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हिमाचल के गगल और दरलाघाट में शुरू हुआ परिचालन, अडानी समूह को मिली राहत
अडानी पर आई परेशानियो के बीच कंपनी का हिमाचल के सीमेंट संयंत्रों में चला आ रहा विवाद खत्म हो गया है और संयंत्रों में फिर से काम शुरू हो गया है. कंपनी ने कहा है कि मालढ़ुलाई की दरें तय कर ली गई हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद परेशानी में आए अडानी समूह की कंपनियां के लिए हिमाचल प्रदेश से अच्छी खबर निकलकर सामने आई है. कंपनी की ओर से बताया गया है कि उसने मालढ़ुलाई को लेकर चल रहे विवाद को सुलझा लिया है. कंपनी ने कहा कि उसने सभी हितधारक के साथ बातचीत करके हिमाचल प्रदेश राज्य में माल ढुलाई दरों पर चल रही चर्चाओं को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल कर लिया है. इस समझौते से कंपनी की एसीसी और अंबुजा सीमेंट्स यूनिट और इसमें शामिल सभी हितधारकों को फायदा होगा.
कल से शुरू हो जाएगा उत्पादन
अडानी सीमेंट के प्रवक्ता की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार एसीसी और अंबुजा सीमेंट्स कल से हिमाचल प्रदेश के गगल और दरलाघाट संयंत्रों में परिचालन फिर से शुरू कर देंगे. इस समझौते के अनुसार 12 टन के सिंगल एक्सल ट्रकों के लिए कल से माल ढुलाई की नई दरें तय कर दी गई है. उसके अनुसार अंबुजा सीमेंट्स के दारलाघाट प्लांट और एसीसी के गगल प्लांट के लिए 10.30 प्रति टन प्रति किमी तय कर दिया है जबकि इससे पहले एसीसी के गगल संयंत्र के लिए ये 11.41 रुपये और अंबुजा सीमेंट्स के दारलाघाट इकाइयों के लिए 10.58 रुपये हुआ करती थी. इसी तरह मल्टी एक्सल 24 टन ट्रकों की नई दरें दोनों इकाइयों के लिए 9.30 रुपये प्रति टन प्रति किलोमीटर होंगी. इसके परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश के ग्राहकों को लाभ पहुंचाने वाली माल ढुलाई दरों में कुल मिलाकर 10-12 प्रतिशत की कमी आएगी.
ये हैं राज्य की सबसे बड़ी औद्योगिक यूनिट
एसीसी और अंबुजा सीमेंट्स की गगल और दारलाघाट यूनिट राज्य की सबसे बड़ी औद्योगिक यूनिट में से एक हैं और रोजगार प्रदान करने और राज्य की आर्थिक ग्रोथ में बड़ा योगदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. संयंत्रों को फिर से खोलने से राज्य के आर्थिक, सामाजिक और समग्र विकास में मदद मिलेगी. इन दरों को लेकर राज्य के सभी प्राधिकरणों की सहमति भी ली गई है.
सीमेंट ढ़ुलाई को लेकर पैदा हो गया था विवाद
पिछले दो महीने से ज्यादा समय से सीमेंट की ढ़लाई करने को लेकर कंपनी और ट्रक ऑपरेटरों के बीच विवाद पैदा हो गया था. ट्रक ऑपरेटर सरकार से मांग कर रहे थे कि वो इस विवाद को सुलझाने की कोशिश करे. इस विवाद के कारण बिलासपुर में सीमेंट की भी कमी हो गई थी. अडानी समूह सीमेंट की आपूर्ति करने के लिए ट्रॉलों की मदद ले रहा था जिसका भी ट्रक ऑपरेटर विरोध कर रहे थे.
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