ईडी ने अपनी जांच में पाया कि लोन ऐप कंपनियों ने क्रिप्टोकरेंसी में बड़े पैमाने पर निवेश किया और एक्सचेंस की मदद लेकर उन्हें विदेशों में ट्रांसफर कर दिया.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
नई दिल्ली: भारत के क्रिप्टो एक्सचेंज WazirX के दिन अच्छे नहीं चल रहे हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने WazirX के डायरेक्टर समीर म्हात्रे के ठिकानों पर छापेमारी की और उनके खातों को भी सीज कर दिया, जिसमें करीब 64 करोड़ रुपये बताए जा रहे हैं.
WazirX पर ED के छापे
दरअसल क्रिप्टो एक्सचेंज Wazirx पर ईडी के छापे भारत में काम कर रहे कई चीनी लोन ऐप के खिलाफ चल रही जांच से जुड़ी है. ED ने छापों के दौरान WazirX के डायरेक्टर समीर म्हात्रे से डेटा मांगे, लेकिन ईडी का कहना है कि वो जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, ईडी का कहना है कि समीर म्हात्रे की पहुंच Wazirx के डेटाबेस तक है, फिर भी वो क्रिप्टो के लेनदेन से जुड़े आंकड़े नहीं दे रहे हैं जो कि लोन ऐप की धोखाधड़ी कमाई से खरीदे गए हैं. WazirX पर आरोप है कि क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज के डायरेक्टर ने वर्चुअल क्रिप्टो असेट्स की खरीद और ट्रांसफर के जरिए धोखाधड़ी के पैसों की मनी लॉन्ड्रिंग में आरोपी लोन ऐप कंपनियों की मदद की है.
WazirX पर आरोप
ईडी ने अपनी जांच में पाया कि लोन ऐप कंपनियों ने क्रिप्टोकरेंसी में बड़े पैमाने पर निवेश किया और एक्सचेंस की मदद लेकर उन्हें विदेशों में ट्रांसफर कर दिया. क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन से जुड़े कई ऐसे सबूत मिले हैं जिन्हें क्रिप्टो के ब्लॉकचेन तक में दर्ज नहीं किया गया. ऐसे में ये वर्चुअल असेट्स अब तक ट्रेस नहीं हो पाए. ईडी ने WazirX को समन जारी करके इस बारे में जानकारी मांगी है. WazirX पर आरोप है कि उसने इन आरोपी कंपनियों की ओर से खरीदे गए क्रिप्टो असेट्स को अज्ञात विदेशी वॉलेट में ट्रांसफर करने में मदद की. मतलब WazirX ने इंस्टैंट लोन मुहैया कराने वाली ऐप कंपनियों के पैसों को अपने प्लेटफॉर्म पर गलत तरीके से क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया.
Binance का नाम कैसे आया
आपको बता दें कि पिछले साल ईडी मनी लांड्रिंग के एक केस की जांच कर रहा था, जिसमें चीन की अवैध ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स शामिल थीं. इस जांच के दौरान ईडी ने पाया कि मनी लांड्रिंग के दौरान करीब 57 करोड़ रुपये को Binance प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिप्टोकरेंसीज में बदला गया. WazirX Binance की इकाई है, जिसका स्वामित्व 2019 से बिनांस के पास है.
Binance ने कहा- WazirX के मालिक नहीं
इधर अमेरिकी बेस्ड दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल करेंसी एक्सचेंज Binance ने जब अपना नाम इसमें आता देखा तो सफाई पेश की है. दरअसल, कार्रवाई के तहत ये बताया जा रहा है कि WazirX Binance की ही एक इकाई है. इसके बाद Binance के CEO चैंगपेंग झाओ ने एक के बाद एक ट्वीट करके सफाई दी है. झाओ का कहना है कि कंपनी भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज की मालिक नहीं है. Binance Zanmai Labs में कोई इक्विटी नहीं रखती है, Zanmai Labs ही WazirX को ऑपरेट करती है.
Quick thread on Binance and WazirX, and some incorrect reporting.
— CZ ? Binance (@cz_binance) August 5, 2022
Binance does not own any equity in Zanmai Labs, the entity operating WazirX and established by the original founders.
1/4
दरअसल साल 2019 में Binance ने एक ब्लॉग पब्लिश किया था जिसमें ये कहा गया था कि उसने WazirX का अधिग्रहण कर लिया है लेकिन झाओ का कहना है कि ये डील कभी पूरी हुई ही नहीं. एक और ट्वीट में झाओ का कहना है कि Binance WazirX को टेक सर्विसेज के तौर पर सिर्फ वॉलेट सर्विसेज देती है. इसके अलावा WazirX बाकी सभी कामों के लिए जिम्मेदार है चाहे वो यूजर साइन-अफ हो, KYC, ट्रेडिंग या निकासी.
VIDEO: Amazon के बाद अब Walmart में भी छंटनी`
AI, हेल्थटेक, एजुकेशन और सस्टेनेबिलिटी पर आधारित समाधानों के साथ युवा स्टार्टअप आइडिया को मिल रहा बढ़ावा; विजेता टीमों को मिलेगा 2 करोड़ रुपये तक का इनक्यूबेशन सपोर्ट
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में टेक्नोलॉजी आधारित इनोवेशन का दायरा अब बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है. छोटे शहरों से भी बड़ी संख्या में युवा नए बिजनेस आइडिया और तकनीकी समाधान के साथ सामने आ रहे हैं. इसका उदाहरण Samsung Solve for Tomorrow 2026 के टॉप 100 चयन में देखने को मिला है, जहां 50 फीसदी से ज्यादा चुनी गई टीमें टियर-2 और टियर-3 शहरों से हैं.
इस प्रोग्राम के पांचवें एडिशन के लिए देशभर से आए आवेदनों में पिछले साल के मुकाबले 85 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि भागीदारी 95 फीसदी बढ़ी है. चयनित टीमें अब मेंटरशिप, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट और इनक्यूबेशन सपोर्ट के जरिए अपने आइडिया को बाजार उपयोग के लायक समाधान में बदलने की दिशा में आगे बढ़ेंगी.
छोटे शहरों में बढ़ रहा इनोवेशन इकोसिस्टम
टॉप 100 टीमों में बिहार के बक्सर, असम के कामरूप, हरियाणा के कैथल, तेलंगाना के मेडचल-मलकजगिरी, ओडिशा के सुंदरगढ़ और मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जैसे शहरों के युवा शामिल हैं. यह ट्रेंड दिखाता है कि देश के छोटे शहरों में भी टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उद्यमिता को लेकर रुचि तेजी से बढ़ रही है. पहले जहां स्टार्टअप और इनोवेशन गतिविधियां मुख्य रूप से मेट्रो शहरों तक केंद्रित थीं, वहीं अब छोटे शहरों के युवा भी स्थानीय समस्याओं के लिए तकनीकी समाधान विकसित कर रहे हैं.
AI और हेल्थटेक पर युवाओं का फोकस
चयनित टीमों के आइडिया चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित हैं, जिनमें AI आधारित समाधान, स्वास्थ्य और शिक्षा, खेल तकनीक और पर्यावरणीय स्थिरता शामिल हैं. AI से जुड़े समाधानों में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गुमनाम रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, वाहन खराबी की पहचान करने वाली तकनीक और एक्सेसिबिलिटी बढ़ाने वाले स्मार्ट डिवाइस शामिल हैं.
हेल्थ और एजुकेशन सेगमेंट में युवाओं ने ऑटिज्म से जुड़े लोगों की जरूरतों को समझने वाली AI तकनीक, बच्चों में सेंसररी समस्याओं की पहचान करने वाले वियरेबल डिवाइस और कम लागत वाले स्मार्ट क्लासरूम समाधान विकसित किए हैं. वहीं, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी में दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए स्मार्ट डिवाइस और AI आधारित कोचिंग प्लेटफॉर्म जैसे आइडिया शामिल हैं.
इनोवेशन को स्टार्टअप में बदलने पर जोर
टॉप 100 टीमों को अब विशेषज्ञों और स्टार्टअप फाउंडर्स से मेंटरशिप मिलेगी, जिससे वे अपने आइडिया को प्रोटोटाइप और संभावित बिजनेस मॉडल में बदल सकेंगी. टॉप 40 टीमें इनोवेशन बूटकैंप में हिस्सा लेंगी, जहां उन्हें प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मार्केट रणनीति और तकनीकी सुधार के लिए मार्गदर्शन मिलेगा.
इसके बाद टॉप 20 टीमों को प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी, जबकि फाइनल में चुनी गई चार विजेता टीमों को कुल 2 करोड़ रुपये तक की इनक्यूबेशन ग्रांट और संस्थागत सपोर्ट मिलेगा.
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए बढ़ते अवसर
युवा इनोवेशन प्रोग्राम्स के जरिए कंपनियां अब केवल आइडिया प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रह रही हैं, बल्कि शुरुआती स्तर के प्रोडक्ट और संभावित स्टार्टअप्स को पहचानने पर भी ध्यान दे रही हैं.
AI, हेल्थटेक, क्लाइमेट टेक और एजुकेशन टेक जैसे क्षेत्रों में बढ़ती संभावनाओं के बीच ऐसे प्लेटफॉर्म नए उद्यमियों के लिए फंडिंग, मेंटरशिप और बाजार तक पहुंच बनाने का जरिया बन रहे हैं.
टाटा स्टील की कंसोलिडेटेड ऑपरेशंस से आय जून तिमाही में सालाना आधार पर 14.3 फीसदी बढ़कर 60,794 करोड़ रुपये हो गई. हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में इसमें 3.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा स्टील (Tata Steel) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 19 फीसदी बढ़कर 2,385.24 करोड़ रुपये पहुंच गया. पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा 2,008 करोड़ रुपये था. हालांकि, तिमाही आधार पर कंपनी की कमाई में गिरावट आई है, क्योंकि कम बिक्री मात्रा (वॉल्यूम) का असर अधिक स्टील कीमतों से मिले लाभ पर पड़ा. कंपनी ने बढ़ती इनपुट लागत और नीदरलैंड्स में नियामकीय अनिश्चितताओं को भी प्रमुख चुनौतियों के रूप में बताया है.
टाटा स्टील की कंसोलिडेटेड ऑपरेशंस से आय जून तिमाही में सालाना आधार पर 14.3 फीसदी बढ़कर 60,794 करोड़ रुपये हो गई. हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में इसमें 3.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA एक साल पहले के 7,480 करोड़ रुपये से बढ़कर 9,370 करोड़ रुपये हो गया. EBITDA मार्जिन भी 14.1 फीसदी से सुधरकर 15.4 फीसदी पहुंच गया. बेहतर स्टील कीमतों के कारण प्रति टन EBITDA बढ़कर 12,898 रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 10,503 रुपये था.
प्री-टैक्स मुनाफे में भी बढ़ोतरी
असाधारण मदों से पहले कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) बढ़कर 4,183 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 3,199 करोड़ रुपये था. वित्त लागत मामूली रूप से घटकर 1,771 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल 1,852 करोड़ रुपये थी. कंपनी ने जून तिमाही में कुल कंसोलिडेटेड प्रॉफिट बिफोर टैक्स 3,838 करोड़ रुपये दर्ज किया.
टाटा स्टील ने कहा कि भारत में खासकर सीजनल कमजोरी के कारण बिक्री मात्रा पर दबाव रहा. भारत और नीदरलैंड्स में कोकिंग कोल की ऊंची लागत, इन्वेंट्री बढ़ना, ज्यादा रॉयल्टी भुगतान और पश्चिम एशिया संकट के कारण बिजली व ईंधन खर्च बढ़ने से मुनाफे पर असर पड़ा. हालांकि, बेहतर स्टील कीमतों और लागत में सुधार की पहलों ने इस दबाव को कुछ हद तक कम किया.
भारत कारोबार ने संभाली कंपनी की कमाई
जून तिमाही में भारत टाटा स्टील का सबसे मजबूत बाजार बना रहा. भारत में कच्चे इस्पात का उत्पादन बढ़कर 54.6 लाख टन पहुंच गया, जबकि डिलीवरी सालाना आधार पर 9 फीसदी बढ़कर 51.7 लाख टन रही.
भारत कारोबार से कंपनी की ऑपरेशंस से आय 36,897 करोड़ रुपये रही और EBITDA 9,409 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट भी बढ़कर 4,536 करोड़ रुपये हो गया.
कंपनी ने कहा कि मौसमी सुस्ती के बावजूद घरेलू डिलीवरी उत्पादन के अनुरूप बनी रही. ऑटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन, रिटेल और इंजीनियरिंग क्षेत्रों से मांग में मजबूती देखने को मिली.
पूरे ग्रुप स्तर पर कच्चे इस्पात का उत्पादन 76.9 लाख टन रहा, जबकि डिलीवरी 72.7 लाख टन दर्ज की गई. हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले बिक्री मात्रा में गिरावट आई, लेकिन विभिन्न बाजारों में बेहतर स्टील कीमतों से इसकी भरपाई हुई.
वैल्यू एडेड कारोबार में भी बढ़ोतरी
टाटा स्टील ने अपने वैल्यू एडेड कारोबार में भी लगातार सुधार की जानकारी दी. हाई-एंड स्टील उत्पादों की ऑटो बिक्री में सालाना आधार पर 21 फीसदी की वृद्धि हुई. वहीं, टाटा टिस्कॉन ने पहली तिमाही में अब तक का सबसे अधिक वॉल्यूम दर्ज किया.
यूरोप कारोबार में मिली-जुली तस्वीर
कंपनी के यूरोपीय कारोबार का प्रदर्शन मिश्रित रहा. टाटा स्टील नीदरलैंड्स का EBITDA 39 करोड़ रुपये पॉजिटिव रहा, लेकिन पिछली तिमाही की तुलना में इसमें तेज गिरावट आई. इसकी वजह कम डिलीवरी और कच्चे माल की बढ़ी लागत रही.
वहीं, टाटा स्टील यूके का EBITDA 341 करोड़ रुपये निगेटिव रहा. हालांकि, मार्च तिमाही के 591 करोड़ रुपये के नुकसान की तुलना में इसमें सुधार हुआ, क्योंकि बेहतर स्टील कीमतों से कुछ राहत मिली.
कंपनी ने बताया कि नीदरलैंड्स में IJmuiden कोक और गैस प्लांट के परमिट रद्द करने के प्रस्ताव के बाद नियामकीय अनिश्चितता बनी हुई है. हालांकि, प्रबंधन ने कहा कि बातचीत जारी है और कंपनी अपने वित्तीय विवरणों को कारोबार जारी रखने (Going Concern) के आधार पर तैयार कर रही है.
टाटा स्टील यूके ने भी यूके सरकार से मिले फंडिंग कमिटमेंट और प्रस्तावित इक्विटी निवेश के आधार पर अपने वित्तीय विवरण तैयार किए हैं. कंपनी ने कहा कि सभी कारोबारों में उसकी लिक्विडिटी स्थिति मजबूत बनी हुई है.
कर्ज बढ़ा, लेकिन डेट-इक्विटी अनुपात में सुधार
तिमाही के दौरान टाटा स्टील ने कुछ संपत्तियों, प्लांट और उपकरणों के उपयोगी जीवन का पुनर्मूल्यांकन किया, जिसके चलते 294 करोड़ रुपये का अतिरिक्त डेप्रिसिएशन चार्ज दर्ज किया गया. कंपनी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में डेप्रिसिएशन करीब 1,178 करोड़ रुपये बढ़ सकता है.
जून तिमाही के अंत में कंपनी की नेटवर्थ 1.01 लाख करोड़ रुपये रही. कंपनी का नेट डेट मार्च के अंत के 80,144 करोड़ रुपये से बढ़कर 84,173 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, ग्रॉस डेट बढ़कर 97,985 करोड़ रुपये पहुंच गया.
हालांकि, कर्ज बढ़ने के बावजूद नेट डेट-टू-इक्विटी अनुपात वित्त वर्ष 2025-26 के अंत के 0.82 से सुधरकर 0.80 हो गया.
विलय और अधिग्रहण से जुड़े अपडेट
टाटा स्टील ने बताया कि उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (NINL) के कंपनी में विलय का प्रस्ताव नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मंजूरी का इंतजार कर रहा है.
इसके अलावा, TM इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स में अतिरिक्त 23 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के प्रस्ताव के लिए भी नियामकीय मंजूरी लंबित है. इस सौदे के बाद कंपनी की संयुक्त उद्यम (JV) में हिस्सेदारी बढ़कर 74 फीसदी हो जाएगी.
भारत में क्लीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के साथ इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल बाजार में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महिंद्रा एंड महिंद्रा की इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सब्सिडियरी महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी (MLMML) ने यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर लिया है. कंपनी ने लाइटरॉक (Lightrock), इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (IFC) और इंडिया-जापान फंड (IJF) से करीब 322 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई है. इस निवेश के बाद कंपनी का वैल्यूएशन बढ़कर 10,822 करोड़ रुपये हो गया है.
यह फंडिंग राउंड लाइटरॉक के नेतृत्व में पूरा हुआ, जिसमें मौजूदा निवेशकों IFC और IJF ने भी भागीदारी की. यह निवेश महिंद्रा के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कारोबार में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है और भारत के इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को उजागर करता है.
इस लेनदेन के तहत MLMML ने निवेशकों के साथ शेयर सब्सक्रिप्शन एग्रीमेंट किया है. प्रस्तावित इक्विटी इश्यू पूरा होने के बाद महिंद्रा एंड महिंद्रा की MLMML में हिस्सेदारी 78.11 फीसदी से घटकर 75.79 फीसदी रह जाएगी. हालांकि, कंपनी महिंद्रा ग्रुप की सब्सिडियरी बनी रहेगी.
इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट में तेजी से बढ़ रही मांग
MLMML के मुताबिक, भारत में L5 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स की पहुंच पिछले दो वर्षों में 12 फीसदी से बढ़कर 40 फीसदी हो गई है. कंपनी की इस सेगमेंट में करीब 40 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है.
कंपनी ने पिछले चार वर्षों में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बिक्री में छह गुना वृद्धि दर्ज की है. वित्त वर्ष 2025-26 में MLMML ने 1 लाख इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स की बिक्री की. वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी के वॉल्यूम में सालाना आधार पर 85 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
महिंद्रा ग्रुप के ग्रुप CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर अनीश शाह ने कहा कि लाइटरॉक का निवेश कंपनी की लास्ट-माइल मोबिलिटी पहल को मजबूती देगा. इस पहल का लक्ष्य 2031 तक भारतीय सड़कों पर 10 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को उतारना है.
भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बाजार में बढ़ रहा निवेश
यह निवेश भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम में बढ़ते निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है. इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स अब लास्ट-माइल ट्रांसपोर्टेशन के इलेक्ट्रिफिकेशन में अहम भूमिका निभा रहे हैं. ऐसे में इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां रणनीतिक और संस्थागत निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं.
भारत में क्लीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के साथ इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल बाजार में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं.
भारत की रोजगार यात्रा ने पिछले कुछ वर्षों में मजबूत सुधार दर्ज किया है. महामारी के बाद बेरोजगारी दर में आई गिरावट इस बात का संकेत है कि अर्थव्यवस्था ने रोजगार सृजन की क्षमता दिखाई है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
साढ़े चार वर्षों तक भारत ने दुनिया की सबसे कम चर्चा में रहने वाली आर्थिक पुनर्बहाली में से एक को अंजाम दिया. महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन के मलबे से, जब 2020 में बेरोजगारी दर 8.8% तक पहुंच गई थी, देश ने नवंबर 2025 तक इसे घटाकर 4.7% कर दिया, यानी 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की. यह एक शांत जीत थी: न सुर्खियां, न जश्न, सिर्फ ग्रामीण और शहरी भारत में लगातार रोजगार सृजन.
फिर भू-राजनीति ने दखल दिया.
मई 2026 में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5% हो गई, जो लगभग एक वर्ष का उच्चतम स्तर था. इसकी वजह कोई नीतिगत चूक नहीं थी. यह अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक कमजोरी भी नहीं थी. इसका कारण था फारस की खाड़ी में शिपिंग संकट और 1970 के दशक के ऊर्जा संकट के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति में सबसे बड़ा व्यवधान. हालांकि, इस समय ने एक असहज सच्चाई उजागर कर दी: भारत की आर्थिक पुनर्बहाली वास्तविक तो है, लेकिन वह अब भी ऐसे बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील है, जिन पर किसी भी सरकार का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं होता.
वह वापसी जो वास्तव में सफल रही
आंकड़े वास्तविक कहानी बताते हैं. 2021 से 2025 के बीच भारत की बेरोजगारी दर 6.38% से घटकर 4.70% पर आ गई—यानी 1.68 प्रतिशत अंकों की गिरावट, जो अर्थव्यवस्था में वास्तविक रोजगार सृजन का संकेत देती है.
2021: 6.38% (महामारी के बाद का समायोजन)
2022: 4.82% (तेज होती पुनर्बहाली, -1.56 प्रतिशत अंक)
2023: 4.17% (संकट-पूर्व सामान्य स्थिति के करीब)
2024: 4.20% (स्थिरता बरकरार)
नवंबर 2025: 4.70% (पांच वर्षों का निचला स्तर)
यह सुधार न तो सांख्यिकीय हेरफेर का परिणाम था और न ही अस्थायी अनुबंध आधारित नौकरियों का. भारत ने औपचारिक और अनौपचारिक दोनों क्षेत्रों में लाखों रोजगार के अवसर पैदा किए, जबकि वेतन स्तर भी अपेक्षाकृत स्थिर रहा. ब्याज दरें, श्रम कानून, निवेश प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे पर खर्च जैसी नीतियां लगातार स्थिर और कारोबार-अनुकूल बनी रहीं. कई देशों के विपरीत, जिन्होंने आर्थिक पुनर्बहाली के दौरान राजकोषीय अनुशासन छोड़ दिया, भारत ने एक कठिन संतुलन बनाए रखा, तेजी से बढ़ती महंगाई के बिना रोजगार में निरंतर वृद्धि.
इस सफलता का असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूप में दिखा. शहरी रोजगार में मजबूती बनी रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिरता रही. इससे संकेत मिलता है कि रोजगार सृजन किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि व्यापक स्तर पर हुआ. 1.4 अरब की श्रम शक्ति वाले देश के लिए यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं थी.
बाहरी झटका
फिर मई 2026 आ गया.
फारस की खाड़ी में समुद्री मार्गों के बंद होने से वह स्थिति पैदा हुई, जिसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने "वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में सबसे बड़ा आपूर्ति व्यवधान" बताया. भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85% जरूरत आयात से पूरी करता है. जब वैश्विक तेल कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दबाव में आता है. जब तेल आयात बिल बढ़ता है, तो महंगाई बढ़ती है. और जब लोगों की क्रय शक्ति घटती है, तो कंपनियां नई भर्तियां रोक देती हैं.
सबसे पहले रुपया प्रभावित हुआ. वित्त वर्ष 2026 के दौरान इसमें 9% की गिरावट आई, जबकि संघर्ष बढ़ने के बाद इसमें अतिरिक्त 3.1% की कमजोरी दर्ज की गई. आयात लागत तेजी से बढ़ी. घरेलू खपत, जिसने आर्थिक पुनर्बहाली को गति दी थी, कमजोर पड़ गई. कंपनियों ने भर्ती पर रोक लगा दी. सिर्फ एक महीने में, अप्रैल से मई 2026 के बीच बेरोजगारी दर 0.3 प्रतिशत अंक बढ़ गई.
क्षेत्रवार अंतर भी स्पष्ट हो गया.
शहरी बेरोजगारी: मई में 6.4% (हालांकि अप्रैल के 6.6% से कम, जो कुछ मजबूती का संकेत देता है)
ग्रामीण बेरोजगारी: मई में 5.1% (अप्रैल की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक अधिक, जहां कृषि क्षेत्र का दबाव भी जुड़ गया)
### नीतिगत माहौल: अपरिवर्तित, स्थिर और दोषमुक्त
जो नहीं बदला, वह था भारत का नीतिगत ढांचा. ब्याज दरें विकास लक्ष्यों के अनुरूप रहीं. श्रम कानूनों में क्रमिक सुधार जारी रहे. बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गति बनी रही. कॉरपोरेट टैक्स दरें प्रतिस्पर्धी रहीं. वैश्विक अस्थिरता के बावजूद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रवाह मजबूत बना रहा.
मई 2026 में बेरोजगारी दर में आई तेजी किसी नीतिगत विफलता का परिणाम नहीं थी. यह तेल बाजार में 25 वर्षों के सबसे बड़े झटके का असर था, जिसने आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया. यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई धावक दौड़ते समय अचानक ट्रैक पर किसी और द्वारा खड़ी की गई अदृश्य दीवार से टकरा जाए—इसका मतलब यह नहीं कि उसकी तैयारी में कमी थी.
यह अंतर समझना महत्वपूर्ण है. 2020 के 8.8% से नवंबर 2025 के 4.7% तक की बेरोजगारी दर में गिरावट वास्तविक, टिकाऊ और नीतियों से समर्थित थी. वहीं हालिया बढ़ोतरी, जिससे दर 5.5% तक पहुंची, भी वास्तविक है, लेकिन अस्थायी और बाहरी परिस्थितियों से प्रेरित है.
असहज सवाल
5.5% की बेरोजगारी दर हाल के वर्षों के हिसाब से अधिक जरूर है, लेकिन संदर्भ भी उतना ही महत्वपूर्ण है. देश अब भी 2020 की महामारी के दौरान के स्तर की तुलना में 31% बेहतर स्थिति में है. 2021 के बाद से हुआ सुधार निर्विवाद है. जिस नीतिगत ढांचे ने इस पुनर्बहाली को संभव बनाया, वह अब भी कायम है.
आंकड़े यह बताते हैं कि भारत ने रोजगार सृजन की ऐसी व्यवस्था तैयार की, जो काम कर रही थी. वैश्विक अव्यवस्था ने उसे फिलहाल कुछ समय के लिए बाधित कर दिया. वह व्यवस्था अब भी मौजूद है. यह दोबारा कितनी तेजी से गति पकड़ती है, यह इस पर कम निर्भर करेगा कि नीति-निर्माता आगे क्या करते हैं, और इस पर अधिक कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात कब सामान्य होता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार कब स्थिर होते हैं.
तब तक 5.5% की बेरोजगारी दर को शासन की विफलता के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों के बंधक के रूप में देखना चाहिए. यह याद दिलाती है कि वैश्वीकरण के दौर में अच्छी नीतियां भी किसी देश को बाहरी झटकों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं रख सकतीं.
डेटा स्रोत:
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स: भारत की बेरोजगारी दर (2018-2026)
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MOSPI), भारत सरकार
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA): 2026 वैश्विक तेल बाजार व्यवधान विश्लेषण
आर्थिक मामलों का विभाग, भारत सरकार: मासिक आर्थिक समीक्षा (मार्च एवं मई 2026)
मैक्रोट्रेंड्स: भारत का ऐतिहासिक बेरोजगारी डेटा (1991-2026)
अगर चाहें, मैं इसे **BW Businessworld हिंदी** की शैली के अनुसार और भी संपादित (भाषा अधिक प्रवाहपूर्ण और प्रकाशन-योग्य) कर सकता हूँ.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
NTPC ने FY2037 तक कुल 250 गीगावाट उत्पादन क्षमता और 136 गीगावाट रिन्यूएबल क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए 16.8 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी NTPC अब कोयला आधारित उत्पादन से आगे बढ़कर हरित ऊर्जा को अपनी विकास रणनीति का केंद्र बना रही है. पहली बार कंपनी की निर्माणाधीन नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल) परियोजनाओं की क्षमता कोयला आधारित परियोजनाओं से अधिक हो गई है. NTPC ने FY2037 तक कुल 250 गीगावाट उत्पादन क्षमता और 136 गीगावाट रिन्यूएबल क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए 16.8 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है. बता दें, जून 2026 के अंत तक NTPC के पास 16.4 गीगावाट निर्माणाधीन रिन्यूएबल क्षमता थी, जबकि निर्माणाधीन कोयला आधारित परियोजनाओं की क्षमता 15.7 गीगावाट रही.
हरित ऊर्जा की ओर बढ़ा कंपनी का फोकस
NTPC ने करीब एक दशक पहले हरित ऊर्जा पर बढ़ते फोकस को देखते हुए अपना नाम 'नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन' से बदलकर सिर्फ NTPC कर लिया था. ताजा आंकड़े बताते हैं कि कंपनी तेजी से सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश बढ़ा रही है. जून 2025 के मुकाबले एक साल में निर्माणाधीन रिन्यूएबल क्षमता 24% बढ़ी है, जबकि कोयला आधारित परियोजनाओं की क्षमता में कमी आई है.
91 GW स्थापित क्षमता, ग्रीन एनर्जी का बढ़ता योगदान
वर्तमान में NTPC की कुल स्थापित क्षमता 91 गीगावाट है. इसमें 74 गीगावाट तापीय, 12 गीगावाट नवीकरणीय, 4 गीगावाट जलविद्युत और 1 गीगावाट पंप्ड स्टोरेज क्षमता शामिल है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी ने 1.7 गीगावाट नई क्षमता जोड़ी, जिसमें 976 मेगावाट रिन्यूएबल और 820 मेगावाट तापीय क्षमता शामिल रही.
FY37 तक 250 GW क्षमता का लक्ष्य
NTPC के निदेशक (वित्त) जयकुमार श्रीनिवासन के मुताबिक, भविष्य में कंपनी की वृद्धि का सबसे बड़ा आधार रिन्यूएबल एनर्जी होगी, जिसका नेतृत्व NTPC Green Energy Ltd करेगी. कंपनी ने FY2032 तक 150 गीगावाट और FY2037 तक 250 गीगावाट कुल उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है. इसी अवधि में रिन्यूएबल क्षमता को मौजूदा 12 गीगावाट से बढ़ाकर 136 गीगावाट तक पहुंचाने की योजना है.
16.8 लाख करोड़ रुपये निवेश करेगी कंपनी
NTPC के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह ने निवेशकों को बताया कि FY2037 तक क्षमता विस्तार के लिए कंपनी करीब 16.8 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगी. यह निवेश रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), पंप्ड स्टोरेज, परमाणु ऊर्जा, मोबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय कारोबार जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा.
न्यूक्लियर और स्टोरेज पर भी बड़ा दांव
कंपनी 18 गीगावाट पंप्ड स्टोरेज क्षमता विकसित कर रही है और विभिन्न राज्यों में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 30 संभावित स्थलों की पहचान कर चुकी है. हाल ही में NTPC और NPCIL के संयुक्त उद्यम ने राजस्थान के माही बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए 28,000 करोड़ रुपये की निविदा भी जारी की है.
भारत के ऊर्जा संक्रमण में अहम भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में NTPC की क्षमता वृद्धि का बड़ा हिस्सा हरित ऊर्जा से आएगा, जबकि ग्रिड की स्थिरता और बेसलोड मांग को पूरा करने में तापीय ऊर्जा की भूमिका बनी रहेगी. भारत ने भी 2035 तक कुल स्थापित क्षमता में 60% हिस्सेदारी गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य तय किया है, जिसमें NTPC की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
यह सुविधा घरेलू रुपये के बल्क डिपॉजिट और अनिवासी भारतीयों (NRI) के रुपये वाले बल्क डिपॉजिट, दोनों पर लागू होगी.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के लिए बल्क डिपॉजिट (थोक जमा) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. नए नियमों के तहत बैंक अब लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) के आधार पर थोक जमा पर अलग-अलग ब्याज दरें तय कर सकेंगे. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि समान श्रेणी की जमा राशि पर सभी शाखाओं और ग्राहकों के लिए ब्याज दरों में एकरूपता बनाए रखना अनिवार्य होगा. संशोधित नियम 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे. यह सुविधा घरेलू रुपये के बल्क डिपॉजिट और अनिवासी भारतीयों (NRI) के रुपये वाले बल्क डिपॉजिट, दोनों पर लागू होगी.
एकरूपता के सिद्धांत से समझौता नहीं
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि ब्याज दर तय करने में लचीलापन मिलने के बावजूद समान श्रेणी की जमा राशि पर सभी शाखाओं और सभी ग्राहकों के लिए ब्याज दरें एक जैसी रहनी चाहिए. किसी भी बैंक को एक ही दिन और समान राशि के डिपॉजिट पर अलग-अलग शाखाओं में अलग ब्याज दर देने की अनुमति नहीं होगी.
क्या होता है रन-ऑफ रेट?
रन-ऑफ रेट वह अनुमानित प्रतिशत होता है, जो बताता है कि किसी तनावपूर्ण या संकट की स्थिति में अगले 30 दिनों के भीतर बैंक से कितनी जमा राशि निकल सकती है. अब बैंक इसी जोखिम के आधार पर बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरों का निर्धारण कर सकेंगे.
वेबसाइट पर रोज जारी करनी होगी ब्याज दरें
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक कार्यदिवस सुबह 10 बजे अपनी वेबसाइट पर बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरें सार्वजनिक करें. साथ ही, ग्राहकों को दी जाने वाली ब्याज दरें वेबसाइट पर प्रकाशित दरों के अनुरूप ही होनी चाहिए.
1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे नियम
आरबीआई के अनुसार, बल्क डिपॉजिट से जुड़े संशोधित दिशा-निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे. इससे बैंकों को अपनी फंडिंग लागत और लिक्विडिटी प्रबंधन को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी, जबकि ग्राहकों के लिए ब्याज दरों में पारदर्शिता और समानता भी बनी रहेगी.
गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 273.55 अंक यानी 0.35% की बढ़त के साथ 77,928.15 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 66.95 अंक चढ़कर 24,317.15 के स्तर पर पहुंचकर बंद हुआ.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार गुरुवार को लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुआ. कारोबार के अंतिम घंटे में खरीदारी बढ़ने से सेंसेक्स 274 अंक और निफ्टी 24,317 के स्तर पर बंद हुआ. अब शुक्रवार को भी बाजार के लिए शुरुआती संकेत सकारात्मक हैं. GIFT Nifty करीब 89 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि ग्लोबल बाजारों में आई तेजी, अमेरिकी टेक कंपनियों के मजबूत नतीजे और आज आने वाले कई ब्लूचिप कंपनियों के तिमाही परिणाम निवेशकों की नजर में रहेंगे.
इन शेयरों ने संभाला बाजार
गुरुवार को दिनभर सुस्त कारोबार के बाद अंतिम घंटे में जोरदार खरीदारी देखने को मिली. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 273.55 अंक यानी 0.35% की बढ़त के साथ 77,928.15 अंक पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 66.95 अंक चढ़कर 24,317.15 के स्तर पर पहुंच गया. इसके साथ ही बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ.सेंसेक्स में महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड और टेक महिंद्रा जैसे शेयरों में अच्छी खरीदारी रही. वहीं अडानी पोर्ट्स, इंडिगो, बजाज फिनसर्व, बीईएल, एक्सिस बैंक, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर और एशियन पेंट्स के शेयर दबाव में रहे.
ब्रॉडर मार्केट में दबाव, ऑटो और ऑयल एंड गैस चमके
मुख्य सूचकांकों में तेजी के बावजूद व्यापक बाजार में कमजोरी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप 0.35% और स्मॉलकैप 0.56% गिरकर बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स में रियल्टी और केमिकल शेयरों में बिकवाली रही, जबकि ऑटो, ऑयल एंड गैस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया.
आज GIFT Nifty ने दिए मजबूत शुरुआत के संकेत
शुक्रवार सुबह GIFT Nifty करीब 89 अंक की बढ़त के साथ 24,447 के आसपास कारोबार करता दिखा. इससे संकेत मिल रहे हैं कि घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत हरे निशान में हो सकती है.
ग्लोबल बाजारों से मिल रहा सपोर्ट
अमेरिका में Amazon और Microsoft के मजबूत तिमाही नतीजों के बाद वॉल स्ट्रीट में शानदार तेजी दर्ज की गई. Dow Jones 1.19%, S&P 500 1.66% और Nasdaq Composite 2.78% की बढ़त के साथ बंद हुआ. इसका असर एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला. दक्षिण कोरिया का Kospi, जापान का Nikkei 225 और चीन का CSI 100 शुरुआती कारोबार में मजबूती के साथ कारोबार करते दिखे. टेक शेयरों में खरीदारी ने पूरे एशियाई बाजार का माहौल सकारात्मक बना दिया.
नतीजों और कॉरपोरेट अपडेट से ये शेयर रहेंगे फोकस में
आज के कारोबार में कई शेयर खबरों के चलते निवेशकों के रडार पर रहेंगे. Astra Microwave Products को HAL से 2,205.23 करोड़ रुपये का बड़ा रक्षा ऑर्डर मिला है, जबकि Tata Digital के प्रेसिडेंट (फाइनेंशियल सर्विसेज) गौरव हजराती ने इस्तीफा दे दिया है. NTPC कोयला आधारित परियोजनाओं की तुलना में अब नवीकरणीय ऊर्जा पर अधिक फोकस कर रही है. Navin Fluorine International ने DRDO के साथ रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण रसायनों के उत्पादन का समझौता किया है. Xtranet Technologies में Mittal Growth Partners ने 1.79% हिस्सेदारी खरीदी है, जबकि IIFL Finance में Fairfax से जुड़ी इकाई FIH Mauritius Investments ने 1.49% हिस्सेदारी बेची है. क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto करीब 1,000 करोड़ रुपये की प्री-IPO फंडिंग जुटाने की तैयारी में है. Sapphire Foods India में Fidelity Funds ने हिस्सेदारी बढ़ाई है, जबकि Government of Singapore ने अपनी हिस्सेदारी घटाई है. वहीं RailTel Corporation और LIC Housing Finance के जून तिमाही नतीजे भी निवेशकों की नजर में रहेंगे, क्योंकि दोनों कंपनियों ने मुनाफे और कारोबार से जुड़े आंकड़े जारी किए हैं.
आज इन बड़ी कंपनियों के नतीजों पर रहेगी नजर
आज कई बड़ी कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करेंगी. इनमें ITC, Maruti Suzuki, Bajaj Finserv, Indian Oil Corporation, GAIL, ABB India, Dixon Technologies, Sun Pharmaceutical, Shree Cement, Glenmark Pharmaceuticals, Aditya Birla Capital, Kajaria Ceramics और Blue Dart Express जैसी कंपनियां शामिल हैं. इनके नतीजों का असर संबंधित शेयरों के साथ-साथ पूरे बाजार की दिशा पर पड़ सकता है.
कमोडिटी बाजार पर भी रहेगी नजर
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी हुई है, जबकि सोना और चांदी भी हल्की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे हैं. ऐसे में आज निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के संकेत, कॉरपोरेट नतीजों, प्रमुख शेयरों से जुड़ी खबरों और IPO गतिविधियों पर रहेगी, जो दिनभर बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
इस वर्ष सूची में 12 श्रेणियों के तहत 117 महिलाओं को सम्मानित किया गया है. बिजनेस, स्टार्टअप, खेल, मीडिया, साहित्य और सामाजिक प्रभाव जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली इन महिलाओं ने भारत में नेतृत्व की नई मिसाल पेश की है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कैंडेरे बाय कल्याण ज्वेलर्स और हुरुन इंडिया ने '2026 कैंडेरे हुरुन इंडिया वुमन लीडर्स लिस्ट' का दूसरा संस्करण जारी किया है. इस वर्ष 12 श्रेणियों में 117 भारतीय महिलाओं को सम्मानित किया गया है, जिन्होंने कारोबार, नवाचार, खेल, मीडिया, साहित्य और सामाजिक बदलाव जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है.
पिछले साल के मुकाबले 21% बढ़ी सूची
2025 में जहां इस सूची में 9 श्रेणियों के तहत 97 महिलाओं को शामिल किया गया था, वहीं इस बार 12 श्रेणियों में 117 महिलाओं को जगह मिली है. यानी सम्मानित महिलाओं की संख्या में 21% की बढ़ोतरी हुई है. सूची का दायरा बढ़ाकर महिलाओं के नेतृत्व के और अधिक क्षेत्रों को शामिल किया गया है.
देश की दिग्गज हस्तियों को मिली जगह
इस सूची में किरण मजूमदार-शॉ, रोशनी नादर मल्होत्रा, फाल्गुनी नायर, निसाबा गोदरेज, सुधा मूर्ति, अनीता डोंगरे और मसाबा गुप्ता के अलावा पीवी सिंधु, साइना नेहवाल, मैरी कॉम, मनु भाकर और मीराबाई चानू जैसी खेल हस्तियां शामिल हैं. वहीं फे डिसूजा, बरखा दत्त, पालकी शर्मा उपाध्याय, ट्विंकल खन्ना, नमिता थापर, कुशा कपिला और अनन्या बिरला को भी सूची में स्थान मिला है.
39 लाख करोड़ रुपये का संयुक्त मूल्यांकन
रिपोर्ट के मुताबिक सूची में शामिल महिलाओं का संयुक्त मूल्यांकन 39 लाख करोड़ रुपये है, जो फिनलैंड की जीडीपी से भी अधिक है. सम्मानित महिलाओं की औसत आयु 48 वर्ष है. सूची में 19 वर्षीय पैरा-तीरंदाज शीतल देवी सबसे कम उम्र की, जबकि 86 वर्षीय उद्यमी रजनी बेक्टर सबसे वरिष्ठ महिला हैं.
खुद के दम पर बनाई पहचान
सूची में शामिल 117 महिलाओं में से 98 ने अपनी पहचान स्वयं बनाई है, जबकि विरासत में नेतृत्व पाने वाली महिलाओं की संख्या काफी कम है. मुंबई लगातार दूसरे वर्ष 26 सम्मानित महिलाओं के साथ देश का सबसे बड़ा महिला नेतृत्व केंद्र बना हुआ है.
इन श्रेणियों में रहा सबसे अधिक प्रतिनिधित्व
वैल्यू क्रिएशन श्रेणी में 19 महिलाओं को सम्मान मिला, जबकि वेल्थ क्रिएशन श्रेणी में 18 महिलाओं को शामिल किया गया. सबसे बड़ी श्रेणी ओलंपिक और पैरालंपिक पदक विजेताओं की रही, जिसमें 20 खिलाड़ियों को जगह मिली. इनमें 60% पैरा-एथलीट हैं.
इन महिलाओं ने अपनी-अपनी श्रेणियों में किया नेतृत्व
एचसीएलटेक की चेयरपर्सन रोशनी नादर मल्होत्रा वेल्थ मल्टीप्लायर्स श्रेणी में शीर्ष पर रहीं. हिंदुस्तान यूनिलीवर की सीईओ एवं एमडी प्रिया नायर प्रोफेशनल सीईओ श्रेणी में पहले स्थान पर हैं. अपोलो हॉस्पिटल्स की प्रीथा रेड्डी और सुनीता रेड्डी वेटरन्स श्रेणी में संयुक्त रूप से शीर्ष पर रहीं. रिन्यू पावर की वैशाली निगम सिन्हा न्यू इकोनॉमी, बीबा की मीना बिंद्रा इंडियन फैशन एंड लाइफस्टाइल, रजनी बेक्टर हार्टलैंड फाउंडर्स और सुधा मूर्ति ऑथर्स श्रेणी में शीर्ष स्थान पर हैं. पैरा निशानेबाज अवनि लेखरा ओलंपिक और पैरालंपिक मेडलिस्ट श्रेणी में सबसे आगे हैं.
कैंडेरे के प्रबंध निदेशक संजय रघुरामन ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ऐसी महिलाओं को सम्मानित करना है, जिनका नेतृत्व और प्रभाव भारत के भविष्य को नई दिशा दे रहा है. वहीं हुरुन इंडिया के संस्थापक एवं मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने कहा कि इस बार सूची का दायरा पहले से अधिक व्यापक किया गया है, ताकि कॉरपोरेट जगत के साथ खेल, मीडिया, साहित्य और सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को भी समान पहचान मिल सके.
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई नियामकीय सूचना में Eicher Motors ने कहा कि यह निवेश भविष्य में मिलने वाले दीर्घकालिक विकास अवसरों के लिए कंपनी को तैयार रखने और चरणबद्ध तरीके से उत्पादन क्षमता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू और वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग को पूरा करने की तैयारी में जुटी Eicher Motors ने बड़ा निवेश करने का फैसला किया है. कंपनी के निदेशक मंडल ने Royal Enfield के आंध्र प्रदेश में बनने वाले नए ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के पहले चरण के लिए 1,225 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दे दी है. यह निवेश कंपनी की पहले घोषित 2,500 करोड़ रुपये की विस्तार योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक विकास और भविष्य की मांग के अनुरूप उत्पादन क्षमता बढ़ाना है.
29 जुलाई को मंजूर किए गए इस निवेश के तहत नए प्लांट के पहले चरण का निर्माण किया जाएगा. यह सुविधा पूरी क्षमता पर संचालित होने पर सालाना 4.5 लाख मोटरसाइकिलों का उत्पादन कर सकेगी. कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 तक इस चरण को पूरा करने का है. इस परियोजना का पूरा वित्तपोषण कंपनी अपने आंतरिक संसाधनों (Internal Accruals) से करेगी.
मई में हुई थी विस्तार योजना की घोषणा
Eicher Motors ने मई में आंध्र प्रदेश में Royal Enfield का नया विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने की घोषणा की थी. यह चरणबद्ध निवेश कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके जरिए कंपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती मांग को देखते हुए अपनी विनिर्माण क्षमता का विस्तार कर रही है.
15 लाख से बढ़कर होगी 24.5 लाख मोटरसाइकिल की सालाना क्षमता
वर्तमान में Royal Enfield की तमिलनाडु स्थित ओरगडम (Oragadam) और वल्लम वडागल (Vallam Vadagal) इकाइयों में कुल मिलाकर लगभग 15 लाख मोटरसाइकिलों की वार्षिक उत्पादन क्षमता है.
इसके अलावा कंपनी चेय्यार (Cheyyar) प्लांट में ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजना पर भी काम कर रही है, जिसके वित्त वर्ष 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है. इसके बाद तमिलनाडु की तीनों इकाइयों की संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़कर लगभग 20 लाख मोटरसाइकिल हो जाएगी.
कंपनी ने कहा कि उसकी मौजूदा उत्पादन क्षमता लगभग पूरी तरह उपयोग में आ चुकी है. ऐसे में भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए आंध्र प्रदेश में नए प्लांट की स्थापना जरूरी हो गई है. इस प्लांट का पहला चरण शुरू होने के बाद Royal Enfield की सभी इकाइयों की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़कर लगभग 24.5 लाख मोटरसाइकिल हो जाएगी.
घरेलू और निर्यात कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
कंपनी का मानना है कि आंध्र प्रदेश में बनने वाला नया संयंत्र Royal Enfield की दीर्घकालिक घरेलू और निर्यात रणनीति को मजबूती देगा. कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के साथ-साथ मिड-साइज मोटरसाइकिल सेगमेंट में अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का भी विस्तार कर रही है.
कंपनी ने क्या कहा?
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई नियामकीय सूचना में Eicher Motors ने कहा कि यह निवेश भविष्य में मिलने वाले दीर्घकालिक विकास अवसरों के लिए कंपनी को तैयार रखने और चरणबद्ध तरीके से उत्पादन क्षमता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है.
यह अधिग्रहण पतंजलि के लिए एफएमसीजी और आयुर्वेद उत्पादों से आगे बढ़कर वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता खोलेगा.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद अब इंश्योरेंस कारोबार में कदम रखने जा रही है. इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने पतंजलि आयुर्वेद और धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप (DS Group) के मैग्मा जनरल इंश्योरेंस के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है. करीब ₹4,500 करोड़ की इस डील के जरिए पतंजलि फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में अपनी मौजूदगी बढ़ाएगी. इस अधिग्रहण के बाद पतंजलि नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की प्रमुख प्रमोटर बन जाएगी.
मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में खरीदेगी 73.6% हिस्सेदारी
IRDAI की मंजूरी के बाद पतंजलि आयुर्वेद मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में 73.6% हिस्सेदारी खरीदेगी. वहीं, रजनीगंधा पान मसाला बनाने वाला धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप (DS Group) और अन्य निवेशक मिलकर कंपनी में 24.5% हिस्सेदारी हासिल करेंगे.
इस डील में DS Group को-इन्वेस्टर के तौर पर शामिल होगा. इसके अलावा अदार पूनावाला की सनोटी प्रॉपर्टीज, सेलका डेवलपर्स और जगुआर एडवाइजरी सर्विसेज जैसे शेयरहोल्डर्स अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. इससे पहले मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में सनोटी प्रॉपर्टीज की 72.4% हिस्सेदारी थी.
फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में पतंजलि का विस्तार
यह अधिग्रहण पतंजलि के लिए एफएमसीजी और आयुर्वेद उत्पादों से आगे बढ़कर वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता खोलेगा. कंपनी की योजना मैग्मा जनरल इंश्योरेंस के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को बढ़ाने और देशभर में इसकी पहुंच का विस्तार करने की है.
पतंजलि के पास देशभर में मजबूत वितरण नेटवर्क है. कंपनी के उत्पाद करीब 2 लाख काउंटर्स पर उपलब्ध हैं, जिनमें रिलायंस रिटेल, हाइपर सिटी, स्टार बाजार जैसी नेशनल चेन और 250 से अधिक पतंजलि मेगा स्टोर शामिल हैं. कंपनी इस नेटवर्क का इस्तेमाल इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की पहुंच बढ़ाने के लिए कर सकती है.
प्रीमियम ग्रोथ में मैग्मा का बेहतर प्रदर्शन
मैग्मा जनरल इंश्योरेंस ने पिछले कुछ वर्षों में प्रीमियम कलेक्शन में मजबूत वृद्धि दर्ज की है. CareEdge Ratings के अनुसार, कंपनी का ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के बीच 22% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़कर ₹3,334 करोड़ हो गया. इस दौरान जनरल इंश्योरेंस इंडस्ट्री की औसत वृद्धि दर करीब 10% रही.
कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में ब्रेक-ईवन हासिल किया और ₹1 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया, जबकि वित्त वर्ष 2024 में उसे ₹141 करोड़ का नुकसान हुआ था. वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में कंपनी ने ₹27 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया.
पतंजलि बनाएगी इंश्योरेंस कारोबार को मजबूत
IRDAI की मंजूरी की शर्तों के तहत पतंजलि कंपनी की सॉल्वेंसी और ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए जरूरी पूंजी निवेश करती रहेगी. 31 दिसंबर 2025 तक मैग्मा जनरल इंश्योरेंस का सॉल्वेंसी मार्जिन 1.81 गुना था, जो नियामकीय सीमा 1.50 गुना से अधिक है.
पतंजलि की योजना इंश्योरेंस कारोबार को खासतौर पर सेमी-अर्बन और ग्रामीण बाजारों तक पहुंचाने की है, जहां अभी भी बीमा सेवाओं की पहुंच सीमित है. कंपनी अपने मौजूदा ग्रामीण नेटवर्क के जरिए जनरल इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने पर फोकस कर सकती है.