UPI पेमेंट पर चार्ज की तैयारी? राष्ट्रपति ने MDR से जुड़े विधेयक को दी मंजूरी

पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव को मिली मंजूरी, फिलहाल UPI पर जीरो MDR की व्यवस्था बरकरार

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Wednesday, 19 August, 2026
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यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भुगतान को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही सरकार को UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव करने का कानूनी अधिकार मिल गया है. हालांकि, फिलहाल UPI पर जीरो MDR की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

नोटिफिकेशन के जरिए तय होगी MDR की व्यवस्था

कानून में संशोधन के बाद अब सरकार नोटिफिकेशन के जरिए यह तय कर सकेगी कि किन डिजिटल पेमेंट्स को MDR से छूट दी जाएगी. मौजूदा व्यवस्था के तहत बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर MDR के रूप में कोई शुल्क नहीं ले सकते हैं.

इस बदलाव से सरकार के पास भविष्य में UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का विकल्प खुल गया है. हालांकि, इसके लिए अलग से सरकारी फैसला और नोटिफिकेशन जारी करना होगा. यानी राष्ट्रपति की मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि UPI पेमेंट पर तत्काल कोई चार्ज लग गया है.

सरकार को इंसेंटिव पर खर्च घटाने में मिल सकती है मदद

UPI पर जीरो MDR की व्यवस्था के कारण बैंकों और पेमेंट कंपनियों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए सरकार समय-समय पर इंसेंटिव देती रही है. MDR व्यवस्था में बदलाव की अनुमति मिलने से भविष्य में सरकार को इस तरह के खर्च को कम करने का विकल्प मिल सकता है.

टैक्स कानून में भी बदलाव को मंजूरी

राष्ट्रपति ने Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 को भी मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और कारोबार करना आसान बनाना है. इसके अलावा नए प्रावधानों के तहत फंड मैनेजरों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करने की प्रक्रिया आसान करने का प्रयास किया गया है. कुछ परिस्थितियों में भारत में उनकी मौजूदगी को टैक्स नियमों के तहत भारत में कारोबार करने के रूप में नहीं माना जाएगा. इससे भारत को ग्लोबल फंड मैनेजमेंट और निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
 


किसानों को आसान कर्ज, युवाओं को बैंकिंग से जोड़ने पर जोर; सीतारमण ने बैंकों को दिए निर्देश

वित्तमंत्री ने कहा कि सरकारी बैंक दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों तक अधिक ऋण पहुंचाएं. इसके साथ ही युवाओं को बैंकिंग से जोड़ने के लिए 2 अक्टूबर से विशेष अभियान शुरू करने का सुझाव भी दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 August, 2026
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Wednesday, 19 August, 2026
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भारत को दलहन और तिलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने सरकारी बैंकों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को दिए जाने वाले ऋण में तेजी लाने को कहा है. उनका मानना है कि इससे इन फसलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘पीएसबी कॉन्क्लेव’ के समापन सत्र में सीतारमण ने सरकारी बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि सरकार की कृषि और खाद्य उत्पादन से जुड़ी प्राथमिकताओं को सही रणनीति के साथ किसानों तक वित्तीय सहायता पहुंचाने में बदलना होगा.

दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर

वित्तमंत्री ने कहा कि बैंकों को विशेष रूप से दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को अधिक ऋण देना चाहिए. इससे भारत की आयात निर्भरता कम करने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सकता है.

सरकार पहले ही दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष मिशन पर काम कर रही है. वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में घोषित दलहन मिशन का लक्ष्य 2031 तक घरेलू उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना और खेती का रकबा 310 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना है.

धन धान्य कृषि योजना वाले जिलों पर विशेष फोकस

सीतारमण ने बैंकों से प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के अंतर्गत आने वाले जिलों में ऋण उपलब्धता बढ़ाने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के कृषि ऋण की जरूरत है. इसके अलावा सिंचाई, फसल कटाई के बाद भंडारण और कृषि से जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए भी पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया.

प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में तेजी लाने की जरूरत

वित्तमंत्री ने बैंकों से प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के तहत अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रयास तेज करने को भी कहा. उन्होंने बैंक प्रमुखों से कहा कि प्राथमिकता क्षेत्र में ऋण की कमी को केवल अन्य संस्थानों के माध्यम से पूरा करने के बजाय बैंक खुद अपनी क्षमता बढ़ाएं.

उन्होंने कहा कि प्राथमिकता क्षेत्र को केवल लक्ष्य पूरा करने के रूप में नहीं, बल्कि औपचारिक ऋण के विस्तार, नए ग्राहकों को जोड़ने, उद्यमों को मजबूत बनाने और व्यापक आर्थिक विकास के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए.

युवाओं के लिए शुरू हो सकता है ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान

बैठक में वित्तमंत्री ने युवाओं को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए भी एक नई पहल का सुझाव दिया. उन्होंने सरकारी बैंकों से 2 अक्टूबर से एक महीने तक चलने वाला ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान शुरू करने का आग्रह किया.

यह अभियान 16 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा सकता है. सीतारमण ने कहा कि बैंकों को युवाओं के शाखाओं में आने का इंतजार करने के बजाय कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कौशल विकास संस्थानों और अन्य परिसरों तक पहुंचना चाहिए.

उन्होंने कहा कि खाता खोलने, वित्तीय जागरूकता और बैंकिंग उत्पादों की जानकारी के जरिए युवाओं के साथ सीधा जुड़ाव बढ़ाया जा सकता है. वित्तमंत्री ने बैंक शाखाओं में युवाओं की मदद के लिए समर्पित ‘युवा कियोस्क’ या ‘युवा बैंकिंग मित्र’ जैसी व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया.

12 सरकारी बैंकों को अलग रणनीति बनाने की सलाह

सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के सभी 12 बैंकों को अपनी क्षेत्रीय मौजूदगी, उत्पादों और संस्थागत क्षमताओं के आधार पर युवाओं को आकर्षित करने और उनसे जुड़ने की अलग रणनीति तैयार करनी चाहिए. सरकार का फोकस एक ओर किसानों तक औपचारिक ऋण की पहुंच बढ़ाने पर है, तो दूसरी ओर नई पीढ़ी को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने पर भी है.
 


सेंसेक्स-निफ्टी में लगातार गिरावट के बाद आज कैसी रहेगी चाल? इन शेयरों में दिख सकती है हलचल

मंगलवार के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 77,235.46 अंक पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 भी 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,154.90 अंक पर बंद हुआ.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 19 August, 2026
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Wednesday, 19 August, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को निवेशकों की नजर बाजार की आगे की चाल पर रहेगी. मंगलवार को सेंसेक्स लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी में लगातार छठे दिन कमजोरी देखने को मिली. ऐसे में आज बाजार खुलने पर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की चाल और रुपये की स्थिति पर निवेशकों की खास नजर रहेगी. साथ ही RailTel, Paytm, BPCL, Exide Industries और PC Jeweller समेत कई कंपनियों के अहम अपडेट शेयरों में हलचल ला सकते हैं.

कल बाजार का क्या रहा हाल?

मंगलवार के कारोबारी सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 77,235.46 अंक पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 भी 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,154.90 अंक पर बंद हुआ. सेंसेक्स में यह लगातार तीसरे दिन गिरावट रही, जबकि निफ्टी लगातार छठे कारोबारी सत्र में कमजोर रहा. मंगलवार को रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95.68 के स्तर पर पहुंच गया. इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.6025 पर बंद हुआ था.

इन शेयरों ने बढ़ाया बाजार पर दबाव

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए. एशियन पेंट्स में सबसे ज्यादा 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा इन्फोसिस, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो और आईटीसी जैसे बड़े शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली. दूसरी ओर एक्सिस बैंक, पावरग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फिनसर्व और एनटीपीसी के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए.

सेक्टोरल मोर्चे पर आईटी और रियल्टी पर दबाव

मंगलवार को निफ्टी आईटी, रियल्टी और पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली. वहीं, निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन किया. ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 0.43 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप लगभग सपाट बंद हुआ. अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि लगातार बिकवाली के बाद बाजार में रिकवरी आती है या पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें दबाव बनाए रखती हैं.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

आज के कारोबार में RailTel, Paytm, Exide Industries, BPCL, Hindustan Zinc, HCC, PC Jeweller, Eicher Motors और ONGC समेत कई शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी. RailTel को EPFO से 166.8 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर मिला है, जबकि Paytm की पैरेंट कंपनी One 97 Communications में करीब 2,948.94 करोड़ रुपये की बड़ी ब्लॉक डील हुई है. Exide Industries ने अपनी सब्सिडियरी Exide Energy Solutions में 200 करोड़ रुपये का निवेश किया है और BPCL ने 5,000 करोड़ रुपये तक फंड जुटाने को मंजूरी दी है. Hindustan Zinc ने रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ाने की जानकारी दी है, वहीं HCC को 800 करोड़ रुपये तक पूंजी जुटाने की मंजूरी मिली है. PC Jeweller ने एक और कंसोर्टियम बैंक का पूरा कर्ज चुकाया है. इसके अलावा Royal Enfield के नए Classic 350 Gorkha Edition लॉन्च के चलते Eicher Motors और असम में नई गैस सुविधाएं शुरू करने के कारण ONGC के शेयर भी फोकस में रह सकते हैं.

बाजार के लिए क्या रहेंगे अहम संकेत?

आज के कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी. मंगलवार की गिरावट के बाद बाजार में शॉर्ट-कवरिंग या निचले स्तरों पर खरीदारी से कुछ रिकवरी भी देखने को मिल सकती है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


FY27 में 6.8% रह सकती है भारत की GDP ग्रोथ, महंगाई और कमजोर रुपये से बढ़ा जोखिम

Ind-Ra का नया अनुमान मई में जारी किए गए 6.7 प्रतिशत के पूर्वानुमान से थोड़ा अधिक है. हालांकि, एजेंसी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से पैदा हुई अनिश्चितता चालू वित्त वर्ष में महंगाई और आर्थिक वृद्धि के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई है.

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Tuesday, 18 August, 2026
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इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. एजेंसी के मुताबिक, ईंधन और खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और एल नीनो के कारण कृषि उत्पादन पर पड़ने वाला संभावित असर आर्थिक वृद्धि के लिए प्रमुख जोखिम बन सकते हैं.

Ind-Ra का नया अनुमान मई में जारी किए गए 6.7 प्रतिशत के पूर्वानुमान से थोड़ा अधिक है. हालांकि, एजेंसी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से पैदा हुई अनिश्चितता चालू वित्त वर्ष में महंगाई और आर्थिक वृद्धि के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई है.

तिमाही आधार पर कैसी रहेगी GDP ग्रोथ?

रेटिंग एजेंसी के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में GDP ग्रोथ 6.9 प्रतिशत, जुलाई-सितंबर तिमाही में 6.6 प्रतिशत, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 6.7 प्रतिशत और जनवरी-मार्च तिमाही में 6.9 प्रतिशत रह सकती है. इसकी तुलना में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इन्हीं तिमाहियों के लिए क्रमशः 7 प्रतिशत, 6.4 प्रतिशत, 6.5 प्रतिशत और 6.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है.

कच्चे तेल के अनुमान में राहत

Ind-Ra ने FY27 के लिए औसत कच्चे तेल की कीमत का अनुमान घटाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जो मई में 95 डॉलर प्रति बैरल था. एजेंसी का मानना है कि कच्चे तेल की कम कीमतों से भारत के व्यापार घाटे और चालू खाते के घाटे को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, मौसम से जुड़े जोखिमों के कारण खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है, जिससे आर्थिक वृद्धि को मिलने वाला फायदा सीमित हो सकता है.

Ind-Ra के मुख्य अर्थशास्त्री और पब्लिक फाइनेंस प्रमुख देवेंद्र पंत ने कहा कि FY27 की जून तिमाही में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत 101.31 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान यह 96.49 डॉलर प्रति बैरल थी. उन्होंने कहा कि पूरे साल के लिए कच्चे तेल की कम कीमत का अनुमान अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकता है, लेकिन एल नीनो का महंगाई पर असर इस सकारात्मक प्रभाव को सीमित कर सकता है.

रुपये पर बना रह सकता है दबाव

रेटिंग एजेंसी ने FY27 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की औसत विनिमय दर 93.98 रुपये रहने का अनुमान लगाया है. इससे पहले एजेंसी ने 94.28 रुपये प्रति डॉलर का अनुमान जताया था. नया अनुमान साल-दर-साल रुपये में करीब 6.4 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है और इससे संकेत मिलता है कि भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रह सकता है.

Ind-Ra ने विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) जमा यानी FCNR(B) और बाहरी वाणिज्यिक उधारी यानी ECB के जरिए 70 अरब डॉलर के पूंजी प्रवाह का अनुमान लगाया है. एजेंसी का मानना है कि ये प्रवाह चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को सहारा दे सकते हैं.

महंगाई और चालू खाते का घाटा बढ़ने का अनुमान

Ind-Ra के अनुसार, FY27 में खुदरा महंगाई औसतन 4.9 प्रतिशत रह सकती है, जबकि FY26 में यह 2 प्रतिशत थी. एजेंसी ने कहा कि एल नीनो के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति में खाद्य महंगाई बढ़ सकती है.

वहीं, चालू खाते का घाटा FY26 के 0.6 प्रतिशत से बढ़कर FY27 में GDP के 1.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है. यह स्थिति कच्चे तेल की कम कीमतों से आयात बिल में मिलने वाली राहत के बावजूद देखने को मिल सकती है.

राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर भी चुनौती

Ind-Ra ने कहा कि सरकार के FY27 के लिए GDP के 4.3 प्रतिशत राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना भी चुनौतीपूर्ण बना रह सकता है. तरलीकृत पेट्रोलियम गैस यानी LPG और उर्वरक सब्सिडी पर अधिक खर्च से सरकारी वित्त पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है.

देवेंद्र पंत के अनुसार, प्रत्यक्ष कर संग्रह और गैर-कर राजस्व में मजबूत वृद्धि सरकार को अपने राजकोषीय लक्ष्य के करीब पहुंचने में मदद कर सकती है. हालांकि, अप्रत्यक्ष कर संग्रह कमजोर रहने पर राजकोषीय समेकन पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है.

इससे पहले RBI ने भी FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया था. केंद्रीय बैंक ने घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का हवाला देते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए अपेक्षाकृत मजबूत वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा है.


राखी बाजार में ‘वोकल फॉर लोकल’ की गूंज, ₹25 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है कारोबार

रक्षाबंधन पर ₹25 हजार करोड़ के राखी कारोबार का अनुमान, उपहार और अन्य उत्पादों को मिलाकर व्यापार ₹30 हजार करोड़ के पार पहुंचने की उम्मीद

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Tuesday, 18 August, 2026
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रक्षाबंधन के मौके पर इस बार बाजारों में स्वदेशी राखियों की चमक और बढ़ गई है. पारंपरिक डिजाइन के साथ-साथ ‘विकसित भारत’, ‘मोदी गारंटी’, ‘ब्रह्मोस’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी थीम वाली राखियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं. कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का अनुमान है कि इस वर्ष देशभर में केवल राखियों का कारोबार करीब ₹25 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है, जबकि मिठाई, उपहार, कपड़े और अन्य त्योहार संबंधी उत्पादों को मिलाकर कुल व्यापार ₹30 हजार करोड़ से अधिक होने की संभावना है.

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी उत्पादों और राष्ट्रभावना के उत्सव के रूप में भी उभरकर सामने आया है. उनके अनुसार, पिछले वर्ष देशभर में करीब ₹17 हजार करोड़ का राखी कारोबार हुआ था, जबकि 2023 में यह आंकड़ा लगभग ₹12 हजार करोड़ था.

‘वोकल फॉर लोकल’ का दिख रहा असर

प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं का बढ़ता भरोसा और ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों का असर इस बार राखी बाजार में साफ दिखाई दे रहा है.

उन्होंने बताया कि पारंपरिक राखियों के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं, राष्ट्रीय उपलब्धियों और विकसित भारत के संकल्प से प्रेरित राखियों की मांग तेजी से बढ़ी है. बाजार में ‘विकसित भारत राखी’, ‘मोदी गारंटी राखी’, ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘आत्मनिर्भर भारत राखी’, ‘वोकल फॉर लोकल राखी’, ‘भारत गौरव राखी’, ‘नारी वंदन राखी’, ‘लखपति दीदी राखी’, ‘नमामि गंगे राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘अमृतकाल राखी’ खास तौर पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं.

युवाओं और बच्चों में ‘ब्रह्मोस’ राखी का क्रेज

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने कहा कि इन राखियों के जरिए बहनें सिर्फ रक्षा सूत्र नहीं बांध रही हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी अभियान, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी भावनाएं भी व्यक्त कर रही हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं और बच्चों के बीच ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘विकसित भारत राखी’ को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है.

अलग-अलग राज्यों की राखियों को भी मिल रही पहचान

देश के विभिन्न हिस्सों की कला, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों से जुड़ी राखियां भी बाजार में अपनी अलग पहचान बना रही हैं. नागपुर की खादी राखी, जयपुर की सांगानेरी कला राखी, पुणे की सीड या बीज राखी, असम की चाय पत्ती राखी, कोलकाता की जूट राखी, मुंबई की सिल्क राखी, बिहार की मधुबनी राखी, बेंगलुरु की पुष्प राखी और जनजातीय हस्तकला से बनी बांस की राखियां उपभोक्ताओं को खूब पसंद आ रही हैं.

कैट का कहना है कि इन उत्पादों की बढ़ती मांग से छोटे कारीगरों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारोबारियों को बड़ा बाजार मिल रहा है.

चीनी राखियों की मांग लगभग न के बराबर

कैट के मुताबिक, इस वर्ष भी बाजारों में चीनी राखियों की मांग नहीं के बराबर है. व्यापारियों और उपभोक्ताओं का रुझान पूरी तरह भारतीय निर्मित राखियों की ओर है, जिससे स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिल रही है.

कैट के राष्ट्रीय चेयरमैन बृजमोहन अग्रवाल ने देशभर के व्यापारियों और उपभोक्ताओं से अपील की कि रक्षाबंधन के साथ-साथ आगामी त्योहारों में भी भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए और ‘स्वदेशी अपनाओ, भारत बढ़ाओ’ अभियान को मजबूत बनाया जाए.

प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि कैट विभिन्न शहरों में विशेष स्वदेशी मेले भी आयोजित करने की तैयारी कर रहा है, जहां महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार राखियों और अन्य उत्पादों की बिक्री की जाएगी. खंडेलवाल ने कहा, “आज स्वदेशी राखी केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत और राष्ट्र गौरव का प्रतीक बन चुकी है.”


अडानी पावर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, ₹1,005 करोड़ के भुगतान विवाद में कर्नाटक डिस्कॉम की याचिका खारिज

शीर्ष अदालत ने Aptel के आदेश में दखल देने से किया इनकार. कर्नाटक की बिजली कंपनियों को झटका, अब तीन महीने में होगा मामले का अंतिम निपटारा

Last Modified:
Tuesday, 18 August, 2026
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अडानी पावर (Adani Power) को ₹1,005 करोड़ के भुगतान विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अडानी पावर की ओर से जारी चालान और भुगतान आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (Aptel) के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए मामले में तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला सुनाने का निर्देश दिया है.

₹1,005 करोड़ के चालान को लेकर पहुंचा था मामला

विवाद बिजली खरीद से जुड़े बकाया भुगतान का है. अडानी पावर ने एक सरकारी पोर्टल पर करीब ₹1,005 करोड़ का चालान अपलोड किया था, जिसके खिलाफ कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियां अदालत पहुंची थीं.

जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने Aptel के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें चालान पर रोक लगाने की मांग खारिज की गई थी. Aptel ने केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग यानी CERC के उस आदेश को भी बरकरार रखा था, जिसमें डिस्कॉम को अडानी पावर की ओर से दावा की गई राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था.

2023 के CERC आदेश से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, CERC ने 2023 में कर्नाटक डिस्कॉम को अंतर राशि का भुगतान वहन लागत और लेट पेमेंट सरचार्ज के साथ करने के लिए उत्तरदायी ठहराया था. भुगतान छह किस्तों में किया जाना था. आदेश में यह भी कहा गया था कि तय शर्तों का पालन नहीं होने पर बिजली उत्पादक लेट पेमेंट सरचार्ज का हकदार होगा. इसके बाद अडानी पावर ने डिस्कॉम पर आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए आयोग का रुख किया.

डिस्कॉम ने कहा- कोई बकाया नहीं

कर्नाटक की बिजली कंपनियों ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनके ऊपर अडानी पावर का कोई बकाया नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि Aptel ने मामले के गुण-दोष पर विचार किए बिना CERC के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

डिस्कॉम ने यह भी कहा कि विवादित राशि का भुगतान करने से उनकी वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है. कंपनियों ने बिजली आपूर्ति में संभावित बाधा और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर का भी हवाला दिया.

तीन महीने में आएगा अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक डिस्कॉम की याचिका खारिज करते हुए Aptel को मामले में तीन महीने के भीतर अंतिम आदेश सुनाने का निर्देश दिया है. फिलहाल इस फैसले को अडानी पावर के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि भुगतान विवाद पर अंतिम फैसला अब अपीलीय न्यायाधिकरण करेगा.


पेटीएम से जुड़ी कंपनी ने बेचे 1.92 करोड़ शेयर, ₹2,949 करोड़ की ब्लॉक डील से मचा हड़कंप

पेटीएम में करीब 1.92 करोड़ शेयरों की ₹2,949 करोड़ की ब्लॉक डील हुई है. रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी को संभावित विक्रेता बताया जा रहा है. डील की खबर के बाद पेटीएम के शेयर में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई.

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Tuesday, 18 August, 2026
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पेटीएम (Paytm) की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस के शेयरों में मंगलवार को दबाव देखने को मिला. कंपनी के करीब 1.92 करोड़ शेयरों की बड़ी ब्लॉक डील हुई, जिसकी कुल कीमत करीब ₹2,949 करोड़ बताई जा रही है. इस सौदे में पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा से पूरी तरह जुड़ी कंपनी रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी को संभावित विक्रेता बताया जा रहा है.

डील के बाद पेटीएम के शेयर करीब 2 फीसदी तक गिरकर ₹1,557 के आसपास पहुंच गए. ब्लॉक डील में शेयरों के लिए ₹1,535.10 प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य तय किया गया था, जो पेटीएम के पिछले बंद भाव ₹1,580.20 से करीब 3 फीसदी कम है.

₹2,949 करोड़ की बेस डील, 4.98% तक हिस्सेदारी बेचने का विकल्प

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी की ओर से करीब 1.92 करोड़ शेयर बेचने की पेशकश की गई थी. यह पेटीएम की कुल हिस्सेदारी का करीब 3 फीसदी है. ₹1,535.10 प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य के आधार पर इस सौदे का मूल्य करीब ₹2,949 करोड़ है.

इस सौदे में 1.27 करोड़ अतिरिक्त शेयर बेचने का विकल्प भी शामिल है. अगर इस विकल्प का पूरी तरह इस्तेमाल किया जाता है, तो कुल 3.19 करोड़ शेयर बेचे जा सकते हैं. ऐसे में पेटीएम की करीब 4.98 फीसदी हिस्सेदारी का सौदा होगा और इसकी कुल कीमत करीब ₹4,895 करोड़ तक पहुंच सकती है.

कौन है रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट?

रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी नीदरलैंड्स स्थित कंपनी है, जिसका पूरा स्वामित्व पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा के पास है. पेटीएम की ओर से की गई पूर्व सूचना के मुताबिक, रेजिलिएंट ने एंटफिन से पेटीएम में करीब 10.20 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की थी.

यह हिस्सेदारी एंटफिन को जारी किए गए वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर के बदले हासिल की गई थी. इस सौदे के तहत रेजिलिएंट को शेयरों का स्वामित्व और मतदान अधिकार मिले थे, जबकि एंटफिन के पास शेयरों का आर्थिक मूल्य बना रहा. 30 जून 2026 तक विजय शेखर शर्मा के पास व्यक्तिगत रूप से पेटीएम में 9 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी थी.

पेटीएम को नहीं मिलेगा ब्लॉक डील का पैसा

यह सौदा पूरी तरह द्वितीयक बाजार का लेनदेन है. इसका मतलब है कि शेयरों की बिक्री से मिलने वाला पैसा पेटीएम के खाते में नहीं जाएगा, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारक को मिलेगा. इस सौदे के लिए गोल्डमैन सैक्स इंडिया सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड प्लेसमेंट एजेंट है. शेयरों की बिक्री भारतीय शेयर बाजारों के स्क्रीन-आधारित कारोबार मंच के जरिए एक या उससे अधिक लेनदेन में की जाएगी. सौदे की शर्तों के मुताबिक, बिक्री पूरी होने के बाद विक्रेता पर 90 दिनों तक आगे शेयर बेचने की रोक रहेगी.

पेटीएम के शेयर में क्यों आई गिरावट?

ब्लॉक डील के लिए तय ₹1,535.10 का न्यूनतम मूल्य पेटीएम के पिछले बंद भाव ₹1,580.20 से करीब 3 फीसदी कम था. आमतौर पर बड़ी हिस्सेदारी की बिक्री और बाजार में अतिरिक्त शेयरों की उपलब्धता से निवेशकों की धारणा पर दबाव पड़ सकता है. यही वजह है कि मंगलवार को पेटीएम के शेयर में शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली.

एक साल में 35% से ज्यादा चढ़ा पेटीएम का शेयर

हालिया दबाव के बावजूद पेटीएम के शेयर ने इस साल अच्छा प्रदर्शन किया है. पिछले एक सप्ताह में शेयर करीब 1 फीसदी कमजोर हुआ है, जबकि एक महीने में इसमें 17 फीसदी से अधिक की तेजी आई है. 2026 में अब तक पेटीएम का शेयर 22 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है.

मार्च में ₹930.60 के 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद शेयर में तेज रिकवरी हुई और यह पिछले सप्ताह ₹1,657.60 के 52-सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंच गया था. इस तरह निचले स्तर से शेयर में करीब 78 फीसदी की तेजी आई.

एक साल की अवधि में पेटीएम के शेयर ने करीब 35 फीसदी और तीन साल में करीब 84 फीसदी का रिटर्न दिया है. हालांकि, शेयर अभी भी 2021 के आईपीओ मूल्य से नीचे कारोबार कर रहा है. कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹1.01 लाख करोड़ से अधिक है.
 


इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बड़ा बढ़ावा, सरकार ने ₹7,877 करोड़ की 31 परियोजनाओं को दी मंजूरी

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत मंजूर परियोजनाओं से ₹82,243 करोड़ के उत्पादन और करीब 10,000 नौकरियों के सृजन की उम्मीद

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Tuesday, 18 August, 2026
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देश में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 31 और आवेदनों को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं में कुल ₹7,877 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने सोमवार को इसकी जानकारी दी.

इन नई मंजूरियों के साथ योजना के तहत स्वीकृत कुल निवेश अब सरकार के शुरुआती लक्ष्य से भी आगे निकल गया है. सरकार का उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का मजबूत आधार तैयार करना और आयातित कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करना है.

कैमरा मॉड्यूल से लेकर दुर्लभ मृदा चुंबक तक

नई मंजूर की गई परियोजनाओं में कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल, एनोड सामग्री, उपकरण आवरण, कनेक्टर, ट्रांसड्यूसर, दुर्लभ-मृदा स्थायी चुंबक, प्रकाशीय ट्रांसीवर, स्पीकर, माइक्रोफोन और रिले जैसे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स शामिल हैं. इसके अलावा इलेक्ट्रोलाइट योजक, एंटीना, धातु-लेपित फिल्म, कॉइल, फिल्टर, कैपेसिटर और धातु परिरक्षण आवरण जैसे कंपोनेंट्स से जुड़ी परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है. एस. कृष्णन के मुताबिक, कॉपर-क्लैड लैमिनेट से जुड़ा निवेश भी बढ़ाया गया है. इस परियोजना के लिए पहले ही एक आवेदन को मंजूरी दी जा चुकी थी.

10 राज्यों में लगेंगी परियोजनाएं

सरकार के मुताबिक, नई मंजूर की गई परियोजनाएं देश के 10 राज्यों में स्थापित की जाएंगी. इनसे करीब ₹82,243 करोड़ का उत्पादन होने और लगभग 10,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. नई मंजूरियों के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत अब तक कुल 106 आवेदनों को मंजूरी मिल चुकी है. ये परियोजनाएं करीब 30 अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों और 15 राज्यों में फैली हुई हैं.

₹59,350 करोड़ के लक्ष्य से आगे निकला निवेश

सरकार के अनुसार, ईसीएमएस के तहत स्वीकृत परियोजनाओं में अब तक कुल ₹69,548 करोड़ का निवेश शामिल है. यह योजना के लिए तय किए गए शुरुआती ₹59,350 करोड़ के निवेश लक्ष्य से काफी अधिक है. सरकार ने 2030 तक देश में सालाना इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया जा रहा है.

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पकड़ रहा रफ्तार

एस. कृष्णन ने कहा कि जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, उन्हें जमीन पर उतारने और विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की गति यह संकेत देती है कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन तेजी पकड़ रहा है.

ईसीएमएस के तहत लगातार नई परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, घरेलू मूल्यवर्धन बढ़ाने और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
 


ब्लूमबर्ग मीडिया से सुनीता राजन की विदाई तय, पांच साल से ज्यादा बाद छोड़ेंगी कंपनी

एशिया-प्रशांत मीडिया बिक्री और विपणन की प्रबंध निदेशक सुनीता राजन जनवरी 2021 में ब्लूमबर्ग मीडिया से जुड़ी थीं, अगली पारी को लेकर अभी जानकारी नहीं

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Tuesday, 18 August, 2026
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ब्लूमबर्ग मीडिया की एशिया-प्रशांत मीडिया बिक्री और विपणन की प्रबंध निदेशक सुनीता राजन पांच साल से अधिक समय बाद कंपनी से विदा लेने की तैयारी में हैं. घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है. हालांकि, उनकी अगली पेशेवर पारी और ब्लूमबर्ग मीडिया में उनका आखिरी कार्यदिवस अभी स्पष्ट नहीं है. कंपनी की ओर से भी इस संबंध में आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.

सिंगापुर में स्थित सुनीता राजन जनवरी 2021 में ब्लूमबर्ग मीडिया से जुड़ी थीं. अपनी मौजूदा भूमिका में वह कंपनी के वैश्विक मीडिया मंचों के लिए विज्ञापन आय और ग्राहक विपणन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं. इसमें डिजिटल उत्पाद, ब्लूमबर्ग टेलीविजन, ब्लूमबर्ग रेडियो, ब्लूमबर्ग लाइव कार्यक्रम और ब्लूमबर्ग बिजनेसवीक तथा ब्लूमबर्ग ग्रीन जैसे मुद्रित प्रकाशन शामिल हैं.

एशिया-प्रशांत में बिक्री और विपणन की जिम्मेदारी

ब्लूमबर्ग मीडिया में राजन की जिम्मेदारियों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की बिक्री और विपणन टीमों की निगरानी भी शामिल थी. उन्होंने विभिन्न मीडिया मंचों पर व्यावसायिक पहलों को आगे बढ़ाने और पूरे क्षेत्र में रणनीतिक विपणन सेवाओं के विस्तार पर काम किया.

उनकी भूमिका में नए कारोबारी अवसरों की पहचान करना और ब्रांडों को ब्लूमबर्ग मीडिया के कारोबारी नेताओं तथा निर्णय लेने वाले प्रमुख दर्शकों तक पहुंचाने में मदद करना भी शामिल था.

तीन दशक से ज्यादा का मीडिया बिक्री अनुभव

सुनीता राजन को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अनुभवी मीडिया बिक्री और व्यावसायिक नेतृत्वकर्ताओं में गिना जाता है. उनका करियर तीन दशक से अधिक का है. ब्लूमबर्ग मीडिया से पहले वह सीएनएन इंटरनेशनल कमर्शियल, बीबीसी वर्ल्डवाइड, चैनल वी और स्टार टीवी जैसी प्रमुख मीडिया कंपनियों में अहम भूमिकाएं निभा चुकी हैं.

ब्लूमबर्ग मीडिया में शामिल होने से पहले राजन ने करीब छह साल सीएनएन इंटरनेशनल कमर्शियल के साथ काम किया. मार्च 2015 में वह विज्ञापन बिक्री की उपाध्यक्ष के तौर पर सीएनएन से जुड़ी थीं और जुलाई 2016 में उन्हें विज्ञापन बिक्री की वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया.

सीएनएन में उन्होंने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए विज्ञापन बिक्री और विपणन साझेदारियों का नेतृत्व किया. इस दौरान उन्होंने हांगकांग, सिंगापुर, टोक्यो, नई दिल्ली और मुंबई में मौजूद टीमों के साथ काम किया और रणनीतिक ग्राहक संबंधों तथा ब्रांड साझेदारियों की जिम्मेदारी संभाली.

बीबीसी वर्ल्डवाइड के साथ 16 साल से ज्यादा का जुड़ाव

सीएनएन से पहले सुनीता राजन का बीबीसी वर्ल्डवाइड एशिया के साथ 16 साल से अधिक का जुड़ाव रहा. उनकी आखिरी भूमिका एशिया और ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड के लिए विज्ञापन बिक्री की कार्यकारी उपाध्यक्ष की थी. इस पद पर वह बीबीसी वर्ल्ड न्यूज, बीबीसी डॉट कॉम, लोनली प्लैनेट और बीबीसी की अन्य व्यावसायिक संपत्तियों से विज्ञापन आय बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रही थीं.

बीबीसी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बीबीसी विज्ञापन एशिया की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एशिया के लिए उप प्रसारण समय बिक्री निदेशक जैसे पदों पर भी काम किया. उन्होंने बीबीसी की आंतरिक विज्ञापन बिक्री व्यवस्था को विकसित करने और एशिया में कंपनी के व्यावसायिक विस्तार में अहम भूमिका निभाई.

चैनल वी और स्टार टीवी से शुरू हुआ सफर

अपने करियर के शुरुआती दौर में राजन ने न्यूजकॉर्प इंटरनेशनल के चैनल वी में विपणन निदेशक और क्षेत्रीय बिक्री प्रबंधक के तौर पर काम किया. भारत में चैनल वी की शुरुआत और विस्तार के शुरुआती दौर में उन्होंने विज्ञापन, उपभोक्ता विपणन, व्यापार विपणन, वितरण और जमीनी प्रचार जैसे क्षेत्रों में काम किया.

इससे पहले वह हांगकांग और भारत में स्टार टीवी के बिक्री विभाग से भी जुड़ी थीं. उन्होंने एशिया में उपग्रह टेलीविजन के शुरुआती विस्तार के दौर में स्टार टीवी के साथ काम किया.

सुनीता राजन ने अपने करियर की शुरुआत मीडिया कंसेशनायर लिमिटेड से विज्ञापन बिक्री के क्षेत्र में की थी, जहां वह भारत में टाइम और फॉर्च्यून जैसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं का प्रतिनिधित्व करती थीं. फिलहाल ब्लूमबर्ग मीडिया में राजन के उत्तराधिकारी को लेकर भी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. उनकी अगली पेशेवर पारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है.
 


बेरोजगारी दर में आई बड़ी गिरावट, जुलाई में 5.1% पर पहुंची; ग्रामीण रोजगार में भी सुधार

जून के 5.5% से घटकर 5.1% हुई बेरोजगारी दर, ग्रामीण इलाकों में 4.5% और शहरी क्षेत्रों में 6.7% रही दर

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Tuesday, 18 August, 2026
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देश में रोजगार के मोर्चे पर जुलाई में राहत की खबर सामने आई है. 15 साल और उससे अधिक उम्र की आबादी के बीच बेरोजगारी दर जून 2026 के 5.5% से घटकर जुलाई में 5.1% रह गई. यानी एक महीने में बेरोजगारी दर में 0.4 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से जारी पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की जुलाई 2026 की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति में खास सुधार हुआ है, जबकि शहरी बेरोजगारी दर में मामूली बढ़ोतरी हुई.

ग्रामीण बेरोजगारी दर 4.5% पर आई

जुलाई में ग्रामीण इलाकों की बेरोजगारी दर जून के 5% से घटकर 4.5% रह गई. इसके उलट शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर जून के 6.6% से मामूली बढ़कर 6.7% हो गई. सालाना आधार पर देखें तो जुलाई 2025 के मुकाबले कुल बेरोजगारी दर और ग्रामीण बेरोजगारी दर में खास बदलाव नहीं हुआ. हालांकि, शहरी बेरोजगारी दर में 0.5 प्रतिशत अंक की कमी आई है. जुलाई 2025 में शहरी बेरोजगारी दर 7.2% थी.

पुरुषों की बेरोजगारी दर में भी कमी

आंकड़ों के मुताबिक, 15 साल और उससे अधिक उम्र के पुरुषों की बेरोजगारी दर जून के 5.3% से घटकर जुलाई में 5% हो गई. जुलाई 2025 में यह दर 5.3% थी. ग्रामीण पुरुषों की बेरोजगारी दर भी जून के 4.9% से घटकर 4.6% हो गई. वहीं, शहरी पुरुषों में बेरोजगारी दर जून के मुकाबले लगभग स्थिर रही, लेकिन सालाना आधार पर इसमें अच्छी गिरावट दर्ज की गई. जुलाई 2025 में शहरी पुरुष बेरोजगारी दर 6.6% थी, जो जुलाई 2026 में घटकर 5.9% रह गई.

शहरी महिलाओं में बेरोजगारी बढ़ी

महिलाओं के आंकड़ों की तस्वीर कुछ मिली-जुली रही. 15 साल और उससे अधिक उम्र की महिलाओं की कुल और ग्रामीण बेरोजगारी दर जून के मुकाबले जुलाई में घटी, लेकिन दोनों दरें एक साल पहले के स्तर से ऊपर रहीं. शहरी महिलाओं में बेरोजगारी दर जून के 8.4% से बढ़कर जुलाई में 8.8% हो गई. जुलाई 2025 में यह 8.7% थी. यानी सालाना आधार पर शहरी महिला बेरोजगारी दर लगभग स्थिर रही.

श्रम बाजार में बढ़ी भागीदारी

बेरोजगारी दर में गिरावट के साथ जुलाई में श्रम बाजार में लोगों की भागीदारी भी बढ़ी. 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों की कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) जून के 54.4% से बढ़कर जुलाई में 55.4% हो गई. ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR में ज्यादा बढ़ोतरी हुई और यह 56.6% से बढ़कर 58% हो गई. वहीं, शहरी LFPR 50.1% से मामूली बढ़कर 50.4% रही.

सालाना आधार पर भी कुल LFPR में सुधार हुआ है. जुलाई 2025 में यह 54.9% थी, जो जुलाई 2026 में बढ़कर 55.4% हो गई. ग्रामीण LFPR भी 56.9% से बढ़कर 58% हो गई, जबकि शहरी LFPR 50.7% से घटकर 50.4% रही.

महिलाओं की श्रम भागीदारी में तेज उछाल

जुलाई में महिलाओं की श्रम बाजार में भागीदारी में खास सुधार देखने को मिला. कुल महिला LFPR जून के 32.7% से बढ़कर जुलाई में 34.4% हो गई. ग्रामीण महिलाओं की LFPR 36.6% से बढ़कर 38.8% पर पहुंच गई, जबकि शहरी महिलाओं की LFPR 24.8% से बढ़कर 25.3% रही.

सालाना आधार पर कुल महिला LFPR जुलाई 2025 के 33.3% से बढ़कर जुलाई 2026 में 34.4% हो गई. ग्रामीण महिलाओं की LFPR में 1.9 प्रतिशत अंक का इजाफा हुआ और यह 36.9% से बढ़कर 38.8% हो गई. हालांकि, शहरी महिलाओं की LFPR 25.8% से घटकर 25.3% रही.

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की रफ्तार बढ़ी

जुलाई में वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) यानी काम करने वाली आबादी के अनुपात में भी सुधार दर्ज किया गया. कुल WPR जून के 51.4% से बढ़कर जुलाई में 52.5% हो गया. ग्रामीण क्षेत्रों में इसमें सबसे ज्यादा सुधार हुआ और WPR 53.8% से बढ़कर 55.4% हो गया. शहरी क्षेत्रों में यह 46.8% से मामूली बढ़कर 47% रहा.

ग्रामीण महिलाओं के रोजगार अनुपात में भी तेज बढ़ोतरी हुई. जून में ग्रामीण महिला WPR 34.7% थी, जो जुलाई में बढ़कर 37.2% हो गई. यानी एक महीने में 2.5 प्रतिशत अंक का इजाफा हुआ. शहरी महिलाओं का WPR भी 22.7% से बढ़कर 23.1% रहा.

सालाना आधार पर कुल WPR जुलाई 2025 के 52% से बढ़कर जुलाई 2026 में 52.5% हो गया. ग्रामीण WPR भी 54.4% से बढ़कर 55.4% पहुंच गया, जबकि शहरी WPR 47% पर स्थिर रहा.

3.71 लाख लोगों से जुटाए गए आंकड़े

जुलाई 2026 का PLFS बुलेटिन इस सीरीज की 16वीं मासिक रिपोर्ट है. जुलाई के आंकड़े देशभर में कुल 3,71,021 लोगों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित हैं. आंकड़ों में बेरोजगारी दर में कमी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम भागीदारी और रोजगार अनुपात में सुधार दिखाई देता है, जो देश के रोजगार बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है.
 


भारी बिकवाली से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 281 अंक टूटा; आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

सोमवार को सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36% गिरकर 77,728.16 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 78.35 अंक यानी 0.32% की गिरावट के साथ 24,287.65 अंक पर बंद हुआ.

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Tuesday, 18 August, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली के चलते गिरावट देखने को मिली. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE Sensex) 500 अंक से अधिक फिसल गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (Nifty 50) भी 24,300 के स्तर से नीचे चला गया. हालांकि, कारोबार के अंत में गिरावट कुछ कम हुई. सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36% गिरकर 77,728.16 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 78.35 अंक यानी 0.32% की गिरावट के साथ 24,287.65 अंक पर बंद हुआ. सेंसेक्स में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र गिरावट रही, जबकि निफ्टी लगातार पांचवें दिन कमजोर होकर बंद हुआ.

IT शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव

सेंसेक्स के 30 में से 23 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. IT शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला. इंफोसिस का शेयर 2.66% गिरकर 1,138 रुपये पर बंद हुआ, जबकि HCL Technologies में 2.53%, सन फार्मा में 2.20%, TCS में 1.87% और टेक महिंद्रा में 1.77% की गिरावट रही. इसके अलावा ITC, ट्रेंट, NTPC, हिंदुस्तान यूनिलीवर, भारती एयरटेल, M&M और बजाज फिनसर्व के शेयर भी गिरावट के साथ बंद हुए.

वहीं, कुछ प्रमुख शेयरों में खरीदारी देखने को मिली. टाटा स्टील का शेयर 1.47% चढ़कर 186.10 रुपये पर पहुंच गया. एक्सिस बैंक में 1.03%, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 0.80%, BEL में 0.49%, HDFC बैंक में 0.36%, L&T में 0.33% और बजाज फाइनेंस में 0.21% की तेजी रही. ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.05% और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.36% की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी IT करीब 2% गिरकर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जबकि निफ्टी मेटल और निफ्टी रियल्टी में सबसे ज्यादा मजबूती रही.

रुपये में भी कमजोरी

विदेशी बाजारों में दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच रुपये में भी कमजोरी रही. रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 0.2% कमजोर होकर 95.61 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.4250 के स्तर पर बंद हुआ था.

कमजोर बाजार में Gujarat Cotex अपर सर्किट में

कमजोर बाजार के बीच सूरत की डायवर्सिफाइड बिजनेस वाली कंपनी Gujarat Cotex Limited का शेयर निवेशकों के फोकस में रहा. कंपनी का शेयर 5% के अपर सर्किट में बंद हुआ. कंपनी के नए बिजनेस वर्टिकल शुरू करने के प्रस्ताव के बाद इस शेयर पर भी बाजार की नजर बनी हुई है.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

आज कई अहम कॉरपोरेट अपडेट्स के चलते Paytm, Nelco, Netweb Technologies, IIFL Finance, Jyoti CNC Automation, PNB Housing Finance, Manipal Health Enterprises, LEAP India, RPP Infra Projects और Kesar India समेत कई शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. Paytm की प्रमोटर इकाई Resilient Asset Management B.V. करीब 4.98% हिस्सेदारी बेच सकती है और इसके लिए 1,535.10 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किए जाने की खबर है. Nelco ने Elveo के साथ सैटेलाइट कनेक्टिविटी और IoT सेवाओं के लिए रणनीतिक साझेदारी की है और Lunar Holdco के CCDs में करीब 166 करोड़ रुपये का निवेश किया है. Netweb Technologies ने करीब 1,200 करोड़ रुपये जुटाने के लिए QIP शुरू किया है, जिसका फ्लोर प्राइस 4,885.90 रुपये प्रति शेयर रखा गया है.

IIFL Finance के लिए भी सकारात्मक खबर है. Fitch Ratings ने कंपनी की लॉन्ग-टर्म इश्यूअर डिफॉल्ट रेटिंग को ‘B+’ से बढ़ाकर ‘BB-’ कर दिया है और आउटलुक Stable रखा है. वहीं, Jyoti CNC Automation के 1,020.65 करोड़ रुपये के कैपिटल निवेश प्रस्ताव को मंजूरी मिली है. PNB Housing Finance के शेयरधारकों ने 10,000 करोड़ रुपये तक के NCD जारी कर रकम जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. Manipal Health Enterprises ने 130 करोड़ रुपये में बेंगलुरु के Kinder Hospital का कारोबार और संबंधित संपत्तियां खरीदने के लिए समझौता किया है.

इसके अलावा Government of Singapore ने LEAP India में करीब 0.5% हिस्सेदारी खरीदी है, जबकि RPP Infra Projects में Diva Projects ने करीब 1.7% हिस्सेदारी बढ़ाई है. Kesar India में Minerva Ventures Fund ने करीब 3.76% हिस्सेदारी खरीदी है. ByteDance ने AI मॉडल में कॉपीराइट सुरक्षा मजबूत करने के लिए Motion Picture Association के साथ समझौता किया है. वहीं, Philips India के Personal Health कारोबार को FY27 में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व हासिल होने की उम्मीद है. इन सभी कॉरपोरेट अपडेट्स के चलते आज संबंधित शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रह सकती है.