Sony के साथ Zee एंटरटेनमेंट (Zee Entertainment) के मर्जर के बाद ही MSCI द्वारा ग्लोबल स्मॉलकैप इंडेक्स से बाहर कर दिया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
Zee एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के पूर्व चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका (Punit Goenka) ने एक बार फिर सिक्योरिटीज अपील ट्रिब्यूनल (SAT) का रुख किया है. इससे पहले भी एक बार पुनीत गोयनका अपने पिता सतीश चंद्रा के साथ SAT का रुख कर चुके हैं.
इस बार क्यों किया SAT का रुख?
जहां पिछली बार पुनीत गोयनका और सतीश चंद्रा ने SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के अंतरिम ऑर्डर को चुनौती देते हुए SAT में अपील दायर की थी, वहीं अबकी बार पुनीत गोयनका ने SEBI के उस आदेश को चुनौती दी है जिसके अनुसार पुनीत ZEEL में डायरेक्टर या फिर किसी भी प्रमुख मैनेजरियल पद पर कार्य नहीं कर सकते. SEBI द्वारा एक फंड डायवर्जन मामले की जांच की जा रही थी और इसी मामले की जांच के दौरान SEBI ने पुनीत गोयनका के खिलाफ यह आदेश सुनाया था.
क्या है SEBI का आदेश?
SEBI ने अपने आदेश में कहा था कि पुनीत गोयंका और उनके पिता सुभाष चंद्रा Zee एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) में डायरेक्टर या फिर किसी प्रमुख मैनेजरियल पद पर काम नहीं कर सकते. ZEEL ही नहीं, अन्य पब्लिक लिस्टेड कंपनियों, ZEEL के अधिकार वाली किसी भी शाखा या फिर परिणाम वश सामने आई किसी भी कंपनी में पुनीत गोयनका और उनके पिता डायरेक्टर या फिर किसी प्रमुख पद पर काम नहीं कर सकते.
SAT से क्या सवाल करेंगे पुनीत गोयनका?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिर्फ पुनीत गोयनका ने ही SAT का रुख किया है और उनके पिता सुभाष चंद्रा ने SAT का रुख नहीं किया है. SAT द्वारा इस मामले की सुनवाई 30 अगस्त को की जाएगी. SEBI द्वारा पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा के खिलाफ यह आदेश SEBI के अंतरिम आदेश के बाद सामने आया था. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पुनीत गोयनका SAT के सामने यह सवाल रखने की कोशिश करेंगे कि जांच के दौरान उन्हें ऑफिस से बाहर कैसे किया जा सकता है?
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स्मार्टफोन के मेमोरी और दूसरे कंपोनेंट्स महंगे होने से कंपनियों के लिए बजट फोन बनाना मुश्किल होता जा रहा है. वहीं, महंगे 5G फोन की कीमत बढ़ने के बीच कंपनियों ने पुराने 4G मॉडल को फिर से बाजार में उतारना शुरू कर दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में सस्ते स्मार्टफोन का बाजार तेजी से सिकुड़ रहा है. फोन बनाने में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी और अन्य कंपोनेंट्स की कीमत बढ़ने से कंपनियों के लिए 9,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन बनाना मुश्किल हो गया है. नतीजतन, कंपनियां इस सेगमेंट में नए मॉडल लॉन्च करने से पीछे हट रही हैं और कम बजट वाले ग्राहकों के लिए पुराने 4G मॉडल फिर से अहम विकल्प बनकर उभरे हैं.
IDC की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में 9,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की बिक्री पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 74.3% घट गई. इस कैटिगरी की बाजार हिस्सेदारी भी 15.6% से घटकर सिर्फ 4.5% रह गई है.
स्मार्टफोन की कीमत क्यों बढ़ रही है?
स्मार्टफोन बाजार में कुल बिक्री भी दबाव में रही. अप्रैल-जून तिमाही में कुल स्मार्टफोन शिपमेंट 11.1% घटकर 3.32 करोड़ यूनिट रह गई. हालांकि, इस दौरान स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत यानी ASP 14.4% बढ़कर करीब 28,400 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. इसकी बड़ी वजह मेमोरी और अन्य कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें हैं. कंपनियों ने बढ़ती लागत का असर कम करने के लिए डिस्काउंट और ऑफर्स में भी कटौती की है. इसका सीधा असर सस्ते स्मार्टफोन सेगमेंट पर पड़ा है.
महंगे फोन की तरफ बढ़ रहा ग्राहकों का रुझान
एक तरफ 9,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन की बिक्री तेजी से घट रही है, वहीं दूसरी ओर ग्राहक प्रीमियम स्मार्टफोन की ओर बढ़ रहे हैं. 36,000 रुपये से 54,000 रुपये के प्राइस सेगमेंट में स्मार्टफोन की मांग 60.3% बढ़ी है.
इससे साफ है कि बाजार में ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है. लोग अब सस्ते फोन के बजाय बेहतर फीचर्स और नई तकनीक वाले महंगे स्मार्टफोन पर ज्यादा खर्च करने को तैयार हैं.
4G फोन को मिला नया जीवन
एंट्री-लेवल 5G स्मार्टफोन महंगे होने के बाद कई ब्रैंड्स ने एक बार फिर 4G मॉडल पर ध्यान देना शुरू कर दिया है. अप्रैल-जून तिमाही में 4G स्मार्टफोन की हिस्सेदारी बढ़कर 11.1% हो गई. कम कीमत वाले 5G फोन की बढ़ती लागत के कारण 4G मॉडल बजट ग्राहकों के लिए एक विकल्प बनकर उभरे हैं.
हालांकि, यह राहत लंबे समय तक रहने की संभावना कम है. जानकारों का मानना है कि पुराने 4G मॉडल का स्टॉक खत्म होने के बाद ग्राहकों के पास महंगे 5G स्मार्टफोन खरीदने के अलावा सीमित विकल्प रह सकते हैं.
चीनी स्मार्टफोन ब्रैंड्स की बिक्री पर भी असर
बाजार में आई गिरावट का असर कई बड़े चीनी स्मार्टफोन ब्रैंड्स पर भी पड़ा है. वीवो की बिक्री 13.9%, शाओमी की 10% और रियलमी की 14.2% घट गई. वहीं, iQoo की बिक्री में सबसे ज्यादा 61% की गिरावट दर्ज की गई.
आने वाले त्योहारों के सीजन में स्मार्टफोन की कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है. जैसे-जैसे पुरानी और कम कीमत वाली इन्वेंट्री खत्म होगी, कंपनियों के लिए बढ़ी हुई लागत को कीमतों में शामिल करना जरूरी हो सकता है. ऐसे में बजट स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों को आने वाले महीनों में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है.
इस निवेश से जियो क्रेडिट को अपने लेंडिंग कारोबार और विभिन्न क्रेडिट प्रोडक्ट्स के विस्तार के लिए लंबी अवधि की पूंजी मिलेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के तेजी से बढ़ते वित्तीय सेवा बाजार पर बैंक ऑफ अमेरिका ने बड़ा दांव लगाया है. अमेरिकी बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई एनबी होल्डिंग्स कॉरपोरेशन, जियो फाइनैंशियल सर्विसेज की लेंडिंग यूनिट जियो क्रेडिट में 49.9% तक हिस्सेदारी खरीदेगी. यह सौदा इक्विटी शेयरों और वारंट के तरजीही आवंटन के जरिए 18,268.22 करोड़ रुपये में होगा. जियो फाइनैंशियल सर्विसेज ने स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी है.
इस समझौते के तहत बैंक ऑफ अमेरिका शुरुआत में जियो क्रेडिट में 26.5% हिस्सेदारी खरीदेगा. इसके बाद वारंट के इस्तेमाल के जरिए उसकी हिस्सेदारी बढ़कर अधिकतम 49.9% तक पहुंच सकती है. हालांकि, यह सौदा जरूरी नियामकीय और कानूनी मंजूरियों पर निर्भर करेगा. जियो क्रेडिट में बाकी हिस्सेदारी जियो फाइनैंशियल सर्विसेज के पास रहेगी.
दो साल में 30,667 करोड़ रुपये का AUM
जियो क्रेडिट ने अपना कारोबार शुरू करने के महज दो साल के भीतर तेजी से विस्तार किया है. 30 जून, 2026 तक कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM 30,667 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
इस निवेश से जियो क्रेडिट को अपने लेंडिंग कारोबार और विभिन्न क्रेडिट प्रोडक्ट्स के विस्तार के लिए लंबी अवधि की पूंजी मिलेगी. वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका को भारत के तेजी से बढ़ते वित्तीय सेवा बाजार में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने का मौका मिलेगा.
भारत के भविष्य पर भरोसा: बैंक ऑफ अमेरिका
बैंक ऑफ अमेरिका के चेयरमैन और CEO ब्रायन मोयनिहान ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ग्रोथ मार्केट्स में से एक है. उन्होंने कहा कि जियो क्रेडिट में निवेश भारत के भविष्य को लेकर बैंक के भरोसे को दर्शाता है. मोयनिहान के मुताबिक, बैंक ऑफ अमेरिका भारत को अच्छी तरह समझता है और कई दशकों से देश के बाजार को समर्थन देता रहा है. अब जियो क्रेडिट में यह निवेश बैंक को भारत के वित्तीय क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने का बड़ा अवसर देगा.
बुधवार को सेंसेक्स 188 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,435 के स्तर पर बंद हुआ. पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित रही.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद गुरुवार को नए संकेतों के साथ कारोबार की शुरुआत करेगा. बुधवार को बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान तेज बिकवाली देखने को मिली थी और सेंसेक्स एक समय 600 अंक से अधिक टूट गया था. हालांकि बाद में निचले स्तरों से कुछ रिकवरी आई. अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सटचेंज(BSE) बीएसई सेंसेक्स 187.90 अंक यानी 0.24% की गिरावट के साथ 77,966.35 अंक पर बंद हुआ. वहीं,नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 35.75 अंक यानी 0.15% गिरकर 24,435.95 अंक पर बंद हुआ.
कल बाजार पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर वैश्विक संकेतों का दबाव रहा. हालांकि, कुछ बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार को निचले स्तरों से सहारा मिला. अब गुरुवार के कारोबार में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों, क्रूड ऑयल की चाल और कंपनियों से जुड़े नए कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहेगी.
टाटा ग्रुप के शेयरों में रही तेज बिकवाली
बुधवार के कारोबार में टाटा ग्रुप के कई शेयरों में दबाव देखने को मिला. TCS सबसे ज्यादा गिरने वाले सेंसेक्स शेयरों में शामिल रहा और कारोबार के दौरान इसमें 5% से अधिक की गिरावट भी देखने को मिली. अंत में TCS का शेयर 3.71% गिरकर बंद हुआ. टाटा स्टील, ट्रेंट और टाइटन के शेयरों में भी कमजोरी रही. ऐसे में गुरुवार को भी निवेशकों की नजर टाटा ग्रुप के शेयरों की चाल पर रहेगी. बाजार यह देखेगा कि इन शेयरों में निचले स्तरों पर खरीदारी लौटती है या बिकवाली का दबाव जारी रहता है.
इन शेयरों में रही गिरावट
सेंसेक्स के 30 में से 21 शेयर बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए. महिंद्रा एंड महिंद्रा, एलएंडटी, इटरनल, इन्फोसिस, आईटीसी, बजाज फाइनेंस, मारुति, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंडिगो, सन फार्मा, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, अडानी पोर्ट्स, एचसीएल टेक, बजाज फिनसर्व और एशियन पेंट्स के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए. वहीं, एसबीआई, भारतीय एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावरग्रिड, रिलायंस, बीईएल, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में तेजी रही.
आईटी शेयरों पर रहा सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी आईटी सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा और इसमें 1.54% की गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी 50 में TCS के अलावा मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट और अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज के शेयर भी सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे.
दूसरी ओर, निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में करीब 2% की तेजी देखने को मिली. ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 0.28% चढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.18% की गिरावट के साथ बंद हुआ.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज के कारोबार में कुछ कंपनियों के शेयर बड़े सौदों, हिस्सेदारी बिक्री, निवेश और नए ऑर्डर के चलते फोकस में रह सकते हैं. UltraTech Cement में करीब 1,909 करोड़ रुपये का बड़ा ब्लॉक डील होने की संभावना है, जिसमें Pilani Investment करीब 17 लाख शेयर बेच सकती है. वहीं, Jio Financial Services की NBFC इकाई Jio Credit में Bank of America के निवेश की खबर के चलते शेयर पर नजर रहेगी. समझौते के तहत Bank of America अधिकतम 49.9% हिस्सेदारी के लिए 18,268 करोड़ रुपये तक का निवेश कर सकता है.
इसके अलावा RPP Infra Projects में प्रमोटर पक्ष की हिस्सेदारी बिक्री हुई है, जबकि Tenneco Clean Air India में करीब 15% हिस्सेदारी की बड़ी बिक्री देखने को मिली है. वहीं, Vascon Engineers को महाराष्ट्र के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट से 126.39 करोड़ रुपये का नया ऑर्डर मिला है, जिसके चलते इसके शेयर में भी हलचल देखने को मिल सकती है.
आज किन फैक्टर्स पर रहेगी बाजार की नजर?
गुरुवार को बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक बाजारों का रुख, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां अहम रहेंगी. इसके अलावा लगातार दो दिन की गिरावट के बाद निवेशक यह भी देखेंगे कि निचले स्तरों पर खरीदारी बाजार को सहारा देती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है. TCS समेत टाटा ग्रुप के शेयरों के साथ UltraTech Cement, Jio Financial, RPP Infra Projects, Tenneco Clean Air India और Vascon Engineers आज के कारोबार में निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
12 से 14 अगस्त तक चलेगा सब्सक्रिप्शन, ₹92-97 प्रति शेयर तय किया गया प्राइस बैंड; कर्ज चुकाने में खर्च होंगे ₹210 करोड़
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ई-कॉमर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म शिपरॉकेट (Shiprocket) का ₹1,617.5 करोड़ का इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) आज यानी 12 अगस्त से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है. यह IPO 14 अगस्त को बंद होगा. कंपनी को Bertelsmann, Temasek, Tribe Capital और Eternal जैसे बड़े निवेशकों का समर्थन हासिल है. IPO खुलने से पहले Shiprocket ने एंकर निवेशकों को 7.50 करोड़ इक्विटी शेयर आवंटित किए और अपर प्राइस बैंड ₹97 प्रति शेयर के हिसाब से ₹727.41 करोड़ जुटाए. कंपनी ने IPO के लिए ₹92 से ₹97 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. निवेशक कम से कम 154 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं और इसके बाद इसी के गुणकों में बोली लगानी होगी.
पहले प्रस्तावित IPO से छोटा हुआ इश्यू
Shiprocket का मौजूदा IPO आकार दिसंबर 2025 में दाखिल अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में प्रस्तावित ₹2,342.3 करोड़ के इश्यू से काफी कम है. पहले प्रस्ताव में ₹1,100 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹1,242.3 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल था. कंपनी ने अपने IPO दस्तावेज गोपनीय माध्यम से दाखिल किए थे और नवंबर 2025 में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से मंजूरी हासिल की थी.
₹365.6 करोड़ से कारोबार का विस्तार
फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम में से ₹365.6 करोड़ कंपनी के मुख्य और नए बिजनेस प्लेटफॉर्म के विस्तार पर खर्च किए जाएंगे. वहीं, ₹210 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में किया जाएगा. 10 जुलाई 2026 तक कंपनी पर ₹244.5 करोड़ का बकाया कर्ज था. बाकी रकम का इस्तेमाल इनऑर्गेनिक ग्रोथ के अवसरों और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा.
Bertelsmann सबसे बड़ा शेयरधारक
Bertelsmann के पास Shiprocket की 21.32% हिस्सेदारी है और वह कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक है. इसके बाद Tribe Capital की 14.14%, Eternal की 6.85%, KDT Venture Holdings की 5.49% और Temasek समर्थित MacRitchie Investments की 5.29% हिस्सेदारी है. Shiprocket एक टेक्नोलॉजी आधारित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जो MSME और बड़े रिटेलर्स को लॉजिस्टिक्स, चेकआउट, पेमेंट्स, फाइनेंसिंग, फुलफिलमेंट और क्रॉस-बॉर्डर कॉमर्स जैसी सेवाएं उपलब्ध कराता है.
FY26 में 24% बढ़ा रेवेन्यू
वित्त वर्ष 2025-26 में Shiprocket का ऑपरेशनल रेवेन्यू सालाना आधार पर 24% बढ़कर ₹2,024.1 करोड़ हो गया. कंपनी ने FY25 में भी रेवेन्यू में करीब 24% की बढ़ोतरी दर्ज की थी. हालांकि, FY26 में कंपनी का नेट लॉस बढ़कर ₹79.2 करोड़ हो गया, जो FY25 में ₹74.4 करोड़ था. हालांकि, यह FY24 में दर्ज ₹595.1 करोड़ के नुकसान से काफी कम है. ब्रोकरेज फर्मों ने कंपनी की एडजस्टेड प्रॉफिटेबिलिटी और ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार को सकारात्मक संकेत माना है.
Geojit Investments ने मध्यम से लंबी अवधि के निवेशकों के लिए IPO को 'Subscribe' रेटिंग दी है. ब्रोकरेज के मुताबिक, ₹97 के अपर प्राइस बैंड पर IPO के बाद Shiprocket का वैल्यूएशन FY26 EV/Sales के आधार पर 3.6 गुना है, जो लिस्टेड पीयर की तुलना में डिस्काउंट पर है.
19 अगस्त को हो सकती है लिस्टिंग
IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 17 अगस्त को फाइनल होने की उम्मीद है. वहीं, Shiprocket के शेयर 19 अगस्त को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हो सकते हैं. इस इश्यू के बुक-रनिंग लीड मैनेजर Axis Capital, BofA Securities India, JM Financial और Kotak Mahindra Capital Company हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
लगातार दूसरे महीने RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर रही खुदरा महंगाई. जुलाई में खाद्य महंगाई 5.52% पर पहुंची, जबकि ट्रांसपोर्ट, कपड़े-जूते और पर्सनल केयर से जुड़े खर्चों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जुलाई में खुदरा महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ा दिया. जून के 4.38% के मुकाबले जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.45% हो गई. इसके साथ ही महंगाई लगातार दूसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर रही. नई CPI सीरीज लागू होने के बाद यह खुदरा महंगाई का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर भी है.
महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में तेजी रही. प्याज, लहसुन और अदरक की बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया, जबकि ट्रांसपोर्ट, रेस्तरां, कपड़े-जूते और पर्सनल केयर से जुड़े खर्चों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
खाद्य महंगाई 5.52% पर पहुंची
कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) के आधार पर खाद्य महंगाई जून के 5.32% से बढ़कर जुलाई में 5.52% हो गई. शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में खाने-पीने की चीजों की महंगाई ज्यादा रही. जुलाई में शहरी क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.05%, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 5.79% दर्ज की गई.
सब्जियों में प्याज, लहसुन और अदरक की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला. प्याज की महंगाई दर जून के 4.73% से बढ़कर जुलाई में 22.54% पहुंच गई. वहीं, लहसुन की महंगाई 17.93% से बढ़कर 35.36% हो गई. अदरक की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी रही और इसकी महंगाई दर 50.41% से बढ़कर 83.62% तक पहुंच गई. हालांकि, कुछ सब्जियों की कीमतों में गिरावट से उपभोक्ताओं को राहत भी मिली. आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 16.56% की कमी दर्ज की गई. भिंडी, मटर और टमाटर के दाम भी घटे हैं.
सफर से लेकर पर्सनल केयर तक बढ़े खर्च
महंगाई का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं रहा. ट्रांसपोर्ट से जुड़े खर्चों की महंगाई जून के 4.31% से बढ़कर जुलाई में 4.43% हो गई, जबकि माल ढुलाई सेवाओं में महंगाई दर 7.77% दर्ज की गई. आवास क्षेत्र में महंगाई 2.22% रही. वहीं, रेस्तरां और आवास सेवाओं में 7.72% की महंगाई दर्ज की गई. कपड़े और जूतों की महंगाई दर 3.38% रही.
पर्सनल केयर और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े सामान एवं सेवाओं में महंगाई सबसे ऊंचे स्तरों में रही और यह 14.77% दर्ज की गई. स्वास्थ्य सेवाओं में 1.34% और शिक्षा सेवाओं में 3.64% की महंगाई दर्ज की गई.
RBI ने FY27 के लिए घटाया महंगाई अनुमान
महंगाई में हालिया तेजी के बावजूद RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है. केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का महंगाई पर सकारात्मक असर पड़ सकता है.
RBI के अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंच सकती है, जिसके बाद इसमें धीरे-धीरे नरमी आने की उम्मीद है. हालांकि, जुलाई के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि फिलहाल खाद्य कीमतें और रोजमर्रा के बढ़ते खर्च आम उपभोक्ता के बजट पर दबाव बनाए रख सकते हैं.
तीन दिवसीय प्रदर्शनी में 190 से अधिक कंपनियों ने दिखाईं नई तकनीकें. AI, ऑटोमेशन, डिजिटल प्रिंटिंग और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर, कंपनियों को मिले नए बिजनेस लीड और साझेदारी के अवसर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग तेजी से तकनीक आधारित मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और सस्टेनेबल प्रोडक्शन अब इस बदलाव के प्रमुख केंद्र बन रहे हैं. इसी रुझान की झलक गार्टेक्स टेक्सप्रोसेस इंडिया (Gartex Texprocess India 2026) और डेनिम शो (Denim Show) में देखने को मिली, जिसका तीन दिवसीय आयोजन 15,079 विजिटर्स के साथ संपन्न हुआ.
प्रदर्शनी में 190 से अधिक एग्जिबिटर्स ने हिस्सा लिया, जिनमें 40 से ज्यादा कंपनियां पहली बार शामिल हुईं. भारत के अलावा चीन, जापान, सिंगापुर, इटली, जर्मनी, ताइवान, तुर्की और हांगकांग की कंपनियों और उनके डिस्ट्रीब्यूटर्स ने भी अपनी तकनीक और उत्पादों का प्रदर्शन किया. आयोजन ने टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग के लिए नए खरीदारों, बिजनेस लीड और भविष्य की साझेदारियों के अवसर तैयार किए.
खरीदारों और कंपनियों के बीच हुई बिजनेस डील पर बातचीत
तीन दिनों के दौरान एग्जिबिटर्स और इंडस्ट्री से जुड़े प्रोफेशनल्स के बीच लगातार बिजनेस मीटिंग्स हुईं. मैन्युफैक्चरर्स, सोर्सिंग प्रोफेशनल्स, रिटेलर्स, एक्सपोर्टर्स, बायिंग हाउस और फैक्ट्री मालिकों ने नए प्रोजेक्ट्स, उत्पादन जरूरतों और आधुनिक मशीनरी को लेकर चर्चा की.
आयोजक MEX एग्जीबिटर्स की डायरेक्टर हिमानी गुलाटी ने बताया, प्रदर्शनी में कंपनियों ने ऐसी मशीनरी और टेक्नोलॉजी पेश कीं, जिनमें AI और ऑटोमेशन जैसे एडवांस फीचर्स शामिल थे. इनका उद्देश्य उत्पादन का समय कम करना, वेस्टेज घटाना, पानी और ऊर्जा की बचत करना और मैनुअल काम पर निर्भरता कम करना है. लाइव डेमोंस्ट्रेशन के जरिए खरीदारों को नई मशीनरी की क्षमता और अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तकनीकों की तुलना करने का मौका मिला.
टेक्सटाइल से लेकर डेनिम तक नई तकनीकों का प्रदर्शन
गार्टेक्स टेक्सप्रोसेस इंडिया में गारमेंट और अपैरल मशीनरी, टेक्सटाइल प्रोसेसिंग, ऑटोमेशन, डिजिटल प्रिंटिंग, निटिंग और फिनिशिंग टेक्नोलॉजी से जुड़े समाधान प्रदर्शित किए गए. वहीं, डेनिम शो में डेनिम फैब्रिक, नई फैशन रेंज, प्रोसेसिंग और फिनिशिंग तकनीकों पर जोर रहा. डाई और केमिकल्स से जुड़े उत्पाद भी प्रदर्शनी का अहम हिस्सा रहे. एग्जिबिटर्स ने भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के भविष्य को लेकर सकारात्मक उम्मीद जताई. हालांकि, तेजी से बदलती तकनीक के बीच उन्होंने स्किलिंग और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत को भी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बताया.
Denim Show में नई रेंज को मिला अच्छा रिस्पॉन्स
डेनिम शो को खरीदारों और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स से अच्छी प्रतिक्रिया मिली. बाबा टेक्सटाइल मशीनरी (Baba Textile Machinery India Pvt. Ltd.) के डायरेक्टर मुकुंद अग्रवाल ने कहा कि प्रदर्शनी में अच्छी संख्या में विजिटर्स पहुंचे. कंपनी को कई मजबूत बिजनेस लीड मिलीं, जिनमें से कुछ नए कारोबार में भी बदलीं. कंपनी ने एम्ब्रॉयडरी और प्रिंटिंग से जुड़ी नई तकनीकों का प्रदर्शन किया और अगले साल भी आयोजन में शामिल होने की इच्छा जताई. इस दौरान Fabcare (India) Pvt. Ltd. ने अपने नए उपकरणों का लाइव डेमोंस्ट्रेशन किया और नए प्रोडक्ट्स भी लॉन्च किए. Raymond UCO Denim ने अपनी नई फैशन रेंज और नए उत्पादों का प्रदर्शन किया, जिन्हें ग्राहकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली.
AI और सस्टैनिबिलिटी पर हुई भविष्य की चर्चा
प्रदर्शनी के साथ आयोजित Gartex Texprocess Talks और Denim Talks में उद्योग विशेषज्ञों, टेक्नोलॉजी कंपनियों और अन्य प्रोफेशनल्स ने टेक्सटाइल और डेनिम उद्योग के भविष्य पर चर्चा की. इन सत्रों में AI, सस्टैनिबिलिटी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, बदलती उपभोक्ता जरूरतों और ग्लोबल कॉम्पिटिशन जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ. कुल मिलाकर, Gartex Texprocess India और Denim Show ने टेक्सटाइल एवं गारमेंट उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण बिजनेस प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत किया. तीन दिनों के दौरान खरीदारों, मैन्युफैक्चरर्स, टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स और सप्लायर्स के बीच हुई बातचीत से नए बिजनेस और भविष्य की साझेदारियों की संभावनाएं बनीं.
प्रस्तावित ₹10,000 करोड़ का सौदा मिस्त्री परिवार की केवल एक शाखा को कवर करेगा और इसके एक वैकल्पिक निवेश कोष के माध्यम से किए जाने की संभावना है, मामले से जुड़े लोगों ने बताया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
टाटा संस करीब ₹10,000 करोड़ के शेयर बायबैक को लेकर चर्चा कर रही है, जिसके तहत शापूरजी पलोनजी समूह के शापूर मिस्त्री परिवार से जुड़ी हिस्सेदारी का एक हिस्सा खरीदा जा सकता है. मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी.
लोगों ने बताया कि प्रस्तावित लेनदेन केवल परिवार की उसी शाखा तक सीमित रहेगा. टाटा संस में परिवार की कुल 18.37% हिस्सेदारी का वह हिस्सा, जो दिवंगत साइरस मिस्त्री के परिवार से जुड़ा है, बेचा नहीं जा रहा है और यह मौजूदा चर्चा का हिस्सा नहीं है.
सूत्रों ने आगाह किया कि सौदे की शर्तें अभी अंतिम रूप में नहीं हैं, इसका आकार और संरचना बदल सकती है और यह भी संभव है कि बातचीत किसी लेनदेन तक न पहुंचे.
टाटा संस ने विस्तृत सवालों के जवाब में कहा कि वह इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देगी. शापूरजी पलोनजी समूह ने भी विस्तृत सवालों का जवाब नहीं दिया. डिकी अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट के निवेश प्रबंधक ने भी अपनी वेबसाइट पर दिए गए ईमेल के जरिए भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया.
शापूरजी पलोनजी समूह पिछले कई वर्षों से अपने कर्ज को कम करने पर काम कर रहा है, जिसके बारे में सार्वजनिक रिपोर्टों में ₹55,000 करोड़ से ₹60,000 करोड़ के बीच बताया गया है. टाटा संस में उसकी हिस्सेदारी, जो समूह की निवेश इकाइयों के माध्यम से रखी गई है, उसकी सबसे मूल्यवान संपत्ति है, लेकिन सबसे कम तरल भी है. टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन बाहरी खरीदारों को शेयर ट्रांसफर करने पर प्रतिबंध लगाते हैं. 2020 में इस हिस्सेदारी के बदले करीब 1 अरब डॉलर जुटाने की कोशिश को टाटा संस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
शेयर बेचने में असमर्थ रहने के कारण समूह ने इसके बदले कर्ज लिया है, वह भी बार-बार और बढ़ती लागत पर. जून 2023 में गोस्वामी इंफ्राटेक ने 18.75% की दर वाले नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर के जरिए करीब ₹14,300 करोड़ जुटाए थे. यह कर्ज टाटा संस की 9.18% हिस्सेदारी के बदले सुरक्षित किया गया था. इन नोट्स की अवधि अप्रैल 2026 में पूरी हो गई. इससे पहले 2021 में स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ने 9.1% हिस्सेदारी और रियल एस्टेट संपत्तियों के बदले एरेस मैनेजमेंट और फैरालॉन कैपिटल मैनेजमेंट से करीब 2.2 अरब डॉलर जुटाए थे.
समूह ने इस साल फिर से रीफाइनेंसिंग की. स्टर्लिंग के माध्यम से टाटा संस की 9.185% हिस्सेदारी के बदले करीब 3.3 अरब डॉलर के जीरो-कूपन डिबेंचर के लिए एक टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए गए. इन डिबेंचर पर मैच्योरिटी के समय करीब 19.75% की यील्ड देय होगी. उस समय की रिपोर्टों के अनुसार, डॉयचे बैंक करीब 64.4 करोड़ डॉलर के साथ सबसे बड़ा सब्सक्राइबर था, जबकि बर्लिंगटन लोन मैनेजमेंट और वार्डे ने प्रत्येक ने 10 करोड़ डॉलर से अधिक का निवेश किया था. इस रकम का बड़ा हिस्सा पहले के प्राइवेट क्रेडिट लेंडर्स का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया गया.
इस तरह समूह एक ऐसी संपत्ति के बदले करीब 20% की दर पर कर्ज का बोझ उठा रहा है, जिसे वह स्वतंत्र रूप से बेच नहीं सकता. यही दबाव टाटा संस की लिस्टिंग की मांग और हिस्सेदारी के एक हिस्से को बेचने की उसकी इच्छा के पीछे प्रमुख कारण रहा है.
यह प्रतिबंध मौजूदा प्रस्तावित संरचना के केंद्र में है. किसी तीसरे पक्ष को सीधे बिक्री करने के बजाय, व्यवस्था के तहत फंडिंग का एक हिस्सा डिकी अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट के माध्यम से किया जा सकता है. मामले से जुड़े लोगों ने इसे सेबी के साथ पंजीकृत कैटेगरी II अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड बताया है.
लेनदेन से जुड़े नहीं रहे टैक्स विशेषज्ञों ने कहा कि सामान्य तौर पर कैटेगरी II AIF के जरिए निवेश करने से टैक्स ट्रीटमेंट बदल जाता है. आयकर अधिनियम की धारा 115UB के तहत ऐसे फंड को पास-थ्रू दर्जा प्राप्त है. इसका मतलब है कि आय पर टैक्स फंड स्तर पर नहीं, बल्कि निवेशकों के हाथों में लगाया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की संरचना को आमतौर पर प्रमोटर को किए गए वितरण के बजाय आर्म्स-लेंथ निवेश के रूप में माना जाएगा और यह 2024 में बदले गए बायबैक टैक्स नियमों के दायरे से बाहर होगा, जिनमें टैक्स का बोझ प्राप्तकर्ता शेयरधारक पर डाल दिया गया है.
मामले से जुड़े लोगों ने यह नहीं बताया कि प्रस्तावित ढांचे को तैयार करने में टैक्स ट्रीटमेंट कोई कारक था या नहीं. साथ ही, इस बात का कोई संकेत नहीं है कि प्रस्तावित संरचना का कोई भी हिस्सा अनुचित है. AIF और शेयर बायबैक, दोनों ही भारतीय कॉरपोरेट वित्त में सामान्य और विनियमित साधन हैं.
मूल्यांकन पहले की बातचीत में सबसे बड़ी बाधा रहा है. 2020 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कार्यवाही के दौरान मिस्त्री पक्ष के वकील ने परिवार की हिस्सेदारी का मूल्य करीब ₹1.78 लाख करोड़ बताया था, जबकि टाटा संस ने इसका मूल्य लगभग ₹80,000 करोड़ आंका था. दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से इस अंतर को कम नहीं कर सके हैं.
दोनों समूहों के बीच इस साल फिर बातचीत शुरू हुई. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और शापूरजी पलोनजी समूह के चेयरमैन शापूर मिस्त्री ने हाल के महीनों में निजी तौर पर मुलाकात की. SP समूह ने भी टाटा संस की लिस्टिंग की अपनी सार्वजनिक मांग दोहराई है. लिस्टिंग होने से परिवार को अपनी हिस्सेदारी का बाजार मूल्य मिल सकेगा और उसे बेचने का रास्ता खुल जाएगा. टाटा ट्रस्ट्स के दो वाइस चेयरमैन ने भी अलग-अलग तौर पर लिस्टिंग का समर्थन किया है.
इस तरह का आंशिक बायबैक व्यापक मुद्दे का समाधान नहीं करेगा. इससे परिवार की एक शाखा को अपनी हिस्सेदारी के एक हिस्से के बदले नकदी मिल जाएगी, जबकि टाटा संस को पूरी हिस्सेदारी का मूल्य तय करने या मिस्त्री परिवार को अपनी पूरी हिस्सेदारी छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
नोएल टाटा के साथ मतभेदों के बीच इस्तीफा, टाटा संस की लिस्टिंग और बोर्ड में प्रतिनिधित्व को लेकर भी रही असहमति
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में बड़ा बदलाव हुआ है. एन. चंद्रशेखरन ने चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, वह फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल की जिम्मेदारियां संभालते रहेंगे. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच कुछ अहम मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नोएल टाटा चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से पहले कुछ शर्तों पर प्रतिबद्धता चाहते थे. इनमें टाटा संस को भविष्य में शेयर बाजार में लिस्ट नहीं किए जाने की गारंटी भी शामिल थी. हालांकि, चंद्रशेखरन ऐसी प्रतिबद्धता देने के पक्ष में नहीं थे. दोनों पक्षों के बीच टाटा संस के बोर्ड में प्रतिनिधित्व को लेकर भी मतभेद बताए गए हैं.
30 से ज्यादा कंपनियों को नियंत्रित करती है टाटा संस
टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और इसके जरिए समूह की 30 से अधिक कंपनियों को नियंत्रित किया जाता है. इनमें टीसीएस, टाटा मोटर्स और एयर इंडिया जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं. टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66% हिस्सेदारी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी में टाटा संस ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर फैसला टाल दिया था. इसके बाद से ही उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज थीं.
1987 में टाटा समूह से जुड़े थे चंद्रशेखरन
एन. चंद्रशेखरन 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे. उन्होंने 2009 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया. उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कई बड़े कारोबारों और रणनीतिक क्षेत्रों में विस्तार किया. हालांकि, पिछले कुछ समय में समूह को कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है.
एयर इंडिया से लेकर JLR तक कई चुनौतियां
पिछले एक साल में टाटा समूह की प्रमुख कंपनियों से जुड़े कई घटनाक्रम चर्चा में रहे हैं. एयर इंडिया को विमान दुर्घटना के बाद नियामकीय जांच का सामना करना पड़ा. वहीं, टीसीएस पर कीमतों का दबाव देखने को मिला. टाटा समूह की ब्रिटिश ऑटो कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) पर साइबर हमले के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ.
टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेदों का इतिहास भी पुराना है. 2016 में तत्कालीन चेयरमैन साइरस मिस्त्री को टाटा संस के बोर्ड ने पद से हटा दिया था. इसके बाद टाटा समूह और मिस्त्री के बीच लंबे समय तक कानूनी विवाद चला था.
चंद्रशेखरन का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है, जब टाटा समूह के भविष्य के नेतृत्व और टाटा संस की रणनीतिक दिशा को लेकर आगे के फैसले पर बाजार की नजर रहेगी.
IMF के अप्रैल 2026 के अनुमान में जापान और ब्रिटेन भारत से आगे. वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए दो साल में करीब 28% घटा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत 2025-26 में 3.92 ट्रिलियन डॉलर के नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के साथ दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अप्रैल 2026 के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के आधार पर सरकार ने मंगलवार को संसद में यह जानकारी दी. इसी के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) की एसेट क्वालिटी में सुधार से जुड़े आंकड़े भी पेश किए गए.
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि IMF की रैंकिंग मौजूदा अमेरिकी डॉलर विनिमय दरों पर आधारित नॉमिनल GDP के आधार पर तय की जाती है. ऐसे में आर्थिक वृद्धि, विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव, कीमतों में बदलाव, राष्ट्रीय खातों में संशोधन और अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि जैसे कई कारण देशों की रैंकिंग को प्रभावित कर सकते हैं.
कभी पांचवें और चौथे स्थान पर था भारत का अनुमान
भारत ने सितंबर 2022 में नॉमिनल GDP के आधार पर ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान हासिल किया था. इसके बाद अप्रैल 2025 में IMF ने अनुमान जताया था कि भारत 2025 में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. उस समय भारत की नॉमिनल GDP 4.187 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया था.
सरकार की ओर से 30 दिसंबर 2025 को जारी सालाना आर्थिक समीक्षा में भी कहा गया था कि भारत जापान को पीछे छोड़ चुका है और देश की GDP करीब 4.18 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है. हालांकि, IMF के अप्रैल 2026 के ताजा अनुमानों में जापान और ब्रिटेन दोनों भारत से आगे हैं, जिसके चलते भारत 2025-26 में छठे स्थान पर पहुंच गया है.
मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और MSME पर सरकार का फोकस
सरकार भारत की आर्थिक विकास क्षमता को मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीति पर काम कर रही है. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, बुनियादी ढांचा और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी MSME प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं. सरकार प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं, क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स में ढील, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार जैसे कदमों के जरिए आर्थिक वृद्धि को गति देने की कोशिश कर रही है.
इसके अलावा, पीएम गति शक्ति और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी के माध्यम से लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. सरकार इनोवेशन, डिजिटलीकरण और रिसर्च को बढ़ावा देने के साथ-साथ सार्वजनिक पूंजीगत खर्च, उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति और प्रत्यक्ष कर एवं GST से जुड़े सुधारों के जरिए निवेश को समर्थन दे रही है.
भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौतों पर भी जोर दिया जा रहा है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से 5 अगस्त 2026 के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की सकल बिक्री ₹29.8 लाख करोड़ रही.
PSB का सकल NPA दो साल में 28% घटा
इस बीच, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की एसेट क्वालिटी में पिछले दो वर्षों के दौरान उल्लेखनीय सुधार हुआ है. PSBs का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी ग्रॉस एनपीए 31 मार्च 2026 तक घटकर ₹2,45,634 करोड़ रह गया, जो दो साल पहले ₹3,39,541 करोड़ था.
इस तरह सकल एनपीए में करीब 28% की कमी दर्ज की गई है. इसी अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का ग्रॉस एनपीए रेशियो भी 3.47% से घटकर 1.93% रह गया.
बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों में 89% की गिरावट
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में दर्ज धोखाधड़ी के मामलों में भी बड़ी कमी आई है. 2023-24 में जहां 54,850 मामले सामने आए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 5,786 रह गई. यह करीब 89% की गिरावट है.
PSBs की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वित्त वर्षों में 5,147 मामलों में कर्मचारियों की जवाबदेही तय की गई. वहीं, धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार उधारकर्ताओं के खिलाफ 9,451 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई.
GRSE में हुआ लॉन्च, समुद्री निगरानी से लेकर एंटी-पायरेसी मिशन तक में निभाएगा अहम भूमिका
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय नौसेना के लिए नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) ‘श्रुति’ को 11 अगस्त को कोलकाता में लॉन्च किया गया. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यार्ड 3037 श्रुति को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में लॉन्च किया गया. यह पोत समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा.
नौसेना और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
पोत का लॉन्च मणिका साधु ने किया. इस दौरान वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन की कंट्रोलर वाइस एडमिरल संजय साधु मौजूद रहे. लॉन्च समारोह में भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय और GRSE के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया.
दो शिपयार्ड में एक साथ बन रहे पोत
NGOPV कार्यक्रम को एक साथ दो भारतीय शिपयार्ड में आगे बढ़ाया जा रहा है. कोलकाता में GRSE और गोवा में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) इन पोतों का निर्माण कर रहे हैं. इन जहाजों को देश में ही डिजाइन और तैयार किया जा रहा है. इनका उद्देश्य भारतीय नौसेना के मौजूदा ऑफशोर पेट्रोल वेसल (OPV) और नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल बेड़े को मजबूत करना है.
समुद्री निगरानी और रेस्क्यू ऑपरेशन में उपयोग
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, नए पोतों को कई तरह के समुद्री अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इनमें समुद्री निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, ऑफशोर संपत्तियों की सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) तथा एंटी-पायरेसी मिशन शामिल हैं. इन पोतों से समुद्री सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न परिचालन जरूरतों को पूरा करने में नौसेना की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है.
चार वेदों से जुड़ा है ‘श्रुति’ नाम
यार्ड 3037 को ‘श्रुति’ नाम दिया गया है, जो भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित है. ‘श्रुति’ नाम चार वेदों को संदर्भित करता है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पोत के क्रेस्ट में उर्सा मेजर तारामंडल के साथ लाल और सफेद रंग का लाइटहाउस भी दर्शाया गया है.
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बढ़ावा
‘श्रुति’ का लॉन्च भारत में स्वदेशी युद्धपोत निर्माण की दिशा में नौसेना के प्रयासों की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है. यह कार्यक्रम सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान और देश में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप है. GRSE और GSL में इन पोतों का समानांतर निर्माण भारतीय नौसेना के पेट्रोल वेसल बेड़े को बढ़ाने में मदद करेगा. इससे समुद्री सुरक्षा, निगरानी और विभिन्न परिचालन अभियानों के लिए नौसेना की क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है.