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जुलाई में खुदरा महंगाई 1.55% पर, 8 साल में सबसे निचला स्तर
खुदरा महंगाई में आई यह गिरावट न केवल उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत है, बल्कि यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति को स्थिर बनाए रखने में भी सहायक हो सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
जुलाई 2025 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) के आंकड़े सामने आने के बाद अर्थव्यवस्था को एक बड़ी राहत मिलती दिखाई दे रही है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर घटकर 1.55% पर आ गई है, जो बीते आठ वर्षों में सबसे निचला स्तर है. यह गिरावट मुख्यतः खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई तेज कमी के कारण हुई है. ऐसे समय में जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है, भारत में महंगाई पर नियंत्रण आने को एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
खाद्य कीमतों में गिरावट बनी मुख्य वजह
महंगाई में इस गिरावट का मुख्य कारण खाद्य पदार्थों के दाम में कमी है. जुलाई में सब्जियों के दाम 20.7% गिरे, जो सितंबर 2021 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है. दालों की कीमत 13.76% कम हुई, जबकि मसालों में 3.07% और मांस में 0.61% की गिरावट दर्ज की गई. अनाज (3.03%), अंडे (2.26%), दूध (2.74%) और चीनी (3.5%) में भी कीमत वृद्धि की रफ्तार धीमी रही.
कृषि और मानसून से मिली राहत
विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी खरीफ बुवाई, मानसून की प्रगति और जलाशयों में पर्याप्त जलस्तर ने खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखा है. उन्होंने हालांकि यह भी चेताया कि भू-राजनीतिक तनाव, जैसे रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध, आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकते हैं.
मुख्य मुद्रास्फीति भी घटी, लेकिन खाद्य तेल महंगा
बता दें, इस बार खुदरा महंगाई जून 2017 के बाद सबसे कम स्तर है, जब यह 1.46% दर्ज की गई थी. वहीं, जून 2025 में खुदरा महंगाई 2.1% थी. इस बार खुदरा महंगाई दर घटकर 1.55% पर आ गई है. वहीं, जुलाई में मुख्य मुद्रास्फीति भी घटकर 4.1% पर आ गई. इसमें खाद्य और ऊर्जा की कीमतें शामिल नहीं होतीं. वहीं, खाद्य तेल की महंगाई लगातार नौवें महीने दो अंकों में रही.
RBI की नीति पर असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि खुदरा महंगाई में नरमी से भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली समीक्षा में रेपो दर यथावत रख सकता है. इंडिया रेटिंग्स के पारस जसराय का कहना है कि अगर महंगाई स्थिर रहती है तो उपभोग मांग में सुधार होगा, हालांकि दरों में कटौती तभी संभव है जब वैश्विक व्यापार तनाव का असर गंभीर हो.
RBI का अनुमान और आगे का रुख
पिछले सप्ताह RBI ने रेपो दर 5.5% पर बरकरार रखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई अनुमान घटाकर 3.1% किया था, जबकि 2026-27 की पहली तिमाही में 4.9% रहने का अनुमान है.
GDP वृद्धि दर का अनुमान 2025-26 के लिए 6.5% और 2026-27 की पहली तिमाही के लिए 6.6% रखा गया है.
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