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RBI ने 2026 की समय सीमा से पहले मुद्रास्फीति लक्ष्य की समीक्षा पर मांगे सुझाव
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 4% लक्ष्य और सहनशीलता सीमा पर उठाए सवाल हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 21 अगस्त को देश की मौद्रिक नीति ढांचे (Monetary Policy Framework) की समीक्षा के लिए एक चर्चा-पत्र (discussion paper) जारी किया और हितधारकों व आम जनता से 18 सितंबर तक अपने विचार भेजने को कहा है.
यह ढांचा लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्य प्रणाली (Flexible Inflation Targeting – FIT) पर आधारित है, जिसे मई 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 में संशोधन के जरिए कानूनी मान्यता दी गई थी. इस अधिनियम की धारा 45ZA के तहत, केंद्र सरकार को आरबीआई से परामर्श कर हर पांच साल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर मुद्रास्फीति का लक्ष्य तय करना होता है.
पहली बार यह लक्ष्य 5 अगस्त 2016 को अधिसूचित किया गया था, जो 2016 से 2021 तक प्रभावी रहा. इसके बाद मार्च 2021 में समीक्षा के बाद इसे मार्च 2026 तक के लिए बरकरार रखा गया. अगली समीक्षा मार्च 2026 से पहले की जानी है.
चर्चा-पत्र में यह सवाल उठाया गया है कि क्या मौद्रिक नीति के लिए मुख्य मुद्रास्फीति (headline inflation) या मूल मुद्रास्फीति (core inflation) को मार्गदर्शक बनाना चाहिए, खासकर ऐसे समय में जब खाद्य वस्तुओं का CPI टोकरी में भारी वजन है और खाद्य एवं गैर-खाद्य मुद्रास्फीति के बीच संबंध बदल रहे हैं.
इसके साथ ही आरबीआई ने यह भी पूछा है कि क्या वर्तमान 4% मुद्रास्फीति लक्ष्य भारत जैसी तेजी से बढ़ती हुई उभरती अर्थव्यवस्था के लिए उपयुक्त है, जो विकास और स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखना चाहती है.
बैंक ने यह जानना चाहा है कि क्या इस लक्ष्य के चारों ओर तय सहनशीलता सीमा (tolerance band) (जो अभी 2% से 6%) को संशोधित, संकुचित, विस्तृत या पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए. साथ ही यह भी विचार करने को कहा गया है कि क्या तय लक्ष्य को हटाकर एक लक्ष्य सीमा (target range) तय की जाए, जिससे नीति में लचीलापन बढ़े बिना इसकी विश्वसनीयता पर असर पड़े.
आरबीआई ने आगाह किया है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं, जिंसों की कीमतों में अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन और भुगतान प्रणालियों में तकनीकी बदलाव जैसी चुनौतियां मुद्रास्फीति लक्ष्य प्रणाली के समक्ष नई चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं.
चर्चा-पत्र में कहा गया है, "यह समीक्षा देश की व्यापक अर्थव्यवस्था को बेहतर दिशा देने के लिए मौद्रिक नीति ढांचे के कुछ मूल सिद्धांतों पर पुनर्विचार का अवसर प्रदान करती है, ताकि सभी हितधारकों के हित सुरक्षित रह सकें."
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