नहीं होगी Sam Altman की वापसी, इन्हें सौंपी जाएगी Open AI की कमान!

Sam Altman की वापसी को लेकर काफी बड़ी खबर सामने आ रही है और उनकी कुर्सी संभालने वाले व्यक्ति का नाम भी सामने आ रहा है.

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Monday, 20 November, 2023
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मेहनत करके आप एक घर खड़ा करें और आगे चलकर कोई आपको उसी घर से निकाल दे तो आप जो महसूस करेंगे फिलहाल वही Open AI के पूर्व CEO, सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) भी महसूस कर रहे हैं. कुछ लोगों को शायद अभी भी उम्मीद है कि सैम की वापसी होगी और अब सैम की वापसी को लेकर एक काफी बड़ी खबर सामने आ रही है. 

कौन लेगा Sam Altman की जगह?
खबर आ रही है Open AI के पूर्व CEO सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) की वापसी अब किसी हालत में नहीं हो सकती. इतना ही नहीं, सामने आ रही जानकारी की मानें तो सैम की कुर्सी संभालने के लिए नए व्यक्ति की तलाश भी खत्म हो चुकी है और माना जा रहा है कि सैम की जगह Twitch के पूर्व प्रमुख Emmett Shear को कंपनी का अस्थायी CEO बनाया जाएगा. आपको बता दें कि यह जानकारी कंपनी के कर्मचारियों के साथ कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल Ilya Sutskever द्वारा साझा की गई है. Twitch, अमेजन डॉट कॉम (Amazon.Com Inc) द्वारा शुरू किया गया एक लाइव विडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म है और इसकी शुरुआत करने में Emmett Shear ने काफी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 

मीरा मूर्ति ने दिया Sam Altman को न्यौता
आपको बता दें कि Emmett Shear ने इस साल की शुरुआत में ही Twitch में अपने पद से इस्तीफा दिया था. पिछले हफ्ते की शुरुआत में ही Open AI ने सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) के अंतरिम विकल्प के रूप में मीरा मूर्ति (Mira Murati) का चयन किया था. लेकिन सामने आ रही जानकारी और दावों को सही मानें तो ऐसा लगता है कि Open AI को अलविदा कहने वाले लोगों में अब मीरा मूर्ति का नाम भी शामिल हो जाएगा. कंपनी ने सैम ऑल्टमैन को वापस बुलाने की काफी कोशिशें की हैं लेकिन सैम ने साफ़ कर दिया है कि वह वापस नहीं आयेंगे. आपको बता दें कि हाल ही में मीरा मूर्ति ने Open AI के पूर्व CEO सैम ऑल्टमैन को न्यौता दिया था जिसके बाद Open AI के पूर्व प्रेजिडेंट Greg Brockman और सैम को कंपनी के सैन फ्रांसिस्को स्थित हेडक्वार्टरर्स में एक साथ देखा गया था. 

क्या सोच रहे हैं Sam Altman?
माना जा रहा है कि सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) कथित तौर पर Open AI में वापसी के बारे में विचार कर रहे हैं और साथ ही एक तरफ ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं जिनमें दावा किया अजा रहा है कि सैम अपना नया AI वेंचर भी लेकर आ सकते हैं. Open AI के बोर्ड द्वारा सैम ऑल्टमैन को निकालने जाने के फैसले से पूरी टेक इंडस्ट्री अभी भी सदमे में है. आपको बता दें कि सैम ऑल्टमैन को Open AI और ChatGPT के चेहरे के रूप में देखा जाता रहा है. 
 

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अमेरिका के लोगों को खूब भा रहे हैं भारत के बने स्‍मार्टफोन, बना सबसे बड़ा खरीदार

2022-23 के आंकड़ों पर नजर डालें तो यूएई सबसे बड़ा खरीदार था वहीं 2023-24 के आंकड़ों पर नजर डालें तो उसमें अमेरिका हमारे स्‍मार्टफोन का सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है. 

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Friday, 14 June, 2024
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भारत की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था को दुनिया की रेटिंग एजेंसिया यूं ही स्थिर नहीं बता रही हैं. दुनिया की सभी टॉप रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि आने वाले सालों में भारत की ग्रोथ इसी तरह तेज बनी रहेगी. दरअसल उनके इस अनुमान के पीछे छिपा है भारत के मेड इन इंडिया प्रोग्राम का सच. कॉमर्स मंत्रालय के मई महीने के ट्रेड डेटा अनुसार भारत के स्‍मॉर्टफोन का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका है. जबकि पिछले साल भारत के स्‍मार्टफोन को सबसे ज्‍यादा यूनाइटेड अरब अमीरात खरीद रहा था. यही नहीं भारत में बने दूसरे कई प्रोडक्‍ट भी दुनिया के कई देशों को भा रहे हैं. 

क्‍या कह रहे हैं आंकड़े? 
भारत में पिछले 10 सालों में स्‍मार्टफोन प्रोडक्‍शन तेजी से आगे बढ़ा है. 2014 के मुकाबले आज देश में कई गुना ज्‍यादा कंपनियां भारत में स्‍मार्टफोन का निर्माण कर रही हैं. भारत के स्‍मार्टफोन एक्‍सपोर्ट के आंकड़े बता रहे हैं कि 2022-23 में हमने जहांे 10.96 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्‍मार्टफोन का निर्यात किया. वहीं 2023-24 में रहने 15.57 अमेरिकी बिलियन डॉलर का निर्यात कर चुके हैं. वहीं अगर साल दर साल के अनुसार, हर महीने के फीगर पर नजर डालें तो उसमें भी हर महीने इजाफा देखने को मिला है.

जानिए किस महीने में हुआ कितना एक्‍सपोर्ट? 

अप्रैल 23 में जहां भारत ने 498.3 बिलियन डॉलर का एक्‍सपोर्ट किया वहीं अप्रैल 24 में ये बढ़करद 1067.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. इसी तरह मई में 444.5 बिलियन डॉलर के मुकाबले मई 24 में 1362.97 बिलियन डॉलर का निवेश मिला है. इसी तरह से अगर जून में 707.36 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1291.13 बिलियन डॉलर, जुलाई में 691.92 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1291.13 बिलियन डॉलर, अगस्‍त में 668.93 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 953.6 बिलियन डॉलर, सितंबर में  में 890.72 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 912.25 बिलियन डॉलर, अक्‍टूबर में 907.98 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1266.66 बिलियन डॉलर, नवंबर में 1194.23 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1265.01 बिलियन डॉलर, दिसंबर में 1190.08 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1443.05 बिलियन डॉलर, जनवरी में 1165.12 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1315.72 बिलियन डॉलर, फरवरी में 951.27 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1755.44 बिलियन डॉलर और मार्च में 1644.84 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1988.42 बिलियन डॉलर का एक्‍सपोर्ट किया है. 

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अमेरिका खरीद रहा है सबसे ज्‍यादा स्‍मार्टफोन 
कॉमर्स मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़े बता रहे हैं कि जहां वर्ष 2022-23 में हमारे टॉप फाइव सबसे बड़े खरीदारों में यूनाइटेड अरब अमीरात 23.5 प्रतिशत, अमेरिका 19.7 प्रतिशत, नीदरलैंड 9.7 प्रतिशत यूके 7.8 प्रतिशत और इटली 6.5 प्रतिशत के साथ शामिल है. जबकि 2023-24 में एक्‍सपोर्ट के आंकड़े बता रहे हैं कि अमेरिका हमारे स्‍मार्टफोन का सबसे बड़ा खरीददार बन चुका है. आज अमेरिका हमसे 35.8 प्रतिशत स्‍मार्टफोन खरीद रहा है जबकि दूसरे नंबर पर यूएई आ चुका है. यूएई हमसे 16.5 प्रतिशत मोबाइल खरीद रहा है जबकि नीदरलैंड 7.6 प्रतिशत फोन खरीद रहा है, यूके 7.3 प्रतिशत मोबाइल का खरीददार है, और इटली 5.1 प्रतिशत मोबाइल खरीद रहा है. 

जान लीजिए क्‍या है इसके पीछे का कारण?   
कॉमर्स मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका सीधा कंज्‍यूमर है, वहीं यूनाइटेड अरब अमीरात सिर्फ गल्‍फ क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि अफ्रीका में भी डिस्‍ट्रीब्‍यूट करता है. इसलिए अफ्रीकन डिमांड और गल्‍फ डिमांड को यूएई पूरा करता है. वहीं अमेरिका में डिमांड में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जैसा कि हम जानते हैं कि अमेरिका एक बहुत अमीर देश है, और वहां स्‍मार्टफोन का एक बड़ा बाजार है. इसलिए अमेरिका का शेयर बहुत ज्‍यादा है. 
 


देश में खुलेगा ‘राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय’, 100 भाषाओं में उपलब्ध होंगी 10 हजार किताबें

राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय ऐप में फिक्शन, नॉन फिक्शन, विज्ञान एवं तकनीकी, भारत के इतिहास, संस्कृति गैर शैक्षणिक पुस्तकें पीडीएफ फॉमेट, ई-पब, ऑडियो बुक्स का एक्सेस मिलेगा.

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Friday, 14 June, 2024
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देश में शिक्षा का डिजिटलीकरण के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय शुरू करने की पहल की है. इसके लिए शिक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी ने नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) के साथ एक एमओयू पर साइन किया है. राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एक डिजिटल लाइब्रेरी प्लेटफॉर्म होगा, जिसके माध्यम से गांव-देहात तक अच्छी शिक्षा और किताबों की उपलब्धता बढ़ाया जा सकेगा.

24X7 मिलेगा किताबों का एक्सेस

डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी ने कहा है कि बच्चों र किशोरों के बीच पढ़ने की आदत बनी रहे, इसके लिए राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एक बेहद अच्छा विकल्प बनने वाला है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय लोगों को देशभर में 24×7 किताबों की एक्सेस देगा. बच्चे इस पर मौजूद किताबों को किसी भी लोकेशन से कभी भी पढ़ाई कर सकेंगे. ये उन राज्यों के लिए बहुत फायदेमंद होगा, जहां लोगों का लाइब्रेरी तक एक्सेस सीमित है.

मिलेंगी 10 हजार एकेडमिक और नॉन-एकेडमिक किताबें

जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय में बच्चों को अगले 2 से 3 साल के अंदर 100 भाषाओं में 10,000 किताबों का एक्सेस मिलेगा. वहीं, इस प्लेटफॉर्म पर अच्छी किताबों के सिलेक्शन के लिए एक ‘कंटेंट एनरिचमेंट कमेटी’ भी बनाई जाएगी. वहीं, राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय पर नॉन-एकेडमिक किताबों को भी शामिल किया जाएगा. इस ऐप में फिलहाल 23 भाषाओं में 1 हजार पुस्तकें उपलब्ध हैं. एनबीटी से एएमयू साइन होने के बाद इसमें 10 हजार पुस्तकों को जोड़ा जाएगा.

मोबाइल से लेकर लैपटॉप में पढ़ सकते हैं किताबें

बच्चों और किशोरों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने और भारत के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति, विज्ञान एवं तकनीकी में विकास कार्यों से जोड़ने के लिए शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार की पहल पर राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की शुरुआत की गई थी, यह भारत का एकमात्र ऐसा ऐप है, जहां पर पाठकों को देशभर के प्रकाशकों की पुस्तकें नि:शुल्क पढ़ने के लिए उपलब्ध हैं. यह एंड्रॉयड, आईओएस और वेब आधारित ऐप्लिकेशन है, जिसे पाठक मोबाइल फोन में भी डाउनलोड कर सकते हैं और डेस्कटॉप या लैपटॉप पर भी इसके वेबपेज पर जा सकते हैं.

चार आयु वर्ग में मौजूद किताबें

इस ऐप में फिक्शन, नॉन फिक्शन, विज्ञान एवं तकनीकी, भारत के इतिहास, संस्कृति सहित व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ और भी कई समसामयिक विषयों की गैर शैक्षणिक पुस्तकें पीडीएफ फॉमेट, ई-पब, ऑडियो बुक्स के रूप में हैं. बच्चे और किशोर पाठक अपनी आयु के अनुसार, अपनी पसंद के विषय की पुस्तकें कहीं भी और कभी भी बिना कोई पंजीकरण शुल्क दिए पढ़ सकते हैं. ऐप में पुस्तकों को चार आयु वर्गों में रखा गया है, जिसेमें 3 से 8 वर्ष, 8 से 11 वर्ष, 11 से 14 वर्ष और 14 से अधिक आयु के पाठकों के अनुसार किताबें हैं.


इंपोर्ट एक्‍सपोर्ट के मोर्चे पर कैसे हुआ इजाफा, लेकिन वित्‍तीय घाटे में हुई कमी 

कॉमर्स मंत्रालय की ओर से पिछले चार महीनों के गोल्‍ड इंपोर्ट का जो आंकड़ा जारी किया गया है वो बता रहा है कि सबसे ज्‍यादा इंपोर्ट फरवरी में 6.15 बिलियन डॉलर का हुआ है.

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Friday, 14 June, 2024
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मई महीने के इंपोर्ट-एक्‍सपोर्ट के आंकड़े जारी हो चुके हैं. आंकड़े बता रहे हैं कि एक्‍सपोर्ट में पिछले साल के मुकाबले इजाफा देखने को मिला है. 2023 में जहां मई में जहां 61.95 यूएसडी बिलियन का व्‍यापार हुआ वहीं मई 2024 में ये एक्‍सपोर्ट बढ़कर 68.29 बिलियन डॉलर हो गया.  इसी तरह इंपोर्ट की बात करें तो मई 2023 में जहां 73.36 बिलियन डॉलर रहा वहीं मई 2024 में ये बढ़कर 79.20 बिलियन डॉलर रहा. वहीं वित्‍तीय घाटे पर नजर डालें तों पिछले साल मई में जहां ये 11.41 बिलियन डॉलर रहा है वहीं मई 2024 में ये कम होकर 10.90 बिलियन डॉलर पर आ गया है. 

कितना रहा इन दो सेक्‍टरों को इंपोर्ट एक्‍सपोर्ट 
अगर मर्चेंडाइज और सर्विस सेक्‍टर के इंपोर्ट-एक्‍सपोर्ट पर नजर डालें तो मर्चेंडाइज सेक्‍टर में मई 2023 में एक्‍सपोर्ट 34.95 बिलियन डॉलर था तो वहीं इस साल आंकड़े में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली और ये 38.13 बिलियन डॉलर पहुंच गया था. इसी तरह मर्चेंडाइज सेक्‍टर में इंपोर्ट की बात करें तो मई 23 में ये 57.48 बिलियन डॉलर तो इस साल मई में ये 61.91 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. इसी तरह सर्विस सेक्‍टर की बात करें तो मई 23 में हमने 26.99 बिलियन डॉलर का एक्‍सपोर्ट किया तो इस साल ये बढ़कर 30.16 बिलियन डॉलर हो चुका है. अगर इंपोर्ट की बात करें तो इस मई में ये 15.88 बिलियन डॉलर था तो इस मई में ये 17.28 बिलियन डॉलर हो चुका है. 

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किन देशों में हुआ सबसे ज्‍यादा एक्‍सपोर्ट?
 कॉमर्स मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, जिन 10 देशों में सबसे ज्‍यादा इंपोर्ट एक्‍सपोर्ट हुआ उनमें अमेरिका, नीदरलैंड, यूनाइटेड अरब अमीरात, मलेशिया जैसे देश शामिल हैं. कॉमर्स मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में पिछले मई और इस मई में जो अंतर बताया गया है उसके अनुसार अमेरिका 0.86 बिलियन डॉलर, नीदरलैंड 0.67 बिलियन डॉलर,यूनाइटेड अरब अमीरात 0.50 बिलियन डॉलर, मलेशिया 0.37 बिलियन डॉलर,यूके 0.35 बिलियन डॉलर का अंतर रहा है. वहीं जिन देशों से इंपोर्ट ज्‍यादा हुआ उनमें यूनाइटेड अरब अमीरात, इराक, रसिया, इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं. 

कितना हुआ सोने का आयात 
कॉमर्स मंत्रालय की ओर से सोने के आयात के आंकड़े जो जारी किए गए हैं उनमें जनवरी 23 में जहां 0.70 बिलियन डॉलर आयात किया गया वहीं जनवरी 24 में ये आंकड़ा 1.91 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. इसी तरह फरवरी 23 में जहां 2.63 बिलियन डॉलर इंपोर्ट हुआ वहीं फरवरी 24 में ये इंपोर्ट बढ़कर 6.15 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. इसी तरह मार्च 23 में ये आंकड़ा 3.30 बिलियन डॉलर था तो वहीं मार्च 24 में 1.53 बिलियन डॉलर रहा. अप्रैल 23 में 1.61 बिलियन डॉलर था तो अप्रैल 24 में 3.11 बिलियन डॉलर रहा. इसी तरह मई 23 में ये जहां 3.69 बिलियन डॉलर रहा वहीं मई 24 में ये 3.33 बिलियन डॉलर रहा. 
 


पवन कल्याण से ज्यादा रईस हैं उनकी रूसी वाइफ, दौलत का लगा रखा है ढेर 

पवन कल्याण के पास कुल 164.53 करोड़ रुपए की संपत्ति है. पिछले 5 साल में उनकी दौलत करीब 60 करोड़ बढ़ी है.

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Friday, 14 June, 2024
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आंध्र प्रदेश में नायडू राज शुरू हो गया है. चंद्रबाबू नायडू मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए हैं और पवन कल्याण राज्य के उप-मुख्यमंत्री बने हैं. तेलुगू फिल्मों के सुपरस्टार कल्याण ने नायडू और पीएम मोदी के रिश्तों में आई खटास दूर करने में अहम भूमिका निभाई है. इसी वजह से नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (TDP) भाजपा के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन का हिस्सा बनी. कल्याण जनसेना पार्टी के चीफ हैं. राज्य का विधानसभा चुनाव भी उन्होंने भाजपा और TDP के साथ मिलकर लड़ा था.

एकदम से चर्चा में आईं
लोकसभा और विधानसभा चुनावों के नतीजे आम होने के बाद से पवन कल्याण मीडिया में छाए हुए हैं. पवन के साथ-साथ उनकी वाइफ ऐना लैझनेवा (Anna Lezhneva) भी एकदम से खबरों में आ गई हैं. दरअसल, कल्याण जब बड़ी उपलब्धि हासिल कर अपने घर पहुंचे, तो ऐना ने उनका स्वागत तिलक और आरती के साथ किया था. तभी से वह भी चर्चा का विषय बन गई हैं. ऐना मूल रूप से रूस की रहने वाली हैं. 1980 में जन्मीं ऐना लैझनेवा अपने पति पवन कल्याण से ज्यादा अमीर हैं. वह मॉडल और एक्ट्रेस हैं.   

दोनों के पास इतनी दौलत
पवन कल्याण कुल 164.53 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं. पिछले 5 साल में उनकी दौलत करीब 60 करोड़ रुपए बढ़ी है. 2019 में पवन के पास करीब 56 करोड़ की संपत्ति थी और आज यह आंकड़ा 164.53 करोड़ रुपए पहुंच गया है. जबकि उनकी पत्नी 1800 के पास करोड़ रुपए की दौलत है. मॉडलिंग के अलावा लैझनेवा सिंगापुर में एक होटल चेन चलाती हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस और सिंगापुर में उनके पास करीब 1800 करोड़ रुपए की संपत्ति है. लैझनेवा और कल्याण का एक बेटा है, जिसका नाम मार्क शंकर पवनोविच है. 

तीन शादियां रचाईं
ऐना लैझनेवा और पवन कल्याण की मुलाकात 2011 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी. दो साल तक डेटिंग करने के बाद दोनों ने 30 सितंबर 2013 को शादी कर ली. शादी के मामले में कल्याण का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है. इसलिए जब पवन और ऐना ने शादी रचाई, तो यह कहा गया कि दोनों का रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चलेगा. लेकिन पवन और ऐना लोगों की इस सोच को अब तक गलत साबित करते आ रहे हैं. आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने 1997 में पहली शादी की थी, मगर 2008 में उनका तलाक हो गया. इसके बाद उन्होंने अभिनेत्री रेणु से 2009 में शादी रचाई. 2012 में कल्याण ने रेणु से भी तलाक ले लिया. 
 


बंद हो गई इस कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग, कहीं आपका तो नहीं लगा है पैसा?

यदि आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है. एक कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग बंद हो गई है.

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Friday, 14 June, 2024
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शेयर बाजार से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. डिजिटल मार्केटिंग कंपनी ब्राइटकॉम ग्रुप (Brightcom Group) के शेयरों की ट्रेडिंग बंद कर दी गई है. यानी इनकी खरीद-फरोख्त अब नहीं हो पाएगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग को सस्पेंड कर दिया है. स्टॉक एक्सचेंज की इस कार्रवाई से एक दिन पहले 13 जून तक कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग एक्टिव थी. BSE पर यह 4.93% की गिरावट के साथ 9.45 रुपए पर बंद हुआ था. 

क्यों हुई कंपनी पर कार्रवाई?
एक्सचेंज की तरफ से बताया गया है कि ब्राइटकॉम ग्रुप के शेयरों का सस्पेंशन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि कंपनी NSE के मास्टर सर्कुलर के हिसाब से काम नहीं करती. 15 मई को ब्राइटकॉम ग्रुप के शेयरों की ट्रेडिंग बंद करने की घोषणा हुई थी. हालांकि, 16 मई को कंपनी ने एक्सचेंजों को बताया कि ऐसी नौबत नहीं आने दी जाएगी और 11 जून तक वह वित्त वर्ष 2023-24 की जुलाई-सितंबर और अक्टूबर-दिसंबर के नतीजे घोषित कर देगी. लेकिन कंपनी ने 11 जून को पूरे नतीजे नहीं जारी किए. ब्राइटकॉम ग्रुप सितंबर तिमाही के नतीजे तो पेश किए, मगर दिसंबर 2023 तिमाही के नतीजों पर कोई जानकारी नहीं दी. इसी के चलते कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग सस्पेंड कर दी गई है.

शेयरधारकों का क्या होगा?
मार्च तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से ब्राइटकॉम ग्रुप में 2 लाख रुपए के कम के निवेश वाले करीब 6.56 लाख शेयरधारक हैं. चूंकि ट्रेडिंग सस्पेंड की गई है, इसलिए शेयरहोल्डर्स 15 दिनों तक न तो अपने शेयर बेच पाएंगे और न ही नए शेयर खरीद पाएंगे. हालांकि, इसके बाद भी ट्रेडिंग सामान्य नहीं होगी. बल्कि निवेशक जेड कैटेगरी में ट्रेड-फॉर-ट्रेड के आधार पर ऐसा करने में सक्षम होंगे. जेड कैटेगरी के तहत अगले छह महीने तक हर सप्ताह के पहले कारोबारी दिन ही ट्रेडिंग हो पाएगी.

SEBI भी ले चुका है एक्शन
जेड कैटेगरी में ऐसे शेयरों को रखा जाता है, जो एक्सचेंजों की लिस्टिंग से जुड़े नियमों को पूरा नहीं करते हैं या निवेशकों की शिकायतों का निपटारा नहीं करते हैं या फिर दोनों डिपॉजिटरीज के पास जरूरी व्यवस्था करने में नाकाम रहते हैं. वहीं, ट्रेड-फॉर-ट्रेड कैटेगरी के तहत आने वाले शेयरों की लेवल डिलीवरी वाली ट्रेडिंग हो सकती है इंट्रा-डे ट्रेडिंग नहीं. गौरतलब है कि ब्राइटकॉम ग्रुप लिमिटेड (BGL) पिछले काफी समय से किसी न किसी वजह से चर्चा में रही है. पिछले साल बाजार नियामक SEBI ने एक अंतरिम आदेश में कंपनी के शीर्ष अधिकारियों में शुमार सुरेश कुमार रेड्डी और नारायण राजू को अगली सूचना तक कोई भी निदेशक पद संभालने से रोक दिया था. सुरेश कुमार रेड्डी कंपनी के प्रमोटर, चेयरमैन एवं MD और नारायण राजू कंपनी के CFO (Chief Financial Officer) की भूमिका निभा रहे थे. 


22 जुलाई को आने वाले Modi 3.0 के पहले बजट में क्या होगा खास?

लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है. लिहाजा इस बार का बजट कुछ अलग हो सकता है.

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Friday, 14 June, 2024
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सहयोगियों के साथ से बनी नई मोदी सरकार (Modi Govt) अगले महीने यानी जुलाई में पहला बजट पेश करने वाली है. 22 जुलाई को पूर्ण बजट पेश किया जा सकता है. लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने अंतरिम बजट पेश किया था, जिसमें कोई खास बड़ी घोषणा नहीं हुई थी. इस बार चूंकि भाजपा सरकार सहयोगियों के भरोसे है, तो बजट के लोकलुभावन होने की संभावना बढ़ गई है. माना जा रहा है कि मोदी 3.0 का पहला बजट महिलाओं, किसानों और युवाओं पर केंद्रित हो सकता है. 

इस पर रहेगा जोर
देश के बजट पर हमेशा से ही लोगों की नजर रही है, लेकिन 22 जुलाई को आने वाले बजट को लेकर खासी उत्सुकता दिखाई दे रही है. इसकी वजह है केंद्र में गठबंधन की सरकार का होना. जानकारों का मानना है कि बेरोजगारी एक प्रमुख मुद्दा रहा है. भले ही मोदी सरकार और सत्ताधारी भाजपा इससे इंकार करते रहे हों, लेकिन चुनाव परिणाम में इस मुद्दे ने भी BJP के खिलाफ काम किया है. लिहाजा, इस बार के बजट में सरकार बेरोजगारी जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कुछ बड़ी योजनाओं की घोषणा कर सकती है. 

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GST और होगा सरल 
इसके अलावा, पहले से चली आ रहीं योजनाओं, जैसे कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स को आगे बढ़ाया जा सकता है. खासकर, सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर पिछले सालों के मुकाबले अधिक खर्च का प्रावधान कर सकती है. इन सबके साथ-साथ वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण राजकोषीय घाटे को भी कम करने का प्रयास करेंगी. व्यापारियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए GST को और सरल बनाने पर भी कोई घोषणा हो सकती है. बता दें कि 18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शुरू होने वाला है. इस सत्र में नए लोकसभा अध्यक्ष का चयन किया जाएगा.


LIC करने जा रही है इस हेल्‍थ इंश्‍योरेंस कंपनी का अधिग्रहण, जानते हैं कौन सी है ये कंपनी? 

एलआईसी ने हाल ही में हेल्‍थ इंश्‍योरेंस सेक्‍टर में उतरने का प्‍लान आईआरडीए को सौंपा है. लेकिन इसमें किसी भी सरकारी जनरल बीमा कंपनी के अधिग्रहरण या मर्जर की कोई बात नहीं कही गई है.

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Friday, 14 June, 2024
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हेल्‍थ इंश्‍योंरेंस में उतरने की तैयारी कर रही एलआईसी जल्‍द ही एक बड़ी डील कर सकती है. कंपनी अपने हेल्‍थ इंश्‍योरेंस कारोबार को लॉन्‍च करने के लिए देश की पांच हेल्‍थ इंश्‍योरेंस कंपनियों में से एक का अधिग्रहण करने की तैयारी कर रही है. एलआईसी मौजूदा समय में देश की सबसे बड़ी इंश्‍योरेंस कंपनी है. सबसे खास बात ये है कि इस कंपनी में सबसे ज्‍यादा शेयर सरकार के हैं. अगर ऐसा होता है तो इसका असर कंपनी के शेयर में भी देखने को मिल सकता है. 

अभी क्‍या है इंश्‍योरेंस कंपनियों की व्यवस्था? 
मौजूदा समय में कोई भी इंश्‍योरेंस कंपनी हेल्‍थ इंश्‍योरेंस नहीं दे सकती हैं. अगर वो देना चाहती हैं तो वो इसके लिए लॉन्‍ग टर्म बेनीफिट दे सकती हैं. अगर कोई शख्‍स अस्‍पताल में भर्ती होता हो या किसी अन्‍य प्रकार की क्षतिपूर्ति देनी पड़े तो इंश्‍योरेंस कंपनियां ऐसा नहीं कर सकती हैं. अगर इस व्‍यवस्‍था को लागू करना है तो इसके लिए इसके कानून में संशोधन करना होगा. लेकिन इस समस्‍या को कुछ हद तक सुलझाने के लिए संसद की एक समिति ने इस पर विचार करते हुए कंपोजिट इंश्‍योरेंस लाइसेंस की व्‍यवस्‍था शुरू की है. इसके तहत इंशयोरेंस कंपनियां लाइफ और नॉन लाइफ कैटेगिरी की पॉलिसीयां बेच सकती हैं. 

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कंपोजिट इंश्‍योरेंस लाइसेंस कैसे काम करता है? 
अब समझने की बात है कि अगर एलआईसी कंपोजिट इंश्‍योरेंस लाइसेंस के जरिए काम करती है तो उसे क्‍या करना होगा. एलआईसी को कंपोजिट इंश्‍योरेंस लाइसेंस लेने के लिए दो से तीन महीने का समय लग जाएगा. इसके बाद एलआईसी हेल्‍थ इंश्‍योंरस सेक्‍टर की किसी भी कंपनी को खरीदकर अपना हेल्‍थ इंश्‍योरेंस का काम कर सकती है. एलआईसी ने हाल ही में हेल्‍थ इंश्‍योरेंस सेक्‍टर में उतरने का प्‍लान आईआरडीए को सौंपा है. लेकिन इसमें किसी भी सरकारी जनरल बीमा कंपनी के अधिग्रहरण या मर्जर की कोई बात नहीं कही गई है. एलआईसी ऐसी कंपनी को खरीदने को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है. सबसे दिलचस्‍प बात ये भी है कि कंपनी वो खरीदी जाएगी जो डिजिटली स्‍ट्रांग हो. 

किन कंपनियों के मर्जर की बन सकती है योजना? 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब सवाल ये है कि आखिर एलआईसी हेल्‍थ सेक्‍टर इंश्‍योरेंस को लेने के लिए आखिर किन कंपनियों का अधिग्रहण कर सकती है. इनमें आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस, केयर हेल्थ इंश्योरेंस, नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस, स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस कंपनी और मनिपाल-सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस शामिल है. अगर एलआईसी किसी कंपनी को खरीदती है तो उसे उसके लिए आईआरडीएआई और वित्त मंत्रालय से मंजूरी लेनी होगी. देश में निजी क्षेत्र की स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों का फाइनेंशियल ईयर 2024 में प्रीमियम 32,351 करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल से मुकाबले 14 फीसदी अधिक है. 
 


Musk और Bezos से आगे निकले Ambani, Jio प्लेटफॉर्म्स को पहले मिली सैटेलाइट इंटरनेट शुरू करने की मंजूरी

मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स को देश में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू करने के लिए भारत के अंतरिक्ष नियामक से मंजूरी मिल गई है.

Last Modified:
Friday, 14 June, 2024
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भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए एक ओर जहां जेफ बेजोस की अमेजन डॉट कॉम (Amazon.com) से लेकर एलन मस्क की स्टारलिंक (starlink) जैसी कंपनियां अनुमति का इंतजार कर रही हैं. वहीं, इनसे पहले बाजी मारते हुए मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) ने एक ज्वाइंट वेंचर के साथ इसकी मंजूरी हासिल कर ली है. 

सैटेलाइट के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराना उद्देश्य
एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस में एक बार फिर से बाजी मार ली है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स को देश में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू करने के लिए भारत के अंतरिक्ष नियामक से मंजूरी मिल गई है. अंबानी की रिलायंस भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है, जिसका मार्केट कैप करीब 2,00,0000 करोड़ रुपये है.

इस कंपनी के साथ हुआ ज्वाइंट वेंचर
मुकेश अंबानी अलग-अलग सेक्टर में सर्विस शुरू करने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ साझेदारी कर रहे हैं. इसी क्रम में जियो प्लेटफॉर्म्स को लक्जमबर्ग की एसईएस के साथ हुए ज्वाइंट वेंचर ऑर्बिट कनेक्ट इंडिया को भारत में सैटेलाइट सर्विस शुरू करने की मंजूरी मिल गई है. इसका उद्देश्य सैटेलाइट के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराना है. जियो को यह मंजूरी उस समय मिली है, जब जेफ बेजोस की अमेजन डॉट कॉम से लेकर एलन मस्क की स्टारलिंक जैसी कंपनियां भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए अनुमति का इंतजार कर रही हैं. वहीं, एक अन्य कंपनी इनमारसैट को भी भारत में सैटेलाइट संचालित करने की मंजूरी मिल गई है. 

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स्टारलिंक और अमेजन को लग सकता है झटका

भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने अप्रैल और जून में ऑर्बिट कनेक्ट को 3 मंजूरी दी, जिससे उसे भारत में सैटेलाइट स्थापित करने की अनुमति मिल गई. हालांकि, परिचालन शुरू करने के लिए दूरसंचार विभाग सहित और मंजूरी की जरूरत है. भारत के सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस बाजार में अगले 5 वर्षों में 36 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है. यह 2030 तक 1.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है. जिस स्पीड से इंडिया में इंटरनेट यूजर्स की बढ़ोतरी हो रही है और जियो अपने सर्विस के अपग्रेड कर रहा है, इससे एलन मस्क की स्टारलिंक और जेफ बेजोस की अमेजन को झटका लग सकता है


आईटी सेक्‍टर की टॉप कंपनियों ने फिलहाल टाली स्‍नातकों की भर्ती, सब ठीक तो है….

दरअसल अमेरिका और यूरोप के बाजारों में जो मंदी की आहट दिखाई दे रही है वो तिमाही नतीजों में साफ तौर पर देखी जा सकती है. कंपनियों संख्‍या बढ़ाए बिना उत्‍पादकता बढ़ाना चाह रही हैं. 

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Friday, 14 June, 2024
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एक ओर जहां दुनियाभर की तमाम रेटिंग एजेंसिया भारत की मौजूदा और भविष्‍य की ग्रोथ को लेकर आश्‍वस्‍त हैं वहीं दूसरी ओर देश के आईटी सेक्‍टर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. आईटी सेक्‍टर की टॉप कंपनियां जिसमें विप्रो, इंफोसिस, टीसीएस जैसे नाम शामिल हैं उन्‍होंने फिलहाल 10 हजार स्‍नातकों की नियुक्तियों को टाल दिया है. इन सभी स्‍नातकों को ऑफर लेटर दिए जा चुके हैं. लेकिन अभी तक कंपनी की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है. ये जानकारी आईटी इंप्‍लाई यूनियन की ओर से निकल कर सामने आई है. 
क्‍या कहते हैं NITES के प्रेसीडेंट? 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Nacsent Information Technology Employee Senate (NITES) हरप्रीत सिंह सलूजा कहते हैं कि ऐसे कैंडिडेट जिन्‍हें आईटी सेक्‍टर की टॉप और मिड लेवल की कंपनियों की ओर से ऑफर दिए गए थे, इन कंपनियों में टीसीएस (TCS), इंफोसिस (Infosys), विप्रो(Wipro), जेनसार (Zensar) और एलटीआई माइंडट्री(LTI Mind Tree) जैसी कंपनियों के नाम हैं.  इंफोसिस की ओर से इन कैंडीडेट को कहा गया है कि उनकी ज्‍वॉइंनिंग की डेट कंपनी की बिजनेस आवश्‍यकताओं पर निर्भर होगी. उन्‍हें इसके लिए कम से कम 3 से 4 हफ्ते पहले सूचित किया जाएगा. इंफोसिस की ओर से फाइनेंशियल ईयर 2024 में अब तक सिर्फ 11900 लोगों को चयनित किया गया है जबकि 2023 में कंपनी की ओर से कोई 50 हजार फ्रेशर्स को चुना गया था. इस साल हुआ सलेक्‍शन 76 प्रतिशत कम है. वहीं विप्रो ने दो साल पहले जिन स्‍टूडेंट को कैंपस सलेक्‍शन के जरिए लिया था उन्‍हें अभी तक जॉब नहीं दिया गया है. 

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क्‍या बोले विप्रो के सीएचआरओ? 
कुछ समय पहले एक अर्निंग काल(आय कॉल) के दौरान कंपनी के सीएचआरओ सौरभ गोविल ने कहा था कि वे नए फ्रेशर्स को नियुक्‍त करने से पहले उन प्रस्‍तावों को पूरा करेंगे जो हमने पहले दिए हैं. लेकिन अनिश्चित मैक्रो वातावरण के कारण कोई संख्‍या नहीं दी जा सकती है. वहीं दूसरी ओर मिड लेवल आईटी कंपनी जेनसार ने उनकी नियुक्ति पर विचार करने से पहले उनकी एक परीक्षा लेने की बात कही थी. देरी के बावजूद जेनसार की ओर से इंतजार कर रहे कैंडिडेट से अपनी बारी का इंतजार करने को कहा गया था.  वहीं इस संबंध में टीसीएस इंफोसिस, विप्रो को भेजे गए सवालों का उन्‍होंने कोई जवाब नहीं दिया है. 

आखिर क्‍या है इस देरी की वजह? 
सबसे ज्‍यादा समझने की बात ये है कि आखिर देरी क्‍यों हो रही है. दरअसल उत्‍तरी अमेरिका के बाजारों में देरी और यूरोप के बाजारों में बनी अनिश्चितता इसका सबसे बड़ा कारण है. इन बाजारों की अनिश्चितता में कंपनियों को मंदी का पुर्वानुमान दिखाई दे रहा है. कंपनियों ने इसी वजह से अपनी कॉस्‍ट एक्‍सपेंस को लेकर विचार करना शुरू कर दिया है. अगर सभी बड़ी कंपनियों में कर्मचारियों की संख्‍या पर नजर डालें तो वो 64 हजार तक कम हो गई है. अब नई नियुक्तिओं में कमी इसलिए हो रही है क्‍योंकि महामारी के दौरान पर्याप्‍त नियुक्तियां हुई हैं. अब इस स्थिति में कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ अपनी उत्‍पादकता को बढ़ाना चाहती हैं. 


Modi 3.0 में क्या हवाई यात्रियों के आएंगे अच्छे दिन? जानें क्या है सरकार की तैयारी

पिछले साल दिवाली के मौके पर हवाई किराए में बेतहाशा वृद्धि हुई थी, जिसे लेकर काफी हंगामा भी मचा था.

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Friday, 14 June, 2024
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हवाई किराया कितना होना चाहिए यह हमेशा से चर्चा का विषय रहा है. खासकर, फेस्टिवल सीजन में एयर फेयर के आसमान पर पहुंचने के चलते यह मांग भी उठती रही है कि इसके लिए कोई कैप निर्धारित होनी चाहिए. पिछले नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किराया नियंत्रित करने की बात ज़रूर कही थी, लेकिन बात कुछ आगे नहीं बढ़ पाई. मोदी 3.0 में इस मंत्रालय की कमान नए हाथों में है. राम मोहन नायडू को देश का नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया है. ऐसे में अब नायडू से उम्मीद की जा रही है कि वो इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएंगे.   

किराया पहली प्राथमिकता
एविएशन मिनिस्ट्री का कामकाज संभालते हुए राम मोहन नायडू ने संकेत भी दिए हैं कि हवाई किराया नियंत्रित करना उनकी प्राथमिकता है. उनका कहना है कि वर्तमान हवाई किराए की समीक्षा की जाएगी. वह बढ़ते किराए के मुद्दे से निपटकर हवाई यात्रा को आम आदमी के लिए ज्यादा सुलभ बनाना चाहते हैं. एयर फेयर में उतार-चढ़ाव के बारे में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि वे हवाई मार्ग को नया रेलवे बनाना चाहते हैं. 

जल्द आयोजित होगी बैठक 
तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सांसद किंजरापु राम मोहन नायडू (Kinjarapu Ram Mohan Naidu) का कहना है कि वह हवाई यात्रा को आम आदमी के लिहाज से सस्ता बनाने पर काम करेंगे. आवश्यक कदम उठाने के लिए एक नीतिगत बैठक जल्द आयोजित की जाएगी. मोदी सरकार के मंत्री ने कहा कि पिछले 10 सालों में इस क्षेत्र में काफी काम हुआ है. कोविड जैसे कई बाहरी कारकों से एविएशन सेक्टर प्रभावित हुआ था, लेकिन अब वह उससे बाहर निकल आया है. नायडू ने कहा कि हवाई किराए की समीक्षा की जाएगी और उसके अनुरूप फैसले लिए जाएंगे. 

पिछले साल मचा था बवाल 
हवाई किराया त्‍योहारी सीजन (Festival Seasons) आते ही चढ़ने लगता है. पहले केवल प्राइवेट बस ऑपरेटर ऐसे मौकों को भुनाने के लिए किराए में कई गुना बढ़ोत्तरी करते थे, लेकिन अब ये आदत विमानन कंपनियों ने भी विकसित कर ली है. पिछले साल दिवाली पर हवाई किराए में बेतहाशा वृद्धि हुई थी. हालात ये हो चले थे कि यानी दिवाली से एक दिन पहले दिल्ली से पटना का हवाई किराया दुबई, बैंकॉक और काठमांडू जाने से भी महंगा हो गया था. हवाई किराए पर कोई कैप निर्धारित नहीं है. एयरलाइन डिमांड के हिसाब से किराए में इजाफा करके मोटी कमाई करती हैं. लेकिन हवाई यात्रियों की जेब ज़रूरत से ज्यादा ढीली हो जाती है. पिछले साल हवाई किराए को लेकर काफी हंगामा भी मचा था. 

देरी भी है बड़ा मुद्दा
नए नागरिक उड्डयन मंत्री को किराया नियंत्रित करने के साथ ही उड़ानों में देरी जैसी चुनौतियों से भी निपटना होगा. पिछले कुछ समय में हवाई यात्रियों को देरी के चलते खासी परेशानी का सामना करना पड़ा है. ऐसे मौकों पर अक्सर एयरलाइन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती हैं. लिहाजा, यह देखने वाली बात होगी कि नायडू इस विषय में क्या कदम उठाते हैं. उन्होंने यह कहा है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय पैसेंजर्स की शिकायतों को गंभीरता से लेने के साथ-साथ ऐसे यात्रियों से भी सख्ती से निपटेगा जो विमान चालक दल के साथ बदतमीजी से पेश आते हैं.