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रुपया वेंटिलेटर, महंगाई एलीवेटर पर, पर सरकार की नज़र में ऑल इज वेल

डॉलर के मुकाबले हमारे रुपए में कमजोरी का दौर जारी है. वैसे, ये कमजोरी पिछली यानी कि मनमोहन सरकार में भी थी, लेकिन मोदी राज में हाल ज्यादा बेहाल हो गए हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

डॉलर के मुकाबले हमारे रुपए में कमजोरी का दौर जारी है. वैसे, ये कमजोरी पिछली यानी कि मनमोहन सरकार में भी थी, लेकिन मोदी राज में हाल ज्यादा बेहाल हो गए हैं. शुक्रवार को रुपए 11 पैसे टूटकर 77.85 पर पहुंच गया. अब एक डॉलर के लिए हमें करीब 78 रुपए चुकाने होंगे. हालांकि, केंद्र सरकार की मानें तो ऑल इज़ वेल, यानी सबकुछ ठीक है. सरकार इस गिरावट के लिए वैश्विक हालातों को जिम्मेदार बता रही है. इसमें कोई दोराय नहीं कि अंतर्राष्ट्रीय उथल-पुथल का ऐसी गिरावटों में योगदान रहता है, लेकिन सरकार की नीतियां भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं. यही वजह है कि रुपए में कमजोरी को लेकर सरकार से सवाल किया जाता है.

सरकार बदली, जवाब वही

प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने से पहले नरेंद्र मोदी ने रुपए में गिरावट पर मनमोहन सरकार की जमकर खिंचाई की थी. 2013 में उन्होंने यहां तक कह दिया था कि UPA को न तो अर्थव्यवस्था की चिंता है और न ही गिरते रुपए की, उसे तो सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने की फिक्र है. उस वक्त रुपया प्रति डॉलर 64.11 रुपए था. जबकि आज लगभग 78 जा पहुंचा है. कुछ ऐसा ही मोदी ने महंगाई को लेकर भी कहा था. उन्होंने मनमोहन सरकार को नेतृत्वहीन करार देते हुए पूछा था कि कीमतें कब कम होंगी? अब समय का पहियां घूम गया है और मनमोहन सिंह की जगह मोदी हैं, और जवाब वही है अंतर्राष्ट्रीय कारण.

दोनों मोर्चों पर नाकाम

26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में NDA की सरकार बनी, तब डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत करीब 58.93 रुपए थी, जिसके बाद से वो लगातार कमजोर होता गया. आज रुपया अपने अब तक के निचले स्तर पर है. मोदी सरकार रुपए को मजबूत करने और बढ़ती महंगाई को रोकने में नाकाम साबित हो रही है. यह कहना लगत नहीं होगा कि आज रुपया वेंटिलेटर पर है और महंगाई एलीवेटर पर सवार होकर ऊपर बढ़ती जा रही है. इस गिरावट के आम जनता के लिए क्या मायने होंगे, ये भी समझ लेते हैं.

ऐसे होगा आप पर असर

भारत बड़ी संख्या में अन्य देशों से सामान आयात करता है. ऐसे में रुपए की कमजोरी से आयात महंगा हो जाएगा. क्रूड ऑयल, इलेक्ट्रॉनिक सामान सहित वे सभी वस्तुएं महंगी हो जाएंगी, जो बाहर से देश में आती हैं. कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ सकते हैं, ऐसे में खाने-पीने की चीज़ें और दूसरे ज़रूरी सामान महंगे हो जाएंगे. वैसे भी महंगाई का डीजल से सीधा कनेक्शन है. मतलब महंगाई से राहत मिलना तो दूर आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं.

इस तरह गिरता गया रुपया

इसके अलावा, रुपया कमजोर होने से विदेशों में घूमना, पढ़ाई आदि के लिए भी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी. अब जरा रुपए के गिरने की कहानी को आंकड़ों की जुबानी समझ लेते हैं. 29, मई 2014 को रुपया 58.93 था, इसके बाद 29, मई 2015 को 63.73, 30 मई, 2016 को 66.97, 30 मई, 2017, 64.66, 4 अक्टूबर, 2018 को 73.79, 10 मई, 2022 को 77.50 और 10 जून, 2022 को 77.85 प्रति डॉलर आ गया है.


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