होम / बिजनेस / RBI ने बताया - सुधर रही है बैंकों की बैलेंसशीट, लेकिन साथ में ही दी ये नसीहत
RBI ने बताया - सुधर रही है बैंकों की बैलेंसशीट, लेकिन साथ में ही दी ये नसीहत
RBI का कहना है कि जनधन, आधार और मोबाइल के परिणामस्वरूप बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच में वृद्धि हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि बैंकों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और उनका ग्रॉस एनपीए (GNPA) घट गया है. हालांकि, RBI ने कहा है कि बैंकों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि क्रेडिट जोखिम को सीमित करने के लिए उनके पास मजबूत ड्यू डिलिजेंस और क्रेडिट अप्रेजल मैकेनिज्म है. क्योंकि मौजूदा वृहद-आर्थिक हालात बैंकों की सेहत पर असर डाल सकते हैं.
बारीकी से नजर रखें
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-22 की 'भारत में बैंकिंग के रुझान एवं प्रगति' रिपोर्ट में कहा है कि यदि गिरावट का जोखिम होता है, तो संपत्ति की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. इसलिए, पुनर्गठित संपत्तियों में गिरावट पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जनधन, आधार और मोबाइल - जिसे अक्सर JAM ट्रिनिटी कहा जाता है- के परिणामस्वरूप बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच में वृद्धि हुई है. भारत के फास्ट पेमेंट प्लेटफॉर्म यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) की सफलता और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को बड़े पैमाने पर अपनाने से कई चिंताओं ने भी जन्म लिया है. जैसे कि थर्ड पार्टी का अनियंत्रित इंगेजमेंट, मिससेलिंग, डेटा गोपनीयता का उल्लंघन, अनुचित व्यापार आचरण, अत्यधिक ब्याज दरें, और अनैतिक वसूली.
यहां आया सुधार
रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों को उपयुक्त व्यावसायिक रणनीति विकसित करने, प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और चिंताओं को कम करने के लिए साइबर सुरक्षा उपायों को लागू करने की आवश्यकता है. RBI ने यह भी कहा है कि बैंकिंग सेक्टर ने अधिक लचीला और मजबूत बनकर महामारी का सामना किया है. समय पर नीतिगत फैसलों के चलते बैंकों ने लाभप्रदता, संपत्ति की गुणवत्ता और कैपिटल बफर्स में सुधार किया है. बैंकों की बैलेंसशीट भी पहले से बेहतर हो रही है. FY22 में, शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों की समेकित बैलेंस शीट ने सात वर्षों के अंतराल के बाद दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की है.
विदेशी बैंकों का GNPA
रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर 2022 में बैंकों का GNPA कुल परिसंपत्तियों के पांच प्रतिशत पर आ गया. वित्त वर्ष 2017-18 में बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा करने के बाद यह उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था. RBI की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय बैंक क्षेत्र इस समय मजबूत बना हुआ है, लेकिन नीति-निर्माताओं को बड़ी तेजी से बदलते हुए वृहद-आर्थिक हालात को लेकर सजग रहना होगा. क्योंकि इससे विनियमित इकाइयों की सेहत पर असर पड़ सकता है. रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारतीय बैंकों के उलट विदेशी बैंकों का GNPA वित्त वर्ष 2021-22 में 0.2 प्रतिशत बढ़कर 0.5 प्रतिशत हो गया.
टैग्स