बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी को रक्षा मंत्रालय से मिला समर्थन, अगली पीढ़ी के उपग्रह पेलोड के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी पिक्सल (Pixxel) ने भारतीय रक्षा मंत्रालय की iDEX (Innovations for Defence Excellence) पहल के अंतर्गत SPARK (Support for Prototype and Research Kickstart) अनुदान समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह अनुदान iDEX DISC 8 चैलेंज 6.2 के तहत स्पेसपिक्सल प्रा. लि. को प्रदान किया गया है, जिसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना के लिए उन्नत हाइपरस्पेक्ट्रल और मिड-वेव इंफ्रारेड (MWIR) पेलोड का विकास करना है.
यह अनुदान रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है. यह समझौता 2023 में iDEX Prime (Space) के अंतर्गत Mission DefSpace Challenge में Pixxel के चयन के बाद भारतीय रक्षा इकोसिस्टम के साथ उसके सहयोग को और गहरा करता है.
अब Pixxel अपने अत्याधुनिक ऑप्टिकल इंजीनियरिंग और इन-हाउस सैटेलाइट निर्माण क्षमताओं का उपयोग करके उच्च-प्रदर्शन वाले पृथ्वी अवलोकन पेलोड विकसित करेगा, जो रणनीतिक और संचालनिक दृष्टिकोण से भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे.
Pixxel के संस्थापक और सीईओ अवाइस अहमद ने इस अवसर पर कहा, “हमें भारत सरकार के साथ अपनी भागीदारी को और मजबूत करने और देश में अत्याधुनिक अंतरिक्ष अवसंरचना के निर्माण की दिशा में एक और कदम बढ़ाने पर गर्व है. यह अनुदान हमारी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और यह भारत को अगली पीढ़ी के एयरोस्पेस नवाचार में अग्रणी बनाने के हमारे मिशन को आगे बढ़ाता है.”
iDEX योजना का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को अत्याधुनिक प्रोटोटाइप और तकनीकों के विकास के लिए प्रोत्साहित करना है. Pixxel की निरंतर भागीदारी इस बात को रेखांकित करती है कि वह भारत के रणनीतिक लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध है और सरकार की उसके तकनीकी ढांचे में बढ़ती हुई विश्वास को भी दर्शाती है.
Pixxel के पहले से ही तीन Firefly उपग्रह कक्षा में सक्रिय हैं और भविष्य में और भी उपग्रह प्रक्षेपित किए जाने वाले हैं. इसके अतिरिक्त, कंपनी का Pixxel Aurora प्लेटफॉर्म पृथ्वी अवलोकन से प्राप्त हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजरी को सरल, उपयोगी और विश्लेषण-योग्य बनाने के लिए अत्याधुनिक टूल्स प्रदान करता है.
Pixxel का लक्ष्य एक ऐसा वैश्विक प्लेटफॉर्म बनाना है, जो पृथ्वी की वास्तविक समय में निगरानी कर सके और पर्यावरण व सुरक्षा से जुड़े मामलों में उच्च गुणवत्ता वाली जानकारी प्रदान कर सके.
बैंक कर्मचारियों की तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल अब नहीं होगी. UFBU ने रविवार को हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की. यह हड़ताल सोमवार से शुरू होनी थी और बैंकों की छमाही क्लोजिंग के समय प्रस्तावित थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल टल गई है. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने भारतीय बैंक संघ (IBA) की ओर से मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया है. इसके चलते सोमवार से बैंक शाखाओं में सामान्य रूप से कामकाज होगा.
बैंक कर्मचारियों की तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल अब नहीं होगी. UFBU ने रविवार को हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की. यह हड़ताल सोमवार से शुरू होनी थी और बैंकों की छमाही क्लोजिंग के समय प्रस्तावित थी. हड़ताल टलने के बाद ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं के लिए किसी तरह की प्रस्तावित बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और सोमवार को बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे.
5 दिन कामकाज के मुद्दे पर बनेगी समिति
हड़ताल स्थगित करने के साथ ही बैंक यूनियनों और IBA के बीच बातचीत का रास्ता खुला है. UFBU के अनुसार, सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने के मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए IBA और UFBU की एक उच्चस्तरीय समिति का तत्काल गठन किया जाएगा. समिति उपलब्ध विकल्पों पर विचार करने के साथ सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करेगी और ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास करेगी, जो ग्राहकों समेत सभी हितधारकों के लिए स्वीकार्य हो.
PLI योजना में बदलाव पर भी होगी चर्चा
बैंक यूनियनों की एक अन्य मांग प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना यानी Performance Linked Incentive (PLI) से संबंधित है. UFBU ने कहा कि स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI योजना को लेकर IBA के साथ बातचीत शुरू की जा सकती है. यूनियनों और एसोसिएशनों की आपत्तियों को दूर करने के लिए योजना में बदलाव का प्रस्ताव सरकार के सामने रखने पर भी चर्चा होगी.
आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित
UFBU ने कहा कि IBA की ओर से इन मुद्दों पर बातचीत और विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद उसने प्रस्तावित आंदोलन और तीन दिन की हड़ताल को स्थगित करने का फैसला किया. अब 5 दिन कामकाज और PLI योजना में बदलाव समेत अन्य मांगों पर आगे की बातचीत समिति के स्तर पर होगी.
शुक्रवार को सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 फीसदी चढ़कर 73,895.74 पर पहुंच गया था. वहीं, निफ्टी 77.40 अंक यानी 0.34 फीसदी की तेजी के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में आज यानी सोमवार, 28 सितंबर को कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी करीब 80 अंक फिसलकर 23,100 के आसपास आ गया है, जबकि अमेरिकी वायदा बाजारों में भी दबाव है. कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच बाजार की नजर आज ग्लोबल संकेतों, क्रूड और FII-DII गतिविधियों पर रहेगी.
शुक्रवार को सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ था. सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 फीसदी चढ़कर 73,895.74 पर पहुंच गया था. वहीं, निफ्टी 77.40 अंक यानी 0.34 फीसदी की तेजी के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 20 बढ़त और 10 गिरावट के साथ बंद हुए थे.
शुक्रवार को एक्सिस बैंक सबसे आगे
शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स पर एक्सिस बैंक 2.82 फीसदी की तेजी के साथ सबसे ज्यादा चढ़ने वाला शेयर रहा. महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.24 फीसदी, एशियन पेंट्स में 1.93 फीसदी, बजाज फाइनेंस में 1.21 फीसदी और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 1.17 फीसदी की बढ़त रही. दूसरी ओर, ट्रेंट 1.41 फीसदी, इन्फोसिस 0.81 फीसदी, कोटक महिंद्रा बैंक 0.47 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक 0.41 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए. निफ्टी में एक्सिस बैंक 3.03 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा. एशियन पेंट्स में 2.14 फीसदी और महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.75 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.
अमेरिकी वायदा बाजारों में दबाव
आज के कारोबार से पहले अमेरिकी वायदा बाजारों में कमजोरी देखने को मिल रही है. डाओ फ्यूचर्स करीब 190 अंक गिरकर 51,970 के आसपास, S&P फ्यूचर्स करीब 25 अंक टूटकर 7,780 और नैस्डैक फ्यूचर्स करीब आधे फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है. हालांकि, एशियाई बाजारों में ज्यादातर प्रमुख इंडेक्स हरे निशान में हैं.
क्रूड 106 डॉलर के करीब
कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी बाजार के लिए अहम संकेत है. ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि WTI क्रूड 93 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है. होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के ईरान के प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा खारिज किए जाने के बाद तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है.
FII की बिकवाली जारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली भी घरेलू बाजार के लिए एक अहम चिंता बनी हुई है. 25 सितंबर के प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार, FII ने 3,696 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने 2,838 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया.
गुरुवार की गिरावट के बाद शुक्रवार को संभला बाजार
इससे पहले 24 सितंबर को बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली थी. सेंसेक्स 1,247 अंक यानी 1.67 फीसदी गिरकर 73,580.54 पर और निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 फीसदी टूटकर 23,063.10 पर बंद हुआ था. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, ब्याज दरों को लेकर चिंता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये में कमजोरी जैसे कारकों के बीच बाजार पर दबाव बना था. शुक्रवार की रिकवरी के बाद अब सोमवार के कारोबार में निवेशकों की नजर इन वैश्विक और घरेलू संकेतों पर रहेगी.
इन शेयरों पर रखें नजर
आज Unichem Laboratories, Aequs, Ceigall India, Zydus Lifesciences, Wheels India, SAIL, NMDC, Prestige Estates Projects और NTPC Green Energy के शेयरों पर नजर रहेगी. Unichem Laboratories की गोवा स्थित पिलरने फॉर्मुलेशन फैसिलिटी में USFDA का निरीक्षण पूरा हुआ, जिसमें पांच टिप्पणियां दर्ज की गईं. Aequs के बोर्ड ने प्रमोटर ग्रुप की कंपनी Mellwood Trustee Services को करीब ₹650 करोड़ के 2.8 करोड़ तक वारंट जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. Ceigall India अपने Arm Ceigall Sahebganj टर्म लोन के लिए सिक्योरिटी तैयार करेगी और संबंधित SPV में अतिरिक्त ₹62 करोड़ का निवेश करेगी. Zydus Lifesciences के न्यू जर्सी ऑफिस में USFDA के फार्माकोविजिलेंस और पोस्ट-मार्केटिंग सर्विलांस सिस्टम के निरीक्षण में कोई ऑब्जर्वेशन नहीं मिला. Wheels India ने 25 सितंबर को QIP पूरा करते हुए ₹2,088 प्रति शेयर के भाव पर 11.97 लाख शेयर आवंटित किए. SAIL और Bharat Coking Coal ने पश्चिम बंगाल में कोयला ब्लॉक्स के संयुक्त विकास और संचालन के लिए MoU किया है. NMDC ने छत्तीसगढ़ के नगरनार में 2 MTPA क्षमता वाले पेलेट प्लांट का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर दिया है. Prestige Estates Projects की सब्सिडियरी Prestige Hospitality Ventures ने रणनीतिक कारणों और मौजूदा बाजार परिस्थितियों में अनिश्चितता का हवाला देते हुए अपना DRHP वापस लेने का फैसला किया है. वहीं, NTPC Green Energy ने राजस्थान के बीकानेर में Kalasar Solar Energy Project की पहली 81.34 MW क्षमता का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर दिया है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
भारत मंडपम में 26 से 28 सितंबर तक आयोजित हो रहे तीन दिवसीय बी2बी एक्सपो में 650 से अधिक प्रदर्शक, 3,000 से ज्यादा ब्रांड और 1.5 लाख से अधिक अनूठे डिजाइन प्रदर्शित किए जा रहे हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का रत्न एवं आभूषण उद्योग आने वाले वर्षों में निर्यात को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है. दिल्ली ज्वेलरी एंड जेम फेयर (DJGF) 2026 के 14वें संस्करण के उद्घाटन के दौरान उद्योग से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों ने निर्यात बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA), वैल्यू एडिशन, कारीगरों के कौशल विकास और बदलती उपभोक्ता मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया.
नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 26 से 28 सितंबर तक आयोजित हो रहे इस तीन दिवसीय बी2बी एक्सपो में 650 से अधिक प्रदर्शक, 3,000 से ज्यादा ब्रांड और 1.5 लाख से अधिक अनूठे डिजाइन प्रदर्शित किए जा रहे हैं.
‘वोकल फॉर लोकल’ से ‘लोकल टू ग्लोबल’
उद्घाटन के अवसर पर निर्यात क्षमता और कारीगरों के कौशल विकास पर बल देते हुए लोकसभा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, भारत का रत्न एवं आभूषण क्षेत्र लगभग 1.65 लाख करोड़ डॉलर के आयात के मुकाबले करीब 2.5 लाख करोड़ डॉलर के सामान का निर्यात करता है, जो इसके मजबूत निर्यात रुझान और देश के व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है. सरकार के 2030 के निर्यात लक्ष्यों की ओर बढ़ते हुए, उद्योग को निवेश, कौशल विकास और मूल्य संवर्धन के जरिए 'वोकल फॉर लोकल' से 'लोकल टू ग्लोबल' के सफर को गति देनी होगी. इसके साथ ही हमारे कारीगरों को पहचानना और उनका कौशल संवर्धन करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि उनकी कारीगरी सीधे तौर पर उत्पाद की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को तय करती है. उनकी क्षमताओं को निखारने से भारतीय आभूषण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे.
100 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य पर फोकस
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (भारत) के रीजनल सीईओ सचिन जैन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ सोने और आभूषण उद्योग के लिए बढ़ते अवसरों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में आगे बढ़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के 4.5 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. जैन ने ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ रोडमैप का उल्लेख करते हुए कहा कि अगले 5 से 7 वर्षों में भारत की सोने की खपत का करीब 20 से 25 फीसदी हिस्सा घरेलू खदानों से आ सकता है. वहीं, आभूषण निर्यात को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.
FTA से 55 अरब डॉलर के बाजार में अवसर
NJGCI के अध्यक्ष प्रमोद डेरावाला ने मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय ज्वेलरी उद्योग के लिए बाजार पहुंच बढ़ने की संभावनाओं पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि जिन देशों के साथ भारत ने FTA किए हैं, वे करीब 55 अरब डॉलर के आभूषणों का आयात करते हैं, जबकि इन बाजारों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 8 अरब डॉलर है. डेरावाला के मुताबिक, यह अंतर भारतीय ज्वेलरी उद्योग के लिए निर्यात बढ़ाने की संभावित गुंजाइश को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि सरकारी पहलों और FTA के जरिए बेहतर बाजार पहुंच के साथ विनिर्माण और निर्यात दोनों में विस्तार की संभावना है.
सोने की ऊंची कीमतों से लाइटवेट ज्वेलरी की मांग
सोने की कीमतों में तेजी का असर उपभोक्ताओं की पसंद पर भी दिखाई दे रहा है. डेरावाला के अनुसार, ग्राहक अब हल्के वजन वाले आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं. हालांकि, 90 फीसदी से अधिक हाई-वैल्यू ज्वेलरी खरीदारी अब भी फिजिकल रिटेल के माध्यम से होती है. इससे संकेत मिलता है कि ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के बावजूद महंगे आभूषणों की खरीदारी में पारंपरिक ज्वेलर्स और फिजिकल स्टोर की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है.
ग्लोबल गोल्ड ज्वेलरी डिमांड में भारत की 27% हिस्सेदारी
इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रास ने कहा कि भारतीय ज्वेलरी उद्योग वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और बदलाव के दौर से गुजर रहा है. उनके मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में वैश्विक स्वर्ण आभूषण मांग में भारत की हिस्सेदारी 27 फीसदी रही. सोने की ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ताओं और रिटेलरों के बीच हल्के वजन और कीमत के लिहाज से किफायती आभूषणों की मांग बढ़ी है. मुद्रास ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 27.72 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हाल ही में घोषित 2040 रोडमैप में इस निर्यात को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.
उद्घाटन में उद्योग जगत के प्रमुख लोग शामिल
DJGF 2026 के उद्घाटन कार्यक्रम में inD के सीईओ डेविड लिन, द बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन दिल्ली (TBJA) के अध्यक्ष रामावतार वर्मा, TBJA के वरिष्ठ अध्यक्ष नवीन कुमार जिंदल और ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा, इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया की सीनियर ग्रुप डायरेक्टर पल्लवी मेहरा सहित ज्वेलरी और जेम्स सेक्टर से जुड़े अन्य उद्योग प्रतिनिधि भी मौजूद थे.
गडकरी ने इथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का बचाव करते हुए कहा कि भारत में इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि अक्टूबर में टोयोटा (Toyota) की ऐसी इनोवा (Innova) लॉन्च की जाएगी, जो 100 फीसदी इथेनॉल पर चल सकेगी. उनके मुताबिक, इस कार को चलाने की लागत करीब ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल से चलने वाली गाड़ी के बराबर हो सकती है. गडकरी ने यह बात ऐसे समय कही है, जब पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की E20 नीति को लेकर वाहन के माइलेज और इंजन पर संभावित असर की चर्चा जारी है.
अक्टूबर में लॉन्च होगी 100% इथेनॉल वाली इनोवा
गडकरी के मुताबिक, उन्हें अक्टूबर में टोयोटा इनोवा फ्लेक्स-फ्यूल कार के लॉन्च के लिए आमंत्रित किया गया है. यह गाड़ी पेट्रोल के बजाय 100 फीसदी इथेनॉल पर चलने के लिए तैयार की गई है. उन्होंने यह भी दावा किया कि वाहन चलते समय करीब 60 फीसदी बिजली पैदा कर सकेगा.
गडकरी ने इथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का बचाव करते हुए कहा कि भारत में इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों में इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है.
क्या है गडकरी का ₹25 वाला फॉर्मूला?
गडकरी ने कहा कि 100 फीसदी इथेनॉल से चलने वाली इस कार को चलाने की लागत करीब ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल से चलने वाली कार के बराबर होगी. यानी उनका दावा वाहन की अनुमानित रनिंग कॉस्ट से जुड़ा है. इसे सीधे तौर पर पेट्रोल की कीमत ₹25 प्रति लीटर होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
इथेनॉल की कीमत और वाहन की ईंधन दक्षता के अलावा वास्तविक रनिंग कॉस्ट कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करेगी. इसलिए कार के बाजार में आने के बाद इसकी वास्तविक ईंधन खपत और लागत की तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होगी.
E20 पेट्रोल को लेकर क्या है विवाद?
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति के तहत E20 फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ाया गया है. E20 पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल और बाकी हिस्सा पेट्रोल होता है. इस नीति को लेकर कुछ वाहन मालिकों और अन्य पक्षों ने माइलेज, इंजन की उम्र और रखरखाव लागत को लेकर सवाल उठाए हैं.
गडकरी ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को लेकर देश में वाहनों से कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई है. सरकार की ओर से भी पहले कहा गया है कि वाहन कंपनियों, ऑटोमोबाइल संगठनों और उपभोक्ता समूहों से E20 के कारण माइलेज, इंजन की टिकाऊपन या रखरखाव लागत पर किसी बड़े प्रतिकूल प्रभाव की ठोस शिकायत नहीं मिली है.
सरकार ने अपने पक्ष में इंजन की ड्यूरेबिलिटी, मटीरियल कम्पैटिबिलिटी और फील्ड ट्रायल से जुड़ी स्टडी का भी हवाला दिया है.
फ्लेक्स-फ्यूल कार क्या होती है?
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे इंजन से लैस होते हैं, जो पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले ईंधन पर चल सकते हैं. आम तौर पर इन वाहनों में E20 से लेकर ज्यादा इथेनॉल मिश्रण और कुछ मामलों में लगभग शुद्ध इथेनॉल तक इस्तेमाल किया जा सकता है.
भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में वाहन कंपनियां भी काम कर रही हैं. जून में मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार पेश की थी. इसका उद्देश्य पेट्रोल के साथ अलग-अलग अनुपात में इथेनॉल वाले ईंधन के इस्तेमाल को संभव बनाना है.
इथेनॉल को बढ़ावा देने के पीछे सरकार की क्या वजह है?
सरकार लंबे समय से पेट्रोलियम ईंधन के विकल्प के तौर पर इथेनॉल, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की बात करती रही है. गडकरी का कहना है कि इथेनॉल के उत्पादन से किसानों के लिए आय के नए अवसर बन सकते हैं.
उन्होंने अलग-अलग मौकों पर मक्का समेत इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली फसलों की मांग बढ़ने का भी जिक्र किया है. सरकार की नीति का एक उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना है.
बाइक टैक्सी को लेकर भी गडकरी ने कही बात
कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने बाइक टैक्सी सेवाओं को बढ़ावा देने की भी बात कही. उनके मुताबिक, ऐप आधारित प्लेटफॉर्म उन लोगों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकते हैं, जिनके पास पहले से दोपहिया वाहन हैं.
उन्होंने राज्यों के परिवहन मंत्रियों से ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस तरह की सेवाओं के विकल्प पर विचार करने की अपील की. गडकरी का कहना है कि बाइक टैक्सी के विस्तार से बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो सकते हैं.
BSE के आंकड़ों के मुताबिक, 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच इन कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे. इस सूची में Steel Authority of India (SAIL), Indraprastha Gas (IGL) और R Systems International जैसी कंपनियां शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शेयर बाजार में अगले सप्ताह सात कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होने वाले हैं. BSE के आंकड़ों के मुताबिक, 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच इन कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे. इस सूची में Steel Authority of India (SAIL), Indraprastha Gas (IGL) और R Systems International जैसी कंपनियां शामिल हैं. इनमें R Systems International ने ₹8 प्रति शेयर का सबसे ज्यादा अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है.
29 सितंबर को Leo Dryfruits का शेयर होगा एक्स-डिविडेंड
अगले सप्ताह एक्स-डिविडेंड होने वाले शेयरों में सबसे पहले Leo Dryfruits and Spices Trading Limited का नाम है. कंपनी का शेयर 29 सितंबर को एक्स-डिविडेंड होगा. कंपनी ने ₹0.50 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा की है. इसके लिए रिकॉर्ड डेट भी 29 सितंबर तय की गई है.
30 सितंबर को SAIL और Saraswati Saree Depot
इसके बाद 30 सितंबर को दो कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे. Steel Authority of India Limited (SAIL) ने ₹2.35 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है. कंपनी ने डिविडेंड के लिए 30 सितंबर को रिकॉर्ड डेट तय की है.
इसी दिन Saraswati Saree Depot Limited का शेयर भी एक्स-डिविडेंड होगा. कंपनी अपने शेयरधारकों को ₹3 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड देगी. इसके लिए रिकॉर्ड डेट 30 सितंबर रखी गई है.
1 अक्टूबर को चार कंपनियों के शेयर होंगे एक्स-डिविडेंड
1 अक्टूबर को सबसे ज्यादा चार कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होने वाले हैं. इनमें Goenka Business and Finance Limited, Indraprastha Gas Limited (IGL), R Systems International Limited और Sainik Finance and Industries Limited शामिल हैं. Goenka Business and Finance ने ₹0.50 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा की है. कंपनी की एक्स-डिविडेंड डेट 1 अक्टूबर है, जबकि रिकॉर्ड डेट 2 अक्टूबर तय की गई है.
Indraprastha Gas Limited (IGL) के शेयर भी 1 अक्टूबर को एक्स-डिविडेंड होंगे. कंपनी ने ₹1.50 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है. IGL के लिए रिकॉर्ड डेट भी 1 अक्टूबर है. R Systems International ने ₹8 प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है. कंपनी के शेयर 1 अक्टूबर को एक्स-डिविडेंड होंगे और रिकॉर्ड डेट भी इसी दिन है. प्रति शेयर घोषित रकम के आधार पर यह अगले सप्ताह एक्स-डिविडेंड होने वाली सात कंपनियों में सबसे बड़ा डिविडेंड है.
Sainik Finance and Industries Limited भी 1 अक्टूबर को एक्स-डिविडेंड होगी. कंपनी ने ₹0.50 प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है और इसके लिए रिकॉर्ड डेट 1 अक्टूबर निर्धारित की गई है.
चार फाइनल और तीन अंतरिम डिविडेंड
अगले सप्ताह एक्स-डिविडेंड होने वाली सात कंपनियों में चार कंपनियों ने फाइनल डिविडेंड और तीन ने अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है. फाइनल डिविडेंड देने वाली कंपनियों में Leo Dryfruits and Spices Trading, SAIL, Goenka Business and Finance और IGL शामिल हैं. वहीं Saraswati Saree Depot, R Systems International और Sainik Finance and Industries ने अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है.
प्रति शेयर डिविडेंड की रकम देखें तो R Systems International ₹8 के साथ सबसे आगे है. इसके बाद Saraswati Saree Depot ₹3 और SAIL ₹2.35 प्रति शेयर का डिविडेंड देगी. IGL ने ₹1.50 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है, जबकि Leo Dryfruits and Spices Trading, Goenka Business and Finance और Sainik Finance and Industries की ओर से ₹0.50 प्रति शेयर का डिविडेंड दिया जाएगा.
एक्स-डिविडेंड डेट का क्या मतलब है?
एक्स-डिविडेंड डेट वह तारीख होती है जब शेयर खरीदने वाला निवेशक घोषित डिविडेंड का हकदार नहीं होता. डिविडेंड पाने के लिए निवेशक का कंपनी की तय रिकॉर्ड डेट के अनुसार पात्र होना जरूरी होता है. इसलिए डिविडेंड वाले शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए एक्स-डिविडेंड डेट के साथ रिकॉर्ड डेट को समझना भी जरूरी है.
फैशन से ज्वेलरी, डेस्टिनेशन वेडिंग से ट्रैवल और डेकोर से टेक्नोलॉजी तक, भारतीय शादियों का कारोबार तेजी से एक बड़े लाइफस्टाइल इकोसिस्टम में बदल रहा है. गुरुग्राम में आयोजित VanVivaha 2026 में इसी बदलती तस्वीर की झलक देखने को मिली
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शादी की तैयारी कभी परिवार और रिश्तेदारों की बैठकों से शुरू होती थी और धीरे-धीरे कपड़े, ज्वेलरी, वेन्यू और कैटरिंग तक पहुंचती थी. अब तस्वीर बदल रही है. शादी सिर्फ एक समारोह नहीं रह गई है, बल्कि यह फैशन, ब्यूटी, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल, डेकोर, एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी और पर्सनलाइज्ड एक्सपीरियंस से जुड़ा एक बड़ा बाजार बनती जा रही है.
इसी बदलते वेडिंग इकोसिस्टम को एक मंच पर लाने की कोशिश गुरुग्राम में आयोजित VanVivaha 2026 में नजर आई. 24 और 25 सितंबर को गुरुग्राम में आयोजित इस दो दिवसीय आयोजन में आयोजकों के मुताबिक 6,000 से ज्यादा विजिटर्स पहुंचे. 100 से अधिक प्रदर्शकों ने फैशन, ज्वेलरी, हॉस्पिटैलिटी, डेस्टिनेशन वेडिंग, प्लानिंग, डेकोर, ब्यूटी, ट्रैवल, एंटरटेनमेंट, गिफ्टिंग और वेडिंग टेक्नोलॉजी से जुड़े विकल्प पेश किए.
एक शादी, कई इंडस्ट्री और एक ही प्लेटफॉर्म
आज एक बड़ी शादी के पीछे सिर्फ दूल्हा-दुल्हन और परिवार नहीं होते. वहां वेडिंग प्लानर, डिजाइनर, ज्वेलर, होटल, डेकोर कंपनी, मेकअप आर्टिस्ट, ट्रैवल एजेंसी, फोटोग्राफर और एंटरटेनमेंट टीम जैसे कई पेशेवर एक साथ काम करते हैं. VanVivaha ने इसी कनेक्शन को एक जगह लाने की कोशिश की. करीब 1.40 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में आयोजित इस प्रदर्शनी में 70,000 वर्ग फुट से ज्यादा का एग्जिबिशन स्पेस था.
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शादी का फैसला अब केवल कीमत और उपलब्धता पर निर्भर नहीं रहता. परिवारों और कपल्स के लिए थीम, डिजाइन, लोकेशन, सर्विस, सोशल मीडिया प्रेजेंस और पूरे समारोह का अनुभव भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है.
परंपरा के साथ ग्लोबल प्रभाव
भारतीय शादियों में ग्लोबल वेडिंग ट्रेंड्स की मौजूदगी भी बढ़ रही है. हालांकि, इन ट्रेंड्स को सीधे अपनाने के बजाय भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं के साथ मिलाकर पेश किया जा रहा है. Black Rock Hotels & Resorts के मैनेजिंग डायरेक्टर गौरव मुडगल के मुताबिक, ग्लोबल प्रभाव भारतीय शादियों में तेजी से प्रवेश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भारतीय परंपराओं, परिवारों और समारोहों के अनुरूप ढाला जा रहा है. उनके अनुसार, ग्लोबल इंस्पिरेशन और लोकल प्रासंगिकता का यह मेल भारतीय वेडिंग इंडस्ट्री की दिशा तय करेगा. यानी शादी में विदेशी थीम या इंटरनेशनल स्टाइल अपनाना अब भारतीय पहचान से अलग होने का संकेत नहीं है. इसके बजाय दोनों को मिलाकर एक नया वेडिंग एक्सपीरियंस तैयार किया जा रहा है.
सेलिब्रेशन से आगे बढ़कर बड़ा बिजनेस इकोसिस्टम
VanVivaha में Redico Khaitan, Revlon, BlackRock Hotels & Resorts, Mulecha Jewellers, PNG Jewellers, Karan Moin, Piccadilly और Samharo Events जैसे स्थापित नामों के साथ कई विशेषज्ञ और उभरते कारोबारी भी शामिल हुए.
यह विविधता इस बात की ओर इशारा करती है कि भारतीय वेडिंग इंडस्ट्री में कारोबार के लिए अवसर केवल पारंपरिक सेवाओं तक सीमित नहीं हैं. टेक्नोलॉजी, ट्रैवल, गिफ्टिंग, एंटरटेनमेंट और नए तरह के एक्सपीरियंस भी इसका हिस्सा बन रहे हैं. VanVivaha के फाउंडर तेजवंत सिंह लांबा के अनुसार, पहले दिन ही करीब 3,500 से ज्यादा विजिटर्स पहुंचे थे और 1,500 से अधिक प्री-रजिस्ट्रेशन हुए थे. आयोजकों का कहना है कि प्रदर्शकों की प्रतिक्रिया को देखते हुए अगले संस्करण में बड़े स्टॉल, बेहतर लोकेशन और अधिक भागीदारी की मांग सामने आई है.
वेडिंग इंडस्ट्री में बढ़ रहा नेटवर्किंग का महत्व
VanVivaha में सिर्फ उत्पादों और सेवाओं की प्रदर्शनी तक सीमित रहने के बजाय नेटवर्किंग पर भी जोर दिया गया. Make My Lagan और Sundowner Networking Party जैसी गतिविधियों के जरिए वेडिंग प्रोफेशनल्स, ब्रांड्स और संभावित ग्राहकों को एक-दूसरे से जोड़ने की कोशिश की गई.
यह बदलाव बताता है कि वेडिंग इंडस्ट्री में बिजनेस अब सिर्फ स्टॉल पर उत्पाद दिखाने तक सीमित नहीं है. नए क्लाइंट, नए सहयोग और अलग-अलग क्षेत्रों के पेशेवरों के बीच नेटवर्क भी इस कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं. VanVivaha के को-फाउंडर सार्थक सैनी के मुताबिक, वेन्यू, डेकोर, फैशन, फूड और एंटरटेनमेंट जैसे क्षेत्र अब अलग-अलग खानों में काम नहीं कर रहे हैं. उनके अनुसार, एक शादी को बेहतर अनुभव बनाने के लिए डिजाइन, टेक्नोलॉजी, हॉस्पिटैलिटी, एंटरटेनमेंट और स्टोरीटेलिंग जैसे कई क्षेत्रों का एक साथ काम करना जरूरी है.
ब्यूटी से लेकर ज्वेलरी तक, बढ़ रहा अनुभव का दायरा
शादी के बदलते स्वरूप में ब्यूटी और पर्सनल स्टाइलिंग भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं. VanVivaha में Revlon जैसे ब्यूटी ब्रांड की मौजूदगी ने इस सेगमेंट की भूमिका को सामने रखा. Revlon India की मैनेजिंग डायरेक्टर मेघना मोदी ने कहा कि कंपनी का VanVivaha के साथ जुड़ाव ब्राइडल और वेडिंग मेकअप के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने की दिशा में है. उन्होंने कहा, ज्वेलरी भी अब सिर्फ पारंपरिक आभूषणों तक सीमित नहीं है. आज दुल्हन और परिवार शादी के अलग-अलग समारोहों के लिए अलग लुक और ज्वेलरी की योजना बनाते हैं. ऐसे में डिजाइन, पर्सनलाइजेशन और पूरे लुक के साथ ज्वेलरी का तालमेल भी बाजार का हिस्सा बन गया है.
अगली मंजिल: 2-3 गुना विस्तार
पहले संस्करण के बाद आयोजकों ने अगले संस्करण को मौजूदा आकार से 2-3 गुना तक बढ़ाने की योजना बताई है. यह विस्तार केवल एक प्रदर्शनी के आकार में बढ़ोतरी नहीं होगा, बल्कि उस बाजार की बढ़ती विविधता को भी दर्शाएगा जिसमें शादी अब एक दिन का आयोजन न रहकर कई दिनों और कई अनुभवों में फैली गतिविधि बन चुकी है.
आज एक भारतीय शादी में मेहंदी, संगीत, कॉकटेल, शादी और रिसेप्शन जैसे कई समारोह हो सकते हैं. हर समारोह के लिए अलग ड्रेस, मेकअप, डेकोर, फूड और एंटरटेनमेंट की जरूरत हो सकती है. डेस्टिनेशन वेडिंग जुड़ने पर होटल, ट्रैवल और लॉजिस्टिक्स भी इसी इकोसिस्टम का हिस्सा बन जाते हैं.
यही वजह है कि वेडिंग इंडस्ट्री को अब सिर्फ 'शादी का कारोबार' कहकर देखना पर्याप्त नहीं लगता. यह तेजी से एक ऐसे लाइफस्टाइल और एक्सपीरियंस इकोसिस्टम का रूप ले रहा है, जहां परिवार ग्राहक हैं, लेकिन उनके साथ काम करने वाले डिजाइनर, होटल, ज्वेलर, प्लानर, टेक्नोलॉजी कंपनियां और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स भी इस पूरी कहानी के अहम हिस्सेदार हैं.
VanVivaha 2026 इसी बदलाव का एक उदाहरण रहा, जहां शादी की तैयारी से जुड़े अलग-अलग हिस्से एक ही छत के नीचे दिखाई दिए. अब देखना यह होगा कि अगले संस्करण में यह प्लेटफॉर्म इस पूरे इकोसिस्टम को किस तरह और बड़े पैमाने पर जोड़ता है.
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2026 के उद्घाटन के दौरान इन कंपनियों को जमीन आवंटन पत्र सौंपे गए. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पांचों कंपनियों के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट प्रदान किए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में परियोजनाओं के लिए पांच कंपनियों को 71,190 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. इन परियोजनाओं में कुल 469 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है और इनके जरिए 4,625 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. शुक्रवार को उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2026 के उद्घाटन के दौरान इन कंपनियों को जमीन आवंटन पत्र सौंपे गए. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पांचों कंपनियों के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट प्रदान किए.
पांच कंपनियों को मिला जमीन आवंटन
C&R Textiles को 16,000 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. कंपनी ने परियोजना में 104 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है, जिससे करीब 2,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी की ओर से प्रबंध निदेशक छत्रपति रंजीत राय ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.
Perfectpack को 16,200 वर्ग मीटर जमीन मिली है. कंपनी 125 करोड़ रुपये का निवेश करेगी और इससे करीब 700 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजय राजगढ़िया ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.
SABS Exports International को 16,180 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. कंपनी ने 87 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है और परियोजना से 475 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के निदेशक चेतन सभरवाल ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.
Simplast India को 12,000 वर्ग मीटर जमीन मिली है. कंपनी की प्रस्तावित परियोजना में 78 करोड़ रुपये का निवेश होगा और इससे 300 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के निदेशक गौरव चुग ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.
Sahu Exports को 10,810 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. कंपनी ने 75 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है. परियोजना से 1,150 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के निदेशक संजीव साहू ने जमीन आवंटन पत्र प्राप्त किया.
अमित शाह ने निवेशकों से की बातचीत
जमीन आवंटन पत्र सौंपने के साथ अमित शाह ने निवेशकों के साथ बातचीत भी की. इस दौरान उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विस्तार, निवेश के अवसरों और राज्य में कारोबारी गतिविधियों को तेज करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.
UPITS के जरिए हुए ये जमीन आवंटन निवेश प्रस्तावों को जमीनी स्तर पर वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की दिशा में एक कदम हैं. पांचों परियोजनाओं से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
इन आवंटनों से YEIDA क्षेत्र की नई औद्योगिक परियोजनाओं को जगह देने में भूमिका भी सामने आती है. उत्तर प्रदेश सरकार निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने और राज्य के औद्योगिक आधार का विस्तार करने पर जोर दे रही है.
प्रस्तावित IPO में 1,300 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और मौजूदा निवेशकों की ओर से 1,754 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल शामिल है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
JSW One Platforms ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के जरिए 3,054 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए हैं. कंपनी मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए टेक्नोलॉजी आधारित B2B प्लेटफॉर्म संचालित करती है.
ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, प्रस्तावित IPO में 1,300 करोड़ रुपये तक का फ्रेश इश्यू और 1,754.01 करोड़ रुपये तक का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है. OFS के तहत JSW Steel, JSW Cement और Mitsui & Co अपने शेयर बेचेंगे.
IPO से जुटाई रकम का कहां होगा इस्तेमाल
फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम में से 125 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी की सहायक इकाई JSW One Distribution में मार्केटिंग और ब्रांड निर्माण गतिविधियों के लिए किया जाएगा. वहीं, 500 करोड़ रुपये JSW One Finance Ltd में निवेश किए जाएंगे, जिससे कंपनी के पूंजी आधार को मजबूत किया जा सके. इसके अलावा, टेक्नोलॉजी और प्लेटफॉर्म के विकास पर 350 करोड़ रुपये तक खर्च करने की योजना है. बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा.
MSME को मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सामग्री से जोड़ता है प्लेटफॉर्म
JSW One Platforms एक इंटीग्रेटेड डिजिटल B2B प्लेटफॉर्म संचालित करती है, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सामग्री बेचने वाले विक्रेताओं से जोड़ता है.
प्लेटफॉर्म पर कॉमर्स के अलावा एम्बेडेड फाइनेंसिंग, लॉजिस्टिक्स, प्रोसेसिंग और कस्टमाइजेशन जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं. कंपनी के पास अपने प्राइवेट ब्रांड भी हैं.
30 जून 2026 तक प्लेटफॉर्म पर 95,611 रजिस्टर्ड ग्राहक और 1,713 विक्रेता थे. इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर कुल 165 ब्रांड मौजूद थे और इसका नेटवर्क 6,963 सर्विसेबल पिन कोड तक फैला था. कंपनी 81 लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स, 12 कॉन्ट्रैक्ट सर्विस सेंटर और 9 कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के नेटवर्क के साथ काम करती है.
FY26 में 45 फीसदी बढ़ा राजस्व
कंपनी का परिचालन से राजस्व वित्त वर्ष 2026 में 44.93 फीसदी बढ़कर 5,743.39 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 3,962.81 करोड़ रुपये था. इसी अवधि में कंपनी का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) भी बढ़कर 18,596.91 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 12,564.84 करोड़ रुपये था.
30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का परिचालन से राजस्व 1,642.45 करोड़ रुपये रहा. इस दौरान कंपनी का कर पश्चात लाभ (PAT) 14.21 करोड़ रुपये रहा, जबकि तिमाही GMV 5,949.73 करोड़ रुपये था.
260 करोड़ रुपये तक हो सकता है प्री-IPO प्लेसमेंट
DRHP के मुताबिक, कंपनी 260 करोड़ रुपये तक के प्री-IPO प्लेसमेंट पर भी विचार कर सकती है. अगर यह प्लेसमेंट पूरा होता है, तो इससे जुटाई गई रकम को फ्रेश इश्यू के आकार से घटा दिया जाएगा.
DRHP में उद्धृत इंडस्ट्री रिपोर्ट के अनुसार, भारत का B2B ट्रेड मार्केट करीब 2 ट्रिलियन डॉलर का है. वित्त वर्ष 2026 में मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन B2B कॉमर्स में डिजिटल पैठ करीब 3 फीसदी आंकी गई थी. ऐसे में JSW One Platforms का प्रस्तावित IPO भारत के B2B कारोबार में बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल के बीच आया है.
सरकार अक्टूबर-मार्च के दौरान 7.86 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी करेगी. सरकार ने बॉन्ड जारी करने का रुख लंबी अवधि वाली प्रतिभूतियों की ओर बढ़ाया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी सकल बाजार उधारी योजना को घटाकर करीब 15.995 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. बजट में पहले इसके 17.20 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था. सरकार वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बॉन्ड बिक्री के जरिए 7.86 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है.
अक्टूबर-मार्च के लिए उधारी कार्यक्रम पहले बताए गए 7.96 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा कम है. संशोधित योजना ऐसे समय में आई है जब सरकार बॉन्ड यील्ड पर दबाव को नियंत्रित करने और सरकारी प्रतिभूति बाजार में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रही है.
उधारी योजना में संशोधन
15.995 लाख करोड़ रुपये का नया आंकड़ा उस 16.09 लाख करोड़ रुपये से भी कम है, जिसकी घोषणा पहली समीक्षा के बाद की गई थी. सरकार अप्रैल-सितंबर के दौरान पहले ही 8.135 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है. इस महीने की शुरुआत में हुई एक नीलामी में सरकार ने तय योजना से 6,500 करोड़ रुपये कम उधार लिया था.
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में शुरुआत में सकल उधारी 17.20 लाख करोड़ रुपये तय की थी. इसके बाद बॉन्ड स्विच ऑपरेशन के जरिए उधारी की जरूरत कम हुई और यह आंकड़ा पहले 16.09 लाख करोड़ रुपये पर आया. अब इसे और घटाकर 15.995 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है.
वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होने वाली शुद्ध बाजार उधारी 11.73 लाख करोड़ रुपये के बजटीय स्तर पर ही बनी हुई है.
लंबी अवधि की प्रतिभूतियों पर जोर
अक्टूबर से मार्च के दौरान सरकार 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 साल की अवधि वाली प्रतिभूतियां जारी करेगी. इनमें 10 साल की अवधि वाले बॉन्ड की उधारी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी बनी रहेगी. हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बाजार प्रतिभागियों के साथ चर्चा के बाद उधारी कार्यक्रम की संरचना को लंबी अवधि वाली प्रतिभूतियों की ओर स्थानांतरित किया गया है.
पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड की हिस्सेदारी अप्रैल-सितंबर की 15.4 फीसदी से घटकर 12.1 फीसदी रह जाएगी. वहीं, 10 साल की प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी 29 फीसदी से घटकर 26.3 फीसदी होगी.
इसके विपरीत, 15 साल और 30 साल की प्रतिभूतियों की संयुक्त हिस्सेदारी दूसरी छमाही की उधारी में 26.8 फीसदी रहेगी, जो पहली छमाही में 21.8 फीसदी थी. सरकार 40 साल और 50 साल की अवधि वाले बॉन्ड भी जारी करेगी.
बॉन्ड बाजार पर नजर
संशोधित उधारी योजना ऐसे समय में आई है जब भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार में दबाव बना हुआ है और हाल के कारोबारी सत्रों में यील्ड बढ़ी है. कारोबारियों के अनुसार, कुछ सबसे अधिक कारोबार वाली अवधि के बॉन्ड की आपूर्ति कम होने से हालिया बिकवाली के बाद इन सेगमेंट में मांग को समर्थन मिल सकता है.
उधारी कैलेंडर ऐसे समय में जारी किया गया है जब भारत की बैंकिंग प्रणाली में नकदी की उपलब्धता ऊंचे स्तर पर है. RBI ने हाल में अतिरिक्त रुपये की नकदी को वित्तीय प्रणाली से सोखने के लिए खुले बाजार में बॉन्ड बिक्री और अन्य लिक्विडिटी मैनेजमेंट उपायों का इस्तेमाल किया है.
नवीनतम संशोधन के बाद सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में डेटेड सिक्योरिटीज के जरिए करीब 16 लाख करोड़ रुपये उधार लेगी. वहीं, नियोजित शुद्ध बाजार उधारी को बजटीय स्तर पर बनाए रखते हुए वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में जारी किए जाने वाले कर्ज की अवधि की संरचना में बदलाव किया गया है.
भारत की FY27 उधारी योजना में कटौती
भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की सकल बाजार उधारी को 17.20 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 15.995 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. दूसरी छमाही यानी अक्टूबर-मार्च में सरकार 7.86 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी करेगी. सरकार ने उधारी की अवधि को भी लंबी अवधि वाली प्रतिभूतियों की ओर बढ़ाया है.
अप्रैल-सितंबर में जुटाए 8.135 लाख करोड़ रुपये
सरकार अप्रैल-सितंबर के दौरान अब तक 8.135 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है. इस महीने की शुरुआत में हुई नीलामी में तय योजना से 6,500 करोड़ रुपये कम उधारी की गई थी. बॉन्ड स्विच ऑपरेशन के बाद सकल उधारी का अनुमान पहले 16.09 लाख करोड़ रुपये किया गया था, जिसे अब और घटाया गया है.
15 और 30 साल के बॉन्ड की हिस्सेदारी बढ़ी
दूसरी छमाही में 15 साल और 30 साल की प्रतिभूतियों की संयुक्त हिस्सेदारी 26.8 फीसदी होगी, जबकि पहली छमाही में यह 21.8 फीसदी थी. वहीं, पांच साल के बॉन्ड की हिस्सेदारी 15.4 फीसदी से घटकर 12.1 फीसदी और 10 साल के बॉन्ड की हिस्सेदारी 29 फीसदी से घटकर 26.3 फीसदी होगी. सरकार 40 और 50 साल की अवधि वाले बॉन्ड भी जारी करेगी.
शुद्ध बाजार उधारी में बदलाव नहीं
सरकार की 11.73 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बाजार उधारी का लक्ष्य बरकरार है. इसमें बदलाव मुख्य रूप से सकल उधारी और दूसरी छमाही में जारी किए जाने वाले बॉन्ड की अवधि की संरचना में किया गया है.
विदेशी मुद्रा भंडार के साप्ताहिक आंकड़े रुपये और देश के बाहरी क्षेत्र की स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 18 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 14.88 अरब डॉलर घटकर 765.90 अरब डॉलर रह गया. इससे पिछले सप्ताह भी भंडार में गिरावट दर्ज की गई थी. सितंबर की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने के बाद अब रिजर्व में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.
विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की बाहरी वित्तीय स्थिति का अहम संकेतक होता है. इसमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना, विशेष आहरण अधिकार (SDR) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में रिजर्व पोजीशन शामिल होते हैं. भंडार में बदलाव का असर देश की बाहरी भुगतान क्षमता और विदेशी मुद्रा बाजार की स्थिति पर पड़ सकता है.
विदेशी मुद्रा भंडार में क्यों आई गिरावट?
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में होता है. इसमें डॉलर के साथ दूसरी विदेशी मुद्राओं में रखी गई परिसंपत्तियां भी शामिल हैं. इन परिसंपत्तियों के मूल्य में बदलाव, विभिन्न मुद्राओं की विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप से कुल रिजर्व में बदलाव हो सकता है.
इसलिए किसी एक सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट को सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था में कमजोरी का संकेत नहीं माना जा सकता. इसके लिए यह देखना जरूरी होता है कि गिरावट किस घटक में हुई है और इसके पीछे क्या वजह रही है.
रुपये पर क्या हो सकता है असर?
विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल देश की बाहरी भुगतान जरूरतों को पूरा करने और विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में किया जाता है. पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होने से आयात भुगतान और वैश्विक वित्तीय दबावों से निपटने में मदद मिलती है.
हालांकि, सिर्फ एक सप्ताह में रिजर्व घटने के आधार पर रुपये की दिशा को लेकर कोई सीधा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. रुपये की चाल पर कच्चे तेल की कीमत, आयात बिल, विदेशी निवेश का प्रवाह, डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजार की स्थिति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है.
आगे किन आंकड़ों पर रहेगी नजर?
आने वाले सप्ताहों में विदेशी मुद्रा भंडार के साथ विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और स्वर्ण भंडार में बदलाव पर भी नजर रहेगी. अगर रिजर्व में लगातार गिरावट जारी रहती है, तो इसके कारणों और इसके अलग-अलग घटकों में हुए बदलाव को समझना महत्वपूर्ण होगा.
भारत की अर्थव्यवस्था ऊर्जा आयात, वैश्विक व्यापार और विदेशी पूंजी प्रवाह से जुड़ी हुई है. ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार के साप्ताहिक आंकड़े रुपये और देश के बाहरी क्षेत्र की स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं.