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हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर जीरो GST की तैयारी, उपभोक्ताओं को मिल सकती है बड़ी राहत
बीमा प्रीमियम पर 18% GST हटाने का प्रस्ताव एक सकारात्मक कदम है, जिससे बीमा को अधिक सुलभ और किफायती बनाया जा सकेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस की इंडिविजुअल पॉलिसी पर 18% वस्तु एवं सेवा कर (GST) हटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव को बुधवार को राज्यों के मंत्रियों के समूह (GoM) की बैठक में सहमति मिल गई. हालांकि अंतिम निर्णय अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होने वाली जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में लिया जाएगा, जो अगले महीने होने की संभावना है.
ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी पर नहीं मिलेगी छूट
केंद्र सरकार ने केवल इंडिविजुअल और उनके परिवार के लिए ली जाने वाली हेल्थ व लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर जीएसटी हटाने का प्रस्ताव दिया है. ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी को इस दायरे से बाहर रखा गया है. मंत्रियों के समूह की बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि जीएसटी में छूट का लाभ सीधे पॉलिसीधारकों को मिलना चाहिए, न कि बीमा कंपनियों को फायदा मिलना चाहिए.
तेलंगाना के डिप्टी सीएम की राय
वहीं, तेलंगाना के डिप्टी सीएम एम बी विक्रमार्क ने भी बैठक में यह स्पष्ट किया कि जीएसटी में कटौती का सीधा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचना चाहिए. उन्होंने इस दिशा में स्पष्ट रूप से एक नियामक व्यवस्था बनाए जाने की बात कही.
बीमा कवरेज को सस्ता बनाने की दिशा में कदम
पिछले एक साल में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रीमियम में औसतन 15% तक की बढ़ोतरी हुई है. बीमा नियामक संस्था IRDAI को जनवरी 2025 में यह निर्देश देना पड़ा था कि 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए सालाना प्रीमियम में वृद्धि 10% से अधिक न हो. ऐसे में अगर इंडिविजुअल पॉलिसी पर जीरो जीएसटी लागू होता है, तो इससे बीमा सस्ता होगा और ज्यादा लोग बीमा कवरेज ले सकेंगे.
वित्त मंत्री ने दिए संकेत: जीएसटी में बड़े सुधार की योजना
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बुधवार को कहा कि जीएसटी के अगले चरण के सुधारों के तहत सरकार ने राज्यों के साथ आम सहमति बनाने का प्रयास शुरू किया है. उन्होंने कहा कि केंद्र ने तीन मुख्य क्षेत्रों संरचनात्मक सुधार, दरों में तर्कसंगत बदलाव और ईज ऑफ लिविंग के आधार पर सुधारों का प्रस्ताव भेजा है. इसके तहत केवल दो टैक्स स्लैब (5% और 18%) रखने और 12% व 28% के स्लैब हटाने की योजना है.
बीमा कंपनियों की चिंता: ITC की व्यवस्था पर असर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंश्योरेंस कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि यदि प्रीमियम पर जीएसटी हटा दिया गया और कोई वैकल्पिक उपाय नहीं किए गए, तो वे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा नहीं कर पाएंगी. बीमा कंपनियां पॉलिसी बेचने और सर्विस देने में जिन वस्तुओं और सेवाओं का इस्तेमाल करती हैं, उन पर जीएसटी चुकाना होता है. वर्तमान में वे इस पर ITC क्लेम कर पाती हैं, जिससे उनकी कर देनदारी घटती है. लेकिन GST हटने के बाद यह सुविधा खत्म हो सकती है, जिससे उनकी लागत बढ़ेगी और यह बोझ अंततः ग्राहकों पर पड़ सकता है.
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