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इस साल महंगाई ने खूब रुलाया, क्या 2023 में बेहतर होगी स्थिति? जानें क्या है RBI का कहना
साल 2022 में महंगाई रिजर्व बैंक के लिए परेशानी बनी रही. उसे पहली बार सरकार को इस संबंध में स्पष्टीकरण देना पड़ा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
इस साल यानी 2022 में महंगाई ने खूब रुलाया. स्थिति यहां तक पहुंच गई कि इतिहास में पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सरकार को स्पष्टीकरण देना पड़ा कि आखिर महंगाई थमने में वह क्यों नाकाम रही. ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि क्या 2023 में महंगाई से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है? इसका जवाब RBI ने अपनी एक रिपोर्ट में देने का प्रयास किया है.
क्या है रिपोर्ट में?
RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report) में बताया गया है कि खुदरा महंगाई दर में अब नरमी देखने को मिल रही है. इसे काबू में लाने के लिए जो कदम उठाए गए हैं, उससे इसके भविष्य में और नीचे आने की उम्मीद है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुख्य मुद्रास्फीति के बने रहने और इसके बढ़ने से दबाव बना रह सकता है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि RBI ने मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिए तत्परता से कदम उठाए हैं. इससे मुद्रास्फीति के संतोषजनक दायरे और लक्ष्य के करीब आने की उम्मीद है.
वित्तीय प्रणाली बेहतर
वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था प्रतिकूल वैश्विक हालात का सामना कर रही है, लेकिन मजबूत वृहत आर्थिक बुनियाद और वित्तीय एवं गैर-वित्तीय क्षेत्र के मजबूत बही-खाते के चलते वित्तीय प्रणाली बेहतर स्थिति में है. हालांकि, मुद्रास्फीति दर ऊंची बनी हुई है, लेकिन तेजी से उठाए कदम और आपूर्ति के स्तर पर हस्तक्षेप से अब इसमें नरमी आ रही है. आने वाले समय में इसके और नीचे आने की उम्मीद है.
इसलिए चढ़ती हैं कीमतें
रिजर्व बैंक का कहना है कि अमेरिकी डॉलर में मजबूती से आयात महंगा होता है और इस वजह से मुद्रास्फीति भी बढ़ती है. इससे खासकर उन जिंसों के दाम बढ़ते हैं, जिन वस्तुओं का आयात डॉलर में किया जाता है. रुपए की विनिमय दर में गिरावट से स्थानीय मुद्रा में जिंसों के भाव में तेजी बरकरार है और कई अर्थव्यवस्थाओं में यह औसतन पिछले पांच साल के मुकाबले ऊंची बनी हुई है, जो गरीब अर्थव्यवस्थाओं के लिए दोहरा झटका है. इससे एक तरफ जहां जिंसों के दाम बढ़ते हैं, वहीं मानवीय संकट भी पैदा होता है.
क्या है RBI की जिम्मेदारी
घरेलू वित्तीय स्थिति के बारे में RBI ने कहा कि मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुसार संतोषजनक दायरे में लाने के लिए मौद्रिक नीति को कड़ा किया गया है. बता दें कि आरबीआई को केंद्र की तरफ से खुदरा महंगाई दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है. इस बार RBI तमाम प्रयासों के बावजूद इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाई थी, जिसकी वजह से उसे सरकार को स्पष्टीकरण देने पड़ा कि महंगाई रोकने में वह क्यों नाकाम रही.
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