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भारत में एंट्री चाहती है ये रूसी कंपनी, जानें क्या है वजह और क्या होगा फायदा?

रूस और भारत के रिश्ते काफी पुराने हैं, लेकिन अब तक भारत रूसी कोयले का बड़ा खरीदार नहीं रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया को प्रभावित कर रही है. यही वजह है कि दुनिया की दिग्गज कंपनियां भारत में या तो अपना कारोबार बढ़ा रही हैं या फिर यहां एंट्री के लिए उत्साहित हैं. अब रूस की सबसे बड़ी कोयला कंपनी 'साइबेरियन कोल एनर्जी' भारत में अपना दफ्तर खोलना चाहती है. इसकी मोटे तौर पर दो वजह हैं, पहली रूस-यूक्रेन युद्ध और दूसरी, भारत का बाज़ार. युद्ध की वजह से पिछले कुछ महीने से यूरोपीय देशों ने रूस पर कारोबारी प्रतिबंध लगा रखा है. ऐसे में 'साइबेरियन कोल एनर्जी' को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. ऐसे में भारत उसे एक उम्मीद के रूप में दिखाई दे रहा है.

दुनिया की चौथी बड़ी कंपनी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साइबेरियन कोल एनर्जी लिफ्ट कंपनी के सीईओ मैक्सिम बसोब का कहना है कि वह भारत में जल्द ही अपना दफ्तर शुरू करने की योजना बना रहे हैं. 2022 के पहले 6 महीने में भारत ने रूस से 1.25 मिलियन टन कोयला मंगाया है, जो 2021 की तुलना में करीब 2 गुना ज्यादा है. साइबेरियन कोल एनर्जी लिमिटेड दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कोयला कंपनी है, जिसकी स्थापना 2001 में हुई थी. कंपनी का मुख्यालय मॉस्को में है.

भारत आए थे सीईओ
साइबेरियन कोल एनर्जी कंपनी के सीईओ मैक्सिम बसोबहाल में भारत में अपना कामकाज शुरू करने के लिहाज से हाल ही में यहां की यात्रा की थी. यह रूसी कंपनी अब भारत के साथ अपने कारोबारी संबंध बढ़ाना चाहती है. इस समय कंपनी भारत में अपने कामकाज का खाका तैयार करने में लगी है. इसमें लॉजिस्टिक की सुविधा बढ़ाने, मांग का अनुमान, अपने पार्टनर्स की संख्या बढ़ाने और आपूर्ति में कम खर्च जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हैं.   

युद्ध से बदले हालात
रूस और भारत के रिश्ते काफी पुराने हैं, लेकिन अब तक भारत रूसी कोयले का बड़ा खरीदार नहीं रहा है. इसकी सबसे प्रमुख वजह है ज्यादा आयात खर्च. लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद हालत बदले हैं. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते रूस ने डिस्काउंट ऑफर किए हैं. कच्चा तेल भारत ने रूस से अच्छे-खासे डिस्काउंट में खरीदा है. ऐसे में 'साइबेरियन कोल एनर्जी' भी कोयले की खरीद पर कुछ डिस्काउंट दे सकती है. हालांकि, कंपनी की तरफ से फिलहाल ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया है.    

अब इतनी आपूर्ति की इच्छा
एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस सालाना भारत को 5-7 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति करता है, लेकिन अब उसकी कोशिश यह है कि हर महीने 2 मिलियन टन आपूर्ति की जाए. अगर ऐसा होता है तो साइबेरियन कोल एनर्जी को काफी फायदा होगा. वहीं, साइबेरियन कोल एनर्जी के भारत में अपना दफ्तर खोलने से भारत में भी रोज़गार के अवसर उत्पन्न होंगे. गौरतलब है कि भारत ने बड़े पैमाने पर रूस से कच्चा तेल आयात किया है. अमेरिका की नाराज़गी के बावजूद भारत ने रूस से सस्ते दामों में क्रूड ऑयल खरीदा है.
 


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