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तीसरी तिमाही में भारत की GDP वृद्धि दर पहुंची यहां, सरकार ने जताई है ये उम्मीद
जहां एक ओर मैन्युफैचरिंग सेक्टर में पिछली तिमाही की तुलना में 1.1 प्रतिशत की कमी आई है वहीं कृषि क्षेत्र ने दूसरी तिमाही में 2.4 प्रतिशत की तुलना में तीसरी तिमाही में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
भारत सरकार की ओर से तीसरी तिमाही के लिए ग्रोथ रेट के आंकड़े जारी कर दिये गए हैं. सरकार के आंकड़ों के अनुसार ये 4.4 प्रतिशत रही है जबकि एक साल पहले ये 5.2 प्रतिशत थी. सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2022-23 में ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत रहेगी. 22-23 की तीसरी तिमाही में लगातार जीडीपी 40.19 लाख करोड़ रुपये रही है जबकि 2021-22 की तीसरी तिमाही में यह 38.51 लाख करोड़ रुपये था. ये आंकड़े 21-22 से जो 4.4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाते हैं. 2022-23 की तीसरी तिमाही में मौजूदा कीमतों पर जीडीपी 69.38 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2021-22 की तीसरी तिमाही में यह 62.39 लाख करोड़ रुपये था, जो पिछले साल से 11.2 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाते हैं.
क्या रहेगी इस साल ग्रोथ
पिछले साल की तिमाही के आंकड़ों के 4.4 फीसदी बढ़ोतरी के बीच वित्त वर्ष 23 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है. आंकड़े ये भी बता रहे हैं कि 2021-22 के लिए आर्थिक विकास को पहले के 8.7 प्रतिशत से संशोधित कर 9.1 प्रतिशत कर दिया गया था. मुख्य रूप से महामारी से संबंधित सांख्यिकीय आंकड़ों के कारण सकल घरेलू उत्पाद वित्त वर्ष 23 की पहली तिमाही में 13.5 प्रतिशत से पिछली तिमाही में 6.3 प्रतिशत पर आ गया था.
क्या रहा अलग-अलग सेक्टर का हाल
जीडीपी के आंकड़ों में अगर अलग-अलग सेक्टर की ग्रोथ देखें तो जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में पिछली तिमाही की तुलना में 1.1 प्रतिशत की कमी आई, पिछली तिमाही में ये 3.6 प्रतिशत रही थी. इस बीच, कृषि क्षेत्र ने दूसरी तिमाही में 2.4 प्रतिशत की तुलना में तीसरी तिमाही में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की. खनन क्षेत्र पिछली तिमाही में 0.4 प्रतिशत के आंकड़े के तुलना में तीसरी तिमाही में ये बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गया है. वहीं अगर खनन क्षेत्र की बात करें तो पिछली तिमाही में इसका आंकड़ा 0.4 प्रतिशत था जो इस तिमाही में बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गया है. तीसरी तिमाही के दौरान बिजली और निर्माण क्षेत्रों में क्रमश: 8.2 प्रतिशत और 8.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। होटल और परिवहन जैसे संपर्क-गहन क्षेत्र दूसरी तिमाही में 15.6 प्रतिशत रहने के बावजूद इस तिमाही में तेजी से घटकर 9.7 प्रतिशत रह गए. रियल एस्टेट में 5.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, वहीं अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में रक्षा क्षेत्र में 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
आखिर क्यों हुई कम
देश में उच्च मुद्रास्फीति के स्तर को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के लिए कम सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. इसके अलावा, मॉडरेशन को आधार प्रभाव के तहत आधार के सामान्यीकरण से भी जोड़ा जा सकता है. इन कारकों के अलावा, निर्यात और कंज्यूमर डिमांड में मंदी ने भी संख्या को नीचे लाने में योगदान दिया है. उपभोक्ता मांग में सेंध को पिछले कुछ वर्षों में मुद्रास्फीति को कम करने के लिए आरबीआई द्वारा तेजी से दरों में बढ़ोतरी से जोड़ा जा सकता है. इससे पहले कई अर्थशास्त्री ब्याज दरों में बढ़ोतरी की श्रृंखला के कारण तीसरी तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि में मंदी की भविष्यवाणी कर चुके हैं. यहां तक कि सरकारी आंकड़ों से भी पता चला था कि भारत की अर्थव्यवस्था चालू तिमाही में और धीमी होकर 4.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, और 2023-24 के दौरान यह औसतन 6.0 प्रतिशत रहेगी.
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