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RBI ने आपके हित में उठाया कदम, डिजिटल लोन पर बैंकों को दिया ये निर्देश

रिजर्व बैंक ने पिछले महीने कुछ इकाइयों को कर्ज पर जरूरत से अधिक ब्याज लेने और बकाया कर्ज की वसूली के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए डिजिटल लोन के नियमों को कड़ा किया था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकों और NBFC (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) से डिजिटल माध्यम से दिए जाने वाले कर्ज (Loan) को संशोधित नियमों के अंतर्गत लाने को कहा है. इसके लिए उन्हें 30 नवंबर तक समय दिया गया है. RBI का कहना है कि ऐसा ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के लिए किया गया है.

नियमों को किया कड़ा
रिजर्व बैंक ने पिछले महीने कुछ इकाइयों को कर्ज पर जरूरत से अधिक ब्याज लेने और बकाया कर्ज की वसूली के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए डिजिटल लोन के नियमों को कड़ा किया था. आरबीआई ने एक सर्कुलर में कहा है कि क्रेडिट सर्विस प्रोवाइडर (LSPs) / डिजिटल लोन ऐप (DLAs) के साथ रेगुलेटेड एंटिटीज़ (बैंक और NBFC) की आउटसोर्सिंग व्यवस्था उनके दायित्वों को कम नहीं करती है. रेगुलेटेड एंटिटीज़ सुनिश्चित करेंगी कि आउटसोर्सिंग संस्थान मौजूदा दिशानिर्देशों का पालन करें. 

इन ग्राहकों पर लागू
सर्कुलर में आगे कहा गया है कि निर्देश नया कर्ज लेने वाले मौजूदा ग्राहकों और नए ग्राहकों दोनों पर लागू होंगे. RBI के अनुसार, व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए विनियमित इकाइयों (Regulated Entities) को पर्याप्त व्यवस्था स्थापित करने को लेकर 30 नवंबर, 2022 तक का समय दिया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो कि मौजूदा डिजिटल कर्ज भी पूरी तरह से इन दिशानिर्देशों के अनुरूप हो.

रेगुलेटेड एंटिटीज़ भरेंगी शुल्क
नई व्यवस्था के तहत सभी कर्ज वितरण और भुगतान केवल कर्ज लेने वाले और विनियमित इकाइयों के बैंक खातों के बीच किया जाएगा. इसमें लोन प्रोवाइडर्स के 'पूल' खाते के उपयोग की जरूरत नहीं है. आरबीआई के सर्कुलर के अनुसार, कर्ज देने की प्रक्रिया में कोई भी शुल्क आदि देना है, वह विनयमित इकाइयां देंगी न कि कर्ज लेने वाला. वहीं, शार्क टैंक इंडिया के मशहूर जज और भारतपे के पूर्व सह-संस्थापक अशीनर ग्रोवर ने नए डिजिटल लेंडिंग दिशानिर्देशों को लेकर RBI की आलोचना की है. उन्होंने नई गाइडलाइन को फिनटेक कंपनियों को लेनदेन से हतोत्साहित करने वाला बताया है.


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