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सचिन बंसल की कंपनी Navi के IPO को मंजूरी, जानिए क्या करती है कंपनी

सचिन बंसल ने Flipkart को छोड़ने के 6 महीने बाद ही दिसंबर 2018 में Navi Technologies की शुरुआत की थी, Walmart ने उसी साल Flipkart को $1600 करोड़ में खरीदा था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

मुंबई: Flipkart के को-फाउंडर रहे सचिन बंसल के नए फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी स्टार्टअप Navi Technologies को मार्केट रेगुलेटर से IPO लाने की मंजूरी मिल गई है. आपको बता दें कि Flipkart को छोड़ने के बाद सचिन बंसल और अंकित अग्रवाल ने साल 2018 में Navi Technologies की शुरुआत की थी. 

इसी साल दाखिल किया था DRHP 
इस साल 14 मार्च 2022 को Navi Technologies ने SEBI को IPO के लिए DRHP दाखिल किया था. इश्यू में नए शेयर जारी किए जाएंगे, IPO में शेयरहोल्डर्स की ओर से ऑफर फॉर सेल नहीं लाया जाएगा. Navi Technologies को सेबी की ओर से 5 सितंबर को ऑब्जरवेशन लेटर जारी किया गया था, इसका मतलब होता है कि मार्केट रेगुलेटर की ओर से IPO को हरी झंडी मिल चुकी है. 

3350 करोड़ रुपये जुटाने की योजना
IPO के जरिए कंपनी की योजना 3350 करोड़ रुपये जुटाने की है. दाखिल किए गए DRHP के मुताबिक इन पैसों का इस्तेमाल कंपनी अपनी सब्सिडियरीज Navi Finserv Pvt Ltd (NFPL) और Navi General Insurance Ltd (NGIL) में करेगी.  कंपनी Navi Finserv में 2,370 करोड़ रुपये डालेगी, जबकि Navi General Insurance में 150 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. Navi Technologies एक फाइनेशियल टेक्नोलॉजी कंपनी है. जो 'Navi' ब्रांड के तहत सर्विसेज मुहैया कराती है जिसमें पर्सनल लोन, होम लोन, जनरल इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड्स शामिल हैं. कंपनी का फोकस युवा मिडिल क्लास आबादी पर है. 

बैंकिंग लाइसेंस की नहीं मिली थी मंजूरी
सचिन बंसल ने Flipkart को छोड़ने के 6 महीने बाद ही दिसंबर 2018 में Navi Technologies की शुरुआत की थी, Walmart ने उसी साल Flipkart को $1600 करोड़ में खरीदा था. आपको बता दें कि Navi Technologies ने अपनी सब्सिडियरी Chaitanya India Fin Credit और पांच दूसरे आवेदकों के साथ बैंकिंग लाइसेंस के लिए अप्लाई किया था. लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उसके आवेदन को खारिज कर दिया था. लेकिन IPO को मंजूरी सही मायने में कंपनी के लिए बड़ी राहत है. 

Navi के फाइनेंशियल
Navi ने FY21 में Rs 71.1 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जबकि FY22 के पहले 9 महीनों में कंपनी को  206.42 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. कंपनी का नॉन परफॉर्मिंग असेट्स (NPAs) इस दौरान 3.83 परसेंट रहा था जबकि पर्सनल लोन का ग्रॉस NPA 1.12 परसेंट था. माइक्रोफाइनेंस लोन Navi का सबसे बड़ा मार्केट सेगमेंट है. FY22 की तीसरी तिमाही के दौरान कंपनी का असेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 1,808 करोड़ रुपये था. 

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