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लोन वसूली के लिए PNB की नई रणनीति: 100 से ज्यादा NPA अकाउंट होंगे ARCs को ट्रांसफर
PNB की यह योजना बैंकों की पारंपरिक वसूली प्रक्रिया से अलग एक आक्रामक कदम है. इससे जहां बैंक को जल्दी वसूली की उम्मीद है, वहीं डिफॉल्टर्स के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने अपने फंसे हुए लोन की वसूली के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई है. बैंक इस वित्त वर्ष में 100 से ज्यादा एनपीए (NPA) अकाउंट को एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) को बेचने की योजना बना रहा है. इससे बैंक को उम्मीद है कि वह भारी मात्रा में बकाया रकम की भरपाई कर सकेगा. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
क्या होती है ये योजना और कैसे करेगी काम?
एनपीए यानी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स वे लोन होते हैं जिनमें उधारकर्ता ने लंबे समय से किस्तें नहीं चुकाईं होतीं और बैंक को राशि वापस मिलने की संभावना कम हो जाती है. PNB अब इन खातों को ARCs को बेचकर उनसे वसूली करवाएगा. ARCs, यानी Asset Reconstruction Companies, बैंकों से ऐसे खराब लोन खरीदती हैं और फिर वसूली की प्रक्रिया शुरू करती हैं. इससे बैंक को तत्काल कुछ राशि मिल जाती है, जबकि वसूली का जिम्मा ARCs उठाती हैं.
PNB को कितनी वसूली की उम्मीद?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीएनबी ने 100 से ज्यादा ऐसे अकाउंट की पहचान की है, जिनकी कुल बकाया राशि 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये के बीच है. के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ अशोक चंद्रा ने कहा है कि बैंक को इन खातों की बिक्री से औसतन 40 से 50 प्रतिशत वसूली की उम्मीद है. कुछ खातों में पूरी वसूली भी हो सकती है, क्योंकि उनके पास मजबूत सिक्योरिटी मौजूद है.
कैसे काम करती हैं ARCs? एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी ग्राहक रमेश (बदला हुआ नाम) ने बैंक से 1 लाख रुपये का लोन लिया था, लेकिन चुकाया सिर्फ 20,000 रुपये. 80,000 रुपये की बकाया राशि NPA हो गई. बैंक ने रमेश का अकाउंट 30,000 रुपये में ARCs को बेच दिया. अब बैंक की जिम्मेदारी खत्म. ARCs अब कोशिश करेंगी कि वो रमेश से 30,000 रुपये से ज्यादा वसूलें, ताकि उन्हें प्रॉफिट हो. अगर रमेश भुगतान नहीं करता, तो ARC कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है.
डिफॉल्टर्स के लिए क्या बदलेगा?
अगर किसी लोनधारक का खाता एनपीए हो चुका है और वह PNB से लोन लेकर चुका नहीं पाया है, तो अब वसूली की प्रक्रिया बैंक के बजाय ARCs संभालेंगी. ARCs आमतौर पर बैंक की तुलना में ज्यादा सख्त होते हैं. पहले बैंक कई बार 20-30% राशि पर भी सेटलमेंट करने को तैयार हो जाता था. लेकिन अब अगर मामला ARC तक पहुंचता है, तो सेटलमेंट में ज्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है.
क्या होगा ग्राहकों पर असर?
- वसूली प्रक्रिया अब अधिक सख्त होगी
- सेटलमेंट की शर्तें सख्त हो सकती हैं
- कानूनी कार्रवाई की संभावना बढ़ेगी
- लोन चुकाने में देरी महंगी साबित हो सकती है
PNB की इस रणनीति का उद्देश्य
पीएनबी की इस रणनीति का उद्देश्य फंसे हुए कर्ज की जल्द वसूली, वित्तीय वर्ष के अंत तक रिकवरी टारगेट हासिल करना, बैलेंस शीट की स्थिति सुधारना और बैंक की क्रेडिट क्वालिटी बेहतर बनाना है.
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