कुर्सी संभालते ही मोदी विनिवेश पर लेंगे ताबड़तोड़ फैसले, सबसे पहले इनका होगा सौदा!

विनिवेश मोदी सरकार की प्राथमिकता में रहा है. हालांकि, चुनावी मौसम में इसकी रफ़्तार धीमी हो गई थी.

Last Modified:
Tuesday, 04 June, 2024
BWHindi

अब से कुछ ही देर में यह साफ हो जाएगा कि क्या अभी भी देश में मन में मोदी हैं? इस बात की संभावना काफी ज्यादा है लोकसभा चुनाव के नतीजे एग्जिट पोल्स की तरह ही आएंगे. यानी कि मोदी तीसरी बार देश के नेतृत्व करेंगे. नई सरकार के गठन के बाद कुछ मुद्दों पर तेजी से काम होने की उम्मीद है, इसमें विनिवेश भी शामिल है. सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपना मोदी सरकार की प्राथमिकता रही है. चुनावी मौसम में नुकसान की आशंका के चलते सरकार ने इस पर काम लगभग रोक दिया था, लेकिन प्रचंड बहुमत से वापसी के बाद उसके फिर से रफ्तार पकड़ने की संभावना है.    

SCI पर सबसे पहले निर्णय
माना जा रहा है कि नई मोदी सरकार अपने कार्यकाल के पहले 100 दिनों में विनिवेश पर फोकस कर सकती है. सबसे पहले आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Shipping Corporation of India) में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को तेजी से निपटाया जा सकता है. एक रिपोर्ट में बताया गया है कि नई सरकार आईडीबीआई बैंक और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) में हिस्सेदारी बेचने को लेकर जल्द कोई बड़ा फैसला ले सकती है. शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में सरकार की 63.75% हिस्सेदारी है. शुरुआत में SCI के लिए बोलियां आमंत्रित किए जाने की संभावना है. बता दें कि SCI की लैंड असेट यूनिट को पहले ही अलग किया जा चुका है और उसे एक्सचेंजों पर अलग से लिस्ट किया गया था.

IDBI में है इतनी हिस्सेदारी
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि आईडीबीआई बैंक के विनिवेश प्रक्रिया में भी तेजी आएगी, जो चुनावी माहौल के चलते ठंडे बस्ते में थी. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया IDBI के संभावित खरीदारों के तौर पर उनके नामों पर विचार कर रहा है, जिन्होंने बैंक के अधिग्रहण में रुचि दिखाई थी. RBI से हरी झंडी मिलने के बाद निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) इस पर फाइनल अप्रूवल देगा. आईडीबीआई बैंक में सरकार के पास 49.24% और एलआईसी की 45.48% हिस्सेदारी है.

LIC और GIC का भी नंबर
इसके अलावा, नई मोदी सरकार जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) में भी अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है. इसी साल अप्रैल में खरब आई थी कि सरकार को GIC के लिए निवेशकों से अच्छा रिस्पांस मिला है. ऐसे में सरकार अब अपने शेयरों मूल्य के आधार पर कंपनी की 10% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है. इसी तरह, सरकार LIC में भी अपनी हिस्सेदारी घटाने पर फोकस कर सकती है. 2022 में LIC की स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग हुई थी. तब से अगले 10 वर्षों में सरकार ने 25% हिस्सेदारी बेचने का लक्ष्य निर्धारित किया है. 
 


कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज की वापसी कितनी व्यावहारिक? जानिए क्या कहते हैं बाजार विशेषज्ञ

विशेषज्ञों की राय बताती है कि CSE का पुनर्जीवन केवल एक ऐतिहासिक संस्था को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह पूर्वी भारत के वित्तीय भविष्य से जुड़ा मुद्दा भी बन सकता है.

रितु राणा by
Published - Thursday, 25 June, 2026
Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
BWHindia

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 118 साल पुराने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) को पुनर्जीवित करने की पहल ने वित्तीय जगत में नई बहस छेड़ दी है. हाल ही में राज्य सरकार ने बजट में एक्सचेंज को दोबारा शुरू करने की मंशा जाहिर की थी, जिसके बाद CSE के भविष्य और उसकी संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में बाजार और निवेश जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि CSE की वापसी केवल एक ऐतिहासिक संस्थान के पुनर्जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वी भारत के लिए नए वित्तीय इकोसिस्टम और पूंजी बाजार के विकास का अवसर भी बन सकती है. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि NSE और BSE के वर्चस्व वाले मौजूदा दौर में CSE के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी होंगी. 

CSE सिर्फ एक्सचेंज नहीं, 'कैपिटल एक्सेस हब' बन सकता है

एसआईपी यात्रा के संस्थापक और वित्त विशेषज्ञ हर्ष गुप्ता का मानना है कि CSE को केवल एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के रूप में देखना इसकी भूमिका को सीमित करना होगा. उनके मुताबिक, पूर्वी भारत में MSME, स्टार्टअप और क्षेत्रीय उद्योगों के लिए पूंजी तक पहुंच अभी भी एक बड़ी चुनौती है. यदि CSE को आधुनिक तकनीक, मजबूत नियामकीय ढांचे और निवेशक शिक्षा के साथ दोबारा विकसित किया जाता है, तो यह पूर्वी भारत के लिए एक 'कैपिटल एक्सेस हब' बन सकता है.

हालांकि, उन्होंने कहा कि इस स्तर पर CSE की तुलना GIFT City से करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि GIFT City की सफलता अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं, कर प्रोत्साहनों और वैश्विक पूंजी प्रवाह पर आधारित है.

NSE और BSE के बीच तीसरे एक्सचेंज की राह आसान नहीं

गौरव भगत अकादमी के संस्थापक गौरव भगत का कहना है कि CSE का ऐतिहासिक महत्व जरूर है, लेकिन केवल भावनात्मक आधार पर किसी एक्सचेंज को सफल नहीं बनाया जा सकता. उन्होंने कहा कि भारतीय पूंजी बाजार में आज NSE और BSE की मजबूत पकड़ है. ऐसे में किसी तीसरे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के लिए जगह बनाना चुनौतीपूर्ण होगा.

उनके अनुसार, यदि पश्चिम बंगाल सरकार फिनटेक, वैकल्पिक निवेश फंड, स्टार्टअप कैपिटल और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने वाला व्यापक वित्तीय इकोसिस्टम तैयार करती है, तभी CSE की कहानी पुनर्जीवन से आगे बढ़कर बदलाव की कहानी बन सकती है.

लिक्विडिटी और वॉल्यूम सबसे बड़ी चुनौती

129 Wealth के फंड मैनेजर और Paul Asset के रिसर्च एनालिस्ट प्रसनजीत पॉल का मानना है कि आज के दौर में स्टॉक एक्सचेंज स्थान से नहीं, बल्कि लिक्विडिटी और टेक्नोलॉजी से चलते हैं. उन्होंने कहा कि कोलकाता के निवेशकों को पहले से ही NSE और BSE तक आसान पहुंच प्राप्त है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती ट्रेडिंग वॉल्यूम और निवेशकों का भरोसा दोबारा हासिल करना होगी.

प्रसनजीत पॉल के अनुसार, CSE को NSE और BSE से सीधी प्रतिस्पर्धा करने के बजाय MSME, स्टार्टअप्स और क्षेत्रीय व्यवसायों के लिए एक विशेष प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जाना चाहिए.

क्या बन सकता है पूर्वी भारत का GIFT City?

विशेषज्ञों की राय में CSE के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह केवल एक पुराने स्टॉक एक्सचेंज के रूप में लौटेगा या फिर पूर्वी भारत के लिए नए वित्तीय इकोसिस्टम का आधार बनेगा. GIFT City की तरह किसी वित्तीय केंद्र के विकास के लिए कर प्रोत्साहन, नीतिगत समर्थन, वैश्विक पूंजी, फिनटेक इकोसिस्टम और दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत होती है. ऐसे में CSE का भविष्य काफी हद तक सरकार की नीतियों, नियामकीय मंजूरी और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगा.

एक समय BSE को भी देता था कड़ी टक्कर

बता दें, कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज कभी देश के सबसे सक्रिय क्षेत्रीय स्टॉक एक्सचेंजों में शामिल था. 1990 के दशक के आखिर और 2000 के शुरुआती वर्षों में कई मौकों पर CSE का दैनिक कारोबार हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. एक समय यहां 4,000 से अधिक कंपनियां सूचीबद्ध थीं और यह देश का दूसरा सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज माना जाता था. 

क्षेत्रीय एक्सचेंजों का दौर लगभग खत्म हो चुका है

विशेषज्ञों के अनुसार, देश में कभी 20 से अधिक क्षेत्रीय स्टॉक एक्सचेंज सक्रिय हुआ करते थे, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग, ऑनलाइन ब्रोकिंग और केंद्रीकृत क्लियरिंग सिस्टम के विस्तार के बाद अधिकांश क्षेत्रीय एक्सचेंज बंद हो गए. आज भारतीय शेयर बाजार में NSE और BSE का दबदबा है, जबकि अन्य एक्सचेंजों की हिस्सेदारी बेहद सीमित है. ऐसे में CSE के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों और ब्रोकरों को दोबारा आकर्षित करने की होगी. 

तकनीक और लिक्विडिटी बनेगी सफलता की कुंजी

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक पूंजी बाजार में किसी स्टॉक एक्सचेंज की सफलता उसकी भौगोलिक स्थिति से ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम, तकनीकी क्षमता और लिक्विडिटी पर निर्भर करती है. यदि किसी एक्सचेंज पर पर्याप्त कारोबार नहीं होता, तो निवेशकों और ब्रोकरों की रुचि भी सीमित रह जाती है. यही कारण है कि CSE के पुनर्जीवन में तकनीकी प्लेटफॉर्म और बाजार सहभागिता दोनों अहम भूमिका निभाएंगे. 

राज्य सरकार की व्यापक वित्तीय रणनीति

पश्चिम बंगाल सरकार केवल CSE के पुनर्जीवन तक सीमित नहीं रहना चाहती. राज्य सरकार लाभ में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भी पूंजी बाजार में सूचीबद्ध करने की संभावनाएं तलाश रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य की कंपनियां भविष्य में सूचीबद्ध होती हैं, तो इससे CSE को शुरुआती कारोबार और लिस्टिंग गतिविधियों का आधार मिल सकता है.

पूर्वी भारत के लिए नया अवसर

पूर्वी भारत में MSME, स्टार्टअप, विनिर्माण और निर्यात आधारित उद्योगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. यदि CSE क्षेत्रीय उद्यमों, SME कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्लेटफॉर्म विकसित करता है, तो यह पूर्वी भारत में पूंजी तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. यही कारण है कि कई विशेषज्ञ CSE को पारंपरिक एक्सचेंज के बजाय एक विशेष क्षेत्रीय वित्तीय मंच के रूप में विकसित करने की वकालत कर रहे हैं.
 


AI, डेटा और साइबर सुरक्षा से बदलेगा मैन्युफैक्चरिंग का भविष्य, KPMG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब केवल तकनीक के प्रयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर AI को अपने संचालन, सप्लाई चेन और उत्पादन प्रक्रियाओं में शामिल कर रही हैं.

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
BWHindia

भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में व्यवधान और तेजी से बदलती तकनीकों के बीच वैश्विक औद्योगिक विनिर्माण (इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. KPMG की ग्लोबल टेक रिपोर्ट 2026 के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा आधारित निर्णय और तकनीक आधारित लचीलापन इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब केवल तकनीक के प्रयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर AI को अपने संचालन, सप्लाई चेन और उत्पादन प्रक्रियाओं में शामिल कर रही हैं.

22 देशों के 258 टेक लीडर्स की राय

KPMG Global Tech Report 2026 – Industrial Manufacturing में 22 देशों और क्षेत्रों के 258 तकनीकी नेताओं की राय शामिल की गई है. इसमें मेटल्स, एडवांस्ड मैटेरियल्स, इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स, स्पेस, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे सेक्टरों को शामिल किया गया है. रिपोर्ट उद्योग क्षेत्र में चल रहे डिजिटल बदलाव और तकनीकी निवेश की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है.

भारत में तेज हो रहा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में औद्योगिक कंपनियां तेजी से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं, बढ़ती डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता और उद्योगों में डिजिटलीकरण इस बदलाव को गति दे रहे हैं. हालांकि, डेटा इंटीग्रेशन, साइबर सुरक्षा, कुशल प्रतिभा की कमी और पुरानी तकनीकी व्यवस्था जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं. ऐसे में कंपनियां अपने ऑपरेटिंग मॉडल को आधुनिक बनाने और तकनीकी आधार को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं.

AI का बढ़ता इस्तेमाल

मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब AI का इस्तेमाल केवल प्रयोग के तौर पर नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर कर रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां ऑपरेशनल एफिशिएंसी, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, क्वालिटी कंट्रोल और सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन के लिए AI का उपयोग बढ़ा रही हैं. इसके साथ ही आईटी, बिजनेस और रिस्क मैनेजमेंट टीमों के बीच सहयोग भी बढ़ रहा है, जिससे जिम्मेदार AI और साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जा सके.

भारत में तकनीक बनेगी ग्रोथ का इंजन

KPMG इंडिया के पार्टनर और नेशनल सेक्टर लीडर (इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग) एस. सतीश ने कहा कि भारतीय कंपनियां अब तकनीक को केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि बिजनेस ग्रोथ के महत्वपूर्ण साधन के रूप में देख रही हैं. उन्होंने कहा कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी निवेश और AI को बढ़ती स्वीकृति भारत में इंडस्ट्रियल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही है. जो कंपनियां डेटा, स्केलेबल प्लेटफॉर्म, स्किल डेवलपमेंट और साइबर सुरक्षा में निवेश करेंगी, वे भविष्य में अधिक मजबूत स्थिति में होंगी.

रिपोर्ट की प्रमुख बातें

1. 87 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग अधिकारियों का मानना है कि एडवांस टेक्नोलॉजी भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगी.
2. 80 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि तकनीक निवेश से बेहतर मूल्य सृजित हो रहा है.
3. 70 प्रतिशत कंपनियां AI लागू करने के लिए केंद्रीकृत मॉडल अपना रही हैं.
4. 76 प्रतिशत अधिकारियों ने खराब या अविश्वसनीय डेटा को AI के लिए सबसे बड़ा जोखिम बताया.
5. 68 प्रतिशत कंपनियां अगले 12 महीनों में बड़े स्तर पर AI लागू करने की तैयारी कर रही हैं.
6. 48 प्रतिशत कंपनियां साइबर सुरक्षा निवेश में बड़ी बढ़ोतरी की योजना बना रही हैं.
7. 49 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि AI आधारित उपयोग से उन्हें वास्तविक व्यावसायिक लाभ मिल रहा है.
8. 89 प्रतिशत अधिकारियों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में AI एजेंट्स का प्रबंधन एक महत्वपूर्ण कार्य कौशल बन जाएगा.

साइबर सुरक्षा और डेटा पर बढ़ा फोकस

रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा प्रबंधन का महत्व भी तेजी से बढ़ रहा है. कंपनियां अब केवल तकनीकी निवेश नहीं कर रहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल ढांचा तैयार करने पर भी जोर दे रही हैं.

भविष्य की औद्योगिक वृद्धि में तकनीक की बड़ी भूमिका

KPMG की रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है. जो कंपनियां AI को बड़े स्तर पर अपनाने, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने और कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करने में सफल होंगी, वही आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास की अगुवाई करेंगी.
 


महाराष्ट्र में निवेश बढ़ाने की तैयारी, अमेजन CEO एंडी जेसी से मिले फडणवीस; डेटा सेंटर और AI पर जोर

मुंबई में हुई अहम बैठक, महाराष्ट्र सरकार ने डेटा सेंटर, हेल्थकेयर और AI स्किल डेवलपमेंट में नए निवेश का दिया न्योता

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
BWHindia

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को मुंबई में अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एंडी जेसी से मुलाकात की और कंपनी को राज्य में डेटा सेंटर, हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कौशल विकास के क्षेत्रों में नए निवेश के लिए आमंत्रित किया. मुख्यमंत्री ने इस बैठक को महाराष्ट्र और अमेजन के बीच एक दशक पुराने सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.

2016 से मजबूत हो रही साझेदारी

देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अमेजन ने जून 2016 में मुंबई को भारत में अपने पहले क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर रीजन के रूप में चुना था. इसके बाद से महाराष्ट्र और अमेजन के बीच सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और राज्य देश की टेक्नोलॉजी राजधानी के रूप में उभरा है. उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में महाराष्ट्र अमेजन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है.

8.3 अरब डॉलर के निवेश पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक के दौरान 2025 में दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान AWS के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई. इस समझौते के तहत महाराष्ट्र में 8.3 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की गई थी, जो किसी एक राज्य में अमेजन की अब तक की सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धता मानी जा रही है. इस निवेश से भारत में करीब 83,100 रोजगार सृजित होने का अनुमान है.

महाराष्ट्र में तेजी से बढ़ रहा अमेजन का नेटवर्क

फडणवीस ने बताया कि अमेजन वर्तमान में महाराष्ट्र में छह फुलफिलमेंट सेंटर और 200 से अधिक डिलीवरी स्टेशनों का संचालन कर रहा है. इसके जरिए कंपनी देश और विदेश के ग्राहकों तक सेवाएं पहुंचा रही है.

राज्य के 22,000 से अधिक उद्यमी और छोटे व्यवसाय अमेजन के प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैश्विक बाजारों में अपने उत्पादों का निर्यात कर रहे हैं. ठाणे, मुंबई, पुणे और कोल्हापुर देश के शीर्ष 50 निर्यातक शहरों में शामिल हैं.

पर्यावरण और सामाजिक परियोजनाओं में भी योगदान

मुख्यमंत्री ने राज्य में अमेजन की पर्यावरणीय और सामाजिक पहलों की भी सराहना की. उन्होंने बताया कि कंपनी ने वैतरणा हाइड्रोबेसिन परियोजना में 10 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिससे हर वर्ष 1.3 अरब लीटर पानी के पुनर्भरण का लक्ष्य है और करीब 700 किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा, पश्चिमी घाट में तीन लाख पेड़ लगाने और ठाणे क्रीक के आसपास फ्लेमिंगो पक्षियों के आवास संरक्षण के लिए 12 लाख डॉलर की परियोजना भी चलाई जा रही है.

युवाओं के कौशल विकास पर फोकस

अमेजन राज्य में युवाओं को नई तकनीकों और डिजिटल कौशलों का प्रशिक्षण देने पर भी काम कर रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की कार्यबल तैयार करने में कंपनी की यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

तकनीक, रोजगार और स्थिरता पर आगे बढ़ेगा सहयोग

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार तकनीक, रोजगार सृजन, स्थिरता और डिजिटल विकास के क्षेत्रों में अमेजन के साथ सहयोग को और गहरा करना चाहती है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और अमेजन के बीच यह साझेदारी आने वाले वर्षों में निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर पैदा कर सकती है.
 


LEAD Group में बड़ा नेतृत्व बदलाव, ग्रोथ और AI इनोवेशन को मिलेगी नई रफ्तार

2030 तक 1.2 करोड़ छात्रों और 25,000 स्कूलों तक पहुंचने के लक्ष्य के बीच कंपनी ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी नई जिम्मेदारियां

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
BWHindia

देश की प्रमुख स्कूल लर्निंग सिस्टम कंपनी LEAD Group ने अपने अगले विकास चरण और तकनीकी नवाचार को गति देने के लिए नेतृत्व स्तर पर कई अहम बदलावों की घोषणा की है. कंपनी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपते हुए संगठन को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है. कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 1.2 करोड़ छात्रों और 25,000 स्कूलों तक अपनी पहुंच बनाना है. इसके लिए LEAD Group तकनीक आधारित शिक्षा समाधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बेहतर शिक्षण परिणामों पर विशेष फोकस कर रही है.

अजय कश्यप संभालेंगे Ms Curie.AI की कमान

नई नियुक्तियों के तहत अजय कश्यप को LEAD Group की AI-आधारित सॉल्यूशंस इकाई **Ms Curie.AI** का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया गया है. नई भूमिका में अजय कश्यप व्यक्तिगत शिक्षण (Personalised Learning) और शिक्षकों को सशक्त बनाने के लिए AI आधारित उत्पादों के विकास का नेतृत्व करेंगे. कंपनी का मानना है कि ये समाधान भविष्य की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा दे सकते हैं.

सोहम मुखर्जी बने चीफ ग्रोथ ऑफिसर

कंपनी ने सोहम मुखर्जी को चीफ ग्रोथ ऑफिसर (CGO) नियुक्त किया है. वह देशभर में स्कूलों के साथ साझेदारी बढ़ाने, नए व्यावसायिक अवसर तलाशने और कंपनी की पहुंच को और मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे. उनकी भूमिका अधिक से अधिक छात्रों तक LEAD Group की सेवाएं पहुंचाने में अहम मानी जा रही है.

इंद्रनील बनर्जी को मिली प्रोडक्ट की जिम्मेदारी

इंद्रनील बनर्जी को चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर (CPO) बनाया गया है. वह कंपनी के उत्पाद विकास और नवाचार रणनीति का नेतृत्व करेंगे. उनका फोकस ऐसे छात्र-केंद्रित समाधानों को विकसित करने पर रहेगा, जो कक्षाओं में बेहतर प्रभाव डालें और सीखने के परिणामों को मजबूत करें.

गुरुप्रसाद होला बने चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर

गुरुप्रसाद होला को कंपनी का नया चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) नियुक्त किया गया है. वह कंपनी की तकनीकी रणनीति का नेतृत्व करते हुए सुरक्षित, स्केलेबल और भविष्य के लिए तैयार तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित करने पर काम करेंगे, जिससे बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके.

कंपनी ने आंतरिक प्रतिभाओं पर जताया भरोसा

LEAD Group के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमीत मेहता ने कहा कि कंपनी विकास, नवाचार और प्रभाव के नए चरण में प्रवेश कर रही है, ऐसे में नेतृत्व टीम को मजबूत करना बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि अजय कश्यप, इंद्रनील बनर्जी, गुरुप्रसाद होला और सोहम मुखर्जी ने कंपनी की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और संगठन के भीतर मौजूद प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना कंपनी की प्राथमिकता है.

2030 के विजन पर रहेगा फोकस

कंपनी का कहना है कि ये नेतृत्व परिवर्तन एक ऐसे भविष्य-उन्मुख संगठन के निर्माण की दिशा में उठाया गया कदम है, जो स्थायी विकास के साथ-साथ देशभर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच को बढ़ा सके. मजबूत नेतृत्व टीम के साथ LEAD Group आने वाले वर्षों में स्कूल शिक्षा को नई दिशा देने और हर बच्चे को उसकी पूरी क्षमता तक पहुंचाने के अपने मिशन को आगे बढ़ाने पर जोर देगी.
 


42% कम बारिश से 315 जिलों पर संकट, खरीफ फसलों को बचाने के लिए सरकार का एक्शन प्लान तैयार

केंद्र सरकार ने राज्यों को जिला-स्तरीय कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि कम बारिश और सिंचाई संकट के बावजूद किसानों को राहत मिल सके और फसल उत्पादन पर असर कम किया जा सके.

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
BWHindia

कमजोर मानसून और अल नीनो के बढ़ते खतरे ने देश की कृषि व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. 23 जून तक देश में सामान्य से 42 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके बाद केंद्र सरकार ने अलर्ट जारी करते हुए 315 संवेदनशील जिलों की पहचान की है. इन जिलों में खरीफ फसलों पर संकट गहराने की आशंका को देखते हुए आपातकालीन योजनाओं पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है.

केंद्र सरकार ने राज्यों को जिला-स्तरीय कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि कम बारिश और सिंचाई संकट के बावजूद किसानों को राहत मिल सके और फसल उत्पादन पर असर कम किया जा सके.

कमजोर मानसून ने बढ़ाई सरकार की चिंता

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को देश में कमजोर मानसून की स्थिति की समीक्षा की. उन्होंने जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक बुआई पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया.

विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो का प्रभाव आमतौर पर सामान्य से कम बारिश, सूखे की स्थिति और खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट से जुड़ा रहा है. यही कारण है कि सरकार ने समय रहते तैयारी शुरू कर दी है.

315 जिलों की पहचान, 111 जिले सबसे ज्यादा जोखिम में

कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने संयुक्त रूप से वर्षा के पैटर्न, सिंचाई सुविधाओं और स्थानीय मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर 315 जिलों को जोखिम वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया है. इनमें 111 जिलों को हाई प्रायोरिटी श्रेणी में रखा गया है, जहां सिंचाई सुविधा 25 प्रतिशत से भी कम है. 76 जिलों को मीडियम प्रायोरिटी श्रेणी में रखा गया है, जहां सिंचाई का दायरा 25 से 50 प्रतिशत के बीच है.

वहीं, 128 जिलों को अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला माना गया है, क्योंकि इन क्षेत्रों में जलाशयों और अन्य जल स्रोतों के माध्यम से बेहतर सिंचाई उपलब्ध है.

इन राज्यों में सबसे ज्यादा असर की आशंका

कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव से प्रभावित जिलों की सबसे अधिक संख्या मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में है. इन राज्यों में कृषि उत्पादन पर प्रभाव को कम करने के लिए विशेष निगरानी की जा रही है.

खरीफ उत्पादन का लक्ष्य बरकरार

सरकार ने वर्ष 2026 के खरीफ सीजन के लिए लगभग 17.6 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष के उत्पादन के बराबर है. हालांकि, कम बारिश के बावजूद 22 जून तक 1.19 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष के 1.17 करोड़ हेक्टेयर से अधिक है. कृषि मंत्री ने माना कि सोयाबीन की बुआई अभी भी अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है.

किसानों के लिए तैयार किया गया बैकअप प्लान

बारिश की संभावित कमी से निपटने के लिए ICAR ने जिला स्तर पर आपातकालीन योजनाएं तैयार की हैं. इन योजनाओं में कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों की खेती, बुआई के समय में बदलाव और फसल प्रबंधन के नए तरीकों की सिफारिश की गई है. सरकार का मानना है कि समय रहते की गई यह तैयारी किसानों की आय और उत्पादन दोनों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है.

अल नीनो और कमजोर मानसून से बढ़ सकती हैं चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले सप्ताहों में मानसून की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कृषि उत्पादन, ग्रामीण आय और खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है. ऐसे में सरकार की तैयारियां और जिला स्तर पर बनाई गई रणनीति आने वाले महीनों में अहम भूमिका निभाएगी.
 


बेंगलुरु रोडशो में यूपी को ₹50,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, GCC हब बनने की ओर बड़ा कदम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में 15 से अधिक कंपनियों ने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए.

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
BWHindia

उत्तर प्रदेश ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक और बड़ी सफलता हासिल की है. बेंगलुरु में आयोजित निवेशक रोडशो के दौरान राज्य को 50,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में 15 से अधिक कंपनियों ने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए. यह निवेश प्रस्ताव ‘उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026’ के दौरान सामने आए. राज्य सरकार उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत देश और विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.

रियल एस्टेट और बिजनेस पार्क सेक्टर से सबसे बड़े निवेश प्रस्ताव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सबसे अधिक निवेश प्रस्ताव रियल एस्टेट, औद्योगिक पार्क और बिजनेस पार्क सेक्टर से मिले हैं. होराइजन (ब्लैकस्टोन) ने 10,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है. वहीं, एम्बेसी और रहेजा माइंडस्पेस REIT ने 5,000-5,000 करोड़ रुपये निवेश की प्रतिबद्धता जताई है.

प्रेस्टीज ग्रुप ने 15,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना पेश की है, जबकि सत्वा डेवलपर्स ने 4,000 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव रखा है. श्रीराम प्रॉपर्टीज ने भी राज्य में निजी औद्योगिक और बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए समझौता किया है.

GCC सेक्टर में भी बढ़ी वैश्विक कंपनियों की दिलचस्पी

उत्तर प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) क्षेत्र में भी नई कंपनियों की रुचि मिली है. एलजी, एऑन, मेटलाइफ और टेबल स्पेस जैसी कंपनियों ने राज्य में निवेश को लेकर समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए. वहीं, टीमलीज ने उत्तर प्रदेश में GCC के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से गैर-वित्तीय समझौता किया है. इसका उद्देश्य राज्य में प्रशिक्षित पेशेवरों की मजबूत पाइपलाइन तैयार करना है.

निवेशकों के साथ बंद कमरे में हुई अहम बैठकें

बेंगलुरु दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैश्विक निवेशकों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ तीन बंद कमरे की गोलमेज बैठकों में हिस्सा लिया. इन बैठकों में शहरी अवसंरचना, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी सेवाएं और राज्य में बढ़ते प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने राज्य की औद्योगिक नीतियों, तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक सुधारों को दीर्घकालिक निवेश के लिए अनुकूल बताया.

2031 तक 500 GCC स्थापित करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख GCC हब बनाने का रोडमैप भी पेश किया. इसके तहत वर्ष 2031 तक 4 करोड़ वर्गफुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस विकसित करने और 500 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है. राज्य सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश के शीर्ष तीन एफडीआई गंतव्यों में शामिल करना है.

गूगल क्लाउड के साथ AI और डिजिटल तकनीक पर चर्चा

बेंगलुरु प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गूगल क्लाउड के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की. इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा आधारित तकनीकों के उपयोग पर चर्चा हुई. बैठक में शासन व्यवस्था, कृषि, एमएसएमई और स्टार्टअप सेक्टर में डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार किया गया. राज्य सरकार का मानना है कि नई तकनीकों के जरिए सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सकती है और किसानों, युवाओं तथा छोटे कारोबारियों को अधिक लाभ पहुंचाया जा सकता है.

उत्तर प्रदेश को निवेश केंद्र बनाने की रणनीति

राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक नीतियां, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े निवेश केंद्रों में बदल सकते हैं. बेंगलुरु रोडशो में मिले निवेश प्रस्ताव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माने जा रहे हैं.
 


जुलाई में IPO की बरसात! SBI, Zepto समेत कई दिग्गज कंपनियां जुटाएंगी ₹45,000 करोड़

जुलाई में आने वाले संभावित आईपीओ में सबसे बड़ा इश्यू SBI फंड्स मैनेजमेंट का हो सकता है. कंपनी 12,000 से 13,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है.

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
BWHindia

भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर आईपीओ बाजार की रौनक लौटने जा रही है. जुलाई 2026 में एक दर्जन से अधिक कंपनियां अपने पब्लिक इश्यू लॉन्च करने की तैयारी में हैं और इनके जरिए करीब 45,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने का अनुमान है. मजबूत होते बाजार, सुधरते निवेशक भरोसे और वैश्विक अनिश्चितताओं में कमी के बीच कई बड़ी कंपनियां लिस्टिंग की राह पर आगे बढ़ रही हैं.

जुलाई में IPO बाजार में आएगी नई तेजी

पिछले कुछ महीनों की सुस्ती के बाद प्राइमरी मार्केट एक बार फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है. निवेश बैंकर्स के अनुसार, बाजार की परिस्थितियां अब कंपनियों के पक्ष में हैं और कई सेक्टरों की कंपनियां अपनी लिस्टिंग योजनाओं को अंतिम रूप दे रही हैं. सेंसेक्स और निफ्टी में हालिया मजबूती ने भी निवेशकों के भरोसे को बढ़ाया है, जिससे कंपनियों को बेहतर वैल्यूएशन मिलने की उम्मीद है.

SBI फंड्स, मणिपाल हेल्थ और Zepto पर नजर

जुलाई में आने वाले संभावित आईपीओ में सबसे बड़ा इश्यू SBI फंड्स मैनेजमेंट का हो सकता है. कंपनी 12,000 से 13,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है. इसके अलावा मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज का लगभग 11,000 करोड़ रुपये और क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto का करीब 8,000 करोड़ रुपये का आईपीओ भी बाजार में आने की संभावना है.

इन तीन बड़े इश्यू के जरिए ही करीब 32,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने का अनुमान है. इसके अलावा गाजा कैपिटल, नैक पैकेजिंग और इनोवेटिव व्यू जैसी कंपनियां भी आईपीओ पाइपलाइन में शामिल हैं.

निवेशकों का भरोसा बना सबसे बड़ा सहारा

JM फाइनेंशियल की प्रबंध निदेशक और सीईओ (इन्वेस्टमेंट बैंकिंग) सोनिया दासगुप्ता के अनुसार, आने वाले महीनों में आईपीओ गतिविधियों में और तेजी देखने को मिल सकती है. उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं में धीरे-धीरे कमी आ रही है और भारतीय निवेशकों का भरोसा बाजार में लगातार मजबूत बना हुआ है. यही वजह है कि कंपनियां अब बाजार में उतरने के लिए अनुकूल समय देख रही हैं.

इस साल क्यों धीमा पड़ा था IPO बाजार?

साल 2025 की दूसरी छमाही में आईपीओ बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी, लेकिन 2026 की शुरुआत अपेक्षाकृत धीमी रही. इसकी प्रमुख वजह पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की कमजोर भागीदारी रही.

इस साल अप्रैल तक 18 आईपीओ बाजार में आए, जबकि मई में एक भी नई कंपनी ने लिस्टिंग नहीं की . हालांकि अब वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और निवेशकों की बढ़ती रुचि से बाजार में नई ऊर्जा दिखाई दे रही है .

मजबूत कंपनियों को मिल रहा निवेशकों का साथ

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अब केवल मजबूत बुनियादी ढांचे, टिकाऊ बिजनेस मॉडल और दीर्घकालिक विकास क्षमता वाली कंपनियों में ही निवेश करना पसंद कर रहे हैं. रिटेल निवेशकों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जिससे प्राइमरी मार्केट को अतिरिक्त मजबूती मिल रही है .

173 कंपनियों को मिल चुकी है सेबी की मंजूरी

19 जून तक 173 कंपनियों को सेबी से आईपीओ लाने की मंजूरी मिल चुकी है . इन कंपनियों का लक्ष्य कुल मिलाकर 2.7 लाख करोड़ रुपये जुटाना है . इसके अलावा 64 अन्य कंपनियां अभी नियामकीय मंजूरी का इंतजार कर रही हैं . इनमें एनएसई के लगभग 30,000 करोड़ रुपये के संभावित आईपीओ और जियो प्लेटफॉर्म्स के बहुप्रतीक्षित इश्यू पर भी बाजार की नजर बनी हुई है .

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार की मौजूदा मजबूती और निवेशकों का भरोसा बना रहता है तो जुलाई भारतीय आईपीओ बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण महीना साबित हो सकता है . हालांकि निवेशकों को किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और बिजनेस मॉडल का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए .

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


बड़ी NBFC के लिए RBI के नए नियम, ₹1 लाख करोड़ एसेट पर लागू होंगे कड़े मानदंड

नई गाइडलाइंस से बड़ी एनबीएफसी होंगी ‘अपर लेयर’ में शामिल, हर तीन साल में होगी समीक्षा

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
BWHindia

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के शैडो बैंकिंग सेक्टर पर निगरानी और सख्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है . केंद्रीय बैंक ने एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक परिसंपत्ति (एसेट) वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) को ‘अपर लेयर’ श्रेणी में रखने का फैसला किया है . इस श्रेणी की कंपनियों पर अधिक कड़े नियामकीय मानदंड लागू होंगे ताकि वित्तीय प्रणाली में किसी तरह का जोखिम पैदा न हो और सिस्टम की स्थिरता बनी रहे .

₹1 लाख करोड़ एसेट वाली NBFC होंगी ‘अपर लेयर’ में शामिल

आरबीआई के नए नियमों के मुताबिक, जिन एनबीएफसी का एसेट साइज नवीनतम वित्तीय विवरण के आधार पर एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक होगा, उन्हें ‘एनबीएफसी-अपर लेयर’ श्रेणी में रखा जाएगा . ऐसी कंपनियों पर अतिरिक्त नियामकीय निगरानी और अनुपालन संबंधी नियम लागू होंगे .

केंद्रीय बैंक का मानना है कि बड़ी एनबीएफसी वित्तीय प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और इनमें किसी प्रकार की गड़बड़ी व्यापक वित्तीय जोखिम पैदा कर सकती है . इसलिए इनके लिए अधिक सख्त नियमों की आवश्यकता है .

चार-स्तरीय रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत होगा वर्गीकरण

आरबीआई ने स्केल बेस्ड रेगुलेशन (Scale Based Regulation) के तहत एनबीएफसी को चार श्रेणियों में बांटा है .

1. एनबीएफसी-बेस लेयर
2. एनबीएफसी-मिडिल लेयर
3. एनबीएफसी-अपर लेयर
4. एनबीएफसी-टॉप लेयर

केंद्रीय बैंक कंपनियों के आकार, जोखिम प्रोफाइल और वित्तीय प्रणाली में उनकी अहमियत के आधार पर उनका वर्गीकरण करता है . अपर लेयर में आने वाली कंपनियों के लिए पूंजी, गवर्नेंस, जोखिम प्रबंधन और निगरानी से जुड़े नियम अधिक सख्त होंगे .

हर तीन साल में होगी सीमा की समीक्षा

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि एनबीएफसी-अपर लेयर में शामिल करने के लिए तय की गई एक लाख करोड़ रुपये की सीमा की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी . इसके लिए हर तीन साल में मानदंडों की समीक्षा की जाएगी ताकि बदलते आर्थिक और वित्तीय परिदृश्य के अनुसार नियमों को अपडेट किया जा सके .

केंद्रीय बैंक का मानना है कि वित्तीय क्षेत्र के आकार और जोखिम में बदलाव के साथ नियामकीय ढांचे में भी लचीलापन जरूरी है .

बैंक समूह की NBFC पर भी लागू होंगे नियम

आरबीआई ने कहा कि जो एनबीएफसी किसी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की समूह इकाई हैं, उन पर भी ये नियम लागू होंगे . यदि कोई व्यवसाय या गतिविधि बैंक और उसकी समूह एनबीएफसी दोनों संचालित कर रहे हैं, तो संबंधित नियामकीय मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा . इससे बैंकिंग और शैडो बैंकिंग के बीच संभावित जोखिमों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी .

वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम वित्तीय प्रणाली की स्थिरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है . बड़ी एनबीएफसी अब बैंकिंग प्रणाली की तरह ही व्यापक प्रभाव रखती हैं, इसलिए उनकी निगरानी और जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना जरूरी हो गया है . नए नियमों से न केवल शैडो बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि किसी बड़े वित्तीय संकट की स्थिति में पूरे सिस्टम पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा .
 


6 साल बाद खुला भारत-चीन व्यापार का रास्ता, लिपुलेख दर्रे से तिब्बत जाएंगे भारतीय व्यापारी

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से 26 जून को भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत के लिए रवाना होगा. प्रशासन ने पहले चरण में 26 व्यापार पास जारी किए हैं, जिनमें 17 व्यापारी और 9 सहायक शामिल हैं.

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
BWHindia

करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद भारत और चीन के बीच उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से सीमापार व्यापार एक बार फिर शुरू होने जा रहा है. 26 जून से भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत के लिए रवाना होगा. कोविड महामारी और सीमा तनाव के बाद रुका यह पारंपरिक व्यापार अब फिर बहाल हो रहा है, जिसे सीमावर्ती अर्थव्यवस्था, स्थानीय कारोबार और भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. हालांकि, इस फैसले के साथ नेपाल ने एक बार फिर लिपुलेख क्षेत्र को लेकर अपनी आपत्ति भी दोहराई है.

26 जून को रवाना होगा पहला व्यापारी दल

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से सीमापार व्यापार की बहाली के तहत 26 जून को भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत के लिए रवाना होगा. प्रशासन ने पहले चरण में 26 व्यापार पास जारी किए हैं, जिनमें 17 व्यापारी और 9 सहायक शामिल हैं. व्यापारियों ने अपना सामान लिपुलेख दर्रे के पास स्थित गोदामों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है. साथ ही गुंजी में कस्टम कार्यालय भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित किया जा सके.

दूसरे चरण में और व्यापारियों को मिल सकते हैं पास

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वर्ष 103 से अधिक व्यापारियों ने आवेदन किया है. प्रशासन आने वाले दिनों में दूसरे चरण के तहत करीब 25 और व्यापारियों को व्यापार पास जारी कर सकता है. व्यापार बहाली से सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारियों में उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि यह कारोबार लंबे समय से स्थानीय लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है.

अब याक और खच्चरों की जगह वाहनों से होगा परिवहन

इस बार व्यापार प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. पहले तिब्बत तक सामान पहुंचाने के लिए खच्चरों और याक का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब सड़क संपर्क बेहतर होने के कारण अधिकतर यात्रा और माल परिवहन वाहनों के जरिए किया जाएगा. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि व्यापारियों की लागत भी कम होगी और कारोबार को नई गति मिलने की उम्मीद है.

नेपाल ने फिर जताई आपत्ति

लिपुलेख दर्रा भारत, चीन और नेपाल के त्रि-जंक्शन क्षेत्र के करीब स्थित है. नेपाल लंबे समय से लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है. नेपाल का कहना है कि भारत और चीन ने सीमा व्यापार बहाल करने तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा को दोबारा शुरू करने जैसे फैसलों से पहले उससे कोई परामर्श नहीं किया. इससे पहले भी 2015 और 2020 में नेपाल इस मुद्दे पर औपचारिक विरोध दर्ज करा चुका है.

भारत का स्पष्ट रुख

भारत सरकार का कहना है कि लिपुलेख उत्तराखंड का हिस्सा है और सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों का समाधान भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय वार्ता के जरिए होना चाहिए. नई दिल्ली इस व्यापार को एक ऐतिहासिक और पारंपरिक गतिविधि मानती है, जो सीमावर्ती समुदायों की आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ी हुई है.

भारत-चीन संबंधों में नरमी का संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि लिपुलेख व्यापार की बहाली भारत और चीन के संबंधों में धीरे-धीरे आ रही नरमी का संकेत है. कोविड महामारी और वर्ष 2020 के सीमा तनाव के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के संपर्क में कमी आई थी. अब सीमापार व्यापार और कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसी गतिविधियों की बहाली को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

सीमावर्ती अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा

लिपुलेख व्यापार के फिर से शुरू होने से उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. स्थानीय व्यापारियों, परिवहन सेवाओं और छोटे कारोबारियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है. हालांकि, नेपाल के क्षेत्रीय दावों और कूटनीतिक संवेदनशीलताओं को देखते हुए लिपुलेख दर्रा आने वाले समय में दक्षिण एशिया की राजनीति और क्षेत्रीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना रह सकता है.
 


सेंसेक्स 77,000 के करीब, आज बाजार की दिशा तय करेंगे ये बड़े फैक्टर्स

बुधवार को (BSE) सेंसेक्स 790.54 अंक यानी 1.04 फीसदी की बढ़त के साथ 76,991.22 अंक पर बंद हुआ. वहीं, (NSE) निफ्टी 197.55 अंक चढ़कर 24,021.65 के स्तर पर पहुंच गया.

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
BWHindia

घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को आई जोरदार रिकवरी ने निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत किया है. सेंसेक्स करीब 800 अंक की छलांग लगाकर 77,000 के करीब पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24,000 के अहम स्तर के ऊपर बंद हुआ. अब गुरुवार के कारोबारी सत्र से पहले निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की खरीदारी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी.

बुधवार को दमदार तेजी के साथ बंद हुआ बाजार

बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 790.54 अंक यानी 1.04 फीसदी की बढ़त के साथ 76,991.22 अंक पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 197.55 अंक चढ़कर 24,021.65 के स्तर पर पहुंच गया. एक दिन पहले बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन अगले ही सत्र में निवेशकों ने जोरदार खरीदारी की.

कच्चे तेल में नरमी से मिला सहारा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. तेल की कीमतें चार महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गई हैं. इससे महंगाई और आयात बिल पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है.

एफआईआई की खरीदारी ने बढ़ाया भरोसा

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एक बार फिर खरीदारी का रुख अपनाया है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की वापसी से घरेलू बाजारों को मजबूती मिल सकती है और निवेशकों का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील से बढ़ी उम्मीदें

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं. अगर यह समझौता आगे बढ़ता है तो कई सेक्टरों को फायदा मिल सकता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है.

आईटी और बैंकिंग शेयरों में रही खरीदारी

बुधवार के कारोबार में आईटी और निजी बैंकिंग शेयरों ने बाजार को सबसे ज्यादा सहारा दिया. टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक जैसे शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. बैंक निफ्टी और आईटी इंडेक्स दोनों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई.

सेंसेक्स के शेयरों में इंडिगो, ट्रेंट, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस और आईसीआईसीआई बैंक सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे. वहीं, एनटीपीसी, टाटा स्टील, मारुति, बीईएल और भारती एयरटेल में दबाव देखने को मिला.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक बने रहते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो गुरुवार को भी बाजार में मजबूती देखने को मिल सकती है. हालांकि, निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

शेयर बाजार में आज कई कंपनियों से जुड़े अहम कॉरपोरेट अपडेट्स के चलते उनके शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं. Embassy Developments ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ लखनऊ में वाणिज्यिक परियोजना के लिए 1,500 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है, जबकि NLC India Renewables ने ओडिशा में 1,000 मेगावाट की हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए OREDA के साथ संयुक्त उद्यम किया है. Bharti Airtel की क्रेडिट रेटिंग S&P Global Ratings ने बढ़ाकर BBB+ कर दी है, वहीं HCLTech ने Nokia और Nestlé के साथ एआई आधारित साझेदारियों का विस्तार किया है. ICICI Bank को ICICI Prudential Life Insurance में अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदने के लिए RBI से मंजूरी मिली है. Jubilant Pharmova को कर मामले में राहत मिली है, जबकि Oberoi Realty ने गुरुग्राम परियोजना को लेकर स्थिति स्पष्ट की है. Delhivery में Alpha Wave Ventures ने अपनी हिस्सेदारी घटाई है और IRFC के OFS में सरकार ग्रीन-शू विकल्प का इस्तेमाल करेगी. वहीं Raymond ने जर्मन कंपनी Deharde के संभावित अधिग्रहण संबंधी खबरों को महज अटकल बताया है. इन सभी घटनाक्रमों के कारण आज के कारोबार में इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)