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रिलायंस इंडस्ट्रीज भी करेगी EV बैट्री का निर्माण, सरकार से मिलेगा 3,620 करोड़ का इंसेंटिव
भारी उद्योग मंत्रालय को एडवांस कैमिलि सेल यानी एसीसी मैन्युफैक्चरिंग की पीएलआई योजना के लिए जारी ग्लोबल टेंडर के तहत सात बोलियां मिली थीं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी लगातार अपने कारोबार का विस्तार कर रहे हैं. पेट्रोकैमिकल से लेकर टेलीकॉम्यूनिकेश तक, ग्रीन एनर्जी से लेकर रिटेल तक अंबानी का कारोबार फैला है. अब उनकी नजर 49000 करोड़ के मार्केट वाले सेगमेंट पर है. मुकेश अंबानी इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए बैटरी का निर्माण करने जा रहे हैं. सरकार की ओर से इस बारे में जानकारी दी गई, जिसमें बताया गया कि देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को एसीसी बैटरी स्टोरेज के लिए 10 गीगावाट बैटरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की मंजूरी दी गई है. मुकेश अंबानी को इसके लिए सरकार की ओर से 3,620 करोड़ रुपए की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना का लाभ भी मिलेगा.
इन कंपनियों को दी मात
भारी उद्योग मंत्रालय को एडवांस कैमिलि सेल यानी एसीसी मैन्युफैक्चरिंग की पीएलआई योजना के लिए जारी ग्लोबल टेंडर के तहत सात बोलियां मिली थीं. इसमें 10 गीगावाट घंटे की एसीसी बैटरी स्टोरेज यूनिट के लिए 3,620 करोड़ रुपए का अधिकतम बजट रखा गया था. इस टेंडर में बोलियां लगाने वाली कंपनियों की लिस्ट में एसीएमई क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, अमारा राजा एडवांस्ड सेल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, अन्वी पावर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू नियो एनर्जी लिमिटेड, लुकास टीवीएस लिमिटेड, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और वारी एनर्जीज लिमिटेड शामिल थीं.
इस तरह से रिलायंस ने मारी बाजी
मंत्रालय ने सभी सात बोलियों का मूल्यांकन करने के बाद वित्तीय आकलन के लिए छह कंपनियों को चुना था. मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को गुणवत्ता और लागत आधारित चयन प्रणाली (क्यूसीबीएस) के आधार पर पीएलआई योजना के तहत 10 गीगावाट घंटे एसीसी क्षमता के लिए चुना गया है. मंत्रालय ने कहा कि इस इकाई की स्थापना के लिए बोलीदाता यानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का चयन अधिकतम कुल स्कोर के आधार पर किया गया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई, 2021 में पीएलआई योजना के तहत एसीसी बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम पर 18,100 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 50 गीगावाट घंटा की विनिर्माण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य घोषित किया था.
पेट्रोल-डीजल पर कम होगी निर्भरता
दो साल पहले पीएलआई स्कीम के तहत एसीसी मैन्युफैक्चरिंग के पहले चरण के आवंटन का काम पूरा हो चुका है. पहले चरण में तीन कंपनियों को 30 जीडब्ल्यूएच एसीसी स्टोरेज विकसित करने का काम दिया गया है. एसीसी की 50 जीडब्ल्यूएच क्षमता विकसित करने के लिए सरकार ने 18,100 करोड़ रुपए का प्रविधान रखा है. एसीसी क्षमता विकसित होने से कम लागत पर बिजली का स्टोरेज किया जा सकेगा और पेट्रोल व डीजल की जगह बिजली का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो सकेगा जिससे पेट्रोल व डीजल पर हमारी निर्भरता कम होगी और आयात बिल में भी भारी कमी आएगी.
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