नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी को लेकर बड़ा फैसला लिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने एक अहम एलान किया है जो कि इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा है. निफ्टी ने जानकारी दी है कि उसने एक्सपायरी के दिन में बदलाव किया है. संशोधन के अनुसार अब सभी निफ्टी F&O कॉन्ट्रैक्ट की एक्सापयरी गुरुवार की बजाय सोमवार को होगी. वीकली और महीने की एक्सपायरी के बदलाव 4 अप्रैल से लागू हो जाएंगे.
4 अप्रैल से होगा लागू
एनएसई (NSE) की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया कि निफ्टी (Nifty), बैंक निफ्टी (Bank Nifty), फिननिफ्टी (FinNifty), निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट (Nifty Midcap Select) और निफ्टी नेक्स्ट 50 (Nifty Next50) के एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी हर महीने के आखिरी सोमवार को होगी. एनएसई ने कहा कि यह फैसला 4 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होगा.
इसके अलावा एनएसई की ओर से निफ्टी की वीकली एक्सपायरी को गुरुवार से शिफ्ट कर सोमवार कर दिया गया है. साथ ही एक्सचेंज ने निफ्टी के तिमाही और अर्धवार्षिक कॉन्ट्रैक्ट को भी गुरुवार से शिफ्ट कर सोमवार कर दिया है. मौजूदा समय एनएसई के सभी इंडेक्स के एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी गुरुवार को होती है.
इसके अलावा एक्सचेंज ने निफ्टी (Nifty), फिननिफ्टी (FinNifty), निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट (Nifty Midcap Select) और निफ्टी नेक्स्ट 50 (Nifty Next50) के मासिक और तिमाही कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी को शिफ्ट कर सोमवार को कर दिया है, जो कि मौजूदा समय में गुरुवार को होती है.
इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स में कोई बदलाव नहीं
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने कहा कि इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स के कॉन्ट्रैक्ट्स में कोई अन्य बदलाव नहीं किया गया है. साथ ही एक्सचेंज ने कहा कि सेटेलमेंट शेड्यूल क्लियरिंग कॉरपोरेशन द्वारा अलग से सूचित किया जाएगा.
यह अत्याधुनिक मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी शिवपुरी में स्थापित होगी, इस परियोजना से 5,000 रोजगार और 50 से अधिक MSME को बढ़ावा मिलेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देने की दिशा में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी में दक्षिण एशिया के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के मिसाइल इकोसिस्टम की आधारशिला रखी है. लगभग ₹2,500 करोड़ के निवेश वाली यह परियोजना भारत के निजी रक्षा उद्योग के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है. इस अत्याधुनिक यूनिट में कच्चे माल से लेकर मिशन के लिए तैयार मिसाइल सिस्टम तक का पूरा निर्माण एक ही परिसर में किया जाएगा.
शिवपुरी बनेगा देश का नया मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग हब
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में स्थापित होने वाली यह इंटीग्रेटेड मिसाइल फैसिलिटी भारत के निजी रक्षा क्षेत्र की पहली ऐसी परियोजना होगी, जहां मिसाइल निर्माण की पूरी वैल्यू चेन एक ही छत के नीचे मौजूद होगी. इस परियोजना की आधारशिला मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्य के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में रखी गई.
₹2,500 करोड़ का निवेश, 5,000 लोगों को मिलेगा रोजगार
अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस अगले तीन वर्षों में इस परियोजना पर ₹2,500 करोड़ का निवेश करेगी. कंपनी के अनुसार, परियोजना के शुरू होने के बाद लगभग 5,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा. साथ ही 50 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनेंगे.
मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइलों का होगा निर्माण
शिवपुरी परिसर में मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों का निर्माण किया जाएगा. यहां कंपोजिट प्रोपेलेंट, TNT और अन्य विस्फोटक ग्रेड सामग्री के उत्पादन की भी सुविधा होगी. इससे देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूती मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी.
ग्वालियर-शिवपुरी मिलकर बनाएंगे डिफेंस क्लस्टर
अडानी एंटरप्राइजेज के निदेशक जीत अडानी ने कहा कि ग्वालियर और शिवपुरी की इकाइयां मिलकर मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करेंगी. वर्तमान में ग्वालियर स्थित यूनिट में लाइट मशीन गन, असॉल्ट राइफल और कार्बाइन का निर्माण किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कंपनी की लाइट मशीन गन परियोजना के तहत भारतीय सशस्त्र बलों को 2,000 हथियार निर्धारित समय से 11 महीने पहले उपलब्ध कराए जा चुके हैं.
मध्य प्रदेश में बढ़ रहा अडानी ग्रुप का निवेश
शिवपुरी परियोजना अडानी ग्रुप की मध्य प्रदेश में दीर्घकालिक निवेश रणनीति का हिस्सा है. इससे पहले समूह ने राज्य में हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज, सीमेंट, माइनिंग, स्मार्ट मीटर और थर्मल पावर परियोजनाओं में ₹1.10 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा की थी. इन परियोजनाओं के माध्यम से वर्ष 2030 तक करीब 1.2 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है.
कई जिलों में चल रही हैं बड़ी परियोजनाएं
जीत अडानी ने बताया कि समूह कटनी जिले के अमेथा और कैमोर सीमेंट संयंत्रों में ₹4,000 करोड़ से अधिक का निवेश कर चुका है. इसके अलावा अडानी पावर मध्य प्रदेश को 1,200 मेगावाट बिजली की आपूर्ति कर रही है और इसे बढ़ाकर 5,600 मेगावाट करने की दिशा में काम चल रहा है. धार, रतलाम और उज्जैन में विंड एनर्जी परियोजनाएं, उज्जैन में प्रस्तावित सीमेंट प्लांट और गुना में ₹1,060 करोड़ की सीमेंट परियोजना भी समूह की प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं.
DRDO और सेना के साथ मिलकर होगा विकास
कंपनी ने कहा कि वह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय सशस्त्र बलों के साथ मिलकर अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास पर काम कर रही है. शिवपुरी की नई मिसाइल फैसिलिटी भारत को मिसाइल निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. इससे विदेशी रक्षा आयात पर निर्भरता घटेगी और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा.
शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 261.79 अंक चढ़कर 77,763.91 पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 95.15 अंक की बढ़त के साथ 24,270.85 पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया था. आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी के दम पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE)
सेंसेक्स 261.79 अंक चढ़कर 77,763.91 पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 95.15 अंक की बढ़त के साथ 24,270.85 पर बंद हुआ. अब सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बाजार की शुरुआत सुस्त रहने के संकेत मिल रहे हैं. GIFT Nifty लगभग सपाट कारोबार कर रहा है, जबकि एशियाई बाजारों में हल्की मजबूती देखने को मिल रही है.
शुक्रवार को बाजार में रही आईटी शेयरों की चमक
शुक्रवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स 600 अंक तक उछला था. HCL Tech, टेक महिंद्रा, इंफोसिस और TCS जैसे आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली. सेंसेक्स के 30 में से 24 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. वहीं, निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी हरे निशान में रहे. हालांकि बैंकिंग और पीएसयू बैंक शेयरों में अपेक्षाकृत कमजोरी रही.
आज GIFT Nifty से सपाट शुरुआत के संकेत
सोमवार सुबह GIFT Nifty 24,354 के आसपास लगभग सपाट कारोबार करता दिखा. इससे संकेत मिल रहे हैं कि भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सीमित दायरे में या हल्की बढ़त के साथ हो सकती है. पिछले तीन सत्रों की तेजी के बाद निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं.
एशियाई बाजारों में तेजी
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन अधिकांश एशियाई बाजारों में मजबूती रही. दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 0.62 प्रतिशत और चीन का CSI 300 लगभग 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा. तकनीकी शेयरों में खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से एशियाई बाजारों को समर्थन मिला.
72 डॉलर से नीचे फिसला ब्रेंट क्रूड
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 72 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है और यह करीब 71.78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. OPEC+ देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति की उम्मीद से तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. कच्चे तेल की नरमी भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती है.
सोना-चांदी में बढ़ी चमक
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है. गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 2.11 प्रतिशत और सिल्वर फ्यूचर्स में 3.56 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई.
फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर रहेगी नजर
इस सप्ताह बाजार की सबसे बड़ी नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जून बैठक के मिनट्स पर रहेगी. निवेशक इससे ब्याज दरों और आगे की मौद्रिक नीति के संकेत तलाशेंगे. इसका असर वैश्विक शेयर बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़े अहम घटनाक्रम निवेशकों की नजर में रहेंगे. HDFC Bank, Yes Bank, Bandhan Bank, RBL Bank, L&T Finance और CreditAccess Grameen ने पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट जारी किए हैं, जिनमें लोन और डिपॉजिट ग्रोथ पर बाजार की नजर रहेगी. वहीं, PB Fintech में Temasek की सहायक कंपनी Macritchie Investments ने 2.2% हिस्सेदारी बेच दी है. Shakti Pumps को महाराष्ट्र में 353.89 करोड़ रुपये का सोलर पंप ऑर्डर मिला है, जबकि Fortis Healthcare ओडिशा में 300 बेड के मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए Dion Group के साथ साझेदारी करेगी. Manappuram Finance के CEO दीपक रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया है. इसके अलावा ICICI Prudential Life Insurance के प्रमोटर वर्गीकरण में बदलाव की योजना, Godrej Consumer Products और Dabur India के मजबूत तिमाही आउटलुक तथा Vedanta Oil & Gas के उत्पादन में गिरावट जैसे घटनाक्रम भी संबंधित शेयरों में हलचल पैदा कर सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
जिष्णु सेन को उन चुनिंदा मार्केटिंग नेताओं में गिना जाता था जिन्होंने पारंपरिक ब्रांड निर्माण और आधुनिक डिजिटल मार्केटिंग, रिटेल तथा कंज्यूमर-टेक ग्रोथ के बीच सफल संतुलन स्थापित किया. उनका निधन भारतीय विज्ञापन और मार्केटिंग उद्योग के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के विज्ञापन और मार्केटिंग क्षेत्र के दिग्गज पेशेवर जिष्णु सेन का रविवार तड़के निधन हो गया. वह ग्रे इंडिया (Grey India) के पूर्व प्रेसिडेंट और सीईओ रह चुके थे. उनके निधन से विज्ञापन, ब्रांड रणनीति और मार्केटिंग उद्योग में शोक की लहर है.
जिष्णु सेन के निधन की जानकारी उनके चचेरे भाई शुभो सेनगुप्ता ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की. उन्होंने बताया कि सेन ने विज्ञापन और मार्केटिंग जगत में लंबा और प्रतिष्ठित करियर बनाया तथा बाद में बेंगलुरु में बस गए थे. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों से वह एक बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जीवन के प्रति अपना उत्साह और सकारात्मकता बनाए रखी.
शुभो सेनगुप्ता ने भावुक संदेश में लिखा कि उन्हें आज भी वह शर्मीला बच्चा याद है, जिसने कई दशक पहले कोलकाता में उनकी मां से आइसक्रीम दिलाने की जिद की थी. उन्होंने अंत में "ॐ शांति" लिखकर श्रद्धांजलि अर्पित की.
तीन दशक से अधिक का शानदार करियर
जिष्णु सेन का करियर तीन दशकों से अधिक समय तक फैला रहा. इस दौरान उन्होंने एजेंसी लीडरशिप, ब्रांड रणनीति, रिटेल मार्केटिंग और ग्रोथ एडवाइजरी जैसे कई अहम क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत JWT से की. इसके बाद वह Young & Rubicam से जुड़े, जहां न्यूयॉर्क में रहते हुए उन्होंने Colgate Asia-Pacific के कारोबार का नेतृत्व किया.
साल 2007 में उन्होंने Grey India का दामन थामा और बाद में इसके प्रेसिडेंट एवं सीईओ बने. उनके नेतृत्व में कंपनी ने उल्लेखनीय विकास किया और डिजिटल मार्केटिंग, एक्टिवेशन तथा शॉपर मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का विस्तार किया.
कई बड़ी कंपनियों में निभाई अहम जिम्मेदारियां
एजेंसी जगत में सफल पारी के बाद जिष्णु सेन कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े. उन्होंने Essar Telecom Retail में डायरेक्टर–ब्रांड स्ट्रेटेजी और बाद में Big Bazaar में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) के रूप में कार्य किया. हाल के वर्षों में वह ग्रोथ और मार्केटिंग सलाहकार के रूप में सक्रिय रहे. उन्होंने Porter, Bergner India, DealShare और L'amar जैसी कंपनियों को ब्रांड निर्माण और विकास रणनीति पर मार्गदर्शन दिया.
कई प्रतिष्ठित ब्रांड्स के साथ किया काम
अपने लंबे करियर में जिष्णु सेन ने Future Group, Pepsi, GSK, Yum Foods, Colgate Palmolive, Britannia, Reliance Telecom और Ferrero सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ काम किया.
उद्योग के लिए अपूरणीय क्षति
जिष्णु सेन को उन चुनिंदा मार्केटिंग नेताओं में गिना जाता था जिन्होंने पारंपरिक ब्रांड निर्माण और आधुनिक डिजिटल मार्केटिंग, रिटेल तथा कंज्यूमर-टेक ग्रोथ के बीच सफल संतुलन स्थापित किया. उनका निधन भारतीय विज्ञापन और मार्केटिंग उद्योग के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है.
यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और सीमा-पार निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) 4 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है. इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और स्थिर कारोबारी माहौल उपलब्ध कराना, निवेश को बढ़ावा देना और आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देना है. वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते पर 8 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे और अब यह आधिकारिक रूप से लागू हो गया है.
निवेशकों को मिलेगा सुरक्षित और पारदर्शी माहौल
इस समझौते का उद्देश्य भारत और इजरायल के निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य निवेश ढांचा उपलब्ध कराना है. इसके साथ ही यह उनके निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, जबकि सरकारों को सार्वजनिक हित से जुड़े वैध नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार भी बनाए रखेगा.
सरकार का कहना है कि यह समझौता आधुनिक निवेश प्रशासन के सिद्धांतों पर आधारित है, जो निवेशकों की सुरक्षा और देशों की नीतिगत संप्रभुता के बीच संतुलन स्थापित करता है.
बढ़ेगा द्विपक्षीय निवेश
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि BIA लागू होने से दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह में वृद्धि होगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा. इससे विभिन्न क्षेत्रों में सीमा-पार निवेश गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत और इजरायल के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे.
कई क्षेत्रों में पहले से मजबूत है साझेदारी
पिछले कुछ वर्षों में भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ा है. दोनों देश प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, रक्षा और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश समझौते के लागू होने से दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को नई गति मिलेगी और निवेशकों को एक स्थिर कानूनी ढांचा उपलब्ध होगा, जिससे भविष्य में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे.
केंद्रीय बैंक ने पाया कि बैंक ने कुछ लोन खातों में निर्धारित दर से अधिक ब्याज वसूला और KYC से जुड़े नियमों का भी पालन नहीं किया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग नियमों के उल्लंघन पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. केंद्रीय बैंक ने ग्राहकों से अधिक ब्याज वसूलने और KYC नियमों का पालन नहीं करने के मामले में बैंक पर 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके अलावा GIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर भी नियामकीय मानकों का उल्लंघन करने पर 3.1 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है.
लोन ग्राहकों से तय दर से अधिक ब्याज वसूला
RBI की जांच में सामने आया कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने कुछ लोन खातों में ग्राहकों से निर्धारित ब्याज दर से अधिक राशि वसूली. यह 'उधार देने वालों के लिए उचित व्यवहार संहिता' (Fair Practices Code) का उल्लंघन माना गया. नियामक के मुताबिक, बैंक ग्राहकों से तय शर्तों के अनुसार ही ब्याज वसूल सकता है और इससे अधिक वसूली बैंकिंग नियमों के खिलाफ है.
KYC नियमों में भी मिली लापरवाही
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि बैंक कई ग्राहकों की KYC जानकारी तय समयसीमा के भीतर सेंट्रल KYC रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री (CKYCR) पर अपलोड नहीं कर पाया. RBI के अनुसार, यह प्रक्रिया सभी बैंकों के लिए अनिवार्य है और इसका उद्देश्य ग्राहकों के रिकॉर्ड को सुरक्षित एवं अद्यतन रखना है.
ऑडिट के बाद हुई कार्रवाई
RBI ने 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के आधार पर बैंक का निरीक्षण किया था. जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. बैंक की ओर से दिए गए लिखित जवाब, अतिरिक्त दस्तावेज और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद भी RBI संतुष्ट नहीं हुआ. इसके बाद 30 जून 2026 के आदेश के तहत बैंक पर 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.
GIC हाउसिंग फाइनेंस पर भी लगा जुर्माना
नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) की जांच में पाया गया कि GIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड खातों की जोखिम श्रेणी की हर छह महीने में समीक्षा करने की अनिवार्य व्यवस्था का पालन नहीं कर रही थी. इस उल्लंघन के चलते कंपनी पर **3.1 लाख रुपये** का अर्थदंड लगाया गया.
ग्राहकों के हितों की सुरक्षा पर RBI का जोर
RBI ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता, नियामकीय अनुपालन और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है. केंद्रीय बैंक लगातार वित्तीय संस्थानों की निगरानी कर रहा है ताकि नियमों के उल्लंघन पर समय रहते कार्रवाई की जा सके.
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन सभी प्रस्तावों का उद्देश्य सशस्त्र बलों की युद्धक क्षमता को मजबूत करना है. साथ ही, इससे देश में विकसित हो रही अत्याधुनिक स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास, उत्पादन और सैन्य सेवाओं में शामिल किए जाने को भी प्रोत्साहन मिलेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की सैन्य ताकत को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में लगभग 52,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रस्तावों में थल सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अत्याधुनिक स्वदेशी रक्षा प्रणालियों और तकनीकों की खरीद शामिल है, जिससे तीनों सेनाओं की युद्धक क्षमता और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
सेना को मिलेंगी अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियां
मंजूर किए गए प्रमुख प्रस्तावों में 'आकाश तरंग' इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली (Electronic Warfare System) की खरीद शामिल है, जिससे सशस्त्र बलों की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता को मजबूती मिलेगी. इसके अलावा, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM), मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) और वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है. इन प्रणालियों से भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी.
टैंकों और ड्रोन क्षमता को भी मिलेगा बढ़ावा
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम तथा जेट-आधारित कामिकाज़े ड्रोन सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी है. यह निर्णय आधुनिक युद्धक्षेत्र में उभरते खतरों से निपटने और स्वायत्त (Autonomous) एवं सटीक हमले (Precision Strike) की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
नौसेना की समुद्री निगरानी होगी और मजबूत
नौसेना के लिए परिषद ने मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइंस (MIGM) और नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS) की खरीद को मंजूरी दी है. इनसे समुद्री निगरानी, टोही अभियानों और पानी के भीतर युद्ध संचालन (Underwater Warfare) की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा.
इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन तकनीक के परीक्षण की सुविधा बनेगी
DAC ने इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड-बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF) स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है. इससे अगली पीढ़ी की नौसैनिक प्रणोदन (Naval Propulsion) तकनीकों के विकास और परीक्षण को गति मिलेगी.
लंबे समय तक निगरानी करने वाला सिस्टम भी होगा शामिल
परिषद ने फिक्स्ड-विंग हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) प्रणाली की खरीद को भी स्वीकृति दी है. यह प्रणाली लंबे समय तक लगातार खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी (Surveillance) और टोही (Reconnaissance) अभियानों को संचालित करने में सक्षम होगी.
स्वदेशी रक्षा तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन सभी प्रस्तावों का उद्देश्य सशस्त्र बलों की युद्धक क्षमता को मजबूत करना है. साथ ही, इससे देश में विकसित हो रही अत्याधुनिक स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास, उत्पादन और सैन्य सेवाओं में शामिल किए जाने को भी प्रोत्साहन मिलेगा.
इस बैठक में स्टील आयात से जुड़े विभिन्न नियामकीय और प्रक्रियागत मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
स्टील आयात से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने उद्योग जगत के साथ सीधा संवाद शुरू करने का फैसला किया है. इस्पात मंत्रालय 9 जुलाई 2026 को ओपन हाउस आयोजित करेगा, जहां कंपनियां और उद्योग संगठन स्टील इम्पोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम (SIMS), SARAL SIMS और क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) से जुड़े मुद्दे सीधे मंत्रालय के अधिकारियों के सामने रख सकेंगे.
स्टील आयात से जुड़े मुद्दों पर उद्योग से संवाद करेगा इस्पात मंत्रालय
स्टील आयात प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. इस्पात मंत्रालय ने 9 जुलाई 2026 को उद्योग जगत के साथ एक ओपन हाउस आयोजित करने का फैसला किया है. इस बैठक में स्टील आयात से जुड़े विभिन्न नियामकीय और प्रक्रियागत मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
यह बैठक नई दिल्ली के नेताजी नगर स्थित GPOA-3 भवन के तीसरे तल पर बने स्टील रूम में सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित होगी. मंत्रालय के अनुसार, इसका उद्देश्य उद्योग जगत को अपनी समस्याएं सीधे अधिकारियों के सामने रखने और समाधान प्राप्त करने का अवसर देना है.
SIMS, SARAL SIMS और QCO पर होगी चर्चा
ओपन हाउस के दौरान कंपनियां और उद्योग संगठन स्टील इम्पोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम (SIMS), SARAL SIMS और क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) से जुड़े मुद्दों, आवेदन प्रक्रियाओं और छूट (Exemption) संबंधी समस्याओं पर अपनी बात रख सकेंगे. मंत्रालय इन विषयों पर आवश्यक स्पष्टीकरण भी देगा.
6 जुलाई तक कराना होगा पंजीकरण
बैठक में भाग लेने के इच्छुक संगठनों को 6 जुलाई 2026 को शाम 4 बजे तक (tech-steel@nic.in) पर ईमेल भेजकर पंजीकरण कराना होगा. पंजीकरण के दौरान कंपनी या संगठन का नाम, उद्योग क्षेत्र (जैसे ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, टेलीकॉम या रक्षा), समस्या का विवरण, SIMS, SARAL SIMS या QCO से संबंधित आवेदन का संदर्भ, 50 शब्दों में मुद्दे का संक्षिप्त विवरण, प्रतिभागी का पद और संपर्क जानकारी देना अनिवार्य होगा.
प्रत्येक संगठन से केवल एक प्रतिनिधि को मिलेगी अनुमति
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक संगठन से केवल एक प्रतिनिधि को बैठक में शामिल होने की अनुमति होगी. तीसरे पक्ष के प्रतिनिधित्व की अनुमति नहीं होगी और बिना पूर्व पंजीकरण के आने वाले प्रतिभागियों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा. पंजीकरण के बाद समय स्लॉट की जानकारी ईमेल के माध्यम से भेजी जाएगी.
आयात प्रक्रिया को आसान बनाने पर सरकार का जोर
सरकार स्टील आयात से जुड़े नियामकीय ढांचे को अधिक प्रभावी और उद्योग हितैषी बनाने पर काम कर रही है. इसी कड़ी में आयोजित यह ओपन हाउस उद्योग जगत और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करेगा तथा SIMS पंजीकरण, SARAL SIMS प्रक्रियाओं और QCO छूट से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान का मंच प्रदान करेगा.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भरोसा जताया है कि वस्तु निर्यात में 16-17 फीसदी और सेवा निर्यात में 10-11 फीसदी की वृद्धि हो सकती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत चालू वित्त वर्ष में निर्यात के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि सरकार को इस साल वस्तु निर्यात में 16-17 फीसदी और सेवा निर्यात में 10-11 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद है. यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो वित्त वर्ष 2027 में भारत का वस्तु निर्यात करीब 515 अरब डॉलर और सेवा निर्यात लगभग 470 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
₹1 लाख करोड़ डॉलर के निर्यात लक्ष्य पर सरकार का फोकस
नई दिल्ली में आयोजित व्यापार बोर्ड (BOT) की बैठक में सरकार, उद्योग संगठनों और निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रतिनिधियों ने निर्यात बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की. बैठक का प्रमुख उद्देश्य भारत को कुल 1 लाख करोड़ डॉलर के निर्यात लक्ष्य के करीब पहुंचाने की दिशा में ठोस कदम तय करना था.
टेक्सटाइल और मेडिकल सेक्टर पर विशेष जोर
सरकार ने सतत टेक्सटाइल, टेक्निकल टेक्सटाइल, परफॉर्मेंस अपैरल और मेडिकल टेक्सटाइल जैसे उभरते क्षेत्रों को निर्यात वृद्धि का प्रमुख आधार माना है. इसके साथ ही राज्यों की विनिर्माण क्षमता के अनुरूप उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर भी जोर दिया गया.
FTA का पूरा लाभ उठाने की तैयारी
बैठक में मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सरकार के पांच-सूत्रीय फ्रेमवर्क पर चर्चा हुई. इस रणनीति के तहत उन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने पर फोकस रहेगा, जहां भारत पहले से मजबूत स्थिति में है. साथ ही नए उत्पादों का विविधीकरण, गैर-शुल्क बाधाओं को कम करना और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों का समाधान भी प्राथमिकता में रहेगा.
डंपिंग पर सख्ती, घरेलू उद्योग को मिलेगा सहारा
सरकार आयातित सस्ते उत्पादों की डंपिंग पर रोक लगाने के लिए भी कदम तेज करेगी. इससे घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी और भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. भारत इस वर्ष कम से कम दो नए मुक्त व्यापार समझौते लागू करने की तैयारी में भी है, जिससे निर्यातकों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलने की उम्मीद है.
सेवा क्षेत्र के साथ-साथ जून में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि भी धीमी रही. इसके चलते HSBC इंडिया कंपोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स मई के 59.3 से घटकर जून में 57.7 पर आ गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के सेवा क्षेत्र (Services Sector) की विकास रफ्तार जून 2026 में कुछ धीमी पड़ गई है. HSBC इंडिया सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) मई के 58.8 से घटकर जून में 57.4 पर आ गया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे निचला स्तर है. हालांकि यह आंकड़ा अब भी 50 से ऊपर है, जो सेवा क्षेत्र में विस्तार जारी रहने का संकेत देता है. लेकिन घरेलू मांग में नरमी के कारण कारोबारी गतिविधियों की गति कम हुई है.
घरेलू मांग में कमजोरी का असर
HSBC की ताजा सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, जून में नए कारोबार की वृद्धि नवंबर 2023 के बाद सबसे धीमी रही. इसकी मुख्य वजह देश के भीतर उपभोक्ता और कारोबारी खर्च में आई कमी रही. दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिलने वाले ऑर्डर मजबूत बने रहे, जिससे घरेलू मांग की कमजोरी का कुछ हद तक असर कम हुआ.
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों की रफ्तार घटी
सेवा क्षेत्र के साथ-साथ जून में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि भी धीमी रही. इसके चलते HSBC इंडिया कंपोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स मई के 59.3 से घटकर जून में 57.7 पर आ गया. इससे संकेत मिलता है कि निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां अभी भी विस्तार कर रही हैं, लेकिन उनकी गति पहले की तुलना में कम हो गई है.
रोजगार बढ़ा, लेकिन भर्ती की रफ्तार घटी
रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों ने जून में नई भर्तियां जारी रखीं, लेकिन भर्ती की गति पहले के मुकाबले धीमी रही. कारोबारियों ने भविष्य को लेकर सतर्क रुख अपनाते हुए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने में संयम दिखाया.
साथ ही कंपनियों की इनपुट लागत में वृद्धि दर्ज की गई, जिसके कारण कई सेवा प्रदाताओं ने अपनी सेवाओं के दाम बढ़ाए. हालांकि आउटपुट कीमतों में बढ़ोतरी का स्तर पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रहा.
HSBC की मुख्य अर्थशास्त्री ने क्या कहा
HSBC इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि जून के PMI आंकड़े बताते हैं कि घरेलू मांग में कमजोरी का असर सेवा क्षेत्र की गतिविधियों पर पड़ा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार समर्थन दे रही है. उन्होंने कहा कि नए कारोबार की धीमी वृद्धि का असर रोजगार सृजन पर भी देखने को मिला.
आगे भी विकास जारी रहने की उम्मीद
धीमी रफ्तार के बावजूद कंपनियों का कारोबारी भरोसा सकारात्मक बना हुआ है. व्यवसायों को उम्मीद है कि नए ग्राहकों, बेहतर मार्केटिंग रणनीतियों और अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों के चलते आने वाले एक वर्ष में मांग मजबूत होगी.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सेवा क्षेत्र अभी भी विकास की राह पर है, लेकिन हाल के महीनों में तेज वृद्धि के बाद अब इसकी गति सामान्य होती दिखाई दे रही है.
घरेलू खपत पर रहेगी नजर
जून के PMI आंकड़े संकेत देते हैं कि आने वाले महीनों में घरेलू खपत भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक होगी. फिलहाल मजबूत निर्यात मांग ने सेवा क्षेत्र को सहारा दिया है, लेकिन दीर्घकालिक गति बनाए रखने के लिए घरेलू खर्च में स्थायी सुधार आवश्यक होगा.
भारत के विझिंजम बंदरगाह को अडानी और MSC के बीच एक सामान्य लेनदेन के रूप में प्रस्तुत किया गया, लेकिन दस्तावेज कहीं अधिक बड़ी कहानी बताते हैं. 'उस गुप्त हाथ के पीछे का साम्राज्य' का दूसरा भाग
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
2025 की शुरुआत में वॉशिंगटन ने यह तय कर लिया कि पनामा नहर पर चीन का प्रभाव अब अस्वीकार्य हो चुका है.
खुद नहर नहीं, 1999 से उसका संचालन पनामा कर रहा है और गंभीरता से कोई भी इसे बदलने का प्रस्ताव नहीं दे रहा था.
निशाना थे वे दो बंदरगाह जो नहर के प्रवेश द्वारों की रक्षा करते हैं, बाल्बोआ और क्रिस्टोबाल, जिनका संचालन दो दशकों से अधिक समय से हांगकांग की CK Hutchison कर रही थी.
जो इन बंदरगाहों को नियंत्रित करता है, वही तय करता है कि किन जहाजों को प्राथमिकता मिलेगी, माल कितनी तेजी से निकलेगा और प्रभावी रूप से दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक धमनियों में से एक पर किसका हाथ रहेगा.
वॉशिंगटन ने नौसेना नहीं भेजी.
उसने पूंजी भेजी.
राष्ट्रपति ट्रंप के सीधे दबाव में, मार्च 2025 में Hutchison ने अपने पूरे वैश्विक पोर्ट कारोबार का 80 प्रतिशत हिस्सा बेचने पर सहमति जताई, जिसमें 23 देशों के 43 टर्मिनल शामिल थे, जिनमें पनामा के दोनों बंदरगाह भी थे. यह सौदा लगभग 22.8 अरब डॉलर का बताया गया.
इस कंसोर्टियम का नेतृत्व ब्लैकरॉक कर रहा था.
एक वर्ष से कुछ अधिक समय बाद, यही वित्तीय संरचना ऐसी जगह दिखाई दी जहां किसी की नजर नहीं थी, भारत के दक्षिणी तट, केरल में 1.397 अरब डॉलर के एक बंदरगाह सौदे के भीतर.
अडानी के 1.4 अरब डॉलर के विझिंजम पोर्ट सौदे के माध्यम से.
पनामा की चाल
बीजिंग ने Hutchison की इस बिक्री को आसानी से स्वीकार नहीं किया.
चीन ने संकेत दिया कि वह इस सौदे को तभी मंजूरी देगा जब उसकी सरकारी शिपिंग कंपनी COSCO को इस कंसोर्टियम में 20–30 प्रतिशत हिस्सेदारी और उन बंदरगाहों पर वीटो अधिकार दिए जाएं जिनमें चीन की सबसे अधिक रुचि है.
बातचीत ठहर गई.
लेकिन फिर पनामा के अपने सर्वोच्च न्यायालय ने एक अलग रास्ते से वॉशिंगटन को वही परिणाम दे दिया जिसकी उसे तलाश थी.
2026 की शुरुआत में अदालत ने फैसला सुनाया कि बाल्बोआ और क्रिस्टोबाल बंदरगाहों पर Hutchison को 1997 में दिया गया मूल कंसेशन असंवैधानिक था और उसे पूरी तरह निरस्त कर दिया.
इसके बाद अंतरिम नियंत्रण, अधिकतम 18 महीनों के लिए, Hutchison की दो प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को सौंप दिया गया.
बाल्बोआ APM Terminals को मिला, जो Maersk का पोर्ट व्यवसाय है.
क्रिस्टोबाल TiL को मिला.
TiL, Mediterranean Shipping Company (MSC) का पोर्ट व्यवसाय है.
और यह संयुक्त रूप से ब्लैकरॉक का भी है, उस लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी और वीटो अधिकारों के माध्यम से, जो ब्लैकरॉक को 2024 में 12.5 अरब डॉलर में Global Infrastructure Partners का अधिग्रहण करने के बाद विरासत में मिले.
पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी मीडिया ने सीधी भाषा में लिखा कि वॉशिंगटन ने पनामा नहर को औपचारिक रूप से छुए बिना ही उसके प्रवेश द्वारों को फिर से अमेरिकी प्रभाव के दायरे में लाने का तरीका खोज लिया था.
दोनों घटनाओं के ऊपर अब एक ही बोर्ड सीट मौजूद है.
Adebayo Ogunlesi, Global Infrastructure Partners (GIP) के चेयरमैन, ब्लैकरॉक के भी निदेशक हैं और TiL के भी निदेशक हैं.
अब एक व्यक्ति का मत पनामा नहर के प्रवेश द्वारों पर होने वाली गतिविधियों पर भी प्रभाव डालता है और विझिंजम में होने वाली गतिविधियों पर भी.
इसका अर्थ यह है कि अब वही स्वामित्व संरचना एक साथ दो पूरी तरह अलग समुद्री रणनीतिक बिंदुओं के भीतर मौजूद है, एक, जो पनामा के माध्यम से अटलांटिक और प्रशांत महासागर तक पहुंच को नियंत्रित करता है, और दूसरा, जो अरब सागर में भारत के अपने रणनीतिक समुद्री व्यापारिक गलियारे के दक्षिणी छोर पर स्थित है.
पिछले सप्ताह तक ये दोनों पूरी तरह अलग-अलग कहानियां थीं.
विझिंजम का यह सौदा चुपचाप इन्हें आपस में जोड़ गया.
पैटर्न
पनामा कोई अकेला मामला नहीं है.
Global Infrastructure Partners के अधिग्रहण के माध्यम से ब्लैकरॉक अब लंदन, सिडनी और कुआलालंपुर के हवाई अड्डों, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के रेल नेटवर्क, डेटा सेंटर अवसंरचना, यूरोप में लाखों परिवारों को सेवा देने वाली एक जल उपयोगिता कंपनी और ऑस्ट्रेलिया से लेकर यूनाइटेड किंगडम तक फैली प्रमुख बंदरगाह परिसंपत्तियों में मौजूद है.
इसका वास्तविक पैमाना तब तक समझ में नहीं आता, जब तक आप पर्याप्त दूरी बनाकर पूरी तस्वीर को एक साथ न देखें.
वही संस्था, जो लाखों सामान्य निवेशकों की सेवानिवृत्ति की बचत का प्रबंधन करती है, अब प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उन हवाई अड्डों के नीचे मौजूद है, जहां से लोग यात्रा करते हैं. उन रेल प्रणालियों के नीचे, जिनसे लोग रोज़ सफर करते हैं. उन बंदरगाहों के नीचे, जहां वैश्विक माल उतरता है. उन डेटा सेंटरों के नीचे, जहां इंटरनेट का भौतिक अस्तित्व टिका है. उन पाइपलाइनों के नीचे, जो ऊर्जा पहुंचाती हैं. और उन जल उपयोगिता प्रणालियों के नीचे, जो पूरे शहरों को पानी उपलब्ध कराती हैं.
इन व्यवस्थाओं पर सरकारें अब भी संप्रभु दिखाई देती हैं.
लेकिन इन व्यवस्थाओं के नीचे मौजूद स्वामित्व तेजी से कहीं और केंद्रित होता जा रहा है.
सरकारें अब भी इन व्यवस्थाओं पर संप्रभु दिखाई देती हैं.
लेकिन इनके नीचे का स्वामित्व लगातार किसी और के हाथों में सिमटता जा रहा है.
अलग-अलग देखने पर इनमें से हर सौदा एक सामान्य अवसंरचना लेनदेन जैसा दिखाई देता है, जिसकी एक बार रिपोर्टिंग होती है और फिर उसे भुला दिया जाता है.
लेकिन सामूहिक रूप से ये कुछ कहीं बड़ा उजागर करते हैं.
वही कुछ वित्तीय संस्थान धीरे-धीरे उस अवसंरचना के नीचे अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं, जिसके माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था वास्तविक रूप से संचालित होती है.
वही नाम बार-बार क्यों दिखाई देते हैं
इस पैटर्न के पीछे एक कारण है.
और वह छिपा हुआ नहीं है.
बस उसके बारे में शायद ही कभी स्पष्ट शब्दों में बात की जाती है.
दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों ने यह समझ लिया है कि अवसंरचना पर नियंत्रण रखना, शेयरों में कारोबार करने से कहीं अधिक लाभदायक है.
आर्थिक मंदी आने पर हवाई अड्डे गायब नहीं हो जाते.
बंदरगाह रातोंरात अप्रासंगिक नहीं हो जाते.
जल उपयोगिता कंपनियों को शायद ही कभी वास्तविक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है.
टोल सड़कें अर्थव्यवस्था के तेज़ी में होने या मंदी में होने, दोनों ही स्थितियों में नकदी उत्पन्न करती रहती हैं.
और लगभग हर दूसरी परिसंपत्ति श्रेणी के विपरीत, भौतिक अवसंरचना अपने मालिक को केवल प्रतिफल (Yield) ही नहीं देती.
वह उससे कहीं अधिक मूल्यवान चीज़ देती है.
आवागमन पर नियंत्रण
माल.
ऊर्जा.
यात्री.
सप्लाई चेन.
व्यापार.
आधुनिक अर्थव्यवस्था भौतिक धमनियों पर चलती है.
और धीरे-धीरे वही कुछ संस्थान इन धमनियों को खरीद रहे हैं, किसी एक बड़े नाटकीय अधिग्रहण के माध्यम से नहीं, बल्कि सौदा-दर-सौदा, बंदरगाह-दर-बंदरगाह, हवाई अड्डा-दर-हवाई अड्डा.
जब तक कि दुनिया का नक्शा चुपचाप बदल नहीं जाता.
आर्थिक भूगोलवेत्ता ब्रेट क्रिस्टोफर्स ने इस स्थिति को एक नाम दिया है "एसेट मैनेजर सोसाइटी."
एक ऐसा छोटा-सा समूह, जिसकी कंपनियां अब उन सड़कों, जल पाइपलाइनों, ऊर्जा ग्रिडों और लगातार बढ़ते हुए बंदरगाहों तथा हवाई अड्डों की मालिक बनती जा रही हैं, जिन पर दुनिया निर्भर करती है.
ऐसे संस्थान, जिन्हें लोगों ने कभी चुना नहीं.
और जिनकी लेखा-पुस्तकों को देखने की क्षमता भी उनके पास नहीं है.
केरल पर वापस
इस पूरी प्रक्रिया में किसी को कोई कानून तोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ी.
अडानी ने अपनी हिस्सेदारी ऐसी कंपनी को बेची, जिसके साथ वह पहले भी दो बार साझेदारी कर चुका था. कीमत ऐसी थी, जिससे उस विस्तार परियोजना को वित्तपोषित किया जा सके, जिसके लिए अन्यथा उसे पूरी पूंजी स्वयं जुटानी पड़ती.
कागज़ों पर हर कदम पूरी तरह सामान्य दिखाई देता है.
भारत मानता है कि वह भविष्य के लिए रणनीतिक अवसंरचना का निर्माण कर रहा है.
लेकिन पूरी दुनिया में एक कहीं अधिक शांत बदलाव पहले से ही जारी है.
राष्ट्र बंदरगाह बनाते हैं.
लेकिन उनका स्वामित्व धीरे-धीरे वैश्विक पूंजी के हाथों में जाता जा रहा है.
विझिंजम को अडानी और MSC के बीच एक सामान्य लेनदेन के रूप में प्रस्तुत किया गया था.
लेकिन दस्तावेज़ कहीं अधिक बड़ी तस्वीर सामने रखते हैं.
अब वही पूंजी संरचना पनामा नहर पर मौजूद है, यूरोप के हवाई अड्डों के भीतर मौजूद है, महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में मौजूद है और अब भारत की सबसे रणनीतिक समुद्री परिसंपत्तियों में से एक के भीतर भी मौजूद है.
देश यह मानते हैं कि वे अपने भविष्य के लिए संप्रभु अवसंरचना का निर्माण कर रहे हैं.
लेकिन धीरे-धीरे उसकी चाबियां कोई और खरीदता जा रहा है.
और यदि वही कुछ संस्थान उन बंदरगाहों, रेल प्रणालियों, हवाई अड्डों और ऊर्जा गलियारों का अधिग्रहण करते रहे, जिनके माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था वास्तव में संचालित होती है, तो असहज करने वाला प्रश्न केवल यह नहीं रहेगा कि विझिंजम का मालिक कौन है.
प्रश्न उससे कहीं बड़ा हो जाएगा.
आखिर धीरे-धीरे पूरी दुनिया का मालिक कौन बनता जा रहा है?
स्रोत एवं टिप्पणियां
1. पनामा के बंदरगाहों को लेकर CK Hutchison पर ट्रंप प्रशासन का दबाव और ब्लैकरॉक के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को 22.8 अरब डॉलर (कुछ रिपोर्टों में लगभग 23 अरब डॉलर) में बिक्री की घोषणा. स्रोत: CBS News, Foreign Policy, FDD Analysis.
2. चीन द्वारा COSCO को कंसोर्टियम में शामिल करने तथा वीटो अधिकार देने की मांग, जिसके कारण Hutchison की व्यापक बिक्री प्रक्रिया रुक गई. स्रोत: SupplyChainBrain.
3. पनामा के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2026 की शुरुआत में CK Hutchison को 1997 में दिया गया कंसेशन निरस्त करना तथा बाल्बोआ (APM Terminals) और क्रिस्टोबाल (TiL) का अंतरिम नियंत्रण प्रतिद्वंद्वी ऑपरेटरों को सौंपना. स्रोत: CNBC.
4. ब्लैकरॉक द्वारा 12.5 अरब डॉलर में Global Infrastructure Partners (जनवरी 2024 में घोषित, अक्टूबर 2024 में पूर्ण) का अधिग्रहण तथा TiL में उसकी हिस्सेदारी. स्रोत: BlackRock Corporate Newsroom, MSC Group Shareholder Disclosures.
5. TiL और BlackRock के बोर्ड में Adebayo Ogunlesi की दोहरी निदेशक भूमिका. स्रोत: BlackRock Corporate Leadership Page, StockTitan.
6. GIP/BlackRock पोर्टफोलियो- गैटविक, एडिनबर्ग, सिडनी एयरपोर्ट, मलेशिया एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स, CyrusOne, Pacific National, Italo, Peel Ports, Port of Melbourne तथा SUEZ (जल एवं अपशिष्ट उपयोगिता कंपनी, जिसका स्वेज नहर से कोई संबंध नहीं है). स्रोत: Global Infrastructure Partners Company Disclosures, SUEZ Company Disclosures तथा संबंधित सेक्टर प्रेस.
7. "Asset Manager Society" की अवधारणा. स्रोत: Brett Christophers की पुस्तक Our Lives in Their Portfolios: Why Asset Managers Own the World (Verso, 2023), तथा Jacobin, LSE Review of Books और Public Books में प्रकाशित समीक्षाएं.
8. विझिंजम सौदे की शर्तें (1.397 अरब डॉलर, 49 प्रतिशत हिस्सेदारी). स्रोत: Adani Ports Disclosures, Business Standard, Business Today.
टिप्पणी
इस लेख में केवल उन्हीं तथ्यों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो कंपनी के आधिकारिक खुलासों, न्यायालय एवं नियामकीय अभिलेखों तथा ऊपर उद्धृत नामित स्रोतों की रिपोर्टिंग में दर्ज हैं.
अवसंरचना निवेश की आर्थिक तर्कशक्ति को उद्योग में प्रचलित दस्तावेज़ित व्यवहार और अकादमिक विश्लेषण के आधार पर प्रस्तुत किया गया है. इसे किसी भी नामित कंपनी द्वारा किसी प्रकार की अनियमितता या गलत कार्य करने का आरोप नहीं माना जाना चाहिए.
पनामा नहर स्वयं पनामा के नहर प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में ही बनी हुई है. यहां जिन बंदरगाहों का उल्लेख किया गया है, वे नहर के प्रवेश द्वारों पर स्थित कंटेनर टर्मिनल हैं, न कि स्वयं पनामा नहर या उसका पारगमन संचालन.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)