहलों के बीच तालमेल बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया गया. दोनों देशों ने पारस्परिक रूप से लाभकारी रक्षा औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई.
समुद्री सुरक्षा और सूचना साझाकरण
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सहमति जताई. इसमें गुरुग्राम स्थित सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) के माध्यम से समुद्री सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना शामिल है. भारत और इटली, दोनों ही प्राचीन समुद्री राष्ट्र हैं और इस क्षेत्र में सहयोग को अहम मानते हैं.
रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती
बैठक से पहले गुइडो क्रोसेटो ने नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमेरियल पर पुष्पांजलि अर्पित की और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने तीनों सेनाओं के सलामी गारद का निरीक्षण भी किया. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा. सह-उत्पादन और तकनीकी सहयोग से दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं में बढ़ोतरी होगी और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी.
SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी AIF स्कीम का पहला क्लोज उसकी लॉन्च पात्रता की तारीख से 12 महीने के भीतर पूरा होना चाहिए. इससे फंड जुटाने की प्रक्रिया में अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पूंजी बाजार को और तेज व कुशल बनाने की दिशा में भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (SEBI) ने बड़ा बदलाव किया है. अब ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) स्कीमों के लिए फास्ट-ट्रैक अप्रूवल सिस्टम लागू किया गया है, जिसके तहत आवेदन के 30 दिनों के भीतर फंड लॉन्च करना संभव होगा. इससे निवेश प्रक्रिया में तेजी आएगी और बाजार में पूंजी का प्रवाह बेहतर होगा.
फास्ट-ट्रैक सिस्टम से क्या बदला?
नए फ्रेमवर्क के तहत AIF (एलवीएफ यानी बड़े वैल्यू फंड्स को छोड़कर) अपने प्राइवेट प्लेसमेंट मेमोरेंडम (PPM) के साथ आवेदन करने के 30 दिन बाद स्कीम लॉन्च कर सकेंगे. इस दौरान यदि नियामक की ओर से कोई रोक या विशेष निर्देश नहीं आता है, तो फंड लॉन्च और निवेशकों को दस्तावेज जारी किए जा सकते हैं.
पहली बार लॉन्च होने वाली स्कीमों के लिए नियम
पहली बार फंड लॉन्च करने वाले AIF के लिए भी प्रक्रिया को सरल किया गया है. ऐसे फंड या तो SEBI से रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद या आवेदन के 30 दिन पूरे होने के बाद, जो भी बाद में हो अपनी स्कीम शुरू कर सकते हैं. हालांकि, SEBI की ओर से आने वाली टिप्पणियों या सुझावों को स्कीम लॉन्च से पहले शामिल करना अनिवार्य होगा.
पुराने सिस्टम से कैसे अलग है नया फ्रेमवर्क?
पहले SEBI PPM दस्तावेजों की विस्तार से समीक्षा करता था और अपनी टिप्पणियों के बाद ही स्कीम को आगे बढ़ने की अनुमति मिलती थी. इस प्रक्रिया में कई बार संशोधन के कारण देरी होती थी. नया फास्ट-ट्रैक सिस्टम इस देरी को कम करने और प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध बनाने के लिए लाया गया है.
मर्चेंट बैंकर और मैनेजर की बढ़ी जिम्मेदारी
अब खुलासों (disclosures) की सटीकता और पूर्णता की जिम्मेदारी पूरी तरह मर्चेंट बैंकरों और AIF मैनेजरों पर होगी. यानी नियामकीय भरोसे के साथ उद्योग पर जवाबदेही भी बढ़ाई गई है.
12 महीने में पूरा करना होगा पहला क्लोज
SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी AIF स्कीम का पहला क्लोज उसकी लॉन्च पात्रता की तारीख से 12 महीने के भीतर पूरा होना चाहिए. इससे फंड जुटाने की प्रक्रिया में अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित होगी.
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम भारत के वैकल्पिक निवेश बाजार को और गति देगा. तेज मंजूरी से फंड मैनेजर जल्दी निवेश शुरू कर पाएंगे, जिससे स्टार्टअप्स, प्राइवेट इक्विटी और अन्य सेक्टरों को समय पर पूंजी मिल सकेगी. कुल मिलाकर, यह पहल भारतीय पूंजी बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
कंपनी ने Nutritionalab में अपनी हिस्सेदारी बेचने से हुई एकमुश्त कमाई का भी फायदा उठाया, जिससे कुल मुनाफे में तेज उछाल देखने को मिला.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 21.4% बढ़कर ₹2,992 करोड़ पहुंच गया. साथ ही कंपनी ने निवेशकों के लिए ₹22 प्रति शेयर अंतिम डिविडेंड का ऐलान किया है. बेहतर बिक्री, मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ और पोर्टफोलियो सुधार के चलते कंपनी के नतीजे बाजार अनुमान से बेहतर रहे.
बिक्री में जोरदार बढ़त, अनुमान से बेहतर रहे आंकड़े
मार्च तिमाही में HUL की शुद्ध बिक्री 7.6% बढ़कर ₹16,351 करोड़ रही. यह आंकड़ा विश्लेषकों के अनुमान से बेहतर रहा. कंपनी ने बताया कि तिमाही के दौरान बिक्री में 7% और वॉल्यूम यानी उत्पादों की मात्रा में 6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इन आंकड़ों में आइसक्रीम कारोबार शामिल नहीं है, जिसे 1 दिसंबर से अलग कर दिया गया था.
एकमुश्त आय से बढ़ा मुनाफा
कंपनी ने Nutritionalab में अपनी हिस्सेदारी बेचने से हुई एकमुश्त कमाई का भी फायदा उठाया, जिससे कुल मुनाफे में तेज उछाल देखने को मिला. हालांकि असाधारण आय को हटाकर देखें तो चौथी तिमाही में कंपनी का समायोजित शुद्ध लाभ 4% बढ़कर ₹2,711 करोड़ रहा. फिर भी यह पिछले 12 तिमाहियों का सबसे बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है.
EBITDA और मार्जिन भी मजबूत
तिमाही के दौरान कंपनी का EBITDA 6% बढ़कर ₹3,841 करोड़ पहुंच गया. EBITDA मार्जिन 23.7% रहा, जो लागत नियंत्रण और बेहतर परिचालन क्षमता को दर्शाता है. HUL की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक प्रिया नायर ने कहा कि कंपनी ने इस साल वृद्धि को तेज करने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए हैं. इनमें पोर्टफोलियो को मजबूत करना, मांग बढ़ाने के लिए निवेश बढ़ाना और संगठनात्मक ढांचे को सरल बनाना शामिल है.
उन्होंने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के कारण कमोडिटी कीमतों और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. कंपनी अनुशासित बचत, मजबूत सप्लाई चेन और सोच-समझकर की गई प्राइसिंग रणनीति से इन चुनौतियों का सामना कर रही है.
पूरे साल का प्रदर्शन भी दमदार
वित्त वर्ष 2026 में HUL का कुल कारोबार ₹63,763 करोड़ रहा. वहीं पूरे साल का शुद्ध मुनाफा ₹10,324 करोड़ दर्ज किया गया.
निवेशकों के लिए बड़ा इनाम
कंपनी के निदेशक मंडल ने ₹22 प्रति शेयर अंतिम डिविडेंड देने की सिफारिश की है. इसके साथ ही पूरे साल में HUL का कुल डिविडेंड भुगतान ₹9,633 करोड़ तक पहुंच जाएगा. मजबूत तिमाही नतीजों और डिविडेंड घोषणा के बाद अब निवेशकों की नजर कंपनी की मांग वृद्धि, ग्रामीण बाजारों की रिकवरी और आने वाले वित्त वर्ष की रणनीति पर रहेगी. HUL के नतीजे संकेत देते हैं कि भारत का FMCG सेक्टर फिर से रफ्तार पकड़ रहा है.
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है. पिछले सत्र में ही एफपीआई ने ₹2,468.42 करोड़ की इक्विटी बेच दी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव में भारतीय रुपया गुरुवार को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.01 पर खुला और शुरुआती कारोबार में ही तेजी से गिरकर 95.34 के रिकॉर्ड इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया. बाद में यह 95.25 के आसपास कारोबार करता दिखा, जो पिछले बंद स्तर से 37 पैसे की गिरावट है. इससे पहले सत्र में रुपया 94.88 के सर्वकालिक बंद स्तर तक गिर चुका था.
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से दबाव
ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.46 प्रतिशत बढ़कर 122.11 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. वैश्विक आपूर्ति में बाधा और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण मार्ग में रुकावटों ने तेल कीमतों को बढ़ाया है. विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती तेल कीमतें रुपये पर सबसे बड़ा दबाव बना रही हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी कारण
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है. पिछले सत्र में ही एफपीआई ने ₹2,468.42 करोड़ की इक्विटी बेच दी.
डॉलर इंडेक्स और वैश्विक संकेत
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 98.79 पर मामूली कमजोरी के साथ स्थिर रहा. वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के फैसले ने भी वैश्विक मुद्रा बाजार को प्रभावित किया.
शेयर बाजार में भी गिरावट
घरेलू शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखी गई. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE Sensex) 687.75 अंक गिरकर 76,808.61 पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE Nifty 50) 228.60 अंक टूटकर 23,949.05 पर पहुंच गया.
बॉन्ड यील्ड और कैपिटल आउटफ्लो का असर
बॉन्ड यील्ड लगभग 7 प्रतिशत तक पहुंचने से भी विदेशी पूंजी बाहर निकल रही है, जिससे मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में रुपया दबाव में रह सकता है. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक जोखिम और विदेशी निवेश प्रवाह आगे भी मुद्रा की दिशा तय करेंगे.
प्रमुख बिजनेस लीडर और ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार चंद्रिका टंडन और एचडीएफसी लाइफ (HDFC Life) की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ विभा पडालकर ने हाल ही में IIM A और IIM B के दीक्षांत समारोहों को संबोधित किया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रमुख बिजनेस लीडर और ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार चंद्रिका टंडन और एचडीएफसी लाइफ (HDFC Life) की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ विभा पडालकर ने हाल ही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (IIM A) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (IIM B) द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोहों को संबोधित किया. उन्होंने छात्रों से जीवन और करियर में “इंटीग्रेटिव इंटेलिजेंस” अपनाने और “सोच-समझकर फैसले लेने” की अपील की.
इंटीग्रेटिव इंटेलिजेंस से बनेगा असली नेतृत्व
IIM A की 1975 बैच की पूर्व छात्रा चंद्रिका टंडन ने कहा, ‘इंटीग्रेटिव इंटेलिजेंस’ का मतलब है, “अंतर्दृष्टि, इरादा, आंतरिक शांति और प्रभाव”. उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने दायरे से बाहर निकलें, रणनीतिक रूप से नए क्षेत्रों को समझें और आलोचनात्मक सोच विकसित करें.
उन्होंने आगे कहा, “किसी एक रास्ते पर अटककर मत रहिए, क्योंकि बड़े बदलाव सीधे रास्तों पर नहीं, बल्कि उनके संगम पर होते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में ‘इंटीग्रेटिव इंटेलिजेंस’ का मतलब है पूरी तरह इंसान बने रहना, और यही असली नेतृत्व को परिभाषित करेगा.”
संकरी सोच से बाहर निकलने की जरूरत
टंडन ने कहा कि आज अकादमिक दुनिया में अलग-अलग क्षेत्रों का मेल हो रहा है और पुराने पारंपरिक रास्ते खत्म हो रहे हैं. अगर आप अपने सीमित दायरे में ही फंसे रहेंगे, तो नए अवसरों को समझ नहीं पाएंगे. इनोवेशन अब अलग-अलग क्षेत्रों के मेल पर ही होगा. उन्होंने ‘इरादे’ की व्याख्या करते हुए कहा कि जब आप किसी रास्ते को चुनते हैं और उसके प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध होते हैं, वही असली इरादा होता है. यह आपको बिना सोचे-समझे जीने से निकालकर उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर ले जाता है.
सोच-समझकर फैसले लेने की सलाह
वहीं, IIM B के दीक्षांत समारोह में विभा पडालकर ने छात्रों से कहा कि जीवन के अगले चरण में प्रवेश करते समय तीन बातों पर ध्यान दें, पहला, भविष्य का अनुमान लगाने की क्षमता; दूसरा, रुककर सोचने का अनुशासन; और तीसरा, समझदारी से चुनाव करने की बुद्धिमत्ता.
उन्होंने कहा, “हर ‘हां’ के साथ कहीं न कहीं ‘ना’ भी जुड़ी होती है. समय के साथ आपकी जिंदगी सिर्फ इस बात से नहीं तय होगी कि आपने क्या चुना, बल्कि इससे भी कि आपने क्या नहीं चुना.”
व्यक्तिगत जीवन में भी संतुलन जरूरी
पडालकर ने छात्रों को सलाह दी कि वे ऐसे लोगों को चुनें जो उन्हें आगे बढ़ने में मदद करें और जीवन को बेहतर बनाएं. उन्होंने कहा, “अगर सफलता उन लोगों की कीमत पर मिलती है जो आपके लिए महत्वपूर्ण हैं, तो वह सफलता शायद मायने नहीं रखती,” उन्होंने कहा कि जीवन में कोई एक सही रास्ता नहीं होता. इसमें ठहराव, मोड़ और संदेह के पल आते हैं, और यही जीवन का हिस्सा हैं, असफलता नहीं.
पडालकर ने कहा कि जीवन हजारों छोटे-छोटे फैसलों से बनता है, जहां महत्वाकांक्षा और धैर्य, गति और ठहराव के बीच संतुलन बनाना जरूरी होता है.
(यह शीर्ष बिजनेस और इंजीनियरिंग संस्थानों के दीक्षांत भाषणों पर आधारित श्रृंखला की पहली कड़ी है.)
ETF बाजार में ट्रेडिंग गतिविधियां भी तेजी से बढ़ी हैं. FY21 में जहां औसत दैनिक टर्नओवर ₹237 करोड़ था, वहीं अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच यह ₹4,200 करोड़ से ज्यादा पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के प्रति निवेशकों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2026 (FY26) में ETF कैटेगरी में कुल ₹1.81 लाख करोड़ का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. खास बात यह रही कि इस बार निवेशकों ने सिर्फ इक्विटी ETF पर भरोसा नहीं जताया, बल्कि गोल्ड और सिल्वर ETF में रिकॉर्ड निवेश किया. इससे साफ संकेत मिलता है कि निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो को ज्यादा संतुलित और विविध बना रहे हैं.
FY26 में टूटा सभी वर्षों का रिकॉर्ड
डेटा के अनुसार FY26 में ETF में ₹1,81,125 करोड़ का कुल नेट इनफ्लो आया. यह FY22 के ₹83,390 करोड़ के पिछले रिकॉर्ड से दोगुने से भी ज्यादा है. FY21 में ETF में ₹46,739 करोड़, FY22 में ₹83,390 करोड़, FY23 में ₹60,179 करोड़, FY24 में ₹48,142 करोड़ और FY25 में ₹83,079 करोड़ का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया था. इसके मुकाबले FY26 में जबरदस्त उछाल देखने को मिला.
गोल्ड और सिल्वर ETF ने मारी बाजी
FY26 में गोल्ड ETF में ₹68,868 करोड़ और सिल्वर ETF में ₹30,412 करोड़ का निवेश आया. यानी दोनों कैटेगरी में कुल ₹99,280 करोड़ का नेट इनफ्लो दर्ज हुआ, जो कुल ETF निवेश का करीब 55 प्रतिशत है. वहीं इक्विटी ETF में ₹77,780 करोड़ और डेट ETF में ₹4,066 करोड़ का निवेश आया. कुल हिस्सेदारी में गोल्ड ETF का 38 प्रतिशत, सिल्वर ETF का 16.8 प्रतिशत, इक्विटी ETF का 42.9 प्रतिशत और डेट ETF का 2.2 प्रतिशत योगदान रहा.
निवेशकों की रणनीति में आया बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अब केवल शेयर बाजार पर निर्भर नहीं रहना चाहते. वैश्विक अनिश्चितता, महंगाई और बाजार उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने गोल्ड और सिल्वर जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया है. ETF के जरिए इन एसेट्स में निवेश आसान, पारदर्शी और कम लागत वाला विकल्प बनकर उभरा है.
गोल्ड ETF में जबरदस्त ग्रोथ
FY26 में गोल्ड ETF का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) मार्च 2025 के ₹59,000 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 में ₹1.71 लाख करोड़ से ज्यादा हो गया. यह करीब 191 प्रतिशत की वृद्धि है. FY21 से FY25 के पूरे पांच वर्षों में गोल्ड ETF में कुल ₹30,200 करोड़ से ज्यादा निवेश आया था, जबकि अकेले FY26 में ₹68,868 करोड़ का निवेश दर्ज हुआ.
सिल्वर ETF भी तेजी से लोकप्रिय
साल 2022 में शुरू हुए सिल्वर ETF ने भी FY26 में शानदार प्रदर्शन किया. इस दौरान ₹30,000 करोड़ से ज्यादा निवेश आया. मार्च 2025 में सिल्वर ETF का कुल AUM ₹15,339 करोड़ था, जिसे FY26 के निवेश ने पीछे छोड़ दिया. चांदी की कीमतों में तेजी और औद्योगिक मांग बढ़ने से निवेशकों का रुझान इस कैटेगरी में बढ़ा.
ETF बाजार में बढ़ी लिक्विडिटी
ETF बाजार में ट्रेडिंग गतिविधियां भी तेजी से बढ़ी हैं. FY21 में जहां औसत दैनिक टर्नओवर ₹237 करोड़ था, वहीं अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच यह ₹4,200 करोड़ से ज्यादा पहुंच गया. कमोडिटी ETF का औसत दैनिक टर्नओवर ₹2,700 करोड़ रहा, जो इक्विटी ETF के ₹745 करोड़ से काफी ज्यादा है.
FY26 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में निवेशकों की सोच तेजी से बदल रही है. अब वे सिर्फ इक्विटी ही नहीं, बल्कि गोल्ड और सिल्वर जैसे एसेट्स को भी पोर्टफोलियो का हिस्सा बना रहे हैं. आने वाले वर्षों में ETF इंडस्ट्री के लिए यह बड़ा ग्रोथ ट्रेंड साबित हो सकता है.
पिछले सात वर्षों में SPNI के साथ अपने कार्यकाल के दौरान वाधवा ने कंपनी की मानव संसाधन और संगठनात्मक रणनीति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सोना पिक्चर्स नेटवर्क्स (Sony Pictures Networks India -SPNI) ने घोषणा की है कि मनु वाधवा 1 जुलाई 2026 से अपनी वर्तमान भूमिका चीफ ह्यूमन रिसोर्सेज ऑफिसर (CHRO) से स्ट्रैटेजी एडवाइजर की नई भूमिका में स्थानांतरित होंगी. नई भूमिका में वाधवा कंपनी के नेतृत्व दल के साथ मिलकर प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताओं पर काम करेंगी. वह अपने गहन संस्थागत अनुभव और संगठनात्मक परिवर्तन में विशेषज्ञता का उपयोग करेंगी.
सात वर्षों का प्रभावशाली कार्यकाल
पिछले सात वर्षों में SPNI के साथ अपने कार्यकाल के दौरान वाधवा ने कंपनी की मानव संसाधन और संगठनात्मक रणनीति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने पीपल फंक्शन को बिजनेस रणनीति के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने, नेतृत्व क्षमता को सशक्त बनाने और प्रदर्शन व रिवॉर्ड सिस्टम को आधुनिक बनाने में अहम योगदान दिया.
परिवर्तन और विकास में अहम भूमिका
उनके नेतृत्व में कंपनी ने विकास और परिवर्तन के विभिन्न चरणों, जैसे नेतृत्व परिवर्तन और संरचनात्मक पुनर्गठन, को सफलतापूर्वक पार किया. साथ ही, उन्होंने एक ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करने में मदद की, जो प्रदर्शन और समावेशन के बीच संतुलन बनाए रखती है.
SPNI के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ गौरव बनर्जी ने कहा, “मनु पिछले कई वर्षों से SPNI के विकास का अभिन्न हिस्सा रही हैं. उन्होंने हमारे संगठनात्मक ढांचे और संस्कृति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. हमें विश्वास है कि स्ट्रैटेजी एडवाइजर के रूप में उनका अनुभव आगे भी कंपनी के लिए मूल्यवान रहेगा.”
मनु वाधवा ने कहा, “SPNI मेरे पेशेवर सफर का एक अहम हिस्सा रहा है. इस दौरान मुझे कंपनी के परिवर्तन और विकास में योगदान देने का अवसर मिला, जिसके लिए मैं आभारी हूं. नई भूमिका में मैं नेतृत्व टीम के साथ मिलकर कंपनी की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर काम जारी रखने के लिए उत्साहित हूं.” वाधवा ने GE, American Express और Coca-Cola जैसी वैश्विक कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण मिला है.
SPNI ने यह भी बताया कि कंपनी जल्द ही नए चीफ ह्यूमन रिसोर्सेज ऑफिसर की खोज शुरू करेगी. इस संबंध में आगे की जानकारी समय आने पर साझा की जाएगी.
दुबई का यह कदम रियल एस्टेट बाजार को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे न केवल विदेशी निवेश बढ़ेगा, बल्कि छोटे निवेशकों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय संपत्ति बाजार में प्रवेश आसान हो जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दुबई ने अपने रियल एस्टेट सेक्टर को नई रफ्तार देने के लिए वीजा नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब छोटे और मिड-इनकम निवेशक भी कम बजट में प्रॉपर्टी खरीदकर रेजिडेंसी वीजा हासिल कर सकेंगे. इस फैसले से विदेशी निवेशकों के लिए दुबई का बाजार पहले से अधिक आकर्षक बन गया है.
वीजा नियमों में बड़ा बदलाव
दुबई सरकार ने दो साल के प्रॉपर्टी-लिंक्ड रेजिडेंसी वीजा के लिए पहले लागू न्यूनतम संपत्ति मूल्य की शर्त को हटा दिया है. पहले निवेशकों को कम से कम AED 750,000 (करीब ₹1.9 करोड़) की संपत्ति खरीदनी जरूरी थी, लेकिन अब यह बाध्यता खत्म कर दी गई है.
संयुक्त निवेश के लिए नई सीमा तय
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नए नियमों के तहत संयुक्त रूप से खरीदी गई प्रॉपर्टी में भी बदलाव किया गया है. अब प्रत्येक निवेशक की न्यूनतम हिस्सेदारी AED 400,000 (करीब ₹1.03 करोड़) होनी जरूरी होगी, पहले यह सीमा AED 750,000 थी. इस बदलाव से छोटे निवेशकों के लिए रियल एस्टेट बाजार में प्रवेश आसान हो गया है.
छोटे निवेशकों के लिए खुला अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला खासकर मिड-सेगमेंट निवेशकों के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है. इससे न केवल व्यक्तिगत खरीदारों की पहुंच बढ़ेगी, बल्कि उन प्रॉपर्टीज की बिक्री भी बढ़ने की उम्मीद है, जो पहले वीजा पात्रता के कारण सीमित दायरे में थीं.
बाजार की स्थिति और दबाव
यह कदम ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण दुबई के रियल एस्टेट बाजार में कुछ दबाव देखा जा रहा है. हाल के महीनों में बिक्री में गिरावट के चलते डेवलपर्स को डिस्काउंट और आकर्षक पेमेंट प्लान देने पड़े हैं.
मजबूत आंकड़े और निवेश का रुझान
2025 में दुबई में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, जहां AED 547 अरब के सौदे दर्ज किए गए. इसमें भारत और ब्रिटेन के निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी रही. रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि नया नियम बाजार में संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा. एक तरफ जहां छोटे निवेशकों को अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर संयुक्त निवेश में न्यूनतम हिस्सेदारी की शर्त वीजा के दुरुपयोग और “वीजा पूलिंग” जैसी प्रथाओं पर रोक लगाएगी.
सरकार द्वारा यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाया गया है, जिसका उद्देश्य दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की अनावश्यक आवाजाही को कम करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नई दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब राजधानी में प्रवेश करने वाले कमर्शियल वाहनों को पहले से ज्यादा पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) देना होगा. नई दरों के तहत कुछ भारी वाहनों पर यह शुल्क ₹4000 तक पहुंच गया है. यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाया गया है, जिसका उद्देश्य दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की अनावश्यक आवाजाही को कम करना है.
ECC शुल्क में बढ़ोतरी का नया ढांचा
सरकार द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, विभिन्न कैटेगरी के कमर्शियल वाहनों पर शुल्क में ₹600 से ₹1400 तक की बढ़ोतरी की गई है. नई दरें इस प्रकार हैं:
1. कैटेगरी 2 (हल्की कमर्शियल गाड़ियां) और कैटेगरी 3 (2-एक्सल ट्रक):
₹1400 से बढ़ाकर ₹2000
2. कैटेगरी 4 (3-एक्सल ट्रक) और कैटेगरी 5 (4 या उससे अधिक एक्सल ट्रक):
₹2600 से बढ़ाकर ₹4000
इसके साथ ही अब हर साल ECC दरों में 5% की ऑटोमैटिक बढ़ोतरी भी लागू होगी.
सिर्फ राजस्व नहीं, प्रदूषण पर रोक
दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का कहना है कि यह फैसला केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि एक सख्त पर्यावरणीय नियंत्रण उपाय है. उन्होंने कहा कि संशोधित ECC का उद्देश्य डीजल से चलने वाले प्रदूषणकारी वाहनों की अनावश्यक एंट्री को कम करना है और ट्रांसपोर्ट सिस्टम को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाना है.
सुप्रीम कोर्ट और CAQM की भूमिका
फरवरी में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सुझाव दिया था कि ECC लंबे समय से नहीं बढ़ाया गया है. इस वजह से कई कमर्शियल वाहन वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की बजाय दिल्ली के रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा था.
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार के अनुसार इस कदम के पीछे मुख्य कारण हैं:
1. 2015 में तय ECC अब प्रभावी नहीं रहा
2. डीजल वाहनों की अनियंत्रित एंट्री रोकना
3. ट्रांसपोर्ट कंपनियों को साफ ईंधन वाले विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना
4. दिल्ली में ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों को कम करना
ट्रांसपोर्ट सेक्टर में असंतोष भी
ECC बढ़ोतरी के फैसले का ट्रांसपोर्ट सेक्टर ने विरोध किया है. ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का कहना है कि बढ़े हुए शुल्क से लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ेगा.
दिल्ली की हवा सुधारने की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका है कि जो भारी वाहन जरूरी नहीं हैं, उन्हें दिल्ली में प्रवेश करने के बजाय एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करना चाहिए. सरकरा को इस नई ECC व्यवस्था से उम्मीद है कि अनावश्यक ट्रैफिक कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि ECC बढ़ने का असर परिवहन लागत पर पड़ेगा. इससे माल ढुलाई महंगी हो सकती है, जिसका बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर दिख सकता है. ECC में यह बढ़ोतरी दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक सख्त कदम है. हालांकि इससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर लागत का दबाव बढ़ेगा, लेकिन सरकार का दावा है कि यह कदम राजधानी की हवा को साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत की वैश्विक सीफेरर हिस्सेदारी को 20% तक पहुंचाना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत ने समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ₹51,383 करोड़ के निवेश की योजना घोषित की है. इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2026–27 में 62 नए जहाज शामिल किए जाएंगे, जिससे देश की शिपिंग क्षमता में बड़ा विस्तार होगा. यह घोषणा केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सरबनंदा सोनोवल ने नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान की.
आत्मनिर्भर शिपिंग कार्यक्रम को गति
सरकार का यह कदम “आत्मनिर्भर शिपिंग कार्यक्रम” के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य भारत की समुद्री निर्भरता को कम करना और घरेलू शिपिंग क्षमता को मजबूत करना है. इस योजना से लगभग 2.85 मिलियन ग्रॉस टन (GT) अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की उम्मीद है, जिससे भारत का शिपिंग इकोसिस्टम और मजबूत होगा.
किन जहाजों पर होगा निवेश
इस विस्तार योजना में कई प्रकार के जहाज जैसे कंटेनर शिप, एलपीजी कैरियर, कच्चे तेल के टैंकर, ग्रीन टग्स और ड्रेजिंग वेसल्स शामिल हैं. सरकार का फोकस ऊर्जा परिवहन और वैश्विक व्यापार के लिए जरूरी जहाजों की क्षमता बढ़ाने पर है.
भारतीय शिपिंग कॉर्पोरेशन की बड़ी भूमिका
शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) इस योजना में अहम भूमिका निभा रही है. तेल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर SCI 59 जहाजों की खरीद की योजना पर काम कर रही है. इसके अलावा, कंपनी को विशेष रूप से अमोनिया परिवहन के लिए जहाज बनाने की दिशा में भी तैयार किया जा रहा है.
भारत की शिपिंग क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि
वित्त वर्ष 2026 में भारत की कुल शिपिंग क्षमता बढ़कर 142 मिलियन ग्रॉस टन तक पहुंच गई है. इस वर्ष 92 नए जहाज जोड़े गए, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि में से एक है.
बंदरगाहों और ढांचे में तेज निवेश
वित्त वर्ष 2025–26 में भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने 915.17 मिलियन टन कार्गो हैंडल किया, जो लक्ष्य से अधिक है. कार्गो में 7.06% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जो समुद्री व्यापार की मजबूत रिकवरी को दर्शाती है. पूंजीगत व्यय भी बढ़कर ₹14,953 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह ₹9,708 करोड़ था.
सरकार का नीति फोकस
सरकार ने सभी संबंधित विभागों को एक विस्तृत व्हाइट पेपर तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें मौजूदा कमियां, लक्ष्य और समयबद्ध रोडमैप शामिल होगा. इस प्रक्रिया में कई मंत्रालय शामिल होंगे, जिनमें वाणिज्य, पेट्रोलियम, रसायन और शिपिंग विभाग प्रमुख हैं.
वैश्विक समुद्री जोखिम और रणनीति
बैठक में वैश्विक व्यापार मार्गों में बढ़ते जोखिमों, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे क्षेत्रों की स्थिति पर भी चर्चा हुई. सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक कार्गो की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षमता विस्तार को जरूरी बताया.
भारत की समुद्री ताकत
भारत के पास 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 111 राष्ट्रीय जलमार्ग और 12 प्रमुख बंदरगाह हैं. इसके अलावा, भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन समुद्री श्रमिक आपूर्तिकर्ता देशों में शामिल है, जहां लगभग 12% वैश्विक सीफेरर्स भारतीय हैं.
सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत की वैश्विक सीफेरर हिस्सेदारी को 20% तक पहुंचाना है. बढ़ते निवेश, नए जहाजों और नीति समन्वय के साथ भारत अपने समुद्री क्षेत्र को अधिक आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.