OMNIYAT ने अपना पहला ग्रीन सुकुक Nasdaq Dubai पर किया शुरू, कंपनी ने जुटाए $500 मिलियन

इस सुकुक के लिए ज़बरदस्त मांग रही जिसमें 3.6 गुना ज़्यादा ऑर्डर मिले, कुल मांग 1.8 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी रही.

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Thursday, 15 May, 2025
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दुबई की एक जानी-मानी लग्ज़री रियल एस्टेट कंपनी OMNIYAT ने अपना पहला ग्रीन सुकुक (इस्लामिक बॉन्ड) सफलतापूर्वक NASDAQ Dubai पर लिस्ट कर दिया है. इस ऑफर से कंपनी ने 500 मिलियन डॉलर (करीब 4,160 करोड़ रुपये) जुटाए हैं. यह सुकुक 3 साल के लिए जारी किया गया है और इससे OMNIYAT ने अंतरराष्ट्रीय कर्ज बाजार में कदम रखा है. 

क्या है ग्रीन सुकुक?

ग्रीन सुकुक का मतलब है ऐसा इस्लामिक बॉन्ड जिससे जुटाई गई राशि को सस्टेनेबल (टिकाऊ) प्रोजेक्ट्स में लगाया जाता है .जैसे पर्यावरण के अनुकूल इमारतें या ऊर्जा बचाने वाली तकनीक.

इस डील की खास बातें है कि निवेशकों ने इस सुकुक को लेकर ज़बरदस्त रुचि दिखाई. 500 मिलियन डॉलर की पेशकश के बदले 1.8 बिलियन डॉलर (3.6 गुना ज़्यादा) के ऑर्डर मिले. इस सुकुक पर 8.375% का मुनाफा (प्रॉफिट रेट) मिलेगा. इसकी कीमत 3 साल के अमेरिकी सरकारी बॉन्ड से 461.7 बेसिस प्वाइंट ऊपर रखी गई है.

पैसा कहां लगेगा?

इस सुकुक से जो पैसे मिलेंगे, उनका इस्तेमाल OMNIYAT के Green Financing Framework के तहत किया जाएगा. यानी यह पैसा ऐसे प्रोजेक्ट्स में लगेगा जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं. यह पूरा ढांचा ICMA (अंतरराष्ट्रीय संस्था) के नियमों के अनुसार है ताकि निवेशक पूरी पारदर्शिता के साथ निवेश कर सकें.

कंपनी के फाउंडर महदी अमजद का बयान

कंपनी के फाउंडर महदी अमजद ने कहा कि “आज हमने जो घंटी बजाई (बेल रिंगिंग सेरेमनी), वह सिर्फ एक फाइनेंशियल कामयाबी नहीं है, बल्कि हमारे लंबे समय के टिकाऊ विकास और ज़िम्मेदार निवेश के संकल्प को भी दर्शाती है. इस ग्रीन सुकुक को लेकर जो ज़बरदस्त रिस्पॉन्स मिला है, वह यह दिखाता है कि अब निवेशक ऐसे साधनों में पैसा लगाना चाहते हैं जो मुनाफा भी दें और पर्यावरण का भी भला करें.”

कंपनी की रेटिंग और इसकी ताकत

S&P Global और Fitch Ratings ने OMNIYAT को BB- की क्रेडिट रेटिंग दी है. दोनों एजेंसियों ने कंपनी के भविष्य को "Stable" (स्थिर) बताया है. कंपनी ने Palm Jumeirah और Business Bay जैसे शानदार लोकेशनों में कई प्रोजेक्ट बनाए हैं. इसकी वजह से दुनियाभर के अमीर ग्राहक OMNIYAT की तरफ आकर्षित होते हैं. कंपनी दुबई की लग्ज़री प्रॉपर्टी मार्केट में एक मजबूत नाम बन चुकी है.
 


पूर्व टीवी संपादक ने शुरू की उत्तर प्रदेश की पहली NABL-मान्यता प्राप्त फॉरेंसिक लैब

इस उपलब्धि के साथ Laxhar Evidence Labs उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी फॉरेंसिक लैब बन गई है, जिसे सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में NABL की मान्यता मिली है. ह

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Friday, 03 July, 2026
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पूर्व टीवी संपादक और फॉरेंसिक पत्रकार इंद्रजीत राय ने उत्तर प्रदेश में राज्य की पहली मान्यता प्राप्त फॉरेंसिक प्रयोगशाला' स्थापित कर एक नया कीर्तिमान बनाया है. उनकी कंपनी Laxhar Evidence Labs Private Limited को नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) से फॉरेंसिक परीक्षण के लिए आधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई है.

इस उपलब्धि के साथ Laxhar Evidence Labs उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी फॉरेंसिक लैब बन गई है, जिसे सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में NABL की मान्यता मिली है. साथ ही यह भारत की पहली निजी मल्टी-डिसिप्लिनरी फॉरेंसिक प्रयोगशाला भी बन गई है, जिसे एक साथ डिजिटल फॉरेंसिक, फिजिकल फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट तीनों क्षेत्रों में NABL मान्यता हासिल हुई है.

पत्रकारिता से फॉरेंसिक साइंस तक का सफर

इंद्रजीत राय ने दो दशकों से अधिक समय तक टीवी पत्रकारिता में अपराध से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग और खोजी पत्रकारिता की. वे ABP News में एग्जीक्यूटिव एडिटर, Zee News में डिप्टी एडिटर और Network18 में क्राइम एडिटर जैसे वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके हैं.

उन्होंने भारत में फॉरेंसिक पत्रकारिता को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसी योगदान के लिए उन्हें World Book of Records से भी सम्मानित किया गया. वर्षों तक फॉरेंसिक विज्ञान का अध्ययन और रिपोर्टिंग करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम के साथ Laxhar Evidence Labs की स्थापना की.

इंद्रजीत राय ने कहा कि पत्रकार के रूप में उन्होंने वर्षों तक सवाल पूछे और तथ्यों की तलाश की. अब फॉरेंसिक विज्ञान उन्हें वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से उन सवालों के जवाब देने का अवसर देता है. उनका उद्देश्य जांच एजेंसियों के साथ-साथ हर उस नागरिक तक विश्वसनीय फॉरेंसिक सेवाएं पहुंचाना है, जो सच्चाई जानना चाहता है.

कड़ी जांच के बाद मिली NABL मान्यता

NABL की मान्यता प्रयोगशाला की वैज्ञानिक क्षमता, परीक्षण पद्धतियों, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, तकनीकी प्रक्रियाओं, उपकरणों, विशेषज्ञ कर्मियों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन की विस्तृत जांच के बाद प्रदान की गई है. इसके लिए NABL की विशेषज्ञ टीम ने प्रयोगशाला का व्यापक ऑन-साइट ऑडिट भी किया.

किन सेवाओं की मिलेगी सुविधा

नोएडा के सेक्टर-73 स्थित एन्थूरियम टॉवर में स्थापित यह प्रयोगशाला निम्नलिखित सेवाएं प्रदान करती है.

1. डिजिटल फॉरेंसिक
2. मोबाइल और क्लाउड फॉरेंसिक
3. ऑडियो एवं वीडियो फॉरेंसिक
4. फिंगरप्रिंट परीक्षण
5. हस्तलेखन और हस्ताक्षर परीक्षण
6. फॉरेंसिक दस्तावेज जांच
7. क्राइम सीन जांच एवं प्रबंधन
8. टेक्निकल सर्विलांस काउंटर-मेजर्स (TSCM)
9. फॉरेंसिक सलाह और विशेषज्ञ राय

निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

भारत में अब तक अधिकांश फॉरेंसिक जांच सरकारी प्रयोगशालाओं तक सीमित रही है. Laxhar Evidence Labs का उद्देश्य इस कमी को दूर करते हुए आम नागरिकों, अधिवक्ताओं, कॉर्पोरेट कंपनियों, वित्तीय संस्थानों, बीमा कंपनियों, स्टार्टअप्स और जांच एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणित फॉरेंसिक सेवाएं उपलब्ध कराना है.

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लैब

Laxhar Evidence Labs को ISO/IEC 17025:2017 मानक के तहत मान्यता प्राप्त है. प्रयोगशाला को 20 मान्यता प्राप्त परीक्षण क्षेत्रों में लैबोरेटरी टेस्टिंग और ऑन-साइट टेस्टिंग दोनों की अनुमति मिली है. इसके अलावा कंपनी कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, MSME, DPIIT, उत्तर प्रदेश आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग और Government e-Marketplace (GeM) में भी पंजीकृत है. साथ ही इसे ISO 9001:2015 गुणवत्ता प्रबंधन प्रमाणन भी प्राप्त है.

इंद्रजीत राय का कहना है कि Laxhar Evidence Labs का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाना और वैज्ञानिक उत्कृष्टता तथा अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के माध्यम से भारत की न्याय प्रणाली को और अधिक मजबूत करना है.


ICAR और सेशेल्स के बीच MoU, जलवायु-अनुकूल खेती और हॉर्टिकल्चर को मिलेगा बढ़ावा

भारत और सेशेल्स ने कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
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भारत और सेशेल्स ने कृषि क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और सेशेल्स के कृषि विभाग ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा, तकनीक हस्तांतरण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके साथ ही दोनों देशों ने 2026 से 2031 तक के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना भी तैयार की है, जिसमें जलवायु-अनुकूल कृषि, बागवानी और खाद्य सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

भारत-सेशेल्स के बीच कृषि सहयोग पर MoU

भारत और सेशेल्स ने कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. यह समझौता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और सेशेल्स के कृषि विभाग के बीच हुआ है. यह समझौता दोनों देशों के बीच कृषि अनुसंधान, शिक्षा, क्षमता निर्माण (Capacity Building), तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) और आधुनिक कृषि पद्धतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करता है. इसके तहत संयुक्त शोध कार्यक्रम चलाए जाएंगे, साथ ही वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित किया जाएगा.

2026-2031 के लिए तैयार हुई पांच वर्षीय कार्ययोजना

समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए दोनों देशों ने 2026 से 2031 तक की पांच वर्षीय कार्ययोजना पर भी हस्ताक्षर किए हैं. इस कार्ययोजना में निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा.

1. क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर (जलवायु-अनुकूल कृषि)
2. हॉर्टिकल्चर (बागवानी)
3. पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट (फसल कटाई के बाद प्रबंधन)
4. पशुधन विकास
5. सतत खाद्य एवं पोषण सुरक्षा

प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान हुआ समझौता

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता भारत के प्रधानमंत्री की सेशेल्स की आधिकारिक यात्रा के दौरान संपन्न हुआ. मंत्रालय ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के कृषि संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना, कृषि उत्पादकता में सुधार करना, तकनीकी क्षमता विकसित करना और सतत कृषि विकास को बढ़ावा देना है.

जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा से निपटने में मिलेगी मदद

मंत्रालय के मुताबिक, यह साझेदारी जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा जैसी उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. साथ ही, इससे कृषि क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीकों को अपनाने में तेजी आएगी.

वैश्विक कृषि साझेदारी को मिल रही मजबूती

ICAR अब तक दुनिया भर के विभिन्न संस्थानों के साथ 100 से अधिक समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर कर चुका है. मंत्रालय का कहना है कि सेशेल्स के साथ हुआ यह नया समझौता ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की साझेदारी को और मजबूत करेगा तथा सतत कृषि, नवाचार और वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाएगा.
 


फर्स्टक्राई समर्थित स्वारा बेबी लाएगी ₹1,000 करोड़ का IPO, सेबी के पास दाखिल किया DRHP

स्वारा बेबी डिस्पोजेबल हाइजीन उत्पादों का निर्माण करती है. कंपनी बेबी केयर, एडल्ट इनकॉन्टिनेंस और फेमिनिन हाइजीन सेगमेंट में कई प्रोडक्ट बनाती है.

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Thursday, 02 July, 2026
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बेबी डायपर और हाइजीन प्रोडक्ट्स बनाने वाली स्वारा बेबी (Swara Baby) ने ₹1,000 करोड़ के शुरुआती सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है. इस आईपीओ के जरिए कंपनी विस्तार, निवेश और कारोबार को नई गति देने की तैयारी में है. IPO में फ्रेश इश्यू के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल (OFS) भी शामिल होगा, जिसमें फर्स्टक्राई की पैरेंट कंपनी ब्रेनबीज सॉल्यूशंस (Brainbees Solutions) अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेगी.

₹1,000 करोड़ का होगा IPO

स्वारा बेबी के प्रस्तावित IPO का कुल आकार ₹1,000 करोड़ है. इसमें ₹500 करोड़ के नए इक्विटी शेयर (Fresh Issue) जारी किए जाएंगे, जबकि शेष राशि ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए जुटाई जाएगी. OFS के तहत ब्रेनबीज सॉल्यूशंस, जो फर्स्टक्राई (FirstCry) की पैरेंट कंपनी है, ₹300 करोड़ तक के शेयर बेचेगी. वर्तमान में ब्रेनबीज के पास स्वारा बेबी में 76.59% हिस्सेदारी है, जिससे वह कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक बनी हुई है.

कौन हैं कंपनी के प्रमोटर?

स्वारा बेबी के प्रमोटर आलोक बिड़ला हैं, जिन्हें हाइजीन प्रोडक्ट्स इंडस्ट्री में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है. कंपनी के प्रमुख प्रमोटरों में आलोक बिड़ला के साथ ब्रेनबीज सॉल्यूशंस भी शामिल है. 

कई हाइजीन कैटेगरी में कारोबार

स्वारा बेबी डिस्पोजेबल हाइजीन उत्पादों का निर्माण करती है. कंपनी बेबी केयर, एडल्ट इनकॉन्टिनेंस और फेमिनिन हाइजीन सेगमेंट में कई उत्पाद बनाती है. वर्ष 2021 के बाद कंपनी ने खुद को एक सिंगल-प्रोडक्ट निर्माता से मल्टी-कैटेगरी बिजनेस में बदल लिया है. कंपनी के पोर्टफोलियो में बेबी पैंट-स्टाइल डायपर, बेबी टेप-स्टाइल डायपर, एडल्ट पैंट-स्टाइल डायपर, एडल्ट टेप-स्टाइल डायपर, सैनिटरी नैपकिन, पैंटी लाइनर्स समेत कुल सात उत्पाद श्रेणियों में प्रोडक्ट शामिल हैं.

FY25 में रहा मजबूत प्रदर्शन

वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में स्वारा बेबी ने ₹84 करोड़ का राजस्व (Revenue) दर्ज किया, जबकि कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) ₹5.2 करोड़ रहा.

प्रोडक्ट इनोवेशन पर भी फोकस

कंपनी लगातार नए उत्पाद विकसित करने पर जोर दे रही है. पिछले वर्ष स्वारा बेबी ने फर्स्टक्राई के BabyHug ब्रांड के तहत एक ऐसा डायपर लॉन्च किया, जिसमें पारंपरिक वुड पल्प का उपयोग घटाकर लगभग 7% कर दिया गया. कंपनी का दावा है कि इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाली वह भारत की पहली निर्माता है.

हाइजीन बिजनेस का विस्तार

ब्रेनबीज सॉल्यूशंस ने दिसंबर 2025 में KA Hygiene और Solis Hygiene का अधिग्रहण करने की घोषणा की थी, ताकि हाइजीन प्रोडक्ट्स कारोबार को और मजबूत किया जा सके. इसी दौरान स्वारा बेबी ने अमेरिका में Swara Corp की स्थापना भी की, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डायपर और अन्य हाइजीन उत्पादों के कारोबार का विस्तार करना है.

ये होंगे IPO के लीड मैनेजर

कंपनी के प्रस्तावित IPO के लिए JM Financial और Avendus Capital को बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है.


एनर्जी ड्रिंक बेचने के दावों पर FSSAI की नजर, रेड बुल सहित 6 बड़ी कंपनियों को जारी हुआ नोटिस

नियामक ने स्पष्ट किया है कि खाद्य उत्पादों को दवा जैसी प्रभावशीलता या विशेष स्वास्थ्य लाभ देने वाला बताना नियमों का उल्लंघन है.

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
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अगर आप एनर्जी ड्रिंक का सेवन करते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है. देश के खाद्य सुरक्षा नियामक फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने Red Bull समेत कम से कम छह प्रमुख एनर्जी ड्रिंक कंपनियों को नोटिस जारी किया है. नियामक का आरोप है कि ये कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार और पैकेजिंग पर ऐसे दावे कर रही हैं, जो भारतीय खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप नहीं हैं.

इन कंपनियों को मिला नोटिस

FSSAI के अनुसार, नोटिस पाने वाली कंपनियों में Red Bull, Monster Energy, PepsiCo India की Adrenaline Rush, Reliance Consumer Products की Campa Energy Drink और Hell Energy जैसे प्रमुख ब्रांड शामिल हैं.

किन दावों पर जताई आपत्ति?

FSSAI ने कहा कि "शरीर और दिमाग को तरोताजा करता है", "फोकस बढ़ाता है" और "एनर्जी लेवल बढ़ाता है" जैसे दावे खाद्य उत्पादों के लिए अनुमत नहीं हैं. ऐसे दावों से यह संदेश जाता है कि उत्पाद किसी विशेष स्वास्थ्य लाभ या चिकित्सीय प्रभाव प्रदान करता है, जो नियमों का उल्लंघन है. नियामक ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पोस्ट में भी स्पष्ट किया कि खाद्य उत्पादों को दवा या स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद की तरह प्रस्तुत नहीं किया जा सकता.

एनर्जी ड्रिंक के लिए अभी नहीं हैं अलग मानक

FSSAI का कहना है कि भारत में फिलहाल एनर्जी ड्रिंक के लिए अलग से कोई आधिकारिक मानक तय नहीं किए गए हैं. ऐसे में कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार में ऐसे दावे नहीं कर सकतीं, जिनसे उपभोक्ताओं को विशेष स्वास्थ्य लाभ मिलने का भ्रम पैदा हो.

तेजी से बढ़ रहा है भारत का एनर्जी ड्रिंक बाजार

रिसर्च फर्म IMARC Group के मुताबिक, भारत का एनर्जी ड्रिंक बाजार वर्ष 2025 में करीब **1.5 अरब डॉलर** का था. इसके वर्ष 2034 तक बढ़कर 2.9 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. शहरीकरण, युवाओं की बढ़ती आबादी और फिटनेस के प्रति बढ़ती रुचि इस बाजार के विस्तार की प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं.

पहले भी कार्रवाई कर चुका है FSSAI

यह पहला मौका नहीं है जब FSSAI ने भ्रामक दावों पर सख्ती दिखाई हो. पिछले वर्ष नियामक ने शुगर-आधारित रीहाइड्रेशन ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे अपने उत्पादों को ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) तभी कहें, जब वे WHO के निर्धारित मानकों पर खरे उतरें. अब इसी तरह की कार्रवाई एनर्जी ड्रिंक कंपनियों के खिलाफ भी की गई है.
 


शिप रीसाइक्लिंग में दुनिया का हब बनेगा भारत, ₹76,000 करोड़ की योजना से 16,000 जहाजों का लक्ष्य

भारत और यूरोपीय संघ ने यूरोपीय शिप रीसाइक्लिंग रेगुलेशन (EUSRR) के तहत भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्ड्स को मान्यता दिलाने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की.

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Thursday, 02 July, 2026
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भारत शिप रीसाइक्लिंग उद्योग में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है. केंद्र सरकार ने अगले दशक में करीब 16,000 जहाजों की रीसाइक्लिंग का लक्ष्य तय किया है. इसके लिए 8 अरब डॉलर (करीब ₹76,000 करोड़) की वित्तीय सहायता का ऐलान किया गया है. साथ ही भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल शिप रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई है.

अगले दशक में 16,000 जहाजों की रीसाइक्लिंग का लक्ष्य

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत अगले 10 वर्षों में करीब 16,000 जहाजों की रीसाइक्लिंग का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है. सरकार ने शिपबिल्डिंग और शिप रीसाइक्लिंग सेक्टर को गति देने के लिए 8 अरब डॉलर (करीब ₹76,000 करोड़) की वित्तीय सहायता की घोषणा की है.

EU के साथ बढ़ेगा सहयोग

भारत और यूरोपीय संघ ने टिकाऊ शिप रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है. दोनों पक्षों ने यूरोपीय शिप रीसाइक्लिंग रेगुलेशन (EUSRR) के तहत भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्ड्स को मान्यता दिलाने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की. वर्तमान में भारत के 30 से अधिक यार्ड EU की मंजूरी पाने की प्रक्रिया में हैं.

रोजगार और पर्यावरण दोनों को मिलेगा लाभ

सोनोवाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने से भारतीय रीसाइक्लिंग सुविधाओं की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ेगी. इससे पर्यावरण-अनुकूल रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा, नए रोजगार पैदा होंगे और समुद्री क्षेत्र में टिकाऊ विकास को मजबूती मिलेगी.

संयुक्त कार्य समूह बनाने का प्रस्ताव

यूरोपीय आयोग की आयुक्त जेसिका रोसवाल ने भारतीय यार्ड्स की प्रगति की सराहना करते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह (JWG) बनाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय से पहले EU सदस्य देशों के साथ इस विषय पर चर्चा की जाएगी. साथ ही भारतीय शिप रीसाइक्लिंग सुविधाओं का दौरा करने की भी इच्छा जताई.

भारत की वैश्विक हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही

संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) के अनुसार, वैश्विक शिप रीसाइक्लिंग में भारत की हिस्सेदारी 2024 के 30.1 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 35.4 प्रतिशत हो गई है. वर्ष 2025 में भारत ने 2.99 मिलियन ग्रॉस टन (GT) जहाजों की रीसाइक्लिंग की, जो 2024 के 1.86 मिलियन GT की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत अधिक है.

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो रहे यार्ड

सरकार के अनुसार, भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्ड्स ने अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण और सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है. इनमें एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन प्रणाली, श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं और आवास जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. सरकार नियमित और बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण के जरिए पर्यावरण संरक्षण, श्रमिक सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है.
 


गोल्ड लोन में तेज उछाल पर नजर रखना जरूरी, फिर भी NBFC सेक्टर मजबूत: RBI रिपोर्ट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) के विश्लेषण में एलारा सिक्योरिटीज ने कहा है कि NBFC क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता, पूंजी स्थिति और ऋण वसूली मजबूत बनी हुई है.

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report-FSR) के विश्लेषण में एलारा सिक्योरिटीज ने कहा है कि देश का गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) क्षेत्र मजबूत स्थिति में है. परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार, पर्याप्त पूंजी और प्रमुख ऋण श्रेणियों में घटते जोखिम के चलते सेक्टर की स्थिति बेहतर बनी हुई है. हालांकि, सोने की ऊंची कीमतों के कारण गोल्ड लोन में तेजी से बढ़ोतरी ऐसे क्षेत्र के रूप में उभर रही है, जिस पर लगातार नजर रखने की जरूरत होगी.

सबसे तेजी से बढ़ा गोल्ड लोन सेगमेंट

एलारा सिक्योरिटीज के अनुसार, पिछले दो वर्षों में गोल्ड लोन की वृद्धि अन्य रिटेल लोन श्रेणियों की तुलना में कहीं अधिक रही है और इसमें NBFCs की सबसे बड़ी भूमिका रही है. वित्त वर्ष 2024 से 2026 के दौरान गोल्ड लोन की वृद्धि दर गैर-हाउसिंग रिटेल लोन की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से लगभग दोगुनी रही. वर्तमान में NBFC के कुल रिटेल लोन पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 17.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

FY26 में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो लगभग दोगुना

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में NBFCs का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 96.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पूरे उद्योग की वृद्धि दर 54.5 प्रतिशत रही. देश में बकाया गोल्ड लोन अब कुल उपभोक्ता ऋण का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा बन चुके हैं. इसकी बड़ी वजह सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतें हैं. रिपोर्ट के अनुसार, नए गोल्ड लोन का मूल्य बकाया गोल्ड लोन से करीब 13 लाख करोड़ रुपये अधिक रहा. इससे संकेत मिलता है कि कई ग्राहक पुराने लोन का नवीनीकरण (रोलओवर) कर अधिक मूल्य वाले सोने के बदले बड़ी राशि उधार ले रहे हैं.

जोखिम फिलहाल नियंत्रित, लेकिन सतर्कता जरूरी

एलारा का मानना है कि फिलहाल जोखिम नियंत्रित है क्योंकि अधिकतर ऋण मौजूदा ग्राहकों को ही दिए जा रहे हैं. नए ग्राहकों की हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है, जबकि लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात 60 प्रतिशत से नीचे है. इसके बावजूद ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि यदि सोने की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव आता है तो जोखिम बढ़ सकता है.

NBFC सेक्टर की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार

रिपोर्ट में NBFC सेक्टर की समग्र स्थिति को सकारात्मक बताया गया है. विभिन्न श्रेणियों में स्लिपेज रेशियो में गिरावट दर्ज की गई है. मिडिल-लेयर NBFCs का स्लिपेज रेशियो घटकर 3 प्रतिशत रह गया है, जबकि अपर-लेयर NBFCs में यह 4.8 प्रतिशत है.

RBI का नॉन-बैंकिंग स्टेबिलिटी इंडिकेटर (NBSI) भी अपने दीर्घकालिक औसत से नीचे बना हुआ है, जो प्रणालीगत जोखिम में कमी का संकेत देता है. वहीं, सेक्टर का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) करीब 24.6 प्रतिशत है, जो नियामकीय आवश्यकता से काफी अधिक है.

MSME और माइक्रोफाइनेंस में भी स्थिति बेहतर

एलारा सिक्योरिटीज ने MSME और माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में भी सुधार की बात कही है. MSME पोर्टफोलियो में सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (GNPA) घटकर 5.4 प्रतिशत रह गई हैं. सेवा क्षेत्र में यह अनुपात केवल 3.1 प्रतिशत है.

माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में भी शुरुआती स्तर का तनाव कम हुआ है. 31 से 180 दिन तक बकाया रहने वाले ऋण मार्च 2026 में घटकर 1.8 प्रतिशत रह गए, जबकि छह महीने पहले यह 4.4 प्रतिशत था. इससे उधारकर्ताओं की भुगतान क्षमता में सुधार का संकेत मिलता है.

उपभोक्ता ऋण बना विकास का प्रमुख आधार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में घरेलू उधारी का सबसे बड़ा आधार उपभोक्ता ऋण बना हुआ है. गैर-हाउसिंग रिटेल लोन अब कुल घरेलू उधारी का 58.4 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो वित्त वर्ष 2025 में 54.9 प्रतिशत था. वहीं, उपभोग आधारित ऋण कुल घरेलू उधारी का लगभग आधा हिस्सा बनाते हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में NBFCs का उपभोक्ता ऋण पोर्टफोलियो 22.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो बैंकों की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है.

उपभोक्ता ऋण में NBFCs का GNPA अनुपात घटकर 1.1 प्रतिशत रह गया, जबकि बैंकों में यह 1.2 प्रतिशत है. हालांकि बिजनेस लोन श्रेणी में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है, लेकिन वहां भी GNPA घटकर 1.8 प्रतिशत पर आ गया है.

बैंकों का NBFC पर बढ़ा भरोसा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि NBFCs के वित्तपोषण में बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ रही है. पिछले एक वर्ष में बैंकों की हिस्सेदारी बढ़कर 43.5 प्रतिशत हो गई है, जो इस क्षेत्र में उनके बढ़ते भरोसे को दर्शाती है. हालांकि, 50,000 रुपये से कम के छोटे व्यक्तिगत ऋण बाजार में NBFCs की हिस्सेदारी घटकर 30.7 प्रतिशत रह गई है. इस श्रेणी में फिनटेक कंपनियों का दबदबा बढ़कर 56.8 प्रतिशत हो गया है. हालांकि इस सेगमेंट में डिफॉल्ट का स्तर अभी भी अपेक्षाकृत ऊंचा बना हुआ है.

FY27 में इन क्षेत्रों पर रहेगी नजर

एलारा सिक्योरिटीज का मानना है कि NBFC सेक्टर में प्रणालीगत जोखिम फिलहाल नियंत्रित हैं और मजबूत परिसंपत्ति गुणवत्ता, पर्याप्त पूंजी तथा बेहतर उधारकर्ता प्रोफाइल इसके प्रमुख कारण हैं. हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान गोल्ड लोन और MSME ऋण ऐसे दो क्षेत्र होंगे, जिन पर सबसे अधिक नजर रहेगी. यदि सोने की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव आता है या आर्थिक परिस्थितियां बदलती हैं, तो नियामकीय निगरानी और सख्त हो सकती है.
 


5,000 करोड़ रुपये की ग्रीन स्टील योजना लाएगी केंद्र सरकार, कार्बन उत्सर्जन घटाने पर रहेगा जोर

इस योजना के तहत इस्पात उत्पादन में स्वच्छ तकनीकों और वैकल्पिक कच्चे माल के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि उद्योग के कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके.

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
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भारत के इस्पात उद्योग को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. सरकार अगले तीन महीनों में 5,000 करोड़ रुपये की ग्रीन स्टील योजना लॉन्च कर सकती है. इस योजना का उद्देश्य स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा देना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में इस्पात क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना है.

कैबिनेट की मंजूरी के लिए जाएगा प्रस्ताव

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित योजना को फिलहाल 'नेशनल स्ट्रेटेजी फॉर सस्टेनेबल सेकेंडरी स्टील' नाम दिया गया है. इसे जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा. योजना का लाभ सभी इस्पात उत्पादकों को मिलेगा, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा सेकेंडरी स्टील निर्माताओं के लिए निर्धारित किया जा सकता है, जिनका देश के कुल इस्पात उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है.

स्वच्छ तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा

इस योजना के तहत इस्पात उत्पादन में स्वच्छ तकनीकों और वैकल्पिक कच्चे माल के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि उद्योग के कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके. ऐसे समय में यह पहल सामने आई है, जब भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इस्पात उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है और साथ ही पेरिस जलवायु समझौते के तहत अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रति टन कच्चे इस्पात के उत्पादन पर लगभग 2.55 टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, जबकि वैश्विक औसत करीब 1.9 टन प्रति टन है. इससे स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में उत्सर्जन कम करने की बड़ी चुनौती मौजूद है.

सेकेंडरी स्टील उत्पादकों को मिलेगा अधिक लाभ

उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का सबसे अधिक लाभ सेकेंडरी स्टील उत्पादकों को मिलने की संभावना है, क्योंकि उनके पास आधुनिक और कम-कार्बन तकनीकों में निवेश के लिए अपेक्षाकृत सीमित पूंजी होती है. योजना के माध्यम से ऊर्जा दक्ष प्रक्रियाओं, स्वच्छ ईंधन और नई उत्पादन तकनीकों को अपनाने में सहायता दी जाएगी, जिससे उत्सर्जन घटाने के साथ उत्पादन क्षमता भी बेहतर होगी. यह पहल सरकार के ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग अभियान और टिकाऊ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा मानी जा रही है.

2030 के लक्ष्य और 2070 के नेट-जीरो मिशन पर फोकस

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक देश है और सरकार ने वर्ष 2030 तक देश की वार्षिक इस्पात उत्पादन क्षमता 300 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना भी सरकार और उद्योग दोनों के लिए बड़ी प्राथमिकता बन चुका है.

यदि इस योजना को मंजूरी मिलती है, तो यह इस्पात क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन के लिए सरकार की अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय पहलों में से एक होगी और भारत में प्रतिस्पर्धी ग्रीन स्टील इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
 


OXMIQ Labs ने जुटाए 35 मिलियन डॉलर, AI चिप आर्किटेक्चर के विस्तार को मिलेगी रफ्तार

Samsung Catalyst Fund समेत कई वैश्विक निवेशकों ने किया निवेश, अब तक 60 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल

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Thursday, 02 July, 2026
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AI और GPU आर्किटेक्चर विकसित करने वाली कंपनी OXMIQ Labs Inc. ने 35 मिलियन डॉलर की सीरीज-A फंडिंग जुटाने का ऐलान किया है. इस निवेश के साथ कंपनी अब तक कुल 60 मिलियन डॉलर की पूंजी जुटा चुकी है. इस फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी अपने लाइसेंस योग्य GPU आर्किटेक्चर OxCore के विस्तार के लिए करेगी, जिससे सेमीकंडक्टर कंपनियां और AI सिस्टम निर्माता बिना पूरा चिप प्रोग्राम विकसित किए अपनी जरूरत के मुताबिक कस्टम AI सिलिकॉन तैयार कर सकेंगे.

इस निवेश दौर का नेतृत्व Fundomo और Samsung Catalyst Fund ने संयुक्त रूप से किया. इसके अलावा MediaTek, AM Intelligence Labs, Pegatron Venture Capital, CDIB-TEN, Darwin Ventures, Morgan Creek Digital समेत कई वित्तीय और रणनीतिक निवेशकों ने भी इसमें भागीदारी की.

AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग को पूरा करने पर फोकस

कंपनी का कहना है कि AI आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण मौजूदा कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ रहा है. इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए OXMIQ ने Atoms to Agents अवधारणा पर आधारित नई GPU आर्किटेक्चर विकसित की है, जो सिलिकॉन IP, कॉन्फिगरेबल सिस्टम और सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म को एक साथ जोड़ती है.

OxCore में एक साथ तीन कंप्यूट इंजन

OXMIQ की प्रमुख तकनीक OxCore एक स्केलेबल और लाइसेंस योग्य GPU कोर है, जिसमें तीन अलग-अलग कंप्यूट इंजन एक साथ काम करते हैं.

1. CUDA®-कम्पैटिबल GPU इंजन
2. Tensor Processing Engine
3. Orchestration Engine (CPU)

कंपनी के अनुसार, यह डिजाइन डेटा ट्रांसफर को कम करता है, जिससे AI वर्कलोड के दौरान ऊर्जा दक्षता और कंप्यूटिंग प्रदर्शन बेहतर होता है. यह तकनीक छोटे AI सिस्टम से लेकर बड़े डेटा सेंटर तक आसानी से स्केल की जा सकती है. फिलहाल इसका लाइव डेमो FPGA प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है.

OxQuilt देगा कस्टम AI चिप बनाने की सुविधा

कंपनी ने OxQuilt नामक नई चिपलेट इंटीग्रेशन आर्किटेक्चर भी विकसित की है. इसकी मदद से विभिन्न प्रकार के कंप्यूट चिपलेट और मेमोरी को एक ही पैकेज में जोड़ा जा सकता है.

कंपनी का दावा है कि यह तकनीक किसी एक फाउंड्री या मेमोरी सिस्टम पर निर्भर नहीं है. ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार अलग-अलग प्रोसेस नोड, मेमोरी तकनीक, इंटरकनेक्ट स्टैंडर्ड और एडवांस पैकेजिंग विकल्प चुन सकते हैं. इससे कंपनियां कम लागत में कस्टम AI सिलिकॉन तैयार कर सकेंगी.

डेवलपर्स के लिए तैयार किया सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म

OXMIQ ने हार्डवेयर के साथ एक व्यापक सॉफ्टवेयर स्टैक भी विकसित किया है. OxPython के जरिए डेवलपर्स बिना किसी कोड में बदलाव किए मौजूदा CUDA® और PyTorch® एप्लिकेशन OxCore पर चला सकेंगे. कंपनी के मुताबिक यह प्लेटफॉर्म नए AI मॉडल्स के लिए पहले दिन से ही सपोर्ट उपलब्ध कराता है.

पूंजी बचाने वाला बिजनेस मॉडल

कंपनी का कहना है कि उसका बिजनेस मॉडल पूरी चिप बनाने के बजाय आर्किटेक्चर IP लाइसेंसिंग पर आधारित है. इससे ग्राहक परियोजनाओं के जरिए राजस्व भी मिलता है और कंपनी को बड़े पैमाने पर पूंजी खर्च करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती.

Samsung Catalyst Fund ने जताया भरोसा

Samsung Catalyst Fund के एसवीपी एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डेविड (डेडे) गोल्डश्मिट ने कहा कि OXMIQ का नया AI कोर और सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर AI वर्कलोड के लिए अधिक कुशल और कस्टम समाधान उपलब्ध कराता है. उन्होंने कहा कि कंपनी की तकनीक भविष्य के AI इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दे सकती है.

वहीं Fundomo के पार्टनर राजीव सुरती ने कहा कि OXMIQ का मॉडल ग्राहकों को चिप, मेमोरी और पैकेजिंग को अपनी जरूरत के अनुसार डिजाइन करने की स्वतंत्रता देता है, जिससे AI कंप्यूटिंग की लागत में कमी आएगी.

बोर्ड में शामिल हुए जिम केलर

कंपनी ने अपने बोर्ड और सलाहकार समूह का भी विस्तार किया है. प्रसिद्ध चिप आर्किटेक्ट और Tenstorrent के CEO जिम केलर OXMIQ के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हो गए हैं. वहीं Intel के पूर्व प्रोसेस टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. वल्लुरी (बॉब) राव कंपनी के सलाहकार बने हैं.

OXMIQ के संस्थापक एवं CEO राजा कोडुरी ने कहा कि खुली और लाइसेंस योग्य GPU आर्किटेक्चर दुनिया भर की डिजाइन टीमों को अपनी जरूरत के अनुसार AI सिलिकॉन विकसित करने की आजादी देगी. उन्होंने कहा कि AI तभी वास्तव में सभी के लिए उपयोगी बन सकता है, जब इसकी कंप्यूटिंग लागत कम हो और अधिक से अधिक कंपनियां इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकें.

भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी होगा फोकस

AM Intelligence Labs के साथ मिलकर OXMIQ भारत में 5 गीगावॉट AI फैक्ट्री विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है. इसमें से 3 गीगावॉट क्षमता नवीकरणीय ऊर्जा आधारित AI कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित की जाएगी. कंपनी ने बताया कि वह सेमीकंडक्टर कंपनियों, AI सिस्टम निर्माताओं, नियोक्लाउड कंपनियों और रोबोटिक्स क्षेत्र के संगठनों के साथ साझेदारी के लिए भी काम कर रही है.
 


SBI का बड़ा डिजिटल अपग्रेड! YONO ऐप में जुड़े AI फीचर्स, अब एक प्रक्रिया में खुलेंगे 3 अकाउंट

SBI ने YONO प्लेटफॉर्म पर 3-इन-1 डिजिटल ऑनबोर्डिंग सुविधा शुरू की है. इससे ग्राहक एक ही प्रक्रिया में सेविंग अकाउंट, डीमैट अकाउंट और SBI Cap Securities के साथ ट्रेडिंग अकाउंट खोल सकेंगे.

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Thursday, 02 July, 2026
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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने 71वें बैंक दिवस पर डिजिटल बैंकिंग को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. बैंक ने YONO ऐप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कई नए फीचर्स जोड़े हैं. अब ग्राहक एक ही डिजिटल प्रक्रिया के जरिए सेविंग अकाउंट, डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट खोल सकेंगे. इसके अलावा फाइनेंशियल हेल्थ, ग्रीन स्कोर और 24x7 AI वर्चुअल असिस्टेंट जैसी कई सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं.

एक प्रक्रिया में खुलेंगे तीन अकाउंट

SBI ने YONO प्लेटफॉर्म पर 3-इन-1 डिजिटल ऑनबोर्डिंग सुविधा शुरू की है. इसके तहत नए ग्राहक एक ही प्रक्रिया में सेविंग अकाउंट, डीमैट अकाउंट और SBI Cap Securities के साथ ट्रेडिंग अकाउंट खोल सकेंगे. इससे निवेश की शुरुआत पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगी.

बिना शाखा जाए सैलरी अकाउंट होगा अपग्रेड

बैंक ने पात्र ग्राहकों के लिए ऑनलाइन सैलरी अकाउंट अपग्रेड की सुविधा भी शुरू की है. ग्राहक अब बिना बैंक शाखा जाए अपने बचत खाते को कॉरपोरेट सैलरी अकाउंट में बदल सकेंगे. वहीं, मौजूदा सैलरी अकाउंट को भी ऑनलाइन अपग्रेड किया जा सकेगा.

अब YONO बताएगा आपका ग्रीन स्कोर

SBI ने YONO पर उद्योग में पहली बार Sustainability Journey फीचर लॉन्च किया है. इसके जरिए ग्राहक डिजिटल बैंकिंग लेनदेन से होने वाली कार्बन उत्सर्जन में बचत को ट्रैक कर सकेंगे. साथ ही हर महीने अपना ग्रीन स्कोर भी देख पाएंगे.

फाइनेंशियल फिटनेस स्कोर से मिलेगी पूरी वित्तीय तस्वीर

YONO में नया Financial Fitness Score फीचर भी जोड़ा गया है. यह ग्राहकों के बैंक खाते, लोन, निवेश, बीमा और खर्च के पैटर्न का एकीकृत विश्लेषण करेगा, जिससे वे अपनी वित्तीय स्थिति को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और भविष्य की बेहतर वित्तीय योजना बना सकेंगे.

मोबाइल पर मिलेगी पूरी ट्रेड फाइनेंस सुविधा

SBI ने YONO Business प्लेटफॉर्म पर e-Trade सुविधा का विस्तार किया है. अब कॉरपोरेट और MSME ग्राहक मोबाइल के जरिए इनलैंड, इंपोर्ट और एक्सपोर्ट ट्रेड फाइनेंस से जुड़े लेनदेन देख, ट्रैक और अधिकृत कर सकेंगे. इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और ट्रेड फाइनेंस संचालन अधिक प्रभावी बनेगा.

24x7 मदद करेगा AI वर्चुअल असिस्टेंट

बैंक ने YONO G नाम से नया एजेंटिक AI आधारित वर्चुअल असिस्टेंट भी लॉन्च किया है. यह वेब और मोबाइल दोनों प्लेटफॉर्म पर चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगा. यह ग्राहकों के बैंकिंग उत्पादों, सेवाओं और प्लेटफॉर्म से जुड़े सवालों के तुरंत जवाब देकर तेज और व्यक्तिगत सहायता प्रदान करेगा.
 


सुभाष चंद्रा से जुड़ी कंपनी को मिलेगा Zee में 20% तक हिस्सा, ₹3,143 करोड़ के वारंट इश्यू पर मुहर

कंपनी ने प्रत्येक ESOP का एक्सरसाइज प्राइस 126 रुपये तय किया है. ज़ी ने कहा कि यह योजना SEBI के शेयर-आधारित कर्मचारी लाभ संबंधी नियमों के अनुरूप लागू की जाएगी.

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Thursday, 02 July, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) के बोर्ड ने 3,143.51 करोड़ रुपये के प्रेफरेंशियल वारंट इश्यू को मंजूरी दे दी है. इस प्रस्ताव के तहत सुभाष चंद्रा से जुड़ी कंपनी सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स (Sunbright Mauritius Investments) को पूरी तरह परिवर्तनीय वारंट जारी किए जाएंगे. सभी वारंट शेयरों में बदलने पर कंपनी में उसकी हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. यह प्रस्ताव शेयरधारकों, नियामकीय संस्थाओं और अन्य आवश्यक वैधानिक मंजूरियों के अधीन रहेगा. कंपनी जल्द ही शेयरधारकों की बैठक बुलाएगी, जिसमें प्रेफरेंशियल वारंट इश्यू और ESOP 2026 दोनों प्रस्तावों पर मंजूरी ली जाएगी.

3,143 करोड़ रुपये का होगा वारंट इश्यू

कंपनी अधिकतम 24,94,85,563 पूरी तरह परिवर्तनीय वारंट जारी करेगी. प्रत्येक वारंट को 1 रुपये अंकित मूल्य वाले जी एंटरटेनमेंट के एक पूर्ण चुकता इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा. वारंट का निर्गम मूल्य 126 रुपये प्रति वारंट तय किया गया है, जिसमें 125 रुपये का प्रीमियम शामिल है. इस इश्यू का कुल आकार 3,143.51 करोड़ रुपये होगा.

सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स को वारंट मूल्य का 25 प्रतिशत (31.50 रुपये प्रति वारंट) अग्रिम जमा करना होगा, जबकि शेष 75 प्रतिशत (94.50 रुपये प्रति वारंट) राशि वारंट को शेयरों में बदलने के समय देनी होगी.

18 महीने के भीतर करना होगा कन्वर्जन

कंपनी के अनुसार, वारंट का एक या एक से अधिक चरणों में आवंटन की तारीख से 18 महीने के भीतर इक्विटी शेयरों में रूपांतरण किया जा सकेगा. यदि निर्धारित अवधि में वारंट का उपयोग नहीं किया गया, तो वह स्वतः समाप्त हो जाएगा और पहले से जमा की गई राशि जब्त कर ली जाएगी.

20% तक पहुंच सकती है हिस्सेदारी

जी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, फिलहाल सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स की कंपनी में कोई हिस्सेदारी नहीं है. हालांकि, वारंट के पूर्ण रूपांतरण के बाद कंपनी में उसकी हिस्सेदारी पूरी तरह डाइल्यूटेड आधार पर 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.

यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे ज़ी एंटरटेनमेंट में प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी बढ़ाने की एक नई कोशिश दिखाई देती है. इससे पहले भी विभिन्न रिपोर्टों में सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स को ज़ी के संस्थापक **सुभाष चंद्रा** और उनके परिवार से जुड़ा प्रमोटर समूह बताया गया है.

ESOP 2026 को भी मिली मंजूरी

वारंट इश्यू के साथ-साथ बोर्ड ने ESOP 2026 योजना को भी मंजूरी दी है, जिसे लागू करने के लिए शेयरधारकों की स्वीकृति आवश्यक होगी. इस योजना के तहत कर्मचारियों को अधिकतम 3,74,22,835 कर्मचारी स्टॉक विकल्प (ESOPs) दिए जा सकेंगे. प्रत्येक विकल्प को 1 रुपये अंकित मूल्य वाले एक इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा.

कंपनी ने प्रत्येक ESOP का एक्सरसाइज प्राइस 126 रुपये तय किया है. ज़ी ने कहा कि यह योजना SEBI के शेयर-आधारित कर्मचारी लाभ संबंधी नियमों के अनुरूप लागू की जाएगी.