दिवाली हमारी, चेहरे भी हमारे ही खिले, इस बार बाजार में सेंध नहीं लगा पाईं चीनी कंपनियां 

इस बार दीपावली के मौके पर लोगों ने चीनी उत्पादों को नकारते हुए पूरी तरह से भारतीय सामान को प्राथमिकता दी है.

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Friday, 01 November, 2024
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देश के अधिकांश हिस्सों में दीपावली का त्यौहार कल यानी 31 अक्तूबर को सेलिब्रेट किया गया. महाराष्ट्र सहित कुछ जगहों पर दिवाली आज मनाई जा रही है. इस दीवाली रिकॉर्ड कारोबार हुआ है. सबसे अच्छी बात यह रही कि हमारी दीवाली पर चीन के घर खुशियों के दीये नहीं जले हैं. कहने का मतलब है कि चीनी कंपनियां भारतीय बाजार में सेंध लगाने में कामयाब नहीं हुई हैं. लोगों ने 'वोकल फॉर लोकल' पर अमल करते हुए भारतीय सामान की खरीदारी की है. 

लोगों ने जमकर की खरीदारी 
कल सुबह से ही बाजारों में भारी भीड़ उमड़ी हुई थी. लोगों ने स्थानीय सामान की जमकर खरीदारी की. कुछ साल पहले तक चीनी कंपनियां हमारे बाजार पर हावी हो गई थीं. दीपावली से जुड़े लगभग हर सामान में चीनी कंपनियों का दबदबा था. स्थिति ये हो गई थी कि लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां भी चीन निर्मित आने लगी थीं. इस वजह से भारतीय व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था. लेकिन अब तस्वीर काफी हद तक बदल गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल नारे ने व्यापक असर दिखाया है. अब लोग लोकल सामान की खरीदारी को तवज्जो देने लगे हैं. 

इस बार रिकॉर्ड कारोबार
एक रिपोर्ट में कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल के हवाले से बताया गया है कि इस वर्ष दिवाली पर 4.25 लाख करोड़ रुपए का कारोबार हुआ है, जो अब तक का रिकॉर्ड व्यापार है. उन्होंने यह भी बताया कि इस बार लोगों ने चीनी उत्पादों को नकारते हुए पूरी तरह से भारतीय सामान को प्राथमिकता दी. अब उन्हें देवउठनी एकादशी यानी शादियों के सीजन में बड़े व्यापार की उम्मीद है. बता दें कि दीपावली पर मिटटी के दीयो का इस्तेमाल भी अब फिर से बढ़ रहा है, जिसकी वजह से स्थानीय कुम्हारों की कमाई में वृद्धि हुई है.     


महंगाई के डर से खर्च घटा रहे भारतीय उपभोक्ता, जरूरी सामान का स्टॉक बढ़ा: सर्वे

सर्वे में यह भी सामने आया है कि एलपीजी सिलेंडर, आटा, खाद्य तेल, चीनी, दवाइयां और ईंधन जैसी वस्तुओं की खरीद सामान्य से करीब ढाई गुना तक बढ़ गई है.

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Thursday, 14 May, 2026
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देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शहरी भारतीय उपभोक्ता अब अपने घरेलू खर्चों में कटौती करने लगे हैं. एक नए सर्वे में सामने आया है कि लोग गैर-जरूरी खर्च टाल रहे हैं, जरूरी सामान का स्टॉक बढ़ा रहे हैं और तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं. इप्सोस इंडिया के “कंज्यूमर पल्स सर्वे” के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता ने उपभोक्ताओं के बीच आर्थिक चिंता बढ़ा दी है.

10 में से 9 उपभोक्ता खर्च घटाने को तैयार

सर्वे के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत शहरी उपभोक्ता महंगाई बढ़ने की स्थिति में अपने घरेलू बजट को और सख्त करने की तैयारी कर रहे हैं. अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंताओं ने लोगों को लंबे समय तक महंगाई बने रहने का संकेत दिया है. करीब दो-तिहाई लोगों ने कहा कि वे बड़े खर्च और महंगी खरीदारी फिलहाल टाल देंगे. वहीं, 60 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने यात्रा और छुट्टियों पर होने वाला खर्च कम करने की बात कही. इसके अलावा, आधे से ज्यादा लोगों ने बाहर खाना खाने, समारोहों और लाइफस्टाइल से जुड़े खर्चों में कटौती की योजना बनाई है.

जरूरी सामान का बढ़ा स्टॉक

सर्वे में यह भी सामने आया कि उपभोक्ता अब एहतियात के तौर पर जरूरी वस्तुओं का ज्यादा स्टॉक जमा कर रहे हैं. एलपीजी सिलेंडर, आटा, खाद्य तेल, चीनी, दवाइयां और ईंधन जैसी वस्तुओं की खरीद सामान्य से करीब ढाई गुना तक बढ़ गई है. लोग अब कम कीमत वाले विकल्प, छोटे पैक और डिस्काउंट ऑफर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं. उपभोक्ताओं के बीच “वैल्यू फॉर मनी” सोच तेजी से बढ़ रही है.

पेट्रोल महंगा होने पर बढ़ेगी EV की मांग

ईंधन महंगाई का असर अब लोगों की वाहन खरीद पसंद पर भी दिखाई देने लगा है. सर्वे के मुताबिक, अगले छह महीनों में दोपहिया वाहन खरीदने की योजना बना रहे हर दो में से एक उपभोक्ता इलेक्ट्रिक मॉडल पर विचार कर रहा है. करीब दो-तिहाई संभावित खरीदारों ने कहा कि अगर पेट्रोल की कीमतों में 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होती है, तो वे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदना पसंद करेंगे. दिलचस्प बात यह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत 5,000 से 8,000 रुपये तक बढ़ने के बावजूद आधे से ज्यादा लोग EV खरीदने का फैसला नहीं बदलेंगे.

कंपनियों से कीमतें स्थिर रखने की उम्मीद

सर्वे में शामिल लगभग तीन-चौथाई उपभोक्ताओं का मानना है कि मौजूदा अनिश्चित माहौल में कंपनियों को कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी से बचना चाहिए. लोगों की अपेक्षा है कि कंपनियां जरूरी सामान की सप्लाई बनाए रखें और सस्ते विकल्प उपलब्ध कराएं. इप्सोस India के CEO सुरेश रामालिंगम ने कहा कि वैश्विक संघर्ष अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की आर्थिक चिंताओं को प्रभावित कर रहे हैं. इससे महंगाई, आय सुरक्षा और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कंपनियों को उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं और “किफायती खरीदारी” की बढ़ती मांग के अनुसार अपनी रणनीति बनानी होगी.

ब्यूटी और फिटनेस पर खर्च बरकरार

हालांकि, खर्च में कटौती के बीच कुछ लाइफस्टाइल श्रेणियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं. सर्वे के अनुसार, ब्यूटी और पर्सनल केयर उत्पाद लोगों की पसंदीदा “सेल्फ-इंडल्जेंस” कैटेगरी बनी हुई है. इसके बाद कैफे बेवरेज, स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन और फिटनेस मेंबरशिप जैसी सेवाओं पर लोग अब भी खर्च कर रहे हैं.

रामालिंगम ने कहा कि फिलहाल सरकार द्वारा खुदरा ईंधन कीमतों को स्थिर रखने से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है. हालांकि, कमर्शियल एलपीजी की बढ़ती कीमतें आने वाले महीनों में बाहर खाना खाने और फूड डिलीवरी को महंगा बना सकती हैं.


अमूल के बाद मदर डेयरी ने बढ़ाए दूध के दाम, आज से नई कीमतें लागू

कंपनी के मुताबिक दूध उत्पादन को बनाए रखने और किसानों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है. इससे डेयरी सेक्टर में सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.

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Thursday, 14 May, 2026
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देशभर में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है. अमूल के बाद अब मदर डेयरी ने भी दूध के दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया है. कंपनी ने विभिन्न श्रेणियों के दूध पर 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है. नई कीमतें 14 मई 2026 से लागू हो गई हैं. कंपनी का कहना है कि किसानों से दूध खरीदने की लागत, पशु चारा, ईंधन और पैकेजिंग खर्च बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा.

किसानों से खरीद महंगी होने का असर

मदर डेयरी ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि पिछले एक साल में किसानों से दूध खरीदने की लागत करीब 6 प्रतिशत तक बढ़ गई है. कंपनी ने लंबे समय तक ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने की कोशिश की, लेकिन लगातार बढ़ती लागत के चलते कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया था.

कंपनी के मुताबिक दूध उत्पादन को बनाए रखने और किसानों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है. इससे डेयरी सेक्टर में सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.

अमूल ने भी बढ़ाए थे दाम

मदर डेयरी से पहले अमूल ने भी दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी. अमूल का कहना है कि दूध बिक्री से होने वाली आय का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा किसानों को भुगतान किया जाता है. ऐसे में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कीमतों में बदलाव किया गया है. कंपनी ने यह भी बताया कि पिछली बार दूध के दाम अप्रैल 2025 में बदले गए थे.

जानिए नई कीमतें

नई दरें लागू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में दूध की कीमतें इस प्रकार हो गई हैं.

1. खुला टोंड दूध, 56 रुपये से बढ़कर 58 रुपये प्रति लीटर
2. फुल क्रीम दूध, 72 रुपये प्रति लीटर
3. टोंड मिल्क, 58 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति लीटर
4. डबल टोंड दूध, 54 रुपये प्रति लीटर
5. गाय का दूध, 60 रुपये से बढ़कर 62 रुपये प्रति लीटर

इन नई कीमतों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ने वाला है, क्योंकि दूध रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल है.

दिल्ली-एनसीआर में रोज 35 लाख लीटर दूध की बिक्री

मदर डेयरी दिल्ली-एनसीआर में प्रतिदिन करीब 35 लाख लीटर दूध की बिक्री करती है. कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में डेयरी उत्पादों और खाद्य तेलों की मजबूत मांग के चलते 17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 20,300 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया.

उधर, डेयरी कंपनियों का कहना है कि किसानों को अधिक भुगतान करने से उत्पादन बनाए रखने और सप्लाई मजबूत करने में मदद मिलेगी. हालांकि, लगातार बढ़ती महंगाई के बीच दूध के दाम बढ़ने से आम लोगों की रसोई का बजट और प्रभावित हो सकता है.


सरकार ने लगाया चीनी निर्यात पर प्रतिबंध: घरेलू आपूर्ति घटने और कीमतों में उछाल के बीच बड़ा फैसला

यह फैसला सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें खाद्य महंगाई को नियंत्रित करना और घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखना प्राथमिकता है. हालांकि इससे वैश्विक चीनी व्यापार और सप्लाई चेन पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना है.

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Thursday, 14 May, 2026
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भारत सरकार ने तत्काल प्रभाव से चीनी (Sugar) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह रोक 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगी. सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना और आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है.

DGFT ने जारी किया आदेश

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत जारी आदेश में कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. यह कदम नीति में बड़ा बदलाव है, जिसके तहत चीनी को “restricted” से हटाकर “prohibited” श्रेणी में डाल दिया गया है.

घरेलू उत्पादन में गिरावट बनी वजह

भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और ब्राजील के बाद प्रमुख निर्यातक है, पहले 1.59 मिलियन मीट्रिक टन तक निर्यात की अनुमति दे चुका था. लेकिन अब लगातार दूसरे साल उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई जा रही है, जिससे घरेलू मांग पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है.

मौसम और एल नीनो का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में कमजोर उपज और आगामी मानसून पर एल नीनो के संभावित प्रभाव ने स्थिति और गंभीर कर दी है. इसी कारण सरकार ने घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है.

पहले से किए गए निर्यात सौदों पर आंशिक राहत

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 8 लाख टन चीनी के निर्यात अनुबंध पहले ही किए जा चुके थे, जिनमें से 6 लाख टन से अधिक पहले ही भेजे जा चुके हैं. सरकार ने उन शिपमेंट्स को अनुमति दी है जो पहले से प्रक्रिया में थे या जहाज लोडिंग, पोर्ट पर आगमन या कस्टम क्लियरेंस की स्थिति में थे.

वैश्विक बाजार पर असर

भारत के इस फैसले से वैश्विक चीनी बाजार पर असर पड़ने की संभावना है. अब ब्राजील और थाईलैंड जैसे देश एशिया और अफ्रीका के बाजारों में अपनी आपूर्ति बढ़ा सकते हैं.

अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल

घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी देखी गई. न्यूयॉर्क में रॉ शुगर फ्यूचर्स 2% से अधिक बढ़े, जबकि लंदन में व्हाइट शुगर फ्यूचर्स लगभग 3% तक चढ़ गए.

घरेलू आपूर्ति और महंगाई नियंत्रण

यह फैसला सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें खाद्य महंगाई को नियंत्रित करना और घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखना प्राथमिकता है. हालांकि इससे वैश्विक चीनी व्यापार और सप्लाई चेन पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना है.
 

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कोयले से बनेगी गैस और केमिकल्स: सरकार ने लॉन्च की ₹37,500 करोड़ की मेगा योजना

कोयला गैसीफिकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस में बदला जाता है. इस गैस का उपयोग ईंधन, मेथेनॉल, यूरिया और विभिन्न केमिकल्स के उत्पादन में किया जा सकता है.

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Thursday, 14 May, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने ₹37,500 करोड़ की एक बड़ी योजना को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत देश में कोयले से गैस और उससे जुड़े अन्य रासायनिक उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का उद्देश्य महंगे आयातित एलएनजी, यूरिया और अन्य रसायनों पर निर्भरता को कम करना है.

क्या है कोयला गैसीफिकेशन तकनीक?

कोयला गैसीफिकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस में बदला जाता है. इस गैस का उपयोग ईंधन, मेथेनॉल, यूरिया और विभिन्न केमिकल्स के उत्पादन में किया जा सकता है. सरकार का मानना है कि भारत के पास विशाल कोयला भंडार है, जिसका उपयोग देश को आत्मनिर्भर बनाने में किया जा सकता है.

सरकार का आत्मनिर्भरता पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगी, निवेश को बढ़ावा देगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी. यह हमारी तकनीक और नवाचार प्रणाली को सशक्त बनाने के प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करेगी.'

वहीं, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार ऐसी तकनीकों को बढ़ावा दे रही है जिससे देश की आयात निर्भरता घटे और घरेलू उत्पादन बढ़े. इस योजना को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

आयात बिल में भारी कमी का लक्ष्य

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत ने LNG, यूरिया, अमोनिया, मेथेनॉल और कोकिंग कोल जैसे उत्पादों के आयात पर लगभग ₹2.77 लाख करोड़ खर्च किए. नई योजना का लक्ष्य इन वस्तुओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आयात खर्च को कम करना है.

कंपनियों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

इस योजना के तहत कोयला गैसीफिकेशन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाएगी. किसी भी प्रोजेक्ट को मशीनरी और प्लांट लागत पर अधिकतम 20 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिल सकता है, जबकि एक परियोजना को अधिकतम ₹5,000 करोड़ तक की सहायता दी जा सकती है. साथ ही कंपनियों को 30 साल तक कोयला आपूर्ति की गारंटी भी दी जाएगी.

निवेश और रोजगार की संभावनाएं

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से देश में ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक का निवेश आ सकता है. इससे लगभग 50,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है. यह परियोजनाएं मुख्य रूप से कोयला-समृद्ध राज्यों में स्थापित की जा सकती हैं.

देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा फायदा

सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर गैस और रसायनों का उत्पादन बढ़ने से विदेशी बाजारों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कम होगा. इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा.

स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा

इस योजना में घरेलू तकनीक के उपयोग को भी प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार का उद्देश्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि देश में इस क्षेत्र की पूरी औद्योगिक और तकनीकी क्षमता को विकसित करना भी है.
 


Airtel Q4 Results: मुनाफे में 33.5% गिरावट, लेकिन रेवेन्यू और ARPU में मजबूती बरकरार

एयरटेल ने बताया कि Q4 FY26 में उसका शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) 33.5% घटकर ₹7,325 करोड़ रह गया. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹11,021.8 करोड़ था.

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Thursday, 14 May, 2026
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भारती एयरटेल ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस दौरान कंपनी के नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर तेज गिरावट देखने को मिली, हालांकि रेवेन्यू और प्रति यूजर औसत आय (ARPU) में बढ़ोतरी ने कंपनी की ऑपरेशनल ग्रोथ को स्थिर बनाए रखा है.

Q4 में मुनाफा घटकर ₹7,325 करोड़

एयरटेल ने बताया कि Q4 FY26 में उसका शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) 33.5% घटकर ₹7,325 करोड़ रह गया. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹11,021.8 करोड़ था. हालांकि तिमाही आधार पर स्थिति थोड़ी बेहतर रही. पिछली तिमाही के ₹6,630 करोड़ की तुलना में मुनाफे में 10.48% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

रेवेन्यू में 15.6% की मजबूत बढ़ोतरी

कंपनी की कुल आय (Revenue from Operations) में इस तिमाही के दौरान अच्छी वृद्धि देखने को मिली. रेवेन्यू 15.6% बढ़कर ₹55,383.2 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹47,876.2 करोड़ था. तिमाही आधार पर भी रेवेन्यू में 2.5% की बढ़त दर्ज की गई, जो स्थिर और लगातार ग्रोथ को दर्शाती है.

भारत कारोबार का प्रदर्शन बेहतर

एयरटेल के भारत बिजनेस सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन किया. इस सेगमेंट की आय सालाना आधार पर 7.7% बढ़कर ₹39,566 करोड़ हो गई. मोबाइल बिजनेस से होने वाली आय में 8.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसकी वजह बेहतर प्रति-यूजर कमाई और ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी रही.

ARPU में सुधार जारी

कंपनी के अनुसार, प्रति यूजर औसत आय (ARPU) में भी सुधार देखने को मिला है. Q4 में ARPU ₹257 रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹245 था. इस बढ़ोतरी का कारण टैरिफ सुधार और बेहतर सेवा गुणवत्ता को माना जा रहा है, जिससे प्रति ग्राहक कमाई बढ़ी है.

FY26 में मुनाफा घटा, रेवेन्यू में तेज उछाल

पूरे वित्त वर्ष FY26 के दौरान एयरटेल का शुद्ध मुनाफा 20.4% घटकर ₹26,695 करोड़ रह गया, जबकि FY25 में यह ₹33,556 करोड़ था. इसके विपरीत, कंपनी की कुल वार्षिक आय 21.9% बढ़कर ₹2,10,972.8 करोड़ तक पहुंच गई.

कंपनी की रणनीति और विस्तार

कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल के अनुसार, FY26 एयरटेल के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा. इस दौरान कंपनी ने 650 मिलियन से अधिक ग्राहकों का आंकड़ा पार किया. साथ ही, कंपनी ने टेलीकॉम-ग्रेड सॉवरेन क्लाउड लॉन्च किया, लेंडिंग बिजनेस शुरू करने के लिए RBI की मंजूरी हासिल की और अपने डेटा सेंटर नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया. कुल मिलाकर, एयरटेल के नतीजे बताते हैं कि कंपनी का मुनाफा दबाव में रहा, लेकिन मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ और ARPU में सुधार से इसके बिजनेस की बुनियादी मजबूती बनी हुई है.
 


दिल्ली मीट्स कोपेनहेगन: भारत-डेनमार्क आर्बिट्रेशन कॉरिडोर ने एक नए आर्बिट्रेशन हब की शुरुआत की

यह लॉन्च प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यूरोप यात्रा और ओस्लो में होने वाले तीसरे इंडिया नॉर्डिक समिट से कुछ दिन पहले विशेष महत्व के साथ किया गया है.

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Thursday, 14 May, 2026
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डेनिश इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेशन (DIA),इंडो डेनिश बिजनेस काउंसिल (IDBC) और ट्रस्ट लीगल ने इंडो-नॉर्डिक क्षेत्र के लिए एक संरचित विवाद समाधान इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए. इंडिया–डेनमार्क आर्बिट्रेशन कॉरिडोर का औपचारिक शुभारंभ आज कोपेनहेगन स्थित भारतीय दूतावास में किया गया.

यह डेनिश इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेशन (DIA),इंडो डेनिश बिजनेस काउंसिल (IDBC) और ट्रस्ट लीगल (Trust Legal), एड्वोकेट्स एंड कंसल्टेंट्स (Advocates & Consultants) के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के माध्यम से स्थापित हुआ. यह कॉरिडोर एक विश्वसनीय और तटस्थ कानूनी ढांचा स्थापित करता है, जो संस्थागत विवाद समाधान व्यवस्था के माध्यम से भारतीय और यूरोपीय व्यवसायों को जोड़ता है.

6.1 अरब अमेरिकी डॉलर के बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार के साथ, भारत डेनिश व्यवसायों को इस विशेष आर्बिट्रेशन कॉरिडोर के माध्यम से विवाद समाधान के लिए आमंत्रित करता है. यह महंगी मुकदमेबाजी का एक तटस्थ और तेज विकल्प है, जिसे विशेष रूप से भारत-डेनमार्क व्यापार के लिए तैयार किया गया है.

यह लॉन्च प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यूरोप यात्रा और ओस्लो में होने वाले तीसरे इंडिया नॉर्डिक समिट से कुछ दिन पहले विशेष महत्व के साथ किया गया है. जनवरी 2026 में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के बाद दो अरब लोगों का मुक्त व्यापार क्षेत्र बना है और भारत-नॉर्डिक द्विपक्षीय व्यापार पहले ही 19 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है. ऐसे में यह कॉरिडोर इस स्तर के व्यापार के लिए आवश्यक कानूनी ढांचा प्रदान करता है.

इस अवसर पर डेनमार्क में भारत के राजदूत एच.ई. मनीष प्रभात उपस्थित रहे, जो इस साझेदारी के प्रति भारत के कूटनीतिक समर्थन को दर्शाता है. भारत में डेनमार्क के सेवानिवृत्त राजदूत और IDBC चेयर एच.ई. फ्रेडी स्वाने, जिनकी भारत-डेनमार्क संबंधों के प्रति दीर्घकालिक व्यक्तिगत प्रतिबद्धता ने इस पहल की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, भी मौजूद रहे. साथ ही Society of Indian Law Firms (SILF) के अध्यक्ष और IDBC चेयर डॉ. ललित भसीन भी कार्यक्रम में शामिल हुए, जिनकी भारत में संस्थागत आर्बिट्रेशन के समर्थन में लंबी वकालत ने इस लॉन्च को गंभीरता और दृष्टि प्रदान की. DIA के चेयरमैन हॉकुन ज्युरहूस, राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा और DIA व साझेदार लॉ फर्मों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई.

“यह केवल एक दृष्टि नहीं है; यह दोनों countries के लिए एक अवसर है.”

- एच.ई. मनीष प्रभात, डेनमार्क में भारत के राजदूत

“यह MoU केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, यह एक एक्सप्रेसवे है. यह भारत के साथ संबंधों को साबित और मजबूत करता है.”

- एच.ई. फ्रेडी स्वाने, भारत में डेनमार्क के सेवानिवृत्त राजदूत और IDBC चेयर

“जब विवादों का निष्पक्ष समाधान होता है, तब व्यापार फलता-फूलता है. यह कॉरिडोर कोपेनहेगन और दिल्ली को पहले से कहीं अधिक करीब लाता है, क्योंकि भारत-नॉर्डिक व्यापार के 19 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर एक मजबूत विवाद समाधान तंत्र अब विलासिता नहीं बल्कि आवश्यकता है.”

- डॉ. ललित भसीन, अध्यक्ष SILF, IDBC चेयर

“यह कॉरिडोर कई प्रतिबद्ध व्यक्तियों और संस्थानों के वर्षों के शांत प्रयासों को दर्शाता है. हमें गर्व है कि हमने इस पहल के भारतीय कानूनी एंकर के रूप में कार्य किया और हम एच.ई. फ्रेडी स्वाने, एच.ई. मनीष प्रभात, डॉ. ललित भसीन और अपने सभी साझेदारों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिनके विश्वास ने इसे वास्तविकता बनाया.”

- सुधीर मिश्रा, मैनेजिंग पार्टनर एवं संस्थापक, ट्रस्ट लीगल

इस MoU के तहत, सभी पक्ष मिलकर भारत-डेनमार्क लेनदेन के लिए मॉडल आर्बिट्रेशन क्लॉज और ADR नीतियां विकसित करेंगे, क्षमता निर्माण कार्यक्रम और आर्बिट्रेटर प्रशिक्षण आयोजित करेंगे, तथा स्टार्टअप्स, SMEs और सीमा-पार निवेशकों के लिए रिसर्च और दिशा-निर्देश प्रकाशित करेंगे. वैश्विक आर्बिट्रेशन की संरचना को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है और भारत व डेनमार्क इसके उपकरण अपने हाथ में लिए हुए हैं.
 


4 दिन की गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, क्या आज भी जारी रहेगा उतार-चढ़ाव?

बुधवार को BSE सेंसेक्स 49.74 अंक यानी 0.07 फीसदी की बढ़त के साथ 74,608.98 पर बंद हुआ. वहीं, NSE निफ्टी 33.05 अंक यानी 0.14 फीसदी मजबूत होकर 23,412.60 के स्तर पर बंद हुआ.

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Thursday, 14 May, 2026
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बुधवार को घरेलू शेयर बाजार ने लगातार चार दिनों की गिरावट के बाद राहत की सांस ली. दिनभर के उतार-चढ़ाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी हल्की बढ़त के साथ बंद हुए, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये का ऑल टाइम लो निवेशकों की चिंता बढ़ाता रहा. अब आज यानी 14 मई को बाजार की नजर टाटा मोटर्स, भारती एयरटेल, DLF, ऑयल इंडिया और TVS Holdings समेत कई कंपनियों के तिमाही नतीजों और बड़े अपडेट पर रहेगी, जिससे बाजार में तेज हलचल देखने को मिल सकती है. 

सेंसेक्स-निफ्टी ने संभाली बढ़त

 

बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स कारोबार के दौरान 75,191.57 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि एक समय यह 74,134.48 तक फिसल गया था. अंत में सेंसेक्स 49.74 अंक यानी 0.07 फीसदी की बढ़त के साथ 74,608.98 पर बंद हुआ. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज  (NSE) निफ्टी 33.05 अंक यानी 0.14 फीसदी मजबूत होकर 23,412.60 के स्तर पर बंद हुआ.

इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 16 गिरावट के साथ बंद हुए. महिंद्रा एंड महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, सन फार्मा, टेक महिंद्रा, पावरग्रिड और बजाज फाइनेंस जैसे दिग्गज शेयरों में दबाव रहा. दूसरी ओर एशियन पेंट्स ने सबसे ज्यादा 4.37 फीसदी की तेजी दर्ज की. इसके अलावा टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स, भारती एयरटेल, एलएंडटी, आईटीसी और ट्रेंट के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली.

जूलरी शेयरों में लगातार तीसरे दिन गिरावट

जूलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा. सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किए जाने का असर इस सेक्टर पर साफ दिखाई दिया. कल्याण जूलर्स, टाइटन और सेन्को गोल्ड जैसे शेयरों में 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई. केवल तीन दिनों में निवेशकों को करीब 60,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. 

आज इन शेयरों पर रखें नजर 

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर बाजार में गुरुवार 14 मई को कई बड़े स्टॉक्स में हलचल देखने को मिल सकती है. टाटा मोटर्स, भारती एयरटेल, DLF, ऑयल इंडिया और TVS Holdings समेत कई कंपनियों ने अपने तिमाही नतीजे जारी किए हैं, जबकि कुछ कंपनियों ने डिविडेंड और नए बिजनेस अपडेट का ऐलान किया है. टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल कारोबार का मुनाफा 33.8 फीसदी बढ़ा और कंपनी ने 4 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड घोषित किया. भारती एयरटेल का कंसोलिडेटेड मुनाफा 7,325 करोड़ रुपये पहुंच गया. भारती हेक्साकॉम ने 18 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान किया, जबकि DLF का मुनाफा लगभग स्थिर रहा लेकिन रेवेन्यू और मार्जिन में गिरावट दर्ज की गई. ल्यूपिन को US FDA से Famotidine Injection के लिए मंजूरी मिली है, जिससे स्टॉक में एक्शन देखने को मिल सकता है. ऑयल इंडिया का मुनाफा दोगुने से ज्यादा बढ़ा, वहीं क्रॉम्पटन ग्रीव्स को चौथी तिमाही में भारी घाटा हुआ. मैन इंफ्राकंस्ट्रक्शन के कमजोर नतीजों ने निवेशकों को निराश किया, जबकि NBCC इंडिया को 131 करोड़ रुपये का नया वर्क ऑर्डर मिला है. TVS Holdings, Zaggle Prepaid Ocean Services और ZF Commercial Vehicle Control Systems India ने मजबूत नतीजे पेश किए हैं, जबकि Kaynes Technology का मुनाफा घटा लेकिन आय में अच्छी बढ़त रही. ऐसे में इन सभी स्टॉक्स पर ट्रेडर्स और निवेशकों की खास नजर रहने वाली है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


भारत में पहला डेटा सेंटर बनाएगा Uber, अडानी ग्रुप के साथ हुई बड़ी साझेदारी

भारत से दुनिया के लिए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पर फोकस, साल के अंत तक तैयार हो सकता है नया सेंटर

Last Modified:
Wednesday, 13 May, 2026
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उबर (Uber) ने भारत में अपना पहला डेटा सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है. कंपनी यह डेटा सेंटर अडानी ग्रुप (Adani Group) के साथ साझेदारी में बनाएगी. उबर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दारा खोसरोशाही ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी.

गौतम अडानी से मुलाकात के बाद हुआ ऐलान

दारा खोसरोशाही ने गौतम अडानी से मुलाकात के बाद इस नई साझेदारी का ऐलान किया. उन्होंने बताया कि यह डेटा सेंटर उबर की टेक्नोलॉजी के परीक्षण और तैनाती के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. कंपनी का लक्ष्य इस साल के अंत तक इसे तैयार करना है. खोसरोशाही ने अपने पोस्ट में लिखा, भारत तेजी से उबर के लिए एक बड़े इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है. इसी को देखते हुए हम अडानी ग्रुप के साथ मिलकर देश में अपना पहला डेटा सेंटर स्थापित कर रहे हैं, जहां उबर की टेक्नोलॉजी का परीक्षण और तैनाती की जाएगी. इस साल के अंत तक तैयार होने वाला यह निवेश हमें बड़े स्तर पर काम करने में मदद करेगा, भारत से, दुनिया के लिए.

भारत में टेक और ऑपरेशन विस्तार पर Uber का जोर

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब उबर भारत में अपने टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल नेटवर्क का विस्तार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. भारत दौरे के दौरान उबर सीईओ ने कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की है. सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को दारा खोसरोशाही ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहम नायडू से भी मुलाकात की.

मुंबई और बेंगलुरु दौरे का भी कार्यक्रम

भारत यात्रा के दौरान उबर सीईओ मुंबई में राज्य सरकार के अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे. इसके बाद वह बेंगलुरु स्थित उबर के टेक्नोलॉजी सेंटर का दौरा करेंगे, जो कंपनी के इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट का बड़ा केंद्र माना जाता है.

Uber के लिए क्यों अहम है भारत?

भारत उबर के लिए सिर्फ बड़ा राइड-हेलिंग बाजार ही नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग टैलेंट का भी महत्वपूर्ण केंद्र है. देश में बड़ी संख्या में ड्राइवर पार्टनर्स और यूजर्स होने के साथ-साथ Uber यहां अपने टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट नेटवर्क को भी मजबूत कर रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अडानी ग्रुप के साथ डेटा सेंटर साझेदारी Uber की भारत में लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है और इससे देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा टेक निवेश को भी बढ़ावा मिल सकता है.


RBI से रिकॉर्ड डिविडेंड की उम्मीद, पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार को मिलेगा बड़ा आर्थिक सहारा

बजट दस्तावेजों के अनुसार, केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में RBI, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से डिविडेंड और अधिशेष के रूप में करीब 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है.

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Wednesday, 13 May, 2026
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केंद्र सरकार को चालू वित्त वर्ष में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड मिलने की संभावना है. मजबूत बैंकिंग प्रदर्शन, रिकॉर्ड मुनाफे और बढ़ते गैर-कर राजस्व के बीच यह राशि सरकार के लिए ऐसे समय में राहत बन सकती है, जब पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का दबाव बढ़ रहा है. माना जा रहा है कि RBI का यह अधिशेष ट्रांसफर सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ विकास योजनाओं और राजकोषीय प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभाएगा.

रिकॉर्ड डिविडेंड देने की तैयारी में RBI

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरबीआईI इस महीने होने वाली अपनी केंद्रीय बोर्ड बैठक में सरकार को दिए जाने वाले डिविडेंड की अंतिम राशि पर फैसला कर सकता है. पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में आरबीआई ने केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था. यह उससे पिछले वर्ष दिए गए 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में करीब 27 प्रतिशत अधिक था. अब उम्मीद जताई जा रही है कि वित्त वर्ष 2026-27 में यह राशि और अधिक हो सकती है, जिससे सरकार को अतिरिक्त वित्तीय मजबूती मिलेगी.

इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क के तहत तय होता है अधिशेष

आरबीआई द्वारा सरकार को दिया जाने वाला अधिशेष केंद्रीय बैंक के संशोधित इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क (ECF) के आधार पर तय किया जाता है. इस ढांचे के तहत आकस्मिक जोखिम बफर (CRB) को आरबीआई की बैलेंस शीट के 4.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना अनिवार्य है. इसी व्यवस्था के अनुसार केंद्रीय बैंक अपनी आय, निवेश और जोखिम प्रबंधन का आकलन करने के बाद सरकार को अधिशेष राशि ट्रांसफर करता है.

सरकार को ₹3.16 लाख करोड़ मिलने का अनुमान

बजट दस्तावेजों के अनुसार, केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में RBI, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से डिविडेंड और अधिशेष के रूप में करीब 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. यह मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 3.75 प्रतिशत अधिक है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह अनुमान सतर्कता के साथ लगाया गया है और वास्तविक राशि बजट अनुमान से ज्यादा हो सकती है.

PSU बैंकों ने दर्ज किया रिकॉर्ड मुनाफा

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के शानदार वित्तीय प्रदर्शन ने सरकार की उम्मीदों को और मजबूत किया है. बेहतर एसेट क्वालिटी, तेज क्रेडिट ग्रोथ और ब्याज आय में बढ़ोतरी के चलते FY26 में सरकारी बैंकों की प्रॉफिटेबिलिटी में बड़ा सुधार देखने को मिला.

सरकारी बैंकों का कुल ऑपरेटिंग प्रॉफिट बढ़कर 3.21 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि शुद्ध लाभ 11.1 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गया. लगातार चौथे वर्ष PSBs ने सामूहिक रूप से मुनाफा दर्ज किया है.

गैर-कर राजस्व पर सरकार की नजर

सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य निवेशों से भी वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 75,000 करोड़ रुपये के डिविडेंड की उम्मीद है. चालू वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 71,000 करोड़ रुपये रहा था. आरबीआई का अधिशेष ट्रांसफर और विभिन्न संस्थानों से मिलने वाला डिविडेंड सरकार के गैर-कर राजस्व का अहम हिस्सा होता है. अगले वित्त वर्ष में सरकार को कुल गैर-कर राजस्व के रूप में 6.66 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है.

वहीं, टैक्स रेवेन्यू 28.66 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 7.18 प्रतिशत अधिक है.

पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ेगी राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच RBI से मिलने वाला बड़ा डिविडेंड सरकार के लिए वित्तीय सुरक्षा कवच साबित हो सकता है. इससे सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने और विकास खर्च जारी रखने में मदद मिलेगी.


1 जून से लागू हो सकता है भारत-ओमान व्यापार समझौता, निर्यात को मिलेगी रफ्तार

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि ओमान की टीम के साथ हुई हालिया बैठक काफी सकारात्मक रही है और संभावना है कि भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता जून की शुरुआत से प्रभावी हो जाएगा.

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Wednesday, 13 May, 2026
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भारत और ओमान के बीच व्यापारिक रिश्ते जल्द ही एक नए चरण में प्रवेश कर सकते हैं. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA 1 जून 2026 से लागू हो सकता है. इस समझौते के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को ओमान के बाजार में बड़ी राहत मिलेगी, जबकि दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है.

1 जून से लागू हो सकता है भारत-ओमान समझौता

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि ओमान की टीम के साथ हुई हालिया बैठक काफी सकारात्मक रही है और संभावना है कि भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता जून की शुरुआत से प्रभावी हो जाएगा. यह समझौता दिसंबर 2025 में हस्ताक्षरित किया गया था और अब इसके क्रियान्वयन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं.

गोयल के अनुसार, ओमान का प्रतिनिधिमंडल इस समय भारत दौरे पर है, जहां दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को और मजबूत करने के विकल्पों पर चर्चा की जा रही है.

भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा फायदा

इस CEPA समझौते के तहत भारत के लगभग 98 प्रतिशत निर्यात को ओमान में शुल्क मुक्त पहुंच मिलने की संभावना है. इसमें वस्त्र, कृषि उत्पाद, चमड़ा और कई अन्य प्रमुख सेक्टर शामिल हैं. इससे भारतीय कंपनियों को ओमान के बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और निर्यात लागत में कमी आएगी.

वहीं दूसरी ओर भारत भी ओमान से आने वाले कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क कम करेगा. इनमें खजूर, संगमरमर और पेट्रोकेमिकल उत्पाद प्रमुख रूप से शामिल हैं.

व्यापार के साथ निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच निवेश के नए अवसर भी पैदा करेगा. भारत और ओमान के बीच लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत हो सकती है. इसके अलावा पश्चिम एशिया में भारत की आर्थिक मौजूदगी को भी इससे नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

चिली के साथ भी आगे बढ़ रही बातचीत

पीयूष गोयल ने चिली के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत और चिली के बीच आर्थिक आकार और अवसरों में अंतर होने के कारण कुछ चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन दोनों देश नए और व्यावहारिक समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.

गोयल ने संकेत दिए कि यदि महत्वपूर्ण खनिजों और खनन रियायतों को लेकर सकारात्मक सहमति बनती है, तो चिली के साथ भी व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है.

भारत के लिए क्यों अहम है चिली समझौता

भारत और चिली पहले से ही 2006 से एक तरजीही व्यापार समझौते के तहत जुड़े हुए हैं. अब दोनों देश इसे विस्तार देकर व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं.

इस प्रस्तावित समझौते में डिजिटल सेवाएं, निवेश सहयोग, MSME सेक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है. चिली दुनिया के सबसे बड़े लिथियम भंडार वाले देशों में गिना जाता है और तांबे का प्रमुख उत्पादक भी है. ऐसे में यह समझौता भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और सौर ऊर्जा सेक्टर के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का कहना है कि ओमान और चिली जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते भारत की वैश्विक आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं. इन समझौतों के जरिए भारत नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने, सप्लाई चेन मजबूत करने और निर्यात आधारित विकास को गति देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.