मसौदा नियमों के अनुसार राज्यों को मिलने वाला ग्रामीण रोजगार फंड अब केवल आबादी या जरूरत के आधार पर तय नहीं होगा. इसमें प्रदर्शन आधारित मानकों को भी शामिल किया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है. सरकार ने मनरेगा की जगह विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-GRAM) अधिनियम 2025 लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है. नए सिस्टम में राज्यों को फंड का आवंटन उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा. समय पर मजदूरी भुगतान, सामाजिक ऑडिट और काम पूरा करने जैसी शर्तों पर राज्यों की रैंकिंग तय होगी. यह नया कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू किया जाएगा.
2026 से लागू होगा नया ग्रामीण रोजगार कानून
केंद्र सरकार ने शनिवार को VB-GRAM अधिनियम 2025 के मसौदा नियम सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किए. यह नया कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGAमनरेगा) की जगह लेगा. सरकार ने कहा है कि 21 जून 2026 तक लोग इस मसौदे पर अपनी राय दे सकते हैं.
राज्यों को प्रदर्शन के आधार पर मिलेगा फंड
मसौदा नियमों के अनुसार राज्यों को मिलने वाला ग्रामीण रोजगार फंड अब केवल आबादी या जरूरत के आधार पर तय नहीं होगा. इसमें प्रदर्शन आधारित मानकों को भी शामिल किया जाएगा.
इन मानकों में शामिल होंगे.
1. मजदूरी का समय पर भुगतान
2. सामाजिक ऑडिट का पालन
3. तय समय में कार्यों की पूर्णता
4. केंद्र द्वारा तय अन्य प्रदर्शन संकेतक
सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी.
16वें वित्त आयोग के फॉर्मूले का होगा इस्तेमाल
केंद्र सरकार ने कहा है कि राज्यों को “मानक फंड आवंटन” देने के लिए 16वें वित्त आयोग के क्षैतिज हस्तांतरण फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाएगा, यानी राज्यों की आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए राशि तय की जाएगी.
केंद्र और राज्यों के बीच ऐसे बंटेगा खर्च
मसौदे के अनुसार अधिकांश राज्यों में केंद्र और राज्य के बीच फंड शेयरिंग का अनुपात 60:40 रहेगा. वहीं उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 तय किया गया है.
सिविल सोसायटी समूहों ने उठाए सवाल
नई व्यवस्था को लेकर कुछ सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि प्रदर्शन आधारित मॉडल से केंद्र सरकार को राज्यों के फंड पर ज्यादा नियंत्रण मिल जाएगा. इससे जरूरतमंद राज्यों में कर्मचारियों के दिनों की संख्या कम हो सकती है और मनरेगा की मांग आधारित मूल भावना प्रभावित होगी.
सरकार ने आलोचनाओं को किया खारिज
केंद्र सरकार ने FAQ जारी कर इन आरोपों को खारिज किया है. सरकार का कहना है कि नया मॉडल बजट प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाएगा और रोजगार गारंटी पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. सरकार के मुताबिक पूरी तरह मांग आधारित मॉडल से बजट आवंटन में असंतुलन और वित्तीय दबाव पैदा हो सकता है.
ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि VB-GRAM अधिनियम ग्रामीण रोजगार योजनाओं के संचालन का तरीका पूरी तरह बदल सकता है. अब राज्यों को ज्यादा फंड पाने के लिए बेहतर प्रदर्शन दिखाना होगा. इससे योजनाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, लेकिन कमजोर राज्यों पर दबाव भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
इस समझौते से व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं. साथ ही दोनों देशों के बीच कारोबारी माहौल और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होने की उम्मीद है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संकेत दिए हैं कि दोनों देश जल्द ही एक बड़ी ट्रेड डील को अंतिम रूप दे सकते हैं. नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बैठक के बाद रूबियो ने कहा कि प्रस्तावित समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ साबित होगा. हालांकि दूसरी ओर टैरिफ विवाद और अमेरिकी व्यापार नियमों में बदलाव को लेकर 500 बिलियन डॉलर के संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सवाल भी उठने लगे हैं. बता दें, इन दिनों रूबियो भारत दौरे पर आए हैं और रविवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की.
रविवार को रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की.
व्यापार से लेकर रक्षा तक कई मुद्दों पर चर्चा
नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई. रूबियो ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में “जबरदस्त प्रगति” हुई है और अब ऐसा समझौता तैयार करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है, जो दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों को मजबूत करेगा.
जल्द भारत आएगा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल
अमेरिकी विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि बहुत जल्द एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत का दौरा करेगा. इस दौरान प्रस्तावित ट्रेड डील को आगे बढ़ाने और अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी. इस बयान को दोनों देशों के बीच तेज होती बातचीत और समझौते की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
भारत को बताया अहम व्यापारिक साझेदार
रूबियो ने भारत को अमेरिका का बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बताया. उन्होंने कहा कि भारत जैसी विशाल अर्थव्यवस्था के साथ मजबूत और संतुलित व्यापारिक संबंध बनाना अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ऐसे ट्रेड एग्रीमेंट चाहता है, जिनसे दोनों देशों को समान रूप से लाभ मिले.
500 बिलियन डॉलर ट्रेड डील पर नई बहस
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित 500 बिलियन डॉलर के ट्रेड और खरीद समझौते को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है. रूबियो ने दावा किया कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खरीदारी कर सकता है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि भारत ने अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर के सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है. यह खरीद मुख्य रूप से ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और एग्रीकल्चर सेक्टर पर केंद्रित हो सकती है.
टैरिफ विवाद से बढ़ी चिंता
हालांकि ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने इस प्रस्तावित समझौते को लेकर चिंता जताई है. संस्था का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ नियमों में हालिया बदलाव के बाद इस डील की बुनियाद कमजोर पड़ सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक अगर दोनों देशों के बीच टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर सहमति नहीं बनती, तो प्रस्तावित समझौते को लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
ट्रंप प्रशासन की नीति पर क्या बोले रूबियो?
संयुक्त प्रेस वार्ता में रूबियो ने साफ कहा कि अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी किसी एक देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी व्यापार व्यवस्था को फिर से संतुलित करना चाहता है ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक फायदा मिल सके. रूबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया के कई देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को नए तरीके से मजबूत और संतुलित करने की दिशा में काम कर रहा है.
क्या हो सकता है ट्रेड डील का असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर भारत और अमेरिका के बीच यह संभावित ट्रेड डील सफल होती है, तो इससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है. इस समझौते से व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं. साथ ही दोनों देशों के बीच कारोबारी माहौल और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होने की उम्मीद है.
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के कहा है कि नई दिल्ली के सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ भूमि को मूल रूप से सामाजिक और खेल गतिविधियों के लिए क्लब चलाने हेतु लीज पर दिया गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक हित का हवाला देते हुए राजधानी दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) की जमीन को अपने कब्जे में लेने का बड़ा फैसला किया है. सरकार ने क्लब को 5 जून 2026 तक परिसर खाली कर शांतिपूर्ण तरीके से कब्जा सौंपने का निर्देश दिया है. यह क्लब दशकों से देश के सबसे प्रभावशाली और विशिष्ट क्लबों में गिना जाता रहा है.
27.3 एकड़ जमीन पर केंद्र का कब्जा
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने 22 मई 2026 को जारी आधिकारिक आदेश में कहा कि नई दिल्ली के सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ भूमि को मूल रूप से सामाजिक और खेल गतिविधियों के लिए क्लब चलाने हेतु लीज पर दिया गया था.
सरकार के मुताबिक यह इलाका राष्ट्रीय राजधानी का “अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र” है, जहां अब रक्षा ढांचे को मजबूत करने, सार्वजनिक सुरक्षा और अन्य जरूरी प्रशासनिक परियोजनाओं के लिए जमीन की आवश्यकता है.
लीज की शर्तों का दिया हवाला
केंद्र सरकार ने लीज डीड की धारा 4 का हवाला देते हुए कहा कि यदि भूमि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जरूरी हो तो सरकार को दोबारा कब्जा लेने का कानूनी अधिकार है. इसी आधार पर भारत के राष्ट्रपति की ओर से लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने क्लब की लीज समाप्त करने और तत्काल प्रभाव से जमीन पर दोबारा कब्जा लेने का आदेश जारी किया है.
भवन, लॉन और संरचनाएं भी होंगी सरकार के अधीन
सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दोबारा कब्जा लेने के बाद पूरी जमीन, भवन, संरचनाएं, लॉन और परिसर में मौजूद सभी फिटिंग्स सरकार के अधिकार में आ जाएंगी. क्लब प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि वह 5 जून 2026 तक परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा सरकार को सौंप दे. ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.
दशकों से अभिजात्य क्लब के रूप में रही पहचान
दिल्ली जिमखाना क्लब लंबे समय से देश के सबसे प्रतिष्ठित और विशिष्ट क्लबों में माना जाता रहा है. वर्षों से ऐसे क्लबों को ऐसे स्थानों के रूप में देखा जाता रहा है, जहां पहुंच और प्रभाव को योग्यता से अधिक महत्व मिलता रहा. सरकार के इस फैसले को इस संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक जरूरतें और सार्वजनिक हित किसी भी विशेषाधिकार से ऊपर हैं.
शुक्रवार को सेंसेक्स 231.99 अंक यानी 0.31 फीसदी की तेजी के साथ 75,415.35 अंक पर बंद हुआ था. वहीं निफ्टी 64.60 अंक यानी 0.27 फीसदी चढ़कर 23,719.30 अंक पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शुक्रवार 22 मई को घरेलू शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ था. बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी तथा रुपये में मजबूती के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी में भी बढ़त दर्ज हुई. हालांकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई थी. अब आज, 25 मई को बाजार की नजर ग्लोबल संकेतों, GIFT Nifty, एशियाई बाजारों की तेजी, Q4 नतीजों और बड़े इंडेक्स बदलावों पर रहेगी, जिससे बाजार में दमदार शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है.
शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में रही तेजी
शुक्रवार के कारोबारी सत्र के अंत में बीएसई सेंसेक्स 231.99 अंक यानी 0.31 फीसदी की तेजी के साथ 75,415.35 अंक पर बंद हुआ था. वहीं एनएसई निफ्टी 64.60 अंक यानी 0.27 फीसदी चढ़कर 23,719.30 अंक पर पहुंच गया था.
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा उछला था, जबकि निफ्टी 23,800 के करीब पहुंच गया था. दिनभर के उतार-चढ़ाव के बावजूद बैंकिंग और वित्तीय शेयरों ने बाजार को मजबूती दी.
रुपये में आई मजबूती
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ था. रुपया 0.54 फीसदी की मजबूती के साथ 95.68 के स्तर पर बंद हुआ. रुपये में मजबूती से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा और इसका सकारात्मक असर शेयर बाजार में देखने को मिला.
बैंकिंग शेयरों ने दिखाई ताकत
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 17 बढ़त के साथ बंद हुए थे. ट्रेंट में सबसे ज्यादा 3 फीसदी से अधिक तेजी दर्ज की गई थी. इसके अलावा एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, कोटक महिंद्रा बैंक और बजाज फिनसर्व के शेयरों में भी एक फीसदी से ज्यादा मजबूती देखने को मिली थी. निफ्टी में ट्रेंट, श्रीराम फाइनेंस और एक्सिस बैंक टॉप गेनर्स रहे थे.
इन शेयरों में रही गिरावट
बाजार में तेजी के बावजूद सन फार्मा, आईटीसी, पावरग्रिड, बीईएल, भारती एयरटेल, इन्फोसिस और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर दबाव में रहे थे. वहीं निफ्टी फार्मा, हेल्थकेयर और मीडिया इंडेक्स में कमजोरी दर्ज की गई थी.
अब सोमवार को बाजार का क्या रहेगा मूड?
सोमवार, 25 मई को भारतीय शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है. सुबह GIFT Nifty 272 अंकों की तेजी के साथ 24,016 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि बाजार हरे निशान में खुल सकता है. एशियाई बाजारों में भी शानदार तेजी देखने को मिली. जापान का Nikkei पहली बार 65,000 के पार पहुंच गया. Strait of Hormuz दोबारा खुलने की संभावनाओं और अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति के संकेतों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है.
आज इन शेयरों और खबरों पर रहेगी नजर
आज TVS Motor Company, Adani Enterprises, One 97 Communications और Ashok Leyland जैसे शेयर इंडेक्स बदलावों के चलते फोकस में रहेंगे. इसके अलावा Suzlon Energy, Rail Vikas Nigam Limited, NBCC (India) और Aditya Birla Fashion and Retail समेत कई कंपनियां अपने मार्च तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. वहीं JSW Cement, Adani Energy Solutions, Lupin, Aurobindo Pharma, RBL Bank और Paytm में ब्लॉक डील्स, रेगुलेटरी अपडेट्स और ओपन ऑफर जैसी खबरों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
विप्रो ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 60 करोड़ तक इक्विटी शेयरों को वापस खरीदने के प्रस्ताव को कंपनी के बोर्ड और शेयरधारकों दोनों की मंजूरी मिल चुकी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख आईटी कंपनी विप्रो (Wipro) ने अपने 15,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक कार्यक्रम के लिए 5 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय कर दी है. इस तारीख तक जिन निवेशकों के पास कंपनी के शेयर होंगे, वही इस बायबैक योजना में हिस्सा लेने के पात्र होंगे. कंपनी ने अप्रैल में इस बायबैक का ऐलान किया था.
60 करोड़ शेयर खरीदेगी कंपनी
बेंगलुरु मुख्यालय वाली विप्रो ने 16 अप्रैल 2026 को बायबैक योजना की घोषणा की थी. कंपनी के बोर्ड ने टेंडर ऑफर के जरिए 60 करोड़ तक पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर वापस खरीदने को मंजूरी दी थी. यह कंपनी की कुल इक्विटी पूंजी का 5 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है. कंपनी प्रति शेयर 250 रुपये की कीमत पर शेयर वापस खरीदेगी. इस पूरी प्रक्रिया पर अधिकतम 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
करीब तीन साल बाद कर रही है बायबैक
यह लगभग तीन साल बाद विप्रो का पहला शेयर बायबैक होगा. इससे पहले कंपनी ने जून 2023 में 12,000 करोड़ रुपये का बायबैक किया था. उस दौरान 22 जून से 30 जून 2023 के बीच कंपनी ने 26.96 करोड़ इक्विटी शेयर वापस खरीदे थे. उस समय कंपनी ने अपनी कुल इक्विटी का करीब 4.91 प्रतिशत हिस्सा 445 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खरीदा था. हालांकि दिसंबर 2024 में घोषित 1:1 बोनस इश्यू के बाद इस कीमत को समायोजित नहीं किया गया है.
बोर्ड और शेयरधारकों से मिली मंजूरी
विप्रो ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 60 करोड़ तक इक्विटी शेयरों को वापस खरीदने के प्रस्ताव को कंपनी के बोर्ड और शेयरधारकों दोनों की मंजूरी मिल चुकी है. कंपनी ने यह भी कहा कि प्रमोटर और प्रमोटर समूह के सदस्य भी इस बायबैक में हिस्सा लेने का इरादा रखते हैं.
क्या होता है शेयर बायबैक
शेयर बायबैक को आमतौर पर कंपनी द्वारा अतिरिक्त नकदी को शेयरधारकों को लौटाने का तरीका माना जाता है. इससे बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या घटती है, जिससे प्रति शेयर आय यानी EPS बेहतर हो सकती है और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है.
शेयर में दिखी तेजी
बायबैक रिकॉर्ड डेट की घोषणा के बाद शुक्रवार को Wipro के शेयरों में तेजी देखने को मिली. NSE पर कंपनी का शेयर 1.62 प्रतिशत बढ़कर 202.97 रुपये पर बंद हुआ.
कंपनी ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को पैनिक बाइंग यानी घबराहट में ज्यादा ईंधन खरीदने से बचना चाहिए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और ईंधन की किल्लत की खबरों के बीच सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल (Indian Oil Corporation) ने बड़ा बयान जारी किया है. कंपनी ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को पैनिक बाइंग यानी घबराहट में ज्यादा ईंधन खरीदने से बचना चाहिए. इंडियन ऑयल के मुताबिक कुछ इलाकों में जो दबाव दिख रहा है, वह अस्थायी और स्थानीय कारणों से पैदा हुआ है.
कुछ इलाकों में क्यों लगी लंबी कतारें?
देश के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर अचानक बढ़ी भीड़ ने लोगों की चिंता बढ़ा दी. कई जगह ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड भी देखने को मिले. हालांकि इंडियन ऑयल का कहना है कि यह स्थिति पूरे देश की नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा इलाकों तक सीमित है. कंपनी के मुताबिक स्थानीय स्तर पर मांग और सप्लाई के असंतुलन तथा बिक्री के पैटर्न में बदलाव के कारण कुछ पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ा है. अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है.
कटाई के सीजन से बढ़ी डीजल की मांग
इंडियन ऑयल ने बताया कि इस समय देश के कई हिस्सों में फसलों की कटाई का मौसम चल रहा है. खेती और कृषि उपकरणों में डीजल की खपत बढ़ने से इसकी मांग में मौसमी उछाल आया है. डीजल की बढ़ी खपत का असर खासतौर पर ग्रामीण और कृषि प्रधान इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां ईंधन की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी ज्यादा हो गई है.
सरकारी पंपों की ओर बढ़ा ग्राहकों का रुख
कंपनी के अनुसार निजी तेल कंपनियों के कई पेट्रोल पंपों पर कीमतें सरकारी पंपों की तुलना में अधिक हैं. यही वजह है कि बड़ी संख्या में ग्राहक सरकारी तेल कंपनियों के आउटलेट्स पर पहुंच रहे हैं. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण थोक और संस्थागत सप्लाई महंगी हो गई है. ऐसे में बड़े कमर्शियल खरीदार भी सीधे सरकारी पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं.
मई में पेट्रोल और डीजल बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
इंडियन ऑयल के आंकड़ों के मुताबिक 1 से 22 मई 2026 के दौरान कंपनी की ईंधन बिक्री में बड़ा उछाल दर्ज किया गया. इस अवधि में पेट्रोल की बिक्री पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 14% बढ़ी है. वहीं डीजल की बिक्री में करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई है. कंपनी का कहना है कि मांग में इतनी तेज बढ़ोतरी के बावजूद पूरे देश में सप्लाई बनाए रखी गई है और ग्राहकों को लगातार ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है.
42 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर सप्लाई सामान्य
इंडियन ऑयल ने बताया कि देशभर में उसके 42 हजार से अधिक पेट्रोल पंपों का नेटवर्क है. इनमें से केवल कुछ चुनिंदा आउटलेट्स पर ही दबाव की स्थिति बनी हुई है. कंपनी ने भरोसा दिलाया कि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर स्टॉक पर्याप्त मात्रा में मौजूद है और सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य तरीके से काम कर रही है.
अफवाहों से बचें, पैनिक बाइंग न करें
इंडियन ऑयल ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल खरीदने से बचें. कंपनी ने कहा कि वह अन्य तेल विपणन कंपनियों के साथ मिलकर देशभर में पर्याप्त स्टॉक बनाए हुए है और जहां कहीं स्थानीय स्तर पर दिक्कत आ रही है, वहां तुरंत कदम उठाए जा रहे हैं.
Icra ने FY27 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि पहले यह अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है. रेटिंग एजेंसी Icra Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.5% से घटाकर 6.2% कर दिया है. एजेंसी का कहना है कि महंगे ऊर्जा आयात, कमजोर निवेश माहौल और वैश्विक अनिश्चितताओं ने आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को प्रभावित किया है. हालांकि, निर्यात और वाहन उत्पादन जैसे कुछ सेक्टर अभी भी मजबूती दिखा रहे हैं.
बिजनेस एक्टिविटी में मामूली सुधार, लेकिन व्यापक तेजी नहीं
Icra के बिजनेस एक्टिविटी मॉनिटर, जो 16 हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स पर आधारित एक संयुक्त सूचकांक है, उसकी सालाना वृद्धि अप्रैल 2026 में 8.3% रही. मार्च 2026 में यह 8.0% थी. हालांकि एजेंसी ने कहा कि यह सुधार सीमित रहा और नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के दौरान दर्ज 9-11% की मजबूत वृद्धि से अभी भी नीचे है. एजेंसी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे वित्तीय परिस्थितियां सख्त हुई हैं और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है.
कच्चे तेल का अनुमान बढ़ाया
Icra ने FY27 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि पहले यह अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल था. एजेंसी का मानना है कि वित्त वर्ष की पहली छमाही में तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं और दूसरी छमाही में घटकर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतें बनी रहने से निवेश मांग कमजोर पड़ सकती है, कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है और उपभोक्ताओं का भरोसा भी घट सकता है.
कमजोर मानसून और एल नीनो का खतरा
Icra ने FY27 की दूसरी छमाही के लिए संभावित एल नीनो और कमजोर मानसून को भी बड़ा जोखिम बताया है. एजेंसी के अनुसार, यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
16 में से 9 संकेतकों में गिरावट
अप्रैल 2026 में बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स में हल्की बढ़त के बावजूद 16 में से 9 संकेतकों का प्रदर्शन मार्च की तुलना में कमजोर रहा. घरेलू हवाई यात्री यातायात अप्रैल में 1.6% घट गया, जबकि मार्च में इसमें 0.9% की गिरावट थी. एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें बढ़ने से हवाई किराए महंगे हुए और यात्रा मांग प्रभावित हुई.
डीजल खपत की वृद्धि दर मार्च के 8.0% से घटकर अप्रैल में सिर्फ 0.3% रह गई. पेट्रोल खपत की वृद्धि भी 7.6% से घटकर 6.4% हो गई. खनन उत्पादन अप्रैल में 6.9% घटा, जो मार्च में 3.1% की गिरावट से भी ज्यादा खराब रहा. फिनिश्ड स्टील की खपत वृद्धि भी 14.1% से घटकर 8.1% रह गई. GST ई-वे बिल जनरेशन की वृद्धि दर 11.8% रही, जो पिछले छह महीनों का सबसे धीमा स्तर है.
कुछ सेक्टरों ने दिखाई मजबूती
कमजोर संकेतकों के बीच कुछ सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन भी किया. गैर-तेल वस्तु निर्यात अप्रैल में 9.0% की दर से बढ़ा, जबकि मार्च में इसमें 9.2% की गिरावट दर्ज की गई थी. इसमें कमोडिटी कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी का योगदान रहा.
पैसेंजर व्हीकल उत्पादन अप्रैल में सालाना आधार पर 12.8% बढ़ा, जबकि मार्च में यह वृद्धि 9.0% थी. टू-व्हीलर उत्पादन भी मजबूत बना रहा. वाहन रजिस्ट्रेशन अप्रैल में 12.8% बढ़े. रिपोर्ट के मुताबिक GST दरों में तर्कसंगत बदलाव से ग्राहकों की खरीद क्षमता में सुधार हुआ.
सीमेंट उत्पादन वृद्धि 4.7% से बढ़कर 9.4% हो गई, जबकि बिजली उत्पादन 0.8% से बढ़कर 4.1% पहुंच गया. गर्मी और हीटवेव की वजह से बिजली मांग में इजाफा देखने को मिला.
कोर सेक्टर की रफ्तार अब भी धीमी
भारत के आठ प्रमुख कोर सेक्टरों की वृद्धि दर अप्रैल में मामूली बढ़कर 1.7% रही, जो मार्च में 1.2% थी. हालांकि Icra ने कहा कि अनुकूल बेस होने के बावजूद प्रदर्शन कमजोर बना हुआ है.
स्टील, सीमेंट और बिजली उत्पादन को छोड़कर बाकी पांच कोर उद्योगों में उत्पादन घटा है. एजेंसी का मानना है कि इसका असर औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों पर भी दिखाई दे सकता है.
ग्रामीण रोजगार की स्थिति बिगड़ी
अप्रैल में श्रम बाजार के संकेतक भी कमजोर हुए. भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.2% हो गई, जो पिछले छह महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. मार्च में यह 5.1% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में वर्कर-पॉपुलेशन रेशियो 55.5% से घटकर 54.9% हो गया, जबकि ग्रामीण बेरोजगारी दर सात महीने के उच्च स्तर 4.6% पर पहुंच गई. हालांकि शहरी क्षेत्रों में स्थिति कुछ बेहतर रही और शहरी बेरोजगारी दर 6.8% से घटकर 6.6% हो गई.
मई के शुरुआती संकेत बेहतर
Icra के मुताबिक मई 2026 के शुरुआती आंकड़े कुछ राहत देने वाले हैं. 1 से 21 मई के बीच रोजाना औसत वाहन रजिस्ट्रेशन करीब 23% बढ़कर 76,600 यूनिट तक पहुंच गया, जबकि अप्रैल में यह वृद्धि 13% थी.
इसी अवधि में बिजली मांग वृद्धि भी 4.4% से बढ़कर 8.1% हो गई. हालांकि एजेंसी ने चेतावनी दी कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी के कारण बॉन्ड यील्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड स्प्रेड और रुपये पर दबाव अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं.
राज्य सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बढ़ती ईंधन कीमतों, वैश्विक कच्चे तेल संकट और ऊर्जा सुरक्षा की चिंताओं के बीच ओडिशा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने 1 जून 2026 से सभी सरकारी विभागों और संस्थानों के लिए केवल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की खरीद अनिवार्य कर दी है. सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य ईंधन की खपत कम करना, खर्चों में कटौती करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है.
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने जारी किए निर्देश
मोहन चरण माझी मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने निर्देश दिया है कि 1 जून के बाद सरकारी कार्यालयों द्वारा खरीदे जाने वाले सभी नए दोपहिया और चारपहिया वाहन इलेक्ट्रिक होने चाहिए. इसके साथ ही विभागों द्वारा किराये पर लिए जाने वाले चारपहिया वाहन भी EV होंगे. हालांकि, विशेष परिस्थितियों में ही पेट्रोल और डीजल वाहनों की खरीद की अनुमति दी जाएगी.
ईंधन बचत और ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नागरिकों से पेट्रोल और डीजल के अनावश्यक उपयोग को कम करने की अपील की थी. मुख्यमंत्री मांझी इससे पहले अपने काफिले में वाहनों की संख्या आधी कर चुके हैं और लोगों से ईंधन बचाने की अपील भी कर चुके हैं.
लागू होंगे आठ बड़े दिशानिर्देश
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव अनु गर्ग को राज्यभर में सरकारी विभागों, सार्वजनिक संस्थानों और सरकारी सहायता प्राप्त संगठनों में ईंधन खपत कम करने के लिए व्यापक आठ-सूत्रीय दिशानिर्देश लागू करने के निर्देश दिए हैं. इन उपायों का मकसद सरकारी खर्च कम करने के साथ-साथ ऊर्जा दक्षता बढ़ाना है.
सरकारी बैठकों में बढ़ेगा वर्चुअल सिस्टम
नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी बैठकों, समीक्षा बैठकों, ट्रेनिंग प्रोग्राम और कार्यशालाओं को प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा. सरकार ने कहा है कि केवल बेहद जरूरी मामलों में ही अधिकारियों और कर्मचारियों की फिजिकल मौजूदगी अनिवार्य होगी. बाकी कर्मचारी वर्चुअल माध्यम से शामिल होंगे.
अधिकारियों को सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने की सलाह
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि सरकारी अधिकारी आधिकारिक यात्राओं के दौरान निजी सरकारी वाहनों के बजाय बस और ट्रेन जैसे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें. सरकार का मानना है कि इससे ईंधन की खपत में बड़ी कमी लाई जा सकती है.
कर्मचारियों के लिए शुरू होंगी इलेक्ट्रिक बस सेवाएं
राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों के लिए इलेक्ट्रिक बस और मिनीबस सेवाएं शुरू करने की भी तैयारी कर रही है. इन सेवाओं का उद्देश्य उन कर्मचारियों को सुविधा देना है जो आवासीय इलाकों से रोजाना दफ्तर आते-जाते हैं. इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी.
EV सेक्टर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा सरकार का यह कदम इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन दे सकता है. सरकारी स्तर पर EV अपनाने से न सिर्फ ईंधन की बचत होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी.
वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी RBI का एक मौद्रिक उपकरण है, जिसका इस्तेमाल बैंकिंग सिस्टम में अल्पकालिक लिक्विडिटी उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बैंकिंग सिस्टम में घटती नकदी और बढ़ती मनी मार्केट दरों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने तीन-दिवसीय वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी के जरिए 81,590 करोड़ रुपये की अस्थायी लिक्विडिटी सिस्टम में डाली है. विशेषज्ञों का मानना है कि RBI का यह कदम बैंकिंग सिस्टम में नकदी की उपलब्धता बनाए रखने और अल्पकालिक ब्याज दरों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है.
क्या है VRR और क्यों जरूरी है यह कदम?
वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी RBI का एक मौद्रिक उपकरण है, जिसका इस्तेमाल बैंकिंग सिस्टम में अल्पकालिक लिक्विडिटी उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है. जब सिस्टम में नकदी कम होने लगती है और बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाता है, तब RBI इस तरह की नीलामी के जरिए बैंकों को फंड उपलब्ध कराता है. RBI ने बताया कि यह फंड 5.26% की कट-ऑफ दर पर उपलब्ध कराया गया.
मांग उम्मीद से कम, लेकिन पिछली नीलामी से बेहतर
हालांकि RBI ने 1 लाख करोड़ रुपये तक की राशि उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, लेकिन बैंकों की कुल मांग 81,590 करोड़ रुपये तक ही रही. इसके बावजूद, 21 मई को हुई पिछली VRR नीलामी की तुलना में इस बार बैंकों की भागीदारी और मांग अधिक रही, जो बाजार में बढ़ती नकदी जरूरत को दर्शाती है.
तेजी से घटा लिक्विडिटी सरप्लस
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस तेजी से घटा है. 20 मई को जहां सिस्टम में करीब 1.51 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस था, वहीं 21 मई तक यह घटकर लगभग 58,876.29 करोड़ रुपये रह गया. लिक्विडिटी में इस गिरावट का असर मनी मार्केट पर भी दिखाई दिया है और ओवरनाइट कॉल मनी रेट में तेज उछाल दर्ज किया गया है.
RBI उठा सकता है और कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सिस्टम में नकदी का दबाव बना रहता है, तो RBI आने वाले दिनों में एक और VRR नीलामी की घोषणा कर सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक का फोकस बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखने और अल्पकालिक ब्याज दरों को स्थिर रखने पर है.
अर्थव्यवस्था और बाजार पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर कर्ज वितरण, ब्याज दरों और बाजार की स्थिरता पर पड़ता है. अगर लिक्विडिटी की स्थिति ज्यादा कमजोर होती है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर आम ग्राहकों के लिए लोन दरों पर भी पड़ सकता है.
कंपनी के निवेश प्रबंधक क्यूब हाईवेज फंड एडवाइजर्स के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने मार्च तिमाही के लिए 3.57 रुपये प्रति यूनिट वितरण को मंजूरी दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
क्यूब हाईवेज ट्रस्ट (Cube InvIT) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष के लिए 13.77 रुपये प्रति यूनिट (DPU) के रिकॉर्ड वितरण की घोषणा की है. कंपनी ने 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के नतीजे जारी करते हुए बताया कि मजबूत ट्रैफिक ग्रोथ, अधिग्रहण और बेहतर परिचालन प्रदर्शन की वजह से आय और EBITDA में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई.
चौथी तिमाही में 480 करोड़ रुपये का वितरण
कंपनी के निवेश प्रबंधक क्यूब हाईवेज फंड एडवाइजर्स (Cube Highways Fund Advisors Pvt. Ltd) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने मार्च तिमाही के लिए 3.57 रुपये प्रति यूनिट वितरण को मंजूरी दी है.
कुल वितरण राशि 480 करोड़ रुपये रहेगी. इसमें:
1. 1.74 रुपये प्रति यूनिट ब्याज
2. 0.27 रुपये प्रति यूनिट डिविडेंड
3. 1.55 रुपये प्रति यूनिट SPV लोन रीपेमेंट
4. 0.01 रुपये प्रति यूनिट ट्रेजरी इनकम शामिल है.
FY26 में आय और EBITDA में जोरदार बढ़ोतरी
कंपनी के ग्रुप सीएफओ पंकज वासनी ने कहा कि FY26 में कंपनी की कंसोलिडेटेड आय सालाना आधार पर 26.23% बढ़कर 4,359 करोड़ रुपये पहुंच गई. वहीं, EBITDA में 29.95% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 3,092 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू भी 28.17% बढ़कर 4,239 करोड़ रुपये हो गया. उन्होंने बताया कि 8.1% की मजबूत ट्रैफिक ग्रोथ और सालभर किए गए रणनीतिक अधिग्रहणों ने इस प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई.
रिकॉर्ड वार्षिक वितरण और मजबूत NAV
कंपनी के मुताबिक FY26 उसके लिए एक ऐतिहासिक साल रहा. इस दौरान कंपनी ने लिस्टिंग के बाद अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक वितरण किया, जो 1,851 करोड़ रुपये रहा. कंपनी का नेट एसेट वैल्यू (NAV) बढ़कर 145.8 रुपये प्रति यूनिट हो गया, जो दिसंबर 2025 में 142.7 रुपये प्रति यूनिट था.
कर्ज स्थिर, एसेट्स अंडर मैनेजमेंट बढ़े
क्यूब हाईवेज ट्रस्ट का नेट डेट 17,768 करोड़ रुपये पर स्थिर रहा. कंपनी ने 46.82% का संतुलित नेट डेट-टू-एंटरप्राइज वैल्यू अनुपात बनाए रखा. वहीं, कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 36,842 करोड़ रुपये हो गया.
AAA रेटिंग बरकरार
कंपनी ने बताया कि उसे क्रिसिल (CRISILL), इंडिया रेटिंग्स (India Ratings and Research) और इकरा (ICRA) से AAA/Stable क्रेडिट रेटिंग मिली हुई है, जो उसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाती है.
27 मई रिकॉर्ड डेट, 4 जून तक मिलेगा भुगतान
कंपनी ने बताया कि वितरण के लिए रिकॉर्ड डेट 27 मई 2026 तय की गई है, जबकि निवेशकों को भुगतान 4 जून 2026 या उससे पहले कर दिया जाएगा.
क्या करती है Cube Highways Trust?
क्यूब हाईवेज ट्रस्ट भारत के हाईवे सेक्टर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत काम करती है. कंपनी केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर हाईवे प्रोजेक्ट्स का संचालन और प्रबंधन करती है.
कंपनी को वैश्विक निवेशकों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें आई स्कावार्ड कैपिटल (I Squared Capital Capital), अबु धाबी इंवेस्टमेंट अथॉरिटी (Abu Dhabi Investment Authority) और मुबाडाला इन्वेस्टमेंट कंपनी (Mubadala Investment Company) जैसे बड़े नाम शामिल हैं.
कंपनी के मुताबिक, डिजिटल सर्विसेज, रिटेल कारोबार और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस में मजबूत प्रदर्शन और लगातार विस्तार ने इस रिकॉर्ड उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries Limited) ने भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित किया है. मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी वित्त वर्ष 2025-26 में 120 बिलियन डॉलर से अधिक का सकल राजस्व हासिल करने वाली देश की पहली कंपनी बन गई है. कंपनी ने इस दौरान 124 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया, जो भारतीय उद्योग जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है. कंपनी के मुताबिक, डिजिटल सर्विसेज, रिटेल कारोबार और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस में मजबूत प्रदर्शन और लगातार विस्तार ने इस रिकॉर्ड उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई.
टेक्सटाइल कारोबार से शुरू होकर ग्लोबल दिग्गज बनने तक का सफर
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि 1966 में एक छोटे टेक्सटाइल कारोबार के रूप में शुरू हुई कंपनी आज 124 बिलियन डॉलर के वैश्विक समूह में बदल चुकी है. कंपनी ने कहा कि FY26 में 120 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू पार करना भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है.
From a textile dream in 1966 to a $124 Billion global conglomerate in 2026.
— Reliance Industries Limited (@RIL_Updates) May 22, 2026
Reliance Industries becomes the first Indian company to surpass USD $120 Billion revenue landmark in FY 2025-26. This is a testament to the spirit of an unstoppable India.
The journey continues. Because… pic.twitter.com/COB5hUPRU7
एक महीने पहले बनाया था नेट प्रॉफिट का भी रिकॉर्ड
यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब करीब एक महीने पहले ही रिलायंस 10 बिलियन डॉलर का वार्षिक नेट प्रॉफिट कमाने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी थी. कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 95,610 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया. डॉलर के मुकाबले 94.4 रुपये की विनिमय दर के हिसाब से यह करीब 10.1 बिलियन डॉलर बैठता है.
TCS, Infosys और HCL Tech से भी ज्यादा रहा मुनाफा
रिलायंस का नेट प्रॉफिट देश की बड़ी आईटी कंपनियों Tata Consultancy Services TCS, Infosys इंफोसिस और HCL Technologies HCL Tech के संयुक्त मुनाफे से भी अधिक रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस का विविध कारोबार मॉडल और उपभोक्ता आधारित बिजनेस रणनीति कंपनी की लगातार मजबूत ग्रोथ का प्रमुख कारण है.
जियो, रिटेल और O2C बिजनेस बने ग्रोथ इंजन
कंपनी की ग्रोथ में Jio Platforms जियो प्लेटफॉर्म्स, Reliance Retail रिलायंस रिटेल और पारंपरिक ऑयल-टू-केमिकल्स कारोबार की अहम भूमिका रही. विशेष रूप से डिजिटल और रिटेल बिजनेस में लगातार बढ़ते ग्राहक आधार और विस्तार ने कंपनी की आय को नई ऊंचाई तक पहुंचाया.
शेयरों में भी दिखा तेजी का असर
शानदार वित्तीय प्रदर्शन का असर कंपनी के शेयरों पर भी देखने को मिला. शुक्रवार को बीएसई पर रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 4.90 रुपये की बढ़त के साथ 1,354.60 रुपये पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान शेयर 1,367.50 रुपये के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया. बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत वित्तीय नतीजों और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा कंपनी पर बना हुआ है.