कहते हैं, पैसे और पावर के साथ घमंड भी आता, लेकिन डीमार्ट (DMart) के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर नोरोन्हा अपवाद हैं. वह दिखावट में यकीन नहीं रखते.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
पिछले साल इग्नाटियस नविल नोरोन्हा (Ignatius Navil Noronha) का नाम एक प्रॉपर्टी डील को लेकर सुर्खियों में रहा था. उन्होंने मुंबई में 70 करोड़ रुपए का आलिशान घर खरीदा था. नोरोन्हा रिटेल स्टोर चलाने वाली कंपनी डीमार्ट (DMart) के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर हैं. उनकी गिनती भले ही भारत के सबसे अधिक सैलरी पाने वाले CEOs में न हो, लेकिन वह देश के सबसे अमीर प्रोफेशनल मैनेजर्स में जरूर शामिल हैं.
माने जाते हैं हंबल सीईओ
कहते हैं, पैसे और पावर के साथ घमंड भी आता, लेकिन नोरोन्हा अपवाद हैं. वह दिखावट में यकीन नहीं रखते. इतनी बड़ी पोजीशन पर होने के बावजूद उसके कैबिन का साइज ज्यादा नहीं है. लो-प्रोफाइल रहने वाले नोरोन्हा को इंडस्ट्री में एक हंबल सीईओ के रूप में जाना जाता हैं. वह अक्टूबर 2021 में अरबपति CEOs के क्लब में शामिल हुए थे. डीमार्ट चलाने वाली एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड (Avenue Supermarts Ltd) के मालिक राधाकिशन दमानी को नोरोन्हा पर काफी विश्वास है, इसलिए उन्हें कंपनी में सीईओ की जिम्मेदारी सौंपी हुई है.
कंपनी लगातार प्रॉफिट में
इग्नाटियस नविल नोरोन्हा अब तक दमानी के भरोसे पर खरे उतरते आए हैं. सीईओ के रूप में उन्होंने एवेन्यू सुपरमार्ट्स को पिछले 5 सालों से प्रॉफिटेबल बनाया हुआ है और इसी वजह से कंपनी प्रतिस्पर्धियों का मजबूती से मुकाबला करने की स्थिति में है. दमानी ने DMart के विस्तार का प्लान तैयार किया है, जिसमें नोरोन्हा अहम भूमिका निभा रहे हैं. दमानी अपने स्टोर्स की संख्या बढ़ाकर 1500 करना चाहते हैं. इस हिसाब से कंपनी की योजना अगले कुछ समय में 1216 नए स्टोर्स खोलने की है. मार्च 2024 तक कंपनी 135 स्टोर्स खोल सकती है.
2 फीसदी की है हिस्सेदारी
डीमार्ट से जुड़ने से पहले नोरोन्हा हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) में अपने कौशल का प्रदर्शन कर रहे थे. उनकी एवेन्यू सुपरमार्केट्स में करीब 2 फीसदी हिस्सेदारी है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नोरोन्हा ने वित्त वर्ष 2021-22 में 4.5 करोड़ रुपए से ज्यादा की सैलरी हासिल की. उन्हें 2004 में डीमार्ट का सीईओ नियुक्त किया गया था. नोरोन्हा ने पिछले साल मुंबई में 70 करोड़ का घर खरीदा था. 9,552 वर्ग फुट वाली इस प्रॉपर्टी को नोरोन्हा और उनकी पत्नी काजल नोरोन्हा ने संयुक्त रूप से खरीदा था. इग्नाटियस नविल नोरोन्हा काम से छुट्टी लेने में विश्वास नहीं रखते. DMart के आईपीओ लॉन्च के बाद से उन्होंने केवल अपनी बेटी के जन्मदिन के लिए एक दिन की छुट्टी ली थी.
दमानी ने बनाया बड़ा प्लान
अब जब DMart की बात निकली है, तो राधाकिशन दमानी के बिजनेस प्लान्स बारे में भी जान लेते हैं. दमानी ने नवी मुंबई में सस्ती जमीन खरीदकर साल 2002 में पहला डीमार्ट स्टोर खोला था. DMart आज कई शहरों में है और इसके देशभर में 284 स्टोर्स हैं. डीमार्ट स्टोर्स को एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड ऑपरेट करती है. दमानी DMart से मुकेश अंबानी की रिलायंस की मुश्किलों में इजाफा करने की योजना पर काम कर रहे हैं. वह अपने स्टोर्स की संख्या बढ़ाकर 1500 करना चाहते हैं. डीमार्ट की इस योजना का सीधा असर रिलायंस के बिजनेस पर पड़ना तय है. मौजूदा वक्त में रिलायंस रिटेल के 12,711 स्टोर्स हैं. इसमें कोई दोराय नहीं है कि जिस तरह से अंबानी ने विस्तार किया है, आने वाले समय में रिलायंस रिटेल के स्टोर्स में भी बढ़ोत्तरी होगी, लेकिन DMart के उसके नजदीक पहुंच जाने से कंपनी के कारोबार पर असर पड़ना लाजमीहै. DMart लोगों की पसंद इसलिए बना हुआ है, क्योंकि यहां ग्रॉसरी का सामान सस्ते दामों में मिलता है.
कंपनी की लेनदार समिति ने प्रस्तावित समझौते को मंजूरी दे दी है. अब इस मामले पर 18 अगस्त को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की बेंगलुरु पीठ में सुनवाई होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
संकटग्रस्त एडटेक कंपनी BYJU'S की पैरेंट कंपनी थिंक एंड लर्न (Think & Learn Pvt Ltd) को आकाश एजुकेशनल सर्विसेज (Aakash Educational Services) की शेयरहोल्डिंग से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में बड़ी राहत मिली है. कंपनी की लेनदार समिति ने प्रस्तावित समझौते को मंजूरी दे दी है. अब इस मामले पर 18 अगस्त को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की बेंगलुरु पीठ में सुनवाई होगी.
CoC की मंजूरी से विवाद सुलझने की उम्मीद
NCLT की बेंगलुरु पीठ में सुनवाई के दौरान थिंक एंड लर्न की ओर से पेश वकील ने बताया कि कंपनी की लेनदार समिति ने प्रस्तावित समझौते को मंजूरी दे दी है. इसके बाद ट्रिब्यूनल ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त के लिए तय कर दी है. इस दौरान दोनों पक्ष अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेंगे, जिसके आधार पर न्यायाधिकरण फैसला ले सकता है.
Aakash की शेयरहोल्डिंग को लेकर चल रहा है विवाद
प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य आकाश एजुकेशनल सर्विसेज की शेयरहोल्डिंग पर चल रहे दावों और विवादों का समाधान करना है. Aakash, BYJU'S के सबसे महत्वपूर्ण और मूल्यवान एसेट्स में से एक है. यदि NCLT इस समझौते को मंजूरी दे देता है, तो कंपनी की स्वामित्व संरचना को लेकर बनी अनिश्चितता दूर हो सकती है और इस प्रमुख परिसंपत्ति से बेहतर मूल्य प्राप्त करने का रास्ता साफ हो जाएगा.
NCLT की मंजूरी के बाद ही लागू होगा समझौता
हालांकि लेनदारों की मंजूरी को इस मामले में अहम उपलब्धि माना जा रहा है, लेकिन प्रस्तावित समझौता तभी प्रभावी होगा जब उसे NCLT की अंतिम मंजूरी मिल जाएगी. फिलहाल सभी की नजर 18 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां ट्रिब्यूनल इस मामले में आगे का फैसला करेगा.
क्यूब हाईवे ट्रस्ट का यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा. यानी इसमें कोई नई यूनिट जारी नहीं की जाएगी, बल्कि मौजूदा यूनिटधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) क्यूब हाईवे ट्रस्ट (Cube Highways Trust) ने अपने ₹5,000 करोड़ के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए प्रति यूनिट ₹151-152 का प्राइस बैंड तय कर दिया है. यह इश्यू 22 जुलाई को खुलेगा और 24 जुलाई को बंद होगा. इस आईपीओ के जरिए कंपनी पहली बार शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्ट) होगी.
पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा IPO
क्यूब हाईवे ट्रस्ट का यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा. यानी इसमें कोई नई यूनिट जारी नहीं की जाएगी, बल्कि मौजूदा यूनिटधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. सार्वजनिक निर्गम 22 जुलाई को खुलेगा और 24 जुलाई को बंद होगा.
एंकर निवेशकों से पहले ही जुटाए ₹1,250 करोड़
आईपीओ से पहले Cube Highways Trust ने पांच रणनीतिक निवेशकों से ₹1,250 करोड़ जुटा लिए हैं. इससे इस इश्यू में संस्थागत निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी का संकेत मिला है. इन निवेशकों में Prazim Trading and Investment Company Pvt. Ltd., HDFC Life Insurance Company, HDFC Pension Fund Management, Axis Max Life Insurance Company और WhiteOak Capital REIT & InvIT Alternatives Fund-I शामिल हैं.
इस आईपीओ का प्रबंधन कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, एचडीएफसी बैंक, एचएसबीसी सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (India) Pvt. Ltd. और जेएम फाइनेंशियल कर रहे हैं.
क्यों लाई जा रही है पब्लिक लिस्टिंग?
इन्वेस्टमेंट मैनेजर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विनय सी. सेकर ने कहा कि पब्लिक लिस्टिंग का उद्देश्य निवेशकों का दायरा बढ़ाना और भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना है. उनके मुताबिक, घरेलू निवेशक ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो स्थिर नकदी प्रवाह के साथ लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना भी दें. लिस्टिंग से यूनिट्स में लिक्विडिटी बढ़ेगी, बेहतर प्राइस डिस्कवरी होगी और ज्यादा निवेशकों को उच्च गुणवत्ता वाली हाईवे परिसंपत्तियों में निवेश का मौका मिलेगा.
उन्होंने बताया कि मार्च 2026 के अंत तक ट्रस्ट का नेट डेट-टू-एंटरप्राइज वैल्यू अनुपात 46.8 फीसदी था, जो नियामकीय सीमा 70 फीसदी से काफी कम है. साथ ही ट्रस्ट की AAA क्रेडिट रेटिंग भविष्य में नई परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए वित्तीय लचीलापन प्रदान करती है.
रिटेल निवेशकों के लिए बड़ा मौका
ग्रुप मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) पंकज वासनी ने कहा कि यह पब्लिक लिस्टिंग रिटेल निवेशकों को इंफ्रास्ट्रक्चर परिसंपत्तियों में निवेश का अवसर देगी. अब तक इस तरह की उच्च गुणवत्ता वाली परिचालन हाईवे परिसंपत्तियों में निवेश का अवसर मुख्य रूप से संस्थागत और निजी निवेशकों तक ही सीमित था.
उन्होंने कहा कि भारत का सड़क क्षेत्र जीडीपी आधारित विकास, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से जुड़ी टोल दरों में संशोधन, बढ़ते ट्रैफिक और सरकार के लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के कारण लंबी अवधि के लिए आकर्षक निवेश अवसर बना हुआ है.
27 हाईवे परियोजनियों का बड़ा पोर्टफोलियो
क्यूब हाईवे ट्रस्ट के पास भारत के सबसे बड़े विविधीकृत सड़क पोर्टफोलियो में से एक है. ट्रस्ट के पास 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में फैली 27 हाईवे परियोजनाएं हैं. इनमें 18 टोल रोड और 9 एन्युटी आधारित परियोजनाएं शामिल हैं, जिससे ट्रैफिक आधारित आय और स्थिर नकदी प्रवाह का संतुलित मिश्रण मिलता है.
ट्रस्ट का पोर्टफोलियो करीब 8,800 लेन किलोमीटर में फैला है और इसके प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों का मूल्य लगभग ₹36,800 करोड़ है. इन परिसंपत्तियों का औसत परिचालन इतिहास नौ वर्ष से अधिक है, जबकि औसत शेष रियायत अवधि 18 वर्ष से ज्यादा है, जिससे लंबी अवधि तक नियमित नकदी प्रवाह की संभावना बनी रहती है.
InvIT में बढ़ रही निवेशकों की दिलचस्पी
क्यूब हाईवे ट्रस्ट का पब्लिक इश्यू ऐसे समय आ रहा है, जब भारत में सड़क और परिवहन अवसंरचना पर लगातार निवेश बढ़ रहा है और InvIT जैसे निवेश माध्यम नियमित नकद वितरण के कारण निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.
गुरुवार को BSE सेंसेक्स 1.44 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,186.87 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 5.75 अंक फिसलकर 24,072.75 के स्तर पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार गुरुवार को शुरुआती बढ़त बरकरार नहीं रख सका और कारोबार के अंत में लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ. सेंसेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी हल्की गिरावट में रहा. बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में बिकवाली के दबाव के बीच आईटी, ऑटो और चुनिंदा ब्लूचिप शेयरों ने बाजार को सहारा दिया. अब शुक्रवार को निवेशकों की नजर जून तिमाही के नतीजों और कई बड़े कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहेगी, जिनके चलते चुनिंदा शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है.
शुरुआती तेजी के बाद फीकी पड़ी बाजार की रफ्तार
एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बढ़त कायम नहीं रख सका. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 1.44 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,186.87 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 5.75 अंक फिसलकर 24,072.75 के स्तर पर बंद हुआ. इस दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 0.1 फीसदी कमजोर होकर 96.3450 पर बंद हुआ.
बैंकिंग शेयरों में बिकवाली, आईटी और ऑटो ने दिया सहारा
सेंसेक्स की 30 में से 15 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. Eternal में सबसे ज्यादा 2.82 फीसदी की गिरावट रही. इसके अलावा BEL, Bajaj Finserv, HDFC Bank, Trent, UltraTech Cement, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank के शेयर भी दबाव में रहे. वहीं InterGlobe Aviation (IndiGo), HCL Tech, Bajaj Finance, Maruti Suzuki, Mahindra & Mahindra, Tech Mahindra, ITC, Titan और TCS के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को सहारा मिला.
सेक्टोरल इंडेक्स में मिला-जुला रुख
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी रियल्टी, बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में सबसे ज्यादा कमजोरी रही. वहीं निफ्टी केमिकल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए. कमोडिटी बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.29 फीसदी की गिरावट के साथ 84.74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा.
आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर
शुक्रवार के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़े बड़े अपडेट निवेशकों के फोकस में रहेंगे. Jio Financial Services ने जून तिमाही में 156 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 830 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है. HCL Tech ने अमेरिका की Guardian Life Insurance Company के साथ सात साल की बड़ी डील की है, जिसके तहत वह Guardian India ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का अधिग्रहण करेगी. इसके अलावा Reliance Industries, JSW Steel, Federal Bank, Central Bank of India, Tata Technologies, Havells India, RBL Bank, Poonawalla Fincorp और Oberoi Realty समेत कई कंपनियां आज अपने अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी.
इन कंपनियों से जुड़े अपडेट भी रहेंगे अहम
PC Jeweller ने QIP के जरिए 1,000 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दी है. Maruti Suzuki ने रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है. Coal India को गुजरात के खावड़ा सोलर प्रोजेक्ट के 200 मेगावाट हिस्से के लिए कमीशनिंग सर्टिफिकेट मिला है. Laser Power and Infra में कई बड़े संस्थागत निवेशकों ने हिस्सेदारी बढ़ाई है. वहीं Wipro के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजों के कारण उसके शेयर दबाव में रह सकते हैं. Piramal Finance का शुद्ध मुनाफा भी सालाना आधार पर 67 फीसदी बढ़कर 461 करोड़ रुपये पहुंचा है.
बाजार की दिशा पर रहेगी नतीजों और वैश्विक संकेतों की नजर
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये की चाल और जून तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे शुक्रवार के कारोबार में बाजार की दिशा तय करेंगे. ऐसे में रिलायंस इंडस्ट्रीज, Jio Financial, HCL Tech, Wipro, Maruti Suzuki और PC Jeweller समेत कई शेयरों में अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजीज वर्किंग ग्रुप के तहत भारत और EU संयुक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रोडमैप तैयार करेंगे. दोनों पक्ष जिम्मेदार AI के विकास और नियमन पर मिलकर काम करेंगे, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और मजबूत सप्लाई चेन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने का फैसला किया है. दोनों पक्षों ने ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) को अधिक परिणाम-केंद्रित मंच बनाने और 2030 तक व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई.
ब्रुसेल्स में हुई तीसरी TTC मंत्रीस्तरीय बैठक
भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की तीसरी मंत्रीस्तरीय बैठक 15 जुलाई को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आयोजित हुई. बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और यूरोपीय आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने की.
ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की स्थापना अप्रैल 2022 में भारत और EU के बीच व्यापार, भरोसेमंद तकनीक और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए की गई थी. दोनों पक्षों ने जनवरी 2026 में हुए 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में अपनाए गए 'Towards 2030: A Joint India-European Union Comprehensive Strategic Agenda' के अनुरूप इस मंच को और मजबूत करने पर सहमति जताई.
AI और सेमीकंडक्टर पर बढ़ेगा सहयोग
स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजीज वर्किंग ग्रुप के तहत भारत और EU संयुक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रोडमैप तैयार करेंगे. दोनों पक्ष जिम्मेदार AI के विकास और नियमन पर मिलकर काम करेंगे, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी.
इसके अलावा, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), एडवांस्ड मैटेरियल्स और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा. इसके लिए Semicon India 2026 के दौरान संयुक्त राउंडटेबल आयोजित करने पर भी सहमति बनी है. साथ ही भारत के सेमीकंडक्टर मिशन और EU Chips Act के तहत चल रही परियोजनाओं के बीच सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी.
DigiLocker और EU Digital Identity Wallet को जोड़ने पर चर्चा
डिजिटल सहयोग के तहत दोनों पक्ष डिजिटल पहचान प्रणाली की इंटरऑपरेबिलिटी पर चर्चा जारी रखेंगे. इसके तहत भारत के DigiLocker और EU Digital Identity Wallet को जोड़ने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की संभावना पर भी विचार किया जाएगा. इसके अलावा क्वांटम टेक्नोलॉजी, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC), 6G मानकों और डिजिटल स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा.
Horizon Europe कार्यक्रम में शामिल हो सकता है भारत
संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत को यूरोपीय संघ के 93.5 अरब यूरो के प्रमुख रिसर्च एवं इनोवेशन प्रोग्राम Horizon Europe से जोड़ने के लिए औपचारिक बातचीत शुरू होगी. दोनों पक्ष 2026 के अंत तक इस प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, ताकि 2027 से भारतीय शोधकर्ता इस कार्यक्रम में पूर्ण रूप से भाग ले सकें.
EV चार्जिंग और क्लीन टेक्नोलॉजी पर बनेगा इनोवेशन हब
भारत और EU इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग तकनीक और टेस्टिंग पर केंद्रित अपना पहला संयुक्त इनोवेशन हब भी स्थापित करेंगे. इस पहल का नेतृत्व यूरोपीय आयोग के ज्वाइंट रिसर्च सेंटर और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) करेंगे.
दोनों पक्षों ने नवीकरणीय हाइड्रोजन, समुद्री प्रदूषण और इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी रीसाइक्लिंग से जुड़े संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की. इन परियोजनाओं में अगले चार वर्षों में संयुक्त रूप से 6 करोड़ यूरो का निवेश किया जाएगा.
सप्लाई चेन और व्यापार सहयोग होगा मजबूत
भारत और EU ने कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और क्लीन टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में मजबूत और लचीली सप्लाई चेन विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई. दोनों पक्ष एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API), खाद्य सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों और हाइड्रोजन क्षेत्र में सहयोग जारी रखेंगे.
इसके अलावा, बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) सहयोग को बढ़ावा देने, बाजार पहुंच से जुड़ी बाधाओं को दूर करने, सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी मानकों, तकनीकी नियमों तथा ऑर्गेनिक उत्पादों की पारस्परिक मान्यता पर भी बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी.
WTO सुधार और कार्बन टैक्स पर भी चर्चा
बैठक में दोनों पक्षों ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार की आवश्यकता पर समर्थन दोहराया. साथ ही यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा जारी रखने का फैसला किया, ताकि भारतीय कंपनियों को मान्यता प्राप्त सत्यापन एजेंसियों तक समय पर पहुंच मिल सके.
Deep-Tech स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा
भारत और EU ने डीप-टेक स्टार्टप पार्टनरशिप शुरू करने पर भी सहमति जताई. इस पहल में यूरोपियन इनोवेशन काउंसिल और स्टार्टप इंडिया मिलकर स्टार्टअप्स को निवेश, बाजार तक पहुंच और व्यावसायीकरण के अवसर उपलब्ध कराएंगे.
इसके अलावा 'Blue Valleys' पहल के तहत रणनीतिक क्षेत्रों में औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने के लिए सरकारों, उद्योगों, स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों को जोड़ने वाले एक विशेष प्लेटफॉर्म की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी.
2027 में नई दिल्ली में होगी अगली बैठक
दोनों पक्षों ने भारत-EU बिजनेस फोरम का हर साल आयोजन करने और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में उद्योग जगत के साथ नियमित संवाद जारी रखने पर सहमति जताई. भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की अगली मंत्रीस्तरीय बैठक 2027 में नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी.
कंपनी का कहना है कि इन पहलों का मकसद ग्राहकों को बेहतर रिवॉर्ड्स, प्रीमियम कॉफी एक्सपीरियंस और पर्सनलाइज्ड सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा स्टारबक्स ने भारत में अपने प्रीमियम कॉफी कारोबार को नई रफ्तार देने के लिए दो बड़े ऐलान किए हैं. कंपनी ने एक ओर स्टारबक्स रिजर्व (Starbucks Reserve) लॉयल्टी प्रोग्राम को पूरी तरह नया रूप देते हुए ग्रीन, गोल्ड और नया रिजर्व टियर लॉन्च किया है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली एयरोसिटी में अपना नया Starbucks Reserve™ स्टोर शुरू किया है. कंपनी का कहना है कि इन दोनों पहलों का उद्देश्य ग्राहकों को बेहतर रिवॉर्ड्स, पर्सनलाइज्ड अनुभव और विश्वस्तरीय कॉफी संस्कृति से जोड़ना है.
एनसीआर में खुला तीसरा Starbucks Reserve
टाटा स्टारबक्स ने दिल्ली एयरोसिटी के वर्ल्डमार्क-5 स्थित वर्ल्ड स्ट्रीट में नया स्टारबक्स रिजर्व स्टोर शुरू किया है. यह एनसीआर का तीसरा स्टारबक्स रिजर्व स्टोर है. कंपनी के मुताबिक, एयरोसिटी तेजी से उभरता हुआ ऐसा केंद्र है, जहां वैश्विक यात्रियों, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स और कॉफी प्रेमियों का बड़ा वर्ग मौजूद है. ऐसे में यहां प्रीमियम कॉफी अनुभव उपलब्ध कराने की बड़ी संभावना है.
स्टोर को स्टारबक्स की 'थर्ड प्लेस' अवधारणा के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि लोग घर और ऑफिस के अलावा यहां आराम से समय बिता सकें, बातचीत कर सकें और कॉफी संस्कृति का आनंद ले सकें. यहां दुर्लभ और प्रीमियम कॉफी वैरायटी, सिग्नेचर एस्प्रेसो बेवरेज, हैंडक्राफ्टेड ड्रिंक्स, चुनिंदा फूड आइटम और नया Bake-In मेन्यू उपलब्ध कराया गया है.
स्टोर में अत्याधुनिक Black Eagle Espresso Machine लगाई गई है, जिससे कॉफी मास्टर्स ब्रूइंग और एक्सट्रैक्शन पर अधिक सटीक नियंत्रण रख सकेंगे. मेन्यू में Ube Coconut Martini, Ube Coconut Cold Brew, Jamaican Rum Stardust, Gin Cocobotanica और Espresso Martini जैसे प्रीमियम सिग्नेचर ड्रिंक्स भी शामिल हैं. इसके अलावा ग्राहकों के लिए Zero-Proof Cocktails, Protein Coffee, कम कैफीन वाले पेय और पसंद के अनुसार पूरी तरह कस्टमाइज्ड ड्रिंक्स भी उपलब्ध होंगे.
Starbucks Rewards प्रोग्राम को मिला नया स्वरूप
टाटा स्टारबक्स की हेड ऑफ प्रोडक्ट एंड मार्केटिंग मिताली माहेश्वरी ने बताया कि कंपनी ने अपने स्टारबक्स रिवॉर्ड्स प्रोग्राम को भी पूरी तरह री-डिजाइन किया है. इसमें ग्रीन और गोल्ड के साथ पहली बार रिजर्व टियर को शामिल किया गया है. नया प्रोग्राम ग्राहकों को पहले की तुलना में तेजी से स्टार्स अर्जित करने, उन्हें आसानी से रिडीम करने और अधिक पर्सनलाइज्ड बेनिफिट्स देने पर केंद्रित है.
ग्रीन एंट्री-लेवल टियर होगा, जबकि एक साल में 1,000 स्टार्स अर्जित करने वाले ग्राहक गोल्ड टियर में पहुंच जाएंगे. वहीं, एक वर्ष में 5,000 या उससे अधिक स्टार्स अर्जित करने वाले ग्राहकों को नए Reserve टियर में अपग्रेड किया जाएगा.
रिजर्व सदस्यों को उनके नाम और सदस्य बनने के वर्ष के साथ एक पर्सनलाइज्ड ब्लैक कार्ड मिलेगा. मिताली ने बताया यह टियर कंपनी के सबसे सक्रिय और वफादार ग्राहकों के लिए तैयार किया गया है, ताकि उन्हें विशेष पहचान और प्रीमियम अनुभव मिल सके.
अब हर 10 रुपये पर मिलेगा एक स्टार
मिताली ने बताया नए रिवॉर्ड्स प्रोग्राम के तहत ग्राहक हर 10 रुपये खर्च करने पर एक स्टार अर्जित करेंगे, यानी पहले की तुलना में कहीं तेजी से स्टार्स जमा होंगे. गोल्ड सदस्य हर 10 रुपये पर 1.2 गुना और रिजर्व सदस्य 1.3 गुना स्टार्स प्राप्त करेंगे. कंपनी ने रिवॉर्ड्स रिडीम करने की न्यूनतम सीमा भी कम कर दी है, जिससे ग्राहक कम स्टार्स में भी अपने पसंदीदा लाभ हासिल कर सकेंगे.
अब ग्राहक अपने स्टार्स का इस्तेमाल केवल फ्री बेवरेज तक सीमित नहीं रखेंगे. वे फूड आइटम, मर्चेंडाइज, बिल पर डिस्काउंट और अन्य ऑफर्स के लिए भी इन्हें रिडीम कर सकेंगे. इसके अलावा बर्थडे रिवॉर्ड्स, माइलस्टोन सेलिब्रेशन, Double Stars Days और एक्सक्लूसिव मेंबर ऑफर्स भी मिलेंगे.
Reserve सदस्यों के लिए होंगे एक्सक्लूसिव अनुभव
रिजर्व टियर के सदस्यों को सिर्फ अतिरिक्त स्टॉर्स ही नहीं, बल्कि कई विशेष अनुभव भी मिलेंगे. इनमें Free Customized Mondays, एक्सक्लूसिव मर्चेंडाइज, क्यूरेटेड कॉफी सेशन, विशेष आयोजनों में भाग लेने का अवसर और सदस्य-विशेष सुविधाएं शामिल हैं.
मिताली ने बताया कि कंपनी चुनिंदा रिजर्व सदस्यों को उन देशों की ऑल-एक्सपेंस पेड यात्रा भी कराती है, जहां Single Origin Coffee उगाई जाती है. इससे ग्राहक कॉफी की खेती से लेकर कप तक की पूरी यात्रा को करीब से समझ पाते हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी ऐसा इकोसिस्टम बनाना चाहती है, जिसमें हर स्तर के ग्राहक को उसकी वफादारी के अनुरूप बेहतर अनुभव और अधिक मूल्य मिले.
RBI का मानना है कि इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बैंकों और NBFC को अपने डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा मैनेजमेंट सिस्टम को पहले से मजबूत करना होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और अन्य विनियमित संस्थाओं के लिए डेटा जोखिम प्रबंधन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से नए मानकों का मसौदा जारी किया है. प्रस्तावित नियमों के तहत संस्थानों को डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क मजबूत करना होगा, डेटा गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी और इसके लिए कार्यकारी स्तर पर निगरानी व्यवस्था भी बनानी होगी. यह कदम 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले एक्सपेक्टिड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क से पहले उठाया गया है.
RBI ने क्यों जारी किया नया मसौदा?
RBI ने कहा कि डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा की मात्रा, विविधता और उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी सिस्टम में डेटा सटीक, सुरक्षित, एक समान और उपयोग योग्य रहे. इसी उद्देश्य से केंद्रीय बैंक ने डेटा गवर्नेंस और डेटा जोखिम प्रबंधन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया है.
ECL फ्रेमवर्क से पहले होगी तैयारी
प्रस्तावित नियम ऐसे समय आए हैं, जब 1 अप्रैल 2027 से एक्सपेक्टिड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क लागू होना है. RBI का मानना है कि इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बैंकों और NBFC को अपने डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा मैनेजमेंट सिस्टम को पहले से मजबूत करना होगा.
डेटा गवर्नेंस पर रहेगा बोर्ड का फोकस
मसौदे के अनुसार, सभी बैंकों और NBFC को कार्यकारी स्तर पर डेटा गवर्नेंस कमेटी गठित करनी होगी या यह जिम्मेदारी किसी मौजूदा कार्यकारी समिति को सौंपी जा सकती है. वहीं, निदेशक मंडल (Board) को डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क की निगरानी करनी होगी और समय-समय पर इसकी समीक्षा करनी होगी. RBI ने सुझाव दिया है कि इस फ्रेमवर्क की समीक्षा कम से कम साल में एक बार या जरूरत पड़ने पर उससे अधिक बार की जाए.
डेटा जोखिम प्रबंधन के लिए क्या होंगे मानक?
RBI के मसौदे के मुताबिक, बैंकों और NBFC को अपनी समग्र जोखिम प्रबंधन प्रणाली में डेटा जोखिम को भी शामिल करना होगा. इसके तहत डेटा से जुड़े जोखिमों की पहचान, आकलन, निगरानी और प्रबंधन की स्पष्ट व्यवस्था बनानी होगी. साथ ही डेटा स्रोत (आंतरिक और बाहरी), डेटा गुणवत्ता, डेटा वर्गीकरण और बिग डेटा के उपयोग से जुड़े जोखिमों पर भी विशेष ध्यान देना होगा.
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, कई मंत्री, उद्योगपति, संत और हजारों लोगों ने नंद किशोर गोयनका को श्रद्धांजलि अर्पित की.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गो-सेवा, समाजसेवा और राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रखर समर्थक एवं वरिष्ठ उद्योगपति नंद किशोर गोयनका बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए. उनकी अंतिम यात्रा हिसार की श्री वैष्णव गौशाला से अग्रोहा धाम स्थित गोयनका उद्यान तक पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ निकाली गई. अंतिम यात्रा में उमड़े हजारों लोगों के जनसैलाब ने उनके प्रति समाज की गहरी आस्था और सम्मान को दर्शाया. हिसार से अग्रोहा तक विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.
परिवार की ओर से एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा, जवाहर गोयनका, लक्ष्मी नारायण गोयनका, अशोक गोयनका और परिवार के अन्य सदस्य पूरी यात्रा के दौरान मौजूद रहे. देशभर से पहुंचे शुभचिंतक भी इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहे.
वैदिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ अंतिम संस्कार
अग्रोहा धाम स्थित गोयनका उद्यान में वैदिक परंपरा के अनुसार नंद किशोर गोयनका का अंतिम संस्कार किया गया. इसी स्थान पर उनकी धर्मपत्नी का भी अंतिम संस्कार हुआ था. अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा और उपस्थित लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी.
बड़ी संख्या में पहुंचे मंत्री, उद्योगपति और संत
अंतिम संस्कार में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा, पूर्व मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, पूर्व मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, आदमपुर विधायक चंद्रप्रकाश और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. डी.पी. वत्स सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.
इसके अलावा देशभर से उद्योग जगत की हस्तियां, फिल्म जगत से जुड़े लोग, संत-महात्मा, समाजसेवी, गौभक्त, शिक्षाविद, व्यापारी, ग्रामीण और विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अंतिम यात्रा में भाग लेकर श्रद्धांजलि अर्पित की. हजारों लोगों की मौजूदगी ने नंद किशोर गोयनका के सामाजिक योगदान और जनस्वीकृति की झलक पेश की.
'उनके विचार हमेशा जीवित रहेंगे': मनोहर लाल खट्टर
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि नंद किशोर गोयनका भले ही आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और आदर्श हमेशा जीवित रहेंगे. उन्होंने कहा कि गोयनका जी ने अपने परिवार, समाज और विशेष रूप से अग्रोहा धाम के माध्यम से सेवा की जो परंपरा स्थापित की है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी.
उन्होंने कहा कि 96 वर्षों का उनका जीवन सेवा, संतोष और समर्पण का प्रतीक रहा. ऐसे व्यक्तित्व का जाना केवल शोक का विषय नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपनाने का अवसर भी है.
मनोहर लाल खट्टर ने अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए बताया कि वर्ष 1992 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक के रूप में उन्हें लगभग दो महीने तक अग्रोहा धाम में नंद किशोर गोयनका के साथ कार्य करने का अवसर मिला था. उन्होंने कहा कि डॉ. सुभाष चंद्रा, जवाहर गोयनका, लक्ष्मी नारायण गोयनका, अशोक गोयनका सहित पूरा गोयनका परिवार जिस तरह समाज सेवा, राष्ट्र सेवा और मानवीय मूल्यों की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, वह नंद किशोर गोयनका के जीवन मूल्यों का ही विस्तार है. उन्होंने विश्वास जताया कि परिवार आगे भी इन्हीं आदर्शों पर चलते हुए देश और समाज की सेवा करता रहेगा.
केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने एक इंटरव्यू में बताया है कि टाटा ग्रुप ने राज्य में शिपबिल्डिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप अब शिपबिल्डिंग सेक्टर में एंट्री की तैयारी कर रहा है. केरल सरकार के मुताबिक, समूह राज्य में करीब 10,000 करोड़ रुपये (1 अरब डॉलर) का निवेश कर जहाज निर्माण परियोजना स्थापित करने की योजना बना रहा है. अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह टाटा ग्रुप का समुद्री उद्योग में पहला बड़ा कदम होगा और भारत की शिपबिल्डिंग क्षमता को भी नई मजबूती मिलेगी.
एक महीने में मिल सकती है मंजूरी
केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में बताया कि टाटा ग्रुप ने राज्य में शिपबिल्डिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव दिया है. सरकार इस परियोजना के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध कराने को तैयार है और प्रस्ताव पर तेजी से काम चल रहा है. उम्मीद है कि अगले एक महीने के भीतर इस मेगा प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी मिल सकती है.
टाटा के कारोबार में जुड़ेगा नया अध्याय
नमक, स्टील, ऑटोमोबाइल, आईटी, एयरलाइंस और कंज्यूमर बिजनेस में मजबूत मौजूदगी रखने वाला टाटा ग्रुप अब जहाज निर्माण जैसे रणनीतिक सेक्टर में भी कदम रखने जा रहा है. हालांकि, इस निवेश को लेकर टाटा ग्रुप की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
अडानी को मिलेगी कड़ी चुनौती
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा की यह योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब अडानी ग्रुप पहले से समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश कर रहा है. केरल के विझिंजम में अडानी का डीपवाटर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विकसित किया जा रहा है, जिसे हाल ही में एमएससी मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी से 1.4 अरब डॉलर का निवेश समर्थन मिला है. ऐसे में टाटा की एंट्री से देश के समुद्री कारोबार में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है.
भारत के शिपबिल्डिंग मिशन को मिलेगा बल
भारत सरकार देश को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है. इसी रणनीति के तहत अप्रैल में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच जहाज निर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का समझौता हुआ था. दक्षिण कोरिया चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शिपबिल्डिंग केंद्र है.
केरल बनना चाहता है समुद्री उद्योग का बड़ा केंद्र
कोच्चि और विझिंजम जैसे प्रमुख बंदरगाहों के दम पर केरल खुद को देश के बड़े मैरीटाइम हब के रूप में विकसित करना चाहता है. राज्य सरकार जहाज निर्माण और मरम्मत से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है. हालांकि, प्रस्तावित टाटा प्लांट की उत्पादन क्षमता और निर्माण शुरू होने की समयसीमा को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है.
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में राहत देते हुए इसे 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. यह बदलाव वैश्विक तेल बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए किया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है, जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी घटा दी है. नई दरें 16 जुलाई से लागू हो गई हैं.
डीजल और ATF पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लेवी 7.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है.
पेट्रोल निर्यात पर मिली राहत
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में राहत देते हुए इसे 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. यह बदलाव वैश्विक तेल बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए किया गया है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार हर 15 दिन में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है. हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है. ऐसे में सरकार ने वैश्विक बाजार की मौजूदा स्थिति के अनुरूप टैक्स दरों में संशोधन किया है.
कच्चे तेल की कीमतों में क्यों आई तेजी?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 0.35% की बढ़त के साथ 85.25 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. अमेरिका द्वारा ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा लागू किए जाने से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी हुई है.
डीजल बाजार पर भी बढ़ा दबाव
रूस से डीजल निर्यात में कमी और वैश्विक सप्लाई बाधित होने से डीजल रिफाइनिंग मार्जिन भी बढ़ा है. इससे ईंधन बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है. इससे पहले सरकार ने 11 जून को औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत ग्राहकों के लिए पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर अस्थायी रोक लगाई थी, जिसे 1 जुलाई से हटा लिया गया था. अब विंडफॉल टैक्स में बदलाव के जरिए सरकार ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नया कदम उठाया है.
नई योजना के तहत सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष रसायन, गैस और सामग्री बनाने वाली कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयां लगाने पर परियोजना लागत का 30% तक सीधा प्रोत्साहन मिलेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1.27 लाख करोड़ के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 और ₹62,500 करोड़ की संशोधित मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (MPMS) को मंजूरी दे दी है. नई योजनाओं के तहत चिप डिजाइन, उपकरण, विशेष रसायन, घरेलू वैल्यू एडिशन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार में तेजी आने की उम्मीद है.
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 पर सरकार का बड़ा फोकस
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ₹1.27 लाख करोड़ के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के तहत अब सिर्फ चिप फैब्रिकेशन ही नहीं, बल्कि डिजाइन, उपकरण, विशेष रसायन, गैस, सामग्री और पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास पर जोर दिया जाएगा. योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश अगले दो सप्ताह में जारी किए जाएंगे.
स्टार्टअप्स और घरेलू कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने भारत में रणनीतिक और व्यावसायिक चिप डिजाइन करने वाले स्टार्टअप्स के लिए ग्रांट-प्लस-इक्विटी मॉडल का प्रस्ताव रखा है, ताकि बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) देश में ही बने रहें. वहीं, मध्यम और बड़ी भारतीय कंपनियों को चिप डिजाइन के क्षेत्र में उतारने के लिए सह-निवेश, रॉयल्टी आधारित फंडिंग और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन की व्यवस्था की जाएगी.
मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम पर रहेगा जोर
नई योजना के तहत सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष रसायन, गैस और सामग्री बनाने वाली कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयां लगाने पर परियोजना लागत का 30% तक सीधा प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार का मानना है कि इससे चिप निर्माण के लिए आवश्यक सप्लाई चेन भी देश में विकसित होगी.
फैब्रिकेशन और पैकेजिंग के प्रोत्साहन में बदलाव
ISM 2.0 में चिप फैब्रिकेशन और पैकेजिंग इकाइयों के लिए प्रोत्साहन दरों को पहले चरण की तुलना में कम किया गया है. सिलिकॉन फैब्रिकेशन इकाइयों के लिए प्रोत्साहन 50% से घटाकर 40% और अन्य फैब्रिकेशन इकाइयों के लिए 35% कर दिया गया है. वहीं एडवांस्ड पैकेजिंग इकाइयों को 35% और पारंपरिक पैकेजिंग इकाइयों को 25% तक प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार का कहना है कि पहले चरण में 12 परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद अब फोकस पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने पर है.
रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट को मिलेगा समर्थन
सरकार उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों पर काम करने वाली कंपनियों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को केंद्रीय और राज्य सरकारों की ओर से कुल परियोजना लागत का 75% तक संयुक्त प्रोत्साहन देगी. इसका उद्देश्य रिसर्च, इनोवेशन और कुशल मानव संसाधन तैयार करना है.
₹4 लाख करोड़ निवेश और 1 लाख करोड़ निर्यात का लक्ष्य
सरकार का अनुमान है कि इस मिशन के जरिए करीब ₹4 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित होगा. इससे ₹2 लाख करोड़ का उत्पादन और ₹1 लाख करोड़ का निर्यात हासिल किया जा सकेगा. अब तक पहले चरण के तहत ₹1.60 लाख करोड़ से अधिक निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है.
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को भी मिला बड़ा प्रोत्साहन
कैबिनेट ने ₹62,500 करोड़ की संशोधित मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (MPMS) को भी मंजूरी दी है. नई योजना में प्रोत्साहन उत्पादन आधारित मॉडल की बजाय घरेलू वैल्यू एडिशन और स्थानीय सोर्सिंग के आधार पर दिया जाएगा. साथ ही भारतीय कंपनियों को मोबाइल डिजाइन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और स्वदेशी बौद्धिक संपदा विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा.
उत्पादन, निर्यात और रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य अगले छह वर्षों में मोबाइल फोन उत्पादन को ₹39 लाख करोड़ तक पहुंचाना, ₹15 लाख करोड़ का निर्यात हासिल करना और मोबाइल विनिर्माण व इससे जुड़े क्षेत्रों में 60,000 अतिरिक्त रोजगार सृजित करना है. इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.