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इस बैंक को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी, सरकार और LIC बेच सकते हैं 60% हिस्सेदारी
मोदी सरकार अपने वित्तीय बोझ को कम करने और सार्वजनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए धन जुटाने के लिए प्राइवेटाइजेशन पर जोर दे रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
विरोध के बावजूद प्राइवेटाइजेशन की दिशा में आगे बढ़ते हुए मोदी सरकार एक बड़ा फैसला ले सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में अपनी 60 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकते हैं.
दोनों के पास 94% हिस्सेदारी
आईडीबीआई बैंक में सरकार और LIC की करीब 94 प्रतिशत हिस्सेदारी है. 30 जून तक केंद्र के पास इसकी 45.48 प्रतिशत और एलआईसी के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. सरकार का कहना है कि वह विनिवेश प्रक्रिया के हर चरण में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से उचित सावधानी बरतने की मांग करेगी. बता दें कि इसके पहले 2021 के बजट में मोदी सरकार ने IDBI बैंक से बाहर निकलने के अपने इरादे की घोषणा की थी.
शेयर में आई तेजी
शेयर बाजार में IDBI बैंक के प्रदर्शन की बात करें, तो मंगलवार को कारोबारी दिन की समाप्ति पर यह शेयर 0.23% की बढ़त के साथ 43.40 रुपए पर ट्रेड कर रहा था. हालांकि, पिछले पांच दिनों में इसमें 6.06% गिरावट देखने को मिली है. लेकिन यदि एक साल का रिकॉर्ड देखें तो यह 11 प्रतिशत चढ़ा है. इसका 52 सप्ताह का हाई लेवल 65.25 रुपए है.
मोदी सरकार की चाहत
मोदी सरकार अपने वित्तीय बोझ को कम करने और सार्वजनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए धन जुटाने के लिए प्राइवेटाइजेशन पर जोर दे रही है. सरकार की लिस्ट में कई सरकारी कंपनियां हैं, जबकि कुछ को पहले ही निजी हाथों में सौंपा जा चुका है. सरकार बैंकों का भी निजीकरण करना चाहती है, लेकिन रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के एक लेख में सरकार की इस योजना पर सवाल उठाए जा चुके हैं. लेख में कहा गया है कि बैंकों के निजीकरण का फायदे से अधिक नुकसान हो सकता है. लेख में सरकार को इस मामले में ध्यान से आगे बढ़ने की सलाह दी गई है. हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद RBI ने इस लेख पर सफाई देते हुए कहा था कि ये लेखक की निजी राय है.
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