मिरे एसेट म्यूचुअल फंड ने लॉन्‍च किया Mirae Asset Multicap Fund, जानें क्या है खास

यह फंड ऐसे निवेशकों के लिए बेहतरीन विकल्प है, जो 5 साल से अधिक की अवधि तक निवेश करना चाहते हैं.

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Friday, 28 July, 2023
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यदि आप इन्वेस्टमेंट की प्लानिंग कर रहे हैं, तो मिरे एसेट म्यूचुअल फंड आपके लिए एक विकल्प लेकर आया है. कंपनी ने मिरे एसेट मल्टीकैप फंड (Mirae Asset Multicap Fund) लॉन्च कर दिया है, जो लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप शेयरों में निवेश करने वाली एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है. फंड के लिए New Fund Offer (NFO) आज यानी 28 जुलाई से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है और यह 11 अगस्त को बंद होगा. फंड के लिए बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 500 मल्टीकैप 50:25:25 टीआरआई होगा.

शुरू में इतना निवेश जरूरी 
मिरे एसेट मल्टीकैप फंड में कम से कम 5000 रुपए का शुरूआती निवेश करना होगा और इसके बाद 1 रुपए के मल्‍टीपल में कितनी भी राशि निवेश की जा सकती है. ये फंड निवेशकों के लिए रेगुलर प्लान और डायरेक्ट प्लान दोनों में उपलब्ध होगा. NFO के बाद, मिनिमम एडिशनल परचेज अमाउंट 1000 रुपए और उसके बाद 1 रुपए के मल्‍टीपल में होगा.

इनके लिए है बेहतरीन विकल्प  
यह फंड ऐसे निवेशकों के लिए बेहतरीन विकल्प है, जो 5 साल से अधिक की अवधि तक निवेश करना चाहते हैं. साथ ही अलग-अलग मार्केट कैप वाली कंपनियों में अपने इक्विटी पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाइड करना चाहते हैं. कंपनी की तरफ से बताया गया है कि लार्ज कैप निवेश मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से टॉप 100 शेयरों में होगा, जहां मिड कैप और स्मॉल कैप की तुलना में कम डाउनसाइड रिस्‍क और कम अस्थिरता होती है. जबकि मिड कैप में मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से अगले 150 (101वें से 250वें) स्टॉक शामिल हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर बेहतर वैल्यूएशन वाले इमर्जिंग बिजनेस शामिल हैं.

एक डायनेमिक विकल्प
मिरे एसेट मल्टीकैप फंड के फंड मैनेजर अंकित जैन ने कहा कि शुरू से ही हमारा प्रयास रहा है कि हम अपने निवेशकों को अलग-अलग विकल्प प्रदान करें, जो उनकी निवेश की रणनीतियों के अनुरूप उनके रिटर्न को बेहतर बनाने में सक्षम हों. मिरे एसेट मल्टीकैप फंड भी इसी तरह के सिद्धांत का पालन करता है. यह निवेशकों को कई योजनाओं को जोड़ने की आवश्यकता के बिना पूरे बाजार स्पेक्ट्रम में अपने निवेश का विस्तार करने में सक्षम बनाता है. मल्टीकैप फंड लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप फंड में निवेश करता है, जिससे निवेश को डाइवर्सिफिकेशन मिलता है और जोखिम घट जाते हैं. इसी वजह से यह रिस्‍क और रिवॉर्ड को बैलेंस करने वाला एक डायनेमिक विकल्प बन जाता है.
 


जून तिमाही में एयरटेल की दमदार कमाई, मुनाफा ₹8,167 करोड़ पहुंचा, आय ने तोड़े अनुमान

कंपनी की कुल आय पहली बार 58,500 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई, जो बाजार के अनुमान से बेहतर रही.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2026
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Wednesday, 05 August, 2026
BWHindia

देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही के शानदार नतीजे पेश किए हैं. कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 11.5 फीसदी बढ़कर 8,167 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि यह बाजार के 8,374 करोड़ रुपये के अनुमान से थोड़ा कम रहा, लेकिन कंपनी की आय उम्मीदों से बेहतर रही.

तिमाही के दौरान एयरटेल का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5.7 फीसदी बढ़कर 58,539 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि बाजार को 57,054 करोड़ रुपये की उम्मीद थी. वहीं EBITDA 6.7 फीसदी की बढ़त के साथ 33,599 करोड़ रुपये रहा और EBITDA मार्जिन बढ़कर 57.4 फीसदी पर पहुंच गया.

रिकॉर्ड संख्या में जुड़े पोस्टपेड ग्राहक

जून तिमाही एयरटेल के लिए ग्राहक जोड़ने के लिहाज से भी ऐतिहासिक रही. कंपनी ने सिर्फ तीन महीनों में 10 लाख नए पोस्टपेड ग्राहक जोड़े, जो किसी एक तिमाही में अब तक का सबसे बड़ा इजाफा है. इसके अलावा 50 लाख नए स्मार्टफोन यूजर भी एयरटेल नेटवर्क से जुड़े.

अब कंपनी के कुल मोबाइल ग्राहकों में करीब 80 फीसदी स्मार्टफोन यूजर हैं. इसी का असर प्रति ग्राहक औसत आय (ARPU) पर भी दिखा, जो एक साल पहले के 250 रुपये से बढ़कर 264 रुपये हो गई. वहीं प्रति ग्राहक मासिक डेटा खपत 36 फीसदी बढ़कर 34.4 GB तक पहुंच गई.

ब्रॉडबैंड और अफ्रीका कारोबार ने भी दिखाई मजबूती

मोबाइल सेवाओं के अलावा एयरटेल का होम ब्रॉडबैंड कारोबार भी लगातार मजबूत हो रहा है. इस सेगमेंट का रेवेन्यू 4.4 फीसदी बढ़ा. पिछले एक साल में कंपनी ने 37 लाख नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जोड़े, जिनमें से 4.73 लाख ग्राहक सिर्फ जून तिमाही में जुड़े.

एयरटेल बिजनेस की आय में 3.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं अफ्रीका कारोबार ने स्थिर मुद्रा के आधार पर 5.7 फीसदी की ग्रोथ हासिल की. हाल ही में शेयर स्वैप डील के बाद कंपनी ने अफ्रीका में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 79 फीसदी से अधिक कर ली है.

नेटवर्क विस्तार पर 13,386 करोड़ रुपये का निवेश

नेटवर्क को और मजबूत बनाने के लिए एयरटेल ने जून तिमाही में 13,386 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश (Capex) किया. इसमें से 9,698 करोड़ रुपये केवल भारत में खर्च किए गए, जिससे 4G और 5G नेटवर्क विस्तार को गति मिली.

 


संदीप बत्रा का ग्लोबल लीडरशिप मॉडल: कैसे HSBC के जरिए भारत की बढ़ती संपदा को दुनिया से जोड़ रहे हैं बैंकिंग दिग्गज

25 वर्षों से अधिक के बैंकिंग अनुभव, पांच देशों में नेतृत्व और भारत के वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार को नई दिशा देने वाले HSBC इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं हेड ऑफ इंटरनेशनल वेल्थ एंड प्रीमियर बैंकिंग संदीप बत्रा का करियर वैश्विक अनुभव और ग्राहक-केंद्रित सोच का अनूठा उदाहरण है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2026
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भारत में वेल्थ मैनेजमेंट और प्रीमियम बैंकिंग को नई दिशा देने वाले HSBC इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं हेड ऑफ इंटरनेशनल वेल्थ एंड प्रीमियर बैंकिंग संदीप बत्रा आज यानी 05 अगस्त को अपना जन्मदिन मना रहे हैं. 25 वर्षों से अधिक के बैंकिंग अनुभव, पांच देशों में नेतृत्व और वैश्विक वित्तीय बाजारों की गहरी समझ रखने वाले बत्रा ने अपने करियर में भारत की बढ़ती संपदा को दुनिया के वित्तीय अवसरों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है. उनके जन्मदिन के अवसर पर आइए जानते हैं उनके अब तक के पेशेवर सफर और नेतृत्व की खास बातें.

संदीप बत्रा का बैंकिंग करियर देशों, संस्कृतियों और जटिल वित्तीय बाजारों के बीच लगातार आगे बढ़ने की कहानी है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान यह रही है कि उन्होंने हर बाजार में ग्राहकों की जरूरतों को समझते हुए भविष्य के अवसरों को समय रहते पहचाना और उसी के अनुरूप कारोबार को आगे बढ़ाया.

वर्तमान में वह HSBC इंडिया में मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड ऑफ इंटरनेशनल वेल्थ एंड प्रीमियर बैंकिंग के रूप में कार्यरत हैं. ऐसे समय में जब भारत तेजी से संपन्न अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और नए निवेशकों की संख्या बढ़ रही है, बत्रा की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है. आज भारत के संपन्न ग्राहक पहले की तुलना में अधिक युवा, वैश्विक सोच रखने वाले और निवेश के प्रति जागरूक हैं. ऐसे ग्राहकों को वैश्विक वित्तीय नेटवर्क से जोड़ने के लिए सिर्फ बैंकिंग उत्पाद नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बदलती आर्थिक जरूरतों की समझ भी जरूरी है.

25 साल का अनुभव, 12 शहर और 5 देशों में नेतृत्व

संदीप बत्रा के पास बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है. इस दौरान उन्होंने 12 शहरों और पांच देशों में काम किया, जिनमें से लगभग 18 वर्ष उन्होंने भारत से बाहर बिताए. वह स्वयं अपने मुंबई स्थित वर्तमान घर को अपना 25वां निवास बताते हैं, जो उनके वैश्विक करियर की व्यापकता को दर्शाता है.

भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरु के पूर्व छात्र बत्रा ने HSBC से जुड़ने से पहले 15 वर्षों से अधिक समय तक सिटी (Citi) के साथ काम किया. अगस्त 2022 में उन्होंने HSBC इंडिया का कार्यभार संभाला.

रूस और थाईलैंड में निभाई अहम जिम्मेदारियां

अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान संदीप बत्रा ने रूस में सिटीबैंक के कंज्यूमर बैंकिंग कारोबार का नेतृत्व किया, जहां उन्होंने तेजी से बदलते आर्थिक माहौल में व्यवसाय को आगे बढ़ाया. इसके अलावा थाईलैंड में उन्होंने कार्ड्स और लेंडिंग बिजनेस का नेतृत्व किया.

थाईलैंड में उन्होंने पारंपरिक बैंकिंग और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों और डिजिटल वॉलेट्स के साथ साझेदारियां विकसित कीं. इस अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि तकनीक, सुविधा और ग्राहकों की बदलती जीवनशैली किस तरह बैंकिंग सेवाओं को नया स्वरूप दे रही है.

भारत की बढ़ती वेल्थ इकोनॉमी पर HSBC का बड़ा दांव

HSBC इंडिया में संदीप बत्रा के नेतृत्व में रिटेल बैंकिंग, प्राइवेट बैंकिंग, वेल्थ मैनेजमेंट, क्रेडिट कार्ड, होम लोन, पर्सनल लोन, एसेट मैनेजमेंट और इंश्योरेंस जैसे कई महत्वपूर्ण कारोबार आते हैं.

उनके कार्यकाल में HSBC ने भारत के संपन्न और वैश्विक ग्राहकों के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है. वर्ष 2025 में बैंक को 20 नए शहरों में शाखाएं खोलने की नियामकीय मंजूरी मिली. इससे HSBC का नेटवर्क 14 शहरों में 26 शाखाओं से बढ़कर 46 शाखाओं तक पहुंचने की संभावना है.

यह विस्तार सिर्फ शाखाओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देश के उभरते आर्थिक केंद्रों तक वैश्विक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना भी है.

ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप नई पहल

संदीप बत्रा की अगुवाई में HSBC ने ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई नई पहल की हैं. इनमें HSBC Premier सेवाओं को मजबूत करना, रिवॉर्ड्स मार्केटप्लेस को अपग्रेड करना और संपन्न भारतीय ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप नई साझेदारियां विकसित करना शामिल है.

आज प्रीमियम बैंकिंग सिर्फ निवेश उत्पादों तक सीमित नहीं रह गई है. ग्राहक डिजिटल सुविधा, वैश्विक बैंकिंग एक्सेस, व्यक्तिगत वित्तीय सलाह और बेहतर लाइफस्टाइल सेवाओं की भी अपेक्षा करते हैं. बत्रा की रणनीति इन्हीं बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है.

तकनीक के साथ मानवीय नेतृत्व पर भी जोर

तकनीकी बदलावों के दौर में भी संदीप बत्रा लोगों को केंद्र में रखने वाले नेतृत्व में विश्वास करते हैं. उन्हें सहयोगी और समावेशी कार्य संस्कृति विकसित करने तथा बैंकिंग क्षेत्र के भविष्य के नेताओं को तैयार करने के लिए जाना जाता है.

उनका मानना है कि बैंकिंग भले ही तेजी से डिजिटल होती जा रही हो, लेकिन ग्राहकों का भरोसा, उनकी वित्तीय सुरक्षा और जीवन के बड़े फैसले आज भी मानवीय समझ और संवेदनशीलता पर ही आधारित होते हैं.

वैश्विक अनुभव और स्थानीय समझ का संतुलन

संदीप बत्रा का करियर यह दिखाता है कि अलग-अलग देशों में सफल नेतृत्व के लिए एक ही मॉडल हर जगह काम नहीं करता. इसके लिए स्थानीय संस्कृति, ग्राहकों की जरूरतों और आर्थिक परिस्थितियों को समझना जरूरी होता है. भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है. ऐसे समय में बत्रा जैसे नेतृत्वकर्ता, जो अंतरराष्ट्रीय अनुभव को भारतीय बाजार की जरूरतों के साथ जोड़ सकें, भविष्य की बैंकिंग व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. 25 वर्षों से अधिक का अनुभव, कई वैश्विक बाजारों में नेतृत्व और भारत में HSBC की वेल्थ बैंकिंग रणनीति को नई दिशा देने में उनकी भूमिका उन्हें देश के प्रमुख बैंकिंग नेताओं में शामिल करती है. उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी खासियत यही है कि वह वैश्विक सोच के साथ ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ते हैं.

उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके अब तक के सफर को सलाम करते हुए यही कामना है कि वे आने वाले वर्षों में भी बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करते रहें.


RBI के फैसले पर विशेषज्ञ बोले- अर्थव्यवस्था मजबूत, रियल एस्टेट-इंफ्रा को मिलेगा सहारा

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उम्मीद के अनुरूप है, जबकि रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के प्रतिनिधियों ने इसे निवेश, मांग और विकास के लिहाज से सकारात्मक बताया है.

रितु राणा by
Published - Wednesday, 05 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार दूसरी बार रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखते हुए 'न्यूट्रल' रुख कायम रखा है. साथ ही केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया, जबकि महंगाई (CPI) का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है. RBI का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते सतर्कता जरूरी है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उम्मीद के अनुरूप है, जबकि रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के प्रतिनिधियों ने इसे निवेश, मांग और विकास के लिहाज से सकारात्मक बताया है.

रेपो रेट पर यथास्थिति, सभी प्रमुख दरें भी बरकरार

तीन से पांच अगस्त तक चली MPC बैठक में सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला किया. इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) व बैंक रेट 5.5% पर यथावत रखे गए. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि समिति ने घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई, वृद्धि और वित्तीय बाजारों की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया है.

GDP पर भरोसा, महंगाई पर सतर्कता

RBI ने FY27 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है. वहीं CPI महंगाई का अनुमान 5% रखा गया है. गवर्नर ने कहा कि पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है. मैन्युफैक्चरिंग, निजी खपत और विवेकाधीन खर्च में मजबूती देखने को मिली है. हालांकि पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण आगे भी सतर्क रहने की जरूरत है. RBI का अनुमान है कि तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद इसमें नरमी आएगी.

रियल एस्टेट सेक्टर ने फैसले को बताया 'डिमांड बूस्टर'

RBI के फैसले का सबसे सकारात्मक असर रियल एस्टेट सेक्टर ने देखा. M3M इंडिया के निदेशक यतीश वहाल ने कहा कि स्थिर ब्याज दरों से होम लोन की लागत में स्थिरता बनी रहेगी, जिससे खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा और एंड-यूजर डिमांड मजबूत होगी. वहीं डेवलपर्स को निवेश और परियोजनाओं की योजना बेहतर तरीके से बनाने में मदद मिलेगी.

लोहिया वर्ल्डस्पेस के प्रबंध निदेशक पीयूष लोहिया का कहना है कि RBI ने विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलित रुख अपनाया है. उनका मानना है कि तीसरी तिमाही के बाद महंगाई में नरमी आने की उम्मीद रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है. इससे मिड-इनकम और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में मांग को बल मिलेगा.

डेवलपर्स बोले- खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा, प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ्तार

अनहद डेवलपर्स के CEO आदिल अल्ताफ ने कहा कि स्थिर ब्याज दरों से घर खरीदना आसान होगा और डेवलपर्स को लागत में अचानक बदलाव की चिंता नहीं रहेगी. इससे परियोजनाओं की बेहतर प्लानिंग और समय पर डिलीवरी संभव होगी.

पायनियर अर्बन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरीवाल का कहना है कि स्थिर ब्याज दरों और बेहतर लिक्विडिटी से डेवलपर्स के लिए नई परियोजनाएं शुरू करना आसान होगा, जबकि खरीदारों का भरोसा भी मजबूत रहेगा.

वहीं, रॉयल ग्रीन रियल्टी के प्रबंध निदेशक यशांक वासन ने कहा कि EMI में स्थिरता से घर खरीदने का विश्वास बढ़ेगा और डेवलपर्स को नई परियोजनाओं की योजना बनाने में सुविधा मिलेगी.

बाजार में भरोसा और निवेश दोनों बढ़ेंगे

जिंदल रियल्टी के CEO एवं प्रेसिडेंट अभय मिश्रा का कहना है कि स्थिर ब्याज दरें रियल एस्टेट सेक्टर के लिए राहत हैं. यदि आगे भी सरकार की नीतियों का समर्थन और पर्याप्त लिक्विडिटी मिलती रही तो निवेश और मांग दोनों में तेजी आएगी.

काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी ने कहा कि यह फैसला आर्थिक संतुलन बनाए रखने का संकेत है. आज खरीदार सिर्फ घर नहीं बल्कि बेहतर जीवनशैली, भविष्य में मूल्य वृद्धि और आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर निवेश कर रहे हैं. ऐसे में स्थिर ब्याज दरें उनके भरोसे को मजबूत करेंगी.

ट्राइडेंट रियल्टी के CEO परविंदर सिंह के अनुसार, स्थिर मौद्रिक नीति डेवलपर्स की वित्तीय योजना को आसान बनाती है और उभरते बाजारों में आवासीय मांग को बनाए रखने में मदद करती है.

आराइज ग्रुप के एमडी एवं संस्थापक अमन शर्मा ने कहा, "रियल एस्टेट सेक्टर के लिए स्थिर ब्याज दरें बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इससे घर खरीदारों और डेवलपर्स को लंबे समय की योजनाएं बनाने में भरोसा मिलता है. हमें उम्मीद है कि इससे घर खरीदने की मांग बढ़ेगी और डेवलपर्स भी निवेश तथा परियोजनाओं की रफ्तार बनाए रख सकेंगे."

HCBS डेवलपमेंट्स के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ सहारन ने कहा कि RBI का फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर उसके भरोसे को दर्शाता है. इससे घर खरीदारों को ब्याज दरों में अचानक बदलाव की चिंता नहीं रहेगी, जबकि डेवलपर्स लंबे समय की निवेश योजनाओं पर अधिक विश्वास के साथ काम कर सकेंगे.

बॉन्ड मार्केट को मिला सहारा, लेकिन आगे भी रहेगी सतर्कता

PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड के हेड-फिक्स्ड इनकम पुनीत पाल ने कहा कि RBI का फैसला उम्मीदों के अनुरूप रहा और इसमें नरम (Dovish) रुख देखने को मिला. उनके मुताबिक, GDP वृद्धि का अनुमान बढ़ाना और महंगाई का अनुमान घटाना अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी संकेत हैं. हालांकि, उनका मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में 50-75 बेसिस प्वाइंट तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है.

वहीं, कोटक महिंद्रा AMC के CIO-डेट दीपक अग्रवाल ने कहा कि RBI का फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा और इसमें हल्का डोविश रुख दिखाई दिया. उनके अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से ऊर्जा कीमतों में नरमी आई है, जिससे महंगाई के अनुमान में कमी आई है. साथ ही मजबूत निर्यात, निजी खपत, हाल के व्यापार समझौतों और RBI के विदेशी मुद्रा एवं पूंजी प्रवाह से जुड़े उपायों के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है. उन्होंने कहा कि RBI का डेटा आधारित रुख सही है और इसी कारण नीति की घोषणा के बाद 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 3 बेसिस प्वाइंट घटकर 6.78% पर आ गई. हालांकि, बाजार अगले 6 से 12 महीनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को अभी भी ध्यान में रख रहा है.

इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स को मिलेगा समर्थन

ACE-एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट के CFO राजन लूथरा का कहना है कि रेपो रेट को स्थिर रखने और GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाने से यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है. उन्होंने कहा कि सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत निवेश पर लगातार फोकस देश की विकास यात्रा को गति दे रहा है. स्थिर ब्याज दरों से फाइनेंसिंग आसान होगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी. इससे कंपनियां लंबी अवधि की रणनीति और इनोवेशन पर अधिक भरोसे के साथ काम कर सकेंगी.

'वेट एंड वॉच' की रणनीति पर कायम RBI

विशेषज्ञों का मानना है कि RBI ने फिलहाल विकास को समर्थन देने और महंगाई पर नजर बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है. केंद्रीय बैंक का रुख संकेत देता है कि आगे के फैसले महंगाई, वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक आंकड़ों के आधार पर लिए जाएंगे. फिलहाल रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला बॉन्ड बाजार, इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योग और रियल एस्टेट सेक्टर, तीनों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है.
 


क्या बैंकिंग सिस्टम में बढ़ेगी नकदी? RBI गवर्नर ने लिक्विडिटी पर साफ किया रुख

केंद्रीय बैंक ने फिलहाल कोई नया लिक्विडिटी बूस्टर नहीं दिया, लेकिन गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भरोसा दिलाया कि जरूरत के मुताबिक बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराई जाती रहेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है. हालांकि इस बार बाजार की नजर सिर्फ ब्याज दरों पर नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में नकदी (लिक्विडिटी) को लेकर RBI के रुख पर भी थी. केंद्रीय बैंक ने फिलहाल कोई नया लिक्विडिटी बूस्टर नहीं दिया, लेकिन गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भरोसा दिलाया कि जरूरत के मुताबिक बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराई जाती रहेगी.

रेपो रेट के साथ सभी प्रमुख दरें यथावत

मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में लगातार दूसरी बार रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा गया. इसके साथ ही RBI ने मौद्रिक नीति का 'न्यूट्रल' रुख भी कायम रखा. स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5%, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट 5.5% पर यथावत रखे गए हैं. समिति का मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत नहीं है.

लिक्विडिटी पर क्या बोला RBI?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि RBI यह सुनिश्चित करेगा कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहे. इसका उद्देश्य यह है कि बैंकों के पास कर्ज देने और रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें. हालांकि केंद्रीय बैंक ने इस बैठक में नकदी बढ़ाने के लिए किसी नए कदम का ऐलान नहीं किया.

फिलहाल नहीं मिला कोई बड़ा लिक्विडिटी बूस्टर

बाजार को उम्मीद थी कि RBI कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में कटौती, ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) या किसी अन्य विशेष लिक्विडिटी उपाय की घोषणा कर सकता है. लेकिन केंद्रीय बैंक ने फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं लिया. RBI ने संकेत दिया कि मौजूदा समय में सिस्टम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध है और जरूरत पड़ने पर वह उचित कदम उठाने के लिए तैयार है.

बैंकिंग सेक्टर की स्थिति मजबूत

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि विभिन्न सेक्टरों में कर्ज की मांग मजबूत बनी हुई है और बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ व्यापक आधार पर जारी है. हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कुछ कम हुआ है, लेकिन बैंकिंग प्रणाली मजबूत स्थिति में है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखी जाएगी, जिससे कर्ज वितरण की रफ्तार प्रभावित नहीं होगी.

बॉन्ड और मनी मार्केट में दिखी नरमी

RBI के मुताबिक जुलाई के दौरान शॉर्ट टर्म मनी मार्केट की ब्याज दरों में नरमी देखने को मिली है. इसके अलावा जून और जुलाई में विभिन्न अवधि वाले सरकारी बॉन्ड (G-Sec) की यील्ड भी घटी है. इससे संकेत मिलता है कि वित्तीय बाजारों में फंडिंग की स्थिति पहले के मुकाबले अधिक सहज हुई है और फिलहाल नकदी का कोई बड़ा दबाव नहीं है.

सहकारी बैंकों के लिए दो बड़े ऐलान

केंद्रीय बैंक ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए दो अहम घोषणाएं भी की हैं. RBI जल्द ही शहरी सहकारी बैंकों (Urban Cooperative Banks) की लाइसेंसिंग दोबारा शुरू करने के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी करेगा. इसके अलावा ग्रामीण सहकारी बैंकों (Rural Cooperative Banks) के लिए भी नए ड्राफ्ट दिशा-निर्देश लाए जाएंगे. RBI का मानना है कि इन कदमों से सहकारी बैंकिंग व्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीण तथा छोटे शहरों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बेहतर बनेगी.

महंगाई और वैश्विक जोखिमों पर बनी हुई है नजर

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई अभी भी RBI के लक्ष्य से ऊपर है और खाद्य व ईंधन की कीमतों का दबाव बना हुआ है. इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अल नीनो और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं भी जोखिम पैदा कर रही हैं. ऐसे में केंद्रीय बैंक फिलहाल कोई आक्रामक कदम उठाने के बजाय आर्थिक परिस्थितियों पर नजर बनाए रखना चाहता है.

फिलहाल 'वेट एंड वॉच' मोड में RBI

पूरी मौद्रिक नीति समीक्षा का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि RBI फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की रणनीति पर काम कर रहा है. एक ओर भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर उम्मीद से बेहतर बनी हुई है, बैंकिंग सेक्टर मजबूत है और वित्तीय बाजारों में पर्याप्त नकदी उपलब्ध है. वहीं दूसरी ओर वैश्विक अनिश्चितताएं और महंगाई से जुड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं. ऐसे में केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों के आर्थिक आंकड़ों और महंगाई के रुख का आकलन करने के बाद ही किसी बड़े नीतिगत बदलाव पर फैसला करेगा.
 


RBI ने बढ़ाया GDP ग्रोथ का अनुमान, घटाया महंगाई का आकलन; रेपो रेट 5.25% पर बरकरार

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है, हालांकि वैश्विक जोखिमों को देखते हुए सतर्कता अभी भी जरूरी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 05 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार दूसरी बार रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है. इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया, जबकि खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है, हालांकि वैश्विक जोखिमों को देखते हुए सतर्कता अभी भी जरूरी है.

रेपो रेट और पॉलिसी रुख में कोई बदलाव नहीं

तीन से पांच अगस्त तक चली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में छहों सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया. समिति ने मौद्रिक नीति का 'न्यूट्रल' रुख भी कायम रखा. इसके अलावा स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5%, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट 5.5% पर यथावत रखे गए हैं.

GDP ग्रोथ के अनुमान में बढ़ोतरी

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है. केंद्रीय बैंक के अनुसार पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा, जिसके चलते पूरे साल के विकास अनुमान में संशोधन किया गया. RBI का अनुमान है कि पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7%, दूसरी तिमाही में 6.4%, तीसरी तिमाही में 6.5% और चौथी तिमाही में 6.8% रहेगी.

घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग बनी ताकत

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक रहे हैं. निजी खपत मजबूत बनी हुई है और विवेकाधीन खर्च में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. घरेलू मांग के दम पर सेवा क्षेत्र में भी अच्छी वृद्धि की संभावना बनी हुई है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है.

महंगाई के मोर्चे पर राहत

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है. गवर्नर ने बताया कि पहली तिमाही में वास्तविक महंगाई RBI के अनुमान से थोड़ी कम रही, क्योंकि लागत बढ़ने का असर उपभोक्ताओं तक सीमित रहा. उन्होंने कहा कि खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण हेडलाइन महंगाई पर दबाव बना हुआ है, लेकिन कोर महंगाई अब भी नियंत्रण में है. RBI का अनुमान है कि दूसरी तिमाही में महंगाई 4.7%, तीसरी तिमाही में 5.9% और चौथी तिमाही में 5.5% रह सकती है. तीसरी तिमाही के बाद महंगाई में धीरे-धीरे नरमी आने की उम्मीद है.

वैश्विक जोखिमों पर RBI की नजर

RBI ने कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताएं अभी भी चिंता का विषय हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापार नीतियों में अनिश्चितता और मौसम संबंधी जोखिम आगे महंगाई और आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं. गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक किसी भी बड़े नीतिगत बदलाव से पहले महंगाई के रुख और आर्थिक आंकड़ों में अधिक स्पष्टता का इंतजार करेगा. इसलिए फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
 


जुपिटर वैगन्स की इटली की कंपनियों के साथ बड़ी साझेदारी, भारत में बनेगा अत्याधुनिक रेलव्हील मैन्युफैक्चरिंग हब

इस साझेदारी का उद्देश्य भारत का पहला पूरी तरह एकीकृत निजी क्षेत्र का रेलव्हील मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म विकसित करना है. कंपनियों के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म भारतीय रेलवे और निजी ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करेगा.

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Published - Wednesday, 05 August, 2026
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Wednesday, 05 August, 2026
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भारत में रेलवे विनिर्माण को नई रफ्तार देने के लिए जुपिटर वैगन्स (Jupiter Wagons) ने इटली की Lucchini RS Holding S.p.A. और इटली सरकार समर्थित वित्तीय संस्था SIMEST S.p.A. के साथ रणनीतिक साझेदारी की है. इस समझौते के तहत भारत में रेलवे व्हील, एक्सल और व्हीलसेट के लिए एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म स्थापित किया जाएगा, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और भारत की वैश्विक रेलवे सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होगी.

जुपिटर वैगन्स (JWL) ने मंगलवार को बताया कि इस बाध्यकारी समझौते (Binding Agreement) के तहत Lucchini RS, Jupiter Tatravagonka Railwheel Factory Private Limited (JTRWF) में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी, जबकि SIMEST अतिरिक्त 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करेगी. दोनों का संयुक्त 25 प्रतिशत निवेश लगभग 2.8 करोड़ यूरो (28 मिलियन यूरो) का होगा.

देश का पहला एकीकृत निजी रेलव्हील मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म

इस साझेदारी का उद्देश्य भारत का पहला पूरी तरह एकीकृत निजी क्षेत्र का रेलव्हील मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म विकसित करना है. यहां रेलवे व्हील, एक्सल और व्हीलसेट का निर्माण कच्चे माल की प्रोसेसिंग, फोर्जिंग, मशीनिंग से लेकर अंतिम असेंबली तक एक ही प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा. इससे पूरे उत्पादन चक्र का संचालन भारत में ही संभव होगा.

ओडिशा में बनेगा नया प्लांट

वर्तमान में JTRWF की छत्रपति संभाजीनगर स्थित यूनिट मशीनिंग और व्हीलसेट असेंबली का काम करती है. इसे ओडिशा में विकसित किए जा रहे ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स से जोड़ा जाएगा. ओडिशा प्लांट में फोर्जिंग, मेटलर्जी और रेलव्हील निर्माण जैसी क्षमताएं विकसित की जाएंगी, जिससे पूरी उत्पादन श्रृंखला एक ही प्लेटफॉर्म पर पूरी हो सकेगी.

घरेलू जरूरतों के साथ निर्यात पर भी रहेगा फोकस

कंपनियों के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म भारतीय रेलवे और निजी ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करेगा. साथ ही, इसका लक्ष्य वैश्विक बाजारों में भी रेल उत्पादों का निर्यात बढ़ाना है, जिससे भारत अंतरराष्ट्रीय रेलवे सप्लाई चेन में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर सके.

इटली की कंपनी देगी तकनीकी सहयोग

Lucchini RS इस परियोजना के विकास और कमीशनिंग के दौरान अत्याधुनिक तकनीक, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और औद्योगिक सहयोग उपलब्ध कराएगी. इसके अलावा, सभी साझेदार मिलकर नए उत्पादों के विकास और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय रेलवे बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने पर भी काम करेंगे.

जुपिटर वैगन्स का कहना है कि उसके मौजूदा वैगन निर्माण कारोबार से व्हीलसेट की लगातार मांग बनी रहेगी, जिससे इस संयुक्त उद्यम की व्यावसायिक व्यवहार्यता मजबूत होगी. साथ ही, इससे तकनीक हस्तांतरण में तेजी आएगी और भारत की रेलवे विनिर्माण क्षमता को भी मजबूती मिलेगी.

इटली सरकार का भी मिला समर्थन

इस निवेश को इटली सरकार ने Sistema Italia फ्रेमवर्क के तहत समर्थन दिया है. SIMEST की इक्विटी भागीदारी के अलावा इटली की डेवलपमेंट फाइनेंस संस्था CDP, Lucchini RS को वित्तीय और सलाहकार सहयोग प्रदान करेगी. भारत में इटली के दूतावास ने भी इस पहल का समर्थन किया है.

क्या बोले कंपनी के अधिकारी?

जुपिटर वैगन्स के प्रबंध निदेशक विवेक लोहिया ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी की विनिर्माण क्षमता और Lucchini RS की तकनीक व इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को एक साथ लाएगी. इससे भारत में एकीकृत रेलव्हील मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म विकसित होगा, देश की आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और भारत वैश्विक रेलवे विनिर्माण हब बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा.

वहीं, Lucchini RS के चेयरमैन ग्यूसेप्पे लुकीनी ने कहा कि यह निवेश कंपनी की अंतरराष्ट्रीय विस्तार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इससे कंपनी को भारत जैसे बड़े बाजार में एक मजबूत स्थानीय साझेदार के साथ दीर्घकालिक अवसर मिलेंगे और भारतीय तथा वैश्विक रेलवे क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी.


L&T की विदेश में बड़ी जीत! UAE की राष्ट्रीय तेल कंपनी से मिला 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऑर्डर

इस प्रोजेक्ट के तहत इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन, इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग (EPCIC) के साथ मौजूदा ऑफशोर सुविधाओं के अपग्रेडेशन का काम भी किया जाएगा.

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Published - Wednesday, 05 August, 2026
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Wednesday, 05 August, 2026
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भारत की इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को पश्चिम एशिया से एक बड़ी कामयाबी मिली है. कंपनी को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राष्ट्रीय तेल कंपनी ADNOC Offshore से 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का अल्ट्रा-मेगा ऑफशोर कॉन्ट्रैक्ट मिला है. इस डील से L&T की अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर बुक और हाइड्रोकार्बन कारोबार को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.

L&T ने मंगलवार को बताया कि यह कॉन्ट्रैक्ट उसकी ऑफशोर हाइड्रोकार्बन इकाई L&T Energy Hydrocarbon Offshore (LTEH Offshore) को मिला है. कंपनी की आंतरिक ऑर्डर वर्गीकरण प्रणाली के अनुसार, 15,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाले प्रोजेक्ट्स को "अल्ट्रा-मेगा" श्रेणी में रखा जाता है.

क्या है प्रोजेक्ट का दायरा?

इस प्रोजेक्ट के तहत इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन, इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग (EPCIC) के साथ मौजूदा ऑफशोर सुविधाओं के अपग्रेडेशन का काम भी किया जाएगा. हालांकि, L&T ने कॉन्ट्रैक्ट की सटीक राशि और इसे पूरा करने की समयसीमा का खुलासा नहीं किया है.

यह परियोजना एक कंसोर्टियम के माध्यम से पूरी की जाएगी, जिसमें LTEH Offshore प्रमुख भागीदार होगा और अधिकांश कार्य की जिम्मेदारी संभालेगा. कंपनी लंबे समय से वैश्विक स्तर पर ऑफशोर हाइड्रोकार्बन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है और मध्य पूर्व के कई बड़े ऑयल एंड गैस प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रह चुकी है.

अंतरराष्ट्रीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

यह नया ऑर्डर L&T के हाइड्रोकार्बन पोर्टफोलियो में एक और बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट जोड़ता है. साथ ही, यह इस बात का भी संकेत है कि मध्य पूर्व की राष्ट्रीय तेल कंपनियां ऑफशोर ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार पर लगातार निवेश बढ़ा रही हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कॉन्ट्रैक्ट से L&T की अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर पाइपलाइन और मजबूत होगी, खासकर ऊर्जा कारोबार में कंपनी की वैश्विक मौजूदगी को और विस्तार मिलेगा. 15,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का यह ऑर्डर L&T के लिए आने वाले वर्षों में राजस्व और वैश्विक परियोजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.


विदेशी निवेशकों के लिए बड़ी राहत! टैक्स नियम होंगे आसान, लोकसभा में Tax Amendment Bill 2026 पेश

इस विधेयक के जरिए विदेशी निवेशकों, फंड मैनेजरों, क्लाउड कंपनियों और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों के लिए टैक्स नियमों को आसान बनाया जाएगा.

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Published - Wednesday, 05 August, 2026
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Wednesday, 05 August, 2026
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केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश आकर्षित करने और कारोबार सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (Tax Amendment Bill 2026) पेश किया. इस विधेयक के जरिए विदेशी निवेशकों, फंड मैनेजरों, क्लाउड कंपनियों और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों के लिए टैक्स नियमों को आसान बनाया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक पूंजी, विनिर्माण और व्यापार के लिए अधिक आकर्षक निवेश गंतव्य बनेगा.

आयकर संशोधन अध्यादेश की जगह लेगा नया विधेयक

यह विधेयक जून 2026 में लागू किए गए आयकर (संशोधन) अध्यादेश की जगह लेगा. वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के दौरान टैक्स नियमों की जटिलता और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है. नया कानून अधिक पारदर्शी और पूर्वानुमानित टैक्स व्यवस्था सुनिश्चित करेगा, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा.

विदेशी निवेश फंडों के लिए नियम हुए आसान

सरकार ने पात्र विदेशी निवेश फंडों के लिए लागू शर्तों की संख्या 13 से घटाकर सिर्फ 5 कर दी है. इसका उद्देश्य विदेशी फंड मैनेजरों को भारत में संचालन के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि उनके फंड को भारत में 'बिजनेस कनेक्शन' वाला न माना जाए. यह प्रावधान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) समेत पूरे देश में लागू होगा.

क्लाउड कंपनियों को भी मिली बड़ी राहत

भारतीय डेटा सेंटर का उपयोग करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भी नियम सरल किए गए हैं. अब विदेशी कंपनी और डेटा सेंटर के लिए अलग से सरकारी अधिसूचना की आवश्यकता नहीं होगी. साथ ही भारतीय कंपनियां डेटा सेंटर का संचालन स्वामित्व या लीज, दोनों मॉडल के तहत कर सकेंगी. सरकार का कहना है कि इससे कारोबार करना और आसान होगा.

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए विदेशी कंपनियों को दी जा रही टैक्स छूट को 10 साल और बढ़ाकर वित्त वर्ष 2040-41 तक कर दिया गया है. यह छूट उन विदेशी कंपनियों पर लागू होगी, जो भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को पूंजीगत सामान, उपकरण और कलपुर्जे उपलब्ध कराती हैं.

पहली बार तय हुई 'स्पेसिफाइड इलेक्ट्रॉनिक गुड्स' की परिभाषा

सरकार ने पहली बार 'स्पेसिफाइड इलेक्ट्रॉनिक गुड्स' को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है. इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, सब-असेंबली, हियरेबल, वियरेबल डिवाइस और उनसे जुड़े एक्सेसरीज को शामिल किया गया है.

इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट सप्लाई पर 15 साल की टैक्स छूट

भारत के कस्टम बॉन्डेड वेयरहाउस में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट स्टोर कर भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई करने वाली विदेशी कंपनियों को मार्च 2041 तक 15 वर्षों के लिए पूरी टैक्स छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है. इससे भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.

डायमंड ट्रेड को भी मिलेगा प्रोत्साहन

विधेयक में मुंबई और सूरत के अधिसूचित विशेष क्षेत्रों में कच्चे हीरों के कारोबार को बढ़ावा देने का भी प्रावधान किया गया है. इसके तहत विदेशी खनन कंपनियों, साइट-होल्डर्स, ब्रोकरों, एग्रीगेटर्स और नीलामी संस्थाओं को कच्चे हीरों की बिक्री से होने वाली आय पर 15 साल की टैक्स छूट मिलेगी. सरकार का लक्ष्य वैश्विक रफ डायमंड ट्रेड का बड़ा हिस्सा भारत की ओर आकर्षित करना है.
 


GetVantage ने जुटाए 63 करोड़ रुपये, छोटे कारोबारों के लिए AI आधारित कैपिटल गेटवे का करेगा विस्तार

कंपनी ने बताया कि आने वाले महीनों में वह कई प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ सेलर-फाइनेंसिंग साझेदारियों की घोषणा करेगी, जिससे MSME को और अधिक तेज, आसान और डिजिटल फाइनेंसिंग सुविधाएं मिल सकेंगी.

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Published - Wednesday, 05 August, 2026
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Wednesday, 05 August, 2026
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मुंबई की B2B फिनटेक कंपनी GetVantage ने अपने Series A1 फंडिंग राउंड में 63 करोड़ रुपये (इक्विटी और डेट) जुटाने का ऐलान किया है. इस नई पूंजी के साथ कंपनी की कुल कमिटेड फंडिंग क्षमता 700 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी. कंपनी इस राशि का इस्तेमाल अपने AI-आधारित कैपिटल गेटवे प्लेटफॉर्म का विस्तार करने और देशभर के MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) को आसान व तेज वित्तपोषण उपलब्ध कराने में करेगी.

कंपनी ने इस फंडिंग राउंड को "Scale Capital Round" नाम दिया है. यह निवेश GetVantage के रेवेन्यू-बेस्ड फाइनेंसिंग मॉडल से आगे बढ़कर एक व्यापक एम्बेडेड कैश-फ्लो फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म बनने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

700 करोड़ रुपये से अधिक होगी फंडिंग क्षमता

कंपनी का कहना है कि नई पूंजी से उसके वित्तीय संस्थान साझेदारों के माध्यम से परिचालन ऋण पूंजी (Operational Debt Capital) के रूप में सैकड़ों करोड़ रुपये की अतिरिक्त फंडिंग उपलब्ध होगी. इस पूंजी का उपयोग GetVantage के कैपिटल गेटवे को विस्तार देने में किया जाएगा. कैपिटल गेटवे एक प्लग-एंड-प्ले API इकोसिस्टम है, जिसकी मदद से B2B ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मार्केटप्लेस और लॉजिस्टिक्स कंपनियां अपने मर्चेंट नेटवर्क में सीधे फाइनेंसिंग विकल्प जोड़ सकती हैं. यह उसी तरह काम करता है, जैसे पेमेंट गेटवे किसी व्यवसाय को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा देता है.

इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व बैंकिंग क्षेत्र के 30 वर्षों के अनुभवी और RBL Bank के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव आहूजा ने किया. उनके साथ ऑपरेटर-नेतृत्व वाली निवेश कंपनी SanRaj Group ने भी निवेश किया. इसके अलावा Chiratae Ventures, Varanium Fintech Fund और VCMint जैसे मौजूदा संस्थागत निवेशकों ने भी कंपनी पर भरोसा बनाए रखा.

क्या बोले संस्थापक भाविक वासा

GetVantage के संस्थापक भाविक वासा ने कहा कि कंपनी ने भारत में कैश-फ्लो आधारित फाइनेंसिंग की शुरुआत की थी, लेकिन उसका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा था. उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य भारत का कैपिटल गेटवे बनना है. जिस तरह पेमेंट गेटवे छोटे कारोबारियों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने में मदद करता है, उसी तरह कैपिटल गेटवे उन्हें तुरंत और आसान तरीके से वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराता है. राजीव आहूजा, राजदीप गुप्ता और Chiratae Ventures जैसे अनुभवी निवेशकों का साथ हमारी इस यात्रा को गति देगा."

पारंपरिक बैंकिंग मॉडल से अलग

GetVantage का फाइनेंसिंग मॉडल पारंपरिक बैंकिंग से अलग है. जहां बैंक आमतौर पर संपार्श्विक (Collateral) और पुराने वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर लोन देते हैं, वहीं GetVantage वैकल्पिक डेटा (Alternate Data) और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का उपयोग कर कंपनियों की वास्तविक कैश-फ्लो क्षमता का आकलन करता है. इससे MSME और स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया आसान और तेज हो जाती है.

MSME के 30 लाख करोड़ रुपये के क्रेडिट गैप को भरने पर फोकस

कंपनी फिलहाल कैश-फ्लो आधारित फाइनेंसिंग, टर्म लोन, बिजनेस लोन और मर्चेंट कैश एडवांस जैसी कई सेवाएं उपलब्ध करा रही है. GetVantage का दावा है कि उसका डेटा-आधारित मॉडल भारत के लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के MSME क्रेडिट गैप को कम करने में मदद करेगा और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को गति देगा.

सरकारी नीति के अनुरूप रणनीति

कंपनी ने कहा कि उसका कैपिटल गेटवे हाल के सरकारी प्रयासों और वित्त मंत्री द्वारा दिए गए उस संदेश के अनुरूप है, जिसमें कहा गया था कि "एक जैसे वित्तीय उत्पाद अलग-अलग तरह के व्यवसायों की जरूरतें पूरी नहीं कर सकते." सरकार कैश-फ्लो आधारित अंडरराइटिंग, को-लेंडिंग और डिजिटल फाइनेंसिंग को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में GetVantage का प्लेटफॉर्म संस्थागत पूंजी को MSME तक पहुंचाने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएगा.

आगे क्या है योजना

SanRaj Group के राजदीप गुप्ता ने कहा कि छोटे कारोबारों के लिए लचीली पूंजी तक पहुंच आज भी बड़ी चुनौती है और GetVantage का API-आधारित कैपिटल गेटवे इस समस्या का समाधान करने की क्षमता रखता है. कंपनी ने बताया कि आने वाले महीनों में वह कई प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ सेलर-फाइनेंसिंग साझेदारियों की घोषणा करेगी, जिससे MSME को और अधिक तेज, आसान और डिजिटल फाइनेंसिंग सुविधाएं मिल सकेंगी.
 


RBI की MPC बैठक से पहले बाजार अलर्ट, आज इन बड़े ट्रिगर्स पर रहेगा फोकस

मंगलवार को सेंसेक्स 210.08 अंक यानी 0.27 फीसदी की गिरावट के साथ 78,428.95 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 इंडेक्स 159.40 अंक यानी 0.64 फीसदी गिरकर 24,614.90 पर बंद हुआ.

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Published - Wednesday, 05 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2026
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घरेलू शेयर बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों की तेजी मंगलवार को थम गई और सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए. RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली. अब आज के कारोबार में LIC के OFS, Paytm और Meesho में हिस्सेदारी बिक्री, HFCL के निवेश, Vedanta की जांच और DLF समेत कई बड़े कॉर्पोरेट अपडेट्स के चलते चुनिंदा शेयरों में अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है.

कल क्या था बाजार का हाल

घरेलू शेयर बाजार में चार कारोबारी सत्रों से जारी तेजी मंगलवार को थम गई. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 210.08 अंक यानी 0.27 फीसदी की गिरावट के साथ 78,428.95 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह 78,211.87 तक फिसल गया था. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 इंडेक्स 159.40 अंक यानी 0.64 फीसदी गिरकर 24,614.90 पर बंद हुआ. दूसरी ओर, डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग स्थिर रहा और 95.3775 के स्तर पर बंद हुआ.

इन दिग्गज शेयरों में रही बिकवाली

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 14 गिरावट के साथ बंद हुए. सबसे अधिक दबाव हिंदुस्तान यूनिलीवर पर रहा, जिसका शेयर करीब 1.7 फीसदी टूटा. इसके अलावा एनटीपीसी, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडिगो, टेक महिंद्रा, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक और इंफोसिस के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई.

इन शेयरों में दिखी मजबूती

कमजोर बाजार के बावजूद ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), टाटा स्टील, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, टाइटन और सन फार्मा के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी बनी रही.

ब्रॉडर मार्केट का मिला-जुला रुख

ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.29 फीसदी गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.23 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ. सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी रियल्टी 2 फीसदी से अधिक टूटा. इसके अलावा एफएमसीजी, प्राइवेट बैंक और बैंकिंग इंडेक्स में भी कमजोरी देखने को मिली.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़े अहम घटनाक्रमों के चलते उनके शेयर फोकस में रहेंगे. सरकार ने LIC के OFS का आकार बढ़ाकर 4 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी बिक्री का फैसला किया है. वहीं, Meesho में Elevation Capital और Peak XV Partners ने करीब 1,949 करोड़ रुपये की 2.27 फीसदी हिस्सेदारी बेची है, जबकि Paytm की पैरेंट कंपनी One97 Communications में Elevation Capital और SAIF से जुड़ी संस्थाओं ने लगभग 2,038 करोड़ रुपये के शेयर ऑफलोड किए हैं. Apollo Pipes के प्रमोटर ने ओपन मार्केट से 23.5 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं. Vedanta की झारसुगुड़ा यूनिट में कथित अवैध भूजल दोहन की जांच के आदेश दिए गए हैं. HFCL ने ऑप्टिकल फाइबर और केबल निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए 400 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है. DLF ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 20,000 करोड़ रुपये के प्री-सेल्स लक्ष्य पर भरोसा जताया है, जबकि Aditya Birla Health Insurance ने युवाओं के लिए नया हेल्थ इंश्योरेंस प्लान 'Activ Yuva' लॉन्च किया है. इन सभी अपडेट्स के चलते आज इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)