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FY2026 में एविएशन सेक्टर पर दबाव, ग्रोथ सुस्त और घाटा बढ़ने की आशंका : ICRA
FY2026 भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए चुनौतीपूर्ण, धीमी ग्रोथ और बढ़ता घाटा चिंता का कारण बन गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
देश का एविएशन सेक्टर एक बार फिर आर्थिक दबाव में आता दिख रहा है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में घरेलू हवाई यात्री यातायात में महज 4-6% की वृद्धि होने की संभावना है, जो पहले के 7-10% अनुमान से काफी कम है. ऐसे समय में जब एयरलाइंस नए विमानों की डिलीवरी ले रही हैं, मांग की यह सुस्ती सेक्टर के लिए चिंता का कारण बन गई है.
172-176 मिलियन तक पहुंच सकता है घरेलू हवाई यात्री यातायात
ICRA ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में बताया है कि FY2026 में घरेलू हवाई यात्री यातायात 172-176 मिलियन तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल की तुलना में केवल 4-6% की वृद्धि होगी. यह अनुमान पहले के 7-10% वृद्धि के अनुमान से कम है. यात्री यातायात में यह सुस्ती ऐसे समय आ रही है जब विमानों की डिलीवरी बढ़ रही है, जिसके कारण भारतीय एविएशन उद्योग का शुद्ध घाटा FY2025 के 55 अरब रुपये से बढ़कर FY2026 में 95-105 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
FY2026 की पहली तिमाही में सुस्ती
FY2026 की पहली तिमाही में यात्री यातायात वृद्धि दर 4.4% रही. इसका कारण सीमा पार तनाव, फ्लाइट कैंसिलेशन, हादसों के बाद यात्रा को लेकर झिझक और लंबा मानसून बताया गया. इसके अलावा अमेरिका की ओर से लगाए गए नए टैरिफ ने व्यापारिक माहौल को प्रभावित किया है, जिससे आने वाले महीनों में हवाई यात्रा की मांग और कम हो सकती है.
ICRA की चेतावनी
ICRA की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट किंजल शाह ने कहा कि FY2025 में एयरलाइंस को बेहतर प्राइसिंग पावर और मांग का फायदा मिला था, लेकिन FY2026 में मांग कमजोर हो रही है. उन्होंने बताया कि धीमी यात्री वृद्धि और नए विमानों की बढ़ती डिलीवरी से घाटा और बढ़ेगा. FY2026 में उद्योग की ब्याज कवरेज रेश्यो 1.3-1.5x रहने का अनुमान है, जो FY2025 के 1.5-1.7x से कम होगा. हालांकि, अनुमानित घाटा FY2022 (216 अरब रुपये) और FY2023 (179 अरब रुपये) से काफी कम रहेगा.
ईंधन कीमतें और रुपये की गिरावट असरदार
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) और रुपये-डॉलर की विनिमय दर एयरलाइंस की कमाई पर बड़ा असर डालती हैं. ईंधन की लागत एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च का 30-40% होती है. FY2026 के शुरुआती पांच महीनों में ATF की औसत कीमत 87,962 रुपये प्रति किलोलीटर रही, जो सालाना आधार पर 8% कम है, लेकिन कोविड से पहले FY2020 की कीमत (64,715 रुपये/किलोलीटर) से कहीं अधिक है. वहीं रुपये ने डॉलर के मुकाबले FY2026 के पहले चार महीनों में करीब 3% की गिरावट दर्ज की. इससे विमान लीज, इंजन मेंटेनेंस और कर्ज भुगतान जैसे खर्च और महंगे हो गए हैं.
नए विमान और सप्लाई चेन चुनौतियां
FY2025 में उद्योग की क्षमता लगभग 5% बढ़कर 855 विमानों तक पहुंच गई. आने वाले 10 वर्षों में 1,600 से ज्यादा विमानों की डिलीवरी लंबित है, जिनमें बड़ी संख्या पुराने विमानों को बदलने के लिए है. हालांकि, इंजन खराबी और सप्लाई चेन संकट के कारण सितंबर 2023 में 20-22% विमानों को ग्राउंडेड करना पड़ा था. मार्च 2025 तक यह आंकड़ा घटकर 15-17% (करीब 130 विमान) रह गया.
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