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Banks के लिए 2023 में आई ये Good News, अब 2024 में भी होगा कमाल!
रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंकों के नॉन परफॉर्मिंग एसेट में लगातार कमी आ रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
भारतीय बैंकों की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है. किसी जमाने में बैड लोन से परेशान बैंक अब बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में रिजर्व बैंक के हवाले से बताया गया है कि बैंकों का ग्रॉस एनपीए (Non-Performing Assets) सितंबर तिमाही के अंत में कई साल के निचले स्तर 3.2 प्रतिशत पर आ गया है. इसी तरह, बैंकों का नेट नॉन परफॉर्मिंग एसेट रेशियो घटकर कई वर्षों के निचले स्तर 0.8 प्रतिशत पर पहुंच गया है.
क्या है रिपोर्ट में?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का कहना है कि बैंकों की नेट नॉन परफॉर्मिंग एसेट रेशियो (NPA) के अनुपात में गिरावट आई है. RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) के अनुसार, इस अवधि में बैंकों का GNPA अनुपात भी घटकर कई साल के निचले स्तर 3.2% पर आ गया है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सितंबर, 2023 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CRAR) 27.6 प्रतिशत, ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो 4.6% और एसेट पर रिटर्न 2.9% पर रहा है.
और सक्षम होंगे बैंक
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अनुसूचित कमर्शियल बैंकों (एससीबीएस) का रिस्क वेटेज एसेट रेशियो (CSR) 16.8% और समान इक्विटी टियर-1 अनुपात सितंबर, 2023 में 13.7 प्रतिशत था. RBI का कहना है कि कमर्शियल बैंक मिनिमम कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होंगे. रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा गया है कि घरेलू वित्तीय प्रणाली लचीली बनी हुई है. इसे मजबूत वित्तीय संस्थानों के स्वस्थ बहीखाते, वृहद-आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों, मुद्रास्फीति में नरमी और निरंतर राजकोषीय मजबूती से समर्थन मिल रहा है.
क्या होता है NPA?
अब जब NPA की बात निकली है, तो यह भी जान लेते हैं कि आखिर ये होता क्या है. एनपीए का मतलब होता है नॉन परफॉर्मिंग एसेट (Non Performing Asset) यानी फंसा हुआ कर्ज. सरल शब्दों में कहें तो लोन लेने के बाद जब कर्जदाता किश्त चुकाने में सक्षम नहीं होता या जानबूझकर ऐसा नहीं करता, तो बैंकों का पैसा फंस जाता है और बैंक उसे NPA घोषित कर देता है. RBI के नियमों के अनुसार, यदि किसी बैंक लोन की किश्त 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाई जाती है, तो उस लोन को एनपीए घोषित कर दिया जाता है. अगर ब्याज या मूलधन 90 दिनों या उससे अधिक की अवधि के लिए ओवरड्यू रहता है, तो लोन अकाउंट को गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है. जबकि, अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है.
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